gangbang xxx chudai kahani
हैलो दोस्तों, मैं हूँ काव्या शर्मा, उम्र २२ साल, फिगर ३६-२६-३६, रंग गेहुँआ गोरा।
मैं बनारस की लड़की हूँ लेकिन दिल्ली में रहती हूँ।
दिखने में मैं बिल्कुल मासूम लगती हूँ—बड़ी-बड़ी आंखें, लंबे काले बाल, और एक ऐसी मुस्कान जो हर किसी को अपनी ओर खींच लेती है।
लेकिन यह मासूमियत सिर्फ कपड़ों तक है।
जब मेरे कपड़े उतरते हैं, तो मैं बिल्कुल रंडी बन जाती हूँ—लंड की भूखी, गालियों की प्यासी, और चुदाई की दीवानी।
मुझे जितना तड़पाओ, उतना मज़ा आता है।
मैं वो लड़की हूँ जो बेड पर रोने-धोने वाली नहीं, बल्कि चिल्ला-चिल्लाकर चुदवाने वाली हूँ।
मेरी चूत हमेशा गीली रहती है, और मेरे स्तन… ओह वो ३६ इंच के गोल-गोल मस्त माल जो किसी भी लंड को खड़ा कर दें।
यह बात तब की है जब मेरे पापा के तीन दोस्त घर आए थे।
पापा का एक पुराना दोस्त राजेश अंकल—जो अब लंदन में रहता है—अपने दो दोस्तों के साथ इंडिया आया था।
उनके साथ विक्रम अंकल थे—एक बड़े बिजनेसमैन, दिखने में बिल्कुल सलमान खान जैसे—और डेविड, जो एक अमेरिकन था लेकिन हिंदी बोलता था।
तीनों की उम्र ४५-५० साल के आसपास थी, लेकिन दिखने में बिल्कुल जवान और फिट।
मेरे पापा और मम्मी दोनों ऑफिस जाते थे, और मेरी यूनिवर्सिटी की छुट्टियाँ चल रही थीं।
इसलिए दिनभर मैं घर पर अकेली रहती, और ये तीनों मुझे अपनी बातों में फंसाते।
शुरू में तो वो सिर्फ मज़ाक करते—मेरी तारीफ करते, मेरे बालों को छूते, कभी-कभी कंधे पर हाथ फेरते।
लेकिन मैं समझदार थी।
मैं जानती थी कि इन तीनों बुड्ढों की नज़रें मेरे जिस्म पर हैं।
एक दिन सुबह, पापा ने कहा, “काव्या बेटा, हम दोनों को ऑफिस से दिल्ली जाना है। शाम तक वापस आएंगे। तुम इन अंकलों का ख्याल रखना।”
मैंने हामी भरी, लेकिन अंदर ही अंदर मुझे पता था कि आज कुछ खास होने वाला है।
मैंने जानबूझकर एक छोटी सी ड्रेस पहनी—जो मेरे घुटनों से ऊपर थी, और ऊपर से मेरे स्तनों का क्लीवेज झलकता था।
मैंने ब्रा नहीं पहनी थी, ताकि मेरे निप्पल साफ दिखें।
जब पापा-मम्मी चले गए, तो मैं लिविंग रूम में गई। तीनों अंकल सोफे पर बैठे थे।
राजेश अंकल ने मुझे देखते ही कहा, “अरे वाह काव्या, आज तो कमाल लग रही हो।”
“थैंक्स अंकल,” मैंने शरमाते हुए कहा, और जानबूझकर उनके सामने झुककर चाय रखी। मेरे स्तनों का क्लीवेज साफ दिख रहा था। मैंने देखा कि तीनों की नज़रें वहीं टिकी हैं।
“काव्या, इधर आओ बैठो,” विक्रम अंकल ने कहा और अपने बगल में जगह बनाई।
मैं उनके बीच में बैठ गई। राजेश अंकल मेरे दूसरी तरफ थे, और डेविड सामने। विक्रम अंकल ने अपना हाथ मेरे कंधे पर रखा और धीरे से सहलाने लगे।
“काव्या, तुम्हारी स्किन तो बिल्कुल मक्खन जैसी है,” विक्रम अंकल ने कहा।
“अंकल, आप भी ना…” मैंने शरमाते हुए कहा।
“अरे शर्माओ मत,” राजेश अंकल ने कहा और मेरे गाल को छुआ, “तुम तो बड़ी हो गई हो। कॉलेज में कोई बॉयफ्रेंड है?”
“नहीं अंकल,” मैंने कहा।
“क्यों? इतनी खूबसूरत लड़की, और कोई बॉयफ्रेंड नहीं?” डेविड ने अंग्रेजी में पूछा।
“पसंद ही नहीं आया कोई,” मैंने कहा।
“कैसा लड़का पसंद है तुम्हें?” राजेश अंकल ने पूछा।
मैंने जानबूझकर कहा, “जो मुझे संभाल सके… जो मुझे मज़ा दे सके…”
तीनों अंकल एक-दूसरे को देखकर मुस्कुराए। मुझे पता था कि वो समझ गए थे।
“काव्या, हम लंदन में रहते हैं वहाँ तो लड़कियाँ १८ साल की उम्र में ही चुदाई करवा लेती हैं,” राजेश अंकल ने कहा।
मैंने उनके मुँह से ‘चुदाई’ शब्द सुनकर अपने होंठ काट लिए। मेरी चूत में हलचल होने लगी थी।
“अंकल, वहाँ की लड़कियाँ तो खुली हुई होती हैं ना,” मैंने कहा।
“तुम भी खुल जाओ,” विक्रम अंकल ने कहा और मेरे कंधे से हाथ नीचे सरकाते हुए मेरी कमर पर रख दिया।
मैंने कुछ नहीं कहा। मैं चुपचाप बैठी रही। यह देखकर वो और भी बोल्ड हो गए।
“काव्या, कभी किसी ने छुआ है तुम्हें?” राजेश अंकल ने पूछा।
“क्या मतलब अंकल?” मैंने जानबूझकर पूछा।
“मतलब यहाँ,” कहते हुए उन्होंने अपना हाथ मेरे स्तन पर रख दिया।
मैंने हल्की सी आवाज निकाली, “उम्माह… अंकल यह क्या कर रहे हो?”
“मज़ा दे रहे हैं तुम्हें,” विक्रम अंकल ने कहा और मेरे दूसरे स्तन को पकड़ लिया।
अब दोनों अंकल मेरे स्तनों को मसल रहे थे। डेविद उठकर मेरे सामने आ गया और घुटनों के बल बैठकर मेरे पैरों को सहलाने लगा।
“अंकल, कोई आ जाएगा…” मैंने कमज़ोर विरोध किया।
“कोई नहीं आएगा,” राजेश अंकल ने कहा, “तुम्हारे पापा ने कहा है कि रात को ही आएंगे।”
मैंने आंखें बड़ी-बड़ी करके उन्हें देखा। वो तीनों मुझे खाने के लिए तैयार थे। और मैं भी… मैं भी चुदवाने के लिए तैयार थी।
“अंकल, प्लीज…” मैंने कहा, लेकिन मेरा बदन मना कर रहा था। मेरे निप्पल कड़े हो चुके थे, और मेरी चूत पानी छोड़ रही थी।
“प्लीज क्या?” विक्रम अंकल ने कहा और मेरा चेहरा अपनी तरफ खींचकर मेरे होंठों पर चूमा।
वो मेरे होंठों को जोर-जोर से चूसने लगा।
राजेश अंकल मेरे गले पर चूमने लगे थे,
और डेविड मेरे पैरों से ऊपर बढ़ता हुआ मेरी जांघों पर हाथ फेर रहा था।
“ओह्ह… अंकल…” मैं कराहने लगी।
“आज तो हम तीनों मिलकर तुम्हें चोदेंगे,” राजेश अंकल ने कहा, “तुम्हारी चूत को फाड़ देंगे।”
“हां… चोदो मुझे…” मैंने फुसफुसाते हुए कहा।
“क्या बोला?” विक्रम अंकल ने कान में पूछा।
“चोदो मुझे अंकल… मैं लंड की भूखी हूं…” मैंने कहा।
यह सुनकर तीनों पागल हो गए। उन्होंने मुझे उठाया
और बेडरूम में ले गए।
मुझे बेड पर पटक दिया। अब तीनों मेरे ऊपर झुके हुए थे।
“साली रंडी, आज तो तेरी चूत का भोसड़ा बना देंगे,” राजेश अंकल ने गाली देते हुए कहा।
“हां… मेरी चूत फाड़ दो… मैं रंडी हूं… मैं चुदना चाहती हूं…” मैंने भी गंदी बातें करनी शुरू कर दीं।
राजेश अंकल ने मेरी ड्रेस ऊपर उठाई और फाड़कर निकाल दी।
मैंने नीचे पैंटी पहनी थी, लेकिन ब्रा नहीं थी।
मेरे दोनों स्तन बाहर आ गए—गोल, गोरे, और निप्पल कड़े।
“वाह… कितने सुंदर चूचे हैं,” डेविड ने कहा और एक स्तन को मुंह में ले लिया।
वो जोर-जोर से चूसने लगा।
राजेश अंकल दूसरे स्तन को पकड़कर मसलने लगे।
विक्रम अंकल मेरी पैंटी नीचे खींच रहे थे।
“यह क्या? पैंटी गीली है… बिल्कुल भीगी हुई है,” विक्रम अंकल ने कहा।
“चूत पानी छोड़ रही है… यह लड़की तो बहुत चुदासी है,” राजेश अंकल ने कहा।
मेरी पैंटी उतार दी गई।
मेरी चूत साफ थी, गीली, और लाल।
विक्रम अंकल ने अपनी उंगली अंदर डाली।
“ओह्ह… अंकल…” मैंने कराही।
“कितनी टाइट है… कितनी गर्म है…” विक्रम अंकल ने कहा।
अब तीनों ने अपने कपड़े उतार दिए।
तीनों के लंड बाहर आ गए।
राजेश अंकल का लंड सबसे मोटा था—काला, ८ इंच लंबा, और एकदम खड़ा।
विक्रम अंकल का लंड लंबा था, करीब ९ इंच, और पतला।
डेविड का लंड गोरा था, मोटा, और लाल टोपे वाला।
“आज तीनों लंड एक साथ लेगी?” राजेश अंकल ने पूछा।
“हां… मैं तीनों का लंड लूंगी… मेरी चूत में डालो… मेरी गांड में डालो… मेरे मुंह में डालो…” मैं पागलों की तरह बोल रही थी।
राजेश अंकल मेरे ऊपर आए और मेरी टांगें चौड़ी कीं।
उन्होंने अपना मोटा लंड मेरी चूत पर रखा और एक जोरदार धक्का दिया।
“आह… माँ… दर्द…” मैं चीखी।
“साली माँ को याद करती है? तेरी माँ भी हम तीनों से चुदी है… वो भी रंडी थी, तू भी रंडी है…” राजेश अंकल ने कहा और दूसरा धक्का दिया।
आधा लंड अंदर चला गया।
मेरी चूत फट रही थी लेकिन मज़ा भी आ रहा था।
“और अंदर… पूरा डालो…” मैंने कहा।
राजेश अंकल ने एक और जोरदार धक्का दिया और पूरा लंड अंदर घुसा दिया।
अब वो झटके लगाने लगे।
मेरी चूत से पच-पच की आवाजें आ रही थीं।
“फक… फक… फक…” मैं चिल्ला रही थी।
इतने में विक्रम अंकल ने अपना लंड मेरे मुंह के पास लाया। “चूस इसे… अपनी माँ की तरह चूस…”
मैंने उसका लंड मुंह में ले लिया। वो मोटा था, गर्म था।
मैं उसे चूसने लगी।
वो मेरे सिर को पकड़कर अपना लंड अंदर-बाहर करने लगा।
डेविड मेरे स्तनों को चूस रहा था।
वो एक-एक करके दोनों स्तनों को मुंह में लेकर चूसता, काटता, और दबाता।
“यह ले… ले ले साली… तीनों का लंड ले…” राजेश अंकल मेरी चूत चोद रहे थे।
“मुँह और अंदर ले… गले तक घुसा ले…” विक्रम अंकल मेरे मुँह को चोद रहे थे।
मैं तीनों की चुदाई का मज़ा ले रही थी।
मेरी चूत पानी छोड़ रही थी, और मैं पहली बार झड़ने वाली थी।
“आह… मैं झड़ने वाली हूं… और तेज़… और जोर से…” मैंने कहा।
राजेश अंकल ने गति बढ़ा दी।
वो जोर-जोर से मेरी चूत में धक्के मार रहे थे।
और फिर मैं झड़ गई। मेरी चूत से पानी निकलकर उनके लंड पर गिरा।
“वाह… स्क्वर्ट करती है… बिल्कुल अपनी माँ की तरह…” राजेश अंकल ने कहा।
अब उन्होंने पोजीशन बदली।
मुझे घुटनों के बल किया गया।
राजेश अंकल पीछे से मेरी चूत में लंड डालकर चोदने लगे।
विक्रम अंकल मेरे सामने खड़े थे और मैं उनका लंड चूस रही थी।
डेविड ने अपना लंड मेरी गांड के छेद पर रखा।
“गांड मारूं?” डेविड ने पूछा।
“हां… मारो… दोनों छेदों में एक साथ डालो…” मैंने कहा।
डेविड ने थूक लगाया और अपना लंड मेरी गांड में डाल दिया।
मैं चीखी, “आह… माँ… दर्द…”
“दर्द तो होगा साली… पहली बार गांड मरवा रही है ना…” राजेश अंकल ने कहा।
अब मेरी चूत और गांड दोनों में लंड थे।
मैं मुंह से भी लंड चूस रही थी।
तीनों छेदों में तीनों लंड।
मैं पूरी तरह से भरी हुई थी।
“ओह्ह… येस… फक मी… हार्डर… और तेज़…” मैं चिल्ला रही थी।
“साली रंडी… बहुत चिल्लाती है… ले अभी और तेज़…” राजेश अंकल ने मेरी कमर पकड़कर जोर-जोर से धक्के मारने शुरू किए।
मेरी चूत और गांड दोनों में आग लग रही थी। लेकिन यह आग मज़े की थी। मैं एक बार फिर झड़ने वाली थी।
“मैं झड़ रही हूं… और तेज़… मारो… फाड़ दो मेरी चूत…” मैंने कहा।
तीनों ने गति बढ़ा दी। वो तीनों एक साथ मुझे चोद रहे थे। और फिर मैं झड़ गई। मेरी पूरी बॉडी कांप रही थी।
“अब हम भी झड़ने वाले हैं…” विक्रम अंकल ने कहा।
“मेरे मुँह में झड़ो… मैं पी जाऊंगी…” मैंने कहा।
विक्रम अंकल ने अपना लंड मेरे मुँह से बाहर निकाला और जोर-जोर से हिलाया।
और फिर उन्होंने अपना गरम वीर्य मेरे मुँह में छोड़ दिया।
वो गाढ़ा था, गर्म था, और बहुत सारा था।
मैंने उसे चूसकर साफ किया।
फिर डेविड ने अपना लंड मेरी गांड से निकाला और मेरे मुँह में दे दिया।
मैंने उसे भी चूसा, और वो भी मेरे मुँह में झड़ गए।
अब सिर्फ राजेश अंकल बचे थे।
उन्होंने मुझे लेटाया और मेरी चूत में ही अपना वीर्य छोड़ दिया।
मेरी चूत उनके गर्म माल से भर गई।
हम चारों बेड पर पड़े थे। मैं थकी हुई थी, लेकिन संतुष्ट थी।
मेरी चूत और गांड दोनों में दर्द था, लेकिन यह दर्द मज़े का था।
“कैसा लगा?” राजेश अंकल ने पूछा।
“बहुत मज़ा आया अंकल… आप तीनों ने मेरी चूत का भोसड़ा बना दिया…” मैंने कहा।
“अभी तो शुरुआत है साली… रात भर चोदेंगे तुझे…” विक्रम अंकल ने कहा।
“हां… मैं तैयार हूं… जितनी बार चाहो चोदो…” मैंने कहा।
उस रात हमने तीन बार और चुदाई की। तीनों ने मुझे हर तरह से चोदा—मिशनरी में, डॉगी में, और मैंने उनके लंड चूस-चूसकर खड़े किए।
सुबह जब मैं उठी, तो मेरी चूत और गांड दोनों में दर्द था।
लेकिन मैं खुश थी। मैंने एक गैंगबैंग का मज़ा लिया था जो मैं कभी नहीं भूलूंगी।
जब पापा-मम्मी आए, तो वो तीनों ऐसे बर्ताव कर रहे थे जैसे कुछ हुआ ही न हो।
लेकिन मुझे पता था कि यह सिर्फ शुरुआत थी।
वो तीनों एक हफ्ते और रुके, और उस एक हफ्ते में मुझे जमकर चोदा।
हर दिन, हर रात, हर कोने में—बाथरूम में, किचन में, लिविंग रूम में।
मैं उनकी रंडी बन गई थी।
और मुझे इसमें कोई शर्म नहीं थी।
मैं एक लंड की भूखी लड़की थी, और मुझे वो तीनों मिल गए थे।
आज भी जब मैं अकेली होती हूं, तो उन तीनों की याद में अपनी चूत में उंगली करती हूं।
और जब वो लंदन से फोन करते हैं, तो मैं फोन सेक्स करती हूं और अपनी चूत का पानी उन्हें सुनाती हूं।
यह थी मेरी गैंगबैंग की कहानी।
उम्मीद है आपको पसंद आई होगी।
अगर आप भी मुझे चोदना चाहते हैं, तो मुझे मैसेज करें।
मैं हमेशा तैयार हूं…
- जाटों ने मेरी मम्मी का गैंगबैंग किया
- मेरी मस्त पड़ोसन भाभी घर आकर चुदी
- कुँवारी सेक्रेटरी प्रेग्नेंट हो गई
- प्रोफेसर मैडम की चुदाई
नोट: यहां पोस्ट की गई सभी कहानियां केवल मनोरंजन के उद्देश्य से प्रस्तुत की गई हैं। कृपया इन्हें वास्तविक जीवन से जोड़कर न देखें। कहानी में दर्शाए गए किसी भी दृश्य, घटना या चित्र का वास्तविक जीवन में प्रयोग करना हानिकारक हो सकता है। इसके लिए न तो कहानी के लेखक और न ही प्रस्तुतकर्ता जिम्मेदार होंगे। इसलिए कृपया अपनी समझ, बुद्धि और विवेक का उपयोग करें।
Wow! mast chudai
Hello kaha se siksha