girlfriend chudai kahani
नमस्ते दोस्तों, मेरा नाम राकेश पांडेय है। मैं गोरखपुर जिले के एक छोटे से शहर में रहता हूं।
मुझे बचपन में एक पक्षाघात (फेलिज अटैक) हो गया था, जिसके कारण मेरा एक पैर कमजोर हो गया है और मुझे बैशाखी की मदद से चलना पड़ता है।
मेरी हाइट पांच फुट छह इंच है और दिखने में मैं बिल्कुल साधारण हूं, लेकिन भगवान ने मुझे एक खास चीज दी है – मेरा लंड साढ़े आठ इंच लंबा है और काफी मोटा भी है।
यह मेरी ताकत है, मेरा गुप्त हथियार।
रोज शाम को मैं बाजार जाता था। वहां एक पकौड़ी की दुकान थी जहां मैं और मेरे दोस्त चाय-पकौड़ी खाने जाते थे।
लेकिन सच कहूं तो हम वहां पकौड़ी के लिए नहीं, उस लड़की के लिए जाते थे जो उस दुकान पर रहती थी।
उसका नाम था नेहा – दुकान मालिक की बेटी।
ओह भाई, वह लड़की क्या माल थी! मध्यम आकार की चूचियां जो उसकी कसी हुई कमीज में उभार लिए रहती थीं, एक पतली कमर जैसे किसी कलाकार ने तराशी हो, और एक गोल-मटोल गांड जो जब वह चलती थी तो ऐसे हिलती थी जैसे कोई जलता हुआ जुगनू हो।
भगवान ने सचमुच उसे बहुत खूबसूरत बनाया था।
उसका चेहरा गुलाब की पंखुड़ियों जैसा, आंखें काजल से सजी हुईं, और होंठ ऐसे जिन्हें देखकर ही मेरा लंड खड़ा हो जाता था।
हम सब दोस्त वहां जमा होते और उसे लाइन मारते रहते।
वह भी हम सबको थोड़ा-थोड़ा लाइन देती – कभी किसी को मुस्कुराकर, कभी किसी से आंख मिलाकर।
यह उसका खेल था और हम सब इस खेल में फंसे हुए थे।
कभी-कभी जब वह दुकान का सामान लेने के लिए पास की दुकानों पर जाती, तो हम उसके पीछे आवाज लगाते,
“नेहा जी, चुदाओगी नहीं?” वह शर्माते हुए मुस्कुरा देती और चली जाती, लेकिन उसकी वो मुस्कान हमें और पागल बना देती।
एक शाम, जब मैं दुकान पर पहुंचा तो नेहा अकेली थी। उसके पिता कहीं गए हुए थे।
मैंने यह मौका देखकर उसका हाथ पकड़ लिया।
वह घबरा गई, “यह क्या कर रहे हो राकेश? कोई देख लेगा!”
मैंने उसके हाथ को कसकर पकड़ा और कहा, “देखो नेहा, मैं तुमसे प्यार करता हूं। मैं जानता हूं मैं शारीरिक रूप से अपंग हूं, मुझे बैशाखी से चलना पड़ता है, लेकिन मेरा दिल साफ है। मैं तुमसे अकेले में मिलना चाहता हूं, तुमसे अपने दिल की बात करना चाहता हूं।”
वह मेरी आंखों में देखने लगी। शायद उसे मेरे चेहरे पर सच्चाई दिखी।
वह धीरे से बोली, “ठीक है, कल शाम को छह बजे बड़ी नहर के पास वाले पीपल के पेड़ के पास मिलेंगे। लेकिन ध्यान रहे, कोई बात नहीं होनी चाहिए।”
मैंने कहा, “मैं सिर्फ तुम्हें प्यार करना चाहता हूं, कुछ गलत नहीं करूंगा।”
तभी उसके पिता आ गए और मैं चुपचाप चाय पीने लगा, लेकिन मेरा दिल तेजी से धड़क रहा था।
मैं सोच रहा था कि कल क्या होगा, क्या वह सचमुच आएगी?
उस रात मुझे नींद नहीं आई। मैं बार-बार नेहा के बारे में सोच रहा था – उसकी मुस्कान, उसकी आंखें, उसकी चूचियां, उसकी गांड।
मैंने अपने लंड को हाथ में लिया और सोचा कि कल अगर मौका मिला तो मैं उसे कैसे चोदूंगा। मेरा लंड पूरा कड़क हो गया था और उसको सोचते सोचते मैं मूठ मारी।
अगले दिन का इंतजार मुझे बेचैनी से भर देता। मैं घड़ी देखता रहा, समय बीतता ही नहीं था।
शाम पांच बजे से पहले ही मैंने तैयारी शुरू कर दी। मैंने अपनी सबसे अच्छी कमीज पहनी, जींस पहनी, और एक अच्छा परफ्यूम लगाया।
मैंने बैशाखी ली और नहर की ओर चल पड़ा। मेरे पैर में दर्द हो रहा था, लेकिन प्यार के सामने यह दर्द कुछ भी नहीं था।
नहर के पास पीपल का एक विशाल पेड़ था जो सदियों पुराना था। वहां शाम को कोई नहीं आता था, यह एकांत का स्थान था।
मैं वहां पहले ही पहुंच गया और उसका इंतजार करने लगा।
मैं घबरा रहा था, कहीं नेहा न आए तो? कहीं वह मजाक तो नहीं कर रही थी? मैंने सोचा कि अगर वह नहीं आई तो मैं टूट जाऊंगा।
लगभग दो घंटे बाद, ठीक छह बजे, मैंने देखा कि कोई आ रहा है।
मेरी आंखें खुली की खुली रह गईं।
वह नेहा ही थी, और क्या रूप लिए हुए! वह काले रंग की सलवार-कमीज में थी, जिसमें उसकी चूचियां और कमर साफ दिख रही थीं।
उसने दुपट्टा नहीं ओढ़ा था, जिससे उसका गोरा गला और कुछ हद तक उसकी चूचियों का उभार दिख रहा था।
पैरों में मध्यम ऊंची हील की सैंडल थी जिससे उसकी चाल और भी आकर्षक लग रही थी। उसके बाल खुले हुए थे और हवा में उड़ रहे थे।
वह बहुत खूबसूरत लग रही थी, जैसे कोई अप्सरा हो। मेरा दिल धड़कने लगा और मेरा लंड भी खड़ा होने लगा।
जब वह मेरे पास आई, तो मैं आगे बढ़ा और उसे अपनी बाहों में भर लिया।
वह भी पिघल गई और मेरी बाहों में समा गई। उसकी खुशबू मेरे सिर में चढ़ गई।
मैंने धीरे से उसके कानों में कहा, “तुम बहुत खूबसूरत लग रही हो नेहा, जैसे कोई परी हो। तुम्हें देखकर मेरा दिल धड़क रहा है।”
वह थोड़ी शर्मा गई, उसके गाल गुलाबी हो गए। मैंने उसे काफी देर तक गले लगाए रखा।
मैं महसूस कर सकता था कि उसकी चूचियां मेरी छाती से दब रही थीं।
मैंने अपने दोनों हाथ धीरे-धीरे उसकी पीठ से नीचे सरकाए और उसकी गांड पर रख दिए।
ओह, क्या गोल और मुलायम गांड थी उसकी! मैं उसकी गांड को सहलाने लगा, उसे दबाने लगा।
वह थोड़ी कसमसाई, लेकिन मुझे बहुत मजा आ रहा था।
यह मेरी जिंदगी की पहली लड़की थी जिसे मैंने अपनी बाहों में लिया था।
इससे पहले मैंने सिर्फ चुदाई की फिल्मों में ही यह सब देखा था।
मैंने सोचा था कि शायद मेरी विकलांगता के कारण कोई लड़की मुझे पसंद नहीं करेगी, लेकिन आज नेहा मेरी बाहों में थी।
मैंने उसका चेहरा थोड़ा पीछे किया और उसके होंठों पर अपने होंठ रख दिए।
वह पहले तो हिचकिचाई, फिर वह भी मेरा साथ देने लगी। हम एक-दूसरे को चूमने लगे, एक-दूसरे की जीभ को चूसने लगे।
मुझे ऐसा लग रहा था जैसे मैं स्वर्ग में हूं। बहुत मजा आ रहा था और वह भी पूरा साथ दे रही थी।
मैंने अपना एक हाथ उसकी कमीज के नीचे डाला और उसकी चूची को छूने लगा। वह कांप उठी।
मैंने उसकी चूची को सहलाया, उसके निप्पल को मसला। उसके निप्पल कड़े हो गए थे।
मैंने फिर अपना हाथ नीचे सरकाया और उसकी सलवार में डाल दिया। मैं उसकी बुर को सहलाने लगा।
वह गीली हो चुकी थी, उसकी बुर से पानी निकल रहा था।
“ओह राकेश… धीरे… बहुत मजा आ रहा है…” नेहा ने सिसकते हुए कहा।
मैंने अपनी उंगली को उसकी बुर में डाला। वह बहुत तंग थी, गर्म और नरम।
मैं अपनी उंगली को अंदर-बाहर करने लगा। नेहा की सांसें तेज हो गईं, उसकी छाती उछल-उछल कर सांस ले रही थी।
मैंने देखा कि उसकी काली कमीज में उसकी चूचियां कैसे उभर रही थीं, उसके निप्पल कपड़े के नीचे खड़े हो गए थे।
“नेहा, मैं तुम्हें नंगा देखना चाहता हूं,” मैंने फुसफुसाते हुए कहा।
नेहा ने शर्माते हुए कहा, “यहां खुले में नहीं… कोई आ जाएगा…”
मैंने देखा कि पीपल के पेड़ के पीछे एक झाड़ी थी जो काफी घनी थी। मैंने नेहा का हाथ पकड़ा और उसे वहां ले गया।
झाड़ियों के बीच एक छोटा सा खाली स्थान था जहां घास थी।
वहां पहुंचकर, मैंने नेहा को अपनी बाहों में लिया और फिर से उसके होंठों को चूमना शुरू किया।
इस बार मेरा चुंबन और भी गहरा और जुनूनी था। मैंने उसकी जीभ को अपने मुंह में खींच लिया और चूसने लगा।
नेहा भी पूरी तरह से उत्तेजित हो चुकी थी, उसने मेरी पीठ पर अपने नाखून गाड़ दिए।
“आह… राकेश… मुझे बहुत अच्छा लग रहा है…” नेहा ने कहा।
मैंने धीरे-धीरे उसकी कमीज ऊपर उठानी शुरू की। नेहा ने थोड़ा विरोध किया, लेकिन फिर हार मान ली।
जैसे ही कमीज ऊपर हुई, मेरी आंखें चौंधिया गईं।
नेहा ने एक काली रंग की ब्रा पहनी हुई थी जिसमें उसकी मध्यम आकार की चूचियां बहुत सुंदर लग रही थीं।
उसकी चूचियों का आकार लगभग 34 इंच का था, गोल और कसे हुए।
मैंने पीछे से अपने हाथ ब्रा के हुक खोले। ब्रा ढीली हो गई और मैंने उसे आगे से खींच लिया।
जैसे ही ब्रा हटी, नेहा की चूचियां आजाद हो गईं। उसके दूध सफेद और गोल थे, बीच में गुलाबी निप्पल खड़े हुए थे जो उत्तेजना से कड़े हो चुके थे।
“वाह… कितनी सुंदर चूचियां हैं तुम्हारी…” मैंने कहा और एक हाथ से उसकी एक चूची को पकड़ लिया।
मैंने धीरे से उसके निप्पल को अपनी उंगलियों से मसलना शुरू किया। नेहा की सांसें और भी तेज हो गईं।
मैंने झुककर उसके निप्पल को अपने मुंह में ले लिया और चूसने लगा।
मैं एक चूची को चूस रहा था और दूसरी को हाथ से दबा रहा था।
“आह… हां… और चूसो… मेरे निपल्स को काट लो…” नेहा ने कामुक आवाज में कहा।
मैंने उसकी बात मानी और हल्के से उसके निप्पल को दांतों से काट लिया।
नेहा ने एक हल्की चीख भरी, लेकिन वह दर्द में भी मजा ले रही थी।
मैंने दूसरी चूची को भी वैसे ही चूसा और चाटा।
मेरे मुंह में नेहा के दूध का स्वाद आ रहा था – मीठा और नमकीन, बहुत ही उत्तेजक।
इसी बीच मेरा एक हाथ उसकी सलवार की डोरी खोलने लगा।
मैंने डोरी खोली और सलवार नीचे सरकाने लगा।
नेहा ने कोई विरोध नहीं किया, बल्कि उसने अपनी कमर थोड़ी उठा दी ताकि सलवार आसानी से नीचे हो सके।
अब नेहा सिर्फ अपनी पैंटी में थी। उसने एक काली रंग की लेस वाली पैंटी पहनी हुई थी जो बहुत सेक्सी लग रही थी।
मैंने उसकी पैंटी के ऊपर से ही उसकी बुर को सहलाना शुरू किया। मैं महसूस कर सकता था कि पैंटी पूरी तरह से गीली हो चुकी थी।
“तुम्हारी बुर बहुत गीली हो गई है, नेहा,” मैंने कहा।
“तुम्हारी वजह से… तुमने मुझे बहुत उत्तेजित कर दिया है…” नेहा ने शर्माते हुए कहा।
मैंने उसकी पैंटी नीचे खींची। जैसे ही पैंटी हटी, नेहा की बुर दिखाई दी।
उसकी बुर पर हल्के-हल्के बाल थे, जिन्हें उसने काफी हद तक साफ किया हुआ था।
उसकी बुर की दोनों फांकें गुलाबी थीं और बीच से पानी जैसा भरा हुआ था।
मैंने अपनी उंगली फिर से उसकी बुर में डाली। इस बार मैं और भी गहरा घुसा।
नेहा की बुर बहुत टाइट थी, मेरी उंगली को कस रही थी।
“तुम्हारी बुर बहुत टाइट है नेहा… क्या तुमने पहले कभी…” मैंने पूछा।
“नहीं… मैं कुंवारी हूं… तुम ही पहले हो जो मेरी बुर में उंगली डाल रहे हो…” नेहा ने कहा।
यह सुनकर मैं और भी उत्तेजित हो गया। मैं एक कुंवारी लड़की को चोदने वाला था।
मैंने अपनी उंगली को उसकी बुर में अंदर-बाहर करना जारी रखा। नेहा की सिसकियां बढ़ती जा रही थीं।
“प्लीज राकेश… अब और मत तड़पाओ… मुझे अपना लंड दो…” नेहा ने कहा।
मैंने अपनी जींस खोली और अपना लंड बाहर निकाला।
जब नेहा ने मेरे लंड का आकार देखा, तो उसकी आंखें खुली की खुली रह गईं।
वह लगभग साढ़े आठ इंच लंबा और मोटा था, जैसे कोई खीरा हो।
मेरा सुपाड़ा लाल हो चुका था और उससे पानी की बूंदें निकल रही थीं।
“यह… यह तो बहुत बड़ा है… यह मेरी बुर में जाएगा भी? ऐसा लंड तो मैंने सिर्फ चुदाई वाली मूवीज में देखि हूँ।” नेहा ने डरते हुए पूछा।
“अच्छा, तो तुम चुदाई वाले मूवीज देखी हो? यह तो बहुत अच्छा है, तुम डरो मत, मैं धीरे-धीरे करूंगा… पहले इसे चूस लो… जैसे मूवीज में चूसती हैं।” मैंने कहा।
नेहा झुकी और मेरे लंड को अपने हाथ में लिया। उसने उसे सहलाया, फिर धीरे से अपने मुंह में ले लिया।
वह उसे चूसने लगी, पहले तो हिचकिचाते हुए, फिर जोर-जोर से। मुझे बहुत मजा आ रहा था।
मैंने नेहा के सिर को पकड़ा और अपना लंड उसके मुंह में और गहरा घुसा दिया।
“आह… हां… और चूसो… बहुत अच्छा लग रहा है..नेहा मेरी जान… तुम कमाल की हो. मुझे नहीं पता था किसी लड़की के चूसने पर इतना मजा आता है, प्लीज तुम बहुत अच्छे से चूस रही हो।” मैंने कहा।
नेहा ने मेरे लंड को पूरा मुंह में ले लिया और जोर-जोर से चूसने लगी।
उसने अपनी जीभ से मेरे सुपाड़े को चाटा और फिर नीचे की तरफ चली गई।
मेरा लंड पूरी तरह से कड़क हो चुका था, नसें फूली हुई थीं।
और मैं पूरी तरह से मजे में था, ऐसा लग रहा था की शायद अगर मैं स्वर्ग में होता तो भी इतना मजा न आता।
कुछ देर बाद मैंने नेहा को उठाया और अपने कपड़ों को घास पर बिछा दिया और उसे नेहा को उस पर लिटा दिया।
मैंने उसके पैर फैलाए और उसकी बुर को देखने लगा।
वह बहुत सुंदर लग रही थी – उसकी चूचियां ऊपर की तरफ उठी हुई थीं, निप्पल खड़े हुए थे, और बुर से पानी टपक रहा था।
मैं अपना होंट उसके बुर पर रख दिया और उसे अपने जीभ से चाटने लगा।
मैं अपने जीभ को पूरी तरह से उसके बुर पर रगड़ रगड़ कर चाटता और एक ऊँगली उसके बुर में अन्दर बाहर करता।
इतना आनंद मुझे अपने जीवन में कभी नही मिला था।
फिर नेहा बोली, “राकेश, प्लीज अब अपने लंड को मेरे बुर में डालकर चोदो।”
मैंने अपने लंड को उसकी बुर के मुहाने पर रखा। मैंने धीरे से एक धक्का लगाया। सुपाड़ा अंदर घुस गया, लेकिन नेहा की बुर बहुत तंग थी।
“आह… दर्द हो रहा है… धीरे करो…” नेहा ने चीखते हुए कहा।
नेहा के बुर से थोड़ा सा खून बाहर निकल आया।
मैंने रुककर उसके होठों पर चुंबन किया और धीरे-धीरे अपना लंड अंदर धकेलना जारी रखा।
थोड़ी देर में मेरा आधा लंड अंदर चला गया। नेहा की आंखों से आंसू निकल रहे थे, लेकिन वह सहन कर रही थी।
“बस थोड़ी देर और… फिर मजा आएगा…” मैंने कहा।
फिर मैंने एक प्यार से धक्का लगाया और मेरा पूरा लंड नेहा की बुर में समा गया।
नेहा ने एक जोरदार चीख भरी, लेकिन मैंने उसके मुंह को अपने मुंह से बंद कर दिया। मैं उसे चूमता रहा जब तक कि उसका दर्द कम नहीं हो गया।
कुछ मिनटों बाद नेहा ने कहा, “अब ठीक है… अब धीरे-धीरे लंड को हिलावो…”
मैंने धीरे से अपना लंड हिलाना शुरू किया और बाहर खींचा और फिर अंदर डाला। मैं धीरे-धीरे चुदाई करने लगा।
नेहा को अब दर्द कम और मजा ज्यादा आने लगा था। उसने अपनी कमर उठानी शुरू कर दी ताकि मेरा लंड और गहरा जाए।
“आह… हां… ऐसे ही… और जोर से…” नेहा ने कहा।
मैंने अपनी गति बढ़ा दी। मैं जोर-जोर से नेहा को चोदने लगा।
मेरा लंड उसकी बुर में पूरी तरह से घुस-निकल रहा था। आवाजें आ रही थीं – पच पच पच!
“तुम्हारी बुर बहुत टाइट है नेहा… बहुत मजा आ रहा है…” मैंने कहा।
“हां… मेरे राजा… और चोदो… मेरी बुर फाड़ दो… मैं अब तुम्हारी रखैल रहूंगी, मुझे अपनी रखैल बना लो…” नेहा ने कामुक आवाज में कहा।
मैंने उसके निप्पलों को फिर से मसलना शुरू किया जबकि मैं उसे चोद रहा था।
नेहा की चूचियां थोड़ी-थोड़ी हिल रही थीं हर धक्के के साथ। मैंने एक हाथ नीचे किया और उसकी बुर के मुहाने पर उंगली घुमाने लगा।
“ओह… मेरा निकलने वाला है… और जल्दी-जल्दी चोदो मुझे…” नेहा ने कहा।
मैंने अपनी पूरी ताकत लगाकर चोदना शुरू किया। मेरा लंड अब बहुत तेजी से अंदर-बाहर हो रहा था। नेहा की बुर से पानी और झाग निकलने लगा था।
अचानक नेहा की कमर ऊपर उठी और वह जोर-जोर से कांपने लगी। वह झड़ चुकी थी।
उसकी बुर ने मेरे लंड को कसकर पकड़ लिया और उसे अंदर ही रोक लिया।
मैं भी झड़ने वाला था।
मैंने कहा, “मेरा भी निकलने वाला है… कहां निकालूं?”
“मेरे मुंह में…मैं तुम्हारा वीर्य मुंह में लूंगी जैसे चुदाई वाले वीडियो में रंडियां लेती हैं, मुझे तुम्हारा पानी पीना है…” नेहा ने कहा।
मैंने अपना लंड बाहर निकाला और नेहा के मुंह के पास ले आया।
जैसे ही मैंने उसे मुंह में डाला, मेरा पानी निकलने लगा। वह गाढ़ा, गर्म और बहुत अधिक था।
नेहा ने थोडा मुंह बनाया लेकिन उसने सब पी लिया, कुछ भी बर्बाद नहीं होने दिया।
चुदाई के बाद, हम दोनों एक-दूसरे की बाहों में लेटे रहे।
मैंने नेहा के बालों को सहलाया और कहा, “मैं तुमसे शादी करना चाहता हूं नेहा… मैं तुम्हें हमेशा के लिए अपना बनाना चाहता हूं।”
नेहा ने मुझे चूमा और कहा, “मैं भी तुमसे प्यार करती हूं राकेश… तुम मुझे बहुत अच्छे लगते हो… मैं तुम्हारी हूं…”
हम शाम को वहां से लौटे, लेकिन हमारी यह मुलाकात हमारे रिश्ते की शुरुआत थी। अब हम रोज मिलते थे और चुदाई करते थे।
नेहा की बुर अब मेरे लंड के लिए पूरी तरह से तैयार हो गई थी।
मैं उसे हर तरह से चोदता – कभी पीछे से, कभी ऊपर से, कभी खड़े होकर।
हमारा प्यार दिन-ब-दिन बढ़ता गया। मैंने नेहा के पिता से उसका हाथ मांगा लेकिन वह नहीं मान रहे थे फिर नेहा ने भी उन्होंने समझाया और बोली की वह मेरे बिना नहीं रह सकती है फिर अंत में वो मान गए।
आज नेहा मेरी पत्नी है और हम बहुत खुशी से रह रहे हैं।
मेरी बैशाखी हमारे प्यार में कोई बाधा नहीं बनी, बल्कि नेहा मुझे और भी ज्यादा प्यार करती है क्योंकि वह मुझे असली मर्द के रूप में देखती है – जिसका लंड उसकी बुर को पूरी तरह से संतुष्ट कर सकता है।
हर रात हम एक-दूसरे को चूमते, चूसते और चोदते हैं।
नेहा की चूचियां अब मेरे हाथों की गर्मी से और भी सुडौल हो गई हैं।
उसके निप्पल रोज चूसे जाते हैं और उसकी बुर रोज चोदी जाती है।
हम दोनों एक-दूसरे के लिए बने हैं – एक अपंग लेकिन बड़े लंड वाला आशिक और एक सुंदर, कामुक पकौड़ी वाली की बेटी।
हमारी यह कहानी उसी पीपल के पेड़ के नीचे शुरू हुई थी जहां एक शाम मैंने नेहा का हाथ पकड़ा था और आज वहां हम अपने बच्चों के साथ बैठते हैं, अपनी प्रेम कहानी को याद करते हुए, जो शारीरिक अपंगता से परे, सच्चे प्यार और कामुकता की मिसाल है।
अगर आप को मेरी कहानी अच्छी लगी तो कमेंट जरुर करिएगा। थैंक यू!
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नोट: यहां पोस्ट की गई सभी कहानियां केवल मनोरंजन के उद्देश्य से प्रस्तुत की गई हैं। कृपया इन्हें वास्तविक जीवन से जोड़कर न देखें। कहानी में दर्शाए गए किसी भी दृश्य, घटना या चित्र का वास्तविक जीवन में प्रयोग करना हानिकारक हो सकता है। इसके लिए न तो कहानी के लेखक और न ही प्रस्तुतकर्ता जिम्मेदार होंगे। इसलिए कृपया अपनी समझ, बुद्धि और विवेक का उपयोग करें।
Very nice story bhai. main bhi Gorakhpur se hun. 👍👍👍
Kis jagah se ho gorkpur se mere saath sex karoge pura maza dunga