makan malik chudai sex story
एक युवा विवाहिता जो अपने शराबी पति से तंग आ चुकी है, उसकी मुलाकात एक अमीर व्यवसायी से होती है जो उसकी हर मदद करता है। जानिए कैसे एक रात की घटना ने उन दोनों को एक-दूसरे के करीब लाया और क्यों वो औरत अपनी शादी तोड़कर उस व्यवसायी की रखैल बनने को तैयार हो गई। यह कहानी वासना, मजबूरी और नई शुरुआत की है।
मेरा नाम रिंकी है और मैं एक छोटे से शहर की रहने वाली हूँ। मेरी उम्र सत्ताईस साल है और मेरी शादी को दो साल हो चुके हैं।
मेरे पति राजेश एक निजी कंपनी में मशीन ऑपरेटर का काम करते हैं।
उनकी नौकरी शिफ्ट में होती है और वो शराब के बहुत बड़े आदी हैं।
अक्सर तो वो शराब पीकर ही नौकरी पर चले जाते हैं और कई बार उनकी हालत देखकर मुझे बहुत शर्म महसूस होती है।
मेरे पति की पहचान के एक मकान मालिक महेश जी हैं जो कभी-कभी हमारे घर पर आते हैं।
महेश जी करीब पैंतालीस साल के हैं और उनका अपना बड़ा सा रियल एस्टेट का बिजनेस है।
वो देखने में बहुत आकर्षक हैं, उनकी हाइट छह फुट है और रंग गेहुँआ है।
उनका बदन एकदम फिट है और उनमें अमीरी की वो खुशबू है जो किसी भी औरत को उनकी तरफ खींच ले।
मैंने BCA की पढ़ाई की है लेकिन मेरे पति नहीं चाहते थे कि मैं नौकरी करूँ।
इसलिए मैं घर में ही रहती हूँ और घरेलू काम करती हूँ।
मेरा रंग बहुत गोरा है और मेरा फिगर 36-30-36 का है।
मेरे स्तन बड़े और गोल हैं, कमर पतली और कूल्हे भरे हुए हैं।
मेरे होंठ गुलाबी और छोटे हैं और चेहरा एकदम मासूम सा लगता है।
जब भी महेश जी हमारे घर आते हैं, वो मुझे बड़ी अजीब से नज़रों से देखते हैं।
जब मैं चाय लेकर आती हूँ तो वो मेरे स्तनों पर नज़रें गड़ाए रहते हैं और जब मैं वापस जाती हूँ तो वो मेरी गांड को घूरते हैं।
मुझे यह सब पता होता है लेकिन मैं कुछ नहीं कहती क्योंकि मेरे पति उनसे कुछ भी नहीं कह सकते।
उन्हें डर है कि अगर महेश जी नाराज़ हो गए तो वो उनकी नौकरी से हटवा देंगे।
महेश जी हमेशा मुझसे कहते हैं कि अगर मैं चाहूँ तो वो मुझे कहीं अच्छी नौकरी पर लगवा देंगे।
लेकिन मेरे पति इसके खिलाफ हैं। वो चाहते हैं कि मैं घर में ही रहूँ और उनकी सेवा करती रहूँ।
लेकिन वो खुद मेरी कोई सेवा नहीं करते।
रात को जब वो नौकरी से आते हैं तो शराब के नशे में धुत होकर सीधे सो जाते हैं।
मेरी शारीरिक ज़रूरतें पूरी तरह से अनदेखी हो जाती हैं।
मैंने कई बार कोशिश की कि वो मुझे समय दें, मुझे प्यार करें, लेकिन वो हमेशा थके हुए या नशे में रहते हैं।
मेरा शरीर जवान है और मुझे भी चाहिए कोई जो मुझे प्यार करे, मेरी परवाह करे।
और महेश जी वो सब करते थे जो मुझे चाहिए था। वो मुझे सम्मान देते थे, मेरी तारीफ़ करते थे, मेरे हाथ में पैसे देते थे।
धीरे-धीरे मैं भी महेश जी को देखने लगी। उनकी बातें, उनका व्यवहार, उनकी अमीरी – सब मुझे आकर्षित करता था।
जब वो मुझे देखते थे तो मुझे ऐसा लगता था कि मैं किसी रानी से कम नहीं हूँ।
उनकी नज़रों में वो चाहत देखकर मेरा दिल धड़कने लगता था।
मैं जानबूझकर उनके सामने झुककर काम करती थी ताकि वो मेरे स्तनों को देख सकें।
मैं जानती थी कि यह गलत है लेकिन मेरा शरीर मुझे कुछ और ही कह रहा था।
एक दिन की बात है जब मेरे पति शराब पीकर नौकरी पर गए और रास्ते में उनका किसी से झगड़ा हो गया।
उन्होंने गुस्से में उस आदमी की कार के शीशे तोड़ दिए और फिर डरकर घर वापस आ गए।
मैं उनकी यह हालत देखकर बहुत डर गई। मुझे समझ नहीं आ रहा था कि क्या करूँ।
अगर वो लोग यहाँ आ गए तो मेरे पति की बहुत पिटाई होगी और पुलिस भी आ सकती है।
मैंने तुरंत महेश जी को फोन किया। वो आधे घंटे में हमारे घर पहुँचे।
उन्होंने मेरे पति की हालत देखी और समझ गए कि क्या हुआ है।
उन्होंने मेरे पति से कहा कि वो कुछ दिनों के लिए बाहर चले जाएं और वो इस मामले को संभालेंगे।
उन्होंने मेरे पति को कुछ पैसे दिए और अपने फार्महाउस पर भेज दिया।
मैं रो रही थी क्योंकि मुझे बह डर लग रहा था।
महेश जी मेरे पास आए और मेरे कंधे पर हाथ रखा। उन्होंने मेरे आँसू पोंछे और मेरा सिर अपने सीने पर रख लिया।
उनकी गर्मी मुझे सुकून दे रही थी।
वो मेरी पीठ सहला रहे थे और मुझे चुप कराने की कोशिश कर रहे थे।
“कोई बात नहीं रिंकी, मैं हूँ ना तुम्हारे साथ। तुम चिंता मत करो,” महेश जी ने कहा।
मैं उनकी बाहों में थी और मुझे बहुत अच्छा लग रहा था। उनका हाथ धीरे-धीरे मेरी पीठ से नीचे की तरफ जा रहा था।
अब उनका हाथ मेरी गांड पर था और वो बहुत प्यार से मेरी गांड को सहला रहे थे।
मैं समझ गई कि महेश जी मुझे चोदना चाहते हैं और मैं भी इसके लिए तैयार थी।
मैंने मौका देखकर उनसे थोड़ा सा अलग हो गई और कहा, “महेश जी, आपने हमारी इतनी मदद की है कि मैं आपको बता नहीं सकती। अब मैं आपका यह एहसान कैसे उतारूँगी?”
महेश जी ने कहा, “इसमें एहसान की क्या बात है? तुम्हारी मदद करना तो मेरा फ़र्ज़ है।”
मैंने कहा, “महेश जी, आपने हमारे लिए बहुत कुछ किया है और अब मेरे पास आपको देने के लिए सिर्फ़ यह मेरा जिस्म ही बचा है।”
यह कहकर मैंने अपनी साड़ी का पल्लू थोड़ा सा नीचे गिरा दिया।
महेश जी की आँखें चमक उठीं।
वो बोले, “रिंकी, मुझे भी तुम बहुत पसंद हो। लेकिन ऐसे सिर्फ़ पल्लू हटाने से क्या होगा?”
मैंने कहा, “महेश जी, मेरा पल्लू हटाना तो सिर्फ़ एक शुरुआत है। आप बेडरूम में चलिए तो सही, फिर देखिए मैं आपके लिए कैसे नंगी होती हूँ।”
मेरे इतना कहते ही महेश जी ने झट से मुझे अपनी गोद में उठाया और बेडरूम में ले जाकर बेड पर पटक दिया।
वो मुझे नंगी करने का काम शुरू कर दिया।
उन्होंने जल्दी से मेरी साड़ी को खींचकर उतार दिया और एक कोने में फेंक दिया।
फिर ब्लाउज को एक जोरदार झटका देकर फाड़ दिया, पेटीकोट का नाड़ा खोलकर उसे नीचे खींच दिया और उसे भी दूसरे कोने में फेंक दिया।
मेरी ब्रा और पैंटी को भी एक ही मिनट में खींचकर उतार दिया।
अब मैं पूरी तरह से नंगी थी। महेश जी मुझे देखकर पागल हो रहे थे।
उन्होंने कहा, “रिंकी, तुम अपनी दोनों टाँगें खोल दो। आज मैं भी तो देखूँ कि राजेश ने तुम्हारी चूत का ख्याल रखा है या फिर चोद-चोदकर तुम्हारी चूत को बड़ा कर दिया है।”
मैंने अपने दोनों पैरों को खोल दिया।
महेश जी मेरी चूत में उंगली डालकर ज़ोर-ज़ोर से हिलाने लगे।
मैं बिन पानी की मछली की तरह मचलने लगी और कराहने लगी।
मुझे उनका मेरी चूत में इस तरह से उंगली को लगातार आगे-पीछे करके ज़ोर-ज़ोर से हिलाना बहुत अच्छा लग रहा था।
मैं धीरे-धीरे गरम होने लगी थी और सिसकियाँ लेने लगी।
महेश जी कहने लगे, “वाह वाह, क्या मस्त बिल्कुल टाईट चूत है।
लगता है कि तू अभी तक सही ढंग से चुदी ही नहीं है।
तेरे पति तेरी चूत पर ज्यादा ध्यान नहीं देते और ना ही इसको अच्छी तरह से चोदते हैं।
लेकिन मैं आज इसको बहुत अच्छी तरह से चोदूँगा और तुझे चुदाई के पूरे मज़े भी दूँगा।”
फिर उन्होंने अपने कपड़े भी उतार दिए और अब उनका मोटा काला सा लंड ठीक मेरी आँखों के सामने था।
उनकी छाती बहुत मजबूत और चौड़ी थी और उस पर बहुत सारे काले बाल भी थे।
महेश जी ने आव देखा ना ताव और सीधे उनका लंड मेरी चूत में घुसेड़ दिया।
मैं इससे पहले कि ज़ोर से चीखती, उन्होंने अपने होंठों को मेरे होंठों पर रख दिया।
मुझे ऐसा महसूस हुआ कि जैसे महेश जी ने अपना लोहे का काला, गरम सरिया मेरी चूत में डाल दिया हो।
वो धीरे-धीरे अंदर-बाहर करने लगे और फिर जब मेरा दर्द थोड़ा कम हुआ तो उन्होंने मेरे होंठों से अपना मुँह हटाकर मेरे बूब्स के निप्पल को चूसना शुरू कर दिया।
वो मुझे नीचे से धक्के देकर चोद रहे थे और ऊपर से मेरे निप्पल को भी चूस रहे थे।
मैं खुशी से रो रही थी और उनसे चुदवा रही थी।
मेरी आँखों में आँसू थे लेकिन मुझे बहुत मज़ा आ रहा था।
इतना मज़ा मुझे अपनी दो साल की शादीशुदा ज़िंदगी में कभी भी नहीं आया था।
वो धक्के पे धक्के मारे जा रहे थे और मैं सिसकियों के साथ-साथ “ओह यस, आह, हाँ” की आवाज़ें किए जा रही थी और अपनी चुदाई के मज़े लिए जा रही थी।
दस मिनट के बाद उन्होंने मुझे डॉगी स्टाइल में आने को कहा और पीछे से जोरदार धक्के मारने लगे।
अब मैं किसी ऑडियो कैसेट की तरह दोनों साइड से बजाई जा रही थी, पहले सामने से और अब पीछे से।
डॉगी स्टाइल की पोजीशन बहुत सुखद थी और ताबड़तोड़ चुदाई के लिए बहुत अच्छी थी।
वो बहुत ज़ोर-ज़ोर से मुझे चोदे जा रहे थे और मैं “महेश जी प्लीज़ बस करो, अह्ह्ह्ह, उह्ह्हह्ह, महेश जी प्लीज़ थोड़ा धीरे करो, आअहह, ऊईईईईई” दर्द से करहाकर चिल्ला रही थी।
एक बूढ़ा काला कुत्ते जैसे एक छोटी सी सफेद बिल्ली को चोद रहा हो, ऐसा नज़ारा हो गया था।
फिर महेश जी के ज़ोर-ज़ोर के झटके अब मुझे बता रहे थे कि उनका झड़ने का टाइम करीब आ गया है।
मैंने उनसे कहा कि अंदर ही डाल दो, मैं तुमसे एक बच्चा चाहती हूँ।
उन्होंने कुछ देर बाद जोरदार धक्के मारकर अपना सारा गरम-गरम वीर्य मेरी चूत में डाल दिया।
उसके मेरी चूत के अंदर गिरते ही मुझे ऐसा लगा कि जैसे मेरी चूत में गरम वीर्य का सुनामी आ गया हो।
मेरी पूरी चूत उनके वीर्य से भर गई और फिर वो बेड पर लेट गए और ज़ोर-ज़ोर से हाँफने लगे।
अब मेरी साँसें भी थोड़ी ऊपर-नीचे हो रही थीं।
महेश जी ने कहा, “रिंकी, मैं तुम्हें अपने पास रखना चाहता हूँ। क्या तुम मेरी रखैल बनोगी?”
मैंने कहा, “महेश जी, आपने जिस वक़्त मेरे घर खर्च के लिए मुझे पैसे दिए थे, मैंने तो उसी वक़्त सोच लिया था कि मैं अब हमेशा आपकी रंडी बनकर रहूँगी। अब आप जब चाहे, जैसे चाहे मुझे चोद सकते हैं। बस आप मेरे पति को सम्भाल लेना।”
हम दोनों हँस पड़े। उस दिन से मेरा और महेश जी का अफेयर शुरू हुआ।
मेरे पति चार दिन तक उनके फार्महाउस पर छुपे रहे और महेश जी मुझे दिन-रात लगातार चोदते रहे।
उन्होंने इन दिनों में मेरी चूत की चुदाई की तरफ से कोई भी कमी नहीं रखी।
उन चार दिनों में उनके काले, मोटे लंड ने मेरी कोमल चूत को घिसकर रख दिया।
मैं अपनी चूत को उनके लंड से चुदवाकर शांत करने की कोशिश करने लगी।
अब हालत यह है कि जब भी मेरे पति अपनी नौकरी पर जाते हैं तो महेश जी मेरे घर पर आते हैं और मेरी चुदाई करते हैं।
लेकिन अब मैंने एक फैसला किया है। मैं अपने पति को छोड़ दूँगी।
महेश जी ने मुझे अपने साथ रहने के लिए एक अलग फ्लैट खरीद दिया है।
वो रोज़ मुझसे मिलते हैं और मेरी हर ज़रूरत का ख्याल रखते हैं।
मैं अब उनकी पत्नी बनने वाली हूँ क्योंकि उन्होंने अपनी पत्नी से तलाक ले लिया है।
मेरे पति को यह सब पता चल गया था लेकिन वो कुछ नहीं कर सके क्योंकि उन्हें महेश जी से डर था।
अब मैं खुश हूँ, मेरी हर ज़रूरत पूरी होती है और मैं रोज़ रात को चुदाई का मज़ा लेती हूँ।
महेश जी मुझे बहुत प्यार करते हैं और हम दोनों जल्दी ही शादी करने वाले हैं।
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agr kushinagar(UP) mein kisi ladki ko chodwana hai to mujhe message kare. mere land ki size 6.4 inch hai
Very nice story 🙂