अपनी रंडी भाभी को मैंने चोदा

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एक रिश्ते की गहरी दास्तान – जब समंदर किनारे एकांत में दो दिल मिले, तो शर्म की सारी दीवारें ढह गईं। पढ़िए कैसे एक मासूम सुबह बदल गई वासना की आग में…

नमस्ते दोस्तों, कैसे हो आप सब। मैं आशा करता हूँ कि आप सभी लोग खैरियत से होंगे और जिंदगी के मजे ले रहे होंगे।

मेरा नाम नवनीत है, उम्र 25 साल है। मैं महाराष्ट्र के पुणे से हूँ। मेरी भाभी का नाम ललिता है और वे 29 साल की हैं।

यह गर्मागर्म कहानी उन दिनों की है जब मैं अपनी नौकरी की छुट्टियों में अपने काका के समंदर किनारे बने बंगले पर गया हुआ था। वहां काका-काकी और उनका बेटा राहुल दोनों मुझे आया देख कर बहुत खुश हुए। और मैं भी उनसे गर्मजोशी से मिला, उनके पैर छुए और घर की बातें बताने लगा।

मेरे पापा और काका जी की उम्र में कोई खास फर्क नहीं था, तो मैं उनसे काका-काकी ही कहता था। हम सब बातें करने लगे।

बातों के दौरान ही मेरी ललिता भाभी बाजार से घर आईं। वे मुझे देख कर खुश हो गईं।

मैं भी खड़ा होकर उनसे मिलने गया तो उन्होंने मुझे अपने गले से लगा लिया।

मुझे भाभी के सीने से लग कर बहुत अच्छा लगा।

उनकी साँसें मेरे गालों पर महसूस हो रही थीं और उनके मम्मे मेरे सीने से दब रहे थे। उनके बालों की खुशबू मेरे दिमाग में घर कर गई।

इधर मैं आपको अपनी ललिता भाभी के बारे में कुछ बताना चाहता हूँ।

मेरी भाभी मुझसे सिर्फ चार साल बड़ी हैं। वे मुझसे बहुत खुली हुई हैं। वे मुझसे अपनी सभी किस्म की बातें शेयर करती हैं।

यहां तक कि वे मुझसे सेक्सी और डबल मीनिंग वाली बातें करने में भी संकोच नहीं करती हैं। यानि हमारे बीच सब कुछ खुला हुआ है।

वैसे मेरी भाभी इतनी भी ज्यादा खूबसूरत नहीं है पर उनका कसा हुआ फिगर ऐसा है कि कोई भी उनको चोदने के लिए तैयार हो जाएगा।

उनका फिगर 36-30-38 है और वो जब भी साड़ी पहनती हैं, उनकी गोल-गोल गांड और भरे हुए मम्मे देखकर मेरा लंड खड़ा हो जाता है।

उनकी आँखों में एक अजीब सी चमक है जो मुझे हमेशा अपनी तरफ खींचती है।

ललिता भाभी से मिलने के बाद हम सब ने मिलकर खाना खाया।

बाद में भाभी के ससुराल वाले आराम करने चले गए और हम दोनों बरामदे में बैठकर समंदर की लहरें देखने लगे।

शाम का वक्त था और हल्की-हल्की ठंडी हवा चल रही थी। भाभी ने अपनी दोनों टांगें ऐसे फैला रखी थीं मानो वे अपनी चुत को हवा खिला रही हों।

मैं उनकी टांगों को देख रहा था जो उनकी साड़ी से बाहर निकली हुई थीं।

उनकी जांघें गोरी और मुलायम थीं। मैं सोच रहा था कि काश मैं उन जांघों को छू सकता।

बातों ही बातों में मैंने उनकी एक जांघ पर हाथ रख दिया और जांघ को दबाने लगा। उन्होंने देख तो लिया था लेकिन कोई प्रतिक्रिया नहीं जताई।

उनकी इस बात से मुझे हिम्मत मिली और मैं उनकी जांघ को सहलाते हुए उनसे बातें करता रहा।

मैंने पूछा, “भाभी, आपकी लास्ट चुदाई कब हुआ है?”

भाभी ने एक आंख दबाई और मुस्कुरा कर बोलीं, “अभी दो घंटे पहले ही निपट चुकी हूँ।”

मैंने आश्चर्य जताते हुए कहा, “अरे क्या बात कर रही हो यार … दो घंटे पहले ही लिया है क्या?”

भाभी- “हां!”

मैं- “तो फिर आप तो थक गई होंगी, लाओ मैं आपके पैर दबा देता हूँ!”

भाभी- “ओह रियली?”

मैं- “हां भाभी, सच में मैं आपके पैर दबा देता हूँ!”

भाभी- “ठीक है, दबा दे बच्चे। तुझे खूब सुंदर और सेक्सी बीवी मिले।”

मैं हंस दिया।

उनसे बातें करते करते अब मैं उनके पैर दबाने लगा। भाभी मुझसे पूछने लगीं कि अभी तक कोई गर्लफ्रेंड बनाई है या नहीं?

मैंने उन्हें ना बोलते हुए बताया कि मेरी कोई गर्लफ्रेंड नहीं है।

उस समय मेरी भाभी ने एक पतली सी साड़ी पहनी हुई थी जो उनके गोरे बदन पर बेहद खूबसूरत लग रही थी।

थोड़ी देर बाद उनकी आंख लग गई और मैं उनकी साड़ी के अन्दर देखने की कोशिश करने लगा।

मुझे उनके दूध के निप्पल उभरे हुए दिखाई दे रहे थे जो ब्लाउज के नीचे से साफ झलक रहे थे।

मेरे मन में आया कि मैं उन्हें छूकर देख लूं और यदि अवसर मिले तो उन्हें चूस भी लूं … पर मुझे डर था कि यह सब करने से भाभी मुझसे कहीं गुस्सा ना हो जाएं।

फिर यही सब सोचते सोचते मेरा लंड खड़ा हो गया और मेरे दिमाग ने काम करना बंद कर दिया था।

मेरा दिल जोर जोर से धड़क रहा था, मेरी वासना बढ़ रही थी और मैं सोच रहा था कि ऐसा क्या करूं कि मेरे लौड़े को भाभी की चुत चोदने मिल जाए।

अंततः मैंने हिम्मत करके पैर दबाते हुए एक हाथ से उनकी चूची को छुआ। तो उनकी तरफ से कोई प्रतिक्रिया नहीं हुई।

यह देख कर मैंने उनके दूध पर हाथ का दबाव बढ़ाया लेकिन तब भी भाभी की तरफ से कोई हलचल नहीं हुई।

मैं समझ गया कि पक्का आज भाभी की चुत सही से नहीं चुदी है इसलिए वे मेरे साथ मजा लेने की सोच रही हैं।

मैंने अब बेझिझक उनके दूध को मसलना शुरू कर दिया। साथ ही मैं अपने दूसरे हाथ को उनकी चूत पर ले गया और चुत को टटोला।

वे पेटीकोट पहनी थीं तो उसके ऊपर से ही चुत को टटोलने से पता चला कि उन्होंने पैंटी तो पहनी ही नहीं है।

यह सोच कर मैंने ऊपर ध्यान देते हुए दूध के निप्पल को मींजा तो समझ आया कि मम्मों के ऊपर ब्रा भी नहीं है।

मेरा हाथ उनकी चुत को रगड़ने लगा। जल्दी ही उनकी चूत वाली जगह गीली हो गई थी।

मैंने अपना हाथ उनके पेटीकोट के अन्दर कर दिया जो सीधा चूत पर जा लगा।

उनकी चुत एकदम लिसलिसी तो थी ही और झांटों का नामोनिशान नहीं था। उनकी चूत एकदम सफाचट थी।

शायद भाभी ने आज ही चुदने जाने के प्रोग्राम के वजह से शेव की हुई थी।

अब मैंने एक उंगली भाभी की चूत के दाने पर घुमाई, तो भाभी के मुँह से सिसकारी निकल गई।

भाभी अभी तक आंखें बंद करके लेटी हुई अपने होंठों को दांतों से काट रही थीं और दबी जुबान से कामुक सिसकारियां भर रही थीं।

दाने के बाद मैंने उंगली चूत के अन्दर पेल दी तो उनकी चुत अन्दर से बहुत गर्म थी और एकदम चिपचिपी थी।

अब मैं मस्ती से अपनी उंगली को भाभी की चुत में अन्दर बाहर करने लगा था।

भाभी के मुँह से खुल कर उम्म स्स आअह्ह निकलने लगा था।

मैंने भाभी के मुँह के पास जाकर अपने होंठों को उनके होंठों पर लगा दिया और उन्हें किस करने लगा।

मेरी भाभी भी मेरा साथ देने लगीं और हम दोनों एक दूसरे को किस करने लगे।

मैं एक हाथ से भाभी के दूध को हॉर्न के जैसे दबा रहा था और दूसरे हाथ से उंगली से चूत को खोद रहा था।

करीब पांच मिनट तक चुत में उंगली करने से भाभी का शरीर अकड़ने लगा।

वे मुझसे जोर से चिपक गईं और उन्होंने उत्तेजना में मेरे होंठों को काट लिया।

मुझे बहुत तेज दर्द हुआ तो मेरे मुँह से गाली निकल गई, “आह मादरचोद ने काट लिया!”

उनकी हंसी छूट गई और वे मेरे लंड को दबा कर बोलीं, “साले हरामी!”

मैं भी अपनी जीभ से अपने कटे होंठ को चूसने लगा।

अब भाभी अपने एक हाथ से मेरे लंड को सहलाने लगीं। जिससे मैं बहुत गर्म होने लगा।

मेरा लंड साढ़े सात इंच लम्बा है और लगभग तीन इंच गोलाई वाला है।

भाभी ने जैसे ही हाथ से लंड पकड़ा, उनकी आंखें खुल गईं और वे वासना से लाल तप्त आंखों से मुझे देखने लगीं।

उनके मुँह से निकल गया, “बहन के लौड़े, तेरा लंड इतना बड़ा है … और मुझे पता ही नहीं है!”

मैंने भी उनके दूध को कपड़े के ऊपर से मुँह में भर लिया और कहा, “तो आज अन्दर लेकर सही से पता कर लो!”

हम दोनों उस समय बरामदे में थे इसलिए चुदाई जैसा कुछ नहीं कर सकते थे।

अब उन्होंने मुझे अपने कमरे में चलने को कहा। तो हम दोनों उनके कमरे में आ गए।

भाभी ने सबसे पहले कमरे की सब खिड़कियां बंद कर दीं और मैंने दरवाजा बंद कर लिया ताकि हमें कोई दिक्कत ना हो।

अब हम दोनों एक दूसरे से चिपक कर लिप किस करने लगे।

मैंने भाभी को उठाकर बेड पर गिरा दिया और खुद उनकी एक बाजू में लेट कर उनकी चूत में उंगली करने लगा।

अभी कुछ ही देर तक मैंने फिंगर फक किया था कि वे तेज सिसकारी के साथ वापस झड़ गईं जिससे मेरा पूरा हाथ भीग गया।

मैंने हाथ पेटीकोट से बाहर निकाल कर उनको दिखाया।

वे मादक नजरों से मुझे देख रही थीं। मैंने उनके सामने ही अपना पूरा हाथ चाट लिया। मुझे भाभी की चुत का पानी बहुत स्वादिष्ट लगा।

भाभी बिना पलकें झपकाए यह सब देखती रहीं। उन्होंने इशारा किया कि अपना लंड बाहर निकालो।

मैंने भी अपना लंड पैंट से बाहर निकाल कर उन्हें दिखाया और हाथ से आगे पीछे करते हुए लंड हिलाने लगा।

भाभी ने लंड को मेरे हाथ से छुड़ा लिया और वे उसे अपने हाथ से हिलाने लगीं। तभी अचानक से उन्होंने पोज बनाया।

वे बिल्ली के जैसे बैठ गईं और मेरा लंड बिना हिचकिचाए अपने मुँह में भर कर उसे चूसने लगीं।

‘आह ह्ह्ह …’ गजब का सुख मिलता है लंड चुसवाने में। क्या ही बताऊँ दोस्तो, जन्नत जैसा आनन्द आ रहा था।

मैं अपनी आंखें बंद करके भाभी का मुँह चोद रहा था।

करीब दस मिनट लंड चुसवाने के बाद मेरा लंड झड़ने लगा। लौड़े से निकला पूरा माल भाभी गटक गईं और उन्होंने मेरे लंड को चाट कर साफ कर दिया।

झड़ कर मैं निढाल हो गया था लेकिन भाभी ने लंड को लगातार चूसा, जिससे मैं बहुत जल्द पूरी तरह से गर्म हो गया था।

मैंने फिर से भाभी को चित लिटाया और उनकी टांगों में मुँह डाल दिया।

भाभी 69 में होने का कहने लगीं। मैंने 69 में होकर अपना लंड भाभी के मुँह में दे दिया तो भाभी फिर से चूसने लगीं।

भाभी मेरे इरादों को जान गई थीं कि आज ये मस्त चुदाई करेगा।

उन्होंने खुद ही अपना पेटीकोट उतार कर अलग कर दिया और अपने मुँह से लंड निकाल कर बोलीं, “मेरी चुत चूस ले। और अब तो मुझसे बर्दाश्त नहीं हो रहा है, तू मेरी चूत चिकनी करके अपना लंड जल्दी से मेरी चूत में डाल दे और मेरी चुत की गर्मी को शांत कर दे प्लीज … अहह!”

मैंने कहा, “भाभी आप चुदवा कर आई तो थीं न … तो क्या आपकी गर्मी शांत नहीं हुई थी?”

वे गाली देती हुई बोलीं, “बहन के लौड़े ने आग बुझाने की जगह भड़का और दी और मुझे अधूरा छोड़ कर झड़ गया साला।”

अब तक मेरा भी लंड खड़ा हो गया था इसलिए मैं भी उनकी बात को समझ लिया कि इन्हें जबरदस्त चुदाई की दरकार है।

पहले मैंने उनकी दोनों टांगों को फैलाया और चूत की फांकें फैला कर अन्दर का नजारा देखा तो अन्दर से गुलाबी रंग का बाग दिखाई दे रहा था।

मैंने अगले ही पल अपना मुँह भाभी की चूत पर लगा दिया और चूत को चाटने लगा। मेरी भाभी एकदम से उछल पड़ीं और मेरे सिर को अपनी चूत पर दबाने लगीं।

मैं अपनी दो उंगलियों से भाभी की चूत चोद रहा था और चाटता जा रहा था।

भाभी- “अब बस भी कर कमीने … मुझसे रहा नहीं जाता, जल्दी से पेल कर चोद भी दे मेरे यार प्लीज!”

मैं- “तो फिर तैयार हो जा रंडी!”

इस बात से भाभी हंसने लगीं।

मैंने उनकी दोनों टांगें फैलाईं और अपना लंड मुठियाता हुआ उनकी दोनों टांगों के बीच में आ गया।

मैं उनकी चूत को लौड़े से कुरेदने लगा तो इससे भाभी और ज्यादा मचलने लगीं।

वे मेरे लंड को अपने हाथ में लेकर चूत में घुसेड़ने की कोशिश करने लगीं। तभी मैंने जोर से धक्का दे दिया।

भाभी की चूत में चिकनाहट कुछ ज्यादा ही थी तो लंड आसानी से अन्दर चला गया।

मेरी भाभी तेज आवाज करती हुई मुझसे जोर से चिपक गईं और नीचे से अपनी गांड उठा उठा कर मेरा साथ देने लगीं।

मैं उन्हें जोर जोर से चोद रहा था और किस भी किए जा रहा था … साथ में दूध भी दबा रहा था।

थोड़ी देर बाद मैंने भाभी को डॉगी स्टाइल में आने का कहा, तो वे फट से कुतिया बन गईं। मैं उनकी चुत को पीछे से चोदने लगा।

इस बीच भाभी एक बार झड़ चुकी थीं लेकिन मैं अभी तक उनकी चूत फाड़ रहा था।

उन्होंने कहा कि मुझे ऊपर आने दो।

मैंने भाभी की चुत से लौड़ा बाहर निकाला और नीचे लेटने लगा।

वे मेरे लौड़े पर बैठने आ रही थीं तो उनकी चुत से गाढ़ा वीर्य टपक निकला।

वह चादर पर गिरा तो मैंने भाभी को दिखाया। मैंने मजाक किया, “भाभी, तुम्हारा दही निकल रहा है!”

वे हंस कर बोलीं, “तो रायता बना कर खा ले भोसड़ी के!”

फिर उन्होंने बताया कि ये शायद उनके उसी बॉयफ्रेंड का है, जिससे चुद कर मैं बिना चुत धोए घर आ गई थी।

मैंने बिना समय गंवाए अपना बाकी का काम चालू किया और भाभी को अपने लंड पर बिठा कर उन्हें पेलने की तैयारी करने लगा।

भाभी ने मेरा लंड अपने हाथ से पकड़ा और चूत में फिट करके लंड पर बैठ गईं।

लंड चुत में अन्दर तक फिट हो गया था, तो वे अपनी गांड उठा उठा कर चूत चुदवाने लगीं।

साथ ही मेरे सीने पर अपने दूध रगड़ कर मुझे किस करने लगीं।

सच में बड़ा मजा रहा था। मैंने उनके दोनों दूध चूसे और खूब चूत चोदी।

फिर एक समय आया कि मैं भी अपने लंड का माल भाभी की चुत में झाड़ कर हांफने लगा।

भाभी भी मेरे सीने से लिपट कर तेज तेज सांसें भरने लगीं।

उसके बाद हम दोनों सो गए।

दोस्तो, उस एक चुदाई के बाद मैंने अपनी भाभी को लगभग रोज चोदा।

वे भी मेरे लंड से बड़ी खुश थीं।

अब तो हम दोनों का रिश्ता और भी गहरा हो गया है।

जब भी मैं उनके घर जाता हूँ, हम चुपके से मिलकर चुदाई का मजा लेते हैं।

यह एकदम सच्ची कहानी है, आपको कैसी लगी … प्लीज जरूर बताएं।

नोट: यहां पोस्ट की गई सभी कहानियां केवल मनोरंजन के उद्देश्य से प्रस्तुत की गई हैं। कृपया इन्हें वास्तविक जीवन से जोड़कर न देखें। कहानी में दर्शाए गए किसी भी दृश्य, घटना या चित्र का वास्तविक जीवन में प्रयोग करना हानिकारक हो सकता है। इसके लिए न तो कहानी के लेखक और न ही प्रस्तुतकर्ता जिम्मेदार होंगे। इसलिए कृपया अपनी समझ, बुद्धि और विवेक का उपयोग करें।

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