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यह कहानी विवान की है जो अपनी बेटी ईशा के प्रति आकर्षित होता है और धीरे-धीरे उनके बीच शारीरिक संबंध बनते हैं। उसकी छोटी बेटी ईरा यह सब देखती है और वह भी अपने पापा के करीब आना चाहती है। एक रात जब ईरा जागती है तो वह देखती है कि उसके पापा ईशा के कमरे में आते हैं और उसके होंठों पर अपना लंड रखते हैं। ईशा उसे चूसने लगती है। ईरा यह सब छिपकर देखती है और फिर क्या होता है यह जानने के लिए पूरी कहानी पढ़ें।
नमस्कार दोस्तो, मेरा नाम ईरा है और मेरी उम्र 20 साल है। मेरा फिगर 32-26-34 का है और मैं अपने परिवार के साथ रहती हूँ।
यह कहानी मेरे पापा विवान और मेरी बड़ी बहन ईशा की है।
मेरे परिवार में चार लोग हैं – मम्मी काव्या, पापा विवान, दीदी ईशा और मैं।
पापा का नाम विवान है और उनकी उम्र 45 साल है।
वे मम्मी से उम्र में 8 साल छोटे हैं। वे एक जिम ट्रेनर हैं और उनकी बॉडी बहुत फिट है।
उनका लंड 8 इंच लंबा और 3 इंच मोटा है जो किसी भी औरत को पागल कर सकता है।
मम्मी का नाम काव्या है और वे 53 साल की हैं। वे एक प्रिंसिपल हैं और दिनभर स्कूल में रहती हैं।
मेरे नाना बहुत पैसे वाले थे। उन्होंने पापा की शादी में खूब दहेज देकर मम्मी की शादी पापा से करवा दी थी।
दीदी ईशा मुझसे 6 साल बड़ी हैं। उनकी उम्र 26 साल है।
उनका फिगर 34-28-36 का था। उनकी 34 इंच की बड़ी-बड़ी रसीली चूचियाँ हैं, उनकी 28 इंच की कमर पर 36 इंच के मोटे-मोटे चूतड़ लटके हुए थिरकते हैं, तो देखने वालों के लंड सलामी देने लगते हैं। उनकी बुर बिल्कुल साफ है और उस पर एक भी बाल नहीं है।
यह बात 3 साल पहले की है जब ईशा दीदी 23 साल की थीं।
उनकी शादी की बात चल रही थी लेकिन दीदी किसी से शादी नहीं करना चाहती थीं।
वे रोज़ घर पर रहती थीं और पापा के साथ समय बिताती थीं।
पापा जिम ट्रेनर होने के कारण घर पर ही एक छोटा सा जिम बनाया हुआ था।
दीदी भी रोज़ वहाँ एक्सरसाइज करती थीं। पापा उन्हें ट्रेनिंग देते थे।
एक दिन की बात है। मम्मी अपनी बहन के यहां गई हुई थीं और मैं भी अपनी सहेली के यहां रुकी हुई थी। घर पर सिर्फ पापा और दीदी थे।
शाम को पापा जिम में एक्सरसाइज कर रहे थे। दीदी भी वहाँ आईं।
उन्होंने टाइट शॉर्ट्स और स्पोर्ट्स ब्रा पहनी हुई थी। उनके दूध ब्रा में से झाँक रहे थे और उनकी गांड बहुत मोटी लग रही थी।
पापा उन्हें देखते ही रह गए। उनका लंड शॉर्ट्स में खड़ा हो गया।
पापा ने दीदी को बेंच प्रेस करने के लिए कहा। जब दीदी झुककर बेंच प्रेस करने लगीं तो उनके दूध बाहर निकलने को हो रहे थे।
पापा उनके पीछे खड़े हो गए और उन्हें सपोर्ट देने के नाम पर उनके दूधों को छूने लगे।
दीदी ने कुछ नहीं कहा। पापा का लंड दीदी की गांड से टच हो रहा था।
“ईशा, तुम बहुत सुंदर हो,” पापा ने कहा।
“थैंक्स पापा,” दीदी ने मुस्कुराते हुए कहा।
पापा ने धीरे से अपने हाथ दीदी के कंधों से नीचे सरकाए और उनके दूधों को पकड़ लिया। दीदी ने “आह्ह्ह” की आवाज़ निकाली।
“पापा, ये क्या कर रहे हैं?” दीदी ने कहा।
“बेटा, मैं तुम्हें प्यार करता हूँ,” पापा ने कहा और उनके गाल पर चूमा।
दीदी ने पापा को रोका नहीं। पापा ने उन्हें घुमाया और उनके होंठों पर चूमा। दीदी भी पापा का साथ देने लगीं।
पापा ने दीदी की ब्रा खोल दी और उनके गोल-गोल दूध बाहर आ गए। वो इतने मुलायम थे कि पापा उन्हें देखते ही रह गए।
“क्या दूध हैं मेरी बेटी के,” पापा ने कहा और एक दूध को मुँह में ले लिया।
“उम्म्म… पापा… और ज़ोर से चूसो…” दीदी ने कहा।
पापा दोनों दूधों को बारी-बारी से चूस रहे थे।
दीदी बुरी तरह उत्तेजित हो चुकी थीं। उन्होंने पापा का शर्ट उतार दिया और उनकी छाती पर चूमना शुरू कर दिया।
पापा ने दीदी के शॉर्ट्स नीचे खींचे। उन्होंने अंदर कुछ नहीं पहना था। उनकी गुलाबी बुर दिख गई। वो गीली हो चुकी थी।
“पापा, प्लीज़…” दीदी ने कहा।
पापा ने दीदी को जिम के फर्श पर लेटा दिया और उनके पैर फैलाए। उन्होंने अपनी जीभ दीदी की बुर में डाली और चाटने लगे।
“आह्ह्ह… हाँ… और ज़ोर से चाटो…” दीदी चीख उठीं।
पापा ने उनकी बुर को अच्छी तरह से चाटा। फिर उन्होंने अपने कपड़े उतार दिए। उनका 8 इंच का लंड खड़ा था।
दीदी ने उसे देखकर कहा, “पापा, ये तो बहुत बड़ा है।”
“बेटा, ये तुम्हें बहुत मज़ा देगा,” पापा ने कहा।
पापा ने अपने लंड को दीदी की बुर पर रखा और धीरे से अंदर धकेलना शुरू किया।
“उफ्फ्फ… पापा… धीरे…” दीदी ने दर्द से चीखते हुए कहा।
पापा ने धीरे-धीरे अपना पूरा लंड दीदी की बुर में डाल दिया। दीदी की बुर बहुत टाइट थी।
“आह्ह्ह… पापा… बहुत बड़ा है…” दीदी ने कहा।
पापा ने धक्के लगाने शुरू किए। दीदी की बुर से आवाज़ें आ रही थीं “फच… फच… फच…”
थोड़ी देर बाद दीदी को भी मज़ा आने लगा।
“हाँ… और ज़ोर से… चोदो मुझे…” दीदी चीखने लगीं।
पापा ने पूरी रात दीदी को चोदा। वो उन्हें अलग-अलग पोज़िशन में चोदते रहे। दीदी बुरी तरह उत्तेजित हो चुकी थीं।
उस रात के बाद पापा और दीदी के बीच रिश्ता बदल गया। वे रोज़ चोदने लगे। जब भी मम्मी घर पर नहीं होती थीं, पापा दीदी को चोदते थे।
मुझे दीदी ने यह बात बाद में बताई थी की कैसे पापा ने उन्हें पहली बार चोदना शुरू किये।
लेकिन मैं एक दिन रात में दीदी और पापा को चुदाई करते हुए देखि और फिर मेरी दुनिया ही बदल गयी।
मैं और दीदी बचपन से एक ही कमरे में सोती हैं।
हमारा घर दिल्ली में है और यह एक बड़ा सा बंगला है।
हमारे पास तीन मंजिला घर है जिसमें हम लोग दूसरी मंजिल पर रहते हैं।
उस रात सबने खाना खाया और मम्मी-पापा अपने कमरे में चले गए।
हम दोनों बहनें अपने कमरे में थीं। वैसे तो मैं जल्दी सो जाती हूँ लेकिन उस रात मुझे नींद नहीं आ रही थी।
अगले दिन मेरा एग्जाम था और मुझे कुछ नहीं आता था।
मैं आँखें बंद किए लेटी थी। तभी कमरे का दरवाजा खुला और पापा अंदर आ गए।
नाइट लैंप जल रहा था इसलिए मुझे साफ दिख रहा था कि पापा क्या कर रहे हैं।
पापा ने अंदर आकर दरवाजा बंद किया और अपना बाथरोब उतार दिया। पापा ने अंदर कुछ नहीं पहना था!
बाथरोब उतारते ही उनका लंड हवा में लहराने लगा। वे मेरे बेड के पास आए क्योंकि दीदी मेरे साथ उसी बेड पर सोती थीं।
पापा ने दीदी के होंठों पर अपना लंड रगड़ा जिससे दीदी की आँख खुल गई।
दीदी ने पापा का लंड मुँह में भर लिया और हाथ से पकड़कर आगे-पीछे करती हुई चूसने लगीं।
मैं यह देखकर एकदम से भौचक्की रह गई कि यह क्या हो रहा है।
मुझे अपनी आँखों पर रत्ती भर भी भरोसा नहीं हो रहा था कि सही में यह सब हो रहा है।
अब मुझे उस दृश्य को देखने में कुछ-कुछ सेक्सी लगने लगा था और मेरे अंदर भी वासना जागने लगी थी।
मैं बस चुपचाप पापा और दीदी की चुदाई के सीन को देखने लगी थी।
पापा ने इतने में दीदी की पैंटी उतार दी और उन्हें नीचे से नंगी कर दिया।
फिर उन्होंने दीदी की बुर में थूक लगाकर उंगली डालनी शुरू की।
मैं आपको बता दूँ कि उस समय भी दीदी का बदन काफी भरा हुआ हो चुका था।
दीदी के चूतड़ इतने बड़े इसलिए हैं क्योंकि उनकी नॉन-स्टॉप चुदाई होती रहती है।
तो उस रात पापा दीदी की बुर में उंगली डाल-डालकर उसे ढीली कर रहे थे और वे बार-बार अपनी उंगली को दीदी की बुर से निकालकर चाट भी रहे थे।
कुछ देर बाद पापा ने दीदी को उठाकर पूरी तरह नंगी कर दिया।
पापा एक कुर्सी पर बैठ गए और उन्होंने दीदी को अपने लंड पर बैठाया और वे खड़े हो गए।
अब दीदी पापा के लंड पर लटकी हुई थीं और पापा दीदी के चूतड़ पकड़कर उन्हें चोदने लगे थे।
थोड़ी देर बाद पापा ने पोजीशन बदल ली।
उन्होंने दीदी को लिटा दिया, उनकी टांगें फैलाईं और अपना लंड उनकी बुर में डाल दिया।
वे दीदी की चूचियाँ मसलते हुए फिर से चोदने लगे।
दीदी ने अपनी टांगें पापा के ऊपर लपेट रखी थीं। वे नीचे से गांड हिलाकर पापा का पूरा साथ दे रही थीं!
पापा दीदी को आधा घंटा तक चोदते रहे।
फिर पापा बोले – आज तुम मेरे लंड का पियोगी या तुम्हारी बुर लेगी?
दीदी बोलीं – इस समय मेरी बुर माल लेगी और सुबह मैं पियूँगी। आह अभी जल्दी-जल्दी चोदो यार, मजा आ रहा है, मैं झड़ने वाली हूँ।
दीदी का जवाब पूरा होने से पहले ही पापा दीदी की बुर में झड़ने को रेडी हो चुके थे।
पापा के धक्कों की स्पीड इतनी बढ़ गई थी कि वो दीदी के नंगे बदन को अपने नंगे शरीर से जोर से चिपका चुके थे।
पापा ने अपना सारा माल दीदी की बुर की गहराई में भर दिया और वैसे ही चिपके हुए उनके ऊपर लेट गए।
दीदी पापा की गर्दन को चूम रही थीं और चाट रही थीं। उन्होंने अपने हाथों से, जो पापा के आस-पास लिपटे हुए थे, उनकी पीठ सहलाई और अपनी टांगों से उनकी गांड को दबा लिया।
कुछ देर तक वैसे ही लेटे रहने के बाद पापा उठे।
दीदी ने पापा का लहराता हुआ लंड पकड़ लिया और वे उसे चूस-चूसकर साफ करने लगीं।
दीदी ने लंड पर लगा सारा माल चाटकर पी लिया और लेट गईं।
पापा बाथरोब पहनते हुए बोले – सुबह फिर से आऊँगा बुर की रानी, नंगी मिलना!
दीदी बोलीं – वह तो मैं रोज़ ही मिलती हूँ!
वैसे दीदी मुझे सुबह अक्सर नंगी ही मिलती थीं।
पहले जब मैं पूछती थी तो वे कहती थीं – मुझे कपड़े पहनकर नींद नहीं आती। और भला मुझे अपनी सगी बहन के सामने नंगी होने में क्या दिक्कत है!
मैं भी उनकी बात मान लिया करती थी। लेकिन उस दिन मुझे पूरी कहानी पता चली।
कुछ देर बाद मुझे भी नींद आ गई। लेकिन मैं ये सोचती हुई सोई कि मुझे सुबह जल्दी उठना है।
सुबह जब मेरी आँख खुली तो पापा दीदी की बुर में बस झड़ने ही वाले थे।
वे दीदी को फुल स्पीड में चोद रहे थे! दीदी जोर-जोर से चिल्ला रही थीं – आआह्ह उम्म्म आआ आह्ह पापा, और जोर से चोदो अपनी नन्हीं सी परी की बुर को, आह और जोर से!
पापा दीदी के बाल खींचते हुए इतनी स्पीड से चोद रहे थे कि बेड हिल रहा था। दीदी पूरे मजे लेकर पापा के लंड से चुद रही थीं।
पाँच मिनट के अंदर ही पापा दीदी की बुर में झड़ गए और हाँफते हुए उनके ऊपर लुढ़क गए।
दीदी फिर रात की तरह पापा की पीठ और गांड सहलाने लगीं।
दस मिनट बाद जब पापा का लंड दीदी की बुर से निकला, तो दीदी ने उसे चूसकर और चाटकर साफ किया और लेट गईं।
पापा बोले – मैं तो भूल ही गया कि तुम्हारे मुँह में माल देना था!
दीदी ने अपनी बुर में उंगली डाली और निकालकर गीली उंगली पापा को दिखाती हुई बोलीं – आज तो आपने मेरी गहराई तक पूरी भर दी! अंदर से माल निकाल-निकालकर मजा ले लूँगी!
पापा ने दीदी का गीला उंगलियों वाला हाथ पकड़ा और उनके मुँह के पास ले गए, जिसे दीदी चाटने लगीं।
पापा बोले – तेरी टाइट बुर के आगे सब फेल है!
दीदी हँसने लगीं और उन्होंने कहा – और तुम्हारे मोटे लंड के आगे भी!
फिर पापा ने दीदी के मुँह में अपना मुँह डालकर दो मिनट तक उन्हें चूमा और वैसे ही नंगे बाहर चले गए।
कुछ देर बाद मैंने ऐसा नाटक किया जैसे मैं अभी उठी हूँ। दीदी नंगी ही लेटी थीं।
आज मुझे पता था कि क्या हुआ क्योंकि मैंने दीदी की बुर की तरफ देखा तो उससे अभी भी पापा का रस टपक रहा था।
मैंने दीदी की बुर की तरफ इशारा करते हुए कहा – दीदी, इससे कुछ निकल रहा है और बिस्तर पर भी गीला-गीला हो गया!
दीदी सकपकाकर बोलीं – अरे, वह कुछ नहीं है! वह पीरियड आने वाला है न, तो उसके पहले ऐसा होता है!
मुझे पता था कि क्या है और क्या नहीं, पर मैं दीदी की चुटकी ले रही थी।
दीदी ने अपनी गीली बुर के ऊपर से ही कपड़े पहन लिए और मेरे साथ कमरे से बाहर जाने लगीं।
सुबह का नहाना-धोना और नाश्ता करने के बाद मैं और दीदी अपने-अपने काम से चली गईं।
मैं रात का इंतज़ार करने लगी ताकि दीदी की चुदाई फिर से देख सकूँ।
पर रात का इंतज़ार करना ही नहीं पड़ा।
मम्मी मुझे रोज़ शाम को मेरे कमरे में बैठाकर पढ़ाती थीं।
जैसे ही शाम हुई, मम्मी बोलीं – चलो ईरा, कमरे में पढ़ाई करो!
दीदी रोज़ की तरह पापा के साथ बैठकर टीवी देख रही थीं। दीदी का बचपन से ही पढ़ाई-लिखाई से कोई लेना-देना नहीं था।
जब मैं मम्मी के साथ अपने कमरे में जा रही थी तो मुझे लगा कहीं दीदी इस वक्त भी तो पापा के साथ सेक्स नहीं कर रही होंगी!
मैं मम्मी के साथ कमरे में चली गई। पर दस मिनट बाद मैंने कहा – मम्मी, मुझे पानी पीने जाना है!
मम्मी बोलीं – यह सब तुम्हारा रोज़ का नाटक है! पढ़ाई शुरू की नहीं कि प्यास-भूख सब लग जाती है!
मैं पानी पीने जाने की जिद करने लगी। तो मम्मी ने कहा – बैठो यहीं पढ़ो, मैं लेकर आती हूँ!
जैसे ही मम्मी गईं, मैं उनके पीछे-पीछे कमरे से झाँककर देखने लगी क्योंकि किचन के सामने ही टीवी वाला हॉल था।
पहले तो कुछ दिखा नहीं, पर जैसे ही मम्मी किचन की तरफ मुड़ीं, मैंने देखा कि दीदी और पापा नंगे थे और दीदी की गांड में पापा का लंड था।
पापा दीदी को घोड़ी बनाकर, उनके बाल खींचते हुए उनकी गांड में लंड डालकर पेल रहे थे।
मम्मी किचन से निकलीं और दीदी-पापा की तरफ देखकर मुस्कुरा दीं और कमरे की तरफ आने लगीं।
मैं फटाक से बेड पर बैठ गई और किताब पकड़कर पढ़ने का नाटक करने लगी।
मम्मी पानी लेकर आईं और मुझे देकर बोलीं – जल्दी पियो और चुपचाप पढ़ो अब!
मम्मी मुझे पढ़ाने लगी और मैं मन में सोचने लगी कि मम्मी को सब पता है कि पापा दीदी को चोद रहे हैं।
वे तो जैसे दीदी को रसमलाई की तरह पापा के खाने के लिए परोस रही थीं!
तब से मैं दीदी की रोज़ चुदाई देखने लगी। दीदी के स्कूल में भी उनके बॉयफ्रेंड थे, वे सारे के सारे उनसे उम्र में बड़े थे और दीदी की चूचियाँ प्लेग्राउंड में रोज़ मसलते थे।
छह महीने बाद एक रात मम्मी ने मुझे पापा के सामने रसमलाई की तरह नंगी करके परोस दिया।
बाद में मुझे पता चला कि दीदी पापा की बेटी है ही नहीं, सिर्फ मैं हूँ।
दीदी नाना की बेटी थीं। जब मेरी मम्मी मेरी आधी से कुछ ज़्यादा उम्र की थीं, तब नानी गुज़र गई थीं।
नानी के गुज़रने के बाद नाना ने मम्मी को खूब चोदा और लगातार बारह-तेरह साल तक चोदते रहे।
जब मम्मी 25 साल की थीं तो वे प्रेगनेंट हो गईं और नाना ने आनन-फानन में उनकी शादी पापा से करवा दी।
पूरे नौ महीने भी नहीं हुए थे कि दीदी पैदा हो गईं।
उस वक्त भी शायद किसी ने कुछ नहीं कहा था क्योंकि नाना जी दीदी के जन्म होने पर खूब सारा पैसा लेकर पापा के पास आए थे।
नाना ने मम्मी को चोदा था क्योंकि जब वे पहले घर आते थे, तो अक्सर मम्मी गेस्ट रूम में उनके साथ ही सोती थीं। तब मुझे नहीं पता था कि अंदर मम्मी और नाना क्या कर रहे थे। खैर यह कहानी मैं बाद में डिटेल में बताऊंगी।
खैर, पापा ने मेरी भी बुर की सील तोड़ दी और मुझसे सेक्स शुरू कर दिया।
क्योंकि दीदी छह महीने की प्रेगनेंट हो गई थीं। दीदी को पापा ने प्रेगनेंट कर दिया और अब वे मुझे चोदने लगे थे।
दीदी के प्रेगनेंट होने के बाद भी पापा उन्हें रोज़ चोदते थे, पर दिन में सिर्फ एक बार और कम-से-कम दो बार मुझे।
जब दीदी का पेट कुछ-कुछ दिखने लगा तो हमने घर बदल लिया ताकि किसी को पता न चले कि दीदी प्रेगनेंट हैं।
नई जगह पर दीदी को तलाकशुदा बता दिया और सब सामान्य चलने लगा।
इनब्रीडिंग से बच्चों में डिफेक्ट आ जाते हैं, पर दीदी का बच्चा बहुत सुंदर है और उसे कोई डिफेक्ट नहीं है।
दीदी को बच्चा होने के बाद भी पापा का ध्यान मुझसे कम नहीं हुआ। वे दीदी को कम भाव देने लगे और सिर्फ मुझे चोदने लगे।
अब मैं भी प्रेगनेंट हो गई हूँ। पापा ने मुझसे वादा किया है कि वे मेरे बच्चे को भी अपनाएँगे और मुझे भी उतना ही प्यार देंगे जितना दीदी को दिया।
पापा ने मुंबई में एक बड़ा सा फ्लैट खरीद लिया है जहाँ हम सब एक साथ रहते हैं। दीदी का बच्चा अब 2 साल का हो गया है और वो भी बहुत खूबसूरत है।
रोज़ रात को पापा पहले दीदी को चोदते हैं और फिर मुझे। कभी-कभी वे हम दोनों को एक साथ भी चोदते हैं। वो रातें बहुत यादगार होती हैं।
मम्मी भी अब हमारे साथ मुंबई में रहती हैं और वो भी खुश हैं क्योंकि पापा उन्हें भी संतुष्ट करते हैं।
हमारा पूरा परिवार अब एक दूसरे से बहुत प्यार करता है और हम सब मिलकर खुशी-खुशी रह रहे हैं।
दीदी और मैं अब दोनों प्रेगनेंट हैं और पापा बहुत खुश हैं।
उन्होंने कहा है कि वे हमारे बच्चों को अपने नाम से ही पालेंगे और कोई भी फर्क नहीं करेंगे।
हमारा यह अनोखा रिश्ता आज भी जारी है और हम सब बहुत खुश हैं।
पापा हम दोनों बहनों को बराबर प्यार करते हैं और हम भी उन्हें बहुत चाहते हैं।
दोस्तो, यह कहानी आपको कैसी लगी, प्लीज़ ज़रूर बताएं।
अगली कहानी में मैं लिखूंगी की कैसे नाना और मम्मी के बीच चुदाई शुरू हुआ
NEXT PART: नाना ने चोदकर मम्मी को प्रेगनेंट कर दिए
- भिखारी की रंडी बनकर उसके लंड से चुदी
- मेरी सहेली के भाई ने मुझे चोदा
- मुस्लिम भाभी की प्यासी बुर चोदने का मजा
नोट: यहां पोस्ट की गई सभी कहानियां केवल मनोरंजन के उद्देश्य से प्रस्तुत की गई हैं। कृपया इन्हें वास्तविक जीवन से जोड़कर न देखें। कहानी में दर्शाए गए किसी भी दृश्य, घटना या चित्र का वास्तविक जीवन में प्रयोग करना हानिकारक हो सकता है। इसके लिए न तो कहानी के लेखक और न ही प्रस्तुतकर्ता जिम्मेदार होंगे। इसलिए कृपया अपनी समझ, बुद्धि और विवेक का उपयोग करें।
Very nice
Jabarjast chudai kahani… 👍
Acha ji 8700160032