जमींदार साहब ने मुझे हवेली में बुलाकर चोद दिए

jamindaar haweli mein chod diye

एक गरीब लड़की का गुप्त सफर – जब एक शक्तिशाली जमींदार की नजरें एक मासूम पर टिकीं, तो इज्ज़त और शर्म की सारी दीवारें ढह गईं। पढ़िए कैसे एक हवेली की चौखट पर लुट गई एक लड़की की बेकसूरी…

नमस्ते दोस्तों, मैं आशा करती हूँ कि आप सभी लोग खैरियत से होंगे।

मेरा नाम सुमन है, उम्र 24 साल। मैं एक छोटे से गाँव सोहानरिया की रहने वाली हूँ जो उत्तर प्रदेश के एक जिले में स्थित है। मेरे पिता जी की मौत कुछ साल पहले हो चुकी है और मेरी माँ बीमार रहती हैं। हमारी आर्थिक स्थिति बहुत खराब है, इसलिए मुझे एक अमीर घर में नौकरी करनी पड़ रही है।

मैंने पढ़ाई बारहवीं तक तो की है, लेकिन गाँव में रोजगार के कोई साधन नहीं हैं।

मेरी एक छोटी बहन भी है जिसकी शादी करनी है, लेकिन पैसों की कमी के कारण वो अभी तक नहीं हो पा रही।

मैंने सोचा कि शहर जाकर कुछ कमाऊँगी तो घर का कर्ज उतार सकूँगी और बहन की शादी कर सकूँगी।

मेरे गाँव के पास ही एक बहुत बड़ी हवेली है जो जमींदार प्रताप बहादुर सिंह की है।

वो इस इलाके के सबसे अमीर और ताकतवर आदमी हैं। उनकी उम्र करीब 50 साल होगी, लेकिन वो दिखते हैं 40 के।

उनका बदन बहुत हट्टा-कट्टा है, कंधे चौड़े हैं और उनकी मूंछें बहुत खूबसूरत हैं।

मैंने सुना था कि उनकी हवेली में नौकरानी की जरूरत है। मैंने सोचा कि क्यों न एक बार कोशिश कर लूँ। मैंने अपनी माँ से बात की और अगले दिन सुबह-सुबह हवेली की तरफ चल पड़ी।

हवेली देखकर मेरी आँखें खुली की खुली रह गईं। इतनी बड़ी इमारत मैंने कभी नहीं देखी थी।

चारों तरफ बगीचे थे, एक बड़ा तालाब था और हवेली की दीवारें इतनी ऊँची थीं कि ऊपर देखने में ही गर्दन दर्द होने लगे।

मैंने दरवाजे पर दस्तक दी। एक बूढ़ा चौकीदर आया और पूछा, “कौन है?”

मैंने कहा, “मैं नौकरी के लिए आई हूँ। क्या यहाँ काम मिल सकता है?”

चौकीदर ने मुझे ऊपर से नीचे तक देखा। मैंने साड़ी पहनी हुई थी, लेकिन वो थोड़ी पुरानी थी।

उसने कहा, “ठहरो, मैं मालिक से पूछकर आता हूँ।”

कुछ देर बाद वो आया और बोला, “मालिक ने बुलाया है।”

मैं उसके पीछे-पीछे हवेली के अंदर गई। अंदर का नजारा और भी शानदार था।

बड़े-बड़े चैंडलियर, महंगे कालीन, और दीवारों पर पुरानी तस्वीरें लगी हुई थीं।

मुझे एक बड़े कमरे में ले जाया गया जहाँ प्रताप बहादुर सिंह बैठे थे।

वो एक बड़ी कुर्सी पर बैठे थे और शराब का गिलास हाथ में लिए थे।

उन्होंने मुझे देखा और उनकी आँखों में एक अजीब सी चमक आ गई।

“आओ बेटी, पास आओ,” उन्होंने कहा।

मैंने कहा, “प्रणाम बाबू जी। मैं नौकरी के लिए आई हूँ।”

वो मुस्कुराए और बोले, “हाँ-हाँ, बैठो। तुम्हारा नाम क्या है?”

“सुमन,” मैंने कहा।

“कितनी उम्र है तुम्हारी?”

“24 साल,” मैंने जवाब दिया।

वो मुझे घूरने लगे। उनकी नजरें मेरे चेहरे से नीचे उतरीं और मेरे मम्मों पर टिक गईं।

मैंने हल्की सी साड़ी पहनी थी जिससे मेरा क्लीवेज थोड़ा दिख रहा था।

वो मेरी जांघों को देखने लगे जो साड़ी के नीचे से झलक रही थीं।

“काम तो मिल जाएगा, लेकिन…” वो रुक गए।

“क्या बाबू जी?” मैंने पूछा।

“इधर मेरे पास तो आओ,” उन्होंने हाथ बढ़ाया।

मैंने कुछ कदम आगे बढ़ाई। उन्होंने अचानक मेरा हाथ पकड़ लिया और खींचकर अपने पास बिठा लिया।

मैं घबरा गई, लेकिन कुछ बोल नहीं पाई।

“बहुत खूबसूरत हो तुम,” उन्होंने मेरे गाल को छूते हुए कहा।

“बाबू जी, प्लीज…” मैंने कहा।

“अरे डरो मत, मैं तुम्हें काम दूँगा। बहुत अच्छा काम। तुम्हें महीने में 50,000 रुपये दूँगा,” उन्होंने कहा।

मेरी आँखें खुली रह गईं। इतने पैसे तो मैंने सोचे भी नहीं थे।

“लेकिन एक शर्त है,” उन्होंने कहा और मेरे कंधे पर हाथ रख दिया।

“क्या शर्त?” मैंने पूछा।

“तुम्हें मेरी खुशी का ख्याल रखना होगा,” उन्होंने कहा और मेरे मम्मों पर हाथ फेरने लगे।

मैं समझ गई कि उनका क्या मतलब है।

मैंने पहले तो मना किया, “नहीं बाबू जी, ये ठीक नहीं। मैं ऐसा काम नहीं कर सकती।”

वो मुस्कुराए और बोले, “सोच लो बेटी, तुम्हारी माँ बीमार है ना? और बहन की शादी भी करनी है। इतने पैसे तुम्हें कहीं और नहीं मिलेंगे।”

मैं सोच में पड़ गई। मुझे पैसों की बहुत जरूरत थी।

मैंने सोचा कि एक बार अगर मान जाऊँ तो शायद बाद में मना कर सकूँगी।

“ठीक है बाबू जी,” मैंने हल्की आवाज में कहा।

वो खुश हो गए और बोले, “चलो, आज से काम शुरू।”

उन्होंने मुझे अपने कमरे में ले जाने को कहा। मैं उनके पीछे-पीछे चल पड़ी।

कमरा बहुत बड़ा था और उसमें एक विशाल बेड था। दीवारों पर अजीब-अजीब तस्वीरें लगी थीं जिनमें नंगे लोग थे।

“कपड़े उतारो,” उन्होंने आदेश दिया।

मैंने हिचकिचाते हुए अपनी साड़ी खोलनी शुरू की। वो बैठकर देख रहे थे और शराब पी रहे थे।

जब मैं सिर्फ ब्लाउज और पेटीकोट में रह गई, तो उन्होंने कहा, “और उतारो, सब कुछ।”

मैंने अपना ब्लाउज उतार दिया। मेरे मम्मे ब्रा में बाहर आ गए।

वो देखकर उत्तेजित हो गए और बोले, “बहुत बड़े हैं तुम्हारे, आओ पास आओ।”

मैं उनके पास गई। उन्होंने मेरी ब्रा खोल दी और मेरे मम्मे बाहर आ गए।

उन्होंने एक मम्मा हाथ में ले लिया और दबाने लगे।

“आह… धीरे बाबू जी…” मैंने कहा।

“चुप कर रांड, आज से तू मेरी रखैल है,” उन्होंने कहा और मेरे मम्मे जोर-जोर से दबाने लगे।

फिर उन्होंने मुझे बेड पर लिटा दिया। मैंने अपना पेटीकोट भी उतार दिया।

वो मेरी जांघों को सहलाने लगे और धीरे-धीरे ऊपर की तरफ बढ़ने लगे।

“बहुत गोरी है तेरी चूत,” उन्होंने कहा और उस पर हाथ फेरा।

मेरी चूत पहले से ही गीली हो चुकी थी। उन्होंने उसमें उंगली डाल दी।

मैं सिसकारी, “आह… बाबू जी…”

“क्या हुआ रांड, मजा आ रहा है?” उन्होंने पूछा।

“हाँ…” मैंने शरमाते हुए कहा।

उन्होंने अपने कपड़े उतारे। उनका बदन बहुत मोटा था और छाती पर बाल थे।

उनका लंड देखकर मेरी आँखें खुली रह गईं। वो करीब 9 इंच लंबा और बहुत मोटा था। एकदम काला और नसों से भरा हुआ।

“डर मत साली, आज इसी से तेरी चूत की सील खोलूँगा,” उन्होंने कहा।

उन्होंने मेरी टांगें फैलाईं और मेरी चूत पर अपना लंड रगड़ा।

फिर एक जोरदार धक्के में आधा लंड अंदर घुसा दिया।

मैं चीख उठी, “आह… बहनचोद… बहुत दर्द हो रहा है… निकालो…”

“चुप कर रांड, अभी तो शुरुआत है,” उन्होंने कहा और और जोर से धक्का दिया।

पूरा लंड अंदर चला गया। मेरी चूत फटने लगी थी।

वो जोर-जोर से धक्के मारने लगे। मेरी चूत से खून निकलने लगा, लेकिन वो नहीं रुके।

“आह… मादरचोद… धीरे करो… मेरी चूत फट जाएगी…” मैंने चिल्लाया।

“तेरी चूत तो मैंने फाड़नी ही है साली, आज से तू मेरी रखैल बनेगी,” उन्होंने कहा और और तेज हो गए।

करीब आधे घंटे तक उन्होंने मेरी चूत मारी। मैं दर्द से चीखती रही, लेकिन धीरे-धीरे मजा भी आने लगा।

फिर उन्होंने अपना लंड बाहर निकाला और मेरे मुँह में घुसा दिया।

“चूस इसे साली रांड, अपने मालिक का लंड चूस,” उन्होंने कहा।

मैंने उनका लंड अपने मुँह में ले लिया और चूसने लगी। उसका स्वाद अजीब था, लेकिन मैं चूसती रही।

कुछ देर बाद उन्होंने मेरे मुँह में ही झड़ दिया और मुझे सब कुछ पीने को कहा।

“गटक जा साली, ये तेरे लिए अमृत है,” उन्होंने कहा।

मैंने सब कुछ पी लिया। उसके बाद उन्होंने मुझे फिर से चोदा। इस बार वो मेरी गांड मारने लगे।

“नहीं बाबू जी, गांड में मत डालो, बहुत दर्द होगा,” मैंने कहा।

“चुप कर रांड, तेरी गांड भी मेरी है,” उन्होंने कहा और थूक लगाकर मेरी गांड में लंड घुसा दिया।

मैं चीखी, “आह… बहनचोद… मेरी गांड फट गई…”

वो हंसे और बोले, “अभी तो शुरुआत है साली, आगे-आगे देख होता है क्या।”

उन्होंने मेरी गांड में भी आधे घंटे तक लंड पेलकर अपना माल छोड़ा। मैं बुरी तरह थक चुकी थी और दर्द से कराह रही थी।

उस दिन के बाद प्रताप बहादुर सिंह ने मुझे अपनी हवेली में रख लिया।

वो रोज मेरी चूत और गांड मारते।

कभी-कभी तो वो अपने दोस्तों को भी बुला लेते और मुझे सबके सामने नंगा करके चोदते।

मैं अब उनकी पूरी तरह से रखैल बन चुकी थी।

उन्होंने मेरी माँ का इलाज कराया और मेरी बहन की शादी भी करा दी।

लेकिन इसके बदले में मुझे रोज अपनी चूत और गांड देनी पड़ती थी।

अब मुझे इसमें कोई शर्म नहीं आती। मैं खुश हूँ कि मेरे परिवार को मैंने संभाल लिया।

और प्रताप बहादुर सिंह का लंड भी मुझे अब अच्छा लगने लगा है।

मैं रोज उनसे चुदवाने के लिए तरसती हूँ।

दोस्तों, ये मेरी जिंदगी की सच्ची कहानी है। आपको कैसी लगी?

नोट: यहां पोस्ट की गई सभी कहानियां केवल मनोरंजन के उद्देश्य से प्रस्तुत की गई हैं। कृपया इन्हें वास्तविक जीवन से जोड़कर न देखें। कहानी में दर्शाए गए किसी भी दृश्य, घटना या चित्र का वास्तविक जीवन में प्रयोग करना हानिकारक हो सकता है। इसके लिए न तो कहानी के लेखक और न ही प्रस्तुतकर्ता जिम्मेदार होंगे। इसलिए कृपया अपनी समझ, बुद्धि और विवेक का उपयोग करें।

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