sexy randi padosan chudai kahani
मैं पहले अपने बारे में बता दूँ। मेरा नाम सुनील है और मैं 29 साल का एक जवान, फिट और शादीशुदा मर्द हूँ।
मेरी हाइट 5 फीट 9 इंच है और मैं रोज़ जिम जाता हूँ जिससे मेरी बॉडी बहुत अच्छी है।
मेरा लंड पूरा खड़ा होने पर 7.5 इंच का हो जाता है और काफी मोटा भी है।
मैंने अपनी जिंदगी में कई औरतों को संतुष्ट किया है लेकिन मुझे खास तौर पर शादीशुदा औरतें ही ज्यादा पसंद हैं क्योंकि वे अनुभवी होती हैं और असली मजा देती हैं।
मैं दिल्ली के एक अपार्टमेंट में रहता हूँ।
मेरी शादी को 3 साल हो चुके हैं लेकिन मेरी बीवी अक्सर अपने मायके चली जाती है क्योंकि उसके पापा की तबीयत ठीक नहीं रहती।
इस वजह से मैं अक्सर अकेला ही रहता हूँ और इसी अकेलेपन में मैंने अपनी पड़ोसन कविता के साथ एक खास रिश्ता बना लिया।
कविता की उम्र 34 साल है और वह पिछले साल ही शादी करके यहाँ आई है।
उसके पति नीरंजन एक सॉफ्टवेयर इंजीनियर हैं और रात की शिफ्ट में काम करते हैं।
वह दिन में सोते हैं और शाम को ऑफिस चले जाते हैं।
कविता घर में अकेली रहती है और उसे बहुत बोरियत होती है।
कविता का फिगर बहुत ही मस्त है। उसकी हाइट 5 फीट 4 इंच है और वह थोड़ी हेल्दी है।
उसके बूब्स करीब 36 इंच के हैं और बहुत मोटे-मोटे हैं।
उसकी कमर 30 इंच की है और गांड 38 इंच की है जो बहुत मस्त हिलती है जब वह चलती है।
उसका रंग गोरा है और आँखें भूरी हैं। देखने में वह बिल्कुल हीरोइन जैसी लगती है।
यह घटना पिछले सर्दियों की है जब मेरी बीवी अपने मायके गई हुई थी।
रात के करीब 8 बजे थे और मैं अपने घर में टीवी देख रहा था।
अचानक दरवाजे की घंटी बजी। मैंने दरवाजा खोला तो देखा कविता भाभी खड़ी हैं।
वह बहुत घबराई हुई लग रही थीं और उन्होंने एक पतली सी शॉल ओढ़ रखी थी जिससे उनके बूब्स की आकृति साफ दिख रही थी।
मैंने पूछा, “क्या हुआ भाभी, इतनी रात को?”
कविता ने कहा, “सुनील, मैं बहुत बड़ी मुसीबत में हूँ।
मैं अपने घर का दरवाजा बंद करके बाहर आई थी और चाबी अंदर ही भूल गई।
अब दरवाजा नहीं खुल रहा और नीरंजन तो ऑफिस में हैं, सुबह 6 बजे आएंगे। मुझे कहीं रहने के लिए जगह चाहिए।”
मैंने तुरंत कहा, “भाभी, आप घबराइए मत। आप मेरे यहाँ रुक सकती हैं। मेरी बीवी तो अपने मायके गई है तो घर में कोई नहीं है। आइए अंदर आइए।”
कविता अंदर आई और मैंने दरवाजा बंद कर दिया।
वह ड्राइंग रूम में बैठी और मैंने उनके लिए गर्म चाय बनाई।
वह चाय पीते हुए मुझसे बातें करने लगीं।
उन्होंने शॉल हटा दी और मैंने देखा कि उन्होंने अंदर एक पतली सी नाइटी पहनी हुई थी जिससे उनके बूब्स साफ झलक रहे थे।
हम बातें करने लगे। कविता ने बताया कि नीरंजन उन्हें बहुत कम समय देते हैं और वह अक्सर अकेली रहती हैं।
उनकी शादी को एक साल हो गया है लेकिन अभी तक कोई बच्चा नहीं हुआ है।
डॉक्टर ने कहा है कि नीरंजन में स्पर्म काउंट कम है इसलिए प्रेग्नेंसी नहीं हो रही।
यह सुनकर मैं समझ गया कि कविता बहुत अकेली और उदास है।
मैंने उन्हें ढाढस दिया और कहा कि सब ठीक हो जाएगा। बातें करते-करते रात के 10 बज गए।
मैंने कहा, “भाभी, आप बेडरूम में सो जाइए, मैं सोफे पर सो जाऊंगा।”
कविता ने कहा, “नहीं सुनील, यह कैसे हो सकता है? यह तुम्हारा घर है। मैं सोफे पर सो जाऊंगी, तुम अपने बेडरूम में सोना।”
मैंने कहा, “भाभी, आप मेहमान हैं और मैं एक मर्द हूँ। मैं सोफे पर ही सोऊंगा, आप चिंता मत कीजिए।”
कविता मान गईं और बेडरूम में चली गईं।
मैंने उन्हें एक तकिया और कंबल दिया।
करीब आधे घंटे बाद मुझे उनकी आवाज आई, “सुनील, सो रहे हो?”
मैंने कहा, “नहीं भाभी, बोलिए।”
कविता ने कहा, “मुझे नींद नहीं आ रही है। क्या तुम थोड़ी देर बात करोगे मेरे साथ?”
मैं उठा और बेडरूम में गया।
कविता बेड पर बैठी हुई थीं और उन्होंने नाइटी के ऊपर से शॉल ओढ़ रखी थी।
मैं बेड के किनारे बैठ गया। हम बातें करने लगे।
बातें करते-करते कविता ने अपना सिर मेरे कंधे पर रख दिया।
मैं समझ गया कि वह मुझे इशारा दे रही हैं।
मैंने हिम्मत करके अपना हाथ उनकी कमर पर रख दिया। वह नहीं हटीं।
मैंने धीरे से उनकी ओर मुड़कर उनके गाल पर किस कर दिया।
कविता ने अपनी आँखें बंद कर लीं और मेरे किस का जवाब दिया।
हमारे होठ एक-दूसरे से मिले और हम पागलों की तरह एक-दूसरे को चूसने लगे।
मैंने एक हाथ से उनके बूब्स दबाने शुरू किए।
उनके बूब्स बहुत मोटे और नरम थे। कविता आहें भरने लगीं, “आह्ह्ह… सुनील… धीरे से… बहुत मजा आ रहा है…”
मैंने उनकी नाइटी के बटन खोलने शुरू किए।
एक-एक करके सारे बटन खोल दिए और नाइटी उतार दी।
अंदर उन्होंने लाल रंग की ब्रा और पैंटी पहनी हुई थी।
मैंने उनकी ब्रा भी खोल दी और उनके 36 इंच के बूब्स आज़ाद हो गए।
वह बिल्कुल गोरी थी और उनके निप्पल गुलाबी रंग के थे।
मैंने एक बूब्स को मुँह में लेकर चूसना शुरू किया और दूसरे को हाथ से मसलने लगा।
कविता मेरे बालों में हाथ फेर रही थीं और मुझे अपने और करीब खींच रही थीं।
मैं उनके बूब्स चूसते हुए नीचे की ओर बढ़ा और उनकी पैंटी के ऊपर से उनकी चूत को सहलाने लगा। वह गीली हो चुकी थी।
मैंने उनकी पैंटी नीचे खींची और उनकी चूत देखी।
वह बिल्कुल साफ शेव की हुई थी और गुलाबी रंग की थी।
मैंने उनकी टांगें खोली और उनकी चूत को चाटना शुरू किया।
कविता पागल हो गईं, “ओह्ह्ह… हाँ… और जोर से चाटो… मेरी जान निकल गई… मैं मर गई…”
मैंने उनके क्लिटोरिस को चूसा और उंगली से उनकी चूत चोदने लगा।
10 मिनट में ही वह झड़ गईं और उनका पानी मेरे मुँह में आ गया। मैंने उसे पी लिया और ऊपर आ गया।
मैंने अपने कपड़े उतार दिए। मेरा 7.5 इंच का लंड पूरी तरह खड़ा था।
कविता ने उसे देखा और कहा, “वाह, तुम्हारा तो नीरंजन से भी बड़ा है। वो तो 5 इंच का है और तुम 7.5 इंच के हो। आज मुझे असली मजा आएगा।”
मैंने कहा, “भाभी, आज मैं आपको वो मजा दूँगा जो आपने कभी नहीं लिया।”
मैंने उनकी टांगें अपने कंधों पर रखीं और अपने लंड को उनकी चूत के मुँह पर रखा।
एक धक्का लगाया और मेरा सुपाड़ा अंदर घुस गया।
कविता दर्द से चीखीं, “आह्ह्ह… धीरे से… बहुत मोटा है… मेरी चूत फट जाएगी…”
मैंने धीरे-धीरे अपना पूरा लंड अंदर डाल दिया।
उनकी चूत बहुत टाइट थी क्योंकि उन्हें काफी समय से ठीक से चुदाई नहीं मिली थी।
मैंने धक्के लगाने शुरू किए। पहले धीरे-धीरे और फिर तेज़-तेज़।
कविता भी नीचे से कमर उठा-उठा कर मेरा साथ देने लगीं।
उनकी चूत से “फच्च… फच्च…” की आवाज आ रही थी।
वह बोलीं, “और जोर से… मेरी चूत फाड़ दो… आज मुझे अपनी बना लो… मैं तेरी रखैल बनना चाहती हूँ…”
मैंने उनकी टांगें और चौड़ी की और जोर-जोर से चोदने लगा।
बेड की आवाज “किच… किच…” कर रही थी।
कविता के बूब्स हर धक्के के साथ हिल रहे थे। लगभग 30 मिनट तक चोदने के बाद मैं झड़ने वाला था।
मैंने पूछा, “भाभी, कहाँ निकालूँ?”
वह बोलीं, “अंदर ही डाल दो… आज मैं तेरी हूँ… मेरी चूत में अपना माल छोड़ दो… मैं तेरे बच्चे की माँ बनना चाहती हूँ…”
यह सुनकर मैं और उत्तेजित हो गया।
मैंने एक जोरदार धक्का लगाया और अपना सारा वीर्य उनकी चूत में छोड़ दिया।
वह भी झड़ गईं और हम दोनों एक-दूसरे से लिपटकर सो गए।
कुछ देर बाद जब हम उठे, तो कविता ने कहा, “सुनील, यह तो बहुत मजा आया। क्या हम एक बार और कर सकते हैं?”
मैंने कहा, “क्यों नहीं भाभी, रात तो अभी बाकी है।”
इस बार कविता ने मुझे घोड़ी बनने के लिए कहा।
वह घोड़ी बन गईं और मैंने पीछे से उनकी चूत में अपना लंड डाल दिया।
उनकी गांड बहुत मस्त थी और मैं उसे दबाते हुए चोद रहा था।
वह बोलीं, “और जोर से… मेरी गांड भी मार… आज मुझे पूरी तरह चोद दो…”
मैंने उनकी गांड पर थप्पड़ मारे और उनकी चूत को जोर-जोर से चोदा।
35 मिनट बाद मैं फिर झड़ गया।
इस बार मैंने अपना माल उनकी गांड पर निकाल दिया।
फिर हमने 69 की पोजीशन में भी सेक्स किया।
कविता मेरा लंड चूस रही थीं और मैं उनकी चूत चाट रहा था।
हम दोनों एक साथ झड़े और फिर एक-दूसरे को चूमते रहे।
रात भर हमने 4 बार सेक्स किया।
सुबह 5 बजे नीरंजन के आने से पहले कविता अपने घर चली गईं।
उसके बाद से जब भी नीरंजन रात को ऑफिस जाते हैं, कविता मेरे पास आ जाती हैं और हम जमकर चुदाई करते हैं।
वह अब मेरी रखैल बन चुकी हैं और मैं उन्हें बहुत प्यार करता हूँ।
धन्यवाद!
नोट: यहां पोस्ट की गई सभी कहानियां केवल मनोरंजन के उद्देश्य से प्रस्तुत की गई हैं। कृपया इन्हें वास्तविक जीवन से जोड़कर न देखें। कहानी में दर्शाए गए किसी भी दृश्य, घटना या चित्र का वास्तविक जीवन में प्रयोग करना हानिकारक हो सकता है। इसके लिए न तो कहानी के लेखक और न ही प्रस्तुतकर्ता जिम्मेदार होंगे। इसलिए कृपया अपनी समझ, बुद्धि और विवेक का उपयोग करें।
Beautiful chudai story. I like this adult sex story.
Very nice