complete sexy nude chachi sex story
मैं इस कहानी का अगला और विस्तृत भाग लिख रहा हूँ जिसमें सुनील और चाची अभिलाषा के बीच की रात को और बारीकी से बयान किया गया है।
दोस्तो, जैसा कि मैंने पिछले भाग में बताया था कि मैं चाची के कमरे में घुसा और उन्हें सेक्सी नाइटी में देखकर मेरा लंड उछाल मारने लगा। अब आगे की विस्तृत कहानी सुनिए।
जब मैंने चाची से कहा कि वे मेरी रानी हैं और मैं उन्हें हमेशा खुश रखूँगा, तो उनकी आँखों में आँसू आ गए।
वे मुझे कसकर गले लगा लीं और रोने लगीं। मैंने पूछा, “चाची, क्या हुआ? आप रो क्यों रही हैं?”
वे रोते हुए बोलीं, “सुनील, तू नहीं जानता। तेरे चाचा ने मुझे 5 साल से छुआ तक नहीं। मैं एक औरत हूँ और मेरे भी जरूरतें हैं। मैं रोज़ रात को अकेली बिस्तर पर तड़पती हूँ। आज जब तूने मुझे छुआ, तो मुझे लगा कि मैं जिंदा हूँ।”
मैंने उनके आँसू पोंछे और कहा, “चाची, आज के बाद आपको कभी अकेला नहीं छोड़ूँगा। मैं आपकी हर जरूरत पूरी करूँगा।”
यह कहकर मैंने उन्हें फिर से किस करना शुरू किया।
इस बार हमारा किस और भी गहरा और जुनूनी था।
हमारी जीभें एक-दूसरे के मुँह में घुसकर एक-दूसरे को चूस रही थीं।
मैंने चाची की नाइटी के बटन एक-एक करके खोलने शुरू किए।
जैसे ही पहला बटन खुला, उनकी काली ब्रा का ऊपरी हिस्सा दिखने लगा। मेरा दिल जोर-जोर से धड़कने लगा।
जब मैंने दूसरा बटन खोला, तो उनकी गहरी नाभि दिखी जो एकदम चिकनी और गोरी थी।
मैंने अपनी उंगली उनकी नाभि में डाली और घुमाने लगा।
चाची कांप उठीं और बोलीं, “आह्ह्ह… यह क्या कर रहा है… बहुत गुदगुदी हो रही है…”
मैंने तीसरा और चौथा बटन भी खोल दिया और अब उनकी नाइटी पूरी तरह खुल चुकी थी।
मैंने धीरे से नाइटी उनके कंधों से उतारी और वे सिर्फ काली ब्रा और पैंटी में मेरे सामने खड़ी थीं।
उनका गोरा बदन मेरे सामने था और मैं उसे देखता ही रह गया।
चाची शर्मा रही थीं और अपने हाथों से अपने बूब्स और चूत छुपाने की कोशिश कर रही थीं।
मैंने उनके हाथ हटाए और कहा, “चाची, शर्माइए मत। आप बहुत खूबसूरत हैं। मैं आपके इस बदन की पूजा करना चाहता हूँ।”
मैंने उन्हें बेड के किनारे बिठाया और खुद घुटनों के बल बैठ गया।
मैंने उनके पैरों को अपने हाथों में लिया और उनकी पायलों को चूमा।
फिर मैं धीरे-धीरे ऊपर की ओर बढ़ा।
उनकी जाँघें बहुत मुलायम और गोरी थीं। मैंने उनकी जाँघों पर किस करना शुरू किया।
चाची की साँसें तेज़ हो गईं और उन्होंने अपने हाथ मेरे बालों में फेर दिए।
मैं उनकी पैंटी के पास पहुँचा और उसके ऊपर से ही उनकी चूत पर किस कर दिया।
चाची कांप उठीं और अपनी कमर ऊपर उठा दीं। मैंने उनकी पैंटी के ऊपर से ही उनकी चूत को सहलाना शुरू किया। वह गीली हो चुकी थी और पैंटी पर गीलेपन का धब्बा दिख रहा था।
मैंने उनकी पैंटी पकड़ी और धीरे-धीरे नीचे खींची।
चाची ने अपनी कमर उठाई और मैंने पैंटी पूरी उतार दी।
अब उनकी चूत मेरे सामने थी। वह बिल्कुल साफ शेव की हुई थी और गुलाबी रंग की थी।
उसकी पंखुड़ियाँ बहुत सुंदर थीं और बीच से पानी टपक रहा था।
मैंने उनकी टांगें खोली और अपनी जीभ से उनकी चूत को चाटना शुरू किया।
चाची पागल हो गईं, “आह्ह्ह… हाँ… और जोर से चाटो… मेरी जान निकल गई… ओह्ह्ह माँ…”
मैंने उनके क्लिटोरिस को अपने होठों में लिया और चूसने लगा।
चाची की कमर हवा में उठने लगी और वे जोर-जोर से चिल्लाने लगीं।
मैंने एक उंगली उनकी चूत में डाली और अंदर-बाहर करने लगा।
चाची की चूत बहुत टाइट थी और उंगली अंदर जाते ही वे चीख उठीं।
मैंने उंगली अंदर-बाहर करते हुए उनकी चूत को चाटना जारी रखा।
10 मिनट बाद चाची झड़ गईं और उनका पानी मेरे मुँह में भर गया।
मैंने उसे पी लिया और ऊपर उठा। चाची थकी हुई लेकिन संतुष्ट दिख रही थीं।
मैंने अपना शॉर्ट और अंडरवियर उतार दिया।
मेरा 8.5 इंच का काला लंड पूरी तरह खड़ा था और उसका सुपाड़ा बैंगनी रंग का हो गया था।
चाची ने मेरे लंड को देखा और उनकी आँखें हैरानी से चौड़ी हो गईं।
वे बोलीं, “यह तो बहुत बड़ा और मोटा है… मेरे चाचा का तो इसका आधा भी नहीं है… यह मेरी चूत में कैसे जाएगा? मैं तो मर ही जाऊँगी…”
मैंने कहा, “चाची, डरो मत। पहले इसे चूसो ताकर थोड़ा चिकना हो जाए।”
चाची ने मेरे लंड को अपने हाथ में लिया और उसे सहलाया।
फिर उन्होंने अपने मुँह में ले लिया और चूसने लगीं। उनका मुँह बहुत गर्म था और मुझे बहुत मजा आ रहा था।
वे आधा लंड ही ले पा रही थीं क्योंकि वह बहुत मोटा था।
मैंने उनके सिर पकड़ा और अपना लंड उनके गले तक धकेलने की कोशिश की।
चाची उल्टी करने लगीं लेकिन मैंने रुकने नहीं दिया।
15 मिनट तक चूसवाने के बाद मैंने अपना लंड बाहर निकाला। वह पूरी तरह चिकना हो चुका था।
मैंने चाची को बेड पर लिटाया और उनकी टांगें अपने कंधों पर रखीं।
मैंने अपने लंड को उनकी चूत के मुँह पर रगड़ा।
चाची कांप रही थीं और कह रही थीं, “धीरे से करना… बहुत दर्द होगा…”
मैंने एक धक्का लगाया और मेरा सुपाड़ा अंदर घुस गया।
चाची दर्द से चीखीं, “आह्ह्ह… बाहर निकालो… बहुत दर्द हो रहा है… मेरी चूत फट जाएगी…”
मैंने उनके होठों पर किस किया और धीरे-धीरे अपना पूरा लंड अंदर डाल दिया।
मेरा लंड उनकी चूत की दीवारों से रगड़ खा रहा था और उन्हें दर्द हो रहा था।
मैंने कुछ देर रुककर उनके बूब्स दबाए और फिर धक्के लगाने शुरू किए।
पहले मैंने धीरे-धीरे धक्के लगाए और फिर जैसे-जैसे चाची को मजा आने लगा, मैंने स्पीड बढ़ा दी।
अब चाची भी नीचे से कमर उठा-उठा कर मेरा साथ दे रही थीं। उनकी चूत से “फच्च… फच्च…” की आवाज आ रही थी और पूरा कमरा उसी आवाज से गूंज रहा था।
चाची बोलीं, “और जोर से… मेरी चूत फाड़ दो… आज मुझे अपनी बना लो… मैं तेरी रंडी हूँ… चोद मुझे…”
मैंने उनकी टांगें और चौड़ी की और जोर-जोर से चोदने लगा। बेड की आवाज “किच… किच…” कर रही थी। चाची के 36 इंच के बूब्स हर धक्के के साथ हिल रहे थे और मैं उन्हें दबाते हुए चोद रहा था।
लगभग 25 मिनट तक चोदने के बाद मैं झड़ने वाला था। मैंने पूछा, “चाची, कहाँ निकालूँ?”
वे बोलीं, “अंदर ही डाल दे… आज मैं तेरी हूँ… मेरी चूत में अपना माल छोड़ दे… मैं तेरे बच्चे की माँ बनना चाहती हूँ…”
यह सुनकर मैं और उत्तेजित हो गया।
मैंने एक जोरदार धक्का लगाया और अपना सारा वीर्य उनकी चूत में छोड़ दिया।
वे भी झड़ गईं और हम दोनों एक-दूसरे से लिपटकर सो गए।
कुछ देर बाद जब हम उठे, तो चाची ने देखा कि उनकी चूत से मेरा वीर्य बह रहा था। वे मुस्कुराईं और कहा, “तूने तो मेरी चूत भर दी।”
मैंने कहा, “चाची, अभी तो रात बाकी है। एक बार और करते हैं।”
चाची ने कहा, “इस बार मुझे घोड़ी बनाकर चोद। मैं तेरी कुतिया बनना चाहती हूँ।”
मैंने उन्हें घोड़ी बनाया और पीछे से उनकी चूत में अपना लंड डाल दिया।
उनकी गांड बहुत मस्त थी और मैं उसे दबाते हुए चोद रहा था। चाची बोलीं, “और जोर से… मेरी गांड भी मार… आज मुझे पूरी तरह चोद दे…”
मैंने उनकी गांड पर थप्पड़ मारे और उनकी चूत को जोर-जोर से चोदा।
30 मिनट बाद मैं फिर झड़ गया। इस बार मैंने अपना माल उनकी गांड पर निकाल दिया।
फिर हमने 69 की पोजीशन में भी सेक्स किया। चाची मेरा लंड चूस रही थीं और मैं उनकी चूत चाट रहा था।
हम दोनों एक साथ झड़े और फिर एक-दूसरे को चूमते रहे।
रात भर हमने पांच बार सेक्स किया। चाची की चूत अब मेरे लंड से ढीली हो गई थी और वे बहुत संतुष्ट थीं।
अगली सुबह जब मैं उठा तो चाची मेरी बाहों में थीं और वे मुझे प्यार से देख रही थीं।
उन्होंने कहा, “सुनील, तू तो बहुत मर्द है। आज मुझे असली मजा आया है। मैं तेरी दीवानी हो गई हूँ।”
मैंने कहा, “चाची, मैं भी आपका दीवाना हूँ। आज के बाद जब भी मैं आऊँगा, हम यही करेंगे।”
उसके बाद से जब भी मैं घर आता, मैं और चाची चुपके से मिलते और जमकर चुदाई करते।
चाचा को कुछ पता नहीं चला और हमारा रिश्ता आज भी चल रहा है।
चाची अब मेरी पूरी तरह से हो गई हैं और वह मेरे बिना नहीं रह सकतीं।
उन्होंने मुझसे वादा किया है कि वह मेरे बच्चे की माँ बनेंगी और हमेशा मेरी रखैल बनकर रहेंगी।
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