6 शराबियों ने मुझे पकड़ कर अरहर के खेत में ग्रुप में चोद दिए

sharabi chudai kahani

हमारे घर की हालत उस समय बहुत दयनीय हो चुकी थी।

अगर आपने पिछली कहानी नहीं पढ़ी तो उसे जरूर पढ़ें कि कैसे एबॉर्शन करने वाला बंगाली डॉक्टर ने आपी को चोदा

पिताजी की आमदनी बहुत कम थी और घर के खर्चे दिन-प्रतिदिन बढ़ते ही जा रहे थे।

माँ की बीमारी के बाद घर पर और भी ज़्यादा आर्थिक बोझ पड़ गया था।

ऐसे में घर के सभी सदस्यों को किसी न किसी तरह से मेहनत-मज़दूरी करनी पड़ती थी।

शमीना आपी, जो कि घर की सबसे बड़ी बेटी थीं, पर सबसे ज़्यादा ज़िम्मेदारियाँ थीं।

वह रोज़ सुबह उठकर घर के सारे काम करतीं – बर्तन धोना, झाड़ू-पोंछा करना, खाना बनाना, और फिर बाकी के काम।

लेकिन इन सबके बावजूद भी घर की आर्थिक स्थिति इतनी खराब थी कि हमारे घर में हैंडपंप तक नहीं लगा पाए थे।

पानी के लिए हमें दूर से लाना पड़ता था, और कपड़े धोने के लिए तो बड़ी नहर पर ही जाना पड़ता था।

उस दिन भी आपी सुबह से ही व्यस्त थीं। उन्होंने सुबह-सुबह ही घर के सारे काम निपटाए थे।

माँ की दवाई का खर्चा, छोटे भाई-बहनों की पढ़ाई की फीस, और घर का राशन – सब कुछ सोच-सोचकर उनका सिर घूम जाता था।

लेकिन आपी कभी भी हिम्मत नहीं हारतीं थीं। वह हमेशा मुस्कुराती रहतीं और कहतीं कि एक दिन सब ठीक हो जाएगा।

उस दिन दोपहर का समय था। धूप बहुत तेज़ थी और आसमान बिल्कुल साफ़ था।

आपी ने सोचा कि इसी मौके का फायदा उठाकर वह कपड़े धोकर आ जाएं।

उन्होंने एक बड़ा टोकरी में घर के सारे गंदे कपड़े इकट्ठे किए – पिताजी की कुर्ते-पायजामे, माँ की साड़ियाँ, छोटे भाइयों की शर्टें, और अपने कपड़े।

वह टोकरी को सिर पर रखकर नहर की ओर चल दीं।

रास्ता काफी लंबा था। लगभग दो किलोमीटर की दूरी तय करके वह नहर पर पहुंचीं।

वहाँ पहुंचकर उन्होंने कपड़े धोने शुरू किए। ठंडा पानी, तेज़ धूप, और आपी की मेहनत – यह एक आम दृश्य था जो रोज़ ही देखने को मिलता था।

आपी ने अपनी साड़ी की पल्लू को कमर में कसकर बांध रखा था ताकि कपड़े धोते समय वह गीली न हो जाए।

उनके हाथ तेज़ी से कपड़े रगड़ रहे थे और उनके चेहरे पर पसीने की बूंदें चमक रही थीं।

कपड़े धोने में लगभग दो घंटे लग गए। जब सारे कपड़े धुल गए, तो आपी ने उन्हें टोकरी में रखा और वापस घर की ओर चल दीं।

वह रास्ते से गुज़र रही थीं जब उन्होंने देखा कि आगे एक देसी शराब की दुकान है जहाँ कुछ आदमी खड़े होकर शराब पी रहे थे।

यह दुकान गाँव के बाहरी हिस्से में थी और यहाँ हमेशा ही कुछ नशेड़ी आदमी मिल ही जाते थे।

आपी ने सोचा कि वह जल्दी से निकल जाएंगी, लेकिन उसी समय उनकी नज़र उन छह आदमियों पर पड़ी जो शराब की दुकान के बाहर खड़े थे।

ये सभी लगभग 30 से 45 साल के बीच के थे। इनमें से कुछ ने पहले ही बहुत सारी शराब पी रखी थी और उनकी आँखें लाल हो चुकी थीं।

ये छह आदमी गाँव के ही रहने वाले थे, लेकिन इनकी गिनती गाँव के बदमाशों और नशेड़ियों में होती थी।

इनमें से एक का नाम था रघु, जो कि एक बड़े किसान का बेटा था लेकिन शराब की लत में सब कुछ बर्बाद कर चुका था।

दूसरा था कल्लू, जो कि मज़दूरी करता था लेकिन ज्यादातर पैसे शराब पर ही उड़ा देता था।

तीसरा था मोहन, जो कि पहलवानी करता था और उसका शरीर बहुत मजबूत था।

चौथा था छोटे, जो कि उम्र में सबसे छोटा था लेकिन शराबी बहुत बड़ा था। पाँचवाँ था बलराम, जो कि एक ट्रैक्टर चालक था।

और छठा था गफ्फार, जो कि मुस्लिम समुदाय से था और इन सबका साथी था।

ये सभी एक साथ मिलकर शराब पी रहे थे और गपशप कर रहे थे। तभी उनकी नज़र शमीना आपी पर पड़ी।

आपी ने उस दिन हल्की गुलाबी रंग की साड़ी पहनी हुई थी जो उनके गोरे बदन पर बहुत सुंदर लग रही थी।

उनके बाल थोड़े बिखरे हुए थे क्योंकि धूप में कपड़े धोने के कारण पसीना आ गया था।

उनके गालों पर पसीने की बूंदें चमक रही थीं और उनके होंठ थोड़े सूखे लग रहे थे।

उन छहों की आँखें जैसे ही आपी को देखी, वैसे ही उनके मन में शैतानी विचार आने लगे।

शराब का नशा उनके सिर पर चढ़ चुका था और उनकी बुद्धि काम करना बंद कर चुकी थी।

उन्होंने एक-दूसरे को देखा और फिर आपी की ओर देखा। उनके चेहरे पर एक शैतानी मुस्कान आ गई।

“अरे वाह, देखो तो कौन जा रहा है,” रघु ने कहा और अपनी शराब की बोतल नीचे रख दी।

“हाँ यार, यह तो वही शमीना है ना, जो कि उस रिक्शेवाली की बेटी है,” कल्लू ने कहा।

“क्या माल है यार, देखो तो कितनी सुंदर लग रही है,” मोहन ने कहा और आपी को घूरने लगा।

“और देखो कपड़े लेकर जा रही है, अकेली है,” छोटे ने कहा।

“अबे, इसी मौके का फायदा उठाना चाहिए,” बलराम ने कहा।

“क्या मतलब?” गफ्फार ने पूछा।

“मतलब यह कि आज इसकी चुदाई करेंगे, ग्रुप में,” रघु ने कहा और सब हँसने लगे।

उन्होंने तुरंत एक योजना बनाई।

उन्होंने देखा कि आपी जिस रास्ते से जा रही थीं, उसके आगे अरहर के खेत थे जो कि अभी घने थे और वहाँ कोई भी नहीं होता था दोपहर के समय। यह सही मौका था।

वे छहों आदमी धीरे-धीरे आपी की ओर बढ़ने लगे।

आपी को कुछ शक हुआ कि पीछे कोई आ रहा है, लेकिन जब उन्होंने पीछे मुड़कर देखा तो वे छहों आदमी अचानक तेज़ी से उनकी ओर दौड़े।

आपी समझ गई आज मेरी बहुत अच्छी से चुदाई होगी।

“अरे रुको रुको, कहाँ भाग रही हो,” रघु ने चिल्लाया।

“छोड़ो मुझे, मैं किसी से बात नहीं करती,” आपी ने कहा और और तेज़ चलने लगीं।

लेकिन वे छहों आदमी बहुत तेज़ थे। उन्होंने आपी को अरहर के खेत के पास ही घेर लिया।

आपी समझ गई कि आज मेरी मस्त चुदाई होने वाला है।

“ले चल इसे खेत में,” रघु ने आदेश दिया।

आपी को वो सब अरहर के खेत में ले गए। खेत बहुत घना था और अरहर के पौधे काफी ऊँचे थे जिससे बाहर से कुछ भी दिखाई नहीं देता था।

वे आपी को खेत के बीच में ले गए जहाँ एक साफ़ जगह थी और घास थोड़ी कम थी।

“यही ठीक जगह है,” कल्लू ने कहा।

“हाँ, यहाँ कोई नहीं आएगा,” बलराम ने कहा।

आपी ने बोला, “मुझे यहां मत चोदो कोई देख लेगा तो घर बता देगा।”

“अरे चुप करो, तुम्हें तो सब जानते हैं कि तुम कितनी बड़ी चुदक्कड़ हो, बस थोड़ा मज़ा करेंगे,” रघु ने कहा और आपी के चेहरे को अपने हाथों में पकड़ लिया।

“कितनी सुंदर है यार, देखो तो इसके होठ,” छोटे ने कहा।

“और यह बदन, क्या माल है,” गफ्फार ने कहा।

आपी को किसी के देखने का डर था लेकिन उनके अंदर एक अजीब सा उत्साह भी था।

वह जानती थीं कि इन छहों से बचना मुश्किल था, और शायद वह इस स्थिति का आनंद भी लेना चाहती थीं क्योंकि उनकी बुर तो वैसे भी हमेशा के लिए खुली हुई थी और हर लंड के लिए तैयार रहती थी।

रघु ने आपी को पकड़ा और उनके करीब आ गया। उसने आपी के होठों पर अपने होठ रख दिए और ज़ोर-ज़ोर से चूमने लगा।

आपी ने विरोध करने की कोशिश की लेकिन रघु बहुत ज़ोर से था। उसने आपी की साड़ी पकड़ी और खींचने लगा।

“आज तो इसकी साड़ी उतारकर इसे पूरी तरह से नंगा कर देंगे,” रघु ने कहा।

“हाँ, देखते हैं इसके अंदर क्या-क्या छुपा है,” मोहन ने कहा।

आपी रो रही थीं लेकिन धीरे-धीरे उनका विरोध कमज़ोर पड़ने लगा। रघु ने उनकी साड़ी खींचकर उतार दी।

फिर उसने उनका ब्लाउज भी खोल दिया। आपी के सफेद रंग की ब्रा दिखाई दी जो उनके बड़े-बड़े दूधों को सहारा दे रही थी।

“वाह, क्या साइज़ है यार,” कल्लू ने कहा।

“इसके दूध तो देखो, कितने बड़े-बड़े हैं,” छोटे ने कहा।

रघु ने आपी की ब्रा भी खींचकर उतार दी।

आपी के दोनों दूध आज़ाद हो गए। वे बड़े, गोल, और बिल्कुल सफेद थे। उनके निप्पल गुलाबी रंग के थे और थोड़े बड़े थे।

धूप की रोशनी में उनके दूध चमक रहे थे।

“आह, क्या नज़ारा है,” गफ्फार ने कहा।

“इन दूधों को तो चूसना ही पड़ेगा,” बलराम ने कहा।

रघु और मोहन ने आपी को पकड़ लिया – एक ने आगे से और एक ने पीछे से।

रघु ने आपी के स्तनों को पकड़ा और ज़ोर-ज़ोर से दबाने लगा। उसने उनके निप्पलों को अपनी उंगलियों से पकड़ा और घुमाना शुरू कर दिया।

“आह… धीरे… दर्द हो रहा है,” आपी ने कहा।

“चुप करो रंडी, अभी तो शुरुआत है,” रघु ने कहा और उनके निप्पलों को खींचा।

मोहन ने पीछे से आपी की गांड पर हाथ फिराना शुरू कर दिया।

उसने उनका पेटीकोट ऊपर उठाया और उनकी गांड को सहलाने लगा। आपी की गांड बड़ी और गोल थी, एकदम मक्खन जैसी नरम।

“क्या गांड है यार, बहुत मज़ेदार है,” मोहन ने कहा और आपी की गांड पर थप्पड़ मारा।

“आह… मत मारो… दर्द होता है,” आपी ने कहा।

“अभी तो मारेंगे, और तुम्हें चोदेंगे भी,” मोहन ने कहा और आपी की गांड में अपनी उंगली डाल दी।

बाकी के चार आदमी भी आगे आ गए। कल्लू ने आपी के होठों को चूमना शुरू कर दिया।

उसने अपनी जीभ आपी के मुँह में डाली और उनकी जीभ के साथ खेलने लगा।

आपी को भी अब मज़ा आने लगा था और वह भी कल्लू की जीभ का जवाब देने लगीं।

“देखो, यह तो मज़े ले रही है,” छोटे ने कहा।

“हाँ, यह रंडी तो पहले से ही तैयार है,” बलराम ने कहा।

गफ्फार और छोटे ने आपी के हाथ पकड़े और उनके हाथों में अपने लंड दे दिए। आपी ने उनके लंडों को पकड़ा और सहलाने लगीं। वे दोनों लंड काफी मोटे और गरम थे।

“सहलाओ रंडी, अच्छे से सहलाओ,” गफ्फार ने कहा।

“और मोटा हो रहा है तुम्हें पकड़ने से,” छोटे ने कहा।

मोहन ने आपी का पेटीकोट और पैंटी दोनों उतार दिए। आपी की बुर अब पूरी तरह से नंगी थी।

वह पहले से ही गीली हो चुकी थी क्योंकि इतने सारे आदमियों के बीच में होने का उत्साह उन्हें हो रहा था।

उनकी बुर एकदम भोसड़े जैसी लग रही थी – थोड़ी फैली हुई, गुलाबी, और गीली।

“वाह, देखो इसकी बुर को, कितनी चौड़ी है,” मोहन ने कहा।

“यह तो पहले से ही बहुत चुदी हुई लगती है,” रघु ने कहा।

“हाँ, इसकी बुर तो पूरी भोसड़ा बन चुकी है,” कल्लू ने कहा।

आपी शरमा रही थीं लेकिन उनकी बुर से पानी बह रहा था।

वह जानती थीं कि आज इन छहों से चुदवाना पड़ेगा और वह इसके लिए तैयार भी थीं।

रघु ने फैसला किया कि वह पहला होगा जो आपी को चोदेगा।

उसने अपने कपड़े उतारे और उसका लंड बाहर निकला। वह लगभग 8 इंच लंबा और काफी मोटा था। उसका सुपाड़ा गुलाबी और फूला हुआ था।

“देखो रंडी, यह है मेरा लंड, आज यह तुम्हारी बुर में जाएगा,” रघु ने कहा।

“और हम सब भी तुम्हें चोदेंगे,” मोहन ने कहा और उसने भी अपने कपड़े उतारे। उसका लंड और भी बड़ा था, लगभग 9 इंच का और बहुत मोटा।

एक-एक करके सभी छहों ने अपने कपड़े उतार दिए। छह लंड एक साथ देखकर आपी की आँखें खुली रह गईं।

कुछ लंबे थे, कुछ मोटे, कुछ काले, और कुछ गोरे – हर तरह के लंड उनके सामने थे।

“अब शुरू करें?” कल्लू ने पूछा।

“हाँ, लेकिन पहले इसे एक सही पोज़िशन में लाते हैं,” रघु ने कहा।

उन्होंने वही किया जो आपने सोचा होगा। पहले दो लोगों ने आपी को पकड़ लिया – रघु ने आगे से और मोहन ने पीछे से।

रघु ने आपी के दूधों को पकड़ा और उन्हें ज़ोर-ज़ोर से दबाने लगा। उसने उनके निप्पलों को खींचा और काटा।

आपी को दर्द और मज़े का अहसास हो रहा था।

“आह… धीरे… निप्पल दर्द कर रहे हैं,” आपी ने कहा।

“चुप करो साली रंडी, तुम्हें तो यही पसंद है,” रघु ने कहा और उनके निप्पलों को और ज़ोर से खींचा।

मोहन ने पीछे से आपी की गांड सहलाना शुरू कर दिया।

उसने उनकी गांड के दोनों हिस्सों को फैलाया और उसमें अपनी उंगली डाल दी।

आपी की गांड बहुत टाइट थी लेकिन मोहन की उंगली आसानी से अंदर चली गई।

“क्या टाइट गांड है यार, आज तो इसे भी फाड़ूँगा,” मोहन ने कहा।

“नहीं… वहाँ मत डालना… बहुत दर्द होगा,” आपी ने कहा।

“अभी देखते हैं, पहले तो तुम्हारी बुर चोदते हैं,” मोहन ने कहा।

फिर बाकी चारों भी आगे आ गए। कल्लू ने आपी के मुँह में अपना लंड डाल दिया।

उसका लंड मोटा और लंबा था और वह आपी के मुँह को पूरी तरह से भर रहा था।

“चूसो साली, अच्छे से चूसो,” कल्लू ने कहा।

आपी ने उसके लंड को चूसना शुरू कर दिया। उसने अपनी जीभ से लंड के सुपाड़े को चाटा और फिर उसे अपने मुँह के अंदर ले लिया। कल्लू को बहुत मज़ा आ रहा था।

“आह… क्या मुँह है इसका… बहुत मज़ा आ रहा है,” कल्लू ने कहा।

छोटे और गफ्फार ने आपी के दोनों हाथों में अपने लंड दे दिए।

आपी ने दोनों लंडों को पकड़ा और उन्हें सहलाने लगीं। वह एक साथ दो लंडों को हिला रही थीं।

“सहलाओ रंडी, और तेज़,” छोटे ने कहा।

“हाँ, और ज़ोर से हिलाओ,” गफ्फार ने कहा।

बलराम और एक और आदमी (जो कि नया था, उसका नाम था श्याम) ने आपी के दूधों को पकड़ लिया।

वे दोनों एक-एक स्तन को अपने मुँह में लेकर चूसने लगे। उन्होंने आपी के निप्पलों को ज़ोर-ज़ोर से चूसा और काटा।

“आह… हाँ… और चूसो… मेरे निप्पलों को चूसो,” आपी ने कहा।

अब आपी पूरी तरह से गर्म हो चुकी थीं। उनकी बुर से पानी बह रहा था और वह इन छहों लंडों का आनंद लेना चाहती थीं।

रघु ने फैसला किया कि अब समय आ गया है मुख्य क्रिया का। उसने आपी को एक रूमाल पर लिटाया जो कि उन्होंने ज़मीन पर बिछाया था।

“अब मैं लेटता हूँ और तुम मेरे ऊपर बैठोगी,” रघु ने कहा।

रघु ज़मीन पर लेट गया और उसने अपना लंड सीधा करके ऊपर उठा लिया।

आपी को उसके ऊपर बैठने के लिए कहा गया। मोहन और कल्लू ने आपी को उठाया और रघु के लंड के ऊपर बैठा दिया।

“धीरे से बैठो, मेरा लंड बहुत मोटा है,” रघु ने कहा।

आपी ने धीरे-धीरे रघु के लंड को अपनी बुर में लेना शुरू किया।

वह लंड बहुत मोटा था लेकिन आपी की बुर तो भोसड़ा बन चुकी थी, इसलिए वह आसानी से अंदर चला गया।

“आह… बहुत मोटा है… पूरा अंदर चला गया,” आपी ने कहा।

“अब उपर-नीचे करो,” रघु ने कहा।

आपी ने उछलना शुरू कर दिया। वह रघु के लंड पर बैठकर उपर-नीचे कर रही थीं। उनके दूध ज़ोर-ज़ोर से हिल रहे थे।

तभी कल्लू ने आगे आकर आपी के मुँह में अपना लंड डाल दिया। अब आपी एक लंड पर बैठी हुई थीं और दूसरा लंड चूस रही थीं।

“चूसो साली, और गहरा लो,” कल्लू ने कहा।

“फच… फच… फच…” की आवाज़ें आ रही थीं।

मोहन ने देखा कि आपी की गांड खाली है, तो उसने सोचा कि क्यों ना इस मौके का फायदा उठाया जाए।

उसने अपने लंड पर थूक लगाया और आपी की गांड के पीछे खड़ा हो गया।

“अब मैं तुम्हारी गांड में डालता हूँ,” मोहन ने कहा।

“नहीं… वहाँ मत डालो… बहुत मोटा है तुम्हारा,” आपी ने कहा लेकिन उनका मुँह कल्लू के लंड से भरा हुआ था।

मोहन ने ज़ोर से धक्का दिया और उसका लंड आपी की गांड में घुस गया। आपी की गांड बहुत टाइट थी लेकिन मोहन के ज़ोरदार धक्के से वह अंदर चला गया।

“उफ… बहुत दर्द हो रहा है… मेरी गांड फट रही है,” आपी ने कहा।

“चुप रहो, थोड़ी देर में मज़ा आएगा,” मोहन ने कहा और धक्के मारने शुरू कर दिए।

अब आपी तीन लंडों के बीच में थीं – एक उनकी बुर में था, एक उनकी गांड में, और एक उनके मुँह में। यह एक डबल पैनिट्रेशन की स्थिति थी जो बहुत ही उत्तेजक थी।

बाकी के तीन आदमी – छोटे, गफ्फार, और बलराम – आपी के पास आ गए। उन्होंने आपी के हाथों में अपने लंड दे दिए।

अब आपी एक साथ पाँच लंडों का आनंद ले रही थीं – दो हाथों में, एक मुँह में, एक बुर में, और एक गांड में।

“क्या मस्त चुदाई है यार,” छोटे ने कहा।

“हाँ, यह रंडी तो एक्सपर्ट है,” गफ्फार ने कहा।

“और ज़ोर से चोदो इसे,” बलराम ने कहा।

रघु नीचे से धक्के मार रहा था, मोहन पीछे से, और कल्लू आगे से आपी के मुँह को चोद रहा था।

आपी की बुर और गांड दोनों एक साथ भरी हुई थीं और उन्हें बहुत मज़ा आ रहा था।

कुछ देर बाद उन्होंने पोज़िशन बदली। रघु और मोहन ने अपने लंड बाहर निकाल लिए और आपी को कुत्तिया बना दिया। अब आपी अपने हाथों और घुटनों के बल खेत में थीं।

“अब मैं तुम्हारी बुर चोदता हूँ,” मोहन ने कहा और उसने अपना लंड आपी की बुर में डाल दिया।

“और मैं तुम्हारी गांड चोदता हूँ,” रघु ने कहा और उसने अपना लंड आपी की गांड में डाल दिया।

अब फिर से दो लंड एक साथ अंदर थे – एक बुर में और एक गांड में। आपी चीख रही थीं लेकिन मज़े से।

“आह… हाँ… और ज़ोर से… मेरी भोसड़ा बनी बुर को फाड़ दो,” आपी ने कहा।

“ले रंडी, ले मेरा लंड,” मोहन ने कहा और ज़ोर-ज़ोर से धक्के मारे।

“और मेरा भी ले, तेरी गांड बहुत टाइट है,” रघु ने कहा।

कल्लू ने आगे आकर आपी के मुँह में अपना लंड डाल दिया। “चूसो, और अच्छे से चूसो,” उसने कहा।

छोटे और गफ्फार ने आपी के नीचे लेटकर उनके दूधों को पकड़ लिया।

वे उनके निप्पलों को चूस रहे थे और काट रहे थे। आपी के निप्पल अब लाल हो चुके थे और बहुत कड़े थे।

“आह… मेरे निप्पल… धीरे काटो,” आपी ने कहा।

“चुप रहो, तुम्हें यही पसंद है,” छोटे ने कहा।

बलराम ने आपी के हाथ में अपना लंड दे दिया। “सहलाओ इसे,” उसने कहा।

अब फिर से सभी छह लंड आपी के संपर्क में थे। वह एक साथ छहों का आनंद ले रही थीं। उनकी बुर से पानी बह रहा था जो उनकी जांघों से नीचे बह रहा था।

लगभग आधे घंटे तक इसी तरह की चुदाई चली। सभी आदमी बारी-बारी से आपी की बुर, गांड, और मुँह चोद रहे थे।

वे आपी के दूधों को भी नहीं भूल रहे थे – कोई उन्हें चूसता, कोई दबाता, और कोई खींचता।

आपी तीन-चार बार झड़ चुकी थीं। उनकी बुर पूरी तरह से गीली थी और उनकी गांड भी ढीली हो चुकी थी।

“अब मैं झड़ने वाला हूँ,” मोहन ने कहा।

“मैं भी,” रघु ने कहा।

“मैं भी अपना माल इसके मुँह में छोड़ूँगा,” कल्लू ने कहा।

“और मैं इसके दूधों पर,” छोटे ने कहा।

“मैं इसकी बुर में,” गफ्फार ने कहा।

“मैं इसकी गांड में,” बलराम ने कहा।

एक-एक करके सभी ने अपना माल छोड़ना शुरू किया। मोहन ने आपी की बुर में अपना गरम माल डाल दिया।

रघु ने उनकी गांड में। कल्लू ने उनके मुँह में। छोटे ने उनके दूधों पर। गफ्फार ने उनकी बुर में दूसरी बार।

और बलराम ने उनकी गांड में दूसरी बार।

आपी पूरी तरह से माल से लथपथ हो गईं। उनकी बुर से माल बह रहा था, उनकी गांड से भी, उनके मुँह से भी, और उनके दूधों पर भी माल लगा हुआ था।

“क्या मस्त चुदाई थी,” रघु ने कहा।

“हाँ, यह रंडी तो बहुत मज़ेदार है,” मोहन ने कहा।

आपी थक कर ज़मीन पर गिर गईं। उनकी साँसें तेज़ चल रही थीं और उनका पूरा शरीर पसीने और माल से भीगा हुआ था।

“अब जाओ, और किसी को मत बताना,” रघु ने कहा।

“वरना फिर से चोदेंगे,” मोहन ने धमकी दी।

आपी ने कपड़े पहने और वहाँ से चली गईं। वह जानती थीं कि यह उनकी ज़िंदगी की सबसे यादगार चुदाई थी जो वह कभी नहीं भूलेंगी।

अभी तो आपी की चुदाई की बहुत सारी कहानियां है, आने वाले दिनों में कभी समय मिला तो फिर कभी सुनाऊंगी……

अगर ये कहानी आपको अच्छी लगी तो कमेंट में जरुर बताना……….

नोट: यहां पोस्ट की गई सभी कहानियां केवल मनोरंजन के उद्देश्य से प्रस्तुत की गई हैं। कृपया इन्हें वास्तविक जीवन से जोड़कर न देखें। कहानी में दर्शाए गए किसी भी दृश्य, घटना या चित्र का वास्तविक जीवन में प्रयोग करना हानिकारक हो सकता है। इसके लिए न तो कहानी के लेखक और न ही प्रस्तुतकर्ता जिम्मेदार होंगे। इसलिए कृपया अपनी समझ, बुद्धि और विवेक का उपयोग करें।

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