अपनी प्यारी काकी को चोदा दिया

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एक रिश्ते की गहराई से जन्मी मोहब्बत – जब दो अकेले दिलों ने एक-दूसरे को पाया, तब समझ आया कि प्यार किसी सीमा को नहीं मानता। एक ऐसी कहानी जो दिल को छू लेगी…

मेरा नाम सोनू है, उम्र 26 साल। मैं एक आईटी कंपनी में काम करता हूँ और अपने पिता के छोटे भाई यानी काका के घर में रहता हूँ।

मेरे काका की शादी को 8 साल हो गए हैं, लेकिन उनकी पत्नी नीलम काकी से मेरी उम्र में कोई खास फर्क नहीं है – वो मुझसे सिर्फ चार साल बड़ी हैं।

नीलम काकी एक बेहद खूबसूरत औरत हैं। उनका चेहरा ऐसा कि कोई भी उन्हें देखकर मुग्ध हो जाए।

उनकी आँखों में एक अजीब सी गहराई है, जैसे वो हमेशा कुछ सोच रही हों।

उनकी हँसी सितारों की टिमटिमाहट जैसी है, और उनकी बातों में इतनी मिठास कि दिल को सुकून मिल जाए।

जब मैं पहली बार उनके घर आया था, तो वो मुझे देखकर शरमा गई थीं।

मैंने भी उन्हें देखकर अपनी साँसें रोक ली थीं। उन्होंने हल्की गुलाबी साड़ी पहनी हुई थी, और उनके बाल गीले थे, जैसे अभी-अभी नहाकर आई हों।

उनके गालों पर पानी की बूंदें थीं जो सूरज की रोशनी में चमक रही थीं।

“आओ सोनू, स्वागत है,” उन्होंने कहा और मेरे कंधे पर हाथ रखा।

उनके हाथ की हल्की सी छुअन से मेरे शरीर में करंट सा दौड़ गया।

मैंने उन्हें देखा और उनकी आँखों में कुछ पल के लिए खो गया।

धीरे-धीरे हमारी बातें बढ़ने लगीं। रात को खाना खाने के बाद हम छत पर बैठकर बातें करते।

वो मुझसे अपनी जिंदगी की बातें शेयर करतीं – कैसे उनकी शादी एक रस्म बनकर रह गई थी, कैसे उनके पति उन्हें समय नहीं देते, कैसे वो अकेली महसूस करती हैं।

एक रात, हम छत पर बैठे थे। चाँद पूरा था और उसकी रोशनी नीलम काकी के चेहरे पर पड़ रही थी। वो कुछ उदास लग रही थीं।

“क्या हुआ काकी, आप उदास क्यों हैं?” मैंने पूछा।

उन्होंने मेरी तरफ देखा। उनकी आँखों में आँसू थे। “कुछ नहीं सोनू, बस ऐसे ही… कभी-कभी लगता है कि मेरी जिंदगी में कुछ कमी है।”

मैंने हिम्मत करके उनका हाथ पकड़ लिया। उनका हाथ ठंडा था। “काकी, आप अकेली नहीं हैं। मैं हूँ ना आपके साथ।”

उन्होंने मेरा हाथ कसकर पकड़ लिया। “तुम कितने अच्छे हो सोनू… तुम्हारी काकी बहुत भाग्यशाली है जो तुम जैसा भतीजा मिला है।”

मैंने कहा, “नहीं काकी, भाग्यशाली तो मैं हूँ जो आप जैसी…”

मेरी बात अधूरी रह गई। हम एक-दूसरे की आँखों में देख रहे थे। वो पल कुछ अलग था। हवा में कुछ बदल रहा था।

अगले दिन से हमारे बीच की बातें बदल गईं। वो मुझसे और खुलकर बातें करने लगीं।

कभी-कभी तो वो मेरे कमरे में आकर मुझसे घंटों बातें करतीं।

हमारी बातें शुरू होतीं सुबह के नाश्ते से और खत्म होतीं रात के खाने के बाद।

एक शाम, मैं घर आया तो देखा कि काकी अकेली बैठी रो रही थीं।

मैंने पूछा तो पता चला कि काका जी आज फिर काम से बाहर गए हैं और कई दिनों बाद लौटेंगे।

“मैं हमेशा अकेली रह जाती हूँ सोनू,” उन्होंने रोते हुए कहा।

मैंने उन्हें गले लगा लिया। वो मेरे सीने से लिपटकर रोने लगीं। मैं उनके बालों को सहलाता रहा।

धीरे-धीरे उनका रोना बंद हुआ, लेकिन हम एक-दूसरे को पकड़े रहे।

उनके बालों की खुशबू मेरे दिमाग में घर कर रही थी।

उनका शरीर मेरे शरीर से सटा हुआ था। मैं उनकी धड़कन महसूस कर सकता था। वो भी मेरी धड़कन सुन रही थीं।

“सोनू…” उन्होंने हल्की आवाज में कहा।

“हाँ काकी,” मैंने कहा।

“क्या तुम मुझे पसंद करते हो?” उन्होंने पूछा।

मैंने उन्हें थोड़ा दूर किया और उनकी आँखों में देखा। “बहुत ज्यादा काकी… इतना कि शब्दों में बयां नहीं कर सकता।”

उनकी आँखों में आँसू फिर भर आए, लेकिन इस बार वो खुशी के आँसू थे। “मैं भी तुम्हें बहुत पसंद करती हूँ सोनू… शायद ये प्यार है…”

मेरा दिल जोर-जोर से धड़कने लगा।

मैंने उनका चेहरा अपने हाथों में लिया और धीरे से उनके गाल पर चूमा।

वो सिहर उठीं, लेकिन विरोध नहीं किया।

“काकी, मैं आप से प्यार करता हूँ,” मैंने कहा।

“मैं भी तुमसे प्यार करती हूँ सोनू,” उन्होंने कहा और मेरे होंठों पर अपने होंठ रख दिए।

वो पहला चुंबन था – मीठा, नरम, और पूरी तरह से हमारा।

हम एक-दूसरे के होंठों को चूमते रहे, जैसे यही हमारी दुनिया हो।

धीरे-धीरे हमारे चुंबन गहरे होने लगे। मेरी जीभ उनके मुँह में घुसी और उनकी जीभ से खेलने लगी।

उनका स्वाद अमृत जैसा था। वो मेरे बालों में हाथ फेर रही थीं और मुझे और पास खींच रही थीं।

मैंने उनके गले पर चूमना शुरू किया। उनकी गर्दन बहुत नरम थी।

वो सिसकारी, “आह… सोनू… धीरे…”

“काकी, आज मैं आपको अपना बनाना चाहता हूँ,” मैंने कहा।

उन्होंने मेरी तरफ देखा। उनकी आँखों में वासना और प्यार दोनों थे। “आज रात मेरा है सोनू… आज मैं पूरी तरह से तुम्हारी हूँ।”

मैंने उन्हें अपनी बाहों में उठाया और अपने कमरे में ले गया।

कमरे में रोशनी धीमी थी। मैंने उन्हें बेड पर बिठाया और उनके सामने घुटनों के बल बैठ गया।

“आप बहुत खूबसूरत हैं काकी,” मैंने कहा और उनके पैरों को चूमा।

वो शरमा गईं। “सोनू, ये सब…”

“शांत रहो काकी, आज मैं आपकी इज्जत करता हूँ, आपकी पूजा करता हूँ,” मैंने कहा।

मैंने धीरे-धीरे उनकी साड़ी खोलनी शुरू की। वो शरमा रही थीं, लेकिन मुझे रोक नहीं रही थीं।

जब मैंने उनकी साड़ी उतार दी, तो वो सिर्फ ब्लाउज और पेटीकोट में रह गईं।

मैंने उनके पैरों को चूमा और धीरे-धीरे ऊपर बढ़ा।

उनकी जांघें बहुत गोरी और नरम थीं।

मैंने उनकी जांघों पर चूमना शुरू किया। वो कांपने लगीं।

“सोनू… बहुत गुदगुदी हो रही है…” उन्होंने कहा।

मैंने उनका पेटीकोट ऊपर उठाया और उनकी जांघों को चूमता रहा।

धीरे-धीरे मैं उनकी पैंटी तक पहुँचा। उनकी पैंटी गीली हो चुकी थी। मैंने उस पर चूमा और उनकी खुशबू सूंघी।

“काकी, आपकी बुर कितनी खूबसूरत है,” मैंने कहा।

वो और शरमा गईं। “सोनू, ये शब्द…”

“ये सच है काकी, आपकी बुर मेरे लिए सबसे पवित्र जगह है,” मैंने कहा।

मैंने उनकी पैंटी उतार दी। उनकी बुर साफ शेव की हुई थी, गुलाबी रंग की, और बहुत खूबसूरत। मैंने उसे देखा और फिर उस पर अपने होंठ रख दिए।

“आह… सोनू…” वो उछल पड़ीं।

मैंने उनकी बुर को चाटना शुरू किया। उसका स्वाद अमृत जैसा था – थोड़ा खट्टा, थोड़ा मीठा।

मैंने उनकी बुर के होंठों को चूमा, फिर उसके बीच की दरार में जीभ फेरनी शुरू की।

“आह… हाँ… और करो सोनू… बहुत मजा आ रहा है…” वो कराहने लगीं।

मैंने उनकी बुर में अपनी जीभ डाल दी। वो पागल हो गईं और मेरे सिर को अपनी बुर पर दबाने लगीं।

मैं उनकी बुर को चाटता रहा, कभी ऊपर, कभी नीचे, कभी अंदर।

करीब दस मिनट तक मैंने उनकी बुर चाटी। फिर वो झड़ गईं। उनकी बुर से पानी निकला और मैंने सब पी लिया।

वो हांफ रही थीं और मुझे देख रही थीं प्यार भरी नजरों से।

“तुम बहुत अच्छे हो सोनू… मेरी बुर को इतना मजा कभी नहीं मिला,” उन्होंने कहा।

मैंने उठकर उनका ब्लाउज खोला।

उनके मम्मे ब्रा में कैद थे। मैंने उनकी ब्रा भी खोल दी।

उनके मम्मे बाहर आ गए – बड़े, गोल, और बहुत खूबसूरत। उनके निपल्स गुलाबी थे और सख्त हो चुके थे।

“आपके दूध कितने बड़े और खूबसूरत हैं काकी,” मैंने कहा।

“तुम्हें पसंद आए सोनू?” उन्होंने पूछा।

“बहुत ज्यादा,” मैंने कहा और एक मम्मे को अपने मुँह में भर लिया।

मैंने उनके निपल्स को चूसना शुरू किया। वो आहें भरने लगीं।

मैं एक निपल्स को चूसता और दूसरे को हाथ से मसलता।

उनके निपल्स बहुत संवेदनशील थे। वो मेरे बालों में हाथ फेर रही थीं और मुझे और पास खींच रही थीं।

“आह… सोनू… और चूसो… मेरे निपल्स को खा जाओ…” वो कराह रही थीं।

मैंने दूसरा मम्मा भी चूसा।

दोनों मम्मों को बारी-बारी से चूसता रहा। वो पागल हो रही थीं।

अब मैंने अपने कपड़े उतारे। मेरा लंड पूरी तरह से खड़ा था।

उन्होंने उसे देखा और उनकी आँखें खुली रह गईं।

“सोनू, तुम्हारा लंड कितना बड़ा और खूबसूरत है,” उन्होंने कहा।

“ये सब आपके लिए है काकी,” मैंने कहा।

वो बैठीं और मेरे लंड को अपने हाथ में लिया। उनका हाथ बहुत नरम था।

उन्होंने मेरे लंड को सहलाया और फिर उस पर चूमा।

“आह… काकी…” मैं सिहर उठा।

उन्होंने मेरे लंड को अपने मुँह में ले लिया और चूसना शुरू किया।

उनकी जीभ मेरे लंड के सुपारे पर चक्कर काट रही थी।

वो पूरा लंड अपने मुँह में ले रही थीं और फिर बाहर निकालतीं।

“काकी… बहुत मजा आ रहा है…” मैंने कहा।

वो और तेज चूसने लगीं। मेरा लंड उनके मुँह में आगे-पीछे हो रहा था।

मैं उनके बालों को सहलाता रहा। करीब दस मिनट तक उन्होंने मेरा लंड चूसा।

फिर मैंने उन्हें बेड पर लिटाया। उनकी टांगें फैलाईं और उनकी बुर को देखा। वो गीली हो चुकी थी और तैयार थी।

“काकी, अब मैं आपकी बुर में अपना लंड डालना चाहता हूँ,” मैंने कहा।

“हाँ सोनू, डाल दो… मेरी बुर तुम्हारे लंड के लिए तरस रही है,” उन्होंने कहा।

मैंने अपने लंड का सुपारा उनकी बुर के मुँह पर रखा और धीरे से दबाया।

वो थोड़ी टाइट थी, लेकिन गीली होने के कारण लंड अंदर चला गया।

“आह… सोनू… धीरे… बहुत बड़ा है तुम्हारा लंड…” वो कराहीं।

मैंने धीरे-धीरे धक्के मारने शुरू किए। उनकी बुर बहुत गर्म और टाइट थी।

मेरा लंड पूरी तरह से अंदर-बाहर हो रहा था। वो मेरे साथ ताल मिलाकर अपनी कमर उठा रही थीं।

“आह… हाँ… और जोर से सोनू… मेरी बुर को फाड़ दो… बहुत मजा आ रहा है…” वो चीख रही थीं।

मैंने स्पीड बढ़ा दी। मेरे धक्के तेज हो गए। उनके मम्मे उछल रहे थे और मैं उन्हें दबाता जा रहा था।

उनके निपल्स मेरे हाथों में थे और मैं उन्हें मसल रहा था।

“काकी… आपकी बुर बहुत अच्छी है… इतनी टाइट… इतनी गर्म…” मैंने कहा।

“तुम्हारा लंड भी बहुत अच्छा है सोनू… मेरी बुर को पूरी तरह से भर दिया है…” वो कह रही थीं।

हम दोनों पसीने से लथपथ हो चुके थे।

कमरे में हमारी सांसों की आवाज और चुदाई की आवाजें गूंज रही थीं।

मैं उनकी बुर में अपना लंड पेलता जा रहा था और वो मजे ले रही थीं।

थोड़ी देर बाद मैंने उनको घोड़ी बनाया। वो अपने हाथों और घुटनों के बल हो गईं और मैंने पीछे से उनकी बुर में लंड डाल दिया।

इस पोजीशन में लंड और गहरा जा रहा था।

“आह… सोनू… पीछे से बहुत गहरा जा रहा है… मेरी बुर फट जाएगी…” वो चीखीं।

“नहीं काकी, आपकी बुर बहुत मजबूत है… ये मेरे लंड को अच्छे से ले सकती है…” मैंने कहा और जोर-जोर से धक्के मारने लगा।

उनकी गांड बहुत मोटी और गोल थी।

मैंने उनकी गांड को थपथपाना शुरू किया।

हर थपकी के साथ वो और उत्तेजित हो रही थीं।

“मारो सोनू… मेरी गांड को मारो… और जोर से चोदो… मैं झड़ने वाली हूँ…” वो चिल्ला रही थीं।

मैंने स्पीड और बढ़ा दी। मेरा लंड उनकी बुर में तेजी से अंदर-बाहर हो रहा था।

फिर वो झड़ गईं।

उनकी बुर ने मेरे लंड को कसकर पकड़ लिया और मुझे और मजा आने लगा।

“काकी… मैं भी झड़ने वाला हूँ…” मैंने कहा।

“अंदर ही डाल दो सोनू… मेरी बुर में अपना सारा प्यार डाल दो…” उन्होंने कहा।

मैंने कुछ और धक्के मारे और फिर उनकी बुर में ही झड़ गया।

मेरा गर्म वीर्य उनकी बुर में भर गया।

वो भी मेरे साथ झड़ीं और हम दोनों एक-दूसरे से लिपटकर बेड पर गिर गए।

कुछ देर तक हम वैसे ही लेटे रहे।

मैं उनके पीछे था और उनके मम्मों को अपने हाथों में लिए हुए था।

उनके निपल्स अभी भी सख्त थे।

“सोनू, ये रात मेरी जिंदगी की सबसे खूबसूरत रात थी,” उन्होंने कहा।

“मेरे लिए भी काकी… मैं आपसे बहुत प्यार करता हूँ,” मैंने कहा।

“मैं भी तुमसे बहुत प्यार करती हूँ सोनू… अब मैं हमेशा तुम्हारी हूँ,” उन्होंने कहा।

हमने फिर से किस किया। उनके होंठों का स्वाद मुझे बहुत पसंद आया।

फिर मैंने उनकी बुर से अपना लंड बाहर निकाला और उसे साफ किया।

उनकी बुर से मेरा वीर्य बह रहा था।

“देखो काकी, ये हमारे प्यार का निशान है,” मैंने कहा।

वो शरमा गईं। “सोनू, तुम बहुत शरारती हो…”

“सिर्फ आपके लिए काकी,” मैंने कहा और उन्हें फिर से गले लगा लिया।

उस रात के बाद हमारा रिश्ता बदल गया।

अब हम सिर्फ काकी और भतीजे नहीं थे, बल्कि प्यार करने वाले दो दिल थे।

जब भी काका जी बाहर जाते, हम एक-दूसरे को अपना प्यार देते।

नीलम काकी अब हमेशा खुश रहती हैं।

उनकी बुर अब हमेशा मेरे लंड के लिए तरसती है, और मेरा लंड उनकी बुर के बिना अधूरा लगता है।

हमारे लंड और बुर का मिलन हमारे प्यार की सबसे बड़ी मिसाल है।

दोस्तों, ये मेरी और नीलम काकी की प्यार भरी कहानी थी।

आशा करता हूँ आपको पसंद आई होगी। अगली कहानी में बताऊँगा की एक दिन काका ने देख लिया और हमने थ्रीसम किये।

NEXT PART: काकी और चाची को मैं और काका मिलकर चोदे (13 september ko 3 pm par padhen)

नोट: यहां पोस्ट की गई सभी कहानियां केवल मनोरंजन के उद्देश्य से प्रस्तुत की गई हैं। कृपया इन्हें वास्तविक जीवन से जोड़कर न देखें। कहानी में दर्शाए गए किसी भी दृश्य, घटना या चित्र का वास्तविक जीवन में प्रयोग करना हानिकारक हो सकता है। इसके लिए न तो कहानी के लेखक और न ही प्रस्तुतकर्ता जिम्मेदार होंगे। इसलिए कृपया अपनी समझ, बुद्धि और विवेक का उपयोग करें।

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