mummy group chudai sex
एक माँ का गुप्त काला सच – जब रात के अंधेरे में दो दोस्तों ने मिलकर एक बेबस औरत की वासना को भड़काया, तो शर्म की सारी हदें टूट गईं। पढ़िए कैसे एक मासूम मुलाकात बदल गई जंगली गैंगबैंग में…
नमस्ते दोस्तों, मैं आशा करता हूँ कि आप सभी लोग खैरियत से होंगे और सेक्स के मजे ले रहे होंगे।
मेरा नाम लकी है, उम्र 22 साल है। मैं उत्तर प्रदेश के लखनऊ से हूँ।
मेरी मम्मी का नाम शिवानी है और वे 42 साल की हैं। मेरे पापा एक प्राइवेट कंपनी में मैनेजर हैं और अक्सर टूर पर रहते हैं।
यह गर्मागर्म कहानी उन दिनों की है जब मैं अपनी गर्मी की छुट्टियों में अपने नाना के गाँव स्थित पुराने हवेली में गया हुआ था।
वहाँ नाना-नानी और मम्मी तीनों ही रह रहे थे क्योंकि पापा विदेश में एक प्रोजेक्ट पर गए हुए थे। मैं भी उनसे मिलने गया था।
मेरी मम्मी शिवानी एक बेहद खूबसूरत औरत हैं। उनका फिगर 38-32-40 है, मतलब उनके मम्मे बहुत बड़े हैं और गांड भी बहुत मोटी और गोल है।
उनकी उम्र 42 साल होने के बावजूद वे दिखती हैं 35 की। उनकी त्वचा गोरी और चिकनी है, और उनकी आँखों में एक अजीब सी चमक है जो किसी भी मर्द को अपनी तरफ खींच लेती है।
मेरी मम्मी हमेशा से ही बहुत खुली विचारों वाली औरत रही हैं। वो मेरे साथ भी हर बात शेयर करती हैं, चाहे वो सेक्स से जुड़ी हो या कुछ और।
उनकी शादी को 20 साल हो गए हैं, लेकिन पापा की बिजी शेड्यूल के कारण वो अक्सर अकेली रह जाती हैं।
नाना की हवेली एक बड़ी पुरानी इमारत है जिसमें कई कमरे हैं।
वहाँ एक बड़ा आंगन है और पीछे एक बगीचा भी है जहाँ अकेले में बैठा जा सकता है।
हवेली में नाना-नानी नीचे के हिस्से में रहते हैं और मम्मी ऊपर के एक बड़े कमरे में रहती थीं। मैं भी ऊपर ही एक कमरे में ठहरा था।
बात उस दिन की है जब मेरी मम्मी के दो पुराने दोस्त हवेली में आए। उनका नाम था नवनीत और राहुल।
दोनों की उम्र करीब 45-47 साल की थी और वे मम्मी के कॉलेज के दोस्त थे।
नवनीत एक जिम ट्रेनर था इसलिए उसका बदन बहुत फिट और मोटा था। राहुल एक बिजनेसमैन था जो हमेशा अच्छे कपड़ों में रहता था।
मैंने पहली बार जब उन्हें देखा तो वे मम्मी से बहुत खुली हुई बातें कर रहे थे।
मम्मी ने उस दिन हल्की नीली रंग की साड़ी पहनी थी जो उनके गोरे बदन पर बेहद खूबसूरत लग रही थी।
उनका ब्लाउज थोड़ा गहरा कट वाला था जिससे उनके मम्मों का क्लीवेज साफ दिख रहा था।
नवनीत और राहुल दोनों ही मम्मी को घूर रहे थे। उनकी नजरें बार-बार मम्मी की गांड और मम्मों पर जा रही थीं।
मम्मी भी उनसे बहुत खुलकर बात कर रही थीं, हँस रही थीं और कभी-कभी उनके हाथ पर हाथ रखकर कुछ कह रही थीं।
मैंने देखा कि नवनीत ने मम्मी की कमर पर हाथ रखा और कुछ कहा तो मम्मी शरमाकर हँसने लगीं।
राहुल भी मम्मी के गाल को छूकर कुछ बोला। मम्मी ने कोई विरोध नहीं किया, बल्कि उनकी आँखों में एक अजीब सी शरारत थी।
शाम को नाना-नानी किसी रिश्तेदारी में चले गए और घर में सिर्फ मैं, मम्मी और उनके दोनों दोस्त रह गए।
हम सबने साथ में खाना खाया और बातें करने लगे।
मम्मी ने थोड़ी शराब भी पी थी जिससे उनके गाल लाल हो गए थे और वो और भी ज्यादा खुशमिजाज हो गई थीं।
रात के करीब 10 बजे मैं अपने कमरे में सोने चला गया। मेरा कमरा मम्मी के कमरे के बगल में था और दोनों कमरों के बीच की दीवार में एक छोटी सी खिड़की थी जो अंदर से खुलती थी।
मैंने सोचा कि थोड़ी देर पढ़ाई कर लूँ इसलिए मैं लाइट जलाकर बैठ गया।
तभी मुझे बगल के कमरे से कुछ आवाजें आईं। मैंने खिड़की से झाँककर देखा तो मेरे होश उड़ गए।
मम्मी अपने कमरे में नवनीत और राहुल के साथ थीं। तीनों ही सोफे पर बैठे थे और मम्मी बीच में थीं।
नवनीत ने मम्मी के गाल पर हाथ फेरा और कुछ कहा। मम्मी ने शरमाते हुए उसका हाथ पकड़ लिया। राहुल ने मम्मी के बालों को सहलाया और उनके गले में हाथ डाल दिया। मम्मी ने अपनी आँखें बंद कर लीं और साँसें तेज होने लगीं।
मैं समझ गया कि आज कुछ होने वाला है। मेरा दिल जोर-जोर से धड़कने लगा। मैंने सोचा कि क्या मैं ये सब देखूँ या नहीं, लेकिन मेरे पैर जम गए और मैं वहीं खड़ा रह गया।
नवनीत ने मम्मी के होंठों पर अपने होंठ रख दिए। मम्मी ने पहले तो हल्का सा विरोध किया, लेकिन फिर वो भी उसका साथ देने लगीं।
राहुल ने पीछे से मम्मी की गर्दन पर चूमना शुरू कर दिया और उनके मम्मों को ब्लाउज के ऊपर से ही दबाने लगा।
मम्मी की साँसें तेज हो गई थीं और वो दोनों को अपने ऊपर छाने दे रही थीं।
नवनीत ने मम्मी का ब्लाउज खोलना शुरू किया और राहुल ने साड़ी का पल्लू हटा दिया। मम्मी अब सिर्फ ब्रा और पेटीकोट में थीं।
नवनीत ने मम्मी की ब्रा खोल दी और उनके बड़े-बड़े मम्मे बाहर आ गए।
वे उन्हें देखकर पागल हो गया। राहुल ने एक मम्मा अपने मुँह में भर लिया और चूसने लगा।
नवनीत ने दूसरे मम्मे को हाथ से मसलना शुरू कर दिया।
मम्मी आँखें बंद किए आहें भर रही थीं, “आह… धीरे… बहुत मजा आ रहा है…”
मैंने देखा कि नवनीत ने अपना एक हाथ मम्मी के पेटीकोट में डाल दिया।
मम्मी ने अपनी आँखें खोलीं और उसे देखा, लेकिन कोई विरोध नहीं किया। नवनीत मम्मी की चूत को उंगली से सहला रहा था।
राहुल ने मम्मी को खड़ा किया और उनका पेटीकोट उतार दिया। मम्मी अब सिर्फ पैंटी में थीं।
नवनीत ने उनकी पैंटी भी नीचे कर दी और मम्मी पूरी तरह नंगी हो गईं।
दोनों मर्दों ने मम्मी को बेड पर लिटा दिया। नवनीत ने मम्मी की टांगें फैलाईं और उनकी चूत को चाटना शुरू कर दिया।
राहुल ने अपना लंड बाहर निकाला और मम्मी के मुँह के पास ले आया।
मम्मी ने उसका लंड देखकर चौंकी, “बहनचोद, इतना मोटा लंड है तेरा!”
राहुल ने मुस्कुराते हुए कहा, “आज इसी से तेरी चूत की सील तोड़ूँगा रांड!”
मम्मी ने उसका लंड अपने मुँह में ले लिया और चूसने लगीं।
नवनीत नीचे उनकी चूत चाट रहा था और कभी-कभी उंगली भी अंदर बाहर कर रहा था।
कुछ देर बाद नवनीत ने अपने कपड़े उतारे। उसका लंड भी बहुत बड़ा था, करीब 8 इंच लंबा और मोटा। उसने मम्मी की चूत पर अपना लंड रगड़ा।
मम्मी ने राहुल का लंड मुँह से निकालकर कहा, “आह… धीरे से डालना… बहुत दिनों से चुदी नहीं हूँ… मेरी चूत टाइट है…”
नवनीत ने एक जोरदार धक्का दिया और उसका आधा लंड मम्मी की चूत में घुस गया।
मम्मी चीख उठीं, “आह… मादरचोद… धीरे… दर्द हो रहा है…”
नवनीत ने कहा, “चुप कर रांड, आज तो तेरी चूत फाड़कर ही रहूँगा!”
वो जोर-जोर से धक्के मारने लगा। मम्मी की चूत से चिकचिक की आवाजें आने लगीं।
राहुल ने मम्मी का मुँह फिर से अपने लंड से भर दिया।
दोनों मर्दों ने मम्मी को बीच में फँसा रखा था। नीचे से नवनीत उनकी चूत चोद रहा था और ऊपर से राहुल उनका मुँह चोद रहा था।
मम्मी की आँखों में आँसू आ गए थे, लेकिन वो मजा भी ले रही थीं।
नवनीत ने मम्मी की टांगें अपने कंधों पर रखीं और और गहरे धक्के मारने लगा।
उसका पूरा लंड अब मम्मी की चूत में अंदर बाहर हो रहा था। मम्मी की चूत लाल हो गई थी और उसमें से पानी निकलने लगा था।
राहुल ने अपना लंड मम्मी के मुँह से निकाला और नीचे आ गया।
उसने नवनीत से कहा, “अब मेरी बारी है, इस रांड की चूत मैं भी चोदूँगा!”
नवनीत ने मम्मी को घोड़ी बनाया। मम्मी घुटनों के बल हो गईं और नवनीत ने पीछे से उनकी चूत में लंड डाल दिया।
राहुल ने आगे से मम्मी का मुँह पकड़ा और अपना लंड उनके मुँह में घुसा दिया।
अब दोनों तरफ से मम्मी चुद रही थीं। नवनीत पीछे से उनकी गांड थपथपा रहा था और चूत में लंड पेल रहा था।
राहुल आगे से मम्मी का मुँह चोद रहा था।
मम्मी की आवाजें दबी हुई आ रही थीं, “उम्म… आह… ह्ह्ह…”
नवनीत ने मम्मी की गांड में उंगली डाल दी।
मम्मी ने मुँह से लंड निकालकर चीखी, “आह… क्या कर रहे हो… गांड में मत डालना…”
नवनीत ने कहा, “चुप कर साली रांड, आज तो तेरी गांड भी मारूँगा!”
उसने थूक लगाकर मम्मी की गांड के छेद पर लंड रगड़ा और एक धक्के में आधा लंड अंदर डाल दिया।
मम्मी दर्द से चीख उठीं, “आह… बहनचोद… बहुत दर्द हो रहा है… निकालो…”
लेकिन नवनीत नहीं रुका। उसने मम्मी की गांड में लंड अंदर बाहर करना शुरू कर दिया।
राहुल ने फिर से मम्मी का मुँह अपने लंड से भर दिया।
करीब 15 मिनट तक मम्मी की गांड मारने के बाद नवनीत ने अपना लंड बाहर निकाला और मम्मी की चूत में डाल दिया।
अब राहुल ने मम्मी की गांड में लंड डालने की तैयारी की।
उसने भी थूक लगाकर मम्मी की गांड में लंड घुसा दिया। मम्मी फिर से चीखीं, लेकिन अब वो थक चुकी थीं और विरोध नहीं कर पा रही थीं।
दोनों मर्दों ने मम्मी को डबल पेनेट्रेशन दिया।
एक लंड चूत में और एक गांड में। मम्मी की आँखों से आँसू बह रहे थे, लेकिन उनकी चूत गीली हो चुकी थी।
नवनीत ने मम्मी के मम्मों को जोर-जोर से दबाया और कहा, “कैसा लग रहा है रांड, दो लंड एक साथ लेने में?”
मम्मी ने हांफते हुए कहा, “आह… बहुत मजा आ रहा है… और जोर से चोदो… मेरी चूत और गांड फाड़ दो…”
दोनों मर्दों ने स्पीड बढ़ा दी। कमरे में चुदाई की आवाजें गूंज रही थीं।
मम्मी की चूत और गांड दोनों से पानी निकल रहा था।
करीब आधे घंटे तक इसी तरह चुदाई चली। फिर नवनीत ने कहा, “मैं झड़ने वाला हूँ…”
राहुल ने भी कहा, “मैं भी…”
नवनीत ने अपना लंड मम्मी की चूत से निकालकर उनके मुँह में डाल दिया और झड़ गया।
राहुल ने भी मम्मी की गांड से लंड निकालकर उनके मुँह में ही झड़ दिया।
मम्मी ने दोनों का माल अपने मुँह में लिया और गटक गईं। उन्होंने लंड चाट-चाटकर साफ कर दिए।
चुदाई के बाद तीनों नंगे ही बेड पर लेट गए। मम्मी दोनों के बीच में थीं और उनके हाथ मम्मी के मम्मों और चूत पर फिर रहे थे।
मम्मी ने हांफते हुए कहा, “आज तो तुम दोनों ने मेरी जान ही निकाल दी… इतने सालों बाद इतना मजा आया है…”
नवनीत ने कहा, “अब तो हम अक्सर आएँगे तेरी चूत मारने…”
राहुल ने भी कहा, “हां रांड, तेरी चूत और गांड दोनों बहुत टाइट हैं… मजा आ गया…”
मम्मी ने मुस्कुराते हुए कहा, “आओ जब भी मन करे… मैं तो तुम दोनों की रखैल बनने को तैयार हूँ…”
मैंने ये सब देखकर अपना लंड हाथ में ले लिया था और झड़ गया। मुझे अपनी मम्मी को इस तरह चुदते देख बहुत उत्तेजना हो रही थी।
अगले दिन जब मैं मम्मी से मिला तो उन्होंने मुझे देखकर शरमाईं, लेकिन मैंने कुछ नहीं कहा।
मैंने सोचा कि ये उनकी निजी जिंदगी है और वो जो चाहें कर सकती हैं।
उस रात के बाद नवनीत और राहुल अक्सर हवेली में आने लगे। कभी-कभी मैं छुपकर उनकी चुदाई देखता भी था।
मम्मी भी अब और भी ज्यादा खुश रहने लगी थीं। उनकी चूत अब हमेशा गीली रहती थी और वो हर रात दोनों दोस्तों से चुदवाती थीं।
एक बार तो मैंने देखा कि तीनों ने पूरे दिन चुदाई की। सुबह से शाम तक मम्मी की चूत और गांड में लंड आते जाते रहे।
मम्मी करीब 10 बार झड़ी थीं और दोनों मर्दों ने कई बार उनके मुँह में अपना माल छोड़ा था।
मम्मी अब पूरी तरह से इन दोनों की रखैल बन चुकी थीं।
जब भी पापा टूर पर जाते, मम्मी नवनीत और राहुल को बुला लेती थीं और पूरी रात चुदवाती थीं।
मैं भी अब इस बात से खुश था कि मेरी मम्मी खुश रहती हैं।
दोस्तों, ये मेरी मम्मी की गैंगबैंग की सच्ची कहानी है।
आपको कैसी लगी? प्लीज जरूर बताएं।
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