sexy nude chachi sex story
दोस्तो, पिछले भाग में आपने पढ़ा कि कैसे मैंने अपनी चाची अभिलाषा को सेक्सी नाइटी में देखा और मेरा लंड उछाल मारने लगा। अब आगे की कहानी सुनिए।
मेरी आँखें चाची के उस सेक्सी बदन को देखकर चौड़ी हो गईं।
उनकी वो काली ब्रा और पैंटी मेरे लिए एक निमंत्रण की तरह थी।
चाची ने मुझे घूरते देखा और शर्माते हुए बोलीं, “क्या देख रहा है बेशरम? आँखें नीचे कर।”
मैंने हिम्मत करके कहा, “चाची, आप तो बहुत खूबसूरत लग रही हैं। मेरा तो दिल कर रहा है कि आपको अभी इसी वक्त अपनी बाहों में भर लूँ।”
चाची ने मुझे डांटते हुए कहा, “पागल हो गया है? मैं तेरी चाची हूँ, कोई पराई औरत नहीं।”
मैंने कहा, “चाची, आप मेरी चाची हो सकती हैं, लेकिन आप भी औरत हो और मैं मर्द। आज रात हम दोनों अकेले हैं और कोई नहीं जानेगा।”
यह सुनकर चाची की आँखों में एक अजीब सी चमक आ गई।
वे बोलीं, “तू तो बहुत बड़ा शैतान बन गया है। पर सच बता, क्या तूने कभी किसी औरत के साथ…”
मैंने कहा, “हाँ चाची, मैंने अपनी गर्लफ्रेंड के साथ किया है, लेकिन वो आपके सामने कुछ भी नहीं। आप जैसी सेक्सी औरत मैंने आज तक नहीं देखी।”
चाची मुस्कुराईं और कहा, “अच्छा? तो तुझे मैं सेक्सी लगती हूँ?”
मैंने कहा, “बहुत ज्यादा चाची। आपके ये 36 इंच के बूब्स, 32 इंच की कमर और 40 इंच की गांड… कोई भी मर्द आपके लिए मर जाए।”
चाची ने कहा, “ठीक है, आज रात मैं तेरी हूँ। लेकिन यह बात किसी को नहीं बताना, वरना मेरी इज्जत का क्या होगा?”
मैंने वादा किया कि यह हमारे बीच ही रहेगा।
फिर मैंने चाची का हाथ पकड़ा और उन्हें अपनी ओर खींच लिया।
वे मेरी बाहों में आ गईं और मैंने उन्हें कसकर पकड़ लिया।
उनका शरीर मेरे शरीर से सट गया और मैंने महसूस किया कि वे कांप रही थीं।
मैंने उनके गाल पर हाथ रखा और धीरे से उनके होठों पर किस करने लगा।
चाची पहले तो झिझकी, लेकिन फिर वे भी रिस्पांड करने लगीं।
हमारी जीभें एक-दूसरे से मिलीं और हम पागलों की तरह एक-दूसरे को चूसने लगे।
मैंने एक हाथ से उनकी कमर पकड़ी और दूसरे हाथ से उनके बूब्स दबाने लगा।
चाची की साँसें तेज़ हो गईं और वे मुझे और करीब खींचने लगीं।
मैंने उनकी नाइटी के बटन खोलने शुरू किए और एक-एक करके सारे बटन खोल दिए।
अब चाची सिर्फ ब्रा और पैंटी में थीं। मैंने उन्हें बेड पर लिटा दिया और उनके ऊपर चढ़ गया।
मैंने उनकी गर्दन पर किस करना शुरू किया और धीरे-धीरे नीचे की ओर बढ़ा।
मैंने उनकी काली ब्रा के ऊपर से ही उनके बूब्स चूसने शुरू कर दिए।
चाची आहें भरने लगीं, “आह्ह्ह सुनील… और जोर से… बहुत मजा आ रहा है।”
मैंने उनकी ब्रा का हुक खोला और उनके बूब्स आज़ाद हो गए।
वाह क्या नज़ारा था! दो गोरे-गोरे पहाड़ जैसे बूब्स मेरे सामने थे और बीच में गुलाबी निप्पल खड़े थे।
मैंने एक बूब्स को मुँह में लिया और जोर-जोर से चूसने लगा।
चाची मेरे सिर को अपने बूब्स में दबा रही थीं।
मैंने दूसरे हाथ से उनकी पैंटी के ऊपर से उनकी चूत सहलानी शुरू कर दी।
चाची की चूत गर्म हो चुकी थी और पैंटी गीली हो रही थी।
मैंने उनकी पैंटी नीचे खींची और उनकी चूत देखी।
वह बिल्कुल साफ शेव की हुई थी और गुलाबी रंग की थी।
मैंने उनकी चूत पर हाथ फेरा तो चाची कांप उठीं।
मैंने उनकी टांगें खोली और उनकी चूत को चाटना शुरू कर दिया।
चाची पागल हो गईं, “आह्ह्ह… क्या कर रहा है… यह गलत है… पर बहुत अच्छा लग रहा है…”
मैंने उनकी चूत की पंखुड़ियों को अपनी जीभ से चाटा और उनके क्लिटोरिस पर धीरे-धीरे काटने लगा।
चाची की कमर उठने लगी और वे जोर-जोर से चिल्लाने लगीं, “ओह्ह्ह माँ… मर गई… झड़ गई…”
मैंने उनका पानी पी लिया और फिर ऊपर आ गया।
मैंने अपना शॉर्ट और अंडरवियर उतार दिया।
मेरा 8.5 इंच का लंड पूरी तरह खड़ा था और चाची की आँखें उसे देखकर बड़ी-बड़ी हो गईं।
वे बोलीं, “यह तो बहुत बड़ा है… मेरे चाचा का तो आधा है… यह कैसे जाएगा अंदर?”
मैंने कहा, “चाची, डरो मत। थोड़ा दर्द होगा फिर बहुत मजा आएगा।”
मैंने उनकी टांगें अपने कंधों पर रखीं और अपने लंड को उनकी चूत के मुँह पर रखा।
चाची की चूत बहुत टाइट थी क्योंकि उन्हें काफी समय से चुदाई नहीं मिली थी।
मैंने एक धक्का लगाया और मेरा सुपाड़ा अंदर घुस गया।
चाची दर्द से चीखीं, “आह्ह्ह… बाहर निकालो… बहुत दर्द हो रहा है…”
मैंने उनके होठों पर किस किया और धीरे-धीरे अपना पूरा लंड अंदर डाल दिया।
मेरा लंड उनकी चूत की दीवारों से रगड़ खा रहा था और चाची भी धीरे-धीरे मजे लेने लगीं।
मैंने धक्के लगाने शुरू किए। पहले धीरे-धीरे और फिर तेज़-तेज़।
चाची की चूत से “फच्च… फच्च…” की आवाज आने लगी। वे बोलीं, “और जोर से… मेरी चूत फाड़ दो… आज मुझे अपनी बना लो…”
मैंने उनकी टांगें और चौड़ी की और जोर-जोर से चोदने लगा।
बेड की आवाज “किच… किच…” कर रही थी।
चाची के बूब्स हर धक्के के साथ हिल रहे थे और मैं उन्हें दबाते हुए चोद रहा था।
लगभग 20 मिनट तक चोदने के बाद मैं झड़ने वाला था। मैंने पूछा, “चाची, कहाँ निकालूँ?”
वे बोलीं, “अंदर ही डाल दे… आज मैं तेरी हूँ… मेरी चूत में अपना माल छोड़ दे…”
मैंने एक जोरदार धक्का लगाया और अपना सारा वीर्य उनकी चूत में छोड़ दिया।
वे भी झड़ गईं और हम दोनों एक-दूसरे से लिपटकर सो गए।
कुछ देर बाद जब हम उठे तो चाची ने कहा, “तू तो बहुत मर्द है सुनील। आज मुझे असली मजा आया है।”
मैंने कहा, “चाची, अभी तो रात बाकी है।”
फिर हमने दूसरे राउंड की तैयारी की। इस बार चाची ने मुझे डॉगी स्टाइल में चोदने के लिए कहा।
वे घोड़ी बन गईं और मैंने पीछे से उनकी चूत में अपना लंड डाल दिया।
उनकी गांड बहुत मस्त थी और मैं उसे दबाते हुए चोद रहा था।
चाची बोलीं, “और जोर से… मेरी गांड भी मार… आज मुझे पूरी तरह चोद दे…”
मैंने उनकी गांड पर थप्पड़ मारे और उनकी चूत को जोर-जोर से चोदा।
25 मिनट बाद मैं फिर झड़ गया।
इस बार मैंने अपना माल उनकी गांड पर निकाल दिया।
रात भर हमने तीन बार सेक्स किया।
चाची की चूत अब मेरे लंड से ढीली हो गई थी और वे बहुत संतुष्ट थीं।
अगली सुबह जब मैं उठा तो चाची मेरी बाहों में थीं और वे मुझे प्यार से देख रही थीं।
उन्होंने कहा, “सुनील, आज के बाद तू जब भी आएगा, मैं तुझसे चुदवाऊंगी। मैं तेरी रखैल बनकर रहना चाहती हूँ।”
मैंने कहा, “चाची, आप मेरी रखैल नहीं, मेरी रानी हो। मैं आपको हमेशा खुश रखूँगा।”
उसके बाद से जब भी मैं घर आता, मैं और चाची चुपके से मिलते और जमकर चुदाई करते।
चाचा को कुछ पता नहीं चला और हमारा रिश्ता आज भी चल रहा है।
चाची अब मेरी दीवानी हो गई हैं और वह मेरे बिना नहीं रह सकतीं।
धन्यवाद!
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नोट: यहां पोस्ट की गई सभी कहानियां केवल मनोरंजन के उद्देश्य से प्रस्तुत की गई हैं। कृपया इन्हें वास्तविक जीवन से जोड़कर न देखें। कहानी में दर्शाए गए किसी भी दृश्य, घटना या चित्र का वास्तविक जीवन में प्रयोग करना हानिकारक हो सकता है। इसके लिए न तो कहानी के लेखक और न ही प्रस्तुतकर्ता जिम्मेदार होंगे। इसलिए कृपया अपनी समझ, बुद्धि और विवेक का उपयोग करें।
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