मरीज़ बनी डॉक्टर नीरंजन की रखैल

doctor patient chudai kahani

मेरा नाम डॉक्टर नीरंजन है और मैं 35 साल का एक सफल जनरल फिजिशियन हूँ।

मैं दिल्ली के एक अच्छे इलाके में अपना क्लिनिक चलाता हूँ।

मेरी शादी नहीं हुई है क्योंकि मैंने अपनी जिंदगी अपने कैरियर पर फोकस किया।

लेकिन मेरा एक गुप्त शौक है –

मैं अपनी खूबसूरत मरीज़ों के साथ सेक्स करना पसंद करता हूँ।

मेरा क्लिनिक बहुत आधुनिक है और मेरे पास हर तरह की सुविधाएं हैं।

मैंने अपने क्लिनिक को इस तरह से डिज़ाइन किया है कि प्राइवेसी पूरी रहे।

मेरे पास एक अलग से एक्जामिनेशन रूम है जहाँ मैं अपनी मरीज़ों का चेकअप करता हूँ।

एक दिन शाम को 5 बजे मेरी रिसेप्शनिस्ट ने मुझे बताया कि एक नई मरीज़ आई है – सारा।

मैंने उसकी फाइल देखी तो पाया कि वह 28 साल की शादीशुदा महिला है और उसे पेट में दर्द की शिकायत है।

मैंने उसे अंदर बुलाने के लिए कहा।

कुछ देर बाद एक औरत अंदर आई।

जैसे ही मैंने उसे देखा, मेरा दिल धड़कने लगा।

वह बहुत खूबसूरत थी। उसकी हाइट लगभग 5 फीट 5 इंच थी और फिगर 36-30-38 था।

उसने एक हल्की सी साड़ी पहनी हुई थी जो उसके शरीर से चिपकी हुई थी और उसके कर्व्स साफ झलक रहे थे।

उसका रंग गोरा था और आँखें भूरी थीं।

मैंने अपने आप को संभाला और पूछा, “आइए बैठिए। आप सारा हैं?”

वह मुस्कुराई और बोली, “हाँ डॉक्टर साहब। मैं सारा हूँ।”

मैंने पूछा, “क्या समस्या है आपको?”

सारा ने कहा, “डॉक्टर साहब, मुझे पेट में बहुत दर्द हो रहा है। नीचे के हिस्से में। और कभी-कभी पीठ में भी दर्द होता है।”

मैंने कहा, “ठीक है, मैं आपका चेकअप कर लेता हूँ। लेकिन उसके लिए आपको एक्जामिनेशन रूम में आना होगा।”

मैंने उसे एक्जामिनेशन रूम में ले जाया।

वहाँ एक बेड था और पर्दे लगे थे।

मैंने कहा, “आप बेड पर लेट जाइए।”

सारा बेड पर लेट गई। मैंने अपने हाथों में ग्लव्स पहने और उसके पेट पर हल्का-हल्का दबाव डालना शुरू किया।

जैसे ही मैंने उसके पेट को छुआ, मुझे एक अजीब सा करंट महसूस हुआ।

उसका पेट बहुत सॉफ्ट था और मेरी उंगलियाँ उसकी त्वचा में धंस रही थीं।

मैंने पूछा, “यहाँ दर्द हो रहा है?”

सारा ने कहा, “हाँ थोड़ा सा।”

मैंने धीरे-धीरे नीचे की ओर बढ़ाया और उसके नाभि के पास पहुँचा।

वहाँ दबाते ही वह कांप उठी।

मैंने नोटिस किया कि उसकी साँसें तेज़ हो गई हैं।

मैंने कहा, “सारा जी, आपको पूरी जाँच के लिए अपने कपड़े ऊपर उठाने होंगे। मुझे नीचे का हिस्सा भी देखना है।”

सारा थोड़ा शर्माई लेकिन फिर मान गई।

उसने अपनी साड़ी को ऊपर उठाया और अपना पेटीकोट भी ऊपर किया।

अब उसकी जाँघें मेरे सामने थीं।

उसने सफेद रंग की पैंटी पहनी हुई थी जो पूरी गीली हो चुकी थी।

मैंने देखा कि वह उत्तेजित हो रही है।

मैंने अपने हाथ उसकी जाँघों पर रखे और धीरे-धीरे ऊपर की ओर बढ़ाया।

उसकी जाँघें बहुत मुलायम थीं और मेरा लंड खड़ा होने लगा था।

मैंने कहा, “सारा जी, आपको पूरी तरह से नंगा होना होगा तभी मैं ठीक से जाँच कर पाऊंगा।”

सारा ने कहा, “डॉक्टर साहब, यह कैसे होगा? मैं शादीशुदा हूँ।”

मैंने कहा, “डॉन्ट वरी, मैं एक डॉक्टर हूँ। मेरे लिए आप एक मरीज़ हैं। और मैं आपकी प्राइवेसी का पूरा ख्याल रखूंगा।”

सारा मान गई और उसने अपनी पैंटी नीचे खींची।

अब उसकी चूत मेरे सामने थी। वह बिल्कुल साफ शेव की हुई थी और गुलाबी रंग की थी।

उसकी पंखुड़ियाँ बहुत सुंदर थीं और बीच से पानी टपक रहा था।

मैंने अपने हाथ से उसकी चूत को छुआ तो वह कांप उठी।

मैंने उसकी चूत की पंखुड़ियों को फैलाया और अंदर देखा। वह बहुत गीली थी।

मैंने कहा, “सारा जी, आपकी चूत में काफी गर्मी है। लगता है आपको काफी दिनों से चुदाई नहीं मिली है।”

सारा शर्मा गई और बोली, “डॉक्टर साहब, आप क्या कह रहे हैं?”

मैंने कहा, “सच कहूँ तो आपके पति आपको संतुष्ट नहीं कर पाते होंगे। आपकी चूत इतनी गीली है कि मुझे लग रहा है आपको एक अच्छे लंड की जरूरत है।”

सारा ने कहा, “डॉक्टर साहब, आप ठीक कह रहे हैं। मेरे पति का लंड छोटा है और वह जल्दी झड़ जाते हैं। मुझे काफी दिनों से असली मजा नहीं मिला है।”

मैंने कहा, “तो फिर मैं आपकी मदद कर सकता हूँ। मेरा लंड 8 इंच का है और मैं आपको पूरी तरह से संतुष्ट कर सकता हूँ।”

सारा ने मुझे वासना से देखा और कहा, “डॉक्टर साहब, आप मुझे चोदेंगे?”

मैंने कहा, “हाँ, लेकिन यह हमारे बीच ही रहेगा।”

सारा मान गई। मैंने अपने कपड़े उतारे और मेरा 8 इंच का लंड बाहर आ गया।

सारा ने उसे देखा और कहा, “वाह डॉक्टर साहब, यह तो बहुत बड़ा है।”

मैंने उसे बेड पर लिटाया और उसकी टांगें खोली।

फिर मैंने अपने लंड को उसकी चूत के मुँह पर रखा और एक धक्का लगाया।

मेरा सुपाड़ा अंदर घुस गया। सारा दर्द से चीखी, “आह्ह्ह… धीरे से… बहुत मोटा है…”

मैंने धीरे-धीरे अपना पूरा लंड अंदर डाल दिया।

उसकी चूत बहुत टाइट थी और मेरा लंड उसकी दीवारों से रगड़ खा रहा था।

मैंने धक्के लगाने शुरू किए। पहले धीरे-धीरे और फिर तेज़-तेज़।

सारा भी नीचे से कमर उठा-उठा कर मेरा साथ देने लगी।

उसकी चूत से “फच्च… फच्च…” की आवाज आ रही थी।

वह बोली, “और जोर से… मेरी चूत फाड़ दो… आज मुझे अपनी बना लो… मैं आपकी रखैल बनना चाहती हूँ…”

मैंने उसकी टांगें और चौड़ी की और जोर-जोर से चोदने लगा।

बेड की आवाज “किच… किच…” कर रही थी।

सारा के 36 इंच के बूब्स हर धक्के के साथ हिल रहे थे। लगभग 35 मिनट तक चोदने के बाद मैं झड़ने वाला था।

मैंने पूछा, “कहाँ निकालूँ?”

वह बोली, “अंदर ही डाल दो… आज मैं आपकी हूँ… मेरी चूत में अपना माल छोड़ दो…”

मैंने एक जोरदार धक्का लगाया और अपना सारा वीर्य उसकी चूत में छोड़ दिया।

वह भी झड़ गई और हम दोनों एक-दूसरे से लिपटकर रहे।

कुछ देर बाद जब हम उठे, तो सारा ने कहा, “डॉक्टर साहब, यह तो बहुत मजा आया। क्या हम फिर से कर सकते हैं?”

मैंने कहा, “क्यों नहीं सारा। लेकिन अब तुम मेरी रेगुलर मरीज़ हो। जब भी तुम्हें जरूरत होगी, तुम मेरे पास आ सकती हो।”

सारा मान गई और अब वह हफ्ते में दो बार मेरे पास आती है और हम जमकर चुदाई करते हैं। उसके पति को कुछ पता नहीं है और सारा अब बहुत खुश रहती है।

धन्यवाद!

नोट: यहां पोस्ट की गई सभी कहानियां केवल मनोरंजन के उद्देश्य से प्रस्तुत की गई हैं। कृपया इन्हें वास्तविक जीवन से जोड़कर न देखें। कहानी में दर्शाए गए किसी भी दृश्य, घटना या चित्र का वास्तविक जीवन में प्रयोग करना हानिकारक हो सकता है। इसके लिए न तो कहानी के लेखक और न ही प्रस्तुतकर्ता जिम्मेदार होंगे। इसलिए कृपया अपनी समझ, बुद्धि और विवेक का उपयोग करें।

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