मेरे बेटे ने मेरी प्यासी बुर को चोदा

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मेरा नाम रश्मिका है। मेरी उम्र 39 साल है, लेकिन जो लोग मुझे देखते हैं वे समझते हैं कि मैं कोई पच्चीस-छब्बीस साल की जवान लड़की हूँ।

मेरा फिगर आज भी 36-32-40 का है, बिल्कुल वैसा ही जैसा मेरी शादी के वक्त था।

मेरी त्वचा दूध की तरह गोरी और कोमल है, और मेरी बॉडी बिपाशा बसु जैसी करीने से गढ़ी हुई है।

मेरे स्तन मोटे और उभरे हुए हैं, कमर पतली जैसे किसी कलाकार ने हाथ से तराशी हो, और मेरी गांड उठी हुई और गोल है।

मेरी शादी उन्नीस साल की उम्र में हो गई थी।

आज मैं दो बच्चों की माँ हूँ – मेरा बेटा रोहन उन्नीस साल का हो चुका है और मेरी बेटी नैना अठारह साल की है।

लेकिन जब हम तीनों बाहर जाते हैं तो लोग समझते हैं कि हम भाई-बहन हैं।

मेरी युवावस्था आज भी बरकरार है, और यह मेरी खूबसूरती की वजह भी है और मेरी परेशानी भी।

रोहन… मेरा बेटा… वह मेरे लिए सिर्फ एक बेटा नहीं रह गया था।

वह एक हंसमुख, आकर्षक जवान मर्द बन चुका था जो मेरी रातों की नींद उड़ा रहा था।

उसकी हाइट पाँच फीट ग्यारह इंच है, बॉडी जॉन अब्राहम जैसी कटी-पिटी, और चेहरा ऐसा कि कोई भी लड़की उसे देखते ही पट जाए। वह जिम जाता है, अपने बालों का खास ख्याल रखता है, और उसमें एक अलग ही आकर्षण है।

मैंने सुना था कि वह लड़कियों में काफी लोकप्रिय है, खासकर उन बड़ी उम्र की औरतों में जो पच्चीस से पैंतालीस साल की हों।

मेरी सहेली पूजा ने मुझे बताया था कि रोहन ने उसे भी… वो … चोदा था। और उसने मुझे रोहन के लंड के बारे में बताया था – कि वह काफी बड़ा है।

उस दिन जब मैंने उसे नहाते हुए देखा, मेरी दुनिया ही बदल गई। मैं उसके कमरे में गई थी कुछ कपड़े रखने के लिए।

बाथरूम का दरवाज़ा हल्का सा खुला था, और अंदर से इंग्लिश गाने की आवाज़ आ रही थी।

मैंने झाँका… और वहाँ मेरा बेटा नहा रहा था, उसका शरीर पानी की बूंदों से लथपथ, और उसके बीच… वह लंड… माँ… वह इतना बड़ा था कि मेरी साँसें रुक गईं।

मैंने अपने जीवन में कई मर्दों को करीब से देखा था, लेकिन यह… यह दस-ग्यारह इंच से कम नहीं था।

मोटा, लंबा, और कड़क जैसे कोई लोहे की रॉड हो।

मुझे पता चला कि उसने कम उम्र में ही लंड बढ़ाने की दवाइयाँ खाई थीं, और उसका असर अब दिख रहा था।

उस रात मैं सो नहीं पाई। मेरी बुर में एक अजीब सी खुजली हो रही थी, एक प्यास जो मेरे पति के मरने के बाद से बुझी नहीं थी।

मैंने सोचा, क्यों नहीं? वह मेरा खून है, मेरा बेटा है, और मैं उसकी माँ हूँ। लेकिन यही तो रिश्ता इसे और भी खास बना रहा था।

मैंने फैसला कर लिया – मैं अपने बेटे से चुदवाऊंगी, और वह भी पूरी रात।

अगले कुछ दिनों में मैंने रोहन के प्रति अपने व्यवहार में बदलाव लाना शुरू किया।

मैं उससे ज़्यादा करीब रहने लगी, उसके कमरे में बहाने से जाती, उसके कपड़े तह करती हुई उसकी गंध सूंघती।

मैंने अपने कपड़े बदलने शुरू किए – अब मैं घर में घाघरे और ब्लाउज के बजाय नाइटी पहनने लगी, और वह भी पारदर्शी और छोटी।

एक रात जब रोहन लिविंग रूम में टीवी देख रहा था, मैं उसके पास बैठी।

मैंने एक गहरे गले वाली नाइटी पहनी थी जिसमें से मेरे मोटे दूध झाँक रहे थे।

मैंने जानबूझकर झुककर रिमोट उठाया ताकि मेरे निप्पल उसकी नज़र में आ जाएँ।

“मम्मी, आप इन दिनों कुछ ज़्यादा ही खुश दिख रही हैं,” रोहन ने पूछा, उसकी आँखें मेरे चूचियों पर टिकी हुई थीं।

“हाँ बेटा, तुम्हारी वजह से,” मैंने मुस्कुराते हुए कहा, “तुम इतने बड़े हो गए हो, इतने समझदार… मम्मी को गर्व है तुम पर।”

मैंने अपना हाथ उसके जांघ पर रख दिया। उसका शरीर काँप उठा।

मैंने महसूस किया कि वह भी मुझे देख रहा है उसी नज़र से जैसे कोई मर्द औरत को देखता है।

“रोहन, क्या तुम्हें मम्मी अच्छी नहीं लगती?” मैंने शरारत से पूछा।

“क्या मतलब मम्मी? आप तो बहुत खूबसूरत हैं,” वह घबराते हुए बोला।

“तो फिर मुझसे दूर क्यों रहते हो? आओ, मम्मी को गले लगाओ,” मैंने अपनी बाहें फैलाईं।

वह मुझे गले लगाने आया। मैंने उसे कसकर पकड़ लिया, मेरे दूध उसकी छाती से दब रहे थे।

मैंने महसूस किया कि उसका लंड मेरी जांघ पर खड़ा हो रहा था। वह बहुत बड़ा और कड़ा था।

“ओह… यह क्या है बेटा?” मैंने शरारत से पूछा।

“मम्मी, वो… मैं…” वह शर्म से लाल हो गया।

“शशश… कोई बात नहीं। यह तो स्वाभाविक है। तुम जवान हो, और मम्मी… मम्मी भी तो औरत है ना,” मैंने उसके कान में फुसफुसाते हुए कहा।

उसने मुझे कसकर पकड़ लिया। हम दोनों एक-दूसरे को देख रहे थे, साँसें तेज़ हो रही थीं।

फिर उसने धीरे से अपने होंठ मेरे होंठों पर रख दिए।

वह पहला चुंबन था… माँ और बेटे के बीच… और वह इतना मीठा था कि मेरा पूरा शरीर काँप उठा।

हमारे बीच की दीवार टूट चुकी थी। अब हम प्रेमी थे, माँ-बेटे के रिश्ते से परे, एक पुरुष और एक महिला जो एक-दूसरे के लिए बने थे।

उस रात जब नैना अपने कमरे में सो रही थी, रोहन मेरे कमरे में आया।

मैंने एक लाल रंग की साड़ी पहनी थी, जो पारदर्शी थी और मेरे गोरे बदन को झलकाती थी।

मेरे बाल खुले थे, और मैंने हल्का सा परफ्यूम लगाया था।

“आ जाओ मेरे राजा,” मैंने उसे अपनी बाहों में बुलाया।

वह मेरे पास आया, और मैंने उसे फिर से चूमा।

इस बार का चुंबन गहरा था, जीभ से जीभ मिल रही थीं।

उसने मेरी साड़ी का पल्लू खींचा और मेरे गोरे कंधे और गर्दन को चूमने लगा।

“मम्मी… आप इतनी खूबसूरत क्यों हैं?” वह मेरी गर्दन चूमते हुए बोला।

“तुम्हारी होने के लिए बनी हूँ मैं, अपने बेटे की रखैल बनने के लिए,” मैंने कामुक आवाज़ में कहा।

उसने मेरी साड़ी खोलनी शुरू की। मैंने नीचे ब्रा और पैंटी नहीं पहनी थी।

जैसे ही साड़ी खुली, मेरे गोरे-गोरे दूध उसकी आँखों के सामने आ गए। मेरे निप्पल कड़े होकर खड़े थे, गुलाबी और मोटे।

“वाह मम्मी… क्या मस्त दूध हैं आपके,” रोहन ने आश्चर्य से कहा।

“चूसो इन्हें बेटा, मम्मी के निप्पलों को चूसो… बहुत दिनों से तड़प रहे हैं ये तुम्हारे मुँह के लिए,” मैंने उसका सिर अपने स्तनों पर दबाते हुए कहा।

वह पागलों की तरह मेरे दूध चूसने लगा।

एक-एक करके दोनों निप्पलों को मुँह में लेकर चूस रहा था, काट रहा था, चाट रहा था।

मुझे ऐसा लग रहा था जैसे मेरे शरीर में करंट दौड़ रहा हो।

“ओह रोहन… हाँ बेटा… और ज़ोर से चूसो… मम्मी के निप्पलों को काट डालो… अहहह…” मैं आँखें बंद करके कराह रही थी।

उसने मुझे बिस्तर पर लिटा दिया। मेरे पैर खुले थे, और मेरी बुर पूरी तरह से नंगी और गीली थी।

उसने मेरी टांगों के बीच अपना चेहरा ले जाया और मेरी बुर को चाटने लगा।

“ओह माँ… क्या गुलाबी बुर है आपकी… इतनी सुंदर… इतनी मीठी…” वह मेरी बुर की फाँकों को चाटते हुए बोला।

“चाटो बेटा… मम्मी की बुर को चाटो… जीभ अंदर डालो… अहहह… हाँ… वहीं… क्लिटोरिस को चूसो… ओह रोहन… मैं पागल हो जाऊँगी…” मैं अपने बालों को पकड़ते हुए चीख रही थी।

उसने मेरी बुर में अपनी जीभ घुसा दी। वह अंदर-बाहर कर रहा था, मेरी योनि को चाट रहा था, मेरी क्लिटोरिस को अपने होठों में लेकर चूस रहा था। मैं झड़ने वाली थी।

“रुको बेटा… अब मत चाटो… मैं तुम्हारे लंड को अपनी बुर में लेना चाहती हूँ… वो बड़ा लंड जो मैंने नहाते हुए देखा था… दिखाओ मुझे…”

वह खड़ा हुआ और अपने कपड़े उतारने लगा। जब उसने अपना अंडरवियर उतारा, वह विशाल लंड बाहर आया।

दस इंच लंबा, मोटा जैसे कोई खीरा हो, और इतना कड़ा कि उसकी नसें दिख रही थीं। मुस्लबंद बड़ा और गुलाबी।

“माँ… यह आपके लिए… मेरा प्यार… मेरा लंड जो सिर्फ आपकी बुर में जाना चाहता है,” रोहन ने अपने लंड को हिलाते हुए कहा।

मैं उठी और उसके लंड को अपने हाथ में लिया। वह गरम था, पुल्सेट कर रहा था। मैंने उसे चूमा, फिर अपने मुँह में ले लिया।

“ओह मम्मी… क्या मुँह है आपका… इतना गरम… इतना टाइट…” रोहन मेरे सिर को पकड़कर अपने लंड पर दबाने लगा।

मैं उसके लंड को चूस रही थी, जीभ से उसकी मुस्लबंद को चाट रही थी, अंडकोशों को मसल रही थी। वह सातवें आसमान पर था।

“बस मम्मी… बस… अब और नहीं… नहीं तो निकल जाएगा… मैं आपकी बुर में डालना चाहता हूँ… वो गोरी, गर्म, टाइट बुर में…” वह मुझे रोकते हुआ बोला।

हम दोनों तैयार थे। मैं बिस्तर पर पीठ के बल लेटी थी, मेरी टांगें खुली थीं, मेरी बुर तड़प रही थी।

रोहन मेरे ऊपर था, उसका वो विशाल लंड मेरी बुर के मुँह पर टिका हुआ था।

“धीरे से डालना बेटा… बहुत बड़ा है तुम्हारा… धीरे-धीरे…” मैंने कहा।

“हाँ मम्मी… मैं आपको दर्द नहीं दूँगा… बस मज़ा दूँगा… आपको खुश करूँगा अपने लंड से…” वह बोला।

उसने धीरे से अपने लंड का सुपाड़ा मेरी बुर में घुसाया।

वाह… क्या गर्मी थी… लंड कितना मोटा था… मेरी बुर फटने को थी, लेकिन वह गीली थी इसलिए अंदर जा रहा था।

“अहहह… ओह रोहन… बड़ा है… बहुत बड़ा है… धीरे… धीरे…” मैं चिल्ला रही थी।

“सहन करो मम्मी… थोड़ा सा दर्द होगा फिर मज़ा आएगा… मेरी प्यारी मम्मी… मेरी रखैल…” वह एक धक्का और मारता हुआ बोला।

आधा लंड अंदर जा चुका था। मेरी बुर फैल रही थी, उस विशाल लंड को समेट रही थी।

फिर उसने एक ज़ोर का धक्का मारा और पूरा लंड मेरी बुर में उतार दिया।

“उई माँ… मर गई… फट गई मेरी बुर… ओह रोहन… बेटा… रुको… रुको…” मैं दर्द से चीख रही थी।

“शशश… शांत हो जाओ मम्मी… अब देखो मज़ा…” वह रुका, फिर धीरे-धीरे हिलने लगा।

थोड़ी देर में दर्द कम होने लगा और एक अजीब सा मज़ा आने लगा।

वह लंड मेरी बुर की दीवारों को रगड़ रहा था, मेरी जी-स्पॉट को छू रहा था।

“हाँ… अब हिलो बेटा… हाँ… ऐसे ही… ओह… क्या मज़ा है… तुम्हारा लंड… मेरी बुर को भर रहा है… पूरी तरह…” मैं कामुक आवाज़ में बोल रही थी।

“कैसी लग रही है मम्मी मेरी चोदाई? कैसा लग रहा है मेरा लंड आपकी बुर में?” रोहन तेज़ी से हिल रहा था।

“बहुत अच्छा लग रहा है बेटा… तुम्हारा लंड… इतना बड़ा… इतना मोटा… मेरी बुर को पूरी तरह भर दिया है… चोदो मुझे… अपनी मम्मी को चोदो… रंडी बना दो मुझे…”

“उठो मम्मी… अब मैं आपको कुत्तिया बनाकर चोदना चाहता हूँ… जैसे रंडियों को चोदते हैं…”

मैं घुटनों और हाथों के बल उठी, अपनी गांड हवा में उठाई। रोहन मेरे पीछे आया, उसने मेरे बाल पकड़े और अपना लंड मेरी बुर में एक ही झटके में पेल दिया।

“ओह माँ… क्या नज़ारा है… आपकी गोरी गांड… आपकी गुलाबी बुर… और मेरा लंड अंदर… बाहर…” वह ज़ोर-ज़ोर से धक्के मारने लगा।

“हाँ बेटा… ऐसे ही… जोर से… मेरी बुर फाड़ डालो… अपनी मम्मी को कुत्तिया बनाकर चोदो… मैं तुम्हारी रखैल हूँ… तुम्हारी रंडी हूँ… चोदो मुझे… और ज़ोर से… अहहह… हाँ… वहीं… वहीं…” मैं अश्लील भाषा बोलते हुए चीख रही थी।

वह मेरे बाल खींच रहा था, मेरी कमर पकड़कर ज़ोर-ज़ोर से धक्के मार रहा था।

उसका लंड मेरी बुर की गहराइयों तक जा रहा था, मेरी गर्भाशय के मुँह को छू रहा था।

पच्चीस मिनट तक वह मुझे इसी पोज़ में चोदता रहा, और मैं दो बार झड़ चुकी थी।

“मम्मी… आपकी बुर… इतनी टाइट… इतनी गर्म… मुझे पागल कर रही है… मैं आपको अपना माल दूँगा… अपनी मम्मी की बुर में अपना वीर्य डालूँगा…”

“हाँ बेटा… डालो… मेरी बुर में अपना सारा पानी निकाल दो… भर दो मेरी बुर को… मैं तुम्हारी हूँ… सिर्फ तुम्हारी…”

रोहन ने मुझे उठाया, अपनी बाहों में लिया। मैंने अपने पैर उसकी कमर के चारों ओर लपेट लिए, और वह अपने हाथों से मेरी गांड पकड़कर मुझे हवा में उठा लिया। उसका लंड अभी भी मेरी बुर में था।

“पकड़ो मम्मी… अब मैं खड़े-खड़े आपको चोदूँगा… जैसे कोई हीरो अपनी हीरोइन को चोदता है…”

वह मुझे हवा में उठाकर ऊपर-नीचे करने लगा। उसका लंड मेरी बुर में अंदर-बाहर हो रहा था। यह एक अलग ही अनुभव था – पूरा वजन उसके लंड पर, और वह मुझे ऐसे चोद रहा था जैसे मैं कोई गुड़िया हूँ।

“ओह रोहन… तुम कितने ताकतवर हो… इतनी देर से मुझे उठाकर चोद रहे हो… और लंड… अभी भी कड़ा है… ओह… हाँ… और ज़ोर से… मेरी बुर को फाड़ डालो… अहहह… मैं फिर से झड़ने वाली हूँ…”

“झड़ जाओ मम्मी… मेरी बाहों में झड़ जाओ… मैं आपको पकड़े हुए हूँ… आप मेरी हैं… मेरी मम्मी… मेरी रंडी…”

मैंने एक और झड़कन ली, मेरी बुर ने उसके लंड को कसकर पकड़ लिया। वह भी काँपने लगा।

“अब एक और पोज़ मम्मी… कुर्सी पर…”

उसने एक कुर्सी ली और उस पर बैठ गया, उसका लंड हवा में खड़ा था।

मैं घुटनों पर बैठकर उसके लंड को चूसने लगी। मैं पहले आधे लंड को मुंह में लेती और अपने जीभ से अन्दर ही अन्दर चाटती और फिर थोडा लंड और अंदर लेती….

“वाह माँ आप तो बहुत अच्छा चूस रही हैं जैसे रंडियां चूसती है, क्या आप पापा का भी ऐसे ही चूसती थीं?” रोहन लंड चुसाई का मजा लेते हुए मुझसे पूछा।

“हाँ, तुम्हारे पापा का लंड तो छोटा था लेकिन मैं पूरा लंड मुंह में लेकर चूसती थी।” मैं उसे बताई, यह सुनकर वह और एक्साइट हो गया और उसने मेरे बालों को पकड़ कर तेजी से मेरे मुंह को ऊपर नीचे करने लगा।

इस पल लग रहा था की जैसे कोई रंडी चुदवा रही हो और मैं तो मानो स्वर्ग की सैर कर रही हूँ।

फिर उस ने चोदने के लिए मुझे मेरा हाथ पकड़ कर अपने उपार खींचा।

मैं उसकी तरफ मुँह करके उसकी गोद में बैठी, और धीरे से उसके लंड को पकड़ कर अपनी बुर में डालकर उस पर बैठ गई।

“ओह… पूरा अंदर चला गया… इतना गहरा… ओह रोहन…” मैंने अपने हाथ उसके कंधों पर रखे।

“हाँ मम्मी… अब आप ऊपर-नीचे हिलो… मैं आपके दूध दबाऊँगा…”

मैं उसकी गोद में उछलने लगी, और वह मेरे मोटे दूधों को दबा रहा था, मेरे निप्पलों को काट रहा था।

हम दोनों पसीने से लथपथ थे, और चोदाई का यह खेल पच्चीस मिनट से ज़्यादा चल चुका था।

“बेटा… अब मैं झड़ने वाली हूँ… तुम भी अपना माल मेरी बुर में निकाल दो… एक साथ… आहहह…”

“हाँ मम्मी… आ रहा है… मेरा वीर्य… आपकी बुर में… ले लो… सारा का सारा… अहहह…”

हम दोनों एक साथ झड़े। उसने अपना गरम-गरम वीर्य मेरी बुर में छोड़ दिया, और मेरी बुर ने भी अपने रसों की धार छोड़ दी।

वह मुझे कसकर पकड़े रहा, मैं उसकी गोद में थी, हम दोनों एक-दूसरे में समा गए थे।

पैंतालीस मिनट की चोदाई के बाद, हम दोनों थककर बिस्तर पर गिर गए। उसका लंड अभी भी मेरी बुर में था, और वह मेरे दूधों से खेल रहा था।

“मम्मी… यह सब कैसा लगा?” उसने प्यार से पूछा।

“बेटा… तुमने मुझे खुश कर दिया… अपने लंड से… अपनी मम्मी को चोदकर… मैं तुमसे बहुत प्यार करती हूँ…”

“मैं भी आपसे बहुत प्यार करता हूँ मम्मी… अब हमेशा मैं आपको चोदूँगा… रोज़ रात…”

“हाँ बेटा… रोज़ रात… और शायद दिन में भी… जब नैना स्कूल जाए…”

हम दोनों मुस्कुराए और एक-दूसरे को चूमते रहे।

नैना ने एक रात अपने भाई रोहन को और मुझे चुदाई करते हुए देख लिया था, और वह भी अपने भाई के उस विशाल लंड की दीवानी हो गई थी।

अगले दिन जब मैं बाज़ार गई, नैना ने रोहन को अपने कमरे में बुलाया और अपने कपड़े उतार दिए, उसके गोरे स्तन और गुलाबी बुर देखकर रोहन का लंड फिर से खड़ा हो गया।

नैना ने कहा, “भैया, मम्मी को जो मज़ा दिया है वो मुझे भी दो।”

यह कहानी मैं आपको अगले पार्ट में बताऊंगी की कैसे रोहन ने मेरी बेटी और अपनी बहन नैना को चोदा…..

NEXT PART: मेरे बेटे ने मेरे बाद अपनी सगी बहन को चोदा

नोट: यहां पोस्ट की गई सभी कहानियां केवल मनोरंजन के उद्देश्य से प्रस्तुत की गई हैं। कृपया इन्हें वास्तविक जीवन से जोड़कर न देखें। कहानी में दर्शाए गए किसी भी दृश्य, घटना या चित्र का वास्तविक जीवन में प्रयोग करना हानिकारक हो सकता है। इसके लिए न तो कहानी के लेखक और न ही प्रस्तुतकर्ता जिम्मेदार होंगे। इसलिए कृपया अपनी समझ, बुद्धि और विवेक का उपयोग करें।

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