मेरे बेटे ने मुझे और अपनी सगी बहन को एकसाथ चोदा

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मैं, रश्मिका, बाज़ार से सामान लेकर घर वापस आई थी। मेरे हाथ में थैले थे, और मन में अपने बेटे रोहन के लिए एक अजीब सी उत्कंठा थी।

पिछले कुछ दिनों से हमारे बीच जो रिश्ता बना था, वह मेरी जिंदगी को नए अर्थ दे रहा था।

पिछली कहानियों में आपने पढ़ा कि कैसे मेरे बेटे ने मेरी प्यासी बुर को चोदा, फिर कैसे मेरे बेटे ने मेरे बाद अपनी सगी बहन को चोदा।

मैंने सोचा था कि आज शाम मैं उसे फिर से अपनी बाहों में लूँगी, अपने बदन से उसे खुश करूँगी।

मैंने दरवाज़ा खोला और अंदर आई।

घर में अजीब सी खामोशी थी, लेकिन फिर मेरी कानों में एक आवाज़ पड़ी… वह आवाज़ जो मैं पहचानती थी… वह कराही जो औरत की होती है जब उसकी बुर में लंड अंदर-बाहर हो रहा हो।

मैंने थैले नीचे रखे और धीरे से अंदर बढ़ी।

आवाज़ रोहन के कमरे से आ रही थी। मेरा दिल तेज़ी से धड़कने लगा। क्या वह… क्या वह किसी और के साथ…?

मैंने उसके कमरे का दरवाज़ा हल्का सा धक्का दिया।

वह खुला था… और जो मैंने देखा… मेरे होश उड़ गए…

वहाँ मेरा बेटा रोहन नंगा था, उसका वो विशाल दस इंच का लंड पूरी तरह से कड़ा था, और वह उसे एक औरत की बुर में पेल रहा था।

लेकिन वह औरत कोई और नहीं… मेरी बेटी नैना थी… उसकी अपनी बहन!

नैना बिस्तर पर पीठ के बल लेटी थी, उसके पैर फैले हुए थे, और रोहन उसके ऊपर था, उसका लंड नैना की बुर में पूरा का पूरा अंदर था।

नैना के मुँह से आवाज़ें निकल रही थीं, “ओह भैया… और ज़ोर से… चोदो मुझे…”

मैं वहीं खड़ी रह गई। मेरे पैर जमीन से जुड़ गए थे। मैं देख रही थी कि मेरा बेटा अपनी बहन को कैसे चोद रहा है।

लेकिन अजीब बात यह थी कि मुझे गुस्सा नहीं आ रहा था… बल्कि मेरी अपनी बुर में एक खुजली हो रही थी, और मेरे दूध कड़े हो रहे थे।

रोहन ने मुझे देख लिया। वह रुक गया, उसका चेहरा सफेद पड़ गया। नैना ने भी मुझे देखा और शर्म से लाल हो गई।

वह अपने हाथों से अपने स्तन ढकने की कोशिश करने लगी।

“मम्मी… आप… आप आ गईं…” रोहन हकलाते हुए बोला, उसका लंड अभी भी नैना की बुर में ही था।

मैंने दरवाज़ा बंद किया और अंदर आ गई।

मैंने अपने साड़ी का पल्लू सिर से हटाया और उन्हें देखते हुए मुस्कुराई।

“ओह, रोहन, तुम अपनी बहन को चोद रहे हो?” मैंने शांत आवाज़ में पूछा।

रोहन घबरा गया, “हाँ माँ, नैना चुदवाने के लिए बहुत परेशान थी और इसने हमारी चुदाई भी देख ली थी, इसलिए मुझे इसको चोदना पड़ा… मम्मी, प्लीज गुस्सा मत होना…”

मैंने हँसते हुए कहा, “ठीक है फिर, अच्छी बात है, अब हम लोग डरने की ज़रूरत नहीं है और हम तीनों मिलकर अब चुदाई करेंगे।”

मेरे शब्द सुनकर दोनों हैरान रह गए। नैना की आँखों में आश्चर्य और खुशी का मिश्रण था।

“सच में मम्मी? आपको बुरा नहीं लगा?” नैना ने पूछा।

“बुरा क्यों लगेगा बेटा? मैंने तो सोच लिया था कि रोहन अब सिर्फ मेरा है, लेकिन अगर तुम भी उसे चाहती हो, तो हम उसे बाँट सकते हैं। वैसे भी, हम दोनों उसकी हैं – मैं उसकी माँ हूँ और तुम उसकी बहन… हम दोनों को उसका प्यार और उसका लंड मिलना चाहिए,” मैंने कहा और अपने कपड़े उतारने शुरू कर दिए।

मैंने अपनी साड़ी खोली, फिर ब्लाउज, और फिर पेटीकोट। मैं सिर्फ ब्रा और पैंटी में थी।

दोनों मुझे देख रहे थे, रोहन का लंड अभी भी कड़ा था।

“आज रात से हम तीनों एक हो जाएँगे,” मैंने कहा, “आज हमारी सुहागरात होगी… रोहन की, मेरी और नैना की… एक साथ।”

हमने फैसला किया कि आज की रात बहुत खास होगी।

यह हम तीनों की सुहागरात होगी जहाँ रोहन अपनी माँ और बहन दोनों को अपनी पत्नी के रूप में स्वीकार करेगा।

हमने मिलकर पूरे घर को सजाने का फैसला किया, खासकर मेरे बेडरूम को जो सबसे बड़ा था।

हमने मिलकर कमरे को सजाना शुरू किया।

सबसे पहले हमने बिस्तर पर नए सफेद रेशमी चादरें बिछाईं, जो चाँदनी की तरह चमक रही थीं।

फिर हमने गुलाब के फूलों की पंखुड़ियाँ बिस्तर पर बिखेर दीं – लाल गुलाब, गुलाबी गुलाब, सफेद गुलाब… पूरा बिस्तर फूलों की चादर से ढक गया।

चारों तरफ मोमबत्तियाँ रखी गईं। छोटी-छोटी सुगंधित मोमबत्तियाँ जिनकी लौ टिमटिमा रही थी।

कमरे की रोशनी बंद कर दी गई और सिर्फ मोमबत्तियों की रोशनी में कमरा एक सुनहरी रोशनी में नहा गया।

दीवारों पर परछाइयाँ नाच रही थीं।

एक कोने में एक छोटी सी मेज सजाई गई जिस पर फल रखे थे – अंगूर, सेब, केले, और स्ट्रॉबेरी।

साथ में शहद की एक कटोरी और क्रीम की बोतल। पास में शैंपेन की बोतल रखी थी और तीन गिलास।

हवा में गुलाब की सुगंध थी, और हल्की सी संगीत की धुन बज रही थी – कोई रोमांटिक गजल जो माहौल को और भी प्यारा बना रही थी।

अब बारी थी हमारे कपड़ों की। मैंने नैना के लिए एक खास बेबी डॉल ड्रेस निकाली थी जो मैंने बाज़ार से खरीदी थी।

वह गुलाबी रंग की थी, पूरी तरह से लेस से बनी हुई, जिसमें से सब कुछ झलकता था।

उसका ऊपरी हिस्सा बहुत छोटा था जिसमें स्तन ठीक से आते थे और निप्पल साफ दिखते थे।

नीचे स्कर्ट बहुत छोटी थी जो जांघों के ऊपर ही थी और उसके नीचे कुछ नहीं था।

“पहनो इसे बेटा,” मैंने नैना को वो ड्रेस दी।

नैना ने शर्माते हुए वो ड्रेस पहनी। वह उस पर बहुत खूबसूरत लग रही थी।

उसके गोरे स्तन ड्रेस में से झाँक रहे थे, निप्पल कड़े होकर खड़े थे, और उसकी गोल गांड नीचे से दिख रही थी।

“वाह नैना… तुम तो परी लग रही हो,” मैंने कहा।

अब मेरी बारी थी। मैंने एक लाल रंग की बेबी डॉल पहनी जो पूरी तरह से जालीदार थी।

वह इतनी छोटी थी कि मेरे मोटे दूध उसमें से आधे बाहर निकले हुए थे, और नीचे से मेरी बुर साफ दिख रही थी।

मैंने नीचे कुछ नहीं पहना था।

हम दोनों माँ-बेटी एक-दूसरे को देख रही थीं। हम दोनों बहुत ही कामुक लग रही थीं।

रोहन जो अब तक बिस्तर पर बैठा था, उसका लंड तो पूरी तरह से खड़ा हो गया था और वह हम दोनों को घूर रहा था।

“देखो रोहन, तुम्हारी माँ और बहन… कितनी खूबसूरत लग रही हैं… आज हम दोनों तुम्हारी हैं,” मैंने कहा।

हम तीनों मेज के पास आए। रोहन बीच में बैठा और मैं और नैना उसके दोनों तरफ।

हमने शैंपेन खोली और एक-दूसरे को पिलाई। फिर हमने फल खाने शुरू किए।

मैंने एक अंगूर उठाया और रोहन के मुँह में डाला।

नैना ने एक स्ट्रॉबेरी अपने मुँह में रखी और रोहन को किस करते हुए उसके मुँह में डाल दी। हम तीनों हँसने लगे।

“आज से हम पति-पत्नी हैं,” मैंने कहा, “रोहन, तुम हम दोनों के पति हो, और हम दोनों तुम्हारी पत्नियाँ… तुम्हारी रखैलें… जो तुम्हारी इच्छा पूरी करेंगी।”

“हाँ भैया, मैं और मम्मी… हम दोनों आपकी हैं… हमारी बुरें आपकी हैं… हमारे दूध आपके हैं… जब चाहो चोद लेना हमें,” नैना ने शरारत से कहा।

रोहन ने हम दोनों को एक-एक करके किस किया।

पहले मुझे, फिर नैना को। उसके होंठ बहुत कोमल थे, और उसकी जीभ मीठी।

फिर हमने शहद का एक खेल खेला।

मैंने अपने स्तनों पर शहद लगाया और रोहन से कहा, “चाटो इसे… मम्मी के दूधों से शहद चाटो।”

रोहन ने मेरे स्तनों पर अपनी जीभ फिराई, शहद चाटा, और फिर निप्पल को मुँह में लेकर चूसने लगा।

नैना भी उत्साहित हो गई, उसने भी अपने स्तनों पर शहद लगाया और रोहन को बुलाया, “मेरे भी चूसो भैया… मेरी निप्पल्स को भी चाटो।”

रोहन बारी-बारी से हम दोनों के स्तन चूस रहा था।

वह मेरे दूध दबा रहा था, मेरे निप्पल काट रहा था, फिर नैना के दूधों पर जा रहा था। हम दोनों कराह रही थीं।

डिनर के बाद हम तीनों बिस्तर पर आ गए।

रोहन बीच में लेटा, मैं उसके एक तरफ और नैना दूसरी तरफ।

हम दोनों ने अपने हाथ उसके शरीर पर फिराने शुरू किए।

मैंने उसके चेहरे पर चूमना शुरू किया – उसके माथे पर, आँखों पर, गालों पर, और फिर होंठों पर।

नैना उसके सीने पर चूम रही थी, उसके निप्पल चाट रही थी।

“ओह मम्मी… नैना… यह बहुत अच्छा लग रहा है…” रोहन कराह रहा था।

हम दोनों नीचे बढ़ीं। मैंने उसका लंड अपने हाथ में लिया।

वह गरम था, पुल्सेट कर रहा था। नैना ने भी अपना हाथ उस पर रखा। हम दोनों माँ-बेटी मिलकर उसके लंड को सहला रही थीं।

“कितना बड़ा है… कितना मोटा…” नैना ने कहा।

“हाँ बेटा, यह हम दोनों के लिए है… इसे खुश करना हमारा काम है,” मैंने कहा और उसके लंड को चूम लिया।

नैना भी झुकी और उसके लंड के सुपाड़े को चूमा।

फिर हम दोनों बारी-बारी से उसे चूसने लगे।

मैं उसके लंड को अपने मुँह में लेती, जीभ से चाटती, फिर नैना लेती। हम दोनों उसके अंडकोश भी चाट रहे थे।

“ओह फक… मम्मी… नैना… बहुत मज़ा आ रहा है… तुम दोनों की जीभ… अहहह…” रोहन अपने बालों में हाथ फिरा रहा था।

मैंने नैना से कहा, “बेटा, अब हम अपनी बुर उसके मुँह पर रखते हैं… वह हम दोनों को एक साथ चाटेगा।”

हम दोनों उठीं और 69 की पोज़िशन में आ गईं। रोहन नीचे लेटा था, और मैं और नैना उसके ऊपर उल्टे लेट गए – मेरी बुर उसके मुँह पर और नैना की बुर उसके चेहरे के पास, लेकिन थोड़ी ऊपर।

रोहन ने अपनी जीभ मेरी बुर में डाली और चाटने लगा।

वह मेरी योनि को चूस रहा था, मेरी क्लोटोरिस को काट रहा था।

साथ में वह अपने हाथ से नैना की बुर को सहला रहा था, उसकी फाँकों को चीर रहा था।

“ओह रोहन… चाटो मम्मी की बुर… जीभ अंदर डालो… अहहह… हाँ… वहीं…” मैं कराह रही थी।

“भैया… मेरी भी चाटो… प्लीज… मेरी बुर में उंगली करो… ओह… कितना मज़ा है…” नैना भी चीख रही थी।

रोहन बारी-बारी से हम दोनों की बुर चाट रहा था। कभी मेरी, कभी नैना की।

वह हम दोनों को पागल कर रहा था। हम दोनों एक-दूसरे के स्तनों को भी सहला रही थीं, एक-दूसरे के निप्पल चाट रही थीं।

अब समय आ गया था मुख्य कार्यक्रम का। रोहन खड़ा हुआ और उसने हम दोनों को देखा।

हम दोनों बिस्तर पर लेटी हुई थीं, मेरी बुर और नैना की बुर दोनों तरफ खुली थीं, दोनों गीली और तरस रही थीं।

“किसे पहले चोदूँ?” रोहन ने पूछा।

“पहले मम्मी को चोदो… वो तुम्हारी पहली पत्नी हैं… फिर मुझे,” नैना ने कहा।

रोहन मेरे पास आया।

उसने मेरी टांगें फैलाईं और अपने लंड का सुपाड़ा मेरी बुर पर रखा।

वह मुझे धीरे से चूमा और एक ही झटके में पूरा लंड अंदर घुसा दिया।

“उई माँ… रोहन… बेटा… इतना बड़ा… अहहह… पूरा भर गया मेरी बुर…” मैं चीख उठी।

“चोदो भैया… मम्मी को ज़ोर से चोदो… मैं देखना चाहती हूँ…” नैना उत्तेजित होकर बोली।

रोहन मुझे ज़ोर-ज़ोर से चोदने लगा।

उसका लंड मेरी बुर में अंदर-बाहर हो रहा था, आवाज़ें आ रही थीं ‘फच… फच… फच…’ मेरे दूध उछल रहे थे, और नैना उन्हें दबा रही थी।

“कैसी लग रही है मम्मी? मेरा लंड? तुम्हारी बुर को भर दिया मैंने?” रोहन ने पूछा।

“हाँ बेटा… बहुत अच्छा लग रहा है… तुम्हारा लंड… मेरी बुर को चीर दो… फाड़ दो मेरी बुर… अपनी माँ को रंडी बनाकर चोदो… हाँ… और ज़ोर से… अहहह…”

मैं झड़ने वाली थी। रोहन ने रफ़्तार तेज़ कर दी और मैं झड़ गई, मेरी बुर ने रस छोड़ दिए।

अब बारी थी नैना की। रोहन नैना के पास गया। उसने नैना को घुटनों और हाथों के बल होने के लिए कहा।

नैना कुत्तिया बन गई, उसकी गोल गांड हवा में थी।

“ऐसे ही रहो बहन… अब मैं तुम्हें कुत्तिया बनाकर चोदूँगा… जैसे रंडियों को चोदते हैं,” रोहन ने कहा और उसका लंड नैना की बुर में एक ही धक्के में पेल दिया।

“उई माँ… भैया… इतना गहरा… अहहह… मेरी बुर फट रही है… और ज़ोर से… चोदो मुझे… अपनी बहन को कुत्तिया बनाकर चोदो…” नैना चीख रही थी।

रोहन उसकी कमर पकड़कर ज़ोर-ज़ोर से धक्के मार रहा था।

नैना के स्तन आगे-पीछे हो रहे थे, और मैंने उन निप्पलों को पकड़कर खींचना शुरू कर दिया।

“क्या नज़ारा है… मेरी माँ और बहन… दोनों मेरी रखैलें… दोनों को मैं चोद रहा हूँ…” रोहन गर्व से बोल रहा था।

“हाँ बेटा… हम दोनों तुम्हारी हैं… चोदो हमें… रंडी बनाकर चोदो… हमारी बुरें तुम्हारी हैं… लंड से भर दो हमें… अहहह…” मैं भी उत्तेजित होकर बोल रही थी।

अब रोहन ने एक खास पोज़िशन सोची।

उसने मुझे बिस्तर के किनारे लिटाया, मेरी टांगें बाहर लटक रही थीं।

फिर उसने नैना को मेरे ऊपर लेटने के लिए कहा, 69 की पोज़िशन में – नैना की बुर मेरे मुँह पर और मेरी बुर नैना के मुँह पर।

“अब मैं तुम दोनों को एक साथ चोदूँगा… मम्मी की बुर में लंड डालूँगा और नैना की बुर में उंगली… फिर बदलूँगा,” रोहन ने कहा।

रोहन ने अपना लंड मेरी बुर में डाला और नैना की बुर में अपनी दो उंगलियाँ।

वह मुझे चोद रहा था और नैना को उंगली से चोद रहा था।

साथ में नैना मेरी बुर चाट रही थी और मैं उसकी बुर चाट रही थी।

“ओह… क्या मज़ा है… मम्मी की बुर तो बहुत तंग है… और नैना की बुर में उंगली करने में भी मज़ा आ रहा है…” रोहन बोल रहा था।

“हाँ बेटा… चोदो मुझे… और नैना को भी चोदो… हम दोनों तुम्हारी रंडियाँ हैं… भर दो हमारी बुरें अपने लंड से… अहहह… मैं फिर से झड़ने वाली हूँ…” मैं चीख रही थी।

रोहन ने अपना लंड मेरी बुर से निकाला और नैना की बुर में डाल दिया।

अब वह नैना को चोद रहा था और मेरी बुर में तीन उंगलियाँ घुसा रहा था।

“भैया… मेरी बुर… फाड़ दो… और ज़ोर से… मम्मी… आप भी चाटो मेरी बुर… ओह… हम तीनों… एक साथ… कितना अच्छा लग रहा है…” नैना पागल हो रही थी।

हम तीनों इसी पोज़िशन में चुदाई कर रहे थे।

रोहन बारी-बारी से हम दोनों की बुर चोद रहा था, कभी मेरी, कभी नैना की।

हम दोनों एक-दूसरे की बुर चाट रहे थे और रोहन के लंड का स्वाद ले रहे थे।

“मैं झड़ने वाला हूँ… कहाँ निकालूँ…?” रोहन ने पूछा।

“मेरी बुर में… नहीं नैना की बुर में… हम दोनों में बाँट दो अपना वीर्य…” मैंने कहा।

रोहन ने पहले नैना की बुर में अपना वीर्य निकाला, फिर तुरंत मेरी बुर में भी डाल दिया।

वह थककर हम दोनों के बीच गिर गया।

हम तीनों एक-दूसरे में समाए हुए थे।

रोहन के हाथ मेरे दूधों पर थे और नैना के स्तन उसके मुँह में थे।

हम तीनों की साँसें तेज़ थीं, लेकिन चेहरे पर संतोष की मुस्कान थी।

“कैसा लगा तुम्हें रोहन? अपनी माँ और बहन दोनों को एक साथ चोदकर?” मैंने प्यार से पूछा।

“मम्मी… यह स्वर्ग से भी ऊपर का एहसास था… मैं दुनिया का सबसे खुशनसीब आदमी हूँ जिसे अपनी माँ और बहन दोनों मिली हैं…” रोहन ने कहा।

“हाँ भैया… अब हम तीनों हमेशा एक साथ रहेंगे… आप हम दोनों को चोदेंगे… रोज़ रात… और हम आपकी रखैलें बनकर रहेंगी…” नैना ने कहा।

हम तीनों ने एक-दूसरे को कसकर गले लगाया।

मोमबत्तियाँ अभी भी जल रही थीं, गुलाब की पंखुड़ियाँ हमारे शरीर पर बिखरी हुई थीं, और हम तीनों एक-दूसरे के प्यार में डूबे हुए थे।

यह थी हमारी सुहागरात… माँ, बेटे और बहन की… एक ऐसा रिश्ता जो शरीर से शुरू हुआ था लेकिन अब आत्मा तक पहुँच गया था।

हम तीनों अब एक थे, और हमेशा एक रहेंगे… चुदाई के इस पवित्र बंधन में बँधे हुए।

रोहन का लंड अभी भी मेरी बुर में ही था, और नैना मेरे चूचियों से खेल रही थी।

हम जानते थे कि यह रात लंबी होगी, और हमारा यह रिश्ता अनंत काल तक चलेगा… माँ की बुर में बेटे का लंड, और बहन की बुर में भी वही लंड… यही हमारी खुशी थी, यही हमारा प्यार था।

तो कैसी लगी आप को हमारी चुदाई, कमेंट में जरुर बताईएगा, मुझे यानी आपकी रश्मिका रंडी को आपके कमेंट का इंतज़ार रहेगा।

नोट: यहां पोस्ट की गई सभी कहानियां केवल मनोरंजन के उद्देश्य से प्रस्तुत की गई हैं। कृपया इन्हें वास्तविक जीवन से जोड़कर न देखें। कहानी में दर्शाए गए किसी भी दृश्य, घटना या चित्र का वास्तविक जीवन में प्रयोग करना हानिकारक हो सकता है। इसके लिए न तो कहानी के लेखक और न ही प्रस्तुतकर्ता जिम्मेदार होंगे। इसलिए कृपया अपनी समझ, बुद्धि और विवेक का उपयोग करें।

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