Vidhwa Chachi ki Chudai
विधवा चाची की चुदाई कहानी में मेरे चाची को मैं पसंद करता था. दुर्भाग्य से चाची विधवा हो गयी. मैंने उनकी बहुत देखभाल की तो वे मुझसे काफी घुल-मिल गईं. मैं उनसे सेक्स की सोच रहा था.
दोस्तो, मेरा नाम वीर सिंह है. मैं मध्य प्रदेश का रहने वाला हूँ.
ये सेक्स कहानी एकदम सच्ची है और मेरी चाची के बारे में है.
मेरी चाची 39 साल की दुबले पतले शरीर वाली एकदम दूध सी गोरी महिला हैं.
उनके 3 बच्चे हैं.
ये विधवा चाची की चुदाई तब शुरू हुई, जब मैं 12वीं क्लास में था.
तब से मैं अपनी चाची के साथ चुदाई के सपने देखता था.
करीब एक साल बाद चाचा का एक्सीडेंट में देहांत हो गया.
अब चाची ही घर को संभालने लगी थीं.
वैसे तो मुझे चाचा के जाने का दुख है लेकिन मुझे चाची को पाने का सही मौका मिल गया था.
अब मैंने उन्हें पटाने का काम शुरू कर दिया.
लॉकडाउन में मैंने उनकी बहुत देखभाल की.
वे मुझसे काफी घुल-मिल गईं.
पर जब मैंने एक दिन मौका पाकर टच करना चाहा तो वे मेरे पास से तुरंत चली गईं.
उसी दिन से हमारी कम बात होने लगी.
कुछ टाइम के बाद फिर से बात बढ़ने लगी.
मैं तो उन्हें पटाने का सोच ही रहा था.
कुछ महीनों के बाद रक्षाबन्धन का त्योहार था.
इस अवसर पर सभी रिश्तेदार और गांव के लोग इसलिए मिलने आते हैं कि घर में कोई मर गया है, तो सब लोग अफसोस जाहिर करने आते हैं.
सब लोग चले गए और घर में सूनापन हो गया.
मैं चाची के बगल में बैठ गया और उनका हाथ पकड़ कर उंगलियां चटकाने लगा.
वे काफी दुखी होकर बातें करने लगी थीं कि आज चाचा कि बड़ी याद आ रही है.
मैंने उनका हाथ अपनी गोद में रख लिया.
थोड़ी देर में उनके स्पर्श से ही मेरा लंड खड़ा होने लगा और उनके हाथ में छूने लगा.
मुझसे कंट्रोल नहीं हो रहा था इसलिए मैंने उनके हाथ को अपनी गोद में दबा दिया और लंड पर रगड़वाने लगा.
उन्होंने लौड़े की सख्ती का अहसास किया और लंड के उभार को देखा, तो अपना हाथ खींच लिया.
हालांकि उन्होंने मुझसे कुछ कहा नहीं, पर उनकी भाव भंगिमा कुछ अलग सी हो गई थी … तो मैं वहां से चला गया.
करीब दस दिन बाद चाची के घर में कुछ सामान आया था जिसे उन्हें सही से रखवाना था.
चाची ने मुझसे मदद को कहा.
मैंने हां कह दी.
वे अपना काम करने लगीं.
मैं उनके बताए अनुसार सामान रखने लगा.
जब मैंने सारा सामान कायदे से रख दिया, तब वे आईं और मुझे देख कर धन्यवाद बोलीं.
मैं चुप रहा.
वे मेरे लिए पानी ले आईं और बोलीं- लो पानी पी लो, कुछ खाना वगैरह खाओगे?
मैंने कहा- नहीं.
पर मेरा लंड खड़ा हो रहा था.
मैंने बाहर गेट की चिटकनी लगाई और अपना लंड खोलकर दिखाया.
वे सन्न रह गईं.
मैंने लंड हिलाते हुए कहा- इसके लिए कुछ है?
वे लौड़े को देखकर तुरंत मुड़ गईं और अन्दर जाने लगीं.
मैंने उन्हें रोका और कहा- चाची, क्या हुआ?
वे बोलीं- ये सब क्या है?
मैंने उनका हाथ पकड़ कर अपने लोअर में डाल दिया और लंड पर दबाए रखा.
वे हाथ खींचने लगीं, पर मैंने टाइट पकड़ लिया.
मैं उन्हें समझाने लगा- आप मुझे बेहद पसंद हो. आप इतनी सुंदर भी हो … क्या आप मेरी गर्लफ्रेंड बनोगी?
वे नहीं मान रही थीं.
तो मैंने जाने दिया और कहा- चाची, आप मुझे पसंद हो. पर जो भी होगा और जब होगा … वह तभी होगा जब आप चाहोगी … वर्ना नहीं. मेरा सब कुछ आपका है. आप इस बारे में अच्छे से सोचना. फिर कहना, मैं इंतज़ार करूँगा. अगर आप हां कहोगी तो मैं आपका बहुत ध्यान रखूँगा … और यदि नहीं, तो कभी भी परेशान नहीं करूँगा.
इतना कहकर मैं लंड को अन्दर करके बाहर चला गया.
फिर मैं 3 दिन बाद उनके घर गया.
दिन का समय था. चाची अकेली थीं.
मैंने सीधे जवाब पूछा.
वे बोलीं- ये सब सही नहीं है.
फिर मैंने कहा- आप कुछ दिनों तक साथ रह कर देख लो. इस दरमियान मैं कुछ भी गलत हरकत नहीं करूँगा. आप बता देना … यह बात बस अपने दोनों के बीच की ही है.
मेरे थोड़ा मनाने पर चाची मान गईं.
मैंने कहा- मुझे आपको गले लगाने का मन करता है. क्या मैं जब चाहूँ आपको गले लगा सकता हूँ?
उन्होंने हां कह दी.
ये पहली बार था, जब मैं उन्हें खुद से गले लगा सकता था.
मैंने तुरंत कहा- मुझे अभी गले लगाना है!
वे हिचक रही थीं, पर मैंने मना लिया.
मैंने आगे बढ़ कर उन्हें गले लगा लिया और आह क्या सुकून मिला था, कह ही सकता.
मैंने कहा- चाची, आप कितनी अच्छी हो … काश मैं आपसे शादी कर पाता. मैं आपको बहुत प्यार करता चाची, चाचा नहीं तो क्या हुआ? आप अब मेरी जिम्मेदारी हो. मैं आपका इतना ध्यान रखूँगा कि आपको मुझसे प्यार हो जाएगा!
वे बोलीं- देखती हूँ.
एक मिनट बाद वे मुझसे अलग होकर जाने लगीं.
पर मुझे उन्हें अभी और ज्यादा हग करना था.
मैंने उन्हें रोका तो वे बोलीं- अभी जाओ.
फिर उसके बाद जब भी मौका मिलता, मैं उन्हें कसके गले लगा लेता.
अब तो वे भी मुझे हग करने लगीं.
मैं भी उनका बहुत ख्याल रखने लगा.
शायद उनको भी मुझसे प्यार हो गया था, इसलिए वे भी मुझसे काफी खुल गई थीं.
अब मैं उन्हें गाल पर किस भी करने लगा.
पर वे मुझे रोक देतीं … पर पहले से काफी सही चल रहा था.
ऐसे-ऐसे दिन बीतते गए और हम दोनों एक दूसरे से काफी घुल-मिल गए.
मैंने उन्हें प्रपोज करने का सोचा.
इसलिए मैं आने वाली 14 फरवरी को एक डेयरी मिल्क और गुलाब लेकर उनके घर जाने का सोचने लगा.
उस दिन मैं उनके घर गया तो वे छत पर किसी काम से गई थीं.
मैंने आवाज लगाई तो वे आने की कह कर बोलीं- तुम बैठो.
मैं बैठ गया.
फिर जैसे ही वे आईं, तो सीधे अपने कमरे में चली गईं.
मैं भी उनके पीछे उनके कमरे में चला गया.
वे मुझे आया देखकर बोलीं- क्या हुआ?
मैंने कहा- रुको, बता रहा हूँ.
वे बोलीं- एक मिनट रुको, अभी आती हूँ. बहुत तेज बाथरूम लगी है.
मैं चुप हो गया.
फिर वे बाथरूम में जाकर फ्रेश होकर आ गईं.
मैंने कहा- आप पहले कुर्सी पर बैठो.
वे कुर्सी पर बैठ गईं और मेरी तरफ देख कर बोलीं- हां कहो!
फिर मैंने उनसे कहा- चाची, आपसे इतने दिनों में मुझे प्यार हो गया है और अब आप ही मेरी दुनिया हो. क्या आप मुझे अपना बनाओगी?
यह कह कर मैंने उन्हें गुलाब का फूल और डेयरी मिल्क का पैक पकड़ा दिया.
वे बोलीं- मुझे भी तुम पसंद हो, पर तुम्हें अपनी उम्र की कोई देखना चाहिए.
मैंने उनको बेड पर बिठाया और उनकी गोद में सर रख कर लेट गया.
मैंने उनकी तरफ मुँह करके देखा और जरा सा उठ कर उन्हें कसके अपने गले से लगा लिया.
वे भी मुझसे चिपक गईं.
मैंने अपनी पोजीशन बदली और पैरों को उनसे लिपटा कर अपने सीने से लगा लिया.
मैं अब उन्हें अपने से कसकर सुकून से बैठ गया.
चाची ने भी मुझे हग कर लिया था.
मैं बोला- चाची, मुझे आपसे बहुत प्यार है!
वे बोलीं- कितना?
मैंने कहा- बहुत ज्यादा …
इतना कहकर मैं उनके होंठों पर किस करने लगा.
वे रोकने लगीं, पर उनका ज्यादा विरोध नहीं था.
मैं उन्हें चुंबन करता रहा.
करीब 10 मिनट तक मैंने उनके होंठों, गले, कान, नाक को किस किया.
अब वे कुछ भी विरोध नहीं कर रही थीं.
मेरा लंड खड़ा हो गया था.
मैंने चाची से कहा- चाची, अब आप मेरी गोद में बैठो न!
वे बोलीं- क्यों?
मैं बोला- आपको और किस करना है!
वे मान गईं और मेरी गोद में मेरी तरफ मुँह करके बैठ गईं.
पहले तो मैंने होंठों पर किस किया.
फिर मैंने कहा- आप अपने पैरों को मुझसे कसकर लपेट लो!
वे मेरी कमर से अपने पैर लपेट कर बैठ गईं.
उनके दूध मेरे सीने से गड़ने लगे.
मैं उन्हें प्यार से चूम रहा था.
कुछ देर बाद मैं उठा और उन्हें ऐसे ही उठाकर चलने लगा.
मेरा लंड भी खड़ा था.
मैं उन्हें बार-बार लंड से रगड़ रहा था.
फिर वे भी कामुक हो गईं और नीचे लौड़े की तरफ खिसकने लगीं.
अब मैंने उनकी गांड में हाथ लगाकर उन्हें अपने लौड़े पर साध लिया और लंड को चुत से रगड़ने लगा.
इधर चुंबन लगातार चल रहा था.
ऐसे दस मिनट तक चला.
वे किसी बच्चे की तरह मुझसे चिपकी हुई थीं.
फिर मैंने उन्हें उतार दिया और बेड पर लिटा दिया.
वे मेरी तरफ वासना से देख रही थीं.
मैं उनके ऊपर झुका और ब्लाउज के ऊपर से ही उनके एक दूध को मुँह में भर कर चूसने लगा.
वे कुछ भी नहीं बोलीं.
मैं दोनों मम्मों को अच्छे से ब्लाउज के ऊपर से ही चूसा, फिर बटन खोलकर उनकी चूचियों को ब्रा से बाहर निकाल लिया.
वे मुझे बड़ी अजीब सी नजरों से देख रही थीं और उनकी नजरों में भी चुदास दिख रही थी.
मैंने उनके दोनों मम्मों को खूब अच्छे से मसला और चूसा.
अब मैंने अपनी टी-शर्ट उतार दी और अपने सीने के निप्पल को उनके मुँह में डालकर उनसे चटवाने लगा.
उन्हें काफी मजा आने लगा था.
शायद वे यह भी समझ गई थीं कि अब आगे क्या होने वाला है
मैंने उनसे कहा- आप मेरा लंड चूसोगी?
वे बोलीं- हां.
मैंने कहा- ओके तो निकाल कर खुद ही चूसो न!
चाची नीचे बैठ गईं और मैं खड़ा हो गया.
वे चड्डी निकाल कर लंड देखने लगीं और अगले ही पल उसे चाटने लगीं.
यह मेरा पहली बार था जब कोई मेरे लंड को चाट रही थी … इसलिए एक मिनट ही चूसने के बाद मेरा रस निकल गया.
उन्होंने लौड़े को अपनी साड़ी के पल्लू से पौंछ दिया.
मैंने कहा- चाची, पहली बार है क्या?
वे बोलीं- हां …
यह कह कर वे थोड़ी हंसी और बोलीं- अब क्या? तुम्हारा तो निकल गया!
मैंने कहा- आप ऐसे ही चूसो, मजा आ रहा है … अभी खड़ा हो जाएगा.
वे चूसने लगीं.
थोड़ी देर बाद मैंने कहा- चाची, मुझे भी आपकी चूसनी है.
वे बोलीं- नहीं, वह अभी साफ नहीं है. मैं नहाई भी नहीं हूँ.
पर मैं नहीं माना और कहा- जैसी भी है, मुझे दिखाओ तो सही!
वे नहीं मानीं.
फिर मैंने उन्हें खड़ी कर दिया और पेटीकोट में नीचे से घुस गया.
उनकी चूत पर बहुत बाल थे और अजीब-सी बदबू आ रही थी.
मैंने बदबू की परवाह नहीं की और ऐसे ही उनकी चूत में मुँह डालकर चूसने लगा.
उनकी चुत पर खूब सारे बालों की वजह से मुझे खास मजा नहीं आया.
फिर मैंने उनकी गांड को चाटना शुरू किया.
पूरी गांड और उनके हगने के छेद को भी चाटा.
फिर मैं बाहर निकला और बोला- मुझे आपकी गांड अच्छे से चूसनी है.
वे बोलीं- ये सब गंदी जगह है, उल्टी हो जाएगी.
पर मैंने उन्हें बेड से झुकाया और पेटीकोट उठाकर उनकी गांड चाटना शुरू कर दिया.
गांड में उंगली डाल-डालकर चूसी.
फिर मैंने उन्हें चोदने का सोचा.
मैं चाची की चूत में लंड घुसाने लगा तो वे बोलीं- नहीं, बच्चा हो जाएगा.
तो मैंने उनकी गांड में लंड घुसाया, पर गया ही नहीं.
अब मैंने उनकी गांड से लंड रगड़ना शुरू कर दिया और ऐसे ही रगड़ रगड़ कर मेरा रस पुनः निकल गया.
मैंने अपने कपड़े पहने और उनसे कहा- अपने बालों को साफ कर लेना और बगलों के भी.
चाची मुस्कुरा दीं और बोलीं- कब आओगे?
मैंने कहा- मैं आज रात को ही सबके सोने के बाद आऊंगा.
वे बोलीं- ठीक है.
मैंने कहा- चाची, यह क्या पूछना कि कब आना है. अब तो आप मेरी हो गई हो तो मैं अब जब भी चाहूँगा, आपके साथ सब कुछ करूँगा.
वे हंस कर बोलीं- हां ठीक है, अभी तो जाओ.
मैं रात का इंतज़ार करने लगा.
मैंने बाजार से कंडोम लाकर भी रख लिए.
रात को बेचैनी हो रही थी तो मैंने मुठ मार ली और थकान के कारण सो गया.
मेरी नींद ही नहीं खुली और जब खुली, तो सुबह हो गई थी.
मैं सर पकड़ कर रह गया, पर अब क्या हो सकता था.
फिर मैंने उन्हें फोन किया.
वे बोलीं- दिन में मिलेंगे.
जब दिन चढ़ गया तो मैं उनके घर में जाने की सोचने लगा.
वे गर्मियों के दिन थे तो सभी अपने कामों में लगे थे.
मैं उनके घर चला गया.
घर में जाते ही मैंने दरवाजा बंद किया और उनकी साड़ी और पेटीकोट उठाकर देखा.
उन्होंने चुत के बाल साफ कर लिए थे, पर अभी भी थोड़े रह गए थे.
लेकिन अब उनकी चूत साफ नजर आ रही थी.
मैंने उनकी गांड चूसना शुरू किया और चूत में उंगली की.
वे ‘आ आ आ …’ करने लगीं.
मैंने अपने लंड पर कंडोम लगाया और चूत में डाल दिया.
कुछ ही देर में धीरे-धीरे पेलने से लंड आराम से अन्दर तक चला गया.
चाची आह आह कर रही थीं.
मैं धीरे-धीरे उनकी चुदाई करने लगा.
थोड़ी देर में मेरा माल निकल गया.
अब मैंने उन्हें खड़ी किया और कहा- आप लेट जाओ.
वे बेड पर लेट गईं.
मैंने उनकी चूत चाटनी शुरू की, फिर उंगली डाल-डालकर चाटी.
उनकी चुत से खूब सारा पानी निकला.
मैं अब 69 में आ गया और उनके मुँह में लंड दे दिया.
वे लंड चूसने लगीं और मैं उनकी चूत चाटता रहा.
कुछ देर बाद मैंने फिर से कंडोम लगाया और चुदाई का मजा लेना शुरू कर दिया.
इस बार गाड़ी देर तक चली और चाची को भी मजा आया.
उस दिन मैंने दो बार चुदाई करके रात को आने का कहा तो चाची ने एक दिन बाद आने का कहा.
मैं दूसरी रात में उन्हें चोदने आ गया और पूरी नंगी करके मैंने चाची की चुदाई का मजा लिया.
इसके बाद जब भी हम दोनों को समय और मौका मिलता, तो मजे कर लेते.
अभी भी हम दोनों का यह रिश्ता गुप्त रूप से बदस्तूर चल रहा है.
Main bhi lauda ki ptasi hun. koi hai gorakhpur se jo meri pyas bujha de
Yes Milo GKP me kaha se ho
Haa me hu gorakh our reena ji kab milna chahogi coll par bta do 9125828388
Ha mai hu gorakhpur se milo kabhi
रामगढ़ ताल आइए वही मजा है
Yes I’m ready
Yes contact me mai milna chahta hu aapse aapki har khwahish poori karunga zindagi bhar yaad karoge aap mujhe please contact my gmail
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Kya Aap Meri Dulhan Banogi Umar Bhar Ke Liye