टिकटॉक वाली भाभी की गैंगबैंग चुदाई

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मेरा नाम आकाश है। मैं उत्तर प्रदेश के एक छोटे से कस्बे में रहता हूँ, जहाँ जीवन धीमी गति से बहता है।

मेरे घर के ठीक सामने एक दो मंजिला मकान है, जिसमें पिछले तीन सालों से संध्या भाभी अपने पति के साथ रह रही हैं।

संध्या भाभी… यह नाम सुनते ही मेरे दिल की धड़कन तेज हो जाती है।

वह 34 साल की एक शादीशुदा औरत हैं, लेकिन उनकी खूबसूरती ऐसी कि कोई भी उन्हें देखकर मोहित हो जाए।

उनका बदन ऐसा कि भगवान ने खुद उनके हर हिस्से को सावधानी से तराशा हो।

उनका फिगर 34-32-36 है – यानी उनके दूध पूरी तरह से तने हुए हैं, कमर इतनी पतली कि हाथ रखते ही नाप लो, और गांड इतनी उभरी हुई कि किसी भी लंड को खड़ा कर दे।

संध्या भाभी टिकटॉक वीडियो बनाती थीं। जब से यह रील्स और शॉर्ट वीडियो का जमाना आया, उन्हें भी फेमस होने का बुखार चढ़ गया।

वह हर रोज नए-नए कपड़े पहनकर, मेकअप करके, अपने आंचल को ऐसे हिलातीं कि पूरे मोहल्ले के लंड खड़े हो जाते।

उनके पति एक बैंक में नौकरी करते हैं और अक्सर दफ्तर से देर से आते, इसलिए संध्या के पास बहुत समय होता था अपने शौक को पूरा करने का।

पिछले छह महीनों से, संध्या की जिंदगी में कुछ नए लोग आए थे।

यह सात लोगों का एक ग्रुप था जो पास के गाँव से आते थे।

यह सब यूट्यूबर्स और इंस्टाग्राम क्रिएटर्स थे, लेकिन असल में यह लखेरों के बाप थे – यानी पैसे वाले, आवारा, और जवानी में भरपूर लौंडे।

इस ग्रुप में वीडियो एडिटर राकेश, कैमरामैन सुनील, साउंड इंजीनियर विकास, डायरेक्टर प्रमोद, और तीन और लौंडे थे – अमित, राजू और करन।

यह सब 25 से 32 साल के बीच के थे, और इन सबकी नजरें सिर्फ एक ही चीज पर टिकी थीं – संध्या की बुर पर।

हर सुबह, यह सातों संध्या के घर आते, उसे अपनी बाइक पर बिठाते, और फिल्म शूटिंग के नाम पर कहीं ले जाते।

शाम को वापस छोड़ते समय, यह सब उसे घूर-घूरकर देखते, उसके बदन को निहारते, और आपस में इशारों में बात करते।

संध्या भी इन सबकी नजरों को पढ़ रही थी, और वह भी अंदर ही अंदर उत्तेजित हो रही थी।

उसकी शादी को पाँच साल हो गए थे, और उसके पति उसे वह संतुष्टि नहीं दे पाते थे जो एक जवान औरत को चाहिए होती है।

जुलाई का महीना था। आसमान में घने बादल छाए हुए थे। गर्मी इतनी थी कि साँस लेना मुश्किल हो रहा था।

दोपहर को अचानक मौसम पलटा और जोरदार बारिश शुरू हो गई।

यह वही दिन था जब उन सातों ने फैसला किया था कि आज संध्या को उनकी बनाई हुई फिल्म का हीरोइन बनाकर, सातों की हीरोइन बनाकर, पूरी तरह से चोदेंगे।

दोपहर के तीन बजे थे। बारिश की आवाज़ इतनी तेज थी कि खिड़कियाँ काँप रही थीं।

संध्या अपने कमरे में बैठी साड़ी पहनने की तैयारी कर रही थी।

उसने सफेद रंग की एक पारदर्शी साड़ी निकाली थी, जिसके नीचे गुलाबी रंग की ब्रा और पैंटी पहनी थी।

उसके दूध ब्रा से बाहर निकलने को बेताब थे, और उसके निप्पल कपड़े के नीचे से साफ दिख रहे थे।

तभी दरवाजे की घंटी बजी। संध्या ने दरवाजा खोला तो सामने सातों लौंडे खड़े थे, पूरी तरह से भीगे हुए।

उनके कपड़े उनके बदन से चिपके हुए थे, और उनके लंडों के उभार साफ दिख रहे थे।

“अरे वाह संध्या जी, आज तो बहुत खूबसूरत लग रही हो,” राकेश ने कहा, उसकी आँखें उसके दूध पर टिकी हुई थीं।

“हाँ, आज तो हमारी हीरोइन पूरी तरह से तैयार है,” सुनील ने कहा, हाथ में कैमरा लिए हुए।

संध्या ने शरारती मुस्कान दी, “अरे तुम लोग भी तो भीगे हुए हो। अंदर आओ, सुख जाओ।”

“नहीं संध्या जी, हमने सोचा है कि आज बारिश में ही शूटिंग करेंगे। रोमांटिक सीन होगा। तुम चलो हमारे साथ,” प्रमोद ने कहा।

संध्या समझ गई कि यह सिर्फ शूटिंग नहीं होने वाली। उसके अंदर की औरत जाग उठी। उ

सने सोचा, “आज इन सातों से चुदवा लेती हूँ। पति से तो वैसे भी कुछ मिलता नहीं।”

“ठीक है, लेकिन मैं भी तो भीगूँगी,” संध्या ने कहा।

“वही तो मजा है,” राजू ने कहा, “भीगी हुई औरत में अलग ही नमक होता है।”

संध्या ने अपनी साड़ी का पल्लू ठीक किया और उनके साथ चल पड़ी।

वह सातों उसे लेकर छत की ओर गए। छत पर पानी भरा हुआ था, और बारिश अब भी तेजी से गिर रही थी।

छत पर पहुँचते ही सुनील ने कैमरा चालू कर दिया। लेकिन आज कोई एक्टिंग नहीं होनी थी, आज असली खेल होना था।

“संध्या जी, आज हम एक रोमांटिक सीन शूट करेंगे। तुम्हें पता है, बारिश में दो लोग जब एक-दूसरे को गले लगते हैं, तो कितना मजा आता है,” राकेश ने कहा, उसकी आवाज़ में वासना की गहराई थी।

“हाँ, मुझे पता है,” संध्या ने कहा, उसकी आँखें नीचे झुकी हुई थीं, शर्माती हुई औरत का अभिनय कर रही थी।

“तो फिर शुरू करें?” विकास ने पूछा।

“कहाँ से?” संध्या ने पूछा।

“पहले तुम थोड़ा घुमो, अपने बदन को हिलाओ। हम देखना चाहते हैं कि बारिश में भीगी हुई तुम कैसी लगती हो,” अमित ने कहा।

संध्या ने मुस्कुराते हुए कहा, “ठीक है।”

और फिर जो नजारा हुआ, वह सातों लौंडों के लिए यादगार बन गया। संध्या ने अपने हाथ ऊपर उठाए और बारिश में घूमने लगी।

पानी उसके चेहरे पर गिर रहा था, उसके बाल भीग गए, और उसकी साड़ी पूरी तरह से चिपक गई उसके बदन से।

अब उसकी ब्रा और पैंटी साफ दिख रही थीं। उसके दूध पूरी तरह से तने हुए थे, और निप्पल ब्रा के नीचे से खड़े होकर कपड़े को बाहर धकेल रहे थे।

उसकी कमर पानी में डूबी हुई थी, और उसकी गांड हर कदम पर ऐसे हिल रही थी जैसे दो फुटबॉल नाच रही हों।

“वाह माँ… क्या माल है,” करन ने फुसफुसाते हुए कहा।

“आज तो इसे खूब चोदेंगे,” राजू ने कहा, अपने लंड पर हाथ फेरते हुए।

संध्या ने एक घूमावदार हरकत की, और उसका पल्लू हवा में उड़ गया।

अब उसका पेट और नाभि साफ दिख रही थी। पानी उसकी नाभि में भर रहा था और फिर बह रहा था, जैसे कोई झरना हो।

“बहुत खूबसूरत,” प्रमोद ने कहा, “अब थोड़ा पास आओ।”

संध्या धीरे-धीरे उनकी ओर बढ़ी। सुनील सबसे आगे खड़ा था।

जैसे ही संध्या उसके पास पहुँची, सुनील ने धीरे से अपना हाथ उसके गाल पर रखा।

“तुम बहुत खूबसूरत हो, संध्या,” उसने कहा।

“धन्यवाद,” संध्या ने शर्माते हुए कहा।

“क्या मैं तुम्हें छू सकता हूँ?” सुनील ने पूछा।

संध्या ने हाँ में सिर हिलाया।

सुनील ने अपने हाथ उसके गीले बालों में फेरे, फिर उसके गालों को सहलाया, और धीरे से उसके होंठों पर अपने होंठ रख दिए।

यह एक लंबा चुम्बन था, जिसमें सुनील ने संध्या की जीभ को अपने मुँह में खींच लिया।

संध्या भी पूरी तरह से उसमें डूब गई, उसने अपने हाथ सुनील की पीठ पर रख दिए।

बाकी छह लौंडे यह सब देख रहे थे, उनके लंड पैंटों में तनकर खड़े हो गए थे।

सुनील के चुम्बन के बाद, राकेश आगे बढ़ा।

उसने संध्या को अपनी बाहों में भर लिया और उसके गर्दन पर चुम्बन करने लगा। संध्या की साँसें तेज हो गईं।

राकेश का हाथ धीरे-धीरे उसकी साड़ी के पल्लू की ओर बढ़ा और उसने पल्लू खींच लिया।

अब संध्या की ब्रा पूरी तरह से दिख रही थी। गुलाबी रंग की ब्रा भीगी हुई थी, और उसके नीचे के दूध पूरी तरह से साफ दिख रहे थे।

राकेश ने अपना हाथ उसकी ब्रा के ऊपर रखा और धीरे से दबाना शुरू किया।

“उम्म्म… अह्ह्ह…” संध्या से आवाज़ निकल गई।

“क्या हुआ? मजा आ रहा है?” राकेश ने पूछा।

“हाँ… बहुत मजा आ रहा है,” संध्या ने कहा।

“तो अभी तो शुरुआत है, रानी,” विकास ने कहा, वह भी पास आ गया था।

अब तीन लौंडे संध्या के चारों ओर थे।

सुनील पीछे से उसकी कमर सहला रहा था, राकेश उसके दूध दबा रहा था, और विकास उसके होंठ चूस रहा था।

संध्या पूरी तरह से उनके बीच फँसी हुई थी, और उसे बहुत मजा आ रहा था।

“और लोग भी तो हैं,” संध्या ने कहा, बाकी चारों की ओर इशारा करते हुए।

“हाँ, सबकी बारी आएगी,” प्रमोद ने कहा, “आज तो हम सातों मिलकर तुझे चोदेंगे, रंडी।”

यह शब्द सुनकर संध्या और भी उत्तेजित हो गई।

उसे गाली देकर चोदने का विचार ही उसे पागल कर रहा था।

“हाँ… चोदो मुझे… सातों मिलकर चोदो,” संध्या ने कहा, “मैं तुम्हारी रंडी हूँ आज।”

“साली रंडी,” अमित ने कहा, “आज तो तेरी बुर फाड़ देंगे।”

“हाँ… फाड़ दो… मेरी बुर को फाड़ दो,” संध्या ने कहा।

अब बारिश और भी तेज हो गई थी, और यह सब भीगे हुए छत पर एक-दूसरे को छू रहे थे।

संध्या की साड़ी पूरी तरह से खुल चुकी थी, और वह अब केवल ब्रा और पैंटी में थी।

“चलो, इसकी ब्रा उतारो,” राजू ने कहा।

राकेश ने पीछे से संध्या की ब्रा की हुक खोलनी शुरू की।

संध्या ने अपने हाथ ऊपर उठाए और राकेश ने ब्रा खींचकर निकाल दी।

जैसे ही ब्रा निकली, संध्या के दूध बाहर कूद पड़े। वह इतने बड़े और गोल थे कि सातों के मुँह में पानी भर गया।

उनके निप्पल गुलाबी रंग के थे, और बारिश के पानी में भीगे हुए चमक रहे थे। निप्पल इतने कड़े हो गए थे जैसे दो छोटे लंड खड़े हों।

“वाह… क्या दूध हैं,” करन ने कहा, “चूसने में कितना मजा आएगा।”

“तो चूसो ना,” संध्या ने कहा, अपने दूध आगे करते हुए।

विकास और अमित दोनों एक साथ आगे बढ़े। विकास ने दायां दूध पकड़ा और अमित ने बायां।

दोनों ने एक साथ उसके निप्पलों को अपने मुँह में ले लिया और चूसने लगे।

“अह्ह्ह… हाँ… और जोर से चूसो… उम्म्म…” संध्या मस्ती से कराहने लगी।

इस बीच, सुनील ने उसकी पैंटी पर हाथ रखा।

वह उसकी गीली पैंटी को सहला रहा था, और संध्या की बुर गर्म होकर पैंटी गीली कर चुकी थी – बारिश के पानी से ज्यादा उसके रस से।

“साली, पैंटी तो पूरी गीली है,” सुनील ने कहा।

“हाँ… मेरी बुर पानी छोड़ रही है… तुम्हारे लंड के लिए तरस रही है,” संध्या ने कहा।

“तो अभी तुम्हारी बुर को मिल जाएगा लंड… और सातों का,” प्रमोद ने कहा।

सुनील ने संध्या की पैंटी नीचे खींची और उसके पैरों से निकाल दी।

अब संध्या पूरी तरह से नंगी हो गई थी बारिश में।

उसका बदन पानी में चमक रहा था, उसके बाल उसके चेहरे पर चिपके हुए थे, और उसकी बुर पूरी तरह से दिख रही थी – गुलाबी, गीली, और चूतड़ों से थोड़ी बालों वाली।

“क्या बुर है यार… इतनी सुंदर,” राजू ने कहा।

“आज इस बुर को हम सातों मिलकर चोदेंगे,” करन ने कहा।

“अब तुम लोग भी तो कपड़े उतारो,” संध्या ने कहा, “मैं तो नंगी हो गई… अब मुझे तुम्हारे लंड दिखाओ।”

“हाँ, दिखाते हैं,” प्रमोद ने कहा।

एक-एक करके सातों लौंडों ने अपने कपड़े उतारने शुरू किए।

शर्ट, टी-शर्ट, पैंट, अंडरवियर – सब बारिश में फेंक दिए गए।

अब सातों नंगे खड़े थे, और उनके सातों लंड हवा में तने हुए थे।

संध्या की आँखें बड़ी हो गईं। वह सातों लंडों को देखकर दंग रह गई।

कुछ 6 इंच के थे, कुछ 7 इंच के, और प्रमोद का तो करीब 8 इंच का लग रहा था – मोटा, लंबा, और नसों से लहराता हुआ।

“वाह… इतने बड़े-बड़े लंड,” संध्या ने कहा, उसके मुँह में पानी भर आया।

“हाँ, रंडी… आज ये सातों लंड तेरी बुर में जाएँगे,” राकेश ने कहा।

“एक-एक करके… या सातों एक साथ?” संध्या ने पूछा, शरारत से मुस्कुराते हुए।

“पहले एक-एक करके… फिर देखते हैं,” सुनील ने कहा।

“तो शुरू करो,” संध्या ने कहा, “कौन पहले?”

“मैं,” प्रमोद ने कहा, वह सबसे बड़ा था और उसका लंड भी सबसे बड़ा था।

प्रमोद ने संध्या को पकड़ा और उसे छत पर एक साफ जगह पर लिटा दिया।

बारिश का पानी उन दोनों पर गिर रहा था। प्रमोद ने संध्या के पैर फैलाए और उसकी बुर को देखा।

वह गुलाबी, चमकीली, और पानी से भीगी हुई थी।

“लगा दूँ?” प्रमोद ने पूछा।

“हाँ… दाल दो अपना लंड… मेरी बुर में घुसाओ,” संध्या ने कहा।

प्रमोद ने अपने लंड को हाथ में पकड़ा और संध्या की बुर के मुँह पर रगड़ना शुरू किया।

संध्या की बुर पहले से ही गीली थी, और प्रमोद का लंड भी बारिश में गीला था। रगड़ते-रगड़ते प्रमोद ने एक जोरदार धक्का दिया।

“उई माँ… अह्ह्ह… बहुत बड़ा है,” संध्या चीखी।

प्रमोद का लंड उसकी बुर में आधा घुस गया था। वह इतना मोटा था कि संध्या की बुर फटने लगी थी।

“साली, रुक जा… अभी तो पूरा अंदर जाएगा,” प्रमोद ने कहा।

“हाँ… डाल दो पूरा… मेरी बुर फाड़ दो,” संध्या ने कहा।

प्रमोद ने दूसरा धक्का दिया और उसका पूरा लंड संध्या की बुर में समा गया।

संध्या की साँसें रुक सी गईं। उसे लगा जैसे कोई गर्म रॉड उसके अंदर घुसा दी गई हो।

“अह्ह्ह… बहुत गहरा है… बहुत मोटा है,” संध्या ने कहा।

“अब मजा आएगा, रंडी,” प्रमोद ने कहा और धक्के लगाने शुरू किए।

प्रमोद का लंड संध्या की बुर में अंदर-बाहर हो रहा था।

पानी की आवाज़ और चुदाई की आवाज़ मिलकर एक अजीब सी ध्वनि बन रही थी।

बाकी छह लौंडे नंगे खड़े होकर अपने लंड हिलाते हुए यह सब देख रहे थे।

“चोदो… और जोर से चोदो,” राकेश चिल्लाया।

“साली को खूब चोदो,” सुनील ने कहा।

प्रमोद की रफ्तार बढ़ गई। वह संध्या को तेजी से चोद रहा था।

संध्या के दूध उसके चेहरे के ऊपर-नीचे हो रहे थे, और उसके निप्पल कड़े होकर हवा में इशारा कर रहे थे।

“मैं झड़ने वाला हूँ,” प्रमोद ने कहा।

“अंदर ही डाल दो… मेरी बुर में ही झड़ जाओ,” संध्या ने कहा।

प्रमोद ने जोर से धक्का दिया और उसका लंड संध्या की बुर में फँसकर झड़ गया।

गर्म गर्म वीर्य संध्या की बुर में भर गया। प्रमोद थोड़ी देर वैसे ही लेटा रहा और फिर अपना लंड बाहर निकाल लिया।

प्रमोद के बाद सुनील आगे बढ़ा।

उसका लंड भी पूरी तरह से खड़ा था, और वह प्रमोद के वीर्य से भरी हुई बुर को चोदने के लिए उतावला हो रहा था।

“मैं अभी आया, रंडी,” सुनील ने कहा।

“हाँ… आओ… अपना लंड दो मुझे,” संध्या ने कहा।

सुनील ने संध्या को घोड़ी बनने के लिए कहा। संध्या घुटनों और हाथों के बल उठ गई।

उसकी गांड हवा में थी, और उसकी बुर से प्रमोद का वीर्य बह रहा था, बारिश के पानी के साथ मिलकर।

सुनील ने पीछे से आकर अपना लंड उसकी बुर पर रखा और एक ही धक्के में पूरा अंदर कर दिया।

“अह्ह्ह… हाँ… ये वाला भी बड़ा है,” संध्या चीखी।

सुनील ने उसकी कमर पकड़ी और जोर-जोर से धक्के लगाने शुरू किए।

उसके थप्पड़ संध्या की गांड पर गूँज रहे थे – थप… थप… थप…

“चोदो… और जोर से चोदो… साले… मेरी बुर को फाड़ दो,” संध्या गालियाँ देते हुए चुदवा रही थी।

“साली रंडी… तेरी बुर तो बहुत टाइट है,” सुनील ने कहा।

“हाँ… मेरी बुर टाइट है… सबको मजा देगी… सातों को मजा देगी,” संध्या ने कहा।

इस बीच, अमित और विकास आगे आए। उन्होंने संध्या के मुँह के पास अपने लंड रख दिए।

“चूसो… साली… दोनों को चूसो,” अमित ने कहा।

संध्या ने एक लंड मुँह में ले लिया और दूसरे को हाथ से सहलाने लगी।

अब वह तीनों लंडों का मजा ले रही थी – एक बुर में, एक मुँह में, और एक हाथ में।

सुनील के झड़ने के बाद, राकेश और विकास ने एक साथ आकर एक नया प्रयोग किया। उन्होंने संध्या को फिर से लिटा दिया।

“आज तुझे डबल मजा देते हैं,” राकेश ने कहा।

“क्या मतलब?” संध्या ने पूछा।

“एक लंड तेरी बुर में और एक तेरी गांड में,” विकास ने कहा।

“ओह… हाँ… वो भी करो… मेरी गांड भी चोदो,” संध्या ने कहा।

राकेश नीचे लेट गया और संध्या को अपने ऊपर बिठा लिया। उसने अपना लंड संध्या की बुर में डाल दिया।

अब विकास आगे बढ़ा और उसने अपने लंड पर थूक लगाया। फिर उसने संध्या की गांड के छेद पर अपना लंड रखा।

“धीरे से… पहली बार है,” संध्या ने कहा।

“हाँ… धीरे से,” विकास ने कहा और धीरे से धक्का दिया।

“अह्ह्ह… माँ… बहुत दर्द हो रहा है… लेकिन मजा आ रहा है,” संध्या चीखी।

विकास का लंड धीरे-धीरे उसकी गांड में घुसने लगा।

अब संध्या की दोनों छेदों में लंड थे – बुर में राकेश का और गांड में विकास का।

“चोदो… दोनों मिलकर चोदो… मुझे फाड़ दो,” संध्या चिल्ला रही थी।

दोनों ने एक साथ धक्के लगाने शुरू किए। संध्या बीच में फँसी हुई थी, ऊपर-नीचे हो रही थी। उसके दूध इतनी तेजी से हिल रहे थे कि दर्द भी हो रहा था और मजा भी।

“साली… क्या माल है… दोनों छेद एक साथ ले रही है,” प्रमोद ने कहा, जो अपना लंड फिर से खड़ा करते हुए देख रहा था।

राकेश और विकास के झड़ने के बाद, अब अमित और करन की बारी थी।

उन्होंने संध्या को उठाया और छत के किनारे ले गए जहाँ एक छोटी सी दीवार थी।

“अब तुझे खड़े-खड़े चोदेंगे,” अमित ने कहा।

अमित ने संध्या को दीवार से सटा दिया और उसका एक पैर ऊपर उठाया।

अब संध्या एक पैर पर खड़ी थी, और उसकी बुर पूरी तरह से खुली हुई थी।

अमित ने अपना लंड उसमें डाल दिया और धक्के लगाने लगा।

इस बीच, करन ने संध्या का मुँह पकड़ा और अपना लंड उसके मुँह में ठूँस दिया।

“चूस… साली… पूरा चूस,” करन ने कहा।

अब संध्या फिर से दो लंडों के बीच थी – एक बुर में और एक मुँह में।

वह करन के लंड को चूस रही थी जबकि अमित उसकी बुर को चोद रहा था।

“उम्म्म… उम्म्म…” संध्या की आवाज़ें करन के लंड के नीचे दबी हुई थीं।

“चूस अच्छे से… रंडी… मेरा लंड चाट,” करन गाली दे रहा था।

“हाँ… चोदो इसे… खूब चोदो,” राजू चिल्ला रहा था, जो अभी तक अपनी बारी का इंतज़ार कर रहा था।

अमित और करन के झड़ने के बाद, अब सिर्फ राजू बचा था।

लेकिन अब तक संध्या थक चुकी थी, उसकी बुर लाल हो गई थी, और उसके दोनों छेदों से वीर्य बह रहा था।

फिर भी वह राजू को भी खुश करना चाहती थी।

“आओ राजू… तुम भी आओ,” संध्या ने कहा।

राजू ने संध्या को फर्श पर लिटाया और उसके ऊपर आ गया।

उसने संध्या के दोनों पैर अपने कंधों पर रखे और अपना लंड उसकी बुर में डाल दिया।

“अह्ह्ह… अब तो बहुत आसानी से घुस रहा है… पहले से चौड़ी हो गई है तेरी बुर,” राजू ने कहा।

“हाँ… तुम सातों ने मेरी बुर चौड़ी कर दी… अब मजा से चोदो,” संध्या ने कहा।

राजू ने तेजी से धक्के लगाने शुरू किए।

वह संध्या के दूध को भी दबा रहा था, उसके निप्पलों को मसल रहा था।

“मैं झड़ने वाला हूँ… साली… तेरी बुर में ही झड़ूँगा,” राजू ने कहा।

“हाँ… डाल दो… मेरी बुर में भर दो… सबका वीर्य मेरी बुर में जाए,” संध्या ने कहा।

राजू ने जोर से धक्का दिया और संध्या की बुर में झड़ गया।

अब सातों लौंडों का वीर्य संध्या की बुर में था, और वह पूरी तरह से संतुष्ट लेटी हुई थी बारिश में।

सातों के झड़ने के बाद, संध्या छत पर ही लेटी रही। बारिश अब धीमी हो गई थी।

सातों लौंडे उसके चारों ओर बैठे थे, थके हुए लेकिन खुश।

संध्या ने अपने हाथ से अपनी बुर को सहलाया, जहाँ से सातों का वीर्य बह रहा था।

उसने उसे अपने हाथ पर लिया और चाट लिया।

“बहुत मजा आया,” उसने कहा।

“हमें भी बहुत मजा आया,” प्रमोद ने कहा।

“क्या हम फिर से कर सकते हैं?” सुनील ने पूछा।

“हाँ… जब चाहो… मैं तुम्हारी रंडी हूँ,” संध्या ने कहा।

उस रात के बाद, संध्या और यह सातों लौंडे अक्सर मिलते।

कभी खेत में, कभी गोदाम में, और कभी फिर से छत पर।

और हर बार, संध्या खुशी-खुशी अपनी बुर, अपने दूध, और अपने निप्पलों से उन सातों का मनोरंजन करती।

मैं, अक्सर अपनी खिड़की से यह सब देखता और अपना लंड हिलाता।

लेकिन मुझे पता था कि संध्या भाभी की असली खुशी उन सातों के बड़े-बड़े लंडों में थी, जो उसकी बुर को पूरी तरह से संतुष्ट कर सकते थे।

और इस तरह, बारिश की उस रात, संध्या की गैंगबैंग चुदाई की कहानी हमेशा के लिए यादगार बन गई।

नोट: यहां पोस्ट की गई सभी कहानियां केवल मनोरंजन के उद्देश्य से प्रस्तुत की गई हैं। कृपया इन्हें वास्तविक जीवन से जोड़कर न देखें। कहानी में दर्शाए गए किसी भी दृश्य, घटना या चित्र का वास्तविक जीवन में प्रयोग करना हानिकारक हो सकता है। इसके लिए न तो कहानी के लेखक और न ही प्रस्तुतकर्ता जिम्मेदार होंगे। इसलिए कृपया अपनी समझ, बुद्धि और विवेक का उपयोग करें।

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