सलहज और उसकी बहन मुझसे रंडियों जैसे चुदवाई

salhaj aur sali ki chudai story

नमस्ते दोस्तों, मैं अर्जुन मल्होत्रा फिर से हाजिर हूं अपनी कहानी के अगले भाग के साथ!

जैसा कि मैंने पिछली कहानी मेरी सलहज की प्यासी जवानी में वादा किया था, आज मैं आपको बताने जा रहा हूं कि कैसे मैंने अनन्या और उसकी बहन की चुदाई गांव में की।

यह कहानी उस समय की है जब मेरी सास ने गांव जाने का फैसला किया और मैं, अनन्या, मेरी पत्नी जिया (छोटी), और अनन्या की बहन तिया सब साथ में गांव गए।

यह बात उसी साल गर्मियों की है जब मेरी पहली कहानी वाली घटना के करीब तीन महीने बाद की है।

मैं और मेरी पत्नी जिया ससुराल आए हुए थे, और वहां पता चला कि गांव में एक पारिवारिक पूजा है जिसमें सभी को जाना जरूरी है।

मेरी सासू मां ने मुझे भी साथ चलने के लिए कहा, और मैंने सोचा कि यह मौका है अनन्या के साथ और मजे करने का।

गांव का नाम था बसंतपुर, जो जिले से करीब 80 किलोमीटर दूर था।

वहां जाने के लिए हमें सुबह निकलना पड़ा।

हमारे साथ थे – मेरी सासू मां, मेरे ससुर जी, मेरी पत्नी जिया, मेरी सलहज अनन्या (बड़ी), और उसकी बहन तिया जो उससे 2 साल छोटी थी।

तिया के बारे में बता दूं – वो उसकी सगी बहन नहीं थी बल्कि चचेरी बहन थी, लेकिन दोनों साथ में पली बढ़ी थीं इसलिए बहनों जैसा प्यार था।

तिया की उम्र करीब 26 साल की थी, और वो भी अपने पति से अलग रहती थी क्योंकि उसका पति विदेश में नौकरी करता था।

उसका फिगर भी अनन्या जैसा ही था – 34-28-36 का।

उसकी स्किन थोड़ी गोरी थी और आंखें हरी-हरी।

बाल लंबे और काले, और होंथ पतले लेकिन सेक्सी।

हम सुबह 5 बजे निकले।

एक टेंपो ट्रैवलर किराए पर लिया गया था जिसमें हम सब बैठे।

मैं, मेरी पत्नी जिया, और तिया पीछे की सीट पर बैठे, जबकि अनन्या (बड़ी), सासू मां और ससुर जी आगे की सीट पर बैठे थे।

रास्ते भर मैं तिया को घूरता रहा।

वो हल्की सी पारदर्शी साड़ी पहने हुए थी जिसमें से उसकी जांघें साफ दिख रही थीं।

जब वो बैठती थी तो उसकी साड़ी का पल्लू कुछ पीछे हट जाता और मुझे उसके बूब्स का क्लीवेज दिखाई देता।

मेरी पत्नी जिया तो सो गई थी, इसलिए मैं मौके का फायदा उठा रहा था।

अनन्या (बड़ी) आईने से मुझे देख रही थी और मुस्कुरा रही थी।

उसे पता था कि मैं तिया को घूर रहा हूं।

रास्ते में एक जगह जब गाड़ी रुकी तो अनन्या ने मुझे पीछे आने का इशारा किया।

मैं बहाने से पीछे गया तो उसने मुझे धीरे से कहा – “ननदोईजी, तिया पर लाइन मार रहे हो? देख लूंगी तुम्हें। आज रात को मेरे कमरे में आना, वहां मैं तुम्हें वो सब दूंगी जो तुम चाहते हो।”

मैंने कहा – “तुम्हें कैसे पता चला?”

वो बोली – “मैं तुम्हारी हरकतें देख रही थी। पर कोई बात नहीं, तिया भी तो मेरी बहन है, उसे भी मजा दे देना। लेकिन पहले मेरी भूख मिटाना।”

यह सुनकर मेरा लौड़ा खड़ा हो गया।

मैंने सोचा कि आज तो मजा आ जाएगा – दो-दो औरतों के साथ।

दोपहर 1 बजे हम गांव पहुंचे।

गांव का घर पुराना हवेली टाइप था, जिसमें बहुत सारे कमरे थे।

नीचे एक बड़ा आंगन था और ऊपर तीन-चार कमरे।

मेरी सासू मां और ससुर जी नीचे वाले बड़े कमरे में सोने वाले थे, जबकि हम युवाओं के लिए ऊपर के कमरे थे।

मेरी पत्नी जिया को एक कमरा दिया गया जो पीछे की तरफ था।

मुझे बगल वाले कमरे में रखा गया।

अनन्या (बड़ी) और तिया एक साथ एक कमरे में थीं, लेकिन वो कमरा मेरे कमरे से जुड़ा हुआ था, बीच में एक दरवाजा था जो अंदर से बंद हो सकता था।

शाम को पूजा हुई और खाना खाया। सब थक गए थे इसलिए जल्दी सोने चले गए।

मेरी पत्नी जिया तो सो गई क्योंकि उसे सुबह से सफर की थकान थी।

मैं अपने कमरे में लेटा हुआ था, लाइट बंद करके, इंतजार कर रहा था कि कब अनन्या आएगी।

रात करीब 11 बजे का समय था।

मैंने देखा कि मेरे कमरे का दरवाजा धीरे से खुला और अनन्या की परछाई अंदर आई।

वो नाइटी पहने हुए थी और उसने तुरंत दरवाजा बंद कर लिया।

वो मेरे पास आई और बोली – “ननदोईजी, तिया सो रही है पास वाले कमरे में। हमें धीरे से काम करना होगा। वो जगी हुई है तो सब खत्म हो जाएगा।”

मैंने कहा – “लेकिन मैं तो उसे भी चाहता हूं।”

वो बोली – “पहले मुझे खुश करो, फिर देखेंगे।”

कहकर वो मेरे ऊपर लेट गई और मेरे होंठ चूसने लगी।

उसकी नाइटी बहुत पतली थी और मुझे उसके बूब्स महसूस हो रहे थे।

मैंने उसे कसकर पकड़ लिया और उसकी कमर सहलाने लगा।

वो मेरे कान में फुसफुसाई – “आज मैं तुमसे वो सब करवाऊंगी जो मैंने कभी नहीं किया। मेरी गांड भी मारो आज।”

यह सुनकर मेरा दिमाग घूम गया।

मैंने कभी गांड नहीं मारी थी और यह मौका था।

मैंने कहा – “लेकिन तेल-वेल कुछ है नहीं।”

वो बोली – “मैं लाई हूं।” कहकर उसने अपनी नाइटी के नीचे से एक छोटी सी बोतल निकाली जिसमें तेल था।

मैंने उसे नीचे पटक दिया और उसकी नाइटी ऊपर उठा दी।

वो नीचे से पूरी नंगी थी, उसने पैंटी नहीं पहनी थी।

उसकी चूत गीली हो चुकी थी और चमक रही थी।

मैंने उसकी टांगें फैलाई और उसकी चूत चाटने लगा।

वो अपने हाथ से अपने मुंह को दबाए हुए थी ताकि आवाज न बाहर जाए।

मैंने उसकी चूत में जीभ डाली और चाटने लगा।

तभी मुझे लगा कि दरवाजे के पास कोई है।

मैंने रुककर देखा तो पाया कि तिया दरवाजे की दरार से झांक रही थी।

उसकी आंखें बड़ी-बड़ी थीं और वो हमें देख रही थी।

मैंने अनन्या को धीरे से बताया – “तिया देख रही है।”

अनन्या ने कहा – “मुझे पता है। मैंने ही उसे भेजा है देखने के लिए। वो भी तरस रही है। आज रात हम तीनों मजा करेंगे।”

यह सुनकर मैं और उत्तेजित हो गया।

मैंने जोर से अनन्या की चूत चाटना शुरू कर दिया ताकि तिया साफ देख सके।

अनन्या की सिसकारियां निकल रही थीं लेकिन वो दबाए हुए थी।

कुछ देर बाद अनन्या ने मुझे रोका और खड़ी हो गई।

उसने दरवाजा खोला और तिया को अंदर खींच लिया।

तिया शर्मा रही थी और उसका चेहरा लाल हो रखा था।

अनन्या ने कहा – “क्यों बहन, मजा आ रहा है देखने में? चाहिए तुम्हें भी?”

तिया ने सिर झुकाया और हां में जवाब दिया।

अनन्या ने कहा – “तो आओ, आज हम तीनों मिलकर मजे करते हैं। ननदोईजी, यह मेरी बहन तिया है, इसे भी खुश कर दो।”

मैं तिया के पास गया और उसके होंठ चूमने लगा।

वो पहले तो हिचकिचाई लेकिन फिर वो भी मेरे साथ देने लगी।

उसके होंठ अनन्या से अलग थे – पतले लेकिन रसीले।

मैंने उसकी साड़ी खोलनी शुरू की।

वो साड़ी के नीचे ब्लाउज और पेटीकोट पहने हुए थी।

मैंने उसका ब्लाउज खोला और उसके बूब्स बाहर निकाल लिए।

उसके बूब्स अनन्या से थोड़े छोटे थे लेकिन उसके निप्पल गुलाबी और कड़े थे।

मैंने एक चूची मुंह में ले ली और चूसने लगा। तिया “आह…” करने लगी। अनन्या ने कहा – “धीरे, आवाज नहीं।”

अनन्या भी उनके पास आ गई और तिया की दूसरी चूची चूसने लगी।

हम दोनों मिलकर तिया के बूब्स चूस रहे थे।

तिया का सिर घूम रहा था, वो मजे में पागल हो रही थी।

फिर मैंने तिया को बेड पर लिटाया और उसका पेटीकोट ऊपर उठाया।

उसने सफेद रंग की पैंटी पहनी हुई थी जो गीली हो चुकी थी।

मैंने पैंटी एक तरफ की और उसकी चूत देखी।

वो बिल्कुल साफ थी, कोई बाल नहीं थे, गुलाबी और गीली।

मैंने उसकी चूत चाटनी शुरू की।

तिया ने अपने हाथ से मुंह दबा लिया क्योंकि वो जोर-जोर से मूंह निकाल रही थी।

अनन्या ने उसके हाथ हटाए और अपने होंठ उसके होंठों पर रख दिए।

दोनों बहनें एक दूसरे को चूम रही थीं और मैं नीचे तिया की चूत चाट रहा था।

यह दृश्य इतना सेक्सी था कि मेरा लौड़ा फटने को हो रहा था।

मैंने अपने कपड़े उतार दिए और नंगा हो गया।

अनन्या ने मेरा लौड़ा पकड़ा और तिया के मुंह में डाल दिया।

तिया पहले तो घबराई लेकिन फिर वो भी चूसने लगी।

अनन्या मुझे कहने लगी – “आज इसकी गांड मारो। यह कभी नहीं मरवाई है, आज पहली बार है। मैं तेल लगा देती हूं।”

अनन्या ने तेल की बोतल ली और तिया की गांड के छेद पर तेल लगाया।

फिर मेरे लौड़े पर भी तेल लगाया। तिया घबरा रही थी लेकिन अनन्या ने उसे समझाया – “पहली बार दर्द होगा फिर मजा आएगा।”

मैंने तिया की टांगें उठाई और अपना लौड़ा उसकी गांड के छेद पर रखा।

धीरे-धीरे दबाया। वो दर्द से कराह उठी लेकिन अनन्या ने उसका मुंह अपने होंठों से बंद कर दिया।

मैंने एक झटका दिया और मेरा सुपाड़ा अंदर चला गया।

तिया की आंखों से आंसू निकले।

मैं रुका रहा फिर धीरे-धीरे अंदर बाहर करने लगा।

कुछ देर में उसे मजा आने लगा।

वो अपनी गांड उठा-उठा कर मेरा साथ देने लगी।

अनन्या नीचे बैठकर मेरे बॉल्स चूस रही थी।

मैं तिया की गांड मार रहा था और वो मजे ले रही थी।

10 मिनट तक मैंने उसकी गांड मारी फिर मैंने अपना माल उसकी गांड में ही छोड़ दिया।

गर्म गर्म वीर्य उसकी गांड में भर गया।

फिर अनन्या ने कहा – “मेरी बारी।”

मैंने अनन्या को घोड़ी बनाया और उसकी गांड में भी अपना लौड़ा डाल दिया।

वो तो एक्सपर्ट थी, उसने आसानी से ले लिया।

मैंने जोर-जोर से धक्के मारे और उसकी गांड चोदी।

तिया यह सब देख रही थी और अपनी चूत सहला रही थी।

मैंने अनन्या की गांड में ही अपना दूसरा वार छोड़ दिया।

अब हम तीनों थक गए थे। हम बेड पर लेटे हुए थे।

तिया बोली – “यह मेरी पहली गांड मारी थी। मजा आ गया।”

अनन्या ने कहा – “अब तो हम तीनों मिलकर ही रहेंगे। ननदोईजी, तुम तो लकी हो, दो-दो चूत मिलेंगी तुम्हें।”

मैंने कहा – “मैं तो दोनों को खुश रखूंगा।”

फिर हमने एक बार और किया।

इस बार मैंने तिया की चूत मारी जबकि अनन्या उसके बूब्स चूस रही थी।

तिया का पानी निकला और मैंने भी अपना माल उसकी चूत में भर दिया।

अनन्या ने कहा – “यह गांव में चुदाई का असली मजा है। कोई डर नहीं, कोई शोर नहीं।”

हम तीनों ने वो रात और अगली रात भी मजे किए।

दिन में तो सब साथ रहते थे लेकिन रात को हम तीनों एक साथ होते थे।

जब हम वापस शहर आए तो तिया भी हमारे साथ आ गई कुछ दिनों के लिए।

वहां भी हमने बहुत मजे किए। लेकिन वो अलग कहानी है।

दोस्तों, यह थी मेरी गांव वाली कहानी।

अगर आपको पसंद आई तो बताएं, मैं और भी लिखूंगा।

NEXT PART: सलहज और साली को बीवी के बेड पर चोदा

नोट: यहां पोस्ट की गई सभी कहानियां केवल मनोरंजन के उद्देश्य से प्रस्तुत की गई हैं। कृपया इन्हें वास्तविक जीवन से जोड़कर न देखें। कहानी में दर्शाए गए किसी भी दृश्य, घटना या चित्र का वास्तविक जीवन में प्रयोग करना हानिकारक हो सकता है। इसके लिए न तो कहानी के लेखक और न ही प्रस्तुतकर्ता जिम्मेदार होंगे। इसलिए कृपया अपनी समझ, बुद्धि और विवेक का उपयोग करें।

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