doctor patient sex story
मेरा नाम डॉक्टर बबलू है और मैं इस अन्तःवासना का रेगुलर रीडर हूं। मुझे ये कहानियां बहुत अच्छी लगती हैं क्योंकि ये मेरे अंदर के जुनून को जगाती हैं।
मेरी उम्र 28 साल है और मैं एक गुप्त रोग का डॉक्टर हूं। मुझे सेक्स बहुत पसंद है, यही वजह है कि मैंने गुप्त रोगों का डॉक्टर बनने का फैसला किया।
लोगों को बहुत सारी सेक्शुअल प्रॉब्लम्स होती हैं और मैं उनकी मदद करना चाहता हूं।
मेरी हाइट 5 फीट 8 इंच है और देखने में मैं काफी हैंडसम हूं।
डॉक्टर होने की वजह से मैं अपना ख्याल रखता हूं – रोजाना जिम जाता हूं, अच्छा खाना खाता हूं और अपने शरीर को फिट रखता हूं।
मेरे लंड की साइज एक्जैक्ट 8.7 इंच है जबकि मोटाई 4.6 इंच है।
यह मेरा गौरव है और मैं जानता हूं कि यह किसी भी औरत को संतुष्ट कर सकता है।
यह कहानी मेरे एक मरीज के साथ हुई घटना पर आधारित है।
एक दिन मेरे क्लिनिक पर विशाल नाम का एक पति अपनी पत्नी माला के साथ आया।
उनकी समस्या थी कि विशाल का लंड बहुत छोटा था और वह माला को संतुष्ट नहीं कर पाता था।
माला चाहती थी कि उसका सेक्स टाइम बढ़ जाए और उसके लंड की साइज 2-3 इंच बढ़ जाए।
जब मैंने पहली बार माला को देखा तो मेरा दिल धड़क उठा। वह बहुत ही सेक्सी थी।
उसके शरीर का साइज 34-30-34 था – यानी उसके दूध 34 इंच के थे जो उसके टाइट ब्लाउज में फूले हुए लग रहे थे, कमर 30 इंच की पतली थी और हिप्स 34 इंच के थे जो उसकी साड़ी में बेहद आकर्षक लग रहे थे।
वह देखने में बहुत ही ज्यादा खूबसूरत थी, गोरा रंग, लंबे काले बाल, बड़ी-बड़ी आंखें और भरपूर होंठ।
मैं पूरी तरह से तैयार नहीं था इसलिए मैंने कुछ दवाइयां लिखीं और दोनों का नंबर ले लिया।
कुछ दिनों बाद मैंने क्लिनिक में एक बड़िया बेड लगवा दिया जो मरीजों की जांच के लिए परफेक्ट था।
फिर मैंने माला को फोन करके बोला, “आपकी जांच आपके हस्बैंड से पहले करनी पड़ेगी, आ जाइए।”
माला पहले ही इसके लिए रेडी बैठी थी। शायद वह भी कुछ ऐसा ही चाहती थी जो मैं सोच रहा था।
वह तुरंत आ गई। उसने हल्की गुलाबी रंग की साड़ी पहनी हुई थी जिसमें वह बेहद खूबसूरत लग रही थी।
उसके ब्लाउज की गहरी गोलाई में उसके दूध का उभार देखकर मेरा लंड खड़ा होने लगा।
थोड़ी देर मैने अपने सेक्रेटरी से अन्दर भेजने के लिए बोला और ये भी बोल दिया कि माला जी के एक्जामिनेशन में टाइम लगेगा तो अगले मरीज को मेरे बोलने पर भेजना।
जब मैं अपने एक मरीज से फ्री हुआ तो उसने माला को अंदर भेज दिया।
“आइए माला जी, बेड पर लेट जाइए,” मैंने उसे नर्म आवाज में कहा।
माला शर्माते हुए बेड पर लेट गई। उसकी सांसें तेज चल रही थीं और उसके चेहरे पर एक अजीब सी उत्सुकता थी।
मैंने धीरे से उसकी साड़ी का पल्लू हटाया और उसके पेट पर हाथ फेरना शुरू किया। उसकी त्वचा बिल्कुल रेशम जैसी मुलायम थी।
“डॉक्टर साहब, प्लीज ठीक से जांचिएगा,” माला ने कांपती आवाज में कहा।
“डोंट वरी माला जी, मैं हूं ना,” मैंने कहा और धीरे से उसके ब्लाउज के हुक खोलने लगा।
जैसे ही मैंने उसका ब्लाउज खोला, मेरे होश उड़ गए। उसके दूध बिल्कुल गोल और टाइट थे, ब्रा के अंदर से उभरे हुए।
मैंने उसकी ब्रा भी खोल दी और उसके निप्पल देखकर मेरा लंड पैंट में तनकर खड़ा हो गया।
उसके निपल्स गुलाबी रंग के थे और काफी एक्साइटेड दिख रहे थे।
“डॉक्टर साहब, क्या देख रहे हैं?” माला ने शर्माते हुए पूछा।
“बस आपकी जांच कर रहा हूं,” मैंने कहा और उसके दूध को अपने हाथों में भर लिया।
माला की सांसें और तेज हो गईं। मैंने उसके दूध को दबाना शुरू किया और उसके निप्पलों को अपने उंगलियों से मसलने लगा।
माला की आंखें बंद हो गईं और वह मजे की सिसकियां भरने लगी।
“ओह डॉक्टर साहब… यह क्या कर रहे हैं आप?” माला ने कहा।
“आपकी जांच कर रहा हूं, रिलैक्स रहिए,” मैंने कहा और उसके एक निप्पल को अपने मुंह में ले लिया।
मैंने उसके निप्पल को चूसना शुरू किया और दूसरे हाथ से उसके दूसरे दूध को दबाने लगा।
माला पागल हो रही थी। उसने मेरे सिर को अपने दूधों पर दबा लिया।
मैं उसके दोनों निप्पलों को बारी-बारी से चूस रहा था और वह मजे से कराह रही थी।
“डॉक्टर साहब… बहुत मजा आ रहा है… ऐसे ही चूसते रहिए,” माला ने कहा।
मैंने उसकी साड़ी को पूरी तरह से हटा दिया और अब वह सिर्फ पेटीकोट में थी।
मैंने उसके पेटीकोट का नाड़ा खोला और उसे नीचे खींच लिया। अब माला सिर्फ पैंटी में थी और उसकी पैंटी पूरी तरह से गीली हो चुकी थी।
मैंने उसकी पैंटी को भी उतार दिया और उसकी बुर देखकर मेरा लंड फटने को हो रहा था।
उसकी बुर पर कोई बाल नहीं थे मतलब वह बिल्कुल साफ शेव थी, बाहर थोड़ा काला लेकिन अंदर गुलाबी रंग की और बहुत ही सुंदर।
मैंने उसकी बुर पर अपना हाथ फेरा और उसकी चूत की दरार में उंगली करने लगा।
“ओह… डॉक्टर साहब… वहां मत करिए,” माला ने कहा।
“क्यों? यही तो आपकी समस्या है ना? मुझे जांचना पड़ेगा,” मैंने कहा और उसकी बुर में उंगली डाल दी।
माला एकदम से एक्साइट हो गई। उसकी बुर बहुत टाइट थी और गीली भी।
मैंने अपनी उंगली को अंदर-बाहर करना शुरू किया और माला की सिसकियां तेज हो गईं।
“ओह… हां… डॉक्टर साहब… और अंदर… पूरी उंगली डालिए,” माला ने कहा।
मैंने अपनी दो उंगलियां उसकी बुर में डाल दीं और उसे अंदर-बाहर करने लगा।
माला की चूत का रस बह रहा था और मेरा हाथ पूरी तरह से गीला हो चुका था।
मैंने अपना हाथ और अंदर डाल दिया और माला की आंखें घूम गईं।
“ओह माई गॉड… डॉक्टर साहब… आपका हाथ… बहुत अच्छा लग रहा है,” माला ने कहा।
मैंने अपना हाथ उसकी बुर में अंदर-बाहर करना जारी रखा।
माला पूरी तरह से मस्त हो चुकी थी। फिर मैंने अपना हाथ बाहर निकाला और अपने कपड़े उतारने लगा।
जब मैंने अपनी पैंट उतारी और अपना 8.7 इंच का लंड माला के सामने दिखाया तो उसकी आंखें फटी रह गईं।
वह मेरे लंड को देखकर खुश हो गई और उसे हाथ में लेकर सहलाने लगी।
“डॉक्टर साहब… यह तो बहुत बड़ा है… मेरे पति का तो इसका आधा भी नहीं है,” माला ने कहा।
“क्या यह आपको पसंद आया?” मैंने पूछा।
“बहुत पसंद आया… यह तो बिल्कुल मोटा और लंबा है,” माला ने कहा और मेरे लंड को चूमने लगी।
फिर माला ने मेरे लंड को अपने हाथ में लिया और उसे अपने मुंह में ले लिया।
और वह मेरे लंड को चूसने लगी और मैं मजे से कराहने लगा।
उसने मेरे लंड के टोपे को अपनी जीभ से चाटना शुरू किया और फिर पूरे लंड को अपने गले तक ले लिया।
“ओह माला… तुम तो बहुत अच्छा लंड चूसती हो,” मैंने कहा।
“आपका लंड बहुत टेस्टी है डॉक्टर साहब… मैं इसे पूरा चूसूंगी,” माला ने कहा और मेरे लंड को और तेजी से चूसने लगी।
मैंने उसके सिर को पकड़ा और अपने लंड को उसके मुंह में आगे-पीछे करने लगा।
माला बिना रुके मेरे लंड को चूस रही थी। उसने मेरे लंड के नीचे की तरफ भी जीभ फेरी और मेरे अंडकोशों को भी चूसा।
“बहुत मजा आ रहा है माला… अब मुझे तुम्हारी बुर चाटनी है,” मैंने कहा।
मैंने उसे बेड पर लिटाया और उसकी टांगें फैला दीं। उसकी बुर बिल्कुल खुली हुई थी और गीली।
मैंने उसकी बुर पर अपनी जीभ रखी और चाटना शुरू कर दिया।
“ओह… डॉक्टर साहब… क्या कर रहे हैं आप… यह गंदी जगह है,” माला ने कहा।
“यह कोई गंदी जगह नहीं है, यह तो स्वर्ग है,” मैंने कहा और उसकी बुर को जोर-जोर से चाटने लगा।
मैंने उसकी बुर की दरार में अपनी जीभ डाली और उसके क्लिटोरिस को चूसने लगा। माला पागल हो रही थी।
उसने मेरे सिर को अपनी बुर पर दबा लिया और मेरी जीभ को अंदर खींचने लगी।
“ओह हां… डॉक्टर साहब… वहीं… वहीं चाटिए… बहुत मजा आ रहा है,” माला ने कहा।
मैंने उसकी बुर को 10 मिनट तक लगातार चाटा।
उसकी बुर से पानी निकल रहा था जिसको मैं चाट चाट कर पी रहा था और वह मजे से कराह रही थी।
फिर मैंने उसकी बुर में अपनी दो उंगलियां डाल दीं और उसे अंदर-बाहर करने लगा।
“ओह… मैं झड़ने वाली हूं… डॉक्टर साहब… प्लीज रुकिए मत,” माला ने कहा।
मैंने उसकी बुर को और तेजी से चाटा और उसके क्लिटोरिस को दांतों से हल्का काट लिया।
माला एकदम से झड़ गई और उसकी बुर से रस की धार निकलने लगी। मैंने उसका सारा रस पी लिया।
“डॉक्टर साहब… आपने तो मुझे पागल कर दिया… अब प्लीज अपना लंड डालिए,” माला ने कहा।
“क्या तुम तैयार हो मेरी जान?” मैंने पूछा।
“हां… बिल्कुल तैयार हूं… प्लीज अपना बड़ा लंड मेरी बुर में डालिए,” माला ने कहा।
मैंने अपने लंड पर कंडोम लगाया और उसकी बुर के मुंह पर रखा। माला की बुर बहुत टाइट थी और मेरा लंड बहुत मोटा था।
मैंने धीरे से अपने लंड का टोपा उसकी बुर में डाला।
“ओह… दर्द हो रहा है… थोड़ा धीरे डालिए,” माला ने कहा।
“रिलैक्स करो मेरी जान… थोड़ी देर में मजा आने लगेगा,” मैंने कहा और धीरे-धीरे अपना लंड अंदर धकेलने लगा।
मेरा लंड बहुत बड़ा था इसलिए माला को थोड़ा दर्द हो रहा था लेकिन वह सहन कर रही थी।
मैंने अपने लंड का आधा से ज्यादा हिस्सा उसकी बुर में डाल दिया और रुक गया।
“कैसा लग रहा है माला?” मैंने पूछा।
“बहुत अच्छा लग रहा है… और अंदर डालिए… पूरा लंड डालिए,” माला ने कहा।
मैंने एक जोर का धक्का लगाया और अपना पूरा 8.7 इंच का लंड उसकी बुर में घुसा दिया।
माला की चीख निकल गई लेकिन वह खुश थी।
“ओह… यह तो मेरे पति से दोगुना अंदर चला गया… बहुत मजा आ रहा है,” माला ने कहा।
मैंने धीरे-धीरे अपने लंड को अंदर-बाहर करना शुरू किया।
माला की बुर बहुत टाइट थी और मेरे लंड को कसकर पकड़े हुए थी।
मैंने अपने हाथों से उसके दूध पकड़े और उसे दबाते हुए चोदने लगा।
“ओह… डॉक्टर साहब… बहुत अच्छा लग रहा है… और तेज… और तेज चोदिए,” माला ने कहा।
मैंने अपनी स्पीड बढ़ा दी और उसे जोर-जोर से चोदने लगा। बेड की चरचराहट की आवाज गूंज रही थी।
माला की सिसकियां और मेरी कराहने की आवाज से पूरा कमरा भर गया था।
“तुम्हारी बुर तो बहुत टाइट है माला… मजा आ गया,” मैंने कहा।
“आपका लंड भी तो बहुत बड़ा है… मेरी बुर फट रही है लेकिन बहुत मजा आ रहा है,” माला ने कहा।
मैंने उसकी टांगें अपने कंधों पर रख लीं और और गहराई से चोदने लगा।
मेरा लंड उसकी बुर की सबसे गहरी जगह तक जा रहा था। माला की आंखें बाहर निकलने को थीं।
“ओह… मैं झड़ने वाली हूं… डॉक्टर साहब… और तेज… मुझे और तेज चोदिए,” माला ने कहा।
मैंने पूरी ताकत से उसे चोदना शुरू किया। मेरे लंड से माला की बुर में पेलने की आवाज “फच… फच… फच…” की आ रही थी।
माला पागल हो रही थी और अपने हाथों से मेरी पीठ को पूरी तरह से जकड़ रखी थी।
“ओह… मैं झड़ गई… मैं झड़ गई,” माला चिल्लाई और उसकी बुर ने मेरे लंड को कसकर पकड़ लिया।
मैंने भी अपनी स्पीड और तेज कर दी। मुझे भी झड़ने का मन हो रहा था लेकिन मैंने खुद को रोका।
मैंने अपना लंड बाहर निकाला और माला को उल्टा लेटा दिया।
“अब मैं तुम्हें पीछे से चोदूंगा,” मैंने कहा।
मैंने उसके पीछे से उसकी बुर में अपना लंड डाला और उसे कुतिया की तरह चोदने लगा।
यह पोजीशन में मेरा लंड और भी गहराई तक जा रहा था। माला की सिसकियां तेज हो गईं।
“ओह… यह तो और भी गहरा जा रहा है… बहुत मजा आ रहा है… चोदिए मुझे… मुझे अपनी रखैल बना लीजिए,” माला ने कहा।
मैंने उसके बाल पकड़े और उसे पीछे की ओर खींचते हुए चोदने लगा।
उसके दूध हिल रहे थे और मैंने एक हाथ से उसके दूध को दबाना शुरू कर दिया।
“तुम मेरी रखैल हो माला… मैं तुम्हें हफ्ते में तीन-चार बार चोदूंगा,” मैंने कहा।
“हां… मैं आपकी रखैल हूं… मुझे जब चाहें चोदिए… मैं आपके बड़े लंड की दीवानी हो गई हूं,” माला ने कहा।
मैंने उसे 15 मिनट तक पीछे से चोदा। फिर मैंने उसे लिटाया और उसके ऊपर आ गया।
मैंने उसके होंठों पर किस किया और उसकी बुर में अपना लंड फिर से डाल दिया।
“अब मैं झड़ने वाला हूं माला… कहां झाड़ूं?” मैंने पूछा।
“मेरे मुंह में झाड़ दीजिए… मैं आपका सारा माल पी जाऊंगी,” माला ने कहा।
मैंने अपना लंड बाहर निकाला और माला के मुंह में डाल दिया। मैंने कुछ ही धक्कों में अपना सारा गरम माल माला के मुंह में निकाल दिया।
माला ने बिना रुके सारा माल पी लिया और मेरे लंड को चाट-चाटकर साफ कर दिया।
“कैसा लगा माला?” मैंने पूछा।
“बहुत अच्छा लगा… आपने मुझे बहुत खुश कर दिया… आपका लंड बहुत पावरफुल है,” माला ने कहा।
“अब तुम्हारी समस्या का समाधान हो गया। तुम्हें अब और दवाई की जरूरत नहीं है। बस हफ्ते में एक बार मेरे पास आ जाओ और मैं तुम्हें अपने लंड से चोदकर खुश कर दूंगा,” मैंने कहा।
“थैंक यू डॉक्टर साहब… आप तो भगवान हो मेरे,” माला ने कहा और मेरे पैरों पर गिरकर मेरा आशीर्वाद लिया।
फिर मैं उसको बाहर भेज दिया और अपने सेक्रेटरी से नेक्स्ट पेशेंट को अंदर भेजने के लिए बोला।
अगले पार्ट में बताऊँगा की कैसे एक हस्बैंड वाइफ के बच्चे की ख्वाहिश को पूरा किया।………
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Very nice sir….
Hiiii jaan aap kessi ho
Hai mem kese