bhabh devar xxx chudai kahani
मेरा नाम शैलेंद्र है। मैं काफी हैंडसम हूँ और मेरी हाइट 5 फीट 8 इंच है। मैं रोज़ जिम जाता हूँ, जिससे मेरा बदन एकदम फिट और आकर्षक हो गया है।
यह मेरी पहली कहानी है, अगर कुछ गलती हो गया हो तो मुझे माफ़ करना।
मेरी छाती चौड़ी है और पेट एकदम टाइट है। मेरे चेहरे पर वो चार्म है जिस पर कॉलेज की सारी लड़कियाँ मरती हैं।
लेकिन मेरा दिल किसी लड़की के लिए नहीं धड़कता, बल्कि मेरी भाभी रीना के लिए धड़कता है।
मेरी भाभी रीना बहुत ही खूबसूरत हैं। उनका चेहरा ऐसा है जैसे कोई परी हो।
उनकी आँखें बड़ी-बड़ी और काजल से सजी हुई हैं, जो किसी को भी अपनी तरफ खींच लेती हैं।
उनके होंठ गुलाबी और मोटे हैं, जिन पर हल्का लिपस्टिक लगा हो तो वो और भी ज़्यादा सेक्सी लगती हैं।
लेकिन सबसे ज़्यादा जो मुझे उनमें पसंद है, वो है उनका बदन।
भाभी के दूध बिल्कुल सही आकार और साइज़ के हैं। वो इतने बड़े और गोल हैं कि किसी भी लड़के का दिल उन्हें देखकर धड़क उठे।
उनकी कमर बहुत पतली है, जो उनके दूध और गांड को और भी ज़्यादा उभार देती है। उनकी गांड भी बिल्कुल सही साइज़ की है – न ज़्यादा बड़ी और न ज़्यादा छोटी, बिल्कुल परफेक्ट।
मेरे भैया बहुत ही बिजी रहते हैं। वो एक बड़ी कंपनी में काम करते हैं और अक्सर टूर पर रहते हैं।
वो भाभी को वो प्यार और वक्त नहीं दे पाते जो एक औरत को चाहिए होता है।
मैं यह सब देखकर दुखी होता हूँ। मुझे भाभी का यूँ उदास और अकेला देखना बिल्कुल पसंद नहीं है।
मैंने तय कर लिया है कि मैं भाभी को खुश करूँगा। मैं उन्हें अपने 10 इंच के लंड से चोदकर खुश करना चाहता हूँ।
मेरा लंड इतना बड़ा और मोटा है कि किसी भी औरत को संतुष्ट कर सकता है।
मैं जानता हूँ कि भाभी को भी इसकी ज़रूरत है, बस वो शर्माती हैं और कह नहीं पातीं।
एक दिन की बात है। भैया एक हफ्ते के लिए ऑफिस के काम से बाहर गए हुए थे।
घर में सिर्फ़ मैं और भाभी थे। मैंने यह मौका देखकर भाभी के करीब जाने का फैसला किया।
शाम को जब भाभी रसोई में खाना बना रही थीं, तो मैं वहाँ गया।
उन्होंने एक पीले रंग की साड़ी पहनी हुई थी जो उनके गोरे बदन पर बहुत सुंदर लग रही थी।
साड़ी का पल्लू उनके कंधे से गिरता हुआ उनके दूध को हल्का ढक रहा था, लेकिन फिर भी उनका क्लीवेज़ दिखाई दे रहा था।
“भाभी, क्या बना रही हो?” मैंने पीछे से आवाज़ लगाई।
भाभी मुड़ीं और मुस्कुराईं, “अरे शैलू, तुम आ गए? मैं तुम्हारी पसंदीदा सब्जी बना रही हूँ।”
मैं उनके पास गया। रसोई तंग थी, और जब मैं उनके पास से गुज़रा, तो मेरा हाथ उनकी कमर से टच हो गया।
वो एकदम से कांप गईं और मुझे घूरने लगीं।
“सॉरी भाभी,” मैंने शरारत से कहा, “जगह कम है ना।”
भाभी ने कुछ नहीं कहा, बस मुस्कुरा दीं। लेकिन मैंने देखा कि उनके गालों पर हल्की सी लाली छा गई थी।
उस रात हमने साथ में खाना खाया। भाभी ने साड़ी में ही खाना परोसा।
जब वो झुककर रोटी देतीं, तो उनके ब्लाउज़ के अंदर से उनके दूध का कुछ हिस्सा दिख जाता।
मेरा लंड तुरंत खड़ा हो गया। मैंने सोचा, आज तो इस मौके का फायदा उठाना ही पड़ेगा।
“भाभी,” मैंने धीरे से कहा, “आप बहुत खूबसूरत लग रही हो आज।”
भाभी ने शर्माते हुए कहा, “पागल हो गए हो क्या? अपनी भाभी से ऐसी बातें कर रहे हो?”
“सच कह रहा हूँ भाभी,” मैंने उनका हाथ पकड़ लिया, “आप जानती नहीं कि आप पर कितने मर्द मरते हैं। मैं तो रोज़ आपको देखकर सोचता हूँ कि काश मैं आपका पति होता।”
भाभी ने हाथ खींचने की कोशिश की, लेकिन मैंने ज़ोर से पकड़ रखा था।
“शैलू, यह गलत है। मैं तुम्हारी भाभी हूँ,” उन्होंने कहा, लेकिन उनकी आवाज़ में वो दृढ़ता नहीं थी जो पहले होती थी।
“भाभी, भैया आपको वो खुशी नहीं दे पाते जो आपको मिलनी चाहिए,” मैंने उनकी आँखों में देखते हुए कहा, “मैं देख सकता हूँ कि आप कितनी अकेली हैं। आपकी आँखें बहुत कुछ कहती हैं।”
भाभी की आँखें नम हो गईं। शायद मेरी बातों में सच्चाई थी।
वो खड़ी हुईं और अपने कमरे की तरफ चल दीं। मैं भी उनके पीछे-पीछे चल दिया।
उनके कमरे में जाकर भाभी खिड़की के पास खड़ी हो गईं।
मैंने धीरे से दरवाज़ा बंद किया और उनके पीछे जाकर खड़ा हो गया।
“भाभी,” मैंने फुसफुसाते हुए कहा, “मैं आपसे बहुत प्यार करता हूँ। मैं जानता हूँ कि यह गलत है, लेकिन मेरा दिल आपके बिना नहीं लगता।”
भाभी ने मुड़कर देखा। उनकी आँखों में आँसू थे। “शैलू, यह सब ठीक नहीं है। समाज क्या कहेगा?”
“समाज की परवाह मुझे नहीं है भाभी,” मैंने उनके कंधों पर हाथ रखते हुए कहा, “मुझे तो बस आपकी खुशी चाहिए। मैं देख सकता हूँ कि आप कितनी तड़प रही हैं। आपके बदन को प्यार और चुदाई की ज़रूरत है।”
कहते हुए मैंने अपने हाथ उनकी कमर पर फिराए।
उनकी साड़ी का नरम कपड़ा मेरे हाथों में आ रहा था। भाभी ने आँखें बंद कर लीं और हल्की सी साँस छोड़ी।
“नहीं शैलू… प्लीज़…” उनकी आवाज़ कांप रही थी, लेकिन उन्होंने मेरे हाथ हटाने की कोशिश नहीं की।
मैंने धीरे से उनका चेहरा अपने हाथों में लिया और उनके माथे पर चूमा।
फिर मैंने उनकी गालों पर चूमना शुरू किया। भाभी कांप रही थीं। उनका बदन मेरे पास आने लगा था।
“भाभी, आप भी तो चाहती हैं ना?” मैंने उनके कान में फुसफुसाते हुए पूछा।
भाभी ने सिर झुका लिया। उनकी साँसें तेज़ हो गई थीं।
मैं समझ गया कि वो भी यही चाहती हैं, बस शर्म से कह नहीं पा रही हैं।
मैंने उनका चेहरा ऊपर उठाया और उनके होंठों पर अपने होंठ रख दिए।
पहले तो वो हल्का सा विरोध किया, लेकिन फिर वो भी मेरे साथ हो गईं।
हम एक-दूसरे के होंठ चूसने लगे। भाभी के होंठ इतने नरम थे कि मुझे बहुत मज़ा आ रहा था।
मैंने अपनी जीभ उनके मुँह में डाली और उनकी जीभ से खेलने लगा।
भाभी भी पूरी तरह से गरम हो चुकी थीं। उन्होंने अपने हाथ मेरी पीठ पर रख दिए और मुझे अपनी तरफ खींचने लगीं।
मैंने धीरे-धीरे उनकी साड़ी खोलना शुरू किया। साड़ी का पल्लू मैंने पहले ही हटा दिया था, जिससे उनका ब्लाउज़ साफ़ दिखाई दे रहा था।
वो एक गहरे लाल रंग का ब्लाउज़ पहने हुए थीं जो उनके गोरे बदन पर बहुत सुंदर लग रहा था।
मैंने पीछे से उनके ब्लाउज़ के हुक खोलने शुरू किए। एक-एक करके सारे हुक खोल दिए। भाभी कांप रही थीं।
मैंने ब्लाउज़ उतार दिया और उनकी पीठ पर चूमना शुरू किया।
उनकी पीठ इतनी गोरी और चिकनी थी कि मैं उसे चूमता ही जा रहा था।
धीरे-धीरे मैं उनकी गर्दन पर आया और वहाँ भी चूमने लगा। भाभी ने अपना सिर पीछे झुका दिया और मेरे बालों में हाथ फिराने लगीं।
“उम्म्म… शैलू…” उनकी हल्की सी आवाज़ निकली।
मैंने उन्हें घुमाया और अब उनकी सामने वाली तरफ देखने लगा।
उन्होंने एक काले रंग की ब्रा पहनी हुई थी जो उनके दूध को बहुत सेक्सी तरीके से ढक रही थी।
उनके दूध का आधा हिस्सा ब्रा से बाहर निकला हुआ था, जो देखकर मेरा लंड और भी ज़्यादा तन गया।
“भाभी, आपके दूध तो बहुत खूबसूरत हैं,” मैंने कहते हुए अपने हाथ उनके दूध पर रख दिए।
वो मेरे हाथों को अपने दूध पर महसूस करके कांप उठीं।
मैंने धीरे-धीरे उनके दूध दबाने शुरू किए। वो इतने नरम और मुलायम थे कि मुझे बहुत मज़ा आ रहा था।
“आह… धीरे शैलू… बहुत मज़ा आ रहा है…” भाभी बोलीं।
मैंने उनकी ब्रा भी उतार दी। जैसे ही ब्रा हटी, उनके दूध बाहर आ गए।
वो इतने बड़े और गोल थे कि मैं उन्हें देखकर हैरान रह गया। उनके निपल्स गुलाबी रंग के थे और बिल्कुल खड़े हो गए थे।
मैंने एक दूध अपने हाथ में लिया और उसे दबाने लगा। दूसरे हाथ से मैं दूसरे दूध को सहला रहा था।
भाभी ने अपनी आँखें बंद कर लीं और मज़े लेने लगीं।
“उफ़… हाँ… और ज़ोर से दबाओ…” भाभी मुझे उकसाने लगीं।
मैंने एक निपल को अपने मुँह में ले लिया और चूसने लगा।
मेरी जीभ उनके निपल्स पर घूम रही थी। भाभी ने मेरे सिर को अपने दूध पर दबा दिया।
“चूसो… और ज़ोर से चूसो… मेरे निपल्स को काट लो…” भाभी अब पूरी तरह से गरम हो चुकी थीं और गंदी बातें कर रही थीं।
मैंने एक निपल को काट भी लिया हल्के से। भाभी ने “आह…” की आवाज़ निकाली।
मैं दूसरे दूध को भी वैसे ही चूसने और काटने लगा। मैं बार-बार दोनों दूध बदल-बदल कर चूस रहा था।
इसके बाद मैं नीचे उतरा। मैंने उनकी साड़ी पूरी तरह से खोल दी और फिर पेटीकोट भी खोल दिया।
अब भाभी सिर्फ़ पैंटी में थीं। उनकी पैंटी भी गीली हो चुकी थी, जो मुझे पता चला कि वो कितनी गरम हैं।
मैंने उनकी पैंटी के ऊपर से ही उनकी बुर को सहलाना शुरू किया।
“भाभी, आपकी बुर तो पूरी तरह से गीली हो गई है,” मैंने कहा।
“हाँ शैलू… तुम्हारे कारण… तुम्हें देखकर मैं पागल हो जाती हूँ…” भाभी ने कबूल किया।
मैंने उनकी पैंटी उतार दी। उनकी बुर साफ़ शेव की हुई थी और बिल्कुल गुलाबी रंग की थी।
उनकी बुर के होंठ बाहर को निकले हुए थे और बिल्कुल गीले चमक रहे थे।
मैंने उनकी जांघों पर चूमना शुरू किया। धीरे-धीरे मैं ऊपर की तरफ बढ़ा और फिर उनकी बुर के पास आ गया।
मैंने अपनी जीभ निकाली और उनकी बुर पर चाटने लगा।
“ओह माई गॉड… शैलू… यह क्या कर रहे हो…” भाभी चीख उठीं।
“आपको चाट रहा हूँ भाभी… आपकी बुर बहुत स्वादिष्ट है,” मैंने कहते हुए उनकी बुर में जीभ घुसा दी।
मैं उनकी बुर को अंदर तक चाट रहा था। मेरी जीभ उनकी बुर के अंदर-बाहर हो रही थी।
भाभी पागलों की तरह कांप रही थीं और मेरे बालों को खींच रही थीं।
“चाटो… और ज़ोर से चाटो… मेरी बुर को फाड़ डालो… उम्म्म… हाँ… बस वहीं…” भाभी चिल्ला रही थीं।
मैंने उनकी क्लिटोरिस को भी अपने मुँह में ले लिया और चूसने लगा।
वो इतनी संवेदनशील जगह थी कि भाभी का पूरा बदन कांप उठा।
“आह… मर गई… बहुत मज़ा आ रहा है… चूसो… और चूसो…” भाभी बेसुध हो रही थीं।
मैं लगातार उनकी बुर चाट रहा था। उनका रस मेरी जीभ पर आ रहा था जो बहुत स्वादिष्ट था।
भाभी ने अपने पैर फैला दिए थे ताकि मैं और गहराई तक जा सकूँ।
करीब पंद्रह मिनट तक भाभी की बुर चाटने के बाद, मैं खड़ा हुआ।
मेरा लंड मेरे पैंट में इतना तना हुआ था कि दर्द हो रहा था।
“भाभी, अब आप भी तो देखो मेरा लंड,” मैंने कहते हुए अपनी पैंट उतार दी।
मैंने अंडरवियर भी उतार दिया और मेरा 10 इंच का लंड बाहर निकल आया।
वो इतना बड़ा और मोटा था कि भाभी उसे देखकर हैरान रह गईं।
“यह… यह तो बहुत बड़ा है शैलू…” भाभी ने डरते हुए कहा।
“डरो मत भाभी,” मैंने कहा, “यह आपको बहुत मज़ा देगा। यह आपकी बुर को पूरी तरह से भर देगा।”
भाभी ने हाथ बढ़ाया और मेरे लंड को छुआ। उनका हाथ इतना नरम था कि मुझे बिजली सी लगी।
फिर उन्होंने मेरे लंड को पकड़ लिया और सहलाने लगीं।
“इतना मोटा और लंबा…” भाभी मेरे लंड को देखते हुए बोलीं, “मेरी बुर में जाएगा यह?”
“हाँ भाभी, पूरा जाएगा,” मैंने कहा, “आप इसे अपने मुँह में लो, फिर और भी ज़्यादा बड़ा हो जाएगा।”
भाभी ने थोड़ा शर्माते हुए मेरे लंड को अपने मुँह के पास लाया।
फिर उन्होंने जीभ निकाली और मेरे लंड के सुपारे पर चाटना शुरू किया।
“उम्म्म…” मैंने आवाज़ निकाली।
भाभी धीरे-धीरे मेरे लंड को अपने मुँह में लेने लगीं। वो पहले तो सिर्फ़ आधा ले पा रही थीं, लेकिन फिर धीरे-धीरे पूरा लंड अपने मुँह में लेने लगीं।
“चूसो भाभी… और ज़ोर से चूसो…” मैंने उनके सिर को पकड़ते हुए कहा।
भाभी मेरे लंड को चूसने लगीं। उनकी जीभ मेरे लंड पर घूम रही थी।
वो कभी ऊपर तो कभी नीचे कर रही थीं। मुझे बहुत मज़ा आ रहा था।
मैंने उनके सिर को पकड़ा और अपना लंड उनके मुँह में आगे-पीछे करने लगा।
भाभी भी साथ दे रही थीं। वो मेरे लंड को बहुत अच्छे से चूस रही थीं।
“भाभी, आप तो बहुत अच्छा लंड चूसती हो,” मैंने कहा, “भैया को भी ऐसे ही चूसती हो क्या?”
“नहीं… उन्हें यह सब पसंद नहीं…” भाभी ने लंड बाहर निकालकर कहा, “वो तो बस ऊपर-ऊपर ही करते हैं… तुम्हारा लंड तो बहुत मज़ेदार है…”
यह सुनकर मैं और भी ज़्यादा गरम हो गया। मैंने भाभी को बिस्तर पर लिटा दिया।
भाभी बिस्तर पर लेट गईं। मैंने उनके पैर फैला दिए।
उनकी बुर बिल्कुल गीली और तैयार थी। मैंने अपने लंड पर थूक लगाया और फिर उनकी बुर के मुँह पर रख दिया।
“भाभी, अब मैं अपना लंड आपकी बुर में डालने जा रहा हूँ,” मैंने कहा।
“हाँ शैलू… डाल दो… मुझे बहुत तड़प हो रही है…” भाभी ने कहा।
मैंने धीरे से अपने लंड का सुपारा उनकी बुर में घुसाया। वो इतनी टाइट थी कि मुझे थोड़ी मुश्किल हो रही थी।
“आह… धीरे… बहुत मोटा है…” भाभी ने दर्द से कहा।
“बस थोड़ी देर में मज़ा आएगा भाभी,” मैंने कहते हुए थोड़ा ज़ोर लगाया।
मेरा आधा लंड उनकी बुर में घुस गया। भाभी दर्द से चीख उठीं।
मैंने रुककर उनके दूध दबाने शुरू किए ताकि उनका ध्यान दर्द से हट जाए।
“उम्म्म… हाँ… दूध दबाओ…” भाभी ने कहा।
मैंने फिर से एक धक्का लगाया और मेरा पूरा 10 इंच का लंड उनकी बुर में समा गया। भाभी ने मुझे कसकर पकड़ लिया।
“बहुत अंदर चला गया… मेरी बुर फट जाएगी…” भाभी चीखीं।
“बस अब मज़ा आएगा भाभी,” मैंने कहा और धीरे-धीरे अपना लंड बाहर खींचना शुरू किया।
थोड़ी देर बाद भाभी को भी मज़ा आने लगा। वो अपनी कमर उठा-उठाकर मेरा साथ देने लगीं।
“अब मज़ा आ रहा है ना?” मैंने पूछा।
“हाँ… बहुत मज़ा आ रहा है… और ज़ोर से चोदो…” भाभी बोलीं।
मैंने अपनी स्पीड बढ़ा दी। मैं जोर-जोर से अपना लंड उनकी बुर में अंदर-बाहर कर रहा था।
चप-चप की आवाज़ें कमरे में गूंज रही थीं।
“चोदो… और चोदो… मेरी बुर फाड़ दो… इसे चोद-चोदकर बड़ी कर दो…” भाभी गंदी बातें कर रही थीं।
मैंने उनके पैर अपने कंधों पर रख लिए और और भी गहराई से चोदने लगा।
मेरा लंड उनकी बुर की सबसे गहरी जगह तक जा रहा था।
“तुम्हारा लंड तो बहुत अच्छा है शैलू… तुम्हारे भैया का तो आधा भी नहीं है…” भाभी ने कहा।
यह सुनकर मैं और भी ज़्यादा उत्साहित हो गया। मैंने उन्हें कुत्ते की तरह बैठने को कहा।
भाभी घुटनों के बल हो गईं और अपनी गांड ऊपर उठा दी।
मैंने पीछे से अपना लंड उनकी बुर में डाल दिया।
“आह… इस तरह से तो और भी ज़्यादा अंदर जा रहा है…” भाभी चीखीं।
मैंने उनकी कमर पकड़ी और जोर-जोर से धक्के लगाने शुरू किए। मेरे अंडे उनकी जांघों से टकरा रहे थे।
“चप-चप-चप” की आवाज़ तेज़ हो गई थी। भाभी चीख-चीखकर मज़े ले रही थीं।
“तुम मुझे बहुत अच्छा चोदते हो… मेरी बुर को बहुत मज़ा दे रहे हो…” भाभी बोलीं।
मैंने करीब बीस मिनट तक उन्हें इसी तरह चोदा। फिर मैंने उन्हें लिटाया और फिर से मिशनरी पोज़िशन में चोदने लगा।
भाभी ने अपने पैर मेरी कमर के चारों ओर लपेट लिए।
मैं उनके ऊपर लेटकर उन्हें चोद रहा था और साथ में उनके दूध भी दबा रहा था।
“मैं झड़ने वाली हूँ… और ज़ोर से चोदो…” भाभी चिल्लाईं।
मैंने पूरी ताकत से धक्के लगाने शुरू किए। भाभी का पूरा बदन कांपने लगा और वो झड़ गईं।
उनकी बुर ने रस छोड़ दिया जो मेरे लंड को और भी ज़्यादा चिकना बना रहा था।
मैंने भी अपना लंड बाहर निकाला और भाभी के दूध पर अपना माल छोड़ दिया।
गाढ़ा, सफ़ेद माल उनके दूध पर गिरा जो बहुत सेक्सी लग रहा था।
थोड़ी देर आराम करने के बाद, मैं फिर से तैयार हो गया। भाभी भी अभी संतुष्ट नहीं हुई थीं।
“शैलू, एक बार और चोदो मुझे…” भाभी ने कहा।
“ज़रूर भाभी, आज तो मैं आपको पूरी तरह से चोदकर खुश करूँगा,” मैंने कहा।
इस बार भाभी ने मुझे लिटाया और खुद मेरे ऊपर बैठ गईं।
उन्होंने मेरे लंड को अपने हाथ में लिया और अपनी बुर के मुँह पर रखा। फिर वो धीरे-धीरे नीचे बैठने लगीं।
“आह… बहुत मज़ा आ रहा है…” भाभी ने कहते हुए पूरा लंड अपनी बुर में ले लिया।
अब वो ऊपर-नीचे उछल-उछलकर मेरा लंड अपनी बुर में ले रही थीं।
मैं नीचे से भी धक्के लगा रहा था। उनके दूध उछल-उछलकर बहुत सेक्सी लग रहे थे।
मैंने उनके दूध पकड़ लिए और उन्हें दबाने लगा। उनके निपल्स मेरे हाथों में आ रहे थे जिन्हें मैं मसल रहा था।
“उम्म्म… हाँ… मेरे दूध दबाओ… निपल्स को खींचो…” भाभी चीख रही थीं।
वो पूरी तरह से मस्त होकर मेरे ऊपर उछल रही थीं। उनकी बुर मेरे लंड को कस-कसकर पकड़ रही थी।
“तुम्हारी बुर तो बहुत टाइट है भाभी… बहुत मज़ा आ रहा है…” मैंने कहा।
“तुम्हारे लंड ने मेरी बुर को खोल दिया है… अब यह सिर्फ़ तुम्हारे लंड के लिए है…” भाभी ने कहा।
यह सुनकर मैं बहुत खुश हुआ। मैंने उनकी कमर पकड़ी और जोर-जोर से ऊपर से नीचे करने लगा। भाभी चीखने लगीं।
“आह… मर गई… बहुत गहरा जा रहा है… मेरी बुर को फाड़ दो…” भाभी ने गंदी बातें करना शुरू कर दीं।
मैंने उन्हें घुमाया और अब साइड में लेटकर चोदने लगा।
इस पोज़िशन में मैं उनकी एक टांग उठाकर चोद रहा था जिससे और भी गहराई तक जा पा रहा था।
“चोदो… और चोदो… मुझे रंडी बनाकर चोदो… मेरी बुर को रगड़-रगड़कर बड़ा कर दो…” भाभी पूरी तरह से बेहोश होकर बोल रही थीं।
मैंने करीब आधे घंटे तक उन्हें इसी तरह चोदा। फिर मैंने उन्हें खड़ा किया और दीवार से सटाकर चोदने लगा।
उनके हाथ दीवार पर थे और मैं पीछे से उनकी बुर में अपना लंड पेल रहा था।
मैं उनके दूध पकड़कर खींच-खींचकर चोद रहा था।
“यह तो बहुत अच्छा लग रहा है… और ज़ोर से… मेरी बुर को तोड़ दो…” भाभी चीख रही थीं।
मैंने अपनी एक उंगली उनकी गांड में डाल दी। वो एकदम से चीख उठीं।
“यह क्या कर रहे हो… गांड में मत डालो…” भाभी ने कहा।
“डरो मत भाभी, बस एक उंगली है… मज़ा आएगा…” मैंने कहा और उंगली अंदर-बाहर करने लगा।
भाभी को यह भी अच्छा लगने लगा। वो पूरी तरह से मस्त हो गईं।
“हाँ… अब मज़ा आ रहा है… दोनों छेद में डालो…” भाभी ने कहा।
मैंने कुछ देर तक ऐसे ही चोदा और फिर मैं झड़ने वाला था।
“भाभी, मैं झड़ने वाला हूँ…” मैंने कहा।
“अंदर ही छोड़ दो… मुझे अपना माल अपनी बुर में चाहिए…” भाभी ने कहा।
मैंने आखिरी कुछ ज़ोरदार धक्के लगाए और फिर अपना गाढ़ा माल उनकी बुर में छोड़ दिया।
वो गरम गरम माल उनकी बुर की गहराई में जा रहा था।
भाभी भी झड़ गईं। हम दोनों एक-दूसरे से लिपटकर खड़े रहे।
रात हो चुकी थी लेकिन हम दोनों का मन नहीं भरा था। हमने खाना खाया और फिर से बिस्तर पर आ गए।
इस बार मैंने भाभी से कहा, “भाभी, मैं आपकी गांड भी मारना चाहता हूँ।”
भाभी ने शर्माते हुए कहा, “वहाँ दर्द होगा… तुम्हारा लंड तो बहुत मोटा है…”
“बस थोड़ी देर का दर्द होगा, फिर बहुत मज़ा आएगा,” मैंने उन्हें मनाया।
भाभी मान गईं। मैंने उन्हें घुटनों के बल बैठने को कहा।
मैंने उनकी गांड पर थूक लगाया और फिर अपनी उंगली से अंदर-बाहर करने लगा।
“आह… अजीब सा लग रहा है…” भाभी ने कहा।
मैंने अपने लंड पर बहुत सारा थूक लगाया और फिर उनकी गांड के मुँह पर रख दिया। धीरे-धीरे मैंने सुपारा अंदर डालने की कोशिश की।
“आह… बहुत मोटा है… धीरे करो…” भाभी चीखीं।
मैंने धीरे से एक धक्का लगाया और मेरा सुपारा अंदर चला गया। भाभी दर्द से कांप रही थीं। मैंने रुककर उनकी बुर को सहलाया।
थोड़ी देर बाद मैंने फिर से धक्का लगाया और आधा लंड अंदर चला गया। भाभी की साँसें तेज़ हो गई थीं।
“बस थोड़ा सा और…” मैंने कहा और पूरा लंड अंदर कर दिया।
“आह… मेरी गांड फट गई…” भाभी चीखीं।
मैंने रुककर उनके दूध दबाने शुरू किए। कुछ देर बाद भाभी को भी मज़ा आने लगा।
“अब ठीक है… थोड़ा हिलो…” भाभी ने कहा।
मैंने धीरे-धीरे अपना लंड अंदर-बाहर करना शुरू किया। भाभी को अब मज़ा आ रहा था।
“हाँ… अब मज़ा आ रहा है… और ज़ोर से करो…” भाभी बोलीं।
मैंने स्पीड बढ़ा दी। मैं उनकी गांड जोर-जोर से मार रहा था। चप-चप की आवाज़ गूंज रही थी।
“मेरी गांड फाड़ दो… इसे बड़ा कर दो… अपने लंड के लायक बना दो…” भाभी गंदी बातें कर रही थीं।
मैंने करीब पंद्रह मिनट तक उनकी गांड मारी। फिर मैंने लंड बाहर निकाला और उनके मुँह में दे दिया।
“चूसो इसे… अपनी गांड का स्वाद चखो…” मैंने कहा।
भाभी ने मेरा लंड चूसना शुरू किया। वो अपनी ही गांड का स्वाद ले रही थीं।
फिर मैंने उन्हें लिटाया और उनकी बुर में फिर से लंड डाल दिया। अब मैं उनके ऊपर लेटकर उन्हें चोद रहा था और उनके होंठ चूम रहा था।
“मैं तुमसे बहुत प्यार करती हूँ शैलू…” भाभी ने कहा।
“मैं भी आपसे बहुत प्यार करता हूँ भाभी…” मैंने कहते हुए उन्हें और तेज़ी से चोदना शुरू किया।
हम दोनों एक-दूसरे से लिपटे हुए थे। मैं उनकी बुर में अपना लंड अंदर-बाहर कर रहा था और वो मुझे कसकर पकड़े हुए थीं।
“और ज़ोर से… मुझे चोद-चोदकर खत्म कर दो…” भाभी चीख रही थीं।
मैंने पूरी ताकत से धक्के लगाए। बिस्तर की चरपराहट तेज़ हो गई थी। भाभी बार-बार झड़ रही थीं।
“मैं फिर से झड़ने वाली हूँ… तुम भी मेरे साथ झड़ो…” भाभी ने कहा।
मैंने ज़ोर-ज़ोर से धक्के लगाए और फिर हम दोनों एक साथ झड़ गए। मेरा माल उनकी बुर में भर गया और उनका रस मेरे लंड पर आ गया।
हम दोनों थककर एक-दूसरे से लिपटे हुए सो गए।
सुबह जब मेरी आँख खुली तो भाभी मेरे बगल में लेटी हुई थीं। उनका बदन बिल्कुल नंगा था और मेरे साथ लिपटा हुआ था।
मैंने उनके माथे पर चूमा। भाभी की आँख खुली और उन्होंने मुस्कुराते हुए कहा, “गुड मॉर्निंग शैलू।”
“गुड मॉर्निंग भाभी,” मैंने कहा, “कैसा लगा आपको?”
“बहुत अच्छा… तुमने मुझे इतना खुश किया कि मैं बता नहीं सकती…” भाभी ने कहा।
मैंने उनके दूध पर हाथ रखा। वो फिर से गरम होने लगीं।
“फिर से करोगे?” भाभी ने पूछा।
“ज़रूर,” मैंने कहा और उनके ऊपर चढ़ गया।
इस बार मैंने उन्हें बहुत धीरे-धीरे और प्यार से चोदा। मैं उनके हर हिस्से को चूमता हुआ नीचे गया और उनकी बुर चाटी। फिर मैंने अपना लंड उनकी बुर में डाला।
“आज बहुत प्यार से चोदो…” भाभी ने कहा।
मैंने धीरे-धीरे धक्के लगाए। हम दोनों एक-दूसरे को देखते हुए मज़े ले रहे थे। मैं उनके होंठ चूमता और फिर धक्का लगाता।
“तुम मेरे हो शैलू… सिर्फ़ मेरे…” भाभी ने कहा।
“हाँ भाभी, मैं सिर्फ़ आपका हूँ…” मैंने कहा।
हम दोनों एक साथ झड़े। यह सुबह की चुदाई बहुत ही रोमांटिक थी।
भैया अगले दिन वापस आ गए। लेकिन अब मैं और भाभी के बीच एक रिश्ता बन चुका था।
जब भी भैया ऑफिस जाते, हम दोनों एक-दूसरे के बाहों में आ जाते।
एक दिन भैया फिर से टूर पर गए। इस बार भाभी ने मुझे फोन करके बुलाया।
“शैलू, जल्दी आओ… मुझे तुम्हारी बहुत याद आ रही है…” भाभी ने फोन पर कहा।
मैं तुरंत घर पहुँचा। भाभी ने एक सेक्सी साड़ी पहनी हुई थी जिसमें से उनका पेट और कमर दिख रही थी।
“आज मैं तुम्हें एक सरप्राइज़ दूँगी…” भाभी ने कहा।
उन्होंने मुझे सोफे पर बैठने को कहा और फिर डांस करने लगीं।
वो अपनी साड़ी हटाती जा रही थीं। पहले पल्लू गिरा, फिर ब्लाउज़ उतारा।
मैं उन्हें देखकर मस्त हो रहा था। फिर उन्होंने अपनी साड़ी भी खोल दी। अब वो सिर्फ़ ब्रा और पैंटी में थीं।
“कैसी लग रही हूँ?” भाभी ने पूछा।
“बहुत सेक्सी…” मैंने कहा।
वो मेरे पास आईं और मेरे कपड़े उतारने लगीं। जब मेरा लंड बाहर आया तो उन्होंने उसे चूसना शुरू कर दिया।
“उम्म्म… मेरे लंड को चूसो…” मैंने कहा।
भाभी बहुत अच्छे से चूस रही थीं। फिर वो ऊपर आईं और अपनी ब्रा उतार दी। उनके दूध मेरे सामने थे।
“इन्हें चूसो…” भाभी ने कहा।
मैंने उनके दूध पकड़े और चूसने लगा। उनके निपल्स को काट-काटकर मज़े ले रहा था।
“आह… बहुत मज़ा आ रहा है…” भाभी बोलीं।
फिर मैंने उन्हें सोफे पर बैठाया और उनकी पैंटी उतार दी। उनकी बुर पूरी तरह से गीली थी।
मैंने अपना लंड उनकी बुर में डाल दिया और उन्हें सोफे पर ही चोदने लगा।
“चोदो… और ज़ोर से…” भाभी चीख रही थीं।
मैंने उनके दूध दबाते हुए जोर-जोर से धक्के लगाए। सोफे की आवाज़ तेज़ हो गई थी।
“मेरी बुर को फाड़ दो… इसे अपने लंड से भर दो…” भाभी गंदी बातें कर रही थीं।
मैंने उन्हें घुमाकर उनकी गांड मारी। फिर उनकी बुर मारी। बार-बार पोज़िशन बदल-बदलकर मैं उन्हें चोद रहा था।
“तुम तो बहुत अच्छा चोदते हो… मुझे बहुत खुश कर देते हो…” भाभी ने कहा।
आखिर में मैंने अपना माल उनके दूध पर छोड़ दिया। वो मेरे माल से लथपथ होकर लेट गईं।
कुछ देर बाद भाभी ने कहा, “चलो नहाते हैं।”
हम दोनों बाथरूम में गए। भाभी ने शावर चालू किया और हम दोनों पानी में भीगने लगे।
भाभी ने साबुन लिया और मेरे बदन पर लगाने लगीं। वो मेरे लंड को साबुन लगाकर सहला रही थीं। मेरा लंड फिर से खड़ा हो गया।
“इसे फिर से तैयार हो गया?” भाभी ने हँसते हुए पूछा।
“आपके सामने तो हमेशा तैयार रहता है,” मैंने कहा।
मैंने भी साबुन लिया और उनके बदन पर लगाया।
मैं उनके दूध दबा रहा था और साबुन लगा रहा था। फिर मैंने उनकी बुर पर भी साबुन लगाया।
“चलो अंदर चलते हैं…” भाभी ने कहा।
हम बाथटब में बैठ गए। भाभी मेरे ऊपर बैठ गईं और अपनी बुर में मेरा लंड ले लिया।
पानी में हम दोनों एक-दूसरे को चोद रहे थे। भाभी ऊपर-नीचे उछल रही थीं और पानी छलक रहा था।
“पानी में और भी मज़ा आ रहा है…” भाभी ने कहा।
“हाँ… बहुत अच्छा लग रहा है…” मैंने कहा।
मैंने उनके दूध पकड़े और ज़ोर-ज़ोर से ऊपर से नीचे करने लगा। भाभी चीख-चीखकर मज़े ले रही थीं।
“चोदो… और चोदो… मुझे पानी में ही झड़ा दो…” भाभी चिल्लाईं।
हम दोनों एक साथ झड़े। पानी में हमारा माल मिल गया।
नहाने के बाद हमने नाश्ता किया। फिर भाभी रसोई में खाना बनाने लगीं। मैं भी उनके पीछे-पीछे गया।
भाभी ने सिर्फ़ एक टी-शर्ट पहनी हुई थी और नीचे कुछ नहीं। उनकी गांड बाहर से दिख रही थी।
मैंने पीछे से जाकर उनकी गांड पकड़ ली।
“क्या कर रहे हो… खाना बना रही हूँ…” भाभी ने कहा।
“बनाने दो… मैं भी तो बना रहा हूँ…” मैंने कहते हुए अपना लंड उनकी गांड पर रख दिया।
“पागल हो…” भाभी ने मुस्कुराते हुए कहा।
मैंने उनकी टी-शर्ट उठाई और उनकी बुर में लंड डाल दिया। वो आगे झुकी हुई थीं और मैं पीछे से चोद रहा था।
“आह… रसोई में…” भाभी ने कहा।
“हाँ… हर जगह चोदूँगा आपको…” मैंने कहा।
मैं उनकी कमर पकड़कर जोर-जोर से धक्के लगा रहा था। उनके दूध आगे-पीछे हिल रहे थे।
“बहुत अच्छा लग रहा है… और ज़ोर से…” भाभी ने कहा।
मैंने पूरी ताकत से धक्के लगाए। रसोई में चप-चप की आवाज़ गूंज रही थी।
“मेरी बुर को रसोई में ही चोद-चोदकर बड़ा कर दो…” भाभी गंदी बातें कर रही थीं।
मैंने करीब दस मिनट तक उन्हें रसोई में चोदा और फिर उनके मुँह में अपना माल छोड़ दिया।
रात को हम दोनों फिर से बिस्तर पर आए। इस बार हमने बहुत सारे तरीके आजमाए।
पहले मैंने उन्हें मिशनरी पोज़िशन में चोदा। फिर डॉगी स्टाइल में। फिर काउगर्ल। फिर साइड वेज़।
हर पोज़िशन में मैं उन्हें 15-15 मिनट तक चोदता। भाभी बार-बार झड़ रही थीं।
“आज तो मेरी बुर की चटनी बना दी तुमने…” भाभी ने थककर कहा।
“अभी तो और बाकी है…” मैंने कहा।
मैंने उनकी गांड भी मारी। फिर उनके मुँह में भी दिया। हर छेद का मैंने पूरा मज़ा लिया।
रात भर हम दोनों चोदते रहे। सुबह जब उठे तो दोनों बहुत थके हुए थे लेकिन बहुत खुश थे।
अब हम दोनों का रिश्ता बहुत मज़बूत हो गया है।
भैया जब भी बाहर जाते हैं, हम दोनों एक-दूसरे के साथ समय बिताते हैं।
भाभी अब बहुत खुश रहती हैं। उनके चेहरे पर वो उदासी नहीं रही जो पहले थी।
मैंने उन्हें अपने लंड से वो खुशी दी जो उन्हें चाहिए थी।
“शैलू, तुम मेरे लिए सब कुछ हो…” भाभी अक्सर कहती हैं।
“और आप मेरे लिए…” मैं भी कहता हूँ।
हम दोनों का यह रिश्ता प्यार और चुदाई से भरा हुआ है।
मैं हमेशा उन्हें खुश रखूँगा और जब भी वो चाहेंगी, मैं उन्हें अपने 10 इंच के लंड से चोदकर खुश करूँगा।
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Very nice 🙂