desi aunty sex kahani
एक युवक जो अपनी चाची के घर छुट्टियों में आता है, उसकी नज़र उसकी चाची की भाभी पर पड़ती है जो अपने पति से अलग रहती हैं। चाची यह सब देख लेती है और उन दोनों के बीच की दूरी मिटाने में मदद करती है। जानिए कैसे एक शाम की बारिश और अकेलेपन ने दो अकेले दिलों को मिलाया और क्यों वो औरत अपने पति को छोड़कर उस युवक के प्यार में पड़ गई। यह कहानी वासना, समझदारी और नई शुरुआत की है।
शिमला की ठंडी शाम थी जब गौतम अपनी चाची लता के घर पहुँचा।
उसकी उम्र चौबीस साल थी और वह दिल्ली से आया था कुछ दिनों की छुट्टी मनाने।
उसके चाचा एक बड़ी कंपनी में मैनेजर थे और अक्सर टूर पर रहते थे। चाची लता की उम्र पैंतालीस साल थी और वह शिमला में अकेली रहती थीं।
गौतम के पहुँचने के अगले दिन उसकी चाची की भाभी निशा भी आ गईं।
निशा चंडीगढ़ से आई थीं और उनकी उम्र बयालीस साल थी।
वह देखने में बेहद आकर्षक थीं, गेहुँए रंग की, कद पाँच फुट चार इंच का और फिगर एकदम भरा हुआ।
उनके स्तन चौंतीस इंच के गोल और उभरे हुए थे जो कसे हुए ब्लाउज में नहीं समा रहे थे।
उनकी कमर तीस इंच की थी लेकिन कूल्हे छत्तीस इंच के भरे हुए और गोल थे।
उन्होंने हरे रंग की साड़ी पहनी थी जिसमें उनकी गांड का आकार साफ़ दिख रहा था।
गौतम जब पहली बार निशा को देखा तो वह ठिठक कर रह गया।
उसने इतनी खूबसूरत औरत कभी नहीं देखी थी।
निशा के गालों पर गड्ढे थे जब वो हँसती थीं और उनकी आँखों में एक अजीब सी चमक थी।
गौतम का लंड तुरंत खड़ा हो गया और उसने अपनी पैंट ठीक करते हुए नज़रें हटा लीं।
उस रात खाने की मेज़ पर गौतम बार-बार निशा को ही देख रहा था।
निशा भी उसे देखकर मुस्कुरा देती थीं।
चाची लता ने यह सब नोटिस कर लिया लेकिन उसने कुछ नहीं कहा।
खाने के बाद जब सब बैठक में बैठे थे तो निशा ने गौतम से उसकी पढ़ाई और नौकरी के बारे में पूछा।
उनकी आवाज़ इतनी मीठी थी कि गौतम का मन किया बस उन्हें सुनता रहे।
अगले दिन सुबह गौतम जब उठा तो निशा बरामदे में चाय पी रही थीं।
उन्होंने कश्मीरी शॉल ओढ़ा हुआ था लेकिन उसके नीचे से उनकी गोरी जाँघें दिख रही थीं।
गौतम ने उन्हें गुड मॉर्निंग कहा और उनके पास बैठ गया।
निशा ने उसे चाय दी और उनकी उँगलियाँ गौतम के हाथ से छू गईं। दोनों को एक सिहरन महसूस हुई।
“यहाँ शिमला में कहाँ घूमने जाओगे?” निशा ने पूछा।
“आपके साथ चलूँ तो कहीं भी चलूँगा,” गौतम ने हिम्मत करके कहा।
निशा शरमा गईं और उठकर चली गईं लेकिन उनके चेहरे पर एक अजीब सी लाली थी।
गौतम समझ गया कि निशा भी उसे पसंद करती हैं।
दोपहर को जब चाची लता और निशा रसोई में खाना बना रही थीं, गौतम वहाँ पानी पीने गया।
निशा स्टूल पर चढ़कर ऊपर की अलमारी से कुछ निकाल रही थीं और उनकी साड़ी का पल्लू सरक गया था।
गौतम ने देखा कि उनकी गोरी पीठ और कमर का ऊपरी हिस्सा दिख रहा था।
उसका लंड फिर से खड़ा हो गया और उसने तुरंत नज़रें हटा लीं।
चाची लता ने यह सब देख लिया।
शाम को जब निशा अपने कमरे में आराम करने गईं, लता ने गौतम को बुलाया।
“गौतम, तुम्हें निशा भाभी पसंद आईं?” लता ने सीधे सवाल पूछा।
गौतम घबरा गया लेकिन फिर बोला, “हाँ चाची, बहुत पसंद आईं। लेकिन…”
“कोई लेकिन वेकिन नहीं। मैंने देख लिया है कि तुम उन्हें कैसे देखते हो। और निशा भाभी भी तुम्हें पसंद करती हैं। उनका पति भी अक्सर बाहर रहता है और वो अकेली हैं। अगर तुम चाहो तो मैं बात कर सकती हूँ,” लता ने कहा।
गौतम का दिल ज़ोर-ज़ोर से धड़कने लगा।
उसने कहा, “चाची, आप जैसा समझें। लेकिन कहीं कोई गड़बड़ न हो।”
“तुम मुझ पर भरोसा रखो। बस तुम तैयार रहना,” लता ने मुस्कुराते हुए कहा।
अगले दिन चाचा किसी काम से बाहर चले गए।
घर में सिर्फ़ गौतम, लता और निशा थे। सुबह से ही बारिश हो रही थी और ठंड बढ़ गई थी।
निशा ने कहा कि उसे बुखार आ रहा है।
लता ने उन्हें बिस्तर पर आराम करने को कहा और गौतम से कहा कि वो उनकी देखभाल करे।
वो खुद बाज़ार से दवाई लेने चली गईं।
गौतम निशा के कमरे में गया। निशा बिस्तर पर लेटी हुई थीं और उन्होंने हल्का कंबल ओढ़ा हुआ था।
उनका चेहरा लाल था और आँखें नींद से भारी।
“कैसी तबीयत है भाभीजी?” गौतम ने पूछा।
“बस थोड़ी ठंड लग रही है,” निशा ने धीरे से कहा।
गौतम ने उनके पास बैठकर उनका हाथ पकड़ लिया।
निशा ने उसे देखा और उनकी आँखों में एक अजीब सी चमक थी।
गौतम ने हिम्मत करके उनके माथे पर हाथ रखा और फिर धीरे से उनके गाल पर चूमा।
निशा ने विरोध नहीं किया। गौतम समझ गया कि चाची ने पहले ही सब ठीक कर दिया है।
उसने निशा को अपनी बाहों में भर लिया और उनके होंठों पर किस कर दिया।
निशा भी पूरा साथ दे रही थीं और उसके बालों में उँगलियाँ फेर रही थीं।
गौतम ने एक-एक करके उनके कपड़े उतारने शुरू किए।
पहले शॉल, फिर साड़ी का पल्लू।
निशा ने हल्का गुलाबी ब्लाउज पहना हुआ था जिसके बटन खुले हुए थे और उनके गोरे स्तनों का ऊपरी हिस्सा दिख रहा था।
गौतम ने उनके ब्लाउज के बटन खोल दिए और अब निशा के बड़े-बड़े दूध बाहर आ गए।
उनके स्तन इतने नरम और गोल थे कि गौतम का मन किया उन्हें कभी न छोड़े।
उसने एक स्तन को हाथ से पकड़ा और दूसरे को मुँह में लेकर चूसने लगा।
निशा के निप्पल कड़े हो गए थे और वो “आहह… हम्म्म…” की आवाज़ें निकाल रही थीं।
“तुम्हारे दूध बहुत मस्त हैं भाभीजी,” गौतम ने कहा।
वो दोनों निपल्स को बारी-बारी से चूस रहा था और काट रहा था।
निशा को थोड़ा दर्द हो रहा था लेकिन मज़ा भी बहुत आ रहा था।
फिर गौतम नीचे बढ़ा और उनकी पेटीकोट के ऊपर से उनकी बुर को चूमने लगा। निशा की बुर पहले से ही गीली हो चुकी थी।
गौतम ने उनकी पेटीकोट उठाई और अब निशा की गुलाबी, चिकनी बुर उसके सामने थी।
उसने उनकी जाँघों पर चूमना शुरू किया और धीरे-धीरे ऊपर बढ़ता गया। फिर उसने उनकी बुर पर जीभ लगाई।
“ओह… यह क्या कर रहे हो… आहह…” निशा काँप उठीं।
गौतम ने उनकी बुर को चाटना शुरू कर दिया।
वो उनकी बुर की दरार में जीभ घुसा रहा था और कभी-कभी ऊपर की क्लिटोरिस को चूस लेता।
निशा पागल हो रही थीं, उन्होंने बिस्तर की चादर को कसकर पकड़ लिया।
“आहह… और ज़ोर से चाटो… मैं झड़ने वाली हूँ…” निशा चिल्लाईं।
गौतम ने उनकी क्लिटोरिस को अपने होठों में लेकर चूसना शुरू किया और साथ में दो उँगलियाँ उनकी बुर में डाल दीं।
निशा तड़प उठीं और कुछ ही देर में झड़ गईं। उनकी बुर से पानी निकलकर गौतम के मुँह में आया।
अब निशा की बारी थी। उन्होंने गौतम के कपड़े उतारे और उसका लंड देखा।
वह सात इंच लंबा और काफ़ी मोटा था, एकदम कड़ा खड़ा था।
निशा ने उसे हाथ में लिया और सहलाया। फिर उन्होंने उसे अपने मुँह में ले लिया और चूसने लगीं।
वो उसे आगे-पीछे कर रही थीं और कभी-कभी नीचे की त्वचा को पीछे करके गुलाबी सिरे को चाटतीं।
गौतम ने उनके सिर को पकड़कर अपने लंड पर दबाना शुरू किया।
लगभग पंद्रह मिनट तक मुँह चुदाई के बाद गौतम ने उन्हें रोकते हुए कहा, “अब मैं तुम्हें चोदना चाहता हूँ।”
निशा ने कहा, “हाँ लेकिन धीरे से… तुम्हारा लंड बहुत मोटा है…”
गौतम ने उन्हें घोड़ी बनने को कहा। निशा घुटनों और हाथों के बल हो गईं।
उनकी गांड इतनी गोल और सुंदर थी।
गौतम ने उनकी बुर में थूक लगाया और अपने लंड का सुपड़ा उसके मुँह पर रखा।
एक धक्के में आधा लंड अंदर चला गया।
“आहह… दर्द हो रहा है… रुको…” निशा चीखीं।
गौतम ने रुककर उनकी कमर सहलाई और फिर एक ज़ोरदार धक्का दिया।
पूरा लंड अंदर समा गया। निशा की आँखों से आँसू निकल आए।
गौतम ने उनके बाल पकड़े और पीछे से ज़ोर-ज़ोर से धक्के लगाने शुरू कर दिए।
पूरा कमरा “पच पच” की आवाज़ों से गूँज उठा।
“आहह… हाँ… और ज़ोर से चोदो… फाड़ दो मेरी बुर को…” निशा चिल्ला रही थीं।
गौतम ने लगभग बीस मिनट तक उन्हें इसी पोज़िशन में चोदा।
फिर उसने उन्हें लिटाया और मिशनरी पोज़िशन में आ गया।
उसने निशा के पैर अपने कंधों पर रखे और फिर से चोदना शुरू किया।
उसने उनके दूध को मसलते हुए चोदना जारी रखा।
फिर गौतम ने कहा, “मैं झड़ने वाला हूँ… कहाँ निकालूँ?”
“अंदर ही डाल दो… आज मेरा सेफ़ दिन है…” निशा ने कहा।
गौतम ने कुछ और तेज़ धक्के लगाए और अपना सारा वीर्य निशा की बुर में ही छोड़ दिया।
वो भी उनके साथ झड़ गए।
कुछ देर बाद गौतम का लंड फिर से खड़ा हो गया।
इस बार उसने निशा से कहा, “मैं तुम्हारी गांड मारना चाहता हूँ।”
निशा ने मान लिया। गौतम ने उन्हें घोड़ी बनाया और उनकी गांड पर थूक लगाया।
उसने एक ज़ोरदार धक्का दिया और आधा लंड अंदर चला गया।
निशा दर्द से चीखीं लेकिन गौतम ने धीरे-धीरे धक्के लगाते रहा।
कुछ देर बाद निशा को भी मज़ा आने लगा। गौतम ने अपना वीर्य उनकी गांड में ही छोड़ दिया।
उस दिन गौतम ने निशा को तीन बार और चोदा।
जब चाची लता वापस आईं तो निशा बहुत खुश और चमक रही थीं।
लता ने गौतम से आँख मारी और पूछा, “कैसा रहा मज़ा?”
“चाची, आपकी भाभी गजब की माल हैं,” गौतम ने कहा।
“मुझे मत भूल जाना,” लता ने कान में कहा।
गौतम ने मुस्कुराते हुए उनके गाल पर चूमा।
निशा ने शिमला में ही रहने का फैसला किया और अपने पति से अलग हो गईं।
अब वो और गौतम एक-दूसरे से प्यार करते हैं और हर महीने मिलते हैं।
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Beautiful story 🙂🙂