dada ji group chudai story
दादा जी ने मुझे अपनी रंडी बना लिया था। रोज वो मेरी चूत और गांड मारते थे। मैं उनके मोटे 8 इंच के लंड की दीवानी हो चुकी थी। मेरे पति राहुल का छोटा लंड अब मुझे पसंद ही नहीं आता था।
{अगर आपने पिछली कहानी नहीं पढ़ी है तो पहले वह पढ़ लें की कैसे दादा जी ने चोदकर मुझे रंडी बनायादे}
एक दिन दादा जी ने मुझे अपने पास बुलाया और कहा, “बहू, आज मैंने तुम्हारे लिए एक खास कार्यक्रम रखा है।”
मैंने पूछा, “क्या दादा जी?”
उन्होंने मुस्कुराते हुए कहा, “आज मेरे चार दोस्त आ रहे हैं। वो सब भी मेरी उम्र के हैं और सब के पास बहुत मोटे-मोटे लंड हैं। आज हम पाँचों मिलकर तुम्हें चोदेंगे। तुम्हें पूरी तरह से रंडी बनाएंगे।”
ये सुनकर मेरी चूत में पानी आ गया। मैंने कहा, “सच में दादा जी? पाँच लंड एक साथ?”
“हाँ बहू, आज तुम्हारी बुर, गांड और मुँह – तीनों एक साथ चोदे जाएंगे। तुम हवस की पूरी तरह से भुखी रंडी बन जाओगी।”
मैंने उनके पैर छुए और कहा, “आज मुझे पूरी तरह से नचाड़िए दादा जी। मैं आप सबकी रंडी हूँ।”
शाम को 5 बजे, दादा जी के चार दोस्त आए। उनके नाम थे – श्याम, राम, कृष्ण और गोविंद। सब की उम्र 70 साल के आसपास थी लेकिन सब बहुत फिट और तंदुरुस्त दिख रहे थे।
श्याम अंकल सबसे लंबे थे, 6 फीट 2 इंच के। उनका लंड मैंने बाद में देखा तो 9 इंच का था। राम अंकल थोड़े मोटे थे लेकिन उनका लंड सबसे मोटा था, लगभग 4 इंच चौड़ा। कृष्ण अंकल गोरे थे और उनका लंड 7.5 इंच का था। गोविंद अंकल ने सबसे ज्यादा बाल थे सफेद और उनका लंड भी 8 इंच का था।
दादा जी ने मुझे उनसे मिलवाया। मैंने उस दिन एकदम सेक्सी कपड़े पहने थे – गहरे गले का ब्लाउज जिसमें से मेरे आधे बूब्स दिख रहे थे, और छोटी स्कर्ट जिसमें से मेरी जांघें दिख रही थीं। अंदर मैंने ब्रा-पैंटी नहीं पहनी थी।
श्याम अंकल ने मुझे देखा और कहा, “वाह मोहन, तुम्हारी बहू तो एकदम माल है। इतनी जवान और सेक्सी।”
राम अंकल ने मेरे बूब्स को छुआ और कहा, “क्या मस्त चूचियाँ हैं। आज इन्हें खूब चूसूंगा।”
मैंने शर्माते हुए कहा, “आप सब मुझे जो चाहें कर सकते हैं। मैं आप सबकी रंडी हूँ आज।”
हम सब दादा जी के बड़े कमरे में गए। दादा जी ने बोतल खोली और सबको पिलाई। थोड़ी देर में सब नशे में हो गए।
श्याम अंकल ने मुझे अपनी गोद में बिठाया और मेरे बूब्स दबाने लगे। “आह्ह्ह… धीरे अंकल…” मैं सिसकी।
दूसरी तरफ राम अंकल ने मेरी स्कर्ट उठाई और मेरी नंगी चूत को देखा। “वाह, ये तो पूरी गीली हो चुकी है।”
“हाँ अंकल, आप सबके लंड देखकर मेरी चूत पानी छोड़ रही है।” मैंने कहा।
दादा जी ने अपने कपड़े उतारे और उनका मोटा लंड बाहर निकला। फिर एक-एक करके सबने अपने कपड़े उतारे। पाँच मोटे-मोटे लंड मेरे सामने थे। कुछ 7 इंच के, कुछ 8 इंच के, और श्याम अंकल का 9 इंच का।
मैंने एक-एक करके सबके लंड पकड़े और हिलाने लगी। फिर मैं श्याम अंकल के लंड को चूसने लगी। वो इतना मोटा था कि मेरे मुँह में आधा ही समा रहा था।
“चूसो बहू… अच्छे से चूसो…” श्याम अंकल मेरे सिर को पकड़कर अपना लंड अंदर-बाहर कर रहे थे।
फिर मैं राम अंकल के लंड को चूसने लगी। उनका लंड सबसे मोटा था, लगभग 4 इंच चौड़ा। मेरी जबान उसके टोपे को चाट रही थी।
एक-एक करके मैंने सबके लंड चूसे। कृष्ण अंकल का लंड बहुत गर्म था, और गोविंद अंकल के लंड पर बहुत नसें उभरी हुई थीं।
दादा जी ने कहा, “बहू, अब सबके लंड एक साथ चूसो।”
मैंने सबके लंड एक साथ पकड़े और बारी-बारी से चूसने लगी। पाँच मोटे लंड मेरे चेहरे के आसपास थे। मैं एक का चूसती, दूसरे को हाथ से हिलाती, तीसरे को अपनी चूचियों से मसलती।
“क्या रंडी है ये… बहुत अच्छा चूस रही है…” राम अंकल कह रहे थे।
अब दादा जी ने मुझे बेड पर लेटा दिया। उन्होंने मेरे पैर फैलाए और मेरी चूत में अपना लंड डाला।
“आह्ह्ह… हाँ दादा जी…” मैं चिल्लाई।
वो जोर-जोर से धक्के मारने लगे। मेरी चूत से फच-फच की आवाज आ रही थी। 5 मिनट बाद वो झड़ गए और मेरी चूत में अपना दूध छोड़ दिया।
फिर श्याम अंकल आए। उनका 9 इंच का लंड मेरी चूत में पूरा घुस गया। “आह्ह्ह… बहुत अंदर जा रहा है…” मैं चीखी।
श्याम अंकल ने मुझे घोड़ी बनाया और पीछे से चोदने लगे। उनका लंड मेरी चूत की गहराई तक जा रहा था। वो मेरी गांड पर थप्पड़ मारते हुए चोद रहे थे।
“मारो अंकल… मारो… मेरी चूत फाड़ दो…” मैं चिल्ला रही थी।
10 मिनट बाद वो भी झड़ गए।
फिर राम अंकल आए। उनका लंड इतना मोटा था कि मेरी चूत फटने लगी। “आह्ह्ह… धीरे अंकल… बहुत मोटा है…” मैं कराह रही थी।
लेकिन वो नहीं रुके। उन्होंने एक जोरदार धक्का मारा और पूरा लंड अंदर घुसा दिया। मेरी चूत पूरी तरह से फैल गई।
“क्या मस्त चूत है… बहुत टाइट है…” राम अंकल कह रहे थे।
वो मुझे 15 मिनट तक चोदते रहे। फिर कृष्ण अंकल और गोविंद अंकल ने भी मेरी चूत में अपना लंड डाला और चोदा।
एक-एक करके पाँचों ने मेरी चूत में अपना दूध छोड़ा। मेरी चूत पूरी तरह से वीर्य से भरी हुई थी।
अब दादा जी ने कहा, “अब इसकी गांड मारते हैं।”
उन्होंने मुझे घोड़ी बनाया और मेरी गांड पर थूक लगाया। फिर अपना लंड मेरी गांड के छेद पर रखा और धक्का मारा।
“आह्ह्ह… हाए माँ… बहुत दर्द हो रहा है…” मैं चीखी।
“सहलो बहू, थोड़ी देर में मजा आएगा…” दादा जी ने कहा और पूरा लंड अंदर घुसा दिया।
उनका मोटा लंड मेरी गांड में पूरा समा गया। वो जोर-जोर से धक्के मारने लगे। मेरी गांड की थप-थप की आवाज पूरे कमरे में गूंज रही थी।
फिर श्याम अंकल ने भी मेरी गांड मारी। उनका 9 इंच का लंड मेरी गांड में पूरा चला गया। मैं दर्द से चीख रही थी लेकिन मजा भी आ रहा था।
“मारो अंकल… मारो मेरी गांड… फाड़ दो इसे…” मैं पागल हो रही थी।
एक-एक करके सबने मेरी गांड मारी। मेरी गांड लाल हो चुकी थी और थोड़ी सूजी भी हुई थी। लेकिन मुझे बहुत मजा आ रहा था।
अब दादा जी ने कहा, “अब असली मजा दिखाते हैं। आज इसकी बुर, गांड और मुँह – तीनों एक साथ चोदेंगे।”
उन्होंने मुझे बेड पर लेटा दिया। राम अंकल मेरे नीचे आए और मेरी चूत में अपना लंड डाला। फिर दादा जी मेरी गांड में अपना लंड डाले। और श्याम अंकल ने अपना लंड मेरे मुँह में डाल दिया।
तीन मोटे लंड मेरे तीनों छेदों में थे। मैं पूरी तरह से भरी हुई थी। तीनों एक साथ धक्के मारने लगे।
“आह्ह्ह… हाए… बहुत मजा आ रहा है…” मैं सिसक रही थी लेकिन मुँह में लंड होने के कारण मेरी आवाज़ दब रही थी।
तीनों जोर-जोर से चोद रहे थे। मेरी चूत, गांड और मुँह – तीनों एक साथ चोदे जा रहे थे। मैं पहली बार इतना मजा ले रही थी।
फिर उन्होंने पोजीशन बदली। कृष्ण अंकल ने मेरी चूत में लंड डाला, गोविंद अंकल ने गांड में, और राम अंकल ने मुँह में। फिर से तीनों एक साथ चोदने लगे।
मैं झड़ चुकी थी लेकिन वो रुके नहीं। वो मुझे लगातार चोदे जा रहे थे।
अब दादा जी ने कहा, “अब हम पाँचों एक साथ इसे चोदेंगे।”
उन्होंने मुझे बेड पर बैठाया। मैंने अपने पैर फैलाए। दादा जी मेरी चूत में लेटे और अपना लंड डाला। श्याम अंकल मेरी गांड में आए। राम अंकल ने अपना लंड मेरे मुँह में डाला। और कृष्ण और गोविंद अंकल ने अपने लंड मेरे दोनों हाथों में पकड़ा दिए।
पाँच मोटे लंड मेरे पाँवों में थे – चूत में एक, गांड में एक, मुँह में एक, और दोनों हाथों में एक-एक। मैं पूरी तरह से रंडी बन चुकी थी।
पाँचों एक साथ धक्के मारने लगे। मैं पागल हो रही थी। मेरे सभी छेदों में लंड घुसे हुए थे।
“आह्ह्ह… मारो… मारो सब मिलकर… मैं आप सबकी रंडी हूँ… मुझे फाड़ डालो…” मैं चिल्ला रही थी।
वो 20 मिनट तक मुझे इसी तरह चोदते रहे। मैं चार-पाँच बार झड़ चुकी थी। मेरी चूत और गांड से पानी बह रहा था।
अंत में वो सब एक साथ झड़ने वाले थे। दादा जी ने अपना दूध मेरी चूत में निकाला। श्याम अंकल ने मेरी गांड में। राम अंकल ने मेरे मुँह में। और कृष्ण और गोविंद अंकल ने मेरे चेहरे और बूब्स पर अपना दूध छोड़ा।
मैं पूरी तरह से वीर्य से लथपथ हो चुकी थी। मेरे चेहरे पर, बूब्स पर, चूत में, गांड में – हर जगह उनका गाढ़ा दूध भरा हुआ था।
चुदाई खत्म होने के बाद, मैं बेड पर गिर गई। मेरी हालत खराब हो चुकी थी। मेरी चूत और गांड दोनों लाल और सूजी हुई थीं।
दादा जी ने मुझे उठाया और बाथरूम में ले गए। उन्होंने मुझे नहलाया और मेरी चूत और गांड की सफाई की। वो बहुत प्यार से मेरे शरीर को सहला रहे थे।
“कैसा लगा बहू?” दादा जी ने पूछा।
“बहुत अच्छा लगा दादा जी। मैं आप सबकी रंडी बनकर बहुत खुश हूँ।” मैंने कहा।
श्याम अंकल ने कहा, “तुम बहुत अच्छी चुदवाती हो। अब हम रोज आएंगे तुम्हें चोदने।”
“हाँ अंकल, आप सब रोज आइए। मैं रोज आप सबका इंतजार करूँगी।” मैंने कहा।
राम अंकल ने मेरे बूब्स दबाते हुए कहा, “तुम्हारी चूत और गांड बहुत टाइट हैं। मजा आ गया।”
कृष्ण अंकल ने कहा, “कल फिर से मिलते हैं। तब तक अपनी चूत और गांड को तैयार रखना।”
गोविंद अंकल ने मेरे होठों पर किस किया और कहा, “तुम्हारा मुँह भी बहुत अच्छा है। मजा आया चुसवाने में।”
उस दिन के बाद, दादा जी के चारों दोस्त रोज आने लगे। कभी-कभी तो सुबह भी आ जाते और मुझे चोदकर जाते।
मैं रोज सुबह उठकर नहाती और सेक्सी कपड़े पहनकर इंतजार करती। जैसे ही वो आते, मैं उनके लंड चूसती और फिर वो मेरी चूत, गांड और मुँह चोदते।
कभी-कभी वो मुझे बाहर भी ले जाते। एक बार उन्होंने मुझे एक होटल में ले जाकर पूरी रात चोदा। पाँचों मिलकर मुझे अलग-अलग पोजीशन में चोदते रहे।
मेरी जिंदगी अब पूरी तरह से बदल चुकी थी। मैं दिन में 5-6 बार चुदती थी। मेरी चूत हमेशा लंड की प्यासी रहती थी।
मेरे पति राहुल को कुछ पता नहीं था। वो सोचते थे कि मैं घर में अकेली बोर होती हूँ लेकिन असल में मैं पाँच बूढ़ों की रंडी बनकर खुश थी।
दादा जी ने मुझे सच में एक पूरी रंडी बना दिया था। मैं अब किसी भी लंड से चुदवा लेती थी। मेरी बुर, गांड और मुँह – तीनों हमेशा तैयार रहते थे।
एक दिन दादा जी ने कहा, “बहू, आज हम तुम्हें एक विशेष जगह ले चलेंगे।”
वो मुझे एक फार्महाउस पर ले गए। वहाँ पहले से ही 10 और बूढ़े लोग इंतजार कर रहे थे। वो सब दादा जी के दोस्त थे। ये कहानी डिटेल में फिर कभी बताऊंगी…
“आज इन सबसे भी चुदवाओगी।” दादा जी ने कहा।
मैंने कहा, “ठीक है दादा जी, आज मैं सबकी रंडी बनूँगी।”
उस दिन 15 बूढ़ों ने मुझे चोदा। सबने मेरी चूत, गांड और मुँह चोदा। मैं पूरी तरह से थक गई लेकिन बहुत खुश थी।
अब मैं एक पूरी रंडी बन चुकी हूँ। दादा जी ने मुझे सच में रंडी बना दिया है। मेरी चूत हमेशा लंड की प्यासी रहती है और मैं हर रोज कई-कई बार चुदती हूँ।
मैं खुश हूँ कि मैं दादा जी और उनके दोस्तों की रंडी बन गई हूँ।
NEXT PART: रंडी बनकर 10 लोगों के साथ गैंगबैंग करायी
- मैंने आलिया को छोटे लंड से चोदकर अपना बनाया
- मेरे कलुआ विदेशी बालम का 11 इंच का लौड़ा
- पड़ोस में आई बाहरी लड़की की बुर चुदाई करके अपना बनाया
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Wow Dada ji, mast chudai bhai