मोटी भाभी को रंडी बनाकर चोदा

moti bhabhi ko kutiya banakr choda

हैलो दोस्तों।

मैं राहुल हूं

और एक बार फिर से आप सभी के सामने अपनी एक और सच्ची कहानी लेकर आया हूं।

मैं दिल्ली का रहने वाला हूं।

मेरी हाइट 5 फुट 8 इंच है

और मेरे लंड का साइज 7 इंच है।

अब आप सभी लोगों का ज्यादा समय खराब न करते हुए सीधे आज की कहानी पर आता हूं।

यह बात आज से करीब एक महीने पहले की है।

मैं वेस्ट दिल्ली में अकेला रहता हूं।

मैं एक फार्मासिस्ट हूं।

सितंबर की शुरुआत में दिल्ली में डेंगू के केस बढ़ने लगे थे।

हमारे सामने एक भाभी रहती थीं।

वे अपने पति के साथ रहती थीं।

भाभी थोड़ी मोटी थीं लेकिन मुझे मोटी औरतें बहुत पसंद हैं।

उनका फिगर 36-30-36 था।

मेरी भाभी से कभी ज्यादा बात नहीं हुई थी।

लेकिन जब मैं जिम से आकर शर्ट उतारकर बालकनी में बैठता था

तो भाभी मुझे अक्सर स्माइल देती थीं।

कई बार काम कैसा चल रहा है

जैसी छोटी-मोटी बात भी हो जाती थी।

उनके पति मार्केटिंग में थे।

उनकी शादी को करीब चार साल हो गए थे

लेकिन उनकी कोई औलाद नहीं थी।

एक दिन रात के करीब ग्यारह बजे मैं अपने कमरे में अकेला बैठा एक इंग्लिश फिल्म देख रहा था।

कमरे की लाइट्स धीमी थीं

और स्क्रीन की रोशनी मेरे चेहरे पर पड़ रही थी।

तभी अचानक मेरे घर की डोरबेल बज उठी।

इतनी रात को कौन हो सकता है,

यह सोचते हुए मैं उठा और दरवाजा खोलने गया।

दरवाजा खोलते ही सामने स्वाती भाभी खड़ी थीं।

उनकी आंखों में चिंता साफ दिख रही थी

और चेहरा थोड़ा पीला पड़ गया था।

भाभी ने हल्की आवाज में कहा, “हैलो राहुल। क्या मैंने तुम्हें परेशान तो नहीं किया?”

मैंने तुरंत जवाब दिया, “भाभी नहीं, ऐसा कुछ नहीं है। लेकिन आप इतनी रात को कैसे? सब ठीक तो है ना?”

भाभी ने थोड़ा रुककर,

घबराहट के साथ कहा, “नहीं राहुल, तुम्हारे भैया को बहुत तेज बुखार है। शरीर जल रहा है और मुझे समझ नहीं आ रहा कि अब क्या करूं। प्लीज तुम आकर एक बार देख तो लो।”

मैंने बिना सोचे कहा, “ठीक है भाभी, मैं अभी आता हूं।”

मैंने जल्दी से अपनी टी-शर्ट पहनी, चप्पलें पहनीं

और उनके साथ चल पड़ा।

सीढ़ियां उतरते हुए भाभी आगे चल रही थीं।

अंधेरे में उनकी काली मैक्सी हल्की-हल्की लहरा रही थी।

उनकी मोटी, गोलाई लिए गांड हर कदम के साथ ऊपर-नीचे हो रही थी।

वह दृश्य देखकर मेरा मन डोल गया।

मैं सोचने लगा कि अभी इन्हें अपनी बाहों में उठाकर अपने कमरे में ले जाऊं

और पूरी रात इनकी चूत में अपना लंड डालकर जोर-जोर से चोदूं।

यह ख्याल आते ही मेरे लंड में सनसनी दौड़ गई।

पजामा के अंदर मेरा लंड धीरे-धीरे सख्त होने लगा

और पूरी तरह तनकर खड़ा हो गया।

हर कदम के साथ वह पजामे पर उभार बनाता जा रहा था।

सीढ़ियों के बीच में अचानक भाभी रुक गईं।

अंधेरा होने की वजह से उन्हें शायद कुछ दिखाई नहीं दिया।

मैं पीछे चल रहा था

और अचानक रुकने की वजह से संतुलन बिगड़ गया।

मेरा शरीर आगे की ओर झुक गया

और मेरा खड़ा लंड सीधा उनकी मुलायम, गोल गांड के बीच में जा लगा।

वह स्पर्श इतना गर्म और नरम था कि मेरे शरीर में करंट सा दौड़ गया।

मैं घबरा गया और तुरंत पीछे हटा।

डरते हुए मैंने कहा, “सॉरी भाभी, मुझे मालूम नहीं था।”

भाभी ने मुड़कर मेरी तरफ देखा,

मुस्कुराईं और धीरे से बोलीं, “कोई बात नहीं राहुल। गलती तो मेरी है, मैं अचानक रुक गई थी।”

उनकी आवाज में शरम के साथ-साथ एक हल्की शरारत भी थी।

फिर हम उनके घर पहुंच गए।

मैंने अंदर जाकर भैया को देखा।

उनका चेहरा लाल था

और बुखार से पूरा शरीर कांप रहा था।

मैंने तुरंत अपनी हॉस्पिटल में फोन किया

और कुछ ही मिनटों में उनके लिए बेड का इंतजाम करवा दिया।

हम उन्हें लेकर हॉस्पिटल पहुंचे। वहां करीब एक बज रहा था।

उनके भाई को भी बुला लिया गया।

भाई ने कहा, “आप लोग सुबह आ जाना, मैं यहां रुक जाता हूं।”

इसके बाद मैं और स्वाती भाभी वापस घर लौटे।

रास्ते में हल्की-हल्की बातें हो रही थीं।

भाभी ने कहा, “धन्यवाद राहुल, तुमने बहुत मदद की।”

मैंने मुस्कुराकर जवाब दिया, “अरे भाभी, इसमें धन्यवाद की क्या जरूरत है। एक अच्छा पड़ोसी ही तो दूसरे पड़ोसी के काम आता है।”

भाभी बोलीं, “शायद भैया को डेंगू हो गया है।”

मैंने कहा, “हां, ऐसा लग रहा है। मेरा ब्लड ग्रुप भी बी+ है। अगर कभी ब्लड की जरूरत पड़ी तो मैं दे दूंगा, कोई टेंशन मत लेना।”

इतने में हम दोनों का घर आ गया।

भाभी ने रुककर मेरी तरफ देखा

और थोड़ा झिझकते हुए कहा, “यार राहुल, क्या तुम मेरा एक काम करोगे?”

मैंने तुरंत कहा, “जी हां भाभी, बोलिए ना।”

भाभी ने आंखें नीची करके कहा, “मुझे अकेले में बहुत डर लग रहा है। घर खाली है और रात बहुत हो गई है। क्या तुम आज रात मेरे यहां सो सकते हो?”

यह सुनते ही मेरे शरीर में एक नई गर्मी दौड़ गई।

मेरा लंड फिर से पूरी तरह खड़ा हो गया।

मैंने थोड़ा संकोच दिखाते हुए कहा, “लेकिन भाभी, अगर कोई देख लेगा तो?”

भाभी ने तुरंत जवाब दिया, “आज हमारी मंजिल पर कोई भी नहीं है। सब घर पर नहीं हैं।”

मैंने मुस्कुराकर कहा, “ठीक है भाभी। अगर आप कह रही हैं तो मैं एक रात सो जाता हूं।”

भाभी ने राहत की सांस ली और कहा, “धन्यवाद राहुल। बस आज रात की बात है। कल से मैं अपनी छोटी बहन को बुला लूंगी।”

हम उनके घर में दाखिल हुए।

घर बहुत खूबसूरती से सजा हुआ था।

लिविंग रूम में हल्की पीली लाइट जल रही थी,

जिससे पूरा माहौल गर्म और आकर्षक लग रहा था।

दीवारों पर सुंदर पेंटिंग्स लगी थीं

और फर्नीचर भी अच्छे से व्यवस्थित था।

भाभी ने मुझे सोफे पर बैठने को कहा

और खुद बेडरूम की तरफ चली गईं।

वे बोलीं, “राहुल, तुम थोड़ा टीवी देख लो, मैं अभी आती हूं।”

मैं सोफे पर बैठ गया

और रिमोट उठाकर टीवी ऑन कर लिया।

कोई पुरानी बॉलीवुड मूवी चल रही थी,

लेकिन मेरा ध्यान कहीं और था।

मैं बार-बार बेडरूम की तरफ देख रहा था कि भाभी कब आती हैं।

कुछ मिनट बाद दरवाजा खुला

और स्वाती भाभी मैक्सी पहनकर बाहर आईं।

वह काली रंग की थिन फैब्रिक वाली मैक्सी थी,

जो उनकी जांघों के बीच तक आ रही थी।

मैक्सी इतनी टाइट थी कि उनके 36 इंच के बड़े, गोल बूब्स साफ उभरे हुए दिख रहे थे।

ब्रा की लाइन भी हल्की-हल्की नजर आ रही थी।

मैक्सी का गला गहरा था,

जिससे उनकी गहरी दरार साफ दिख रही थी।

उनकी मोटी जांघें हर कदम के साथ हिल रही थीं

और कमर की मोटाई उन्हें और भी सेक्सी बना रही थी।

वे जैसे ही पास आईं,

मैं उन्हें घूरकर देखने लगा।

उनके बूब्स इतने भरे-भरे लग रहे थे कि मेरा मन कर रहा था

कि अभी इन्हें दोनों हाथों से पकड़कर जोर-जोर से दबाऊं,

मैक्सी के ऊपर से ही चूसूं और सारा दूध-सा रस पी जाऊं।

मेरी नजरें उनके बूब्स पर टिक गईं।

भाभी ने मुझे इस तरह देखते हुए पकड़ लिया।

वे थोड़ा शरमा गईं

और अपनी बाहें सीने के सामने क्रॉस करके खड़ी हो गईं,

जैसे अपनी छाती को छिपाने की कोशिश कर रही हों।

उनके चेहरे पर हल्की लाली छा गई थी।

भाभी ने थोड़ा झिझकते हुए पूछा, “तुमने अपनी गर्लफ्रेंड को तो नहीं बताया कि आज तुम यहां सो रहे हो?”

मैंने मुस्कुराकर कहा, “नहीं भाभी। अगर पता चलेगा तो वो कुछ भी सोचेगी।”

भाभी ने उत्सुकता से पूछा, “वो क्या सोचेगी?”

मैंने उनकी आंखों में देखते हुए कहा, “यही कि मैं किसी खूबसूरत लड़की के साथ पूरी रात अकेला रहूंगा।”

भाभी अचानक हंस पड़ीं।

उनकी हंसी में एक मासूमियत थी,

लेकिन आंखों में शरारत भी।

वे बोलीं, “क्या मैं सुंदर हूं? लेकिन मुझे कहां से सुंदर लगती हूं।”

मैंने तुरंत जवाब दिया, “अरे भाभी, जो अभी आप पहनकर हैं, इन कपड़ों में अगर भैया को दिखाओ तो वो खुद बताएंगे कि आप कितनी खूबसूरत हो।”

भाभी ने फिर हंसते हुए कहा, “हां ठीक है। अब तुम ही बता दो कि मैं कितनी सुंदर लग रही हूं।”

मैंने उनकी तरफ देखकर धीरे से कहा, “एकदम मस्त माल। मेरा मन कर रहा है कि…”

मैं वाक्य अधूरा छोड़ दिया।

भाभी ने मेरी तरफ देखा

और शरारत भरी मुस्कान के साथ बोलीं, “शैतान, तुम बहुत बड़े हो गए हो। अब लगता है आंटी से बात करके तुम्हारी शादी करवा दूं।”

मैंने हंसकर कहा, “हां बोल दो। अपना हुलिया भी बता देना। कह देना कि उसे ऐसी लड़की पसंद है।”

भाभी ने मेरी तरफ झुककर पूछा, “अच्छा तो तुम्हें मुझमें क्या अच्छा लगता है?”

मैंने थोड़ा संकोच दिखाते हुए कहा, “नहीं भाभी, आप बुरा मान जाओगी।”

भाभी ने मेरी आंखों में देखकर जोर देकर कहा, “अरे नहीं। बताओ ना। तुम्हारी कसम।”

मैंने अब हिम्मत करके कहा, “जब आप सीढ़ियों से उतर रही थीं और मेरा लंड आपसे जा लगा था, तो मुझे आपकी गांड बहुत मस्त लगी। इतनी गोल, मुलायम और भरी हुई… बस मन कर रहा था कि पकड़ लूं।”

भाभी मेरी बात सुनकर एक पल के लिए चुप हो गईं।

फिर अचानक शरमाते हुए हंस पड़ीं

और हल्के से मेरी जांघ पर थप्पड़ मार दिया।

उनका हाथ गलती से मेरे पजामे के ऊपर से मेरे खड़े लंड पर जा लगा।

जैसे ही उनका मुलायम हाथ मेरे तने हुए लंड को छुआ,

एक झटका सा लगा।

मेरा लंड पहले से ही पूरी तरह सख्त था,

और अब उनके स्पर्श से और भी ज्यादा फड़क उठा।

वह इतना कड़ा हो गया कि पजामा में साफ उभार बन गया।

मैंने उनकी आंखों में देखा।

उनकी आंखें चमक रही थीं,

पुतलियां फैली हुई थीं।

साफ दिख रहा था कि उन्हें भी यह स्पर्श बहुत अच्छा लग रहा था।

उनकी सांसें तेज हो गई थीं और होंठ हल्के से कांप रहे थे।

उनकी आंखों में वही चाहत झलक रही थी जो मेरे मन में चल रही थी –

अब बस एक कदम और चाहिए था।

भाभी ने शरमाते हुए,

आवाज को थोड़ा दबाकर कहा, “चलो, मैं सोने जा रही हूं।”

वे उठीं और बेडरूम की तरफ जाने लगीं,

लेकिन उनकी चाल में एक अलग सी मस्ती थी।

मैंने कहा, “ठीक है भाभी। शुभ रात्रि।”

लेकिन मेरा हाल बहुत खराब हो रहा था।

लंड इतना तना हुआ था कि दर्द होने लगा।

मैं सोच रहा था कि अब शुरू कहां से करूं।

क्या उनके पीछे जाकर कुछ कहूं? या इंतजार करूं?

मन में हजार ख्याल घूम रहे थे।

तभी बेडरूम से भाभी की आवाज आई, “राहुल… मुझे डर लग रहा है। तुम भी मेरे रूम में सो जाओ ना।”

उनकी आवाज में हल्की कंपकंपी थी,

लेकिन उसमें एक छिपी हुई पुकार भी थी।

मैंने तुरंत कहा, “ठीक है भाभी।”

मैं उठा और बेडरूम में चला गया।

भाभी कंबल ओढ़कर बेड पर लेटी हुई थीं।

लाइट धीमी थी, सिर्फ बेडसाइड लैंप जल रहा था।

कंबल उनके सीने तक था,

लेकिन मैक्सी के नीचे उनकी जांघें हल्की-हल्की दिख रही थीं।

मैंने कहा, “भाभी, आप ऊपर लेट जाओ। मैं सोफे पर सो जाऊंगा।”

भाभी ने कंबल थोड़ा सरकाते हुए कहा, “ठीक है।”

मैं सोफे पर लेट गया।

लेकिन नींद कहां आ रही थी।

मेरा लंड अभी भी खड़ा था

और दिमाग में वही दृश्य घूम रहा था।

करीब एक घंटे बाद भाभी उठीं और वॉशरूम की तरफ गईं।

मैं आंखें बंद करके लेटा था,

नींद आने ही वाली थी कि अचानक जोर की आवाज आई – “धड़ाम!” मैं झट से उठ बैठा।

भाभी वॉशरूम में गिर पड़ी थीं।

मैं दौड़कर गया।

वे फर्श पर बैठी थीं,

चेहरा दर्द से सिकुड़ा हुआ था।

मैंने उन्हें सहारा देकर उठाया।

मेरे हाथ उनकी कमर पर गए और फिर गोद में उठा लिया।

उनकी मोटी, मुलायम गांड मेरे हाथ में आ गई।

गांड पर हाथ लगाते ही लाल पेंटी का नरम कपड़ा महसूस हुआ।

उनकी गांड इतनी गोल और भरी हुई थी कि मेरी उंगलियां उसमें धंस गईं।

गोद में उठाते ही मेरा लंड फिर से पूरी तरह खड़ा हो गया।

वह उनके पेट से सटकर दब रहा था।

भाभी की सांसें मेरे कान के पास थीं और गर्मी महसूस हो रही थी।

मैंने उन्हें बेड पर धीरे से लिटाया।

पूछा, “कहीं चोट तो नहीं लगी भाभी?”

भाभी ने दर्द भरी मुस्कान के साथ कहा, “जो चीज तुम्हें सबसे ज्यादा पसंद है, उसी पर लगी है।”

मैं तुरंत समझ गया कि चोट उनकी गांड पर लगी है।

मैंने कहा, “लाओ, मैं तेल से मालिश कर दूं। दर्द कम हो जाएगा।”

भाभी ने बिना कुछ कहे इशारा किया कि तेल अलमारी में रखा है।

मैंने तेल की बोतल उठाई।

फिर उन्हें कहा, “भाभी, मुंह के बल लेट जाओ।”

वे मुंह के बल लेट गईं।

मैक्सी पीछे की तरफ सरक गई और उनकी गांड पूरी तरह दिखने लगी।

लाल रंग की पतली पेंटी उनके गोल नितंबों के बीच में फंसी हुई थी।

गांड के दोनों गाल इतने भरे हुए थे कि पेंटी बीच में धंस गई थी।

मैंने तेल हाथ में लिया और धीरे-धीरे उनकी गांड पर मलने लगा।

पहले हल्के हाथों से, फिर थोड़ा जोर लगाकर।

उनकी गांड गर्म और नरम थी।

मालिश करते-करते मैंने झुककर उनकी गांड पर एक हल्का सा किस कर दिया।

होंठ उनके नितंब पर लगे।

भाभी का शरीर सिहर गया।

उन्हें पता चल गया था,

लेकिन उन्होंने कुछ नहीं कहा।

उनका दर्द धीरे-धीरे कम होने लगा।

मैंने कहा, “भाभी, आपकी पेंटी बीच में आ रही है। इसे थोड़ा साइड कर लूं या उतार दूं?”

भाभी ने धीमी आवाज में कहा, “तुम ही उतार दो।”

मैंने उनकी पेंटी धीरे से नीचे सरकाई और उतार दी।

अब उनकी नंगी गांड मेरे सामने थी।

वाह, क्या मस्त गांड थी – गोल, गोरी, मुलायम।

मैंने अपने कपड़े फटाफट उतारे। मेरा 7 इंच का लंड पूरी तरह खड़ा था।

मैंने उसे उनकी गांड के गालों पर फेरना शुरू किया।

लंड का गरम सिरा उनकी नितंबों पर रगड़ खा रहा था।

भाभी ने करवट ली और पलट गईं। उनकी आंखें बंद थीं, लेकिन होंठ खुले हुए थे।

उन्होंने अपना एक हाथ अपनी चूत पर रख दिया

और बोलीं, “इसमें भी दर्द है… थोड़ा यहां भी लगाओ ना।”

मैंने उनकी चूत की तरफ देखा।

चूत एकदम गुलाबी थी, होंठ फूले हुए और छोटे-छोटे बाल।

जैसे तीन-चार दिन पहले ही शेव की हो। चूत पर हल्की नमी चमक रही थी।

मैंने हाथ फेरा। मेरी उंगलियां उनकी चूत के होंठों पर सरकीं।

भाभी मोअन करने लगीं – “आह… उह… मां…”

उनकी आवाज कमरे में गूंज रही थी।

मैंने एक उंगली धीरे से अंदर डाली।

चूत गर्म और गीली थी।

मैंने उंगली अंदर-बाहर करना शुरू किया।

भाभी की कमर उठने लगी।

उनकी सांसें तेज हो गईं।

“आह… राहुल… और जोर से…” उनकी आवाज अब दर्द से ज्यादा सुख की हो चुकी थी।

मैंने दूसरी उंगली भी डाली और तेजी से चोदने लगा।

उनकी चूत से रस निकलने लगा।

कमरे में उनकी मोअन की आवाज और मेरी उंगलियों की चपचपाहट गूंज रही थी।

फिर हम दोनों ने एक-दूसरे की तरफ देखा।

भाभी की आंखों में अब शरम कम और चाहत ज्यादा थी।

मैंने उन्हें धीरे से अपनी तरफ खींचा और बेड पर लेट गया।

भाभी मेरे ऊपर चढ़ गईं। हम 69 पोजिशन में आ गए।

उनकी चूत मेरे मुंह के ठीक सामने थी, गुलाबी और गीली।

मैंने उनकी जांघों को फैलाया और अपनी जीभ से उनकी चूत के होंठों को छुआ।

जैसे ही मेरी जीभ उनकी चूत पर लगी, भाभी का पूरा शरीर उछल पड़ा।

वे एकदम से सिहर उठीं और उनकी कमर ऊपर उठ गई।

शायद भैया ने कभी उनकी चूत नहीं चाटी थी।

यह पहला अनुभव था उनके लिए।

भाभी ने जोर से चीखा, “राहुल… यह क्या कर रहे हो? आह… तुम बहुत अच्छे हो… और जोर से चाटो… मेरी चूत खा जाओ… आह्ह्ह…”

उनकी आवाज कांप रही थी, लेकिन सुख से भरी हुई थी।

मैंने अपनी जीभ को और तेज किया।

पहले उनके क्लिटोरिस पर गोल-गोल घुमाया,

फिर चूत के होंठों को चाटा।

उनकी चूत से रस बहने लगा। मैंने जीभ को अंदर डाल दिया।

चूत गर्म, नम और टाइट थी।

मैं जीभ अंदर-बाहर करने लगा।

भाभी मेरे चेहरे पर अपनी चूत रगड़ रही थीं।

उनकी जांघें मेरे सिर के दोनों तरफ कस गईं।

वे बार-बार कह रही थीं, “आह… राहुल… और गहराई में… खा जाओ इसे…”

उसी बीच भाभी ने मेरा लंड पकड़ा।

उनका हाथ मेरे लंड पर सरका।

फिर उन्होंने झुककर मेरा लंड मुंह में ले लिया।

उनका गर्म मुंह मेरे लंड के सिरे पर लगा।

उन्होंने जीभ से चाटना शुरू किया।

फिर धीरे-धीरे पूरा लंड मुंह में लिया।

मेरा 7 इंच का लंड उनके मुंह में आधा-अधूरा जा रहा था। वे चूस रही थीं, जीभ घुमा रही थीं।

बीच-बीच में मुंह से निकालकर बोलीं, “कितना बड़ा है तुम्हारा… राहुल… प्लीज इसे मेरी चूत में डाल दो… अब और बर्दाश्त नहीं होता…”

उनकी आवाज भारी हो चुकी थी।

मैंने कहा, “मेरी जान, अभी चूत तो चाटने दो। मुझे चूत चाटना बहुत पसंद है।”

मैंने फिर से उनकी चूत पर जीभ डाली।

इस बार और गहराई में।

जीभ को अंदर तक घुमाया।

भाभी जन्नत में पहुंच चुकी थीं।

उनका पूरा शरीर कांप रहा था।

वे मेरे लंड को जोर-जोर से चूस रही थीं।

कमरे में सिर्फ उनकी मोअन और चूसने की आवाजें गूंज रही थीं।

कुछ देर बाद मैंने रुककर पूछा, “भाभी, कंडोम है क्या?”

भाभी ने सांस लेते हुए कहा, “हां… अलमारी में है। ले आओ।”

मैं उठा और अलमारी से कंडोम का पैकेट निकाला।

वापस आया तो भाभी ने मुझे देखकर मुस्कुराईं।

उन्होंने पैकेट लिया, फिर मेरे लंड को फिर से मुंह में लिया।

प्यार से चूसा, जीभ से साफ किया।

फिर कंडोम निकाला और धीरे-धीरे मेरे लंड पर चढ़ा दिया।

उनका हाथ मेरे लंड पर सरक रहा था।

कंडोम पूरी तरह चढ़ जाने के बाद उन्होंने मेरी तरफ देखा और बोलीं, “अब आ जाओ… मुझे पूरी तरह भर दो।”

उस रात मैंने भाभी की दो बार जमकर चुदाई की।

पहली बार मैंने उन्हें मिशनरी पोजिशन में चोदा।

उनका लंड उनकी चूत में धीरे-धीरे घुसाया।

चूत टाइट थी, लेकिन गीली होने से आसानी से अंदर चला गया।

मैंने जोर-जोर से धक्के मारे। भाभी चीख रही थीं, “आह… राहुल… और जोर से… फाड़ दो मेरी चूत…”

मैंने उनके बूब्स दबाए, चूसे।

वे मेरी पीठ पर नाखून गड़ा रही थीं।

पहली बार मैंने उनकी चूत में झड़ दिया।

फिर थोड़ी देर आराम करने के बाद भाभी ने कहा, “राहुल… अब मेरी गांड भी ट्राई करो… मुझे भी मजा लेना है।”

मैंने उन्हें कुतिया बनाया।

उनकी गांड पर थूक लगाया, फिर धीरे से लंड घुसाया।

गांड बहुत टाइट थी।

भाभी दर्द से सिहर रही थीं, लेकिन कह रही थीं, “धीरे… लेकिन मत रुकना…”

मैंने धीरे-धीरे पूरा लंड अंदर किया।

फिर जोर-जोर से चोदा।

भाभी की चीखें और मोअन कमरे में गूंज रहे थे।

आखिरी बार मैंने उनकी गांड में झड़ दिया।

हम दोनों थककर लेट गए।

भाभी मेरे सीने पर सिर रखकर सांस ले रही थीं।

धन्यवाद।

नोट: यहां पोस्ट की गई सभी कहानियां केवल मनोरंजन के उद्देश्य से प्रस्तुत की गई हैं। कृपया इन्हें वास्तविक जीवन से जोड़कर न देखें। कहानी में दर्शाए गए किसी भी दृश्य, घटना या चित्र का वास्तविक जीवन में प्रयोग करना हानिकारक हो सकता है। इसके लिए न तो कहानी के लेखक और न ही प्रस्तुतकर्ता जिम्मेदार होंगे। इसलिए कृपया अपनी समझ, बुद्धि और विवेक का उपयोग करें।

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