मेरे बेटे ने मेरे बाद अपनी सगी बहन को चोदा

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मैं, रश्मिका, अपने बेटे रोहन के साथ अपने शरीर का संबंध बना चुकी थी। वह रात जब उसने मुझे चोदा था, मेरी जिंदगी की सबसे खूबसूरत रात थी।

{अगर आपने पिछली कहानी नहीं पढ़ी है तो पहले वह पढ़ लें की कैसे मेरे बेटे ने मेरी प्यासी बुर को चोदा}

लेकिन मुझे नहीं पता था कि उसी रात एक और आँख हम पर थी, एक और दिल धड़क रहा था जो मेरे बेटे के लिए बेकरार था।

मेरी बेटी नैना… अठारह साल की जवान लड़की, जो अपनी माँ की तरह ही खूबसूरत थी।

उसका फिगर 34-28-32 था, स्तन मोटे और उभरे हुए जो किसी भी मर्द को दीवाना बना दें, कमर पतली और गांड गोल और उठी हुई।

उसकी त्वचा भी गोरी थी, बिल्कुल मेरी तरह, और उसके चेहरे पर एक मासूमियत थी जो अब जवानी की चाहत में बदल रही थी।

नैना ने उस रात हमें देखा था। वह अपने कमरे से बाहर पानी पीने आई थी जब उसने मेरे कमरे से अजीब सी आवाज़ें सुनीं।

वह दरवाज़े के पास गई और झाँका… और उसने देखा कि उसका भाई रोहन उसकी माँ यानी मुझे कैसे चोद रहा था।

वह दृश्य उसके दिमाग में बस गया – रोहन का मोटा लंड मेरी बुर में अंदर-बाहर हो रहा था, मेरे दूध उसके हाथों में थे, और मैं आनंद से कराह रही थी।

नैना उस रात सो नहीं पाई। वह अपने बिस्तर पर लेटी हुई सोच रही थी कि कैसा होगा वो एहसास जब उसका भाई उसे भी वैसे ही चोदेगा।

उसने अपने हाथ अपनी बुर पर फिराए और महसूस किया कि वह पूरी तरह से गीली हो चुकी है।

उसने कभी किसी लड़के को छुआ नहीं था, लेकिन अब उसकी इच्छा अपने ही भाई से चुदवाने की हो रही थी।

अगली सुबह जब मैं उठी तो मैंने नैना को अजीब से व्यवहार करते हुए देखा।

वह मुझसे आँखें नहीं मिला रही थी, और रोहन को देखते ही शर्मा जा रही थी।

मैंने सोचा कि शायद उसे कुछ पता चल गया है, लेकिन मैंने चुप्पी साध ली।

मैंने देखा कि नैना रोहन के पीछे-पीछे घूम रही है, उसकी शर्ट के नीचे से उसकी बॉडी को घूर रही है, और जब रोहन स्विमिंग ट्रंक्स में घर में घूमता था तो उसकी आँखें उसके लंड पर टिकी रहती थीं।

एक हफ्ते बाद… नैना ने फैसला कर लिया।

वह रोहन को पाना चाहती थी, चाहे वह उसका भाई ही क्यों न हो।

वह जानती थी कि मैं और रोहन अब प्रेमी हैं, और यह बात उसे और भी उत्तेजित कर रही थी।

एक दिन जब मैं बाज़ार गई हुई थी और घर में सिर्फ रोहन और नैना थे, नैना ने अपनी योजना पर अमल किया।

वह रोहन के कमरे में गई, जहाँ वह बिस्तर पर लेटा हुआ था और अपने फोन पर कुछ देख रहा था।

“भैया…” नैना ने आवाज़ दी।

रोहन ने देखा और चौंक गया।

नैना ने एक छोटी सी स्कर्ट और टॉप पहनी हुयी थी जिसमें से उसकी गोरी जांघें और पेट दिख रहा था।

उसके दूध टॉप में कसे हुए थे और निप्पल साफ दिख रहे थे।

“हाँ नैना, क्या हुआ?” रोहन ने पूछा, उसकी आँखें अनजाने में उसके चुचियों पर चली गईं।

“भैया, मैंने सब देख लिया…” नैना ने शर्माते हुए कहा।

“क्या देखा?” रोहन घबरा गया।

“मैंने देखा है कि आप मम्मी को कैसे चोदते हैं… उस रात जब आप उनके कमरे में थे… मैंने दरवाज़े से झाँका था…” नैना ने सिर झुकाते हुए कहा।

रोहन का चेहरा लाल हो गया।

वह खड़ा हुआ और बोला, “नैना, वो… मैं…”

“कोई बात नहीं भैया, मुझे बुरा नहीं लगा… बल्कि…” नैना ने अपनी आँखें उठाईं, “बल्कि मुझे भी वही चाहिए…”

“क्या?” रोहन हैरान रह गया।

“मैंने देखा है आपका लंड… मम्मी को चोदते हुए… वह इतना बड़ा है… मैं सोचती हूँ कि वह मेरी बुर में कैसा लगेगा…” नैना ने अपने हाथ अपनी स्कर्ट पर फिराते हुए कहा।

रोहन का लंड खड़ा होने लगा।

वह अपनी बहन को उस नज़र से देख रहा था जैसे पहले कभी नहीं देखा था।

नैना सच में बहुत खूबसूरत थी, और अब वह जवान औरत बन चुकी थी।

“नैना, तुम मेरी बहन हो…” रोहन ने कहा।

“हाँ, और मम्मी भी तो आपकी मम्मी हैं… फिर भी आपने उन्हें चोदा ना… मुझे भी चोदो भैया… मैं भी तो औरत हूँ… मेरी भी बुर में आपका लंड चाहिए…” नैना ने कहा और अपना टॉप उतार दिया।

उसके सफेद दूध बाहर आ गए, गोल और मोटे, गुलाबी निप्पल खड़े हुए। रोहन का मुँह सूख गया।

“देखो भैया, मेरे दूध… कितने मोटे हैं… मम्मी से कम नहीं हैं… चूसो इन्हें…” नैना ने आगे बढ़कर रोहन का हाथ अपने स्तन पर रख दिया।

रोहन ने महसूस किया – कितने कोमल, कितने गर्म थे वो। उसका लंड पूरी तरह से खड़ा हो गया था।

“प्लीज भैया… मत रोको अपने आपको… मैं चाहती हूँ आपका लंड… वो बड़ा लंड जो मम्मी को इतना मज़ा देता है…” नैना ने रोहन को चूमना शुरू कर दिया।

रोहन ने भी हार मान ली। उसने नैना को कसकर पकड़ लिया और उसके होंठ चूसने लगा।

वह उसकी जीभ को चाट रहा था, उसके मुँह में अपनी जीभ घुसा रहा था।

नैना काँप रही थी, यह उसका पहला किस था।

“ओह भैया… कितना मज़ा आ रहा है… और चूसो… मुझे अपनी बनाओ…” नैना कराह रही थी।

रोहन ने उसे बिस्तर पर लिटाया और उसके ऊपर आ गया।

वह उसके गले को चूमते हुए नीचे आया, उसके स्तनों पर पहुँचा।

उसने एक चूची अपने मुँह में ले लिया और निप्पल को चूसने लगा।

“अहहह… हाँ भैया… वहीं… काटो मेरे निप्पल… ओह… क्या कर रहे हो… बहुत मज़ा आ रहा है…” नैना अपने बालों में हाथ फिराते हुए चीख रही थी।

रोहन दूसरे चूची को भी चूस रहा था, दोनों निप्पलों को बारी-बारी से काट रहा था।

नैना की बुर पूरी तरह से गीली हो चुकी थी, उसकी पैंटी पूरी भीग गई थी।

“भैया… नीचे… मेरी बुर को भी चाटो… मैंने सुना है लड़के लड़कियों की बुर चाटते हैं… चाटो मेरी बुर… जैसे आप मम्मी का चाट रहे थे।” नैना ने अपनी स्कर्ट उठा दी।

रोहन नीचे गया और उसकी पैंटी खींचकर उतार दी।

नैना की बुर साफ थी, एक भी बाल नहीं था, गुलाबी और चिकनी। वह अभी भी कुँवारी थी।

“वाह नैना… कितनी प्यारी बुर है तुम्हारी… बिल्कुल गुलाबी… मैं इसे चाटूँगा…” रोहन ने कहा और उसकी बुर पर अपनी जीभ रख दी।

“ओह माँ… भैया… क्या कर रहे हो… अहहह… इतना मीठा… ओह… जीभ अंदर डालो… हाँ… वहीं…” नैना पागल हो रही थी।

रोहन उसकी बुर को पागलों की तरह चाट रहा था।

उसकी जीभ उसकी योनि में घुस रही थी, उसकी क्लिटोरिस को चूस रहा था।

नैना पहली बार ऐसा अनुभव कर रही थी और वह झड़ने वाली थी।

“भैया… रुको… मैं झड़ने वाली हूँ… ओह… अहहह…” नैना ने अपनी कमर उठाई और झड़ गई।

वह रोहन के मुंह में झड गयी।

रोहन ने उसके रस पिए, वो मीठे थे।

अब उसका लंड पूरी तरह से खड़ा था और वह अपनी बहन को चोदने के लिए बेकरार था।

“नैना… अब मैं तुम्हें चोदूँगा… अपना लंड तुम्हारी बुर में डालूँगा… तुम्हारी सील तोड़ूँगा… दर्द होगा थोड़ा…” रोहन ने कहा।

“भाई पहले मैं आपका लंड चुसना चाहती हूँ, प्लीज मुझे अपना लंड चूसने दीजिये?” नैना ने उसके सामने हाथ जोड़ते हुए बोली।

रोहन ने अपने कपड़े उतारे। उसका दस इंच का लंड बाहर आया, मोटा और कड़ा। नैना उसे देखकर डर भी गई और खुश भी हुई।

“ठीक है मेरी जान, मेरी बहन, पहले तुम मेरे लंड को चूस लो फिर मैं तुम्हें चोदूंगा।” रोहन ने अपनी बहन का हाथ खोलते हुए उसके मुंह में लंड डाल दिया।

नैना धीरे धीरे लंड को चूसने लगी, कभी वो जीभ से उसके लंड को चाटती तो कभी अपने मुंह में पूरा लेने की कोशिश करती लेकिन रोहन का लंड इतना बड़ा था की वह पूरा लंड अपने मुंह में नहीं ले पा रही था।

रोहन उसको पकड़ कर अपना लंड अन्दर बाहर करने लगा।

फिर बोला, “मेरी जान अब मैं तुम्हें चोदना चाहता हूँ, तुम्हारे बुर में अपना लंड डालना चाहता हूँ, अगर मेरी बहन की परमिशन हो तो मैं अपने लंड को तुम्हारे बुर में डाल दूँ?”

“हाँ भैया… डालो… मैं सहन करूँगी… मुझे अपनी औरत बनाओ… अपने लंड से मेरी बुर फाड़ दो…” नैना ने कहा।

“भैया तुम्हारा लंड कितना बड़ा.. मेरे बुर के सामने, मेरी बुर तो छोटी सी है, क्या यह मेरी बुर में जाएगा?” नैना ने पूछा।

“हाँ बहन… पूरा जाएगा… और तुम्हें मज़ा आएगा…” रोहन ने कहा।

वह उसके ऊपर आया और अपने लंड का सुपाड़ा उसकी बुर के मुँह पर रखा। नैना की बुर बहुत बहुत टाइट थी, वह कुँवारी थी।

“धीरे से भैया…” नैना ने कहा।

रोहन ने एक ज़ोर का धक्का मारा और उसका सुपाड़ा अंदर चला गया।

नैना चीख उठी, “उई माँ… दर्द हो रहा है… रुको…”

“थोड़ा सहन करो बहन… अभी आराम मिलेगा…” रोहन ने रुककर उसके दूध दबाए।

थोड़ी देर बाद रोहन ने एक और धक्का मारा और आधा लंड अंदर कर दिया।

नैना की आँखों से आँसू निकले, लेकिन वह सहन कर रही थी।

“बस थोड़ा और… अब पूरा अंदर जाएगा…” रोहन ने कहा और एक ज़ोर का धक्का मारा।

पूरा लंड नैना की बुर में समा गया। उसकी सील टूट चुकी थी, खून निकला था थोड़ा सा, लेकिन अब वह पूरी तरह से रोहन की हो चुकी थी।

“ओह भैया… तुम्हारा लंड बुर में पूरी तरह से भर गया है … इतना बड़ा लंड… मैं तो मर जाऊँगी…” नैना साँसें तेज़ करते हुए बोली।

“अब मज़ा आएगा बहन… देखो…” रोहन धीरे-धीरे हिलना शुरू कर दिया।

पहले धीरे-धीरे, फिर तेज़ी से। नैना को दर्द कम और मज़ा ज़्यादा आने लगा। उसकी बुर अब लंड को आसानी से ले रही थी।

“हाँ भैया… ऐसे ही… चोदो मुझे… अपनी बहन को चोदो… मेरी बुर को तोड़ डालो… अहहह… क्या मज़ा है…” नैना कराह रही थी।

रोहन उसे ज़ोर-ज़ोर से चोद रहा था।

उसका लंड पूरी तरह से अंदर-बाहर हो रहा था, नैना की बुर से आवाज़ें आ रही थीं ‘फच… फच… फच…’

“कैसी लग रही है मेरी चुदाई बहन? कैसा लग रहा है मेरा लंड?” रोहन ने पूछा।

“बहुत अच्छा भैया… तुम्हारा लंड… मेरी बुर को भर दिया है… और ज़ोर से चोदो… मुझे रंडी बनाओ… अपनी बहन को अपनी रखैल बनाओ… चोदो… और ज़ोर से चोदो…” नैना अश्लील भाषा बोल रही थी।

रोहन ने उसकी टांगें अपने कंधों पर रख दीं और और गहराई से चोदना शुरू किया।

उसका लंड नैना की बुर की गहराइयों तक जा रहा था।

“ओह… वहीं… वहीं भैया… और अंदर… मेरी बुर के अंदर तक जाओ… अहहह… मैं झड़ने वाली हूँ…” नैना चीख रही थी।

“झड़ जाओ बहन… मेरी बाहों में झड़ जाओ…” रोहन तेज़ी से चोद रहा था।

नैना झड़ गई, उसकी बुर ने रस छोड़ दिए और उसने रोहन को कसकर पकड़ लिया। रोहन भी झड़ने वाला था।

“मैं भी झड़ने वाला हूँ बहन… कहाँ निकालूँ…”

“मेरी बुर में ही डालो भैया… भर दो मेरी बुर को अपने वीर्य से… मैं गर्भवती होना चाहती हूँ तुमसे… डालो सारा…” नैना ने कहा।

रोहन ने ज़ोर से धक्के मारे और अपना गरम वीर्य नैना की बुर में छोड़ दिया।

वे दोनों एक साथ झड़े और एक-दूसरे में समा गए।

तभी मैं मार्किट से घर आ गयी और दोनों को चुदाई करते हुए पकड़ लिया।

“ओह, रोहन, तुम अपनी बहन को चोद रहे हो?” मैं रोहन से पूछी।

“हाँ माँ, नैना चुदवाने के लिए बहुत परेशां थी और इसने हमारी चुदाई भी देख ली थी, इसलिए मुझे इसको चोदना पड़ा।” रोहन ने हकलाते हुए जवाब दिया।

“ठीक है फिर, अच्छी बात है, अब हम लोग डरने की जरुरत नहीं है और हम तीनों मिलकर अब चुदाई करेंगें” मैंने उन दोनों से कहा।

उस दिन के बाद रोहन, मैं और नैना… हम तीनों एक-दूसरे के प्रेमी बन गए।

रोहन रोज़ रात हम दोनों को चोदता – कभी मुझे, कभी नैना को, और कभी हम दोनों को एक साथ।

हमारा घर अब स्वर्ग बन गया था जहाँ माँ-बेटा-बहन के बीच सिर्फ प्यार और चोदाई थी।

नैना अब रोज़ रोहन का लंड अपनी बुर में लेती है, और मैं भी अपने बेटे से चुदवाती हूँ।

हम दोनों औरतें अब रोहन की रखैल हैं, और रोहन हम दोनों का मालिक है जो अपने बड़े लंड से हमें खुश रखता है।

अगली कहानी में मैं डिटेल में बताऊंगी की कैसे हमने थ्रीसम किया……

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नोट: यहां पोस्ट की गई सभी कहानियां केवल मनोरंजन के उद्देश्य से प्रस्तुत की गई हैं। कृपया इन्हें वास्तविक जीवन से जोड़कर न देखें। कहानी में दर्शाए गए किसी भी दृश्य, घटना या चित्र का वास्तविक जीवन में प्रयोग करना हानिकारक हो सकता है। इसके लिए न तो कहानी के लेखक और न ही प्रस्तुतकर्ता जिम्मेदार होंगे। इसलिए कृपया अपनी समझ, बुद्धि और विवेक का उपयोग करें।

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