मौसी को दस लंडों से चुदवाते हुए मौसा जी ने पकड़ लिया

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पांच मजदूरों के साथ गैंगबैंग के बाद मेरी मौसी पूरी तरह से बदल गई थीं। वह अब और भी ज्यादा हॉर्नी हो गई थीं।

{अगर आपने पिछली कहानी नहीं पढ़ी है तो पहले वह पढ़ लें की कैसे मौसी जी के इच्छा पर पांच मजदूरों से गैंगबैंग करवाया}

उनकी बुर और गांड थोड़ी फैल चुकी थीं लेकिन वह और अधिक चाहती थीं।

एक हफ्ते बाद जब मैं उनके घर गया तो वह मुझे देखते ही बोलीं, राहुल, वह दिन मैं कभी नहीं भूल सकती। लेकिन अब मुझे और चाहिए।

मैंने पूछा, क्या चाहिए मौसी?

वह मेरी आंखों में देखते हुए बोलीं, पांच से मन नहीं भरा। इस बार मैं दस चाहती हूँ। दस मर्द। दस लंड। एक साथ।

मैं चाहती हूँ कि मेरी तीनों छेद भरी रहें और दोनों हाथों में भी लंड हों। मैं पूरी तरह से भरी हुई महसूस करना चाहती हूँ।

मैं थोड़ा घबराया लेकिन फिर सोचा, मौसी की इच्छा पूरी करनी ही होगी।

मैंने कहा, ठीक है मौसी, इस बार मैं दस मर्दों का इंतजाम करता हूँ। लेकिन यह थोड़ा मुश्किल होगा।

वह बोलीं, जैसे भी करो। मैं तैयार हूँ। और सुन, इस बार उन्हें पैसे नहीं देना। मैं अपने शरीर से उनका भुगतान करूंगी।

वे मुझे चोदेंगे और मैं उन्हें अपनी बुर का सुख दूंगी। यही मेरी मजदूरी होगी।

मैंने कहा, ठीक है मौसी, जैसी आपकी इच्छा।

अगले दिन मैं गाँव के बाहर गया जहाँ मजदूर काम करते थे। इस बार मुझे दस मर्द चाहिए थे।

मैंने देखा कि वहां कुछ नए मजदूर भी आए थे जो पास के गाँवों से काम करने आए थे।

मैंने धीरे-धीरे दस मजदूरों को चुना। उनमें से कुछ पिछली बार वाले भी थे जो फिर से तैयार हो गए।

मैंने उनसे कहा, भैयाओ, एक बहुत खास काम है। दस मर्द चाहिए। काम है पूरे दिन का। लेकिन यह काम थोड़ा अलग है।

उनमें से एक ने पूछा, कैसा काम भाई साहब?

मैंने समझाया, देखो, मेरी मौसी हैं। वह बहुत अकेली हैं और उनकी एक इच्छा है। वह चाहती हैं कि दस मर्द उन्हें एक साथ चोदें।

वह खुद चाहती हैं यह। अगर तुम लोग तैयार हो तो आओ। कोई पैसा नहीं मिलेगा लेकिन मेरी मौसी बहुत खूबसूरत हैं और वह तुम्हें वह सुख देंगी जो तुमने कभी नहीं पाया होगा।

वह सब आपस में देखने लगे। फिर एक बुजुर्ग मजदूर बोला, भाई साहब, हम गरीब आदमी हैं। हमें तो कुछ भी करने में कोई परेशानी नहीं।

और अगर कोई खूबसूरत औरत चुदवाने को तैयार है तो हम क्यों मना करेंगे? वैसे भी हम महीनों से अपनी औरतों से दूर हैं।

मैंने कहा, ठीक है, लेकिन एक बात याद रखना। वह मेरी मौसी हैं। उनके साथ जोर-जबरदस्ती नहीं चलेगी।

जो वह कहेंगी वही करना। और तुम सबको नहाना-धोना जरूरी है। गंदगी नहीं चलेगी।

वह सब तैयार हो गए। मैं उन्हें शाम को मौसी के घर ले आया। मौसी ने उस दिन खास तैयारी की थी।

उन्होंने एक बहुत ही पतली और छोटी साड़ी पहनी थी जो लगभग पारदर्शी थी।

उनके दूध साड़ी में साफ दिख रहे थे और निपल्स खड़े थे। उन्होंने मेकअप भी किया था और बहुत खूबसूरत लग रही थीं।

जब मैं दस मजदूरों को लेकर आया तो मौसी की आंखें चमक उठीं।

वह बोलीं, वाह राहुल! दस मर्द! और सब कड़क लग रहे हैं।

मैंने कहा, हाँ मौसी, यह सब आपके लिए तैयार हैं।

मौसी ने उन दसों को देखा। वह सभी बीस से चालीस साल की उम्र के बीच के थे।

कुछ बहुत गठीले थे, कुछ लंबे-डौड़े। सभी कड़ी मेहनत करने वाले मजदूर थे जिनके शरीर पर पसीने की महक थी लेकिन वह नहा कर आए थे।

मौसी बोलीं, आओ, अंदर आओ। आज मैं तुम सबकी हूँ।

मैंने उन्हें एक बड़े कमरे में ले जाया जहाँ मैंने पहले से ही बिस्तर तैयार कर रखा था।

वह एक बहुत बड़ा बिस्तर था जिस पर दस मर्द आराम से समा सकते थे।

मौसी बोलीं, पहले तुम सब अपने कपड़े उतारो। मैं देखना चाहती हूँ कि तुम्हारे पास क्या हथियार हैं।

वह दसों ने शर्माते हुए अपने कपड़े उतारने शुरू किए। जैसे-जैसे वह नंगे होते गए, मौसी की आंखें बड़ी-बड़ी होती गईं।

वह सभी मजदूर कड़ी मेहनत की वजह से बिल्कुल फिट थे। उनके पेट पर तगड़ी मांसपेशियां थीं और उनके लंड… हर एक का लंड खड़ा हो चुका था।

कुछ के छह इंच, कुछ के सात इंच, कुछ के आठ इंच और दो के तो करीब नौ इंच के थे।

मौसी बोलीं, वाह! क्या मर्द हैं तुम लोग। देखा राहुल, दस लंड! आज तो मेरी बुर और गांड दोनों फट जाएंगी लेकिन मजा आ जाएगा।

मैंने कहा, हाँ मौसी, आज आप पूरी तरह से संतुष्ट हो जाएंगी।

मौसी ने अपनी साड़ी उतारनी शुरू की। वह धीरे-धीरे नंगी होती गईं। जब वह पूरी तरह से नंगी हो गईं, तो उनका गोरा बदन उन दस मजदूरों के सामने चमक रहा था।

उनके दूध लटक रहे थे लेकिन फिर भी सख्त थे, निपल्स खड़े थे। उनकी बुर पर हल्के बाल थे और वह पहले से ही गीली हो चुकी थी।

वह दसों मजदूर तो जैसे पागल हो गए। उनकी आंखें मौसी के बदन पर टिक गईं।

उनमें से एक बोला, मालकिन, आप तो बहुत खूबसूरत हैं। हमने तो ऐसी औरत कभी नहीं देखी।

मौसी बोलीं, आज तुम्हें न सिर्फ देखने को मिलेगी, बल्कि चोदने को भी मिलेगी। मैं तुम सबकी हूँ आज। जो चाहो वो करो। लेकिन धीरे-धीरे शुरू करो।

पहला मजदूर जो सबसे बुजुर्ग था, उसने कहा, मालकिन, मैं पहले आपके दूध चूसना चाहता हूँ।

मौसी ने कहा, आओ, पी लो मेरा दूध।

वह मजदूर आगे बढ़ा और मौसी के स्तन को अपने हाथों में लेकर चूसने लगा। वह उनके निपल्स को काट रहा था। मौसी आहें भर रही थीं, आह्ह्ह… हाँ… और जोर से चूसो… बड़े मजे हैं…

दूसरा मजदूर पीछे गया और मौसी की गांड को सहलाने लगा।

उसने अपनी उंगली उनकी गांड के छेद में डाल दी। ओह्ह्ह… वहां भी डालो… मेरी गांड भी तरस रही है… मौसी चिल्लाईं।

तीसरा मजदूर नीचे बैठ गया और मौसी की बुर को चाटने लगा। वह अपनी जीभ उनकी बुर में डाल-डाल कर चूस रहा था।

चौथा मजदूर आगे आया और मौसी का हाथ पकड़ कर अपने लंड पर रख दिया।

मौसी ने उसे पकड़ा और सहलाने लगीं। वह बोलीं, वाह, कितना कड़क लंड है तेरा।

पांचवां मजदूर आगे आया और अपना लंड मौसी के मुंह के पास ले आया।

मौसी ने बिना कहे ही उसे अपने मुंह में ले लिया और चूसने लगीं।

मैं एक कोने में बैठकर यह सब देख रहा था। मेरा लंड भी खड़ा हो चुका था।

मैंने अपना लंड बाहर निकाल कर सहलाना शुरू कर दिया।

छठा, सातवां, आठवां, नौवां और दसवां मजदूर भी आ गए। अब मौसी के चारों ओर दस लंड थे।

वह एक-एक करके उन्हें चूसने लगीं। वह पहले एक का लंड मुंह में लेकर चूसतीं, फिर दूसरे का।

वह बारी-बारी से दसों के लंड चूस रही थीं।

आह्ह्ह… मालकिन… बहुत मजा आ रहा है… वह मजदूर कराह रहे थे।

मौसी बोलीं, अब बस करो। अब मेरी बुर में डालो। मैं चुदना चाहती हूँ। मैं तैयार हूँ।

पहला मजदूर बिस्तर पर लेट गया। मौसी उसके ऊपर चढ़ गईं और उसका लंड अपनी बुर में बैठा लिया।

ओह्ह्ह… बड़ा है… आह्ह्ह… मौसी चिल्लाईं।

जैसे ही पहले मजदूर का लंड उनकी बुर में गया, दूसरा मजदूर पीछे से आया और अपना लंड उनकी गांड में डालने लगा।

आह्ह्ह… दोनों छेद भर गए… बहुत मजा आ रहा है… मौसी चिल्लाईं।

तीसरा मजदूर आगे आया और अपना लंड मौसी के मुंह में डाल दिया।

अब मौसी की तीनों छेद भरी हुई थीं। वह एक साथ तीन लंड ले रही थीं। एक बुर में, एक गांड में और एक मुंह में।

चौथा मजदूर आया और मौसी के एक हाथ में अपना लंड दे दिया। पांचवां मजदूर दूसरे हाथ में।

अब मौसी पांच लंड से एक साथ चुद रही थीं। उनकी बुर में एक, गांड में एक, मुंह में एक और दोनों हाथों में एक-एक।

चोदो सालों… चोदो मुझे… और जोर से… मौसी चिल्लाईं जा रही थीं।

वह पांचों मजदूर एक साथ धक्के लगा रहे थे। जब एक अंदर डालता तो दूसरा बाहर निकालता। मौसी की बुर और गांड से फच-फच की आवाजें आ रही थीं।

मैं देख रहा था और मुझे भी बहुत मजा आ रहा था। मैंने सोचा कि अब मुझे भी शामिल होना चाहिए।

मैं उठकर गया और छठे मजदूर से कहा, रुक, अब मेरी बारी है।

मैंने मौसी के हाथ में अपना ग्यारह इंच का लंड दे दिया। वह मुंह से तीसरे का लंड निकालकर बोलीं, आह्ह्ह… राहुल… तू भी आ गया… देख… तेरी मौसी की बुर कैसे चुद रही है…

मैंने कहा, हाँ मौसी, देख रहा हूँ। आप बहुत मजे ले रही हैं।

वह मेरे लंड को चूसने लगीं जबकि पीछे से दूसरा मजदूर उनकी गांड चोद रहा था और नीचे पहला मजदूर उनकी बुर में लंड पेल रहा था।

कुछ देर बाद उन्होंने पोजीशन बदली। अब मौसी घोड़ी बन गईं।

एक मजदूर नीचे लेटा और मौसी उसके ऊपर, दूसरा पीछे से उनकी गांड में, तीसरा आगे से उनके मुंह में और चौथा और पांचवां दोनों उनके हाथों में अपने लंड देकर खड़े थे।

छठा मजदूर नीचे बैठकर उनकी बुर चाट रहा था जबकि सातवां उनके दूध चूस रहा था।

आह्ह्ह… मेरी बुर फट रही है… इतने बड़े-बड़े लंड… और जोर से… मौसी चिल्ला रही थीं।

आठवां मजदूर आया और मौसी के पैरों के पास खड़ा हो गया। उसने अपना लंड उनके पैरों पर रगड़ना शुरू कर दिया।

नौवां मजदूर उनके सिर के पास खड़ा होकर अपना लंड उनके बालों में रगड़ रहा था।

दसवां मजदूर उनके बगल में खड़ा था और उनकी कमर को चूम रहा था।

मैंने देखा कि उनकी बुर से खून निकल रहा था लेकिन वह रुकने को नहीं कह रही थीं। वह और ज्यादा चाहती थीं।

मैंने कहा, मौसी, आपकी बुर से खून आ रहा है। रुक जाएं?

वह बोलीं, नहीं साले… रुकना नहीं है… और चोदो मुझे… मैं औरत हूँ… मुझे चोदना चाहिए… आह्ह्ह… और जोर से… मेरी गांड भी फाड़ दो…

वह दसों मजदूर बारी-बारी से उनकी बुर और गांड चोद रहे थे।

हर एक करीब दस-दस मिनट तक उन्हें चोदता और फिर दूसरा ले लेता। मौसी की बुर और गांड से खून और पानी मिलकर बह रहा था।

दोपहर हो चुकी थी। मैंने उनके लिए खाना मंगवाया। वह सभी नंगे ही बैठकर खाना खा रहे थे।

मौसी भी नंगी ही बैठी थीं और खाते समय भी वह मजदूरों के लंड सहला रही थीं।

खाना खाने के बाद फिर से शुरुआत हुई। इस बार मौसी ने कहा, अब मैं सबका एक साथ लूंगी।

वह बिस्तर पर लेट गईं और अपने पैर फैला दिए।

उन्होंने कहा, एक मेरे मुंह में, दो मेरे हाथों में, एक मेरी बुर में, एक मेरी गांड में, दो मेरे दूध पर रगड़ें, एक मेरे पैरों पर और दो मेरे बगल में खड़े होकर हिलाएं।

वह दसों मजदूर तैयार थे। पहला मजदूर उनकी बुर में घुसा, दूसरा गांड में, तीसरा मुंह में और बचे हुए उनके हाथों में, दूध पर, पैरों पर और बगल में।

फच-फच-फच… की आवाजें कमरे में गूंज रही थीं।

मौसी की बुर और गांड से पानी और खून मिलकर बह रहा था लेकिन वह रुकने का नाम नहीं ले रही थीं।

वह चिल्ला रही थीं, और जोर से… मेरी बुर फाड़ दो… मेरी गांड तोड़ दो… मैं तुम्हारी रंडी हूँ… चोदो मुझे… दस लंड एक साथ… आह्ह्ह… मैं जन्नत में हूँ…

मैंने देखा कि वह दसों मजदूर थक चुके थे लेकिन मौसी अभी भी चुदवा रही थीं। उनकी इच्छा अतृप्त थी।

मैंने कहा, बस करो अब।

मौसी बोलीं, नहीं… अभी और… मैंने कहा था ना पूरे दिन… मैं और चाहती हूँ… और जोर से…

शाम होने वाली थी। सूरज डूबने वाला था। मजदूरों ने कई बार अपना माल छोड़ दिया था।

मौसी के शरीर पर स्पर्म की मोटी परत जम गई थी। उनके चेहरे पर, दूध पर, बुर में, गांड में, बालों में, हर जगह माल था।

अचानक बाहर गाड़ी की आवाज आई। मैंने खिड़की से झाँककर देखा तो मेरे होश उड़ गए। मौसा जी की गाड़ी थी!

मैं घबराकर मौसी से बोला, मौसी! मौसा जी आ गए!

मौसी एकदम से उठीं। उनकी आंखों में डर था लेकिन साथ में एक अजीब सी उत्तेजना भी थी। वह बोलीं, क्या? वह बिना बताए?

मैंने कहा, हाँ मौसी, वह अंदर आ रहे हैं!

दरवाजा खुला और मौसा जी अंदर आए। वह मुंबई से आए थे और अपनी पत्नी को सरप्राइज देना चाहते थे।

लेकिन जैसे ही उन्होंने कमरे में कदम रखा, वह एकदम से जमीन पर खड़े हो गए।

उनकी आंखों के सामने का दृश्य उन्हें विश्वास नहीं हो रहा था। उनकी पत्नी, मेरी मौसी, पूरी तरह से नंगी थीं।

उनके शरीर पर स्पर्म से सना हुआ था। उनके चारों ओर दस नंगे मर्द खड़े थे जिनके लंड खड़े थे।

मौसी की बुर और गांड से खून और माल बह रहा था।

मौसा जी कांप रहे थे।

उन्होंने कहा, यह… यह क्या है नीतू? यह सब क्या हो रहा है?

मौसी पहले तो डरीं, फिर उन्होंने हिम्मत जुटाई और बोलीं, तुमने जो देखा वही है। मैं चुदवा रही हूँ। इन दस मजदूरों से।

मौसा जी चिल्लाए, तुम पागल हो गई हो! यह क्या हरकत है? और तू यहां क्या कर रहा है राहुल?

मैंने कहा, मौसा जी, मैं… मैं सिर्फ…

मौसी ने कहा, इसमें राहुल का कोई दोष नहीं है। मैंने ही इससे कहा था कि यह मजदूरों को लाए। मैं चाहती थी यह सब।

मौसा जी कांपते हुए बोले, लेकिन क्यों? मैं तो हूँ ना?

मौसी बोलीं, तुम? तुम तो महीने में एक बार आते हो और वह भी दो मिनट में निकल जाते हो। मुझे चाहिए था असली मर्दों का साथ। देखो इनके लंड, इनकी ताकत। तुम क्या दोगे मुझे?

मौसा जी ने देखा कि वह मजदूरों के लंड वाकई में बड़े-बड़े थे।

उनका अपना लंड तो छोटा था और वह इससे इनकार नहीं कर सकते थे।

मौसा जी ने कहा, तो क्या मैं तुम्हें खुश नहीं कर सकता?

मौसी बोलीं, नहीं कर सकते। लेकिन अगर तुम चाहो तो यहीं बैठकर देख सकते हो कि तुम्हारी पत्नी कैसे चुदती है।

मौसा जी हैरान थे।

उन्होंने कहा, क्या? मैं देखूं?

मौसी बोलीं, हाँ, बैठो वहां। और देखो कि असली मर्द कैसे चोदते हैं।

मौसा जी कुछ सोचते रहे फिर वह कोने में बैठ गए।

उनकी आंखों में आंसू थे लेकिन साथ में एक अजीब सी उत्तेजना भी थी।

मौसी ने मजदूरों से कहा, चलो जारी रखो। मेरे पति देख रहे हैं। उन्हें दिखाओ कि कैसे चोदते हैं।

वह मजदूर फिर से शुरू हो गए। वह दसों मजदूर मौसी को चोदने लगे।

मौसा जी कोने में बैठकर देख रहे थे कि कैसे उनकी पत्नी दस मर्दों से एक साथ चुद रही थीं।

आह्ह्ह… देखो… तुम्हारी पत्नी कितनी मस्त है… इन लंड से… मौसी चिल्ला रही थीं।

मौसा जी का लंड खड़ा हो गया था। वह अपने लंड को पैंट के ऊपर से ही सहला रहे थे।

मैंने देखा और मुस्कुराया। मैंने कहा, मौसा जी, आप भी निकाल लो।

मौसा जी ने शर्माते हुए अपना लंड बाहर निकाल लिया।

वह छोटा था, करीब पांच इंच का। वह उसे हिलाते हुए देख रहे थे।

मौसी बोलीं, देखा, तुम्हारा लंड इनके सामने कुछ भी नहीं है। फिर भी आओ, मेरे पास आओ। मैं तुम्हें भी ले लेती हूँ।

मौसा जी उठे और मौसी के पास गए। मौसी ने उनका छोटा लंड अपने मुंह में ले लिया और चूसने लगीं।

वह दस मजदूर उन्हें चोद रहे थे और वह अपने पति का लंड चूस रही थीं।

आह्ह्ह… नीतू… मैं झड़ने वाला हूँ… मौसा जी कराहे।

मौसी ने उनका लंड मुंह से निकाला और बोलीं, अपना माल मेरे चेहरे पर छोड़ो।

मौसा जी ने अपना माल मौसी के चेहरे पर छोड़ दिया।

वह दस मजदूर भी एक-एक करके मौसी के चेहरे पर झड़ने लगे।

मौसी का चेहरा पूरी तरह से स्पर्म से ढक गया।

मौसी बोलीं, देखा… यह है असली चुदाई… मैं खुश हूँ…

मौसा जी ने कहा, मैं समझ गया। तुम्हें यही चाहिए था।

मैंने कहा, मौसा जी, माफी चाहता हूँ। लेकिन मौसी की इच्छा थी।

मौसा जी ने कहा, कोई बात नहीं। अब मैं समझ गया हूँ कि मेरी पत्नी को क्या चाहिए।

उस रात मौसा जी ने मौसी को छुआ भी नहीं।

वह सिर्फ देखते रहे कि कैसे मैं और मजदूर उन्हें चोदते हैं।

और तब से मौसा जी हमेशा यही चाहते थे कि मौसी दूसरों से चुदें और वह देखें।

यह थी मेरी मौसी की दस लंडों की कहानी जिसमें मौसा जी ने उन्हें पकड़ लिया लेकिन फिर भी वह खुश थे क्योंकि उन्हें पता चल गया था कि उनकी पत्नी की असली जरूरत क्या है।

तो दोस्तों आशा करता हूँ की आपको मेरी यह कहानी पसंद आई होगी. यह सचमुच की कहानी है. मैं खुद आज तक नहीं समझ पाया हूँ एक घरेलु औरत इस तरह हो सकती है अभी भी मुझे संदेह है.

कभी कभी सोचता हूँ की इंसान की हवस का कोई सीमा नहीं है। सारे रिश्ते भूल जाता है और नज़र आती है तो सिर्फ चुदाई।

मैंने अपने इंजीनियरिंग के दौरान ऐसे ऐसे चुदाई देखें है की मैं घबरा जाता हूँ अब सोचकर। मैं लिखते हुए भी शरमा जाता हूँ। मेरे पास बहुत साड़ी कहानियां है। और मैं धीरे धीरे आपके साथ सभी शेयर करूँगा।

इस कहानी को पढ़ने के लिए धन्यबाद! अगर आप कभी कटिहार आये और चुदाई का मन हो तो मुझे कमेंट करियेगा और अगर मैं कमेंट पढ़ा तो आपको मजे दिलाने की कोसिस करूँगा।

नोट: यहां पोस्ट की गई सभी कहानियां केवल मनोरंजन के उद्देश्य से प्रस्तुत की गई हैं। कृपया इन्हें वास्तविक जीवन से जोड़कर न देखें। कहानी में दर्शाए गए किसी भी दृश्य, घटना या चित्र का वास्तविक जीवन में प्रयोग करना हानिकारक हो सकता है। इसके लिए न तो कहानी के लेखक और न ही प्रस्तुतकर्ता जिम्मेदार होंगे। इसलिए कृपया अपनी समझ, बुद्धि और विवेक का उपयोग करें।

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