रंडी बनकर 10 लोगों के साथ गैंगबैंग करायी

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दादा जी ने मुझे बताया कि आज घर पर एक खास कार्यक्रम होगा। उन्होंने मुझे सुबह ही तैयार होने के लिए कहा। मैंने एकदम सेक्सी कपड़े पहने – लाल रंग की ब्रा और पैंटी, जिसमें से मेरे मोटे मोटे बूब्स और मेरी गोरी गोरी चूत झलक रही थी। ऊपर मैंने एक पारदर्शी नाइटी पहनी जिसमें से सब कुछ दिख रहा था।

{अगर आपने पिछली कहानी नहीं पढ़ी है तो पहले वह पढ़ लें की कैसे दादा जी और उनके फ्रेंड मिलकर ग्रुप में मुझे चोदे}

दोपहर को 2 बजे, एक-एक करके मेहमान आने शुरू हुए। पहले श्याम अंकल आए, फिर राम अंकल, फिर कृष्ण अंकल, फिर गोविंद अंकल। ये तो पहले से ही मुझे चोद चुके थे। लेकिन आज और भी लोग आने वाले थे।

5 बजे तक कुल 10 लोग हो चुके थे। उनके नाम थे – श्याम (9 इंच का लंड), राम (4 इंच चौड़ा लंड), कृष्ण (7.5 इंच), गोविंद (8 इंच), मदन (7 इंच), सुरेश (8.5 इंच), विनोद (6 इंच मोटा), प्रकाश (9.5 इंच सबसे लंबा), रघुनाथ (7 इंच), और दादा जी मोहन (8 इंच)। सब की उम्र 65 से 75 साल के बीच थी लेकिन सब बहुत फिट और तंदुरुस्त थे।

मैंने सबको नमस्ते की। सबकी नजरें मेरे बूब्स और चूत पर टिकी हुई थीं। मैंने कहा, “आज मैं आप सबकी रंडी हूँ। जो चाहें मुझे कर सकते हैं।”

दादा जी ने कहा, “आज हम 10 लोग मिलकर तुम्हें पूरी तरह से निचाड़ेंगे। तुम्हारी बुर, गांड और मुँह – तीनों हम फाड़ डालेंगे।”

मैंने शर्माते हुए कहा, “हाँ दादा जी, मैं तैयार हूँ। आप सब मुझे अपनी रंडी समझकर चोदिए।”

सबसे पहले श्याम अंकल आगे आए। उन्होंने मेरे कंधों पर हाथ रखा और धीरे से मेरी नाइटी के बटन खोलने शुरू किए। एक-एक करके सारे बटन खुले और मेरी नाइटी खुल गई। अब मैं केवल लाल ब्रा और पैंटी में थी।

“वाह प्रिया, तुम तो एकदम माल लग रही हो।” श्याम अंकल ने मेरे गाल को चूमा।

उन्होंने अपने होंठ मेरे होंठों पर रखे और धीरे-धीरे चूसने लगे। उनकी मूंछें मेरे चेहरे पर खुजला रही थीं। मैंने भी उनका साथ दिया और उनकी जीभ को अपने मुँह में खींच लिया।

“आह्ह्ह… श्याम अंकल…” मैं सिसकी।

उन्होंने मेरे पीछे हाथ फेरा और ब्रा का हुक खोल दिया। मेरी ब्रा नीचे गिर गई और मेरे मोटे मोटे बूब्स बाहर आ गए। उन्होंने मेरे बूब्स को दोनों हाथों से पकड़ा और दबाना शुरू किया।

“क्या मस्त चूचियाँ हैं… बहुत मोटी हैं…” वो बोले।

उन्होंने मेरे निपल्स को अपने हाथों में लिया और घुमाना शुरू किया। मेरे निपल्स खड़े हो गए। फिर उन्होंने एक निप्पल को मुँह में लिया और चूसना शुरू किया।

“आह्ह्ह… और जोर से चूसो…” मैंने कहा।

वो एक बूब्स को चूस रहे थे और दूसरे को हाथ से दबा रहे थे। मेरे बूब्स पर लाल निशान हो गए।

अब राम अंकल आए। वो थोड़े मोटे थे लेकिन बहुत स्ट्रॉन्ग। उन्होंने मुझे अपनी गोद में उठा लिया और सोफे पर बैठ गए। मैं उनके ऊपर बैठी थी।

उन्होंने मेरी पैंटी के ऊपर से ही मेरी चूत को सहलाना शुरू किया। “आह्ह्ह… अंकल…” मैं कांप उठी।

“क्या बात है, पैंटी तो पूरी गीली हो चुकी है।” राम अंकल ने कहा।

उन्होंने मेरी पैंटी एक तरफ की और मेरी चूत को देखा। “क्या गुलाबी चूत है… बहुत सुंदर…”

उन्होंने अपनी एक उंगली मेरी चूत में डाली। मेरी चूत पहले से ही गीली थी इसलिए उंगली आसानी से अंदर चली गई।

“आह्ह्ह… अंकल… धीरे…” मैंने कहा।

वो उंगली अंदर-बाहर करने लगे। फिर उन्होंने दो उंगलियाँ डाल दीं। मेरी चूत फैल गई और मुझे मजा आने लगा।

कृष्ण अंकल गोरे और हैंडसम थे। उन्होंने मुझे खड़ा किया और मेरी पैंटी नीचे खींची। मैं बिल्कुल नंगी हो गई। उन्होंने मेरी जांघों पर किस करना शुरू किया।

धीरे-धीरे वो ऊपर आते गए और मेरी चूत के पास पहुँच गए। उन्होंने मेरी चूत पर जीभ रखी और चाटना शुरू कर दिया।

“आह्ह्ह… हाँ… चाटो…” मैंने उनका सिर पकड़ा।

वो मेरी चूत की होंठों को चाट रहे थे। फिर उन्होंने अपनी जीभ मेरी चूत के छेद में डाली और अंदर-बाहर करने लगे।

“बहुत स्वादिष्ट है तुम्हारी चूत…” वो बोले।

मेरी चूत से पानी निकल रहा था जो वो पी रहे थे।

गोविंद अंकल ने मुझे घोड़ी बनाया। मैं सोफे पर घुटनों के बल खड़ी थी। उन्होंने मेरी गांड पर थप्पड़ मारा।

“थप्पड़ मारो अंकल…” मैंने कहा।

उन्होंने मेरी गांड को दोनों हाथों से फैलाया और मेरी गांड के छेद को देखा। “क्या मस्त गांड है… आज इसे फाड़ूंगा।”

उन्होंने मेरी गांड पर थूक लगाया और उंगली से मालिश करने लगे।

एक-एक करके सबने मुझे छुआ। मदन अंकल ने मेरे बूब्स कसकर दबाए। सुरेश अंकल ने मेरी चूत में उंगली डाली। विनोद अंकल ने मेरी गांड चाटी। प्रकाश अंकल ने मेरे होंठ काटे। रघुनाथ अंकल ने मेरी पूरी बॉडी पर किस किए।

सब मिलकर मुझे फोरप्ले में मस्त कर रहे थे। मैं पूरी तरह से गरम हो चुकी थी।

अब दादा जी ने कहा, “अब इन सबका लंड चूसो।”

सबने अपने कपड़े उतारे। 10 मोटे-मोटे लंड मेरे सामने थे। मैंने सिलाई मशीन के पास से इंच टेप उठाई और सभी लंड को नापने लगी, कुछ 7 इंच के, कुछ 8 इंच के, कुछ 9 इंच के, और प्रकाश अंकल का सबसे बड़ा 9.5 इंच का।

मैंने सबसे पहले दादा जी का लंड पकड़ा। उनका लंड 8 इंच का था और बहुत मोटा। मैंने उसे जीभ से चाटना शुरू किया। टोपे को चाटा, फिर नीचे की तरफ गई और गोलियों को चाटा।

“आह्ह्ह… बहू… अच्छे से चूसो…” दादा जी कराहे।

मैंने उनका लंड मुँह में लिया और चूसने लगी। मैं ऊपर-नीचे कर रही थी और जीभ से लंड को चाट रही थी।

फिर मैं श्याम अंकल के पास गई। उनका 9 इंच का लंड बहुत बड़ा था। मैंने उसे हाथ से हिलाया और फिर मुँह में लिया। वो इतना मोटा था कि मेरे गाल फैल गए।

“चूसो रंडी… अच्छे से चूसो…” श्याम अंकल मेरे सिर को पकड़कर अपना लंड अंदर-बाहर कर रहे थे।

मैंने उनका पूरा लंड गले तक ले लिया। वो मेरे गले में अपना लंड पेल रहे थे। मेरी आँखों से आँसू निकल रहे थे लेकिन मैं चूसती रही।

फिर राम अंकल का लंड चूसा। उनका लंड सबसे मोटा था, 4 इंच चौड़ा। मैंने उसे मुश्किल से मुँह में लिया। मेरे होंठ फैल गए।

“क्या मस्त चूस रही है… बहुत मजा आ रहा है…” राम अंकल बोले।

मैंने उनके लंड को जीभ से चाटा और फिर चूसा।

कृष्ण अंकल के लंड को चूसा। उनका लंड बहुत गर्म था। मैंने उसे अपने मुँह में गर्माहट महसूस की।

गोविंद अंकल का लंड चूसा। उनके लंड पर बहुत नसें उभरी हुई थीं जो मेरी जीभ को चुभ रही थीं।

मदन अंकल का लंड चूसा। उनका लंड थोड़ा मुड़ा हुआ था जो मेरी चूत में अच्छे से घुसेगा।

सुरेश अंकल का लंड चूसा। उनका लंड 8.5 इंच का था और बहुत कड़क।

विनोद अंकल का लंड चूसा। उनका लंड छोटा था लेकिन बहुत मोटा।

प्रकाश अंकल का 9.5 इंच का लंड चूसा। ये सबसे बड़ा था। मैंने उसे दोनों हाथों से पकड़ा और चूसा।

रघुनाथ अंकल का लंड चूसा। उनका लंड बहुत तेज़ी से फड़क रहा था।

मैंने एक-एक करके सबके 10 लंड चूसे। सबका लंड मेरे मुँह में आ चुका था। सब मेरे मुँह को चोद चुके थे।

अब दादा जी ने कहा, “अब तुम्हारी चूत चाटते हैं।”

मैं बेड पर लेट गई और अपने पैर फैला दिए। मेरी चूत पूरी तरह से खुली हुई थी और गीली हो चुकी थी।

सबसे पहले दादा जी आए। उन्होंने मेरी चूत को देखा और कहा, “क्या गुलाबी चूत है मेरी बहू की।”

उन्होंने अपनी जीभ मेरी चूत पर रखी और चाटना शुरू किया। वो मेरी चूत के होंठों को चाट रहे थे, फिर अंदर की तरफ गए और छेद को चाटा।

“आह्ह्ह… हाँ दादा जी… और अंदर…” मैं चिल्लाई।

उन्होंने अपनी जीभ मेरी चूत के अंदर डाल दी और अंदर-बाहर करने लगे। मेरी चूत से पानी निकल रहा था जो वो पी रहे थे।

फिर श्याम अंकल आए। उन्होंने मेरी चूत को दोनों हाथों से फैलाया और अंदर का गुलाबी हिस्सा देखा। “क्या मस्त चूत है…”

उन्होंने मेरी चूत को चूसना शुरू किया। वो मेरी चूत के होंठों को अपने होंठों में लेकर चूस रहे थे। फिर उन्होंने मेरी क्लिट को चूसा।

“आह्ह्ह… मर गई… बहुत मजा आ रहा है…” मैं कांप रही थी।

राम अंकल ने मेरी चूत चाटी। उन्होंने अपनी मूंछों से मेरी चूत को खुजलाया और मैं मदहोश हो गई।

कृष्ण अंकल ने मेरी चूत में उंगली डालकर चाटी। वो उंगली अंदर-बाहर करते हुए चाट रहे थे।

गोविंद अंकल ने मेरी चूत को चूसते हुए मेरी गांड में उंगली डाल दी। मैं दोनों तरफ से मजा ले रही थी।

मदन, सुरेश, विनोद, प्रकाश और रघुनाथ अंकल ने भी एक-एक करके मेरी चूत चाटी। सबने मेरी चूत का अपना अलग तरीके से मजा लिया।

मेरी चूत पूरी तरह से लाल हो चुकी थी और बहुत गीली थी। मैं 3 बार झड़ चुकी थी।

अब दादा जी ने कहा, “अब मुँह में पेलते हैं।”

मैंने बेड के किनारे सिर नीचे किया और मुँह खोला। दादा जी ने अपना 8 इंच का लंड मेरे मुँह में डाला और धक्के मारने शुरू किए।

“आह्ह्ह… गला घोंट दो… पूरा अंदर डालो…” मैंने कहा।

वो मेरे मुँह को चोद रहे थे। उनका लंड मेरे गले तक जा रहा था। मेरी आँखों से आँसू निकल रहे थे।

फिर श्याम अंकल आए। उनका 9 इंच का लंड मेरे मुँह में पूरा समा गया। वो मेरे सिर को पकड़कर जोर-जोर से अपना लंड अंदर-बाहर कर रहे थे।

“क्या मस्त मुँह है… बहुत टाइट है…” वो बोले।

राम अंकल ने अपना मोटा लंड मेरे मुँह में डाला। मेरे होंफ फटने लगे थे लेकिन मैं चूसती रही।

“चूसो रंडी… अच्छे से चूसो…” राम अंकल मुझे गाली दे रहे थे।

कृष्ण अंकल ने मेरे मुँह में अपना लंड डाला और तेज़ी से चोदा।

गोविंद अंकल ने मेरे मुँह को चोदते हुए मेरे बूब्स दबाए।

मदन अंकल ने मेरे मुँह में लंड डाला और मेरी नाक को भी चोदा।

सुरेश, विनोद, प्रकाश और रघुनाथ अंकल ने भी मेरे मुँह को पूरी तरह से चोदा। मेरा मुँह वीर्य से भर गया था।

अब दादा जी ने मेरी चूत में अपना लंड डाला।

“आह्ह्ह… हाँ दादा जी… मेरी चूत फाड़ दो…” मैं चिल्लाई।

“ले रंडी… ले मेरा लंड… तेरी चूत बहुत टाइट है…” दादा जी धक्के मार रहे थे।

“मारो दादा जी… मारो… मैं आपकी रंडी हूँ… मुझे निचोड़ दो…” मैं कामुक बातें कर रही थी।

वो 10 मिनट तक मेरी चूत चोदते रहे और फिर झड़ गए।

फिर श्याम अंकल आए। उनका 9 इंच का लंड मेरी चूत में पूरा घुस गया।

“आह्ह्ह… बहुत अंदर जा रहा है…” मैंने कहा।

“सहलो रंडी… पूरा लंड ले लो…” श्याम अंकल धक्के मार रहे थे।

“मारो अंकल… मारो… मेरी चूत फाड़ दो… मैं आपकी रंडी हूँ…” मैं चिल्ला रही थी।

राम अंकल ने मेरी चूत में अपना मोटा लंड डाला। मेरी चूत फटने लगी।

“आह्ह्ह… धीरे अंकल… बहुत मोटा है…” मैंने कहा।

“रुकूंगा नहीं रंडी… आज तेरी चूत फाड़कर ही रहूंगा…” राम अंकल जोर-जोर से धक्के मार रहे थे।

“मारो… मारो… फाड़ दो मेरी चूत… मैं रंडी हूँ आपकी…” मैं पागल हो रही थी।

कृष्ण, गोविंद, मदन, सुरेश, विनोद, प्रकाश और रघुनाथ अंकल ने भी मेरी चूत में अपना लंड डाला और चोदा। सबने मुझे रंडी कहकर चोदा।

अब दादा जी ने मेरी गांड मारी।

“आह्ह्ह… हाए माँ… बहुत दर्द हो रहा है…” मैं चीखी।

“सहलो रंडी… थोड़ी देर में मजा आएगा…” दादा जी मेरी गांड में लंड पेल रहे थे।

“मारो… मारो… मेरी गांड फाड़ दो…” मैंने कहा।

श्याम अंकल ने भी मेरी गांड मारी। उनका 9 इंच का लंड मेरी गांड में पूरा चला गया।

“आह्ह्ह… मर गई… इतना अंदर…” मैं चिल्ला रही थी।

“ले रंडी… पूरा लंड ले लो…” श्याम अंकल मेरी गांड जोर-जोर से मार रहे थे।

सबने एक-एक करके मेरी गांड मारी। मेरी गांड लाल और सूजी हुई हो गई थी।

अब दादा जी ने कहा, “अब हम तीनों एक साथ चोदेंगे।”

दादा जी मेरी चूत में, श्याम अंकल मेरी गांड में, और राम अंकल मेरे मुँह में – तीनों एक साथ लंड डालकर धक्के मारने लगे।

“आह्ह्ह… मर गई… तीनों तरफ से…” मैं पागल हो रही थी।

“ले रंडी… ले… हम तीनों का लंड…” वो सब एक साथ चोद रहे थे।

फिर उन्होंने पोजीशन बदली। प्रकाश अंकल मेरी चूत में, कृष्ण अंकल मेरी गांड में, और गोविंद अंकल मेरे मुँह में।

मैं पूरी तरह से भरी हुई थी। मेरे सभी छेदों में लंड थे।

अंत में सबने एक साथ झड़ना शुरू किया। दादा जी ने मेरी चूत में, श्याम अंकल ने मेरी गांड में, राम अंकल ने मेरे मुँह में, और बाकी सबने मेरे चेहरे और बूब्स पर अपना वीर्य छोड़ा।

मैं पूरी तरह से वीर्य से लथपथ हो चुकी थी। मेरे चेहरे पर, बूब्स पर, चूत में, गांड में – हर जगह गाढ़ा सफेद दूध भरा हुआ था।

मैंने सबका दूध चाटा और पिया। मैं पूरी तरह से रंडी बन चुकी थी।

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नोट: यहां पोस्ट की गई सभी कहानियां केवल मनोरंजन के उद्देश्य से प्रस्तुत की गई हैं। कृपया इन्हें वास्तविक जीवन से जोड़कर न देखें। कहानी में दर्शाए गए किसी भी दृश्य, घटना या चित्र का वास्तविक जीवन में प्रयोग करना हानिकारक हो सकता है। इसके लिए न तो कहानी के लेखक और न ही प्रस्तुतकर्ता जिम्मेदार होंगे। इसलिए कृपया अपनी समझ, बुद्धि और विवेक का उपयोग करें।

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