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एमबीबीएस की डिग्री मिलते ही मेरी पोस्टिंग राजस्थान के एक दूरदराज़ गाँव में हो गई।
यह गाँव जयपुर से करीब 150 किलोमीटर दूर था और यहाँ आधुनिक चिकित्सा सुविधाओं का पूरी तरह से अभाव था।
गाँववासियों ने अपने जीवन में गाँव में पहली बार कोई योग्य डॉक्टर देखा था। इसके पहले गाँव झाड़-फूँक करने वालों, ओझाओं और नीम-हकीमों के भरोसे था।
मेरा नाम डॉक्टर इंद्रजीत है और मेरी उम्र 29 साल है। मैं एक हैण्डसम और फिट युवक हूँ, मेरी हाइट 6 फीट है और मैं जिम रेगुलर जाता हूँ।
मेरे लिंग का साइज़ भी काफी बड़ा है, पूरा खड़ा होने पर यह करीब 9 इंच लंबा और 3 इंच मोटा हो जाता है।
रोज ही काफी मरीज़ मेरे क्लिनिक पर आते थे और मैं जल्दी ही गाँव की ज़िंदगी में बड़ा महत्वपूर्ण समझा जाने लगा।
गाँव वाले अब सलाह के लिए भी मेरे पास आने लगे। मैं भी किसी भी वक्त मना नहीं करता था अपने मरीज़ों को आने के लिए।
गाँव के बाहर मेरा एक बड़ा सा बंगला था जो पंचायत ने मुझे दिया था। इसी बंगले में मेरी डिस्पेंसरी भी थी।
गाँव में मेरे 8 महीने गुज़ारने के बाद की बात है ये। इस गाँव में लड़कियाँ और औरतें बड़ी सुंदर-सुंदर थीं।
ऐसी ही एक बहुत खूबसूरत लड़की थी गाँव के सरपंच की बहू। नाम था उसका निधि। सच कहूँ तो मेरा भी दिल उस पर आ गया था पर होनी को कुछ और मंजूर था।
गाँव के सबसे अमीर ज़मींदार रहीम के बेटे का भी दिल उस पर आया और उनकी शादी हो गई। पर जोड़ी बड़ी बेमेल थी। कहाँ निधि, और कहाँ तुलसी।
तुलसी बड़ा सूखा सा मरियल सा लड़का था, उसकी उम्र 25 साल थी लेकिन दिखने में वह 40 साल का लगता था।
उसकी हाइट सिर्फ 5 फीट 2 इंच थी और वह बहुत दुबला-पतला था। मुझे तो उसके मर्द होने पर भी शक था। और ये बात सच निकली करीब-करीब।
उनकी शादी के 10 महीने बाद एक दिन सरपंच की बीवी निर्मला मेरे घर पर आईं। उसने मुझे कहा कि उसे बड़ी चिंता हो रही है कि बहू को कुछ बच्चा वगैरह नहीं हो रहा।
उसने मुझसे पूछा कि क्या प्रॉब्लम हो सकता है। लड़का-बहू उसे कुछ बताते नहीं हैं और उसे शक है कि बहू कहीं बाँझ तो नहीं।
मैंने उसे ढाढ़स दिया और कहा कि वो लड़का-बहू को मेरे पास भेज दे तो मैं देख लूँगा कि क्या प्रॉब्लम है।
उसने मुझसे आग्रह किया कि मैं ये बात गुप्त रखूँ, घर की इज्जत का मामला है। फिर एक रात करीब शाम को 7 बजे वे दोनों आए।
तुलसी और उसकी बहू निधि। देखते ही लगता था कि बेचारी निधि के साथ बड़ा अन्याय हुआ है।
कहाँ वो लंबी, लचीली एकदम गोरी लड़की, भरे-पूरे बदन की बाला की खूबसूरत लड़की और कहाँ वो तुलसी, काला-कलूटा मरियल सा।
निधि की उम्र 22 साल थी और उसका फिगर 36-28-38 था। वह देखने में बिल्कुल फिल्मी हीरोइन जैसी लगती थी।
मुझे तुलसी की किस्मत पर बड़ा रंज हुआ। वे धीरे-धीरे अक्सर इलाज करवाने मेरे क्लिनिक पर आने लगे और साथ-साथ मुझसे खुलते गए।
तुलसी बड़ा नरम दिल इंसान था। अपनी बाला की खूबसूरत बीवी को ज़रा सा भी दुख देना उसे मंजूर न था। उसने दबी ज़ुबान से स्वीकार किया एक दिन कि अभी तक वो अपनी बीवी को चोद नहीं पाया है।
मैं समझ गया कि क्यों बच्चा नहीं हो रहा है। जब निधि अभी तक वर्जिन ही है तो, सहसा मेरे मन में एक खयाल आया और मुझे मेरी दबी हुई हसरत पूरी करने का एक हसीन मौका दिखा। निधि का कौमार्य लूटने का। दरअसल जब-जब तुलसी निधि के सुंदर नंगे जिस्म को देखता था अपने ऊपर काबू नहीं रख पाता था और इससे पहले कि निधि सेक्स के लिए तैयार हो तुलसी उस पर टूट पड़ता था।
नतीजा ये कि लंड घुसाने की कोशिश करता था तो निधि दर्द से चिल्लाने लगती थी और निधि को ये सब बड़ा तकलीफ वाला मालूम होता था। उसे चिल्लाते देख बेचारा तुलसी सब्र कर लेता था फिर। दूसरी तुलसी इतना कुरूप सा था कि उसे देखकर निधि बुझ सी जाती थी।
सारी समस्या जानने के बाद मैंने अपना जाल बिछाया। मैंने एक दिन निर्मला और तुलसी को बुलाया। उन्हें बताया कि खराबी उनके बेटे में नहीं बल्कि बहू में है। और उसका इलाज करना होगा। छोटा सा ऑपरेशन। बस बहू ठीक हो जाएगी। बुढ़िया तो खुश हो गई पर बेटे ने बाद में पूछा, “डॉक्टर साहब, आखिर क्या ऑपरेशन करना होगा?”
“हाँ तुलसी तुम्हें बताना ज़रूरी है। नहीं तो बाद में तुम कुछ और समझोगे।”
“हाँ हाँ बोलिए ना डॉक्टर साहब।”
“देखो तुलसी। तुम्हारी बीवी का गुप्तांग थोड़ा सा खोलना होगा ऑपरेशन करके। तभी तुम उससे संभोग कर पाओगे और वो माँ बन सकेगी।”
“क्या? पर क्या ये ऑपरेशन आप करेंगे? मतलब मेरी बीवी को आपके सामने नंगा लेटना पड़ेगा?”
“हाँ ये मजबूरी तो है। पर तुम तभी उसकी जवानी का मजा लूट पाओगे! वरना सोच लो यूं ही तुम्हारी उम्र निकल जाएगी और वो कुँवारी ही रहेगी।”
“तो क्या आप जानते हैं ये सब बात?” वह भौंचक्का सा बोला।
“हाँ! निर्मला जी ने मुझे सारी बात बता दी थी।”
अब वो नरम पड़ गया। “प्लीज डॉक्टर साहब। कुछ भी कीजिए। ऑपरेशन कीजिए चाहे जो जी आए कीजिए पर कुछ ऐसा कीजिए कि मैं उसके साथ वो सब कर सकूँ और हमारा आँगन बच्चे की किलकारी से गूँज उठे। वरना मैं तो गाँव में मुँह नहीं दिखा सकूँगा किसी को। खानदान की इज्जत का मामला है डॉक्टर साहब।” उसने हाथ जोड़ लिए।
“ठीक है घबराओ नहीं। बहू को मेरे क्लिनिक में भर्ती कर दो। 3-4 दिन में जब वो ठीक हो जाएगी तो घर आ जाएगी। जब तुम गाँव वापस आओगे तो बस फिर बहू के साथ मौज करना।”
“ठीक है डॉक्टर साहब। मेरे आने तक ठीक हो जाएगी तो मैं आपका बड़ा उपकार मानूँगा।”
और इस तरह निधि मेरे घर पर आ गई। कुछ दिनों के लिए। शिकार जाल में था बस अब। करने की बारी थी। निधि अच्छी मिलनसार थी। खुल सी गई थी मुझसे। पर जब वो सामने होती थी अपने ऊपर काबू रखना मुश्किल हो जाता था। बाला की कमसिन थी वो। जवानी जैसे फूट-फूट कर भरी थी उसके बदन में। पर मैं जब्त किए था। मौका देख रहा था।
4 महीनों से कोई लड़की मेरे साथ नहीं सोई थी। लंड था कि नारी बदन देखते ही खड़ा हो जाता था। दूसरी प्रॉब्लम ये थी मेरे साथ कि मेरा लंड बहुत बड़ा है। जब वो पूरी तरह खड़ा होता है तो करीब 9 इंच लंबा होता है और उसका हेड का डायमीटर 3 इंच का हो जाता है। जैसे कि एक लाल बड़ा सा टमाटर हो। और पीछे लंबा सा, पत्थर की तरह कड़ा एकदम सीधा लंबा सा खीरे जैसा मोटा सा लंड!
निधि को मेरे घर आए एक दिन बीत चुका था। पिछली रात तो मैंने किसी तरह गुज़ार दी पर दूसरे दिन बदहवास सा हो गया और मुझे लगा कि अब मुझे निधि चाहिए। ऐसी सुंदर कामिनी क्या मेरे ही घर में। और मैं प्यासा। रात्री भोजन के बाद मैंने निधि से कहा कि मुझे उससे कुछ खास बातें करनी हैं उसके केस के बारे में।
क्लिनिक बंद करके मैंने उससे कहा कि वो अंदर मेरे घर में आ जाए। गाँव की एक वधू की तरह वो मेरे सामने बैठी थी। एक भरपूर नजर मैंने उस पर डाली। उसने नज़रें झुका लीं। अब मैंने बेरोकटोक उसके जिस्म को अपनी नज़रों से तोला। उफ्फ! कपड़ों में लिपटी हुई भी वो कितनी कामवासना जगाने वाली थी।
“देखो निधि मैं जानता हूँ कि जो बातें मैं तुमसे करने जा रहा हूँ वो मुझे तुम्हारे पति की अनुपस्थिति में शायद नहीं करनी चाहिए, पर तुम्हारे केस को समझाने के लिए और इलाज के लिए मेरा जानना ज़रूरी है और अकेले में मुझे लगता है कि तुम सच-सच बताओगी। मैं जो पूछूँ उसका ठीक-ठीक जवाब देना।”
“तुम्हारे पति ने मुझे सब बताया है। और उसने ये भी बताया है कि क्यों तुम दोनों का बच्चा नहीं हो रहा।”
“क्या बताया उन्होंने डॉक्टर साहब?”
“तुलसी कहता है कि तुम माँ बनने के काबिल ही नहीं हो।”
“वो तो डॉक्टर साहब वो मुझसे भी कहते हैं! और जब मैं नहीं मानती तो उन्होंने मुझे मारा भी है एक-दो बार।”
“तो तुम्हें क्या लगता है कि तुम माँ बन सकती हो?”
“हाँ डॉक्टर साहब। मेरे में कोई कमी नहीं। मैं बन सकती हूँ।”
“तो क्या तुलसी में कुछ खराबी है?”
“हाँ डॉक्टर साहब।”
“क्या?”
“साहब वो… वो…”
“हाँ… हाँ… बोलो निधि। देखो मुझसे कुछ छुपाओ मत। मैं डॉक्टर हूँ और डॉक्टर से कुछ छुपाना नहीं चाहिए।”
“डॉक्टर साहब। मुझे शर्म आती है कहते हुए। आप पराए मर्द हैं ना।”
मैं उठा। कमरे का दरवाजा बंद करके खिड़की में भी चिटकनी लगा के मैंने कहा, “लो अब मेरे अलावा कोई सुन भी नहीं सकता। और मुझसे तो शर्माओ मत। हो सकता है तुम्हारा इलाज करने के लिए मुझे तुम्हें नंगा भी करना पड़े। तुम्हारी सास और पति से भी मैंने कह दिया है और उन्होंने कहा है कि मैं कुछ भी करूँ पर उनके खानदान को बच्चा दे दूँ। इसलिए मुझसे मत शर्माओ।”
“डॉक्टर साहब वो मेरे साथ कुछ कर नहीं पाते।” “क्या?” मैंने अनजान बनते हुए कहा।
मुझे निधि से बात करने में बड़ा मज़ा आ रहा था। मैं उस अल्हड़ गाँव की युवती को कुछ भी करने से पहले पूरा खोल लेना चाहता था।
“वो… वो मेरे साथ… मेरी योनि में… डाल नहीं पाते।”
“ओह्ह्हो। यूं कहो ना कि वो मेरे साथ संभोग नहीं कर पाते।”
“हाँ।”
“तुलसी कह रहा था कि तुम्हारी योनि बहुत संकरी है।”
“तो क्या आज तक उसने कभी भी तुम्हारी योनि में नहीं घुसाया?”
“नहीं डॉक्टर साहब।” नज़र झुकाए ही वो बोली।
“तो क्या तुम अभी तक कुँवारी ही हो। तुम्हारी शादी को तो 10 महीने हो चुके हैं।”
“हाँ साहब। वो कर ही नहीं सकते। मैं तो तड़पती ही रह जाती हूँ।” यह कहते-कहते निधि रुआँसी हो उठी।
“पर वो तो कहता है कि तुम सह नहीं पाती हो। और चीखने लगती हो। चिल्लाने लगती हो।”
“साहब वो तो हर लड़की पहली बार… पर मर्द को चाहिए कि वो एक न सुने और अपना काम करता रहे। पर ये तो कर ही नहीं सकते। इनके उसमें ताकत ही नहीं है इतनी। सूखे से तो हैं। पर वो तो कहता है कि तुमको संभोग की इच्छा ही नहीं होती।”
“झूठ बोलते हैं साहब। किस लड़की की इच्छा नहीं होती कि कोई बलिष्ठ मर्द आए और उसे लूट ले पर उन्हें देखकर मेरी सारी इच्छा खत्म हो जाती है।”
“पर निधि मैंने तो उसका कम अंग देखा है। ठीक ही है। वो संभोग कर तो सकता है। कहीं तुम्हारी योनि में ही तो कुछ समस्या नहीं।”
“नहीं साहब नहीं। आप उनकी बातों में न आइए। पहले तो हमेशा मेरे आगे-पीछे घूमते थे। कि मुझसे सुंदर गाँव में कोई नहीं। और अब…” वो सुबकने लगी। “आप ही बताइए डॉक्टर साहब। मैं शादी के 10 महीने बाद भी कुँवारी हूँ। और फिर भी उस घर में सभी मुझे ताना मारते हैं।”
“अरे नहीं निधि।” मैंने प्यार से उसके सर पर हाथ फेरा। “अच्छा मैं सब ठीक कर दूँगा। अच्छा चलो यहाँ बिस्तर पर लेट जाओ। मुझे तुम्हारा चेकअप करना है।”
“क्या देखेंगे डॉक्टर साहब?”
“तुम्हारे बदन का इंस्पेक्शन तो करना होगा।”
“जी… ऊपर से ही देख लीजिए ना डॉक्टर साहब।”
“जो देखना है… ऊपर से तो तुम बहुत खूबसूरत लगती हो। एकदम काम की देवी। तुम्हें देखकर तो कोई भी मर्द पागल हो जाए। फिर मुझे देखना ये है कि आज तक तुम कुँवारी कैसे हो। चलो लेटो बिस्तर पर और साड़ी उतारो।”
“ज्जाज्जी… डॉक्टर साहब… मैं… मैं… मुझे शर्म आती है।”
“डॉक्टर से शर्माओगी तो इलाज कैसे होगा?”
वो लेट गई। मैंने उसे साड़ी उतारने में मदद की। एक खूबसूरत जिस्म मेरे सामने सिर्फ ब्लाउज और पेटीकोट में था। लेटा हुआ वो भी मेरे बिस्तर पर। मेरे लंड में हलचल होने लगी। मैंने उसका पेटीकोट थोड़ा ऊपर को सरकाया और अपना एक हाथ अंदर डाला। वो अंदर नंगी थी। एक उँगली से उसकी चूत को सहलाया। वो सिसकी। और अपनी जाँघों से मेरे हाथ पर हल्का सा दबाव डाला। उसकी चूत के होंठ बड़े टाइट थे। मैंने दरार पर उँगली घुमाने के बाद अचानक उँगली अंदर घुसा दी। वो उछली। हल्की सी।
एक सिसकारी उसके होंठों से निकली। थोड़ी मुश्किल के बाद उँगली तो घुसी। फिर मैंने उँगली थोड़ी अंदर-बाहर की। वो भी 10 महीने से तड़प रही थी। मेरी इस हरकत ने उसे थोड़ी गर्मी दे दी। इसी बीच एक उँगली से उसे चोदते हुए मैंने बाकी उँगलियाँ उसकी चूत से गांड के छेद तक के रास्ते पर फिरानी शुरू कर दी थी।
“कैसा महसूस हो रहा है… अच्छा लग रहा है?”
“हाँ डॉक्टर साहब।”
“तुम्हारा पति ऐसा करता था… तुम्हारी योनि में इस तरह अँगुल डालता था?”
“नाह्ह्ह्हींन्न… डॉक्क्कटररर स्स्साह्हब्ब…”
निधि अब छटपटाने लगी थी। उसकी आँखें लाल हो उठी थीं।
“अगर तुम्हारे साथ संभोग करने से पहले तुम्हारा पति ऐसा करे तो तुम्हें अच्छा लगेगा?”
“हान्न्नन्न…” “वे तो कुछ जानते ही नहीं और सारा दोष मेरे माथे पर ही मढ़ रहे हैं।”
“अगली बार जब अपने पति के पास जाना तो यहाँ… योनि पर एक भी बाल नहीं रखना। तुम्हारे पति को बहुत अच्छा लगेगा। और वो ज़रूर तुम पर चढ़ेगा।”
“अच्छा डॉक्टर साहब।”
“जाओ उधर बाथरूम में सब काट कर आओ। वहाँ रेजर रखा है। जानती हो ना… कैसे करना है। संभोग करने से पहले इसे सजा कर अपने पति के सामने करना चाहिए।”
मैंने निधि की चूत को खोदते हुए उसकी आँखों में आँखें डाल कर कहा।
“हाँ… डॉक्टर साहब… लेकिन उन्होंने तो कभी भी मुझे बाल साफ करने के लिए नहीं कहा।” निधि ने धीरे से कहा।
वो गई और थोड़ी देर में वापस मेरे बेडरूम में आ गई।
“हो गया…”
“तो तुम्हें रेजर इस्तेमाल करना आता है… कहीं उस नाजुक जगह को काट तो नहीं बैठी हो?” मैंने पूछा।
“जी जी कर दिया। शादी से पहले मैंने कई बार रेजर पहले भी इस्तेमाल किया है।”
“अच्छा आओ फिर यहाँ लेट जाओ।”
वो आई और लेट गई। पिछली बार से इस बार प्रतिरोध कम था। मैंने उसके पेटीकोट का नाड़ा पकड़ा और खींचना शुरू किया। पेटीकोट खुल गया। उसकी कमर मुश्किल से 28 इंच रही होगी। और हिप्स साइज़ करीब 38 इंच। जाँघों पर खूब मांसलता थी। गोलाई और मदकता। विशाल पुट्ठे। इस सुंदर कामुक दृश्य ने मेरा स्वागत किया। उसने मेरा हाथ पकड़ लिया।
“डॉक्टर साहब… ये क्या कर रहे हैं… आप तो मुझे नंगी कर रहे हैं?”
“अरे देख तो लूँ तुमने बाल ठीक से साफ किए भी कि नहीं। और बाल काटने के बाद वहाँ पर एक क्रीम भी लगानी है।”
अब इससे पहले वो कुछ बोलती… मैंने उसका पेटीकोट घुटनों से नीचे तक खींच लिया था। अति सुंदर। बाला की कामुक।
“तुम बहुत खूबसूरत हो निधि…” मैंने थोड़ा साहस के साथ कह डाला।
उसकी तारीफ ने उसके हाथों के जोर को थोड़ा कम कर दिया। और उसका फायदा उठाते हुए मैंने पूरा पेटीकोट खींच डाला और दूर कुर्सी पर फेंक दिया। यकीन मानिए ऐसा लगा कि अभी उस पर चढ़ जाऊँ। वो पतला सपाट पेट… छोटी सी कमर पर वो विशाल नितंब… वो टाइट वीनस माउंट…
सिर्फ एक ब्लाउज पीस में रह गया था उसका बदन। भरपूर नज़रों से देखा मैंने उसका बदन। उसने शर्म के मारे अपनी आँखों पर हाथ रख लिया और तुरंत पेट के बल हो गई ताकि मैं उसकी चूत न देख सकूँ। शायद चूत दिखाने में शर्मा रही थी।
“ज़रा पलटो निधि… शर्म नहीं करते… फिर तुम इतनी सुंदर हो कि तुम्हें तो अपने इस मस्त बदन पर गर्व होना चाहिए।”
“नहीं डॉक्टर साहब… पराए मर्द के सामने मुझे बहुत शर्म आ रही है…”
“पलटो न निधि…” कहकर मैंने उसके पुट्ठों पर हाथ रखा और बलपूर्वक उसे पलटा। दो खूबसूरत जाँघों के बीच में वो कुँवारी चूत चमक उठी। गोरे-गोरे… दोनों चूत की पंखुड़ियाँ फड़क सी रही थीं। शायद उन्होंने भाँप लिया था कि किसी मस्त से लंड को उनकी खुशबू लग गई है। उसकी चूत पर थोड़ी सी लाली भी छाई थी।
इधर मेरे लंड में भूचाल सा आ रहा था। और मेरे अंडरवियर के लिए मेरे लंड को कंट्रोल में रखना मुश्किल सा हो रहा था। फिर भी मेरे टाइट अंडरवियर ने मेरे लंड को छिपा रखा था। अब मैंने उसकी चूत पर उँगलियाँ फिराईं और पूछा, “निधि क्या तुलसी… तुम्हें यहाँ पर मेरा मतलब तुम्हारी योनि पर चूमता है?”
“नहीं साहब यहाँ… यहाँ कैसे चूमेंगे?”
“तुम्हारे इन पुट्ठों पर…” मैंने उसके बम्स पर हाथ रखकर पूछा।
“नहीं डॉक्टर साहब आप कैसी बातें कर रहे हैं…”
अब उसकी आवाज में एक नशा एक मदकता सी आ गई थी। चुदने के लिए तैयार एक गरम युवती की सी।
“वो कहाँ-कहाँ चूमता है तुम्हें?”
“जी… यहाँ पर…”
उसने अपने चूची की तरफ इशारा किया। जो इस गरम होते माहौल की खुशबू से साइज़ में काफी बड़े हो गए थे और लगता था कि जल्दी उनको बाहर नहीं निकाला तो ब्लाउज फट जाएगा। उसने कोई ब्रा भी नहीं पहनी थी। मैं बिस्तर पर चढ़ गया। मैंने दोनों हथेलियाँ उसके दोनों मम्मों पर रखीं और उन्हें कामुक अंदाज में मसलना शुरू किया।
वो तड़पने लगी। “डॉक्टरररर स्साहह्ब्ब्ब क्या कर रहे हैं आप… यह कैसा इलाज आप कर रहे हैं?”
“कैसा लग रहा है निधि?”
“मुझे अच्छी तरह से देखना होगा कि तुलसी ठीक कहता है या नहीं। वह कहता है तुम हाथ लगाते ही ऐसे चीखने लग जाती हो।”
“बहुत अच्छा लग रहा है साहब… पर आपसे यह सब करवाना क्या अच्छी बात है?”
“और दबाऊँ?” मैंने निधि की बातों पर कोई ध्यान नहीं दिया और उसकी मस्त चूचियाँ दबानी जारी रखी।
“हाँ… आपका इनको हल्के-हल्के दबाना बहुत अच्छा लग रहा है… तुलसी भी ऐसे ही मसलता है…”
“तेरे इन खूबसूरत स्तनों को…”
“नहीं साहब आपके हाथों में मर्दानी पकड़ है…”
मैंने उसे कमर से पकड़कर उठा लिया। बूब्स के भर से अचानक उसका ब्लाउज फट गया। और वो कसे-कसे दूध बाहर को उछलकर आ गए। वाह क्या खूबसूरत कामुक अप्सरा बैठी थी मेरे सामने एकदम नग्न… 36-28-38… एकदम दूध की तरह गोरी… बाला की कमसिन… मुझसे रुकना मुश्किल हो रहा था।
अब मैंने उसके मुख को पकड़ उसके होंठों को चूसना शुरू कर दिया। इससे पहले वो कुछ समझ पाती उसके होंठ मेरे होंठों को जकड़ में थे। मेरे एक हाथ ने उसके पूरे बदन को मेरे शरीर से चिपटा लिया था। और दूसरे हाथ ने ज़बरदस्ती… उसकी जाँघों के बीच से जगह बनाकर उसके गुप्तांग में उँगली डाल दी थी। उसके क्लिटोरिस पर मैंने ज़बरदस्त मसाज की। उसके पुट्ठे उठने लगे थे। वो मतवाली हो उठी थी।
मैंने होंठों को चूमा। “कभी तुलसी ने इस तरह किया तेरे साथ… सच कहना निधि?”
“नहीं डॉक्टर साहब… वह तो सीधे ऊपर चढ़ जाते हैं और थोड़ी देर हिलके सुस्त पड़ जाते हैं…”
“यही तो मुझे देखना है निधि… तुलसी कह रहा था तुम चिल्लाने लग जाती हो?”
“बहुत अच्छा… पर अब… जाँच-पड़ताल खत्म हो गई क्या डॉक्टर साहब? आप और क्या-क्या करेंगे मेरे साथ?”
“अब मैं वही करूँगा जो एक जवान शक्तिशाली मर्द को, एक सुंदर कामुक खूबसूरत बदन वाली जवान युवती, जो बिस्तर पर नंगी पड़ी हो, के साथ करना चाहिए। तेरा बदन वैसे भी 10 महीने से तड़प रहा है। तेरा कौमार्य टूटने के लिए बेताब है। और आज ये मर्दाना काम… मेरा काम अंग करेगा रात भर इस बिस्तर पर।”
मेरी उँगली जो अभी भी उसकी चूत में थी… ने अचानक एक जलजला सा महसूस किया। ये उसका योनि रस था… जो योनि को संभोग के लिए तैयार होने में मदद करता है। मेरी उँगली पूरी भीग गई थी और रस चूत के बाहर बहकर जाँघों को भी भिगो रहा था। मेरी बात सुनकर उसके बदन में एक तड़प सी हुई चूतड़ ऊपर को उठे और उसके मुँह से एक सिसकारी भरी चीख निकल पड़ी।
बाद में थोड़ा संयत होकर निधि बोली… “डॉक्टर साहब… पर इससे मैं रुसवा हो जाऊँगी… मेरा मर्द मुझे घर से निकाल देगा यदि उसे पता चला कि मैं आपके साथ सोई थी… आप मुझे जाने दीजिए… मुझे माफ कीजिए…”
“तू मुझे मर्द समझती है… तो मुझ पर भरोसा रख… मैं आज तुझे भरपूर जवानी का सुख ही नहीं दूँगा… बल्कि तुझे हर मुसीबत से बचाऊँगा… तेरा मर्द तुझे और भी खुशी-खुशी रखेगा…”
“वो कैसे डॉक्टर साहब?”
“क्योंकि आज के बाद जब वो तुझ पर चढ़ेगा वो तेरे साथ संभोग कर सकेगा। जो काम वो आज तक नहीं कर पाया तुम दोनों की शादी के बाद अब कर सकेगा। और तब तू उसके बच्चे की माँ भी बन जाएगी।”
“पर कैसे डॉक्टर साहब… कैसे होगा ये चमत्कार… साहब?”
“निधि… प्यारी…”
मैंने उसकी फटी चोली अलग करते हुए और उसके बूब्स को मसलना शुरू करते हुए कहा… “तेरी योनि का द्वार बंद है… उसे आज मैं अपने प्रचंड भयंकर लंड से खोल दूँगा ताकि तेरा पति फिर अपना लंड उसमें घुसा सके और अपना वीर्य उसमें डाल सके जिससे तू माँ बन सकेगी…”
मेरे मसलने से उसके बूब्स बड़े-बड़े होने लगे थे और कठोर भी। उफ्फ… क्या लगती थी वो अपनी पूरी नग्नता में… उन सॉलिड बूब्स पर वो गोल छोटी चुचियाँ भी बहुत बेचैन कर रही थीं मुझे। उसका पूरा बदन अब बुरी तरह तड़प रहा था। नशीले बदन पर पसीने की हल्की छोटी बूँदें भी उभर आई थीं। मेरा लंड बहुत ही तूफानी हो रहा था और अब उसके आजाद होने का वक्त आ गया था।
“डॉक्टर साहब मुझे बहुत डर लग रहा है… मेरी इज्जत से मत खेलिए ना… जाने दीजिए… मेरा बदन… ऊऊईईमां…”
“मुझ पर यकीन करो निधि… ये एक मर्द का वादा है तुझसे… मैं सब देख लूँगा… तेरा बदन तड़प रहा है निधि… एक मर्द के लिए… तेरी चूत का बहता पानी… तेरे कसे हुए बूब्स साफ कह रहे हैं कि अब तुझे संभोग चाहिए…”
“साहब… हाँ…”
“निधि मेरी रानी… बोल…”
“मैं माँ बनूँगी ना…”
“हाँ…”
“मेरा मर्द मुझे अपने साथ रख लेगा ना… मुझे मारेगा तो नहीं ना…”
“हाँ… निधि… तू बिल्कुल चिंता न कर…”
“तो साहब फिर अपनी फीस ले लो आज रात… मेरी जवानी आपकी है…”
“ओह… मेरी निधि… आ… जा…”
और हम दोनों फिर लिपट गए। मेरा लंड विशाल हो उठा।
“डॉक्टर साहब बहुत प्यासी हूँ… आज तक किसी मर्द ने नहीं सींचा मुझे… मेरे तन-बदन की आग बुझा दो साहब…”
“तो फिर आ मेरी जाँघों पर रख दे अपने चूतड़ और लिपट जा मेरे बदन से…”
थोड़ी देर बाद मेरे हाथ मेरी कमीज के बटनों से खेल रहे थे। कमीज उतारी… फिर मेरी पैंट… निधि की नज़र मेरे बदन को घूर रही थी। मेरा अंडरवियर इससे पहले फट जाता मैंने उसे उतार डाला। और फिर ज्यों ही मैं सीधा हुआ… मेरे लंड ने अपनी पूरी खूबसूरती से अपने शिकार को पूरा तनकर उठाकर सलाम किया। अपनी पूरी 9 इंच लंबाई और बड़े टमाटर जितने लाल हेड के साथ… निधि बड़े ज़ोर से चीखी… और बिस्तर से उठकर नंगी ही दरवाजे की तरफ भागी।
“क्या हुआ निधि?” मैं घबरा गया। मैं तना हुआ लंड लेकर उसकी तरफ दौड़ा।
“नाहीईईई मुझे कुछ भी नहीं करवाना… नहीईईईई मुझे जाआआ… जाने दो…”
निधि फिर चीखी।
“क्या हुआ निधि?” लेकिन मैं उसकी तरफ बढ़ता ही रहा।
“साहब आपका ये… ये लंड… ये लंड तो बहुत बड़ा और मोटा है… ब्ब्बाआप्परेरेरे बाप… यह तो गधे के जैसा है… नहीं यह तो मुझे चीर देगा…”
“आओ निधि… घबराओ मत… असली मोटे और मजबूत लंड ही योनि को चीर पाते हैं… गौर से देखो इसे… छूकर देखो… इससे प्यार करो और फिर देखो ये तुम्हें कितना पागल कर देगा…”
“डॉक्टर साहब… है तो बड़ा ही प्यारा… और बेहद सुंदर मस्तंड सा… मेरा तो देखते ही इसे चूमने का मन कर रहा है… ऊऊफ्फ्फ… कितना बड़ा है… पर साहब ये मेरी चूत में कैसे घुस पाएगा इतना मोटा… मैं तो मर जाऊँगी… तुलसी का लंड तो इसके सामने बहुत छोटा है जब वो ही नहीं जाता तो… ये कैसे…”
“यही तो मर्द की संभोग कला कौशल होता है मेरी रानी… चूत खोलना और उसे ढंग से चोदना… हर मर्द के बस की बात नहीं… वो भी तेरी चूत जैसी… कुँवारी… करारी… तू डर मत शुरू मैं थोड़ा सह लेना बस फिर देखना तू चुदवाते-चुदवाते थक जाएगी पर तेरा मन नहीं भरेगा…”
“चल अब आ जा मेरी जान… अब और सहा नहीं जा रहा… मेरे लंड से खेलो मेरी रानी…” कहकर मैंने उसे उठा लिया बाहों में… और बिस्तर पर लिटा दिया। उसकी चूत ही नहीं बल्कि घुटनों तक जाँघ भी भीग चुकी थी। बूब्स एकदम सॉलिड और बड़े-बड़े हो गए थे। साँस के साथ ऊपर-नीचे… साँस ज़ोर-ज़ोर से चल रही थी।
मैं बिस्तर पर चढ़ा और उसके पेट पर बैठ गया। उन्नत उठे बूब्स के बीच में मैंने अपने लंबे खड़े लंड को बिठा दिया और दोनों बूब्स हथेली से दबा दिए। मेरा लंड बूब्स के बीच में फँस गया। उँगलियों से बूब्स के निप्पल रगड़ते हुए मैं बूब्स को मसलने लगा और लंड से उसके संकरे क्लिवेज को फक करने लगा।
अप स्ट्रोक में लंड का लाल हेड नंगा होकर उसके लिप्स से टच करता और डाउन स्ट्रोक में वैली की चुदाई। उत्तेजना में आकर निधि ने ज्यों ही चिल्लाने के लिए लिप्स खोले ही थे कि मेरे लंड का हेड उसमें जाकर अटक गया और वो गो… गो… गू… गूू… की आवाज करने लगी।
मैंने और ज़ोर लगाया ऊपर को तो लगभग आगे से 2-3 इंच लंड उसके मुँह में घुस गया। थोड़ी देर की कसमकश के बाद मोशन सेट हो गया… और मैं जैसे स्वर्ग में था। लंड ने स्पीड पकड़ ली थी… निधि के मुँह भी हेड को मस्त चूस रहा था… और शाफ्ट अंदर तक जा कर उसके गले तक हिट कर रही थी। बूब्स बड़े विशाल हो गए थे।
अब मैं हल्का सा उठकर आगे को सरका और निधि के बूब्स पर बैठ गया। और मैंने जितना पॉसिबल था लंड उसके मुँह में घुसा दिया। मेरी जाँघों के बीच कसा उसका पूरा बदन जैसे बिना पानी की मछली की तरह तड़प रहा था। थोड़ी देर के बाद मैंने लंड को निकाला और अब निधि ने मेरे दोनों टेस्टिकल्स को चाटना शुरू किया।
बीच में वो पूरे 9 इंच लंबे लंड पर अपनी जीभ फिराती तो कभी सुपाड़े को चाट लेती। थोड़ी देर के बाद मैंने 69 की पोजीशन ले ली तो उसे मेरे कम अंगों और आस-पास के एरिया की पूरी एक्सेस मिल गई अब वो मेरे चूतड़ भी चाटने लगी। मैंने भी गांड का छेद उसके मुँह पर रख दिया।
उसने बड़े प्यार से मेरे चूतड़ को हाथों में लिया और मेरी गांड के छेद पर जीभ से चाटा। इस बीच मैंने भी उसकी चूत को अपनी जीभ से चाटा और चोदा। पर वाकई उसकी चूत बड़ी कसी थी जीभ तक भी नहीं घुस पा रही थी उसमें। एक बार तो मुझे भी लगा कि कहीं वो मर न जाए मेरा लंड घुसवाते समय।
फिर मैंने उसे पलटकर के उसके बड़े-बड़े गोल-गोल चूतड़ भी चूसे और चाटे। अब निधि बड़े ज़ोर-ज़ोर से सिसकारी भर रही थी और बीच-बीच में चिल्ला भी उठती थी। वो मेरे लंड को दोनों हाथों से पकड़े हुई थी और अब काफी ज़ोर-ज़ोर से चिल्लाने लगी थी।
“डॉक्टर साहब… चोद दो मुझे… चढ़ जाओ मेरे ऊपर… घुसा दो डॉक्टर साहब… दया करो मेरे ऊपर… नहीं तो मैं मर जाऊँगी… चाहे मैं मर ही जाऊँ पर अपना ये मोटा सा लोहे का रॉड मेरे अंदर डाल दो… देखो साहब मेरी चूत कैसी लाल हो गई है… गरम होकर… इसकी आग ठंडी कर दो साहब अपने हथौड़े से… वाह क्या मर्दाना मस्त लंड है डॉक्टर साहब आपका… कोई भी लड़की देखते ही मतवाली हो जाए और अपने कपड़े खोलकर आपके बिस्तर पर लेट जाए… आओ साहब आ जाओ घुसा दो… ऊऊफ्फ…”
मेरा लंड भी अब कामुकता की सारी हदें पार कर चुका था। मैं उसकी टाँगों के बीच में बैठा और उसकी टाँगों को हवा में V शेप की तरह पूरी खोलकर उठाया और फिर उसकी कमर पकड़ उसकी चूत पर अपने लौड़े को रखा और आहिस्ता से पर ज़रा कस कर दबाया। चूत इतनी लुब्रिकेटेड थी कि लंड का हेड तो घुस ही गया।
“आह… मर गाईईइ… !! मैं मर गई… डॉक्टरररर स्स्स्साह्हह्ब्ब्ब…”
“घबराओ नहीं मेरी जान…” और मैंने लंड को हाथ से पकड़ थोड़ा और घुसाया। वो मुझे धक्का देने लगी। वो चिल्ला भी रही थी दर्द के मारे। तब मैंने उसे ज़बरदस्ती नीचे पटककर… उसपर लेट गया। अपनी छाती से उसके बूब्स को मसलते-मसलते आधे घुसे लंड को एक ज़बरदस्त शॉट मारा।
वो इतनी ज़ोर से चीखी जैसे किसी ने मार ही डाला हो। उसका शरीर भी तड़प उठा। और उसने मुझे कस कर जकड़ भी लिया था। मेरे लंड का करीब 6 इंच अंदर घुसा हुआ था। और शायद उसकी कौमार्य की झिल्ली जो तनी हुई थी और अभी फटनी बाकी थी।
थोड़ी देर बाद जब वो शांत सी हुई तो बोली… “डॉक्टर साहब मुझे छोड़ दो… मैं नहीं सह पाऊँगी आपका लंड…” मैंने उसके होंठों पर अपने होंठ रखे और एक ज़बरदस्त किस दिया जिसमें उसके कठोर बूब्स बुरी तरह कुचल गए थे। उसकी लंबी बाहों ने एक बार फिर मुझे लपेट लिया और उसकी टाँगें भी मेरी टाँगों से लिपट रही थीं। जैसे ठीक से चुदने के लिए पोजीशन ले रही हो।
थोड़ी देर में जब मुझे लगा कि वो दर्द भूल गई है तो अचानक मैंने लंड को थोड़ा सा बाहर निकालते हुए एक भरपूर शॉट मारा। लंड का ये प्रहार इतना शक्तिशाली था कि वो पस्त हो गई। एक और चीख के साथ… एक हल्की सी आवाज के साथ उसका कौमार्य आज फट गया था, शादी के 10 महीने बाद वो भी एक दूसरे मर्द से और इस प्रहार से उसका ऑर्गेज्म भी हो गया। उसकी चूत से रस धार बह निकली और बुरी तरह हाँफ रही थी।
अब निधि की चूत पूरी लसीली थी और मैं अभी तक नहीं झड़ा था। मैंने ज़ोरदार धक्कों के साथ उसे चोदना शुरू किया। उसकी टाइट चूत की दीवारों से रगड़ खाके मेरा लंड छीला जा रहा था। लेकिन मैं रुका नहीं और उसे बुरी तरह चोदता रहा।
फिर मैंने लंड उसकी चूत से खींच लिया और लंड एक आवाज के साथ बाहर आ गया जैसे सोडा वॉटर की बोतल खोली हो। फिर मैंने उसे डॉगी स्टाइल में कर दिया और पीछे से लंड उसकी चूत में डाल उसे चोदने लगा। अब निधि भी मस्ती में आ गई और मुझे ज़ोर से चोदने के लिए उकसाने लगी।
“चोदो मुझे… डॉक्टर साहब… फाड़ दो मेरी… डॉक्टर साहब… छोड़ना मत मुझे… बुरी तरह… फाड़ दो मुझे… और ज़ोर से चोद दो मुझे… मैं दासी हूँ आपकी… आपकी सेवा करूँगी… रोज रात-दिन आपके सामने बिल्कुल नंगी होकर रहूँगी… आपके लिए हमेशा तैयार रहूँगी… और जब-जब आपका लंड चाहेगा तब-तब चुदवाने के लिए आपके बिस्तर पर लेट जाऊँगी… पर मुझे खूब चोदो साहब…”
“और ज़ोर से और तेजी से चोदो साहब…”
उस रात मैंने निधि को 3 बार चोदा। दूसरे दिन दोपहर में निर्मला क्लिनिक में आ गईं। मैंने उसे बताया कि चेकअप हो गया है और शाम तक छोटा सा ऑपरेशन हो जाएगा और कल आपकी बहू आपके घर चली जाएगी। निर्मला संतुष्ट होकर वापस हवेली चली गईं।
आज रात निधि खुद उतावली थी कि कब रात हो। उसे भी पता था कि कल उसे वापस हवेली चले जाना है और आज की रात ही बची है सच्चा मजा लूटने का। उसने आज जैसे मैंने चाहा वैसे करने दिया। एक-दूसरे के अंगों को हम दोनों खूब चूसे, प्यार किए सहलाए और जी भर के देखे।
फिर मैंने निधि को तरह-तरह से कई पोज में चोदा। साथ में आने वाले दिनों में उसे अपने ससुराल में कैसे रहना है और क्या करना है सब समझा दिया। दूसरे दिन तुलसी भी शहर से आ गया। मैंने उसे समझा दिया कि निधि का ऑपरेशन हो गया है।
“तो डॉक्टर साहब निधि अब माँ बनेगी ना?” “हाँ पर तुम जल्दबाजी मत करना। अभी एक महीने तो निधि से दूर ही रहना। और हाँ इसे बीच-बीच में यहाँ चेकअप के लिए भेजते रहना। यह बहुत सावधानी का काम है।” तुलसी ने कुछ असमंजस से हाँ भरी। फिर वह निधि को ले गया। निधि मेरे प्लान के अनुसार बीच-बीच में क्लिनिक में आती रही। मैं उसे शाम के वक्त बुलाता जब गाँव के मरीज़ नहीं होते। रात 8-9 बजे तक उसे रख उसकी खूब चुदाई करता। निधि भी खूब मस्ती के साथ मुझसे चुदती।
3 महीने बाद निधि के गर्भ ठहर गए। मैंने निधि को समझा दिया कि वह तुलसी से अब चुदवाए। उसकी चूत को तो मेरे 9 इंच के लंड ने पहले ही भोसड़ा बना दिया था जहाँ अब तुलसी का लंड आराम से चला जाता। तुलसी भी बहुत खुश था कि डॉक्टर साहब के कारण ही अब वह अपनी बीवी को चोद पा रहा है। निधि पहले ही मेरी दीवानी बन चुकी थी। निर्मला को जब पता चला कि निधि के पाँव भरे हुए हैं तो उसने क्लिनिक में आकर मेरा शुक्रिया अदा किया। मैं तो खुश था ही और अब किसी दूसरी निधि की उम्मीद में अपना क्लिनिक चला रहा हूँ।
- मेरी बहन अपने नामर्द पति के वजह से रंडी बनी
- भाई की वाइफ को चोदकर मैं बना एक चोदू डॉक्टर
- विधवा आंटी से शादी कर सुहागरात मनाया
- मोटी भाभी को कुतिया बनाकर चोदा
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Mast story hai doctor 🏥💊 sahab
Wow! amazing story. I love it. Can you fuck me doctor?