dost wife chudai kahani
मेरा नाम मास है। मैं दिल्ली के साकेत इलाके में रहता हूं। मेरी उम्र 26 साल है और मेरी हाइट 6 फीट है।
मुझे हमेशा से शादीशुदा औरतें बेहद पसंद हैं, ठीक जेम्स बॉंड की तरह।
इन औरतों में मुझे विशेष रूप से वे आकर्षित करती हैं जिनके बड़े-बड़े चूचिये हों, मध्यम आकार की कमर हो, और विशेष रूप से बड़ी-बड़ी गांड हो। ये तीनों चीजें मुझे बेहद उत्तेजित करती हैं।
मेरा एक बेहद करीबी दोस्त है जिसका नाम सुनील है। वह गोंडा का रहने वाला है और कनॉट प्लेस में काम करता था।
किस्मत से, वह मेरे ही घर के ऊपरी कमरे में किराए पर रहता था। हमारी दोस्ती काफी गहरी थी, लेकिन जब उसकी शादी हुई तो मैं किसी कारणवश उसकी शादी में नहीं जा सका।
यह मेरी जिंदगी का सबसे बड़ा अफसोस बन गया, क्योंकि मुझे नहीं पता था कि इस शादी में मेरी किस्मत भी छुपी हुई है।
एक दिन जब मैं घर लौटा, तो मैंने देखा कि सुनील एक लड़की के साथ था। वह लड़की इतनी खूबसूरत थी कि मेरे होश उड़ गए।
वह ठीक वैसी ही थी जैसी लड़कियां मुझे पसंद थीं – बड़े-बड़े दूध, बेहद मोटी गांड, और एक ऐसा जिस्म जो किसी भी मर्द को पागल बना दे।
मेरा लंड तुरंत खड़ा हो गया और मुझे उसे तुरंत चोदने का मन होने लगा।
तभी मुझे पता चला कि वह सुनील की बीवी है। यह जानकर मुझे और भी ज्यादा मजा आया, क्योंकि अब मुझे लगा कि उसे पटाना और चोदना आसान होगा।
वह रोज मेरे घर आती-जाती रहेगी, और मुझे उसे पटाने के कई मौके मिलेंगे।
मैंने तय कर लिया कि मैं इस माल को हासिल करके रहूंगा, चाहे कुछ भी हो जाए।
उसका नाम प्रिया था। वह 24 साल की थी और उसका जिस्म एकदम परिपक्व था।
उसके बड़े-बड़े दूध उसके ब्लाउज से बाहर निकलने को तरस रहे थे, और उसकी गांड ऐसी थी कि मैं बस उसे देखता ही रह गया।
मैंने उसे पटाना शुरू कर दिया।
जब मैंने पहली बार प्रिया को देखा, वह सुनील के साथ सीढ़ियों से उतर रही थी।
उसने एक हल्का सा नीला सूट पहना था जो उसके जिस्म पर बेहद फिट बैठा था।
उसके बड़े-बड़े दूध सूट के ऊपर से ही उभार दे रहे थे, और जब वह चलती थी तो उसकी गांड इतनी मोटी थी कि मेरा मुंह खुला रह गया।
“अरे मास भैया, यह मेरी बीवी प्रिया,” सुनील ने मुझसे मिलवाया।
मैंने उसे नमस्ते की और जब वह झुककर पैर छूने लगी, तो मुझे उसके सूट के ऊपर से उसके बड़े-बड़े दूध साफ दिखाई दिए।
उसका क्लीवेज इतना गहरा था कि मेरा लंड तुरंत खड़ा हो गया।
मैंने कल्पना की कि कैसे मैं उन बड़े दूधों को मसलूंगा, कैसे उसके निप्पलों को चूसूंगा, और कैसे उसकी बुर को अपने लंड से भरूंगा।
“नमस्ते भैया,” प्रिया ने शरमाते हुए कहा।
उसकी आवाज इतनी मधुर थी कि मेरे रोंगटे खड़े हो गए।
मैंने नोटिस किया कि सुनील जब काम पर जाता था, तो प्रिया अकेली घर में रहती थी। यह मेरे लिए सुनहरा मौका था।
अगले कुछ दिनों में, मैंने जानबूझकर सुनील के कमरे के आसपास घूमना शुरू कर दिया।
जब भी प्रिया सीढ़ियों से उतरती या चढ़ती, मैं उसे घूरता रहता।
एक दिन जब वह नहाकर आई, तो उसने गीले बालों में तौलिया लपेटा हुआ था और साड़ी पहनी थी।
उसकी साड़ी का पल्लू गीला होकर उसके बड़े-बड़े दूधों से चिपक गया था, और उसके निपल्स साफ दिख रहे थे।
“अरे वाह प्रिया जी, आप तो बिल्कुल हीरोइन लग रही हो,” मैंने उसे तारीफ दी।
वह शरमा गई और बोली, “भैया, आप भी ना…”
“अरे भैया-भैया मत कहो, मुझे मास ही बुलाओ,” मैंने कहा और उसकी आंखों में घूरते हुए उसके होंठों को देखा।
वह समझ गई कि मैं उसे किस नजर से देख रहा हूं, लेकिन वह मना नहीं कर रही थी।
बल्कि वह भी मुझे कुछ-कुछ इशारे दे रही थी। शायद सुनील उसे वो संतुष्टि नहीं दे पा रहा था जो एक जवान औरत को चाहिए होती है।
एक दिन सुनील काम पर गया और प्रिया अकेली घर में थी। मैंने सोचा यही सही मौका है।
मैंने बहाने से उसके कमरे का दरवाजा खटखटाया।
“कौन है?” उसकी आवाज अंदर से आई।
“मैं हूं मास, तुम्हारा पानी का पाइप चेक करने आया हूं,” मैंने बहाना बनाया।
दरवाजा खुला और प्रिया सामने खड़ी थी। उसने एक पतला सा नाइटी पहना था जो उसके घुटनों तक था।
उसके बड़े-बड़े दूध नाइटी में कैद थे और उसके निप्पल मोटे होकर कपड़े से बाहर उभार दे रहे थे।
“आइए भैया… मतलब मास,” वह कहते-कहते रुक गई।
मैं अंदर आया और जानबूझकर दरवाजा बंद कर दिया। कमरे में अब सिर्फ हम दोनों थे।
प्रिया थोड़ा घबराई हुई लग रही थी, लेकिन उसकी आंखों में एक अजीब सी चमक थी।
“क्या बात है प्रिया, तुम इतनी उदास क्यों लग रही हो?” मैंने पूछा और उसके करीब गया।
“कुछ नहीं… बस ऐसे ही,” वह नीचे देखते हुए बोली।
मैंने उसका चेहरा उठाया और उसकी आंखों में देखा। “सुनील तुम्हें खुश नहीं रख पा रहा क्या?”
यह सुनकर वह चौंक गई। “आप… आपको कैसे पता?”
“मुझे सब पता है प्रिया, मैं एक औरत की आंखों में उसकी भूख देख लेता हूं,” मैंने कहा और उसके कंधे पर हाथ रख दिया।
उसने मेरा हाथ हटाने की कोशिश नहीं की। बल्कि वह मेरी तरफ और करीब आ गई।
मुझे उसकी सांसों की गर्माहट महसूस हुई और मेरा लंड तुरंत खड़ा हो गया।
मैंने धीरे से उसका चेहरा अपने हाथों में लिया और उसके होंठों पर अपने होंठ रख दिए।
वह पहले तो थोड़ा हिचकिचाई, लेकिन फिर वह भी मेरे साथ देने लगी।
हमारी जीभें आपस में खेलने लगीं और मैंने उसे कसकर अपनी बाहों में भर लिया।
मेरे हाथ उसकी पीठ पर घूमने लगे और धीरे-धीरे नीचे की तरफ बढ़ने लगे।
मैंने उसकी मोटी गांड को सहलाना शुरू कर दिया। वह इतनी नरम और मुलायम थी कि मैं उसे मसलता ही रह गया।
“ओह मास… यह गलत है,” प्रिया ने कहा लेकिन वह मुझे दूर नहीं धकेल रही थी।
“कुछ भी गलत नहीं है प्रिया, यह तो प्यार है,” मैंने कहा और उसके गालों पर किस करने लगा।
मैंने उसके कानों को चूमा, उसकी गर्दन पर किस किए, और धीरे-धीरे नीचे की तरफ बढ़ने लगा।
मैंने उसकी नाइटी के बटन खोलने शुरू किए और एक-एक करके सारे बटन खोल दिए।
जैसे ही नाइटी खुली, मेरे सामने उसके बड़े-बड़े दूध ब्रा में कैद दिखाई दिए।
वह इतने बड़े थे कि ब्रा भी उन्हें ढंक नहीं पा रही थी। ऊपर से उसकी क्लीवेज इतनी गहरी थी कि मेरा लंड पैंट में तड़पने लगा।
“वाह प्रिया, तुम्हारे दूध तो बेहद खूबसूरत हैं,” मैंने कहा और उसके ब्रा के ऊपर से ही उसके निप्पलों को सहलाना शुरू कर दिया।
“आहह… धीरे मास… वहां बहुत सेंसिटिव है,” प्रिया ने कराहते हुए कहा।
मैंने उसकी ब्रा के हुक खोले और जैसे ही ब्रा हटी, उसके बड़े-बड़े दूध आजाद होकर बाहर आ गए।
उसके निपल्स गुलाबी और मोटे थे, बिल्कुल अंगूर की तरह। मैंने एक दूध को अपने हाथ में लिया और उसे मसलने लगा।
वह इतना नरम और गर्म था कि मैं उसे छोड़ना ही नहीं चाहता था।
“ओहह… मास… यह क्या कर रहे हो तुम,” प्रिया ने सिसकते हुए कहा।
“तुम्हें प्यार कर रहा हूं प्रिया, तुम्हें वो सुख दे रहा हूं जो तुम्हें चाहिए,” मैंने कहा और उसके एक निप्पल को अपने मुंह में ले लिया।
मैंने उसके निप्पल को चूसना शुरू किया, कभी धीरे-धीरे तो कभी जोर-जोर से।
मेरे दूसरे हाथ ने उसके दूसरे दूध को मसलना जारी रखा।
प्रिया की सांसें तेज होने लगीं और वह मेरे सिर को अपने दूधों पर और दबाने लगी।
“आहह… हां… और चूसो… बहुत मजा आ रहा है,” प्रिया ने मजे से कहा।
मैंने उसके दोनों दूधों को बारी-बारी से चूसा, उनके निपल्स को काटा, और उन्हें अपने हाथों से मसला।
वह पूरी तरह से गर्म हो चुकी थी और उसकी बुर पानी छोड़ने लगी थी।
मैंने उसकी नाइटी पूरी तरह से उतार दी और अब वह सिर्फ पैंटी में थी।
मैंने उसे बिस्तर पर लिटाया और उसके पैरों के बीच में आ गया। मैंने उसकी पैंटी के ऊपर से ही उसकी बुर को सहलाना शुरू कर दिया।
“ओह मास… वहां मत करो… गंदी जगह है,” प्रिया ने शरमा कर कहा।
“कुछ भी गंदा नहीं है प्रिया, यह तो सबसे प्यारी जगह है,” मैंने कहा और उसकी पैंटी को नीचे खींच लिया।
जैसे ही उसकी पैंटी उतरी, मेरे सामने उसकी सुंदर बुर दिखाई दी।
वह पूरी तरह से क्लीन शेव थी और उसकी गुलाबी चूत पानी से तर हो रही थी। मैंने उसके पैरों को फैलाया और उसकी बुर को देखने लगा।
“कितनी खूबसूरत है तुम्हारी बुर प्रिया,” मैंने कहा और उस पर एक किस कर दिया।
प्रिया की कमर ऊपर उठ गई और उसने मेरे सिर को पकड़ लिया।
मैंने अपनी जीभ निकाली और उसकी बुर की दरार पर चाटना शुरू कर दिया। वह इतनी मीठी थी कि मैं उसे चाटता ही रह गया।
“आहह… हां… और चाटो… बहुत अच्छा लग रहा है,” प्रिया ने कराहते हुए कहा।
मैंने उसकी बुर की दरार को अपनी जीभ से चाटा, उसके क्लिट को चूसा, और उसकी बुर में अपनी जीभ डाल दी।
वह पागलों की तरह चिल्लाने लगी और उसकी कमर ऊपर-नीचे होने लगी।
“ओहह… मास… मैं पागल हो जाऊंगी… रुको… नहीं… और करो,” वह बेसुध होकर बोल रही थी।
मैंने उसकी बुर को अच्छी तरह से चाटा, उसका रस पिया, और उसे पूरी तरह से गीला कर दिया।
उसकी बुर अब पूरी तरह से तैयार थी मेरे लंड को अपने अंदर लेने के लिए।
अब मैंने खुद भी अपने कपड़े उतारने शुरू किए। मैंने अपनी शर्ट उतारी, फिर पैंट उतारी, और अंडरवियर भी उतार दिया।
जैसे ही मेरा लंड बाहर आया, प्रिया की आंखें हैरान रह गईं।
मेरा लंड करीब 8 इंच लंबा और काफी मोटा था। वह पूरी तरह से खड़ा था और उसका सुपाड़ा लाल होकर तैयार था।
“ओह माय गॉड… यह तो बहुत बड़ा है,” प्रिया ने कहा और उसे देखते ही रह गई।
“तुम्हें दर्द तो नही होगा, क्या तुम इसे अपने अंदर ले सकोगी?” मैंने पूछा।
“मैं कोशिश करूंगी… लेकिन धीरे-धीरे डालना, और फिर अन्दर रगड़ने के बाद चोदना।,” उसने कहा।
मैंने उसे बिस्तर पर लिटाया और उसके पैरों के बीच में आ गया। मैंने अपने लंड को उसकी बुर के मुंह पर रखा और धीरे-धीरे अंदर डालने की कोशिश की।
मेरे लंड का सुपाड़ा उसकी बुर में घुसा और वह एकदम से चीख पड़ी।
“आहह… बहुत दर्द हो रहा है… रुको… धीरे करो,” प्रिया ने कहा।
मैंने रुककर उसके होंठों पर किस किया और उसके दूधों को सहलाने लगा।
थोड़ी देर बाद जब वह ठीक हुई, तो मैंने थोड़ा और अंदर धकेल दिया।
“आहह… हां… अब ठीक है… और डालो,” उसने कहा।
मैंने धीरे-धीरे अपना पूरा लंड उसकी बुर में उतार दिया। वह इतनी टाइट थी कि मेरा लंड पूरी तरह से घिर गया।
मैंने कुछ देर रुककर अपने लंड को उसके अंदर समाया महसूस किया।
और फिर रगड़ना शुरू किया।
“कैसा लग रहा है?” मैंने पूछा।
“बहुत अच्छा… तुम्हारा लंड तो सुनील से दोगुना बड़ा है,” उसने कहा।
यह सुनकर मुझे और भी जोश आया। मैंने धीरे-धीरे अपना लंड बाहर निकाला और फिर अंदर डाला।
यह प्रक्रिया मैंने धीरे-धीरे शुरू की।
“आहह… हां… और तेज करो… मुझे बहुत मजा आ रहा है,” प्रिया ने कहा।
मैंने अपनी स्पीड बढ़ाई और उसे जोर-जोर से चोदने लगा।
उसकी बुर मेरे लंड को कसकर पकड़े हुए थी और मुझे बेहद मजा आ रहा था।
मैंने प्रिया के पैरों को अपने कंधों पर रखा और जोर-जोर से उसकी बुर में अपना लंड पेलने लगा।
उसके बड़े-बड़े दूध उछल-उछल कर मुझे और उत्तेजित कर रहे थे।
मैंने एक हाथ से उसके दूध को पकड़ा और उसके निप्पल को मसलते हुए चोदना जारी रखा।
“आहह… मास… और तेज… मुझे और चोदो… मैं तुम्हारी हूं… आज से मैं सिर्फ तुम्हारी हूं,” प्रिया ने चिल्लाते हुए कहा।
मैंने उसे घोड़ी बनाया और पीछे से उसकी मोटी गांड पर हाथ मारते हुए उसकी बुर में अपना लंड डाल दिया।
इस एंगल में उसकी बुर और भी टाइट लग रही थी।
“आहह… यह पोजीशन बहुत अच्छी है… और गहरा जा रहा है,” प्रिया ने कहा।
मैंने उसकी कमर पकड़ी और जोर-जोर से उसे पीछे से चोदने लगा।
उसकी गांड की थप-थप की आवाज कमरे में गूंज रही थी।
अब प्रिया मेरे ऊपर आ गई और अपने हाथों से मेरा लंड पकड़कर अपनी बुर में डाल लिया।
वह ऊपर-नीचे उछलने लगी और उसके बड़े-बड़े दूध मेरे चेहरे के सामने उछल रहे थे।
मैंने उठकर उसके एक दूध को मुंह में ले लिया और उसके निप्पल को चूसने लगा।
वह और भी तेज उछलने लगी और मेरा लंड उसकी बुर के अंदर-बाहर हो रहा था।
“आहह… मास… मैं झड़ने वाली हूं… और तेज करो,” प्रिया ने कहा।
मैंने उसे फिर से लिटाया और उसके पैरों को फैलाकर जोर-जोर से चोदने लगा।
मेरा लंड अब उसकी बुर में पूरी तरह से घुस-बाहर हो रहा था और हम दोनों पसीने से तर हो चुके थे।
“आहह… मास… अब मैं नहीं रुक सकती… मैं झड़ रही हूं… ओहह… आहह…” प्रिया ने चिल्लाते हुए कहा और उसकी बुर ने गर्म गर्म पानी छोड़ दिया।
उसकी बुर के कसाव से मेरा लंड भी झड़ने वाला था।
मैंने अपना लंड बाहर निकाला और उसके बड़े-बड़े दूधों पर अपना गर्म वीर्य छोड़ दिया।
“ओहह… यह क्या… बहुत गर्म है,” प्रिया ने कहा।
मेरा वीर्य उसके दूधों पर फैल गया और मैंने अपने लंड को उसके दूधों पर रगड़ते हुए साफ किया।
थोड़ी देर आराम करने के बाद, मैंने देखा कि मेरा लंड फिर से खड़ा हो रहा है।
प्रिया भी तैयार थी और उसने मेरे लंड को अपने हाथ में लेकर सहलाना शुरू कर दिया।
“तुम तो बहुत जल्दी तैयार हो जाते हो,” उसने कहा।
“तुम्हारे जैसी खूबसूरत औरत को देखकर कोई भी तैयार हो जाए,” मैंने कहा।
इस बार मैंने उसे उल्टा लिटाया और उसकी गांड के नीचे एक तकिया रखा।
उसकी बुर अब ऊंची हो गई थी और मैंने अपना लंड फिर से उसके अंदर डाल दिया।
इस बार मैंने कोई रहम नहीं किया। मैंने पूरी ताकत से उसे चोदना शुरू कर दिया।
उसकी बुर अब पूरी तरह से खुल चुकी थी और मेरा लंड बिना किसी रुकावट के अंदर-बाहर हो रहा था।
“आहह… मास… मेरी बुर फाड़ दोगे क्या… इतना तेज मत करो… नहीं… और तेज करो… हां… बस ऐसे ही,” प्रिया ने कहा।
मैंने उसके दोनों दूधों को पकड़ा और उन्हें कसकर दबाते हुए चोदना जारी रखा।
उसके निपल्स अब पूरी तरह से कड़े हो चुके थे और मैंने उन्हें अपने हाथों से मसलना जारी रखा।
“बोलो… कौन है तुम्हारा मालिक?” मैंने उससे पूछा।
“आप… आप हैं मेरे मालिक… मैं आपकी रंडी हूं… मुझे चोदो… अपनी रंडी को चोदो,” प्रिया ने कहा।
यह सुनकर मैं और भी जोश में आ गया। मैंने उसे घोड़ी बनाया और पीछे से उसकी बुर में अपना लंड डाल दिया।
इस बार मैंने उसकी गांड पर हाथ मारते हुए उसे चोदा।
“आहह… मेरी गांड मत मारो… दर्द हो रहा है… लेकिन अच्छा लग रहा है… और मारो,” वह बोल रही थी।
मैंने उसकी गांड को लाल कर दिया और फिर उसे लिटाकर उसके मुंह में अपना लंड दे दिया।
“चूसो इसे… अपने मुँह से चूसो,” मैंने कहा।
प्रिया ने मेरे लंड को अपने मुंह में लिया और चूसना शुरू कर दिया।
वह मेरे सुपाड़े को अपनी जीभ से चाट रही थी और मेरे लंड को अपने होंठों से कसकर पकड़े हुए थी।
“आहह… बहुत अच्छा चूस रही हो… और चूसो,” मैंने कहा।
फिर मैंने उसे 69 की पोजीशन में लिटाया। मैं उसके ऊपर था और उसकी बुर को चाट रहा था, जबकि वह मेरे लंड को चूस रही थी।
हम दोनों एक-दूसरे को ओरल प्लेजर दे रहे थे।
उसकी बुर का स्वाद बेहद मीठा था और मैं उसे जीभ से चाटते हुए उसके क्लिट को भी चूस रहा था।
वह भी मेरे लंड को गहराई तक अपने मुंह में लेकर चूस रही थी।
“आहह… मास… मैं फिर से झड़ने वाली हूं… और चाटो… हां… बस ऐसे ही,” प्रिया ने कहा।
मैंने उसे फिर से लिटाया और इस बार मैंने उसके पैरों को बेहद ऊंचा उठाया।
उसकी बुर अब पूरी तरह से खुली हुई थी और मैंने अपना लंड पूरी ताकत से अंदर डाल दिया।
“आहह… मेरी बुर फट जाएगी… इतना गहरा मत डालो… नहीं… और डालो… मुझे पूरा अपना बना लो,” प्रिया ने चिल्लाते हुए कहा।
मैंने पूरी ताकत से उसे चोदना जारी रखा।
उसकी बुर से पिच-पिच की आवाज आ रही थी और हम दोनों का पसीना एक-दूसरे से मिल रहा था।
“आहह… मास… मैं झड़ रही हूं… मुझे अपना वीर्य दो… मेरी बुर में ही झड़ जाओ… आज मैं सेफ पीरियड में हूं… अंदर ही झड़ जाओ,” प्रिया ने कहा।
यह सुनकर मैंने अपना लंड और तेजी से अंदर-बाहर करना शुरू कर दिया। कुछ ही देर में मेरा वीर्य निकलने वाला था।
“आहह… मैं भी आ रहा हूं… ले लो मेरा सारा वीर्य… अपनी बुर में भर लो,” मैंने चिल्लाते हुए कहा।
और फिर मैंने अपना गर्म वीर्य उसकी बुर के अंदर छोड़ दिया।
वह भी झड़ चुकी थी और हम दोनों एक-दूसरे से लिपटकर पड़े रहे।
करीब आधे घंटे बाद जब हम दोनों सांत्वना में आए, तो प्रिया मेरी बाहों में थी।
मैंने उसके बड़े-बड़े दूधों को अपने हाथों में लेकर सहलाया।
“कैसा लगा?” मैंने पूछा।
“यह मेरी जिंदगी का सबसे अच्छा सेक्स था। सुनील कभी मुझे इतना संतुष्ट नहीं कर पाता,” उसने कहा।
“तो फिर अब से हम यह करते रहेंगे। जब भी सुनील काम पर जाएगा, मैं तुम्हें चोदने आऊंगा,” मैंने कहा।
“हां, मैं भी यही चाहती हूं। मैं तुम्हारी हूं मास, आज से सिर्फ तुम्हारी,” उसने कहा और मेरे होंठों पर किस कर लिया।
हम दोनों ने फिर से एक-दूसरे को चूमा और मैंने उसके निप्पलों को फिर से मसलना शुरू कर दिया। मेरा लंड फिर से खड़ा हो रहा था…
अगले दिन सुबह जब सुनील काम पर चला गया, तो प्रिया मेरे कमरे में आ गई।
इस बार उसने एक पारदर्शी नाइटी पहनी हुई थी जिसके नीचे वह बिना ब्रा के थी। उसके बड़े-बड़े दूध और निप्पल साफ दिख रहे थे।
“आज क्या प्लान है?” उसने पूछा।
“आज मैं तुम्हें बाथरूम में चोदूंगा,” मैंने कहा।
मैंने उसे अपनी गोद में उठाया और बाथरूम में ले गया। मैंने शावर चालू किया और हम दोनों गीले हो गए।
उसकी नाइटी पूरी तरह से भीग गई और उसके बड़े-बड़े दूध और भी साफ दिखने लगे।
मैंने उसकी नाइटी फाड़ दी और उसे नंगा कर दिया। फिर मैंने उसे दीवार से सटाया और उसके एक पैर को ऊंचा उठाया।
उसकी बुर अब पूरी तरह से खुली थी और पानी की बौछार में वह और भी सेक्सी लग रही थी।
मैंने अपना लंड उसकी बुर में डाल दिया और पानी के नीचे ही उसे चोदने लगा।
वह मेरे कंधों पकड़कर मुझे और करीब खींच रही थी।
“आहह… पानी में चुदाई का अलग ही मजा है… और तेज करो… मुझे और चोदो,” वह चिल्ला रही थी।
मैंने उसे घुमाकर बाथरूम के फर्श पर घोड़ी बनाया और पीछे से उसकी बुर में अपना लंड डाल दिया।
पानी की बौछार उसकी पीठ पर पड़ रही थी और मैं उसकी मोटी गांड को पकड़कर जोर-जोर से चोद रहा था।
बाथरूम से निकलकर हम रसोई में आ गए। प्रिया बोली, “मैं नाश्ता बना कर लाती हूँ।”
लेकिन मुझसे रहा नहीं गया और मैं किचन में ही चला गया।
प्रिया नाश्ता बना रही थी और मैंने उसे पीछे से पकड़ लिया।
मैंने उसके बड़े-बड़े दूधों को पकड़ा और उसके निप्पलों को मसलने लगा।
“अभी तो रात भर चोदा… फिर से मन कर रहा है?” उसने शरमा कर पूछा।
“तुम्हें देखते ही हमेशा मन करता है,” मैंने कहा और उसकी साड़ी उठाकर उसकी बुर में उंगली करने लगा।
वह गैस पर रोटी बना रही थी और मैं उसे पीछे से चोद रहा था।
मैंने अपना लंड उसकी बुर में डाल दिया और उसे चोदते हुए उसके दूधों को मसल रहा था।
“आहह… रोटी जल जाएगी… धीरे करो… हां… बस ऐसे ही,” वह सिसक रही थी।
मैंने उसे रसोई के काउंटर पर लिटाया और उसके पैरों को फैलाकर जोर-जोर से चोदने लगा।
उसकी बुर अब पूरी तरह से मेरी हो चुकी थी और वह मेरे लंड को बिना किसी दर्द के ले रही थी।
दोपहर को जब हम बेडरूम में थे, तो मैंने उसे अपने ऊपर बैठाया।
वह मेरे लंड पर बैठकर ऊपर-नीचे उछल रही थी और उसके बड़े-बड़े दूध मेरे चेहरे के सामने उछल रहे थे।
मैंने उठकर उसके एक दूध को मुंह में ले लिया और उसके निप्पल को चूसने लगा।
वह और भी तेज उछलने लगी और मेरा लंड उसकी बुर के अंदर-बाहर हो रहा था।
“आहह… मास… मैं झड़ने वाली हूं… और तेज उछलो… हां… बस ऐसे ही,” मैंने कहा।
वह पूरी ताकत से उछलने लगी और फिर वह झड़ गई।
उसकी बुर ने गर्म पानी छोड़ा और मैं भी उसके अंदर ही झड़ गया।
शाम को जब सुनील के आने का समय होने वाला था, तो हमने एक बार और चुदाई की।
इस बार मैंने उसे बहुत धीरे-धीरे और प्यार से चोदा।
मैंने उसके पूरे जिस्म पर किस किए, उसके गालों को चूमा, उसके गले को चूमा, उसके बड़े-बड़े दूधों को चूमा, उसके पेट को चूमा, और फिर उसकी बुर को चाटा।
फिर मैंने धीरे से अपना लंड उसकी बुर में डाला और धीरे-धीरे चोदने लगा।
हम दोनों एक-दूसरे की आंखों में देख रहे थे और प्यार कर रहे थे।
“आहह… मास… मैं तुमसे प्यार करती हूं… मुझे हमेशा ऐसे ही चोदते रहो,” उसने कहा।
“मैं भी तुमसे प्यार करता हूं प्रिया… तुम मेरी हो… सिर्फ मेरी,” मैंने कहा और उसे कसकर अपनी बाहों में भर लिया।
हम दोनों एक साथ झड़े और फिर एक-दूसरे से लिपटकर पड़े रहे।
यह सिर्फ एक दिन की कहानी थी। इसके बाद प्रिया और मैं रोज चुदाई करते थे जब भी सुनील काम पर जाता था।
वह मेरी रंडी बन चुकी थी और मैं उसका मालिक।
उसके बड़े-बड़े दूध, उसकी मोटी गांड, और उसकी टाइट बुर ने मुझे पूरी तरह से अपना दीवाना बना लिया था।
और मेरा बड़ा लंड उसे वो संतुष्टि दे रहा था जो उसे चाहिए थी।
हम दोनों एक-दूसरे से प्यार करते थे और चुदाई करते थे।
यह एक बेहतरीन रिश्ता था जो सिर्फ सेक्स पर आधारित था, लेकिन उसमें बहुत सारा प्यार भी था।
अगली कहानी में बताऊँगा की प्रिया इतनी चुदक्कड हो गयी हमारे पड़ोस मकान में रहने वाले बिहार के दिहाड़ी पर काम करने वाले एक मजदूर से चुदवाई……..और मैं उसे चुदवाते हुए देख लिया फिर हम दोनों एक साथ प्रिया को चोदे………
NEXT PART: बिहारी भाई को चोदते देखकर मैं भी भाभी को चोद दिया
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नोट: यहां पोस्ट की गई सभी कहानियां केवल मनोरंजन के उद्देश्य से प्रस्तुत की गई हैं। कृपया इन्हें वास्तविक जीवन से जोड़कर न देखें। कहानी में दर्शाए गए किसी भी दृश्य, घटना या चित्र का वास्तविक जीवन में प्रयोग करना हानिकारक हो सकता है। इसके लिए न तो कहानी के लेखक और न ही प्रस्तुतकर्ता जिम्मेदार होंगे। इसलिए कृपया अपनी समझ, बुद्धि और विवेक का उपयोग करें।
Mast chudai kahani bhai
Aaj kal to yah sab normal bat h
Babli ji aap kahan se aur kya aap mujhse chudwaogi?