इंग्लिश क्लास वाले लड़के ने मुझे होटल में पहली बार चोदा

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नमस्ते दोस्तों, मैं तरन्नुम। आज मैं आपको अपने दिल की सबसे गहरी बात बताऊँगी।

यह वो कहानी है जो मैंने आज तक किसी को नहीं बताई। यह मेरी जिंदगी का वो पन्ना है जो मैं आपके सामने खोलने जा रही हूँ।

बात उन दिनों की है जब मेरा घर पटना में बना। पहले हम लोग गुलवरिया गाँव में रहते थे।

मेरे पिता एक किसान थे और माँ गृहिणी। हमारा परिवार बड़ा था – दो भाई, पाँच बहनें और मैं सबसे छोटी थी।

जब हम पटना शिफ्ट हुए तो मुझे बड़ा अच्छा लगा। शहर की रौनक, भीड़-भाड़, और वो आजादी जो गाँव में नहीं मिलती थी।

हमारा घर सिनेमा रोड पर था। यहाँ सब कुछ नजदीक था – बाजार, स्कूल, और मनोरंजन।

मैं हमेशा से ही खूबसूरत थी। मेरी हाइट 5 फीट 6 इंच थी, रंग गोरा, और बाल लंबे काले।

मेरी फिगर 32-26-32 थी – जैसे किसी हीरोइन की। मुझे मर्दों की नजरों में खोया हुआ पाना अच्छा लगता था।

मैं चाहती थी कि मेरे इर्द-गिर्द हमेशा कोई न कोई लड़का या मर्द रहे और मैं उससे बातें करती रहूँ।

हमारे घर के सामने ही एक सिनेमा हॉल था। उसमें हमेशा गंदी-गंदी फिल्में लगती थीं।

चुड़ैल वाले पोस्टर होते थे – पूरी तरह नंगी नहीं, पर उसी तरह से अर्ध-नग्न।

मैं जब भी उन पोस्टरों को देखती तो मेरे अंदर कुछ होता। मेरी बुर में एक अजीब सी खिंचाव महसूस होती।

मुझे समझ नहीं आता था कि यह क्या है, लेकिन यह अच्छा लगता था।

मेरी बड़ी बहन की शादी हो चुकी थी। उसका देवर सलमान अक्सर हमारे यहाँ आता था।

वह BPSC की तैयारी कर रहा था। सलमान खूबसूरत नहीं था, लेकिन बीच-बीच का था।

वह मुझसे खुल गया था। हम रात भर पढ़ाई के नाम पर जागते और खूब बातें करते।

एक दिन उसने मुझे एक किताब दी। वह मस्तराम की चुदाई वाली किताब थी।

मैंने जब उसे पढ़ा तो मेरा दिमाग हिल गया।

उसमें लिखा था कि कैसे लड़का लड़की को चोदता है, कैसे लंड को बुर में डालते हैं, कैसे औरतें चिल्लाती हैं। मुझे बहुत मजा आया।

उस रात मैंने पहली बार अपने नंगे शरीर को आईने में देखा। मैंने अपने कपड़े उतारे और खड़ी हो गई।

मेरी चूचियाँ गोल और मुलायम थीं। मेरे निप्पल गुलाबी रंग के थे।

मेरी बुर पर हल्के-हल्के बाल थे। मैं समझ गई कि मैं सिर्फ ऊपर से ही नहीं, अंदर से भी बहुत सेक्सी हूँ।

कोई भी मुझे देखे तो पागल हो जाए।

कुछ दिनों बाद मैंने एक इंग्लिश स्पोकन की कोचिंन ज्वाइन की। वहाँ मेरी जिंदगी बदल गई।

मैंने जुल्फिकार को देखा। वह 5 फीट 11 इंच का हेंडसम लड़का था। रोज जिम जाता था, उसका बॉडी बेहद मस्कुलर था।

उसकी छाती चौड़ी, पेट सिक्स पैक वाला, और हाथों में नसें उभरी हुई।

वह मेरे आगे-पीछे घूमता रहता था। मुझे पता था कि वह मुझे पटाना चाहता है।

उसने मुझे लिपस्टिक, सोने की चेन, रोमांटिक कहानियों की किताबें, और चूड़ियाँ तोहफे में दीं।

मैं भी उसे देखकर गर्म हो जाती थी। मेरी बुर उसके लिए तरसती थी।

एक दिन कोचिंग खत्म होने के बाद उसने मुझे रोक लिया। हम अकेले थे क्लासरूम में।

उसने मेरा हाथ पकड़ा और कहा, “तरन्नुम, मुझे तुम्हें चोदना है। चोदवाओगी मुझसे?”

मैं तो हैरान रह गई। ऐसी बातें मैंने सिर्फ उस किताब में पढ़ी थीं। मैं कुंवारी थी। कोई मुझे नहीं चोद पाया था।

कई लड़कों ने कोशिश की थी लेकिन मैंने मना कर दिया था। लेकिन जुल्फिकार… वह अलग था।

मैंने सोचा, फिर कहा, “ठीक है, मैं तुमसे चोदवाऊंगी। लेकिन कहीं बाहर, ताकि घर वालों को या दोस्तों को पता न चले।”

उसने मुस्कुराते हुए कहा, “थैंक यू, मेरी जान। मैं तुम्हें वो खुशी दूँगा जो तुमने कभी सोची भी नहीं होगी।”

अगले दिन जुल्फिकार ने एक होटल में कमरा बुक किया।

मैंने स्कूल से छुट्टी ली और उसके साथ चली गई।

यह मेरी पहली चुदाई थी, इसलिए मैंने उसे कहा था कि वह बहुत सावधानी से मुझे चोदेगा। वह मान गया था।

जब हम कमरे में दाखिल हुए तो मेरी साँसें रुक गईं।

जुल्फिकार ने यह कमरा मेरे लिए सजाया था। यह एक डीलक्स सूट था जो मेरे सपनों से भी खूबसूरत था।

छत पर एक बड़ा क्रिस्टल झूमर लगा था जो रोशनी में इंद्रधनुषी रंग बिखेर रहा था।

फर्श पर मुलायम क्रीम रंग का कारपेट था जिस पर ताजे गुलाब की पंखुड़ियाँ बिखेरी हुई थीं।

बीच में एक विशाल बेड था जिस पर सफेद रेशमी चादरें बिछी थीं।

उस पर लाल गुलाबों से एक दिल का आकार बनाया गया था – जैसे यह मेरे लिए कोई सरप्राइज हो।

कमरे के कोनों में खुशबूदार मोमबत्तियाँ जल रही थीं।

लैवेंडर और गुलाब की खुशबू पूरे कमरे में फैली हुई थी, इतनी ताजगी कि मैं मदहोश हो रही थी।

एक तरफ एक छोटी सी बार काउंटर थी जिस पर शैंपेन की बोतल रखी थी और दो कांच के गिलास।

दीवारों पर हल्के गुलाबी रंग की रोशनी थी जो कमरे को एक सपनों की दुनिया बना रही थी।

खिड़की से पटना शहर का नजारा दिखाई दे रहा था – दूर तक बिखरी रोशनी और चलते हुए वाहन।

कमरे में एक म्यूजिक सिस्टम भी था जिससे धीमी रोमांटिक संगीत बज रहा था – कोई पुराना हिंदी गाना जो प्यार और चाहत पर था।

बाथरूम का दरवाजा खुला था जहाँ से गर्म पानी की भाप आ रही थी।

अंदर एक बड़ा बाथटब था जिसमें गुलाब की पंखुड़ियाँ तैर रही थीं और फ्रेगरेंस ऑयल्स रखे थे।

यह सब देखकर मेरी आँखें नम हो गईं। मैंने कभी सोचा नहीं था कि मेरी पहली बार इतनी शानदार जगह पर होगी।

जुल्फिकार ने मेरे हाथ पकड़े और धीरे से कमरे में ले गया। उसने दरवाजा बंद किया और चाबी लगा दी।

अब हम दोनों अकेले थे – इस रोमांटिक आशियाने में, प्यार और चुदाई की रात के लिए तैयार।

जुल्फिकार मेरे करीब आया। उसने मेरे गाल को छुआ। उसके हाथ गर्म थे।

उसने धीरे से मेरे बालों को मेरे चेहरे से हटाया और मेरी आँखों में देखा। उसकी आँखों में वो चमक थी जो मुझे पागल कर रही थी।

“तुम बेहद खूबसूरत हो, तरन्नुम,” उसने धीमी आवाज में कहा।

मैं शर्मा गई। मेरे गाल गुलाबी हो गए। उसने मेरा चेहरा अपने हाथों में लिया और धीरे-धीरे मेरे होंठों पर अपने होंठ रखे।

यह हमारा पहला किस था – नरम, प्यार भरा, और धीमा। उसने मेरे निचले होंठ को अपने दाँतों से हल्का काटा और फिर चूसा।

मुझे मजा आने लगा। मैंने अपने हाथ उसकी पीठ पर रखे और उसे करीब खींच लिया।

हम करीब पंद्रह मिनट तक किस करते रहे। उसकी जीभ मेरे मुँह में थी और वह मेरी जीभ से खेल रहा था।

मैं उत्तेजित होने लगी थी। मेरी बुर में गीला पन आ रहा था।

किस करते-करते उसने धीरे से अपने हाथ मेरी कमर पर रखे।

फिर वे हाथ ऊपर की ओर बढ़े – मेरी पीठ से होते हुए मेरी चूचियों की ओर।

मैंने आज एक कसा हुआ टॉप पहना था जिसमें से मेरा दूध झाँक रहा था।

उसने धीरे से मेरे टॉप के ऊपर से ही मेरी चूचियों को दबाना शुरू किया।

मेरी साँसें तेज हो गईं। मेरे निप्पल कड़े होने लगे थे – मैं उत्तेजना से भर रही थी।

उसने मेरे निपल्स को अपनी उँगलियों से मसलना शुरू किया और मैंने हल्की सी सिसकी निकाली।

“ऊह्ह्ह… जुल्फिकार… धीरे…” मैंने कहा।

उसने मुझे शांत किया और किस करना जारी रखा। अब उसका एक हाथ मेरी गांड की ओर बढ़ा।

उसने मेरी जींस के ऊपर से ही मेरी गांड को सहलाना शुरू किया – गोल-गोल घुमाते हुए, दबाते हुए।

मुझे अजीब सा मजा आ रहा था – मैं नीचे अपनी बुर में गीला पन महसूस कर रही थी।

करीब आधे घंटे तक यह फोरप्ले चला। उसने मेरा टॉप उतार दिया।

अब मैं सिर्फ ब्रा में थी – मेरी काली रंग की लेस वाली ब्रा जिसमें से मेरा दूध झाँक रहा था।

उसने मेरी ब्रा के ऊपर से ही मेरे निप्पलों को चूसना शुरू किया।

वह ब्रा को नीचे किए बिना ही अपनी जीभ से मेरे निपल्स को कड़ा कर रहा था।

मैं अब बेसब्र हो रही थी। मैंने खुद ही अपनी ब्रा का हुक खोल दिया और उसे फेंक दिया।

मेरी चूचियाँ आजाद हो गईं – गोल, मुलायम, और बिल्कुल दूध जैसी सफेद।

मेरे निप्पल गुलाबी रंग के थे और कड़े होकर खड़े थे।

जुल्फिकार ने एक चूची को अपने हाथ में लिया और दूसरे को अपने मुँह में ले लिया।

वह उसे चूसने लगा – कभी निप्पल को काटता, कभी पूरे दूध को मुँह में भर लेता।

मुझे बहुत मजा आ रहा था – मैंने अपने सिर को पीछे झुकाकर आनंद लिया।

“चूसो… और चूसो… मेरे निप्पलों को…” मैं बड़बड़ा रही थी।

उसने दूसरी चूची पर भी वही किया। फिर उसने मुझे बेड की ओर धकेल दिया।

मैं बेड पर गिरी और वह मेरे ऊपर आ गया। उसने मेरी जींस और पैंटी उतार दी।

अब मैं पूरी तरह नंगी थी – मेरी बुर साफ दिख रही थी। मैं शर्मा गई और अपने हाथों से अपनी बुर को छुपाने की कोशिश की।

“मत छिपाओ, तरन्नुम,” जुल्फिकार ने कहा, “तुम्हारी बुर बेहद खूबसूरत है।”

उसने मेरे हाथ हटाए और मेरी टांगें फैला दीं।

मेरी बुर गीली हो चुकी थी – उसमें से प्यार का रस निकल रहा था।

जुल्फिकार ने अपनी जीभ मेरी बुर पर रखी और चाटना शुरू कर दिया।

“ऊह्ह्ह… हाह्ह्ह… ओह्ह्ह…” मैं कराह उठी।

वह मेरी बुर को चाट रहा था – कभी मेरी चूत की दीवारों को, कभी मेरे क्लिटोरिस को।

उसने अपनी उँगली मेरी बुर में डाली और अंदर-बाहर करने लगा। मेरी साँसें तेज हो गईं – मैं झड़ने वाली थी।

“मैं झड़ने वाली हूँ… ऊह्ह्ह…” मैं चिल्लाई।

और फिर मैं झड़ गई – मेरी बुर से पानी निकला और जुल्फिकार ने उसे चाट-चाटकर साफ कर दिया।

वह मेरा प्यारा रस पी गया। मैं थककर लेट गई लेकिन वह अभी रुका नहीं था।

अब उसने अपनी शर्ट और जींस उतारी। उसका शरीर बेहद मस्कुलर था – छाती पर बाल, सिक्स पैक एब्स, और मोटी जांघें। और फिर उसने अपना लंड बाहर निकाला।

मेरी आँखें खुली रह गईं। जुल्फिकार का लंड करीब 6.7 इंच लंबा था और मोटाई में भी बेहद कड़ा।

उसका लंड एक खंभे की तरह खड़ा था – सुर्ख लाल रंग का और नसों से भरा हुआ। मैंने आज तक इतना बड़ा लंड नहीं देखा था।

“यह तुम्हारे लिए, मेरी जान,” जुल्फिकार ने कहा।

मैंने उसका लंड हाथ में लिया। वह गर्म था और कड़ा। मैंने उसे सहलाया और फिर अपने मुँह में ले लिया।

यह मेरी पहली बार थी लेकिन मैं उसे खुश करना चाहती थी। मैंने लंड को अपने मुँह में अंदर-बाहर किया – कभी टोपी को चूसती, कभी पूरे लंड को गले तक ले जाती।

“ओह्ह्ह… तरन्नुम… बहुत मजा आ रहा है…” जुल्फिकार कराहा।

करीब दस मिनट तक मैं उसका लंड चूसती रही।

फिर उसने मुझे रोका और कहा, “अब मैं तुम्हें चोदना चाहता हूँ।”

मैं बेड पर लेट गई और अपनी टांगें फैला दीं।

जुल्फिकार ने मेरे ऊपर आकर अपने लंड को मेरी बुर के मुँह पर रखा। वह धीरे-धीरे अंदर धकेलने लगा।

“धीरे… पहली बार है…” मैंने कहा।

उसने धीरे से धक्का लगाया। उसका लंड मेरी बुर में घुसने लगा। मुझे थोड़ा दर्द हुआ – मैं कुंवारी थी। लेकिन जुल्फिकार बहुत प्यार से कर रहा था। उसने रुककर मेरे होंठों पर किस किया और फिर धक्का जारी रखा।

एक तेज झटके के साथ जुल्फिकार का पूरा लंड मेरी बुर में घुस गया।

मेरी आँखों में आँसू आ गए – लेकिन यह दर्द जल्दी ही मजे में बदल गया।

जुल्फिकार ने मेरे आँसू पोंछे और धीरे-धीरे धक्के लगाने शुरू किए।

“कैसा लग रहा है, जान?” जुल्फिकार ने पूछा।

“बहुत अच्छा… और तेज करो…” मैंने कहा।

उसने अपनी गति बढ़ा दी। वह मेरी बुर में अपना लंड अंदर-बाहर कर रहा था – कभी धीरे, कभी तेज।

कमरे में चप-चप की आवाजें गूंज रही थीं। मेरी चूचियाँ हिल रही थीं और जुल्फिकार उन्हें दबाते हुए चोद रहा था।

“ओह्ह्ह… जुल्फिकार… मैं फिर से झड़ने वाली हूँ…” मैंने चिल्लाया।

“मैं भी… एक साथ…” जुल्फिकार बोला।

और फिर हम दोनों एक साथ झड़े। जुल्फिकार का गर्म वीर्य मेरी बुर में भर गया और मैंने भी अपना रस छोड़ दिया।

जुल्फिकार थककर मेरे ऊपर ही गिर गया और मुझे किस करने लगा।

हम दोनों करीब आधे घंटे तक वैसे ही लेटे रहे – एक-दूसरे को किस करते, सहलाते।

फिर जुल्फिकार ने फिर से मुझे चोदा – इस बार पीछे से, फिर मुझे ऊपर बिठाकर। हम पूरी रात चुदाई करते रहे।

मेरी पहली चुदाई बेहद यादगार थी – दर्द था लेकिन प्यार था, मजा था लेकिन सावधानी भी।

जुल्फिकार ने मुझे एक परफेक्ट प्रेमी की तरह चोदा – मुझे दर्द नहीं दिया, बल्कि खुशी दी।

लेकिन मेरी कहानी यहीं खत्म नहीं होती। मेरी जिंदगी में एक और मर्द था जो मुझे चोदना चाहता था – सलमान, मेरी बहन का देवर।

सलमान ने भी मुझ पर अपना दिल खो दिया था और वह BPSC की तैयारी के बहाने अक्सर हमारे यहाँ आता था।

एक दिन जब घर में कोई नहीं था, सलमान ने मुझे अकेले पाकर मुझे पटाने की कोशिश की।

उसने मुझे एक और चुदाई की किताब दी – इस बार और भी गंदी और विस्तृत।

मैं पढ़ते-पढ़ते गर्म हो गई और सलमान ने मुझे अपने कमरे में बुला लिया।

वहाँ जो हुआ, वह बेहद ही रोमांटिक और जंगली था।

सलमान ने मुझे अलग तरीके से चोदा – उसने मुझे बाथरूम में चोदा, फिर होटल में। उसका लंड जुल्फिकार से अलग था – थोड़ा छोटा लेकिन मोटा, और वह चोदने में बेहद एक्सपर्ट था।

कैसे सलमान ने मुझे पटाया, कैसे उसने मेरी बुर चाटी, कैसे उसने मुझे अलग-अलग पोजीशन में चोदा – यह सब हम अगले भाग में पढ़ेंगे।

मेरी चुदाई की कहानी अभी जारी है, और सलमान के साथ मेरी रात मेरे जीवन की सबसे जंगली और यादगार रात थी।

क्या सलमान ने मुझे खुश किया? क्या मैं फिर से कुंवारी बन पाई? क्या जुल्फिकार को इस बात का पता चला? यह सब जानने के लिए पढ़ते रहिए मेरी चुदाई का अगला भाग…

NEXT PART: सलमान मुझे 5 साल तक रंडियों की तरह चोदा

नोट: यहां पोस्ट की गई सभी कहानियां केवल मनोरंजन के उद्देश्य से प्रस्तुत की गई हैं। कृपया इन्हें वास्तविक जीवन से जोड़कर न देखें। कहानी में दर्शाए गए किसी भी दृश्य, घटना या चित्र का वास्तविक जीवन में प्रयोग करना हानिकारक हो सकता है। इसके लिए न तो कहानी के लेखक और न ही प्रस्तुतकर्ता जिम्मेदार होंगे। इसलिए कृपया अपनी समझ, बुद्धि और विवेक का उपयोग करें।

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