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यह कहानी एक देवर (राजेश) और उसकी भाभी (रिंकी) के बीच प्रेम और कामुक संबंधों के विकास को दर्शाती है, जो शुरू में फोन पर बातचीत से शुरू होकर अंततः शारीरिक संबंधों में परिवर्तित हो जाती है।
दोस्तों, मेरा नाम राजेश है। मेरी उम्र इस समय 25 साल है, लेकिन आज जो हॉट भाभी देवर की चुदाई कहानी मैं आपको सुनाने जा रहा हूँ, वो उस समय की है जब मैं 22 साल का था।
मैं अपने रिश्ते में एक चचेरे भाई की शादी में गया था। शादी में जब मैंने पहली बार नई भाभी को देखा तो देखता ही रह गया।
सच में मेरी भाभी रिंकी एक बला की खूबसूरत हसीना थीं।
उनकी उम्र उस समय 24 साल थी, और वो एकदम जवान और तरोताजा लग रही थीं।
उनका फिगर 36-30-38 था, और रंग एकदम गोरा। उनके बाल कमर तक लंबे थे, और आँखें एकदम कातिल।
शादी के बाद जब पहली बार रिंकी भाभी अपनी ससुराल आईं, तो उस समय उनसे मेरी ज्यादा पहचान ना हो पाई।
इतने लोग थे कि नई भाभी के लिए किसी के बारे में एकदम से सब कुछ जान पाना मुश्किल था।
लेकिन मैंने महसूस किया कि रिंकी भाभी मुझे देखकर मुस्कुरा रही थीं, और मेरी नजरें उन पर से हट नहीं रही थीं।
शादी में जब हमारी नजरें मिलीं, तो मुझे लगा जैसे बिजली सी कौंध गई।
रिंकी भाभी ने एक गुलाबी लहंगा पहना था, और उसमें वो एकदम परी लग रही थीं।
उनके बूब्स मानो बाहर आने को मचल रहे थे, और मेरी नजरें उनके हुस्न को आँखों से चोदने में ही लग गई थीं।
शादी के बाद मैं वापस भोपाल आ गया।
चूँकि मैं उनका सबसे बड़ा देवर था, इसलिए मैंने उन्हें फोन लगाना शुरू कर दिया।
पहली बार जब मैंने फोन किया, तो उनकी आवाज़ सुनकर ही मेरा दिल धड़कने लगा।
हमने औपचारिक बातचीत की, लेकिन मुझे उनसे बात करके अजीब सा सुकून मिला।
धीरे-धीरे हमारी बातचीत बढ़ने लगी। शुरू में हम दिन में एक बार बात करते थे, फिर ये बढ़कर दो बार, फिर तीन बार हो गया।
रात को 11 बजे, 12 बजे तक हम फोन पर बातें करते रहते।
रिंकी भाभी ने एक दिन कहा, “आपसे बात करके अच्छा लगा, प्लीज़ फोन पर बातचीत करते रहें।”
अब मेरी और रिंकी भाभी की हमेशा बातचीत होती रहती थी और हँसी-मजाक भी चलता रहता था।
धीरे-धीरे हम दोनों में खुलापन आया। मैं उन्हें अपने दिल की बातें बताने लगा, और वो भी मुझसे खुलकर बात करने लगीं।
एक दिन रात को 2 बजे हम बात कर रहे थे।
रिंकी भाभी ने पूछा, “राजेश, तुम्हारी गर्लफ्रेंड है?”
मैंने कहा, “नहीं भाभी, अभी तो कोई नहीं।”
तो वो बोलीं, “क्यों, इतने हैंडसम हो, कोई लड़की क्यों नहीं पटाई?”
मैंने मजाक में कहा, “भाभी, आप जैसी खूबसूरत लड़की मिले तो ही पटाऊँगा।”
ये सुनकर रिंकी भाभी शरमा गईं और बोलीं, “अच्छा, तो मैं खूबसूरत लगती हूँ?”
मैंने कहा, “हाँ भाभी, आप तो बहुत खूबसूरत हैं। मैं तो आपको देखते ही दिल हार बैठा था शादी में।”
इसके बाद हमारी बातचीत और भी निजी हो गई। कभी-कभी हम अडल्ट मजाक भी कर लेते थे।
रिंकी भाभी एक दिन बोलीं, “राजेश, मुझे अकेलेपन में बहुत बोरियत होती है। तुम्हारे भैया माहेश तो रात को ड्यूटी पर ही रहते हैं।”
मैंने कहा, “भाभी, मैं हूँ ना, आपको कभी अकेला नहीं छोड़ूँगा।”
एक दिन रात को बात करते-करते रिंकी भाभी ने कहा, “राजेश, मुझे तुमसे एक बात कहनी है।”
मैंने पूछा, “क्या भाभी?” वो थोड़ी देर चुप रहीं, फिर बोलीं, “मुझे तुम बहुत पसंद आते हो। तुम्हारी आवाज़ सुनकर मेरा दिल धड़कता है।”
ये सुनकर मैं खुशी से पागल हो गया।
मैंने कहा, “भाभी, मैं भी आपसे प्यार करता हूँ। आपको देखते ही मैं आपका हो गया था।”
इसके बाद हमारे बीच और भी करीबियाँ बढ़ने लगीं।
हम रोज़ फोन पर घंटों बातें करते, एक-दूसरे को कविताएँ सुनाते, गाने सुनाते।
रिंकी भाभी एक दिन बोलीं, “राजेश, कब आओगे मुझे मिलने? मैं तुम्हें देखना चाहती हूँ।”
मैंने कहा, “भाभी, जल्दी ही आऊँगा। मैं भी आपको देखने के लिए बेताब हूँ।”
मुझे रिंकी भाभी से रूबरू मिलने का समय नहीं मिला इसलिए हम दोनों कभी मिल नहीं पा रहे थे।
लेकिन फोन पर हमारा प्यार बढ़ता ही जा रहा था।
हम एक-दूसरे को “जान”, “प्यार” कहकर बुलाने लगे थे।
रात को बात करते समय रिंकी भाभी कभी-कभी मुझसे कहतीं, “राजेश, मुझे तुम्हारे बगल में सोना है। तुम्हारी बाहों में आराम करना है।”
मैं भी उनसे कहता, “भाभी, मैं तो आपको अपनी बाहों में भरकर पूरा दिन बिताना चाहता हूँ। आपके होंठों को चूमना चाहता हूँ।”
ये सब बातें हम फोन पर करते थे, और दोनों ही उत्तेजित हो जाते थे।
डेढ़ साल बाद भैया माहेश के घर जाने का मेरा प्लान बना।
मैंने रिंकी भाभी को फोन पर बताया तो वो बहुत खुश हुईं।
उन्होंने कहा, “जल्दी आओ राजेश, मैं तुम्हारा इंतजार कर रही हूँ।”
मैं सुबह नौ बजे उनके घर पहुँचा। भैया माहेश अपनी नाइट ड्यूटी से आकर सोए हुए थे तो रिंकी भाभी ने ही मेरा स्वागत किया।
जब मैंने इस बार रिंकी भाभी को देखा तो उनके फिगर में काफी बदलाव आ गया था।
वो उस समय सलवार कुर्ते में थीं और कुर्ता थोड़ा टाइट था इसलिए उनका फिगर साफ समझ आ रहा था।
रिंकी भाभी का 36-30-38 का फिगर रहा होगा। उन्होंने अपने बालों की चोटी बना रखी थी जो कमर तक आ रही थी।
उनके बूब्स तो मानो बाहर आने को मचल रहे थे।
मेरी नजरें उनके हुस्न को आँखों से चोदने में ही लग गई थीं। शायद रिंकी भाभी ने भी इस बात को समझ लिया था।
उन्होंने मुस्कुराते हुए कहा, “आ गए राजेश? कैसे हो?”
मैंने कहा, “भाभी, आप देखकर अब और भी अच्छा हो गया हूँ।”
वो शरमा गईं और बोलीं, “आओ, अंदर आओ।”
फिर मैंने चाय-नाश्ता किया और रिंकी भाभी से उस दौरान बहुत सारी बातचीत, हँसी-मजाक हुआ।
हम दोनों के बीच वो पुरानी केमिस्ट्री फिर से जाग उठी। वो मुझे बार-बार मुस्कुराकर देख रही थीं, और मैं उनके बूब्स को देखकर उत्तेजित हो रहा था।
फिर रिंकी भाभी ने कहा, “आप थक गए होंगे, आराम कर लीजिए।”
मैंने गेस्ट रूम में जाकर आराम किया। करीब बारह बजे भैया माहेश उठे तो मैं उनसे मिला।
कुछ देर बाद उनका एक फोन आ गया और वो अपने मित्र के आमंत्रण पर उसके घर खाना खाने चले गए।
मैं और रिंकी भाभी घर पर अकेले रह गए थे। मेरा दिल जोर-जोर से धड़क रहा था। यही वो मौका था जिसका मुझे इंतजार था।
रिंकी भाभी ने मुझे किचन से आवाज़ लगाई।
मैं गया तो रिंकी भाभी बोलीं, “राजेश, वो ऊपर रखा डिब्बा निकाल दो।”
मैंने निकालने की कोशिश की लेकिन मेरा हाथ वहाँ तक नहीं पहुँच रहा था।
इस पर रिंकी भाभी बोलीं, “बस इतना ही दम था?”
मैंने पलटकर उन्हें तिरछी नजर से देखा। जिस पर वह मुस्कुरा दीं।
मैंने कहा, “अकेले तो नहीं, पर आपका साथ मिले, तो डिब्बा एक मिनट में निकाल सकता हूँ।”
रिंकी भाभी बोलीं, “वो कैसे?”
मैंने कहा, “मैं आपको उठा लेता हूँ, आपको मेरे दम का अंदाजा भी हो जाएगा और आपका काम भी हो जाएगा।”
रिंकी भाभी बुदबुदाईं, “मेरा काम भी हो जाएगा … हम्म।”
मैंने फिर से रिंकी भाभी से कहा, “आइए मैं आपको पकड़कर उठाता हूँ, आपसे आसानी से डिब्बा निकल आएगा।”
रिंकी भाभी ने एक पल कुछ सोचा और मुस्कुराकर आगे को आ गईं।
मैंने उन्हें पीछे से घुटनों के थोड़ा ऊपर पकड़ा और उठा दिया।
रिंकी भाभी ने झट से डिब्बा पकड़ लिया।
उस समय रिंकी भाभी की गांड और कमर के बीच में मेरा मुँह लगा था। मैं उनके जिस्म की खुशबू को महसूस कर रहा था।
फिर मैंने रिंकी भाभी को धीरे-धीरे नीचे किया।
उस दौरान उनकी कमर से उनकी पीठ, फिर उनकी गर्दन, उनके बाल सब पर मेरा मुँह लगा।
जब रिंकी भाभी की गर्दन के पास मेरा मुँह आया तो मैंने अपने होंठों से उनकी गर्दन को हल्का सा छू लिया।
जिस पर रिंकी भाभी नीचे उतरने के बाद मुझे तिरछी नजरों से देखने लगीं और मैं हँसते हुए बाहर चला गया।
रिंकी भाभी बोलीं, “काम के बहाने तुमने अच्छा चांस मार लिया।”
मैं बोला, “अरे कहाँ भाभी … आपने तो मुझे कुछ पकड़ने ही नहीं दिया।”
कुछ देर बाद रिंकी भाभी बाहर सोफे पर मेरे साथ आकर बैठ गईं और बातचीत करने लगीं।
बातचीत करते-करते मैंने अपना हाथ उनके कंधे पर रख दिया।
इस पर एक क्षण के लिए उन्होंने मेरी तरफ देखा मगर वो शांत रहीं। मैंने हाथ नहीं हटाया।
रिंकी भाभी मुझसे बातें करने लगीं। मैं उनके कंधे को सहलाने लगा।
रिंकी भाभी मेरी ओर ललचाई नजरों से देखने लगीं।
फिर कुछ समय बाद भैया माहेश की स्कूटर रुकने की आवाज आई तो मैंने अपना हाथ हटा लिया और हम लोग बात करने लगे।
भैया माहेश अन्दर आए और शाम को उन्हें नाइट ड्यूटी पर जाना था तो वे उस वक्त आराम करने बेडरूम में चले गए।
मैं भी गेस्ट रूम में आराम करने आ गया।
रिंकी भाभी उनके बेडरूम में जाने लगीं। जब वह दरवाजा बंद कर रही थीं तब मेरी और उनकी नजर आपस में टकरा गईं।
रिंकी भाभी ने एक कातिल मुस्कान के साथ मेरी ओर देखा तो मैंने भी इशारे में कहा, “यहीं आकर आराम कर लो।”
इस पर रिंकी भाभी ने मुझे जीभ चिढ़ाते हुए दरवाजा बंद कर लिया। मैं भी लेट गया और हम सभी ने आराम किया।
शाम के वक्त भैया माहेश और मैंने साथ में चाय पी।
उसके बाद भैया माहेश ने मुझे बताया कि रात को हम सबको एक रिसेप्शन पार्टी में चलना है। उधर से ही वो अपनी ड्यूटी पर निकल जाएंगे।
करीब 7:00 बजे हम सब लोग पार्टी में जाने के लिए तैयार होने लगे।
मैं और भैया माहेश तैयार हो चुके थे। रिंकी भाभी जब तैयार होकर बाहर निकलीं तो मैं उन्हें देखता ही रह गया।
उन्होंने गोल्डन कलर की साड़ी, ब्लैक स्ट्रिप वाले गोल्डन ब्लाउज को पहना था।
उनका ब्लाउज बैकलेस था और सामने से यू शेप में गहरे गले का था। हाथों में कंगन खनखना रहे थे। रिंकी भाभी ने अपने बाल खुले रखे थे।
उनके बूब्स उनके ब्लाउज में एकदम टाइट फंसे थे, जिस वजह से उनकी क्लीवेज साफ दिख रही थी।
रिंकी भाभी का रंग तो गोरा था ही, उस पर गोल्डन कलर की साड़ी उनकी खूबसूरती पर चार चांद लगा रही थी।
रिंकी भाभी ने पिंक कलर की लिपस्टिक लगाई थी, जो उन्हें कातिल रूप दे रही थी।
उनको देखकर उन पर कोई भी फ़िदा हो सकता था। फिर मैं, भैया माहेश और रिंकी भाभी पार्टी की ओर ऑटो से निकल चले।
वहाँ पहुँचकर रिंकी भाभी अपने सहेलियों के साथ घुल-मिल गईं और मैं और भैया माहेश उनके दोस्तों के साथ खड़े रहकर बातचीत करने लगे।
कुछ देर बाद हमने खाना खाया। खाना खाने के बाद करीब 9:30 बजे भैया माहेश और मैं रिंकी भाभी के पास गए।
भैया माहेश ने उनसे कहा, “मुझे ड्यूटी जाना है, सो मैं यहीं से निकल रहा हूँ। तुम अपने देवर के साथ घर चली जाना।”
रिंकी भाभी ने मुस्कुराकर हामी भर दी और कहा, “हम लोग कुछ देर पार्टी एन्जॉय करेंगे। फिर घर चले जाएंगे।”
भैया माहेश ओके कहकर ड्यूटी निकल गए।
करीब आधे घंटे बाद रिंकी भाभी भी मेरे पास आईं और बोलीं, “राजेश चलो घर चलते हैं।”
रिंकी भाभी और मैं भी वहां से एक ऑटो पकड़कर घर की ओर आ गए।
रिंकी भाभी ने गेट खोला। हम दोनों घर के अन्दर आ गए।
रिंकी भाभी ने गेट को अन्दर से बंद कर लिया। मुझे रिंकी भाभी काफी सुंदर लग रही थीं और उस समय घर में हम दोनों अकेले थे।
अब मुझसे रहा नहीं जा रहा था। मैंने सोचा यही समय है जब रिंकी भाभी से कुछ स्टार्ट करता हूँ।
अगर रिंकी भाभी बुरा मानती हैं तो मजाक की बात कह दूंगा।
जब रिंकी भाभी दरवाजा बंद कर रही थीं, तो मैं रिंकी भाभी के पीछे चला गया।
रिंकी भाभी दरवाजा बंद करके जैसे ही पलटीं तो मैं उनके सामने खड़ा हो गया।
वह हँसते हुए बोलीं, “जाने भी दो देवर जी … कोई देख लेगा।”
मैंने भी कहा, “हां आपके घर की दीवारें हमें देख सकती हैं।”
इस पर रिंकी भाभी हँसी और मेरे साइड से जाने लगीं।
मैंने रिंकी भाभी का हाथ पकड़ लिया।
रिंकी भाभी बोलीं, “अब छोड़ो भी देवर जी, बहुत हो गया।”
मैंने कहा, “छोड़ने के लिए तो हाथ नहीं पकड़ा है।”
मैं रिंकी भाभी के पीछे जाकर एकदम उनसे चिपक गया। रिंकी भाभी कुछ नहीं बोल रही थीं।
मैंने अपना एक हाथ रिंकी भाभी के कंधे पर रख दिया और उनके कंधे पर हल्का सा दबाव दिया तो रिंकी भाभी हल्का आगे को हो गईं।
मैंने मौका देखा और रिंकी भाभी को दीवार की तरफ ले जाकर दीवार से चिपका दिया।
रिंकी भाभी के पूरे बूब्स दीवार पर दब रहे थे।
रिंकी भाभी की साड़ी का पल्लू मैंने उनके सर से खींच लिया और रिंकी भाभी के लंबे बालों को अपने एक हाथ से साइड में करके उनकी पीठ पर एक किस कर ली।
रिंकी भाभी की सांसें बढ़ने लगीं।
मैंने अब रिंकी भाभी के दोनों हाथ पकड़कर दीवार पर ऊपर को कर दिए और बालों को आगे की ओर कर दिया।
अब मैं रिंकी भाभी की गर्दन के पास आया और मैंने कहा, “मैं आपको अच्छा लगता हूँ?”
रिंकी भाभी ने तुरंत कहा, “बिल्कुल नहीं … भला कोई देवर अपनी भाभी के साथ ऐसा करता है।”
मैंने कहा, “यह देवर तो ऐसा ही करेगा।”
यह कहकर मैंने रिंकी भाभी के गर्दन पर अपने होंठ रख दिए और हल्के-हल्के से चूमने लगा।
रिंकी भाभी ने कुछ नहीं कहा तो मैं उनकी पीठ की ओर बढ़ने लगा।
मेरा दबाव रिंकी भाभी पर बढ़ता जा रहा था और मैं उन्हें दीवार पर पुश कर रहा था।
मेरा लंड हल्के-हल्के से साड़ी के ऊपर से ही रिंकी भाभी की गांड की दरार में सैट हो रहा था।
शायद अब रिंकी भाभी से सहा नहीं जा रहा था और उन्होंने धीमी आवाज में कहा, “राजेश बस करो।”
फिर वो पीछे को धक्का देती हुई वहां से बेडरूम की ओर चली गईं।
कमरे में जाते-जाते रिंकी भाभी ने मेरी ओर देखा और एक कातिल मुस्कान के साथ होंठों को दाँत से दबा दिया।
मैं रिंकी भाभी के पीछे उनके बेडरूम की ओर आ गया और दरवाजे पर खड़े होकर उन्हें देखने लगा।
रिंकी भाभी शीशे के सामने खड़ी थीं।
उन्होंने शीशे में से ही मेरी ओर देखकर कहा, “अब खड़े क्या हो … इधर आओ और मेरा नेकलेस उतारने में मेरी मदद करो न।”
मैं तुरंत गया और रिंकी भाभी के नेकलेस की डोरी खोलकर उसे उतारकर शेल्फ पर रख दिया।
इसके बाद उन्होंने अपने कान के झुमके उतारे।
मैं वहीं खड़ा रिंकी भाभी को आईने में देख रहा था और रिंकी भाभी भी मुस्कुरा रही थीं।
रिंकी भाभी बोलीं, “ऐसे क्या देख रहे हो?”
मैं बोला, “मैं उस हसीना को देख रहा हूँ, जिसने मेरे दिल पर कब्ज़ा कर लिया है।”
रिंकी भाभी ने हँसकर कहा, “एक और काम था लेकिन कोई शरारत नहीं करने का वादा करो, तो बताऊं।”
मैंने दिल पर हाथ रखकर कहा, “जितने चाहे खंजर चला लीजिएगा, ये मजनूँ उफ तक नहीं करेगा।”
रिंकी भाभी जोर से हँसी और बोलीं, “डियर मजनूँ जी … क्या आप पीछे से मेरे ब्लाउज के हुक खोल देंगे?”
अब मैं समझ गया था कि यह मेरे लिए खुला निमंत्रण है।
मैंने तुरंत आगे बढ़कर रिंकी भाभी के ब्लाउज के दो हुक खोल दिए और पीछे से उनकी पीठ को अपने हाथों से सहलाने लगा।
रिंकी भाभी कुछ बोलतीं या समझतीं, इससे पहले मैंने रिंकी भाभी को कमर के बल उठाकर बेड पर गिरा दिया और मैं भी रिंकी भाभी के ऊपर आ गया।
उनका पिछवाड़ा मेरे नीचे था। उनके ब्लाउज के हुक तो खुले ही थे।
अब मैं रिंकी भाभी के बाल, जो बिखरे थे, उन्हें एक साइड में करके रिंकी भाभी की पीठ पर सहलाने लगा और हल्की-हल्की किस लेने लगा।
फिर मैंने रिंकी भाभी के ब्लाउज को पीछे से हटा दिया और उनकी पीठ और कमर पर बहुत सारी चुम्मियाँ करते हुए नीचे आता गया।
रिंकी भाभी कुछ नहीं कह रही थीं तो मैंने रिंकी भाभी की साड़ी को उनके पैरों से ऊपर करना शुरू कर दिया।
अब रिंकी भाभी ने अपने आपको पलटा लिया और चित लेट गईं।
इस पोजीशन में रिंकी भाभी का सामना मेरी ओर आ गया था और मैं बैठकर उनके चेहरे को देख रहा था।
मैंने अपनी शर्ट और बनियान दोनों निकाल दिए।
उसी समय रिंकी भाभी ने मुझे अपनी बाहों में लेने के लिए अपने दोनों हाथ फैला दिए।
मैं भी तुरंत सामने से उनके ऊपर आ गया और उनके होंठों पर अपने होंठ रख दिए।
फिर हमारे बीच वो लंबा किस चला जिसमें रिंकी भाभी और मैंने एक-दूसरे के होंठों को खूब चूसा।
इस लंबे चुम्बन से मेरे अन्दर बिजली सी दौड़ गई थी। मेरा हाथ आगे की ओर आ गया।
रिंकी भाभी के ब्लाउज के ऊपर से उनके बूब्स अभी भी अधखुले ब्लाउज में कैद से थे।
मैंने रिंकी भाभी के ब्लाउज के ऊपर से ही उनके मम्मों को दबाना आरम्भ कर दिया।
रिंकी भाभी के बूब्स काफ़ी बड़े थे जो मुझे और भी मजा दे रहे थे।
मैंने कुछ देर बाद रिंकी भाभी के ब्लाउज को निकाल दिया।
अब रिंकी भाभी के 38 साइज के बूब्स मेरे सामने थे जिस पर मैंने अपना मुँह रख दिया और चूसने लगा।
मैंने रिंकी भाभी के दोनों मम्मों को बहुत चूसा।
रिंकी भाभी भी मेरे सर पर दबाव डालते हुए अपने बूब्स चुसवा रही थीं और बोल रही थीं, “बहुत बढ़िया राजेश … तुम तो बहुत पक्के खिलाड़ी निकले … आह और चूसो राजेश!”
मैंने रिंकी भाभी की साड़ी की ओर हाथ किया और उनकी साड़ी और पेटीकोट को कमर तक खींच लिया।
फिर उनके मम्मों को चूसते हुए मैंने उनकी चूत पर हाथ फेर दिया।
रिंकी भाभी ने धीमे से कहा, “अपने कपड़े उतार दो।”
मैं उठा और मैंने अपनी पैंट और चड्डी निकाल दी। शर्ट पहले ही हट चुकी थी।
मैं रिंकी भाभी के ऊपर चढ़ गया और रिंकी भाभी के होंठों पर अपने होंठ लगा दिए।
हम दोनों एक-दूसरे को खूब चूस रहे थे, चुम्मा-चाटी कर रहे थे।
कुछ देर बाद मैंने रिंकी भाभी के दोनों पैरों के बीच आकर मेरे लंड को उनकी चूत पर सैट कर दिया।
रिंकी भाभी लंड की गर्मी पाते ही मचल उठीं और उन्होंने अपनी टांगें फैला दीं। मैं उनकी चूत पर लंड रगड़ने लगा।
अब रिंकी भाभी से कंट्रोल करना मुश्किल हो रहा था तो उन्होंने मुझे अपनी ओर खींचा लेकिन मैं अभी भी उन्हें तरसा रहा था।
कुछ देर बाद रिंकी भाभी की चूत में मैंने अपने लंड का एक जोरदार धक्का मारा तो मेरा लंड उनकी चूत को चीरते हुए सीधा अन्दर चला गया।
रिंकी भाभी थोड़ा सा उचकीं और आह करती हुई बोलीं, “आह मर गई … धीरे करो ना।”
मैं लेकिन कहाँ मानने वाला था … मैंने फिर से अपना लंड बाहर करके एक और जोरदार स्ट्रोक दे मारा।
मेरे कड़क झटकों के कारण रिंकी भाभी को मजा आने लगा और वह मुझे किस करने लगीं।
मैंने अपनी चुदाई की रेलगाड़ी चालू कर दी।
करीब पन्द्रह मिनट तक मैंने रिंकी भाभी की चूत में लंड जड़ तक डाल-डालकर उन्हें खूब चोदा।
रिंकी भाभी भी अपनी दोनों टांगें हवा में करके मेरे लंड को पूरी तरह अन्दर तक ले रही थीं और आवाज करती हुई मजा ले रही थीं।
रिंकी भाभी की चूत से पानी की धार बहने लगी थी।
शायद वो एक-दो बार तो डिस्चार्ज हो ही गई थीं।
रिंकी भाभी की कामुक आवाजें भी निकल रही थीं, “आह आह … राजेश मजा आ गया। मैं फिर से जाने वाली हूँ।”
मैंने भी कहा, “हां मेरा भी निकलने वाला है।”
इस पर रिंकी भाभी बोलीं, “तुम करते रहो।”
मैं उनके मम्मों को दबाते हुए होंठों पर किस ले रहा था और अपने लंड को पूरी ताकत से उनकी चूत में डालता-निकालता रहा।
फिर करीब दस झटकों के बाद मेरा वीर्य उनकी चूत में गिर गया और मैं उनके ऊपर ही ढह गया।
मैं उनके एक दूध को अपने मुँह में लेकर चूसने लगा। वो भी मेरे बालों को सहला रही थीं।
हम लोग उसी पोजीशन में करीब पाँच मिनट तक पड़े रहे। उसके बाद रिंकी भाभी ने मुझे धक्का देकर साइड में किया।
रिंकी भाभी ने कहा, “कर दिया ना अपनी भाभी को खराब … ले लिया मजा?”
ये कहकर रिंकी भाभी हँस दीं। मैंने कहा, “खराब नहीं, मेरी प्यारी रिंकी भाभी मैंने आपको आबाद किया है।”
फिर रिंकी भाभी उठीं और उन्होंने अपने कपड़े चेंज किए।
फिर किचन में जाकर हम दोनों के लिए कॉफी बना लाईं।
इस समय रिंकी भाभी ने टू-पीस गाउन पहना था जिसमें वह और भी हॉट लग रही थीं।
चाय पीने के बाद रिंकी भाभी ने मुझसे कहा, “अब हमारा रिश्ता बदल गया है राजेश। मैं अब सिर्फ तुम्हारी भाभी नहीं, तुम्हारी प्रेमिका भी हूँ।”
मैंने उनके हाथ पकड़े और कहा, “हाँ रिंकी, मैं आपसे प्यार करता हूँ। हमेशा करता रहूँगा।”
फिर से एक बार मैं रिंकी भाभी से प्यार करने लगा।
उनके गालों पर किस करते हुए उनके गाउन की कोटी निकाल दी, उनके दूध दबाते हुए मैं रिंकी भाभी के गाल पर किस करने लगा।
कुछ देर बाद मेरा लंड फिर से खड़ा हो गया। इस बार मैंने रिंकी भाभी को पीछे घुमने को कहा।
जिस पर रिंकी भाभी बोलीं, “एक ही दिन में सब ले लोगे क्या?”
मैं समझ गया कि रिंकी भाभी मुझे धीरे-धीरे ही सब कुछ देंगी।
फिर से मैं रिंकी भाभी के ऊपर चढ़ गया और उनका गाउन ऊपर करके अपना लंड उनकी चूत में डाल दिया।
मैं उन्हें किस करते हुए धक्के लगाने लगा, रिंकी भाभी की चूत में अपना लंड अन्दर-बाहर करने लगा।
इस बार उनकी चुदाई का कार्यक्रम करीब बीस मिनट से ज्यादा चला होगा।
मैंने एक बार फिर से उनकी चूत में अपना वीर्य छोड़ दिया।
अब मैं और रिंकी भाभी दोनों ही चिपककर एक-दूसरे को प्यार करने लगे।
मैं उनके सारे शरीर को सहलाते हुए सो गया।
रिंकी भाभी ने सुबह पाँच बजे अलार्म लगाया था।
उस समय हम दोनों उठे और मैंने फिर से एक बार रिंकी भाभी की धमाकेदार चुदाई की।
रिंकी भाभी ने मुझसे कहा, “काफी सालों बाद मैं एक रात में तीन बार चुदी हूं।”
रिंकी भाभी को काफी अच्छा लग रहा था और मजा भी आया था।
फिर मैं अपने कपड़े पहनकर गेस्ट रूम में चला गया।
अगले दिन जब भैया माहेश आए, तब मैं सोया हुआ था।
लेकिन अब मैं और रिंकी भाभी रोज़ फोन पर बात करते हैं और जब भी मौका मिलता है, हम एक-दूसरे से मिलकर प्यार करते हैं।
मैंने रिंकी भाभी को अपनी प्रेमिका बना लिया है और वो भी मुझसे बहुत प्यार करती हैं।
हमारा ये रिश्ता अब जिंदगी भर चलेगा।
नोट: यहां पोस्ट की गई सभी कहानियां केवल मनोरंजन के उद्देश्य से प्रस्तुत की गई हैं। कृपया इन्हें वास्तविक जीवन से जोड़कर न देखें। कहानी में दर्शाए गए किसी भी दृश्य, घटना या चित्र का वास्तविक जीवन में प्रयोग करना हानिकारक हो सकता है। इसके लिए न तो कहानी के लेखक और न ही प्रस्तुतकर्ता जिम्मेदार होंगे। इसलिए कृपया अपनी समझ, बुद्धि और विवेक का उपयोग करें।
agr kushinagar(UP) mein kisi ladki ko chodwana hai to mujhe message kare. mere land ki size 6.4 inch hai
Very nice story 🙂