स्कूल फ्रेंड की कुंवारी बुर की चुदाई

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यह कहानी गौतम की है जो अपनी दोस्त सुनिधि के साथ मनाली की यात्रा पर जाता है। एक दुर्घटना में गौतम के लंड पर चोट लग जाती है और सुनिधि उसकी देखभाल करती है। इसके बाद दोनों के बीच नज़दीकियाँ बढ़ती हैं और अंततः वे शारीरिक संबंध बनाते हैं। यह जानने के लिए कि कैसे एक दोस्त अपनी दोस्त की बुर चोदता है, पूरी कहानी पढ़ें।

सभी दोस्तों को मेरा नमस्कार! मैं आप सबको अपनी सच्ची कहानी बताने जा रहा हूं।

मेरा नाम गौतम है और मेरी दोस्त का नाम सुनिधि है।

मैं और सुनिधि कॉलेज से दोस्त थे। हम दोनों एक ही क्लास में पढ़ते थे। धीरे-धीरे हमारी दोस्ती गहरी होने लगी।

मैं उसे देखकर बहुत खुश होता था। उसके गोल दूध और मोटी गांड देखकर मेरा लंड खड़ा हो जाता था।

मैं रोज़ उसके बारे में सोचता था। रात में मैं उसके दूधों के बारे में सोचकर मुठ मारता था।

मुझे उसे पाने की इच्छा होती थी लेकिन हिम्मत नहीं होती थी। वो मुझसे दूर रहती थी और कम ही बात करती थी।

एक दिन मैंने सोचा कि क्यों ना सुनिधि को अपने साथ मनाली घुमाने ले जाऊं।

मैंने उससे पूछा तो वो भी जाना चाहती थी। फिर मैंने अपने माता-पिता से इस बारे में बात की और सुनिधि के परिवार से भी बात कर ली।

चूंकि हम दोनों काफी सालों से अच्छे दोस्त थे तो दोनों के ही परिवारों को कोई आपत्ति नहीं थी। हमारे परिवार वालों की भी आपस में खूब बनती है।

तो मैं और सुनिधि अगले दिन मनाली के लिए निकल पड़े। मनाली में हम एक होटल में ठहरे। होटल में मुझे देख कर सब बहुत खुश थे।

सफर की थकान के कारण उस दिन हम कहीं घूमने भी नहीं जा सके। फिर रात का खाना खाकर हम लोग सो गए।

अगले दिन सुबह मैं सुनिधि को मनाली के खूबसूरत जंगलों में घुमाने के लिए ले गया।

बीच में मुझे पेशाब लगी तो मैं सुनिधि को वहीं छोड़कर पेशाब करने चला गया। मैं थोड़ी दूरी पर था।

पेशाब करते हुए बाद में मेरा ध्यान गया कि यहां तो एक पत्थर है। मेरा पेशाब पत्थर पर चला गया था।

मैं वहां से हटने ही वाला था कि एक सांप का बच्चा पत्थर के नीचे से बाहर निकल आया। ये देखकर मैं थोड़ा डर गया और हड़बड़ी में चेन बंद करके वहां से भागा।

हड़बड़ी में चेन खींचते हुए मेरे लंड की त्वचा चेन में फंस गई।

मुझे बहुत दर्द हो रहा था लंड में … लेकिन मैं सुनिधि को कुछ बता भी नहीं सकता था। हम लोग वहां से वापस आ गए।

होटल आते ही मैं सीधा अपने कमरे में आया और जल्दी से बैठकर चेन में से लंड की खाल छुड़ाने लगा। इतने में सुनिधि भी मेरे पीछे पीछे रूम में आ गई।

वो कहने लगी कि अभी तो करके आए थे, फिर से लगी है क्या?

मैं एकदम से हड़बड़ा गया और बोला- नहीं यार, चेन फंस गई है, बहुत दर्द हो रहा है।

फिर मैं मुंह घुमाकर दोबारा से लंड की त्वचा को चेन में से निकालने लगा। लेकिन दर्द इतना हो रहा था कि मैं उसको निकाल ही नहीं पा रहा था।

फिर सुनिधि मेरे पास आई और एकदम से चेन खींचकर खोल दी।

लंड की त्वचा तो निकल गई लेकिन कट भी गई; वहां से खून भी निकलने लगा। ये देख सुनिधि भी थोड़ी घबरा गई।

फिर वो जल्दी से दौड़कर दवाई लेकर आई और लंड को साफ कर उस पर दवाई लगाने लगी।

मुझे इतना दर्द हो रहा था कि मैं वहीं बेड पर पीछे होकर लेट गया।

सुनिधि मेरे लंड पर दवाई लगा रही थी। उसने लंड को हाथ में पकड़ लिया था।

उसके नर्म कोमल हाथ का स्पर्श मुझे महसूस हो रहा था।

एक तरफ जहां लंड का दर्द कम हो रहा था, वहीं दूसरी तरफ उसमें तनाव भी आने लगा।

अब मैं उसको रोक भी नहीं सकता था। बस मैं चुपचाप लेटा रहा और फिर सुनिधि दवाई लगाकर चली गई।

फिर मुझे लेटे हुए ही नींद आ गई। कुछ घंटे बाद मैं उठा तो लंड में आराम था।

अब सुनिधि की ओर मेरे ख्याल बदलने लगे थे। मैं उसको हवस की नजर से देखने लगा था।

अब मजाक-मजाक में मैं उसके दूधों को छूने की कोशिश करता था, कभी-कभी उनको दबा भी देता था।

सुनिधि की गांड को भी मैं छूने की कोशिश करता था। वो भी इन सबका कोई विरोध नहीं करती थी।

अगले दिन दोपहर का वक्त था और मैं नहाने के लिए जाने लगा।

मुझे नंगा होकर नहाने की आदत है। मैंने तौलिया लपेटा हुआ था और उसे खोलकर मैं बाहर फेंक कर अंदर नंगा ही घुस गया।

जैसे ही मैं घुसा तो पाया कि सुनिधि पहले से ही नंगी होकर नहा रही है। वो अपनी बुर को रगड़ रही थी और दूधों को मसल रही थी।

उसकी नजर मुझ पर पड़ी तो वह घबरा गई। वो दूधों और बुर को हाथ से छुपाने की कोशिश करते हुए बोली- आने से पहले आवाज नहीं दे सकते थे?

इधर मैं उसके नंगे जिस्म को देखकर जैसे पत्थर का हो गया था।

मैंने कभी अपने सामने किसी लड़की को नंगी नहीं देखा था।

उसकी गोरी और गीली बुर, कसे हुए दूध और नंगी गांड देखकर मैं तो पागल ही हो गया।

फिर उसने हाथ लगाकर मुझे हिलाया और बोली- बाहर जाओ अब, यहीं खड़े रहोगे क्या?

लेकिन मैं जैसे कुछ सुन ही नहीं रहा था, उसका नंगा जिस्म मुझे उसकी ओर खींच रहा था।

मैंने आगे बढ़कर उसको बांहों में भींच लिया और उसको बेतहाशा चूमने लगा।

वो मुझे पीछे हटाने लगी लेकिन मैंने उसको नहीं छोड़ा।

मेरा नंगा लंड उसकी नंगी बुर से टकरा रहा था और उसमें बिजली की तेजी से तनाव आने लगा।

देखते ही देखते लंड एकदम से तनकर उसकी बुर के होठों से टकराने लगा।

अब मेरा रुक पाना मुझे मुश्किल लग रहा था।

मैंने उसको एक हाथ से अपने आगोश में ही रखा और दूसरे हाथ को नीचे ले जाकर उसकी बुर को तेजी से रगड़ने लगा।

वो मुझे हटाते हुए कहने लगी- क्या कर रहे हो गौतम! पागल हो गए हो क्या, कोई देख लेगा।

लेकिन मैं कुछ नहीं सुन पा रहा था। मैं उसकी बुर में उंगली दे दी और उसके दूधों पर मुंह लगाकर चूसने लगा।

मैंने उसको एक हाथ से कसकर अपने से चिपका रखा था।

कभी मैं उसकी गांड दबा देता तो कभी बुर में उंगली देकर अंदर बाहर करने लगता।

ऊपर से उसके दूधों को मैं बारी बारी से एक-एक करके चूस रहा था।

इस बीच सुनिधि को भी मजा सा आने लगा। धीरे-धीरे उसका विरोध बंद हो गया और वो शांत होती चली गई। अब मैं आराम से उसकी बुर में उंगली चलाते हुए उसके दूधों को चूस रहा था।

सुनिधि अब मेरा साथ देने लगी थी। हम दोनों के होंठ मिल गए और हम एक दूसरे के जिस्मों को सहलाते हुए होंठों का रस खींचने लगे। सुनिधि की बुर अभी भी गीली थी।

अब मैंने उसको अपनी गोद में उठाया और बाहर लेकर आ गया।

मैंने उसे बेड पर लेटाया और उसकी टांगों को फैलाकर उसकी गीली-रसीली बुर को चाटने लगा।

उसकी बुर से नमकीन रस निकलने लगा जिसको चाटने में मुझे और भी ज्यादा स्वाद आने लगा। बुर एकदम गुलाबी थी और उसका दाना जैसे केक पर टॉपिंग था।

मैं बीच बीच में बुर के दाने को भी सहलाने लगता था जिससे उसकी सिसकारी और तेज हो जाती थी। मैंने फिर जीभ देकर अंदर ही अंदर बुर को चोदना शुरू किया।

उसकी बुर के रस का स्वाद लेते हुए मैं जीभ को अंदर तक घुसा रहा था।

कुछ ही देर में उसका बदन अकड़ गया और उसने ढेर सारा पानी छोड़ दिया।

उस पानी को मैं साथ की साथ ही पीता चला गया। सुनिधि अब ठंडी पड़ गई। लेकिन मेरा लौड़ा तनकर दर्द करने लगा था।

मैंने उसको लंड को मुंह में लेने के लिए कहा। पहले तो वो मना करने लगी लेकिन मैंने जिद की तो वो मान गई।

फिर मैंने उसको जमीन पर घुटनों के बल अपने लंड के सामने बैठा लिया।

मैंने लंड उसके मुंह में दे दिया और वो धीरे-धीरे उसे चूसने लगी। मुझे बहुत मजा आने लगा।

ऐसा लग रहा था कि दो मिनट में ही माल छूट जाएगा इसलिए मैंने बीच में ही उसको रोका और बेड पर ले जाकर फिर से उसकी बुर को चाटने लगा। फिर कुछ देर की बुर चटाई के बाद मैं भी बेड पर ही आ गया।

हम दोनों 69 में लेट गए और एक दूसरे के सेक्स अंगों को चाटने-चूसने का मजा देने लगे। सुनिधि भी अब मस्त तरीके से मेरा लंड चूस रही थी।

मुझसे रुका न गया और मैं उसको नीचे लेटाकर उसके ऊपर चढ़ गया। मैंने गांड उसकी छाती पर रखी और लंड उसके मुंह में दे दिया और धक्के देने लगा।

मुझे उसके मुंह को चोदने में बहुत मजा आ रहा था। वो भी मेरे चूतड़ों को दबाते हुए लंड को पूरा गले तक लेने की कोशिश कर रही थी।

उसने मुझे बुर की ओर इशारा किया तो मैं समझ गया कि वो भी बुर में दोबारा से मजा लेना चाहती है।

मैंने पीछे हाथ ले जाकर उसकी बुर को सहलाना शुरू कर दिया, कभी उंगली देकर चोदने लगा।

उसकी गीली-गर्म बुर में उंगली देने में भी बहुत मजा आ रहा था। उधर मेरा लंड उसके मुंह में था जो मुझे जन्नत का मजा दे रहा था।

बस कुछ ही देर में मेरा माल निकल गया और इतने में ही सुनिधि दोबारा से झड़ गई। हम दोनों ने ही एक दूसरे के माल को पी लिया।

कुछ देर शांत पड़े रहने के बाद फिर से हवस की चिंगारी उठी। हम फिर से एक दूसरे के होंठों को चूसने लगे।

चूंकि होटल में कोई नहीं था तो बस हम इस चुदाई का पूरा मजा लेना चाहते थे।

एक बार फिर से हम लोग गर्म हो गए और अब बारी उसकी बुर चोदने की थी। मैंने उसको पीठ के बल लेटा लिया और लंड को बुर पर लगा दिया।

मैं धक्का देने लगा तो पता चला बुर काफी टाइट है इसलिए लंड फिसल रहा था।

फिर उसने खुद ही मेरा लंड पकड़ कर अपनी बुर के छेद पर सेट करवा लिया।

अब मैंने तेज झटका दिया और सुपारा उसकी बुर में उतार दिया। वो छटपटा उठी और दर्द के मारे उसकी आंखों में पानी आ गया।

मैं थोड़ा रुका और फिर से उसको चूमने लगा। उसको चूमते हुए मैं उसके दूधों को दबाने और चूसने लगा।

जब वो थोड़ी शांत हुई तो मैंने फिर से धक्का मारा और लंड उसकी बुर में अंदर सरका दिया।

उसे दर्द हुआ लेकिन पहले से कम! धीरे-धीरे मैं उसको चोदने लगा।

कुछ देर में ही सुनिधि को भी चुदाई में पूरा मजा आने लगा। अब वो गांड मटका कर अपनी बुर मरवाने लगी।

हम दोनों की मादक सिसकारियां पूरे रूम में गूंज रहीं थीं। कुछ देर चोदने के बाद मैं अब नीचे लेट गया और सुनिधि मेरे लंड पर बैठ गई।

वो लंड को बुर में लेकर उछलने लगी। ऐसा लग रहा था जैसे कोई पोर्न फिल्म चल रही हो। धीरे-धीरे उसकी स्पीड बढ़ने लगी। वो लंड को गहराई तक बुर में ले जा रही थी।

लगभग 10 मिनट की चुदाई के बाद उसकी बुर ने पानी छोड़ दिया और मेरा माल भी तभी निकल गया। वो मेरे ऊपर ही ढेर हो गई और मैंने उसको बांहों में कस लिया।

शाम को मुझे सुनिधि ने ही जगाया। उसके बाद हम दोनों बाथरूम में गए। वो ठीक से चल नहीं पा रही थी। हम नहाए और फिर नाश्ता किया।

मैंने सुनिधि को दर्द की दवाई दिलवाई और गर्भ न ठहरने के लिए भी दवाई दिलवाई। हम वहां तीन-चार दिन और रुके और चुदाई का पूरा मजा लेते रहे।

उसके बाद हम लोग घर वापस आ गए। मनाली में चुदाई का तो हमने पूरा मजा लिया लेकिन शहर वापस आने के बाद इतना मौका नहीं मिल पाता था।

बस कभी-कभार जब उसके घर में कोई नहीं होता था या मेरे घर में सब बाहर गए होते थे तो हमें तब ही चुदाई का मौका मिलता था।

इस तरह से सुनिधि के साथ चुदाई का ये मजा अभी तक मुझे मिल रहा है। हम दोनों अच्छे दोस्त हैं इसलिए किसी को शक भी नहीं होता है।

आज हम दोनों की शादी हो गई है और हम पति-पत्नी के रूप में बहुत खुश हैं। हम रोज़ मज़े करते हैं और हमारा यह रिश्ता आज भी जारी है।

नोट: यहां पोस्ट की गई सभी कहानियां केवल मनोरंजन के उद्देश्य से प्रस्तुत की गई हैं। कृपया इन्हें वास्तविक जीवन से जोड़कर न देखें। कहानी में दर्शाए गए किसी भी दृश्य, घटना या चित्र का वास्तविक जीवन में प्रयोग करना हानिकारक हो सकता है। इसके लिए न तो कहानी के लेखक और न ही प्रस्तुतकर्ता जिम्मेदार होंगे। इसलिए कृपया अपनी समझ, बुद्धि और विवेक का उपयोग करें।

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