indian sexy girl chudai kahani
एक समुद्र तटीय गाँव में रहने वाला एक युवक जो अपने पिता के रेस्टोरेंट में काम करता था, उसकी मुलाकात एक बाहरी लड़की से होती है जो अपने रिश्तेदारों के यहाँ छुट्टियाँ बिताने आती है। धीरे-धीरे उनके बीच प्यार हो जाता है और एक रात जब वो अकेले होते हैं, वो एक-दूसरे के शरीर का मज़ा लेते हैं। जानिए कैसे दो युव दिलों की मुलाकात शारीरिक आकर्षण से शुरू होकर सच्चे प्यार में बदल जाती है और कैसे वो अपनी ज़िंदगी एक साथ बिताने का फैसला करते हैं। यह कहानी प्यार, वासना और समर्पण की है।
गोवा के एक शांत समुद्र तटीय गाँव में किशोर अपने परिवार के साथ रहता था।
उसकी उम्र इक्कीस साल थी, कद पाँच फुट नौ इंच का और रंग गेहुँआ।
वह अपने पिता के समुद्र तटीय रेस्टोरेंट में मदद करता था और सुबह-शाम समुद्र के किनारे टहलना उसकी आदत थी।
उसका घर एक पुराने अंग्रेज़ों के जमाने की बंगले में था जहाँ से समुद्र का नीला दरिया साफ़ दिखता था।
जून का महीना था और पर्यटकों की भीड़ बढ़ने लगी थी।
किशोर के पड़ोस में जो पुराना खाली बंगला महीनों से बंद पड़ा था, उसमें अचानक जान आ गई।
एक शाम जब किशोर समुद्र तट पर लौट रहा था तो उसने देखा कि एक टैक्सी से एक लड़की उतरी।
वह लड़की इतनी खूबसूरत थी कि किशोर ठिठक कर रह गया। उसने पहली बार इतनी हसीन लड़की देखी थी।
वह लड़की निशा थी।
उसकी उम्र उन्नीस साल थी, कद पाँच फुट छह इंच का और रंग एकदम गोरा जैसे किसी ने दूध में हल्दी मिलाकर उसके शरीर पर लगा दिया हो।
उसके बाल कमर तक लंबे, घने और काले थे जिन्हें उसने खुला छोड़ रखा था। लेकिन जो चीज़ किशोर को सबसे ज़्यादा आकर्षित करती थी वो था उसका बदन।
उसके स्तन चौंतीस इंच के गोल और उभरे हुए थे जो उसकी टाइट टी-शर्ट में साफ़ उभर रहे थे।
उसकी कमर छब्बीस इंच की इतनी पतली थी कि हाथ रखते ही उँगलियाँ मिल जातीं और उसकी गांड छत्तीस इंच की गोल और भरी हुई थी जो उसकी शॉर्ट्स में से साफ़ दिख रही थी।
निशा दिल्ली से आई थी और अपने चाचा-चाची के यहाँ गर्मी की छुट्टियाँ बिताने आई थी।
उसके चाचा का बंगला किशोर के घर के ठीक बगल में था।
पहले दिन ही जब किशोर ने उसे देखा तो उसका दिल ज़ोर-ज़ोर से धड़कने लगा।
वो रात भर निशा के बारे में सोचता रहा और उसकी खूबसूरती उसके दिमाग़ से नहीं जा रही थी।
अगले दिन सुबह किशोर जब समुद्र तट पर जा रहा था तो उसकी नज़र निशा से मिली।
वह समुद्र के किनारे टहल रही थी और सफ़ेद रंग की फ्रॉक पहने हुए थी जिसमें उसके गोरे पैर और भरी हुई जाँघें दिख रही थीं।
किशोर ने उसे देखा और वो भी उसे देखकर मुस्कुरा दी।
वह मुस्कान इतनी मादक थी कि किशोर का दिल उसी पल हार गया।
धीरे-धीरे उनकी मुलाकातें बढ़ने लगीं। कभी सुबह समुद्र तट पर, कभी शाम को बाज़ार में।
किशोर ने एक दिन हिम्मत करके उससे बात की।
उसने पता चला कि निशा कॉलेज में पढ़ती है और उसे समुद्र से बहुत लगाव है।
किशोर ने उसे समुद्र तट के बारे में बताया, कहाँ तैराकी अच्छी है, कहाँ सूर्यास्त सबसे खूबसूरत दिखता है।
एक शाम जब सूरज समुद्र में डूब रहा था, किशोर और निशा एक चट्टान पर बैठे थे।
नारंगी रोशनी में निशा का चेहरा इतना खूबसूरत लग रहा था कि किशोर उसे देखता ही रह गया।
निशा ने शरमा कर पूछा, “क्या देख रहे हो?”
किशोर ने कहा, “तुम्हें… तुम बहुत खूबसूरत हो।”
निशा ने गालों पर हाथ रखते हुए कहा, “पागल…”
लेकिन वो दोनों जानते थे कि उनके बीच कुछ हो रहा है।
वो एक-दूसरे को देखकर मुस्कुराते, आँखें चुराते, और फिर से एक-दूसरे को ढूँढते।
किशोर को निशा की हर अदा पसंद आने लगी थी।
जब वो हँसती थी तो उसके गालों पर गड्ढे पड़ जाते, जब वो समुद्र में पैर डुबाती थी तो उसकी स्कर्ट ऊपर उठ जाती और उसकी गोरी जाँघें दिखतीं। किशोर का दिल उसी पल धड़कता और उसका लंड खड़ा हो जाता।
निशा भी किशोर को पसंद करने लगी थी। उसे उसकी ईमानदारी और सरलता भाती थी।
वो उसकी बातों में खो जाती, उसकी आँखों में समुद्र की गहराई देखती।
एक रात जब चाँद पूरा था और समुद्र की लहरें शांत थीं,
निशा ने किशोर से कहा, “मुझे तुम्हारे साथ वक़्त बिताना अच्छा लगता है।”
किशोर ने उसका हाथ पकड़ लिया और कहा, “मैं तो हर वक़्त तुम्हारे साथ रहना चाहता हूँ।”
उनके बीच का रिश्ता अब प्यार में बदलने लगा था।
वो रोज़ मिलते, समुद्र तट पर घंटों बैठते, एक-दूसरे के हाथ पकड़कर चलते।
किशोर ने एक दिन निशा को अपने घर की छत पर ले जाया जहाँ से पूरा समुद्र दिखता था।
वहाँ उसने पहली बार उसे किस किया। निशा ने भी पूरा साथ दिया।
उनके होंठ एक-दूसरे से मिले तो दोनों को ऐसा लगा जैसे बिजली सी दौड़ गई हो।
वो बीस मिनट तक एक-दूसरे के होंठ चूसते रहे, एक-दूसरे की जीभ को चूसते रहे।
लेकिन किशोर का मन अब और भी कुछ चाहता था।
वो निशा के शरीर को छूना चाहता था, उसके स्तनों को महसूस करना चाहता था, उसकी चूत को चोदना चाहता था।
और निशा भी यही चाहती थी लेकिन शर्म के कारण कुछ कह नहीं पा रही थी।
एक रात जब निशा के चाचा-चाची किसी शादी में गए हुए थे, निशा ने किशोर को फोन किया और अपने घर बुलाया।
किशोर समझ गया कि आज वो दिन है जिसका उसे इंतज़ार था।
उसने अपने कमरे से एक कंडोम का पैकेट उठाया और निशा के घर चला गया।
निशा ने दरवाज़ा खोला तो वह एकदम हल्के कपड़ों में थी।
उसने गुलाबी रंग की नाइटी पहनी हुई थी जो उसके घुटनों तक थी और कंधे खुले थे।
किशोर ने जैसे ही दरवाज़ा बंद किया, उसने निशा को अपनी बाहों में भर लिया और ज़ोर से किस करने लगा।
निशा भी उसे कसकर पकड़ ली और उसके बालों में उँगलियाँ फेरने लगी।
किशोर ने उसकी नाइटी ऊपर उठानी शुरू की और निशा ने भी उसकी टी-शर्ट उतार दी।
अब किशोर बिना शर्ट के था और निशा की नाइटी उसके कमर तक आ गई थी।
किशोर ने उसे गोद में उठाया और बेडरूम में ले गया जहाँ मोमबत्तियाँ जल रही थीं और कमरे में हल्की सुगंध थी।
उसने निशा को बिस्तर पर लिटाया और उसके ऊपर आ गया। वो उसके गले पर, कंधों पर, हाथों पर चूमने लगा।
फिर वो उसके स्तनों पर आया। निशा ने ब्रा नहीं पहनी थी और उसके निप्पल नाइटी के नीचे से खड़े हो रहे थे।
किशोर ने एक हाथ से उसके स्तन को दबाना शुरू किया और दूसरे को मुँह में लेकर चूसने लगा।
“आहह किशोर… धीरे… दर्द हो रहा है…” निशा सिसकी।
किशोर ने धीरे से उसकी नाइटी उतार दी। अब निशा सिर्फ़ पैंटी में थी।
उसके स्तन गोल और कड़े थे, निप्पल गुलाबी और खड़े हुए थे।
किशोर ने एक स्तन को मुँह में लिया और चूसने लगा, दूसरे को हाथ से मसलने लगा।
वो निप्पल को अपने दाँतों से हल्का-हल्का काट रहा था जिससे निशा के मुँह से मादक आवाज़ें निकल रही थीं।
“आहह… हम्म्म… और ज़ोर से चूसो… मज़ा आ रहा है…” निशा कराही।
किशोर ने उसकी पैंटी भी उतार दी। निशा की चूत बिल्कुल साफ़ थी, थोड़ी सी झाँटें थीं लेकिन गुलाबी और चिकनी।
उसकी चूत से पहले से ही पानी निकल रहा था जो उसकी गोरी जाँघों पर बह रहा था।
किशोर ने उसके पैर फैलाए और उसकी जाँघों पर चूमना शुरू किया। वो धीरे-धीरे ऊपर बढ़ा और फिर उसकी चूत पर जीभ लगाई।
“ओह माँ… यह क्या कर रहे हो… आहह…” निशा काँप उठी।
किशोर ने उसकी चूत को चाटना शुरू कर दिया।
वो उसकी चूत की दरार में जीभ घुसा रहा था, कभी ऊपर से नीचे तक चाटता, कभी चूत के छेद में जीभ डाल देता।
निशा पागल हो रही थी, उसने बिस्तर की चादर को कसकर पकड़ लिया और अपनी कमर उठा-उठाकर किशोर के मुँह पर दबाने लगी।
“आहह… और ज़ोर से चाटो… मेरी जान… मैं झड़ने वाली हूँ…” निशा चिल्लाई।
किशोर ने उसकी क्लिटोरिस को अपने होठों में लेकर चूसना शुरू किया और साथ में दो उँगलियाँ उसकी चूत में डाल दीं।
निशा तड़प उठी और कुछ ही देर में झड़ गई।
उसकी चूत से पानी निकलकर किशोर के मुँह में आ गया जिसे उसने पी लिया।
अब निशा की बारी थी। उसने किशोर को लिटाया और उसकी पैंट उतार दी।
किशोर का लंड सात इंच लंबा और काफ़ी मोटा था, बिल्कुल लोहे की रॉड की तरह कड़ा खड़ा था।
निशा ने उसे हाथ में लिया और सहलाया। फिर उसने उसे अपने मुँह में ले लिया और चूसने लगी।
वो उसे आगे-पीछे कर रही थी और कभी-कभी नीचे की त्वचा को पीछे करके गुलाबी सिरे को चाटती।
किशोर ने उसके सिर को पकड़कर अपने लंड पर दबाना शुरू किया और उसके मुँह में पूरा लंड अंदर-बाहर करने लगा।
निशा को थोड़ी तकलीफ़ हो रही थी लेकिन वो चूसती रही।
लगभग पंद्रह मिनट तक मुँह चुदाई के बाद किशोर ने उसे रोकते हुए कहा, “अब मैं तुम्हें चोदना चाहता हूँ।”
निशा ने कहा, “हाँ लेकिन धीरे से… मैं पहली बार कर रही हूँ… मेरा लंड कभी किसी ने नहीं लिया है…”
किशोर ने उसे घोड़ी बनने को कहा।
निशा घुटनों और हाथों के बल हो गई।
उसकी गांड इतनी गोल और सुंदर थी कि किशोर का मन किया उसे भी चोदे लेकिन पहले उसने उसकी चूत को चोदने का फैसला किया।
उसने उसकी चूत में थूक लगाया और अपने लंड का सुपड़ा उसके मुँह पर रखा। एक धक्के में आधा लंड अंदर चला गया।
“आहह… दर्द हो रहा है… रुको…” निशा चीखी।
किशोर ने रुककर उसकी कमर सहलाई और फिर एक ज़ोरदार धक्का दिया।
पूरा लंड अंदर समा गया। निशा की आँखों से आँसू निकल आए और वो दर्द से कराह उठी लेकिन वो सहती रही।
किशोर ने उसके बाल पकड़े और पीछे से ज़ोर-ज़ोर से धक्के लगाने शुरू कर दिए। पूरा कमरा “पच पच” की आवाज़ों से गूँज उठा।
“आहह… हाँ… और ज़ोर से चोदो… फाड़ दो मेरी बुर को…” निशा चिल्ला रही थी।
किशोर ने लगभग बीस मिनट तक उसे इसी पोज़िशन में चोदा।
उसकी गांड थपथपा रही थी और वो उसे कसकर मार रहा था।
फिर उसने उसे लिटाया और मिशनरी पोज़िशन में आ गया।
उसने निशा के पैर अपने कंधों पर रखे और फिर से चोदना शुरू किया।
इस बार लंड और भी गहरा जा रहा था। निशा की चूत से खून निकल रहा था क्योंकि वो पहली बार चुद रही थी।
“आहह… मर गई… बहुत मज़ा आ रहा है…” निशा कराही।
किशोर ने उसके स्तनों को मसलते हुए चोदना जारी रखा।
उसके निप्पल कड़े हो गए थे और वो उन्हें काट-काट कर खेल रहा था।
फिर उसने कहा, “मैं झड़ने वाला हूँ… कहाँ निकालूँ?”
“अंदर ही डाल दो… मैं गोली खा रही हूँ…” निशा ने कहा।
किशोर ने कुछ और तेज़ धक्के लगाए और फिर अपना सारा वीर्य निशा की चूत में ही छोड़ दिया।
वो भी निशा के साथ झड़ गई। वो दोनों एक-दूसरे की बाहों में पड़े रहे।
कुछ देर बाद किशोर का लंड फिर से खड़ा हो गया।
इस बार उसने निशा से कहा, “मैं तुम्हारी गांड मारना चाहता हूँ।”
निशा ने मना किया, “नहीं किशोर, मैंने कभी गांड नहीं मरवाई। बहुत दर्द होगा।”
“बस एक बार करने दो। तुम्हें बहुत मज़ा आएगा,” किशोर ने कहा।
निशा ने आख़िरकार मान लिया।
किशोर ने उसे घोड़ी बनाया और उसकी गांड पर थूक लगाया।
उसने अपने लंड पर भी थूक लगाया और फिर धीरे से सुपड़ा अंदर डालने की कोशिश की।
निशा की गांड बहुत टाइट थी। किशोर ने एक ज़ोरदार धक्का दिया और आधा लंड अंदर चला गया।
“आहह… माँ… मर गई… बहुत दर्द हो रहा है…” निशा ज़ोर-ज़ोर से रोने लगी।
किशोर रुका नहीं। उसने एक और धक्का दिया और पूरा लंड अंदर समा गया।
निशा की गांड से खून निकलने लगा। किशोर ने उसके मुँह में तकिया दबा दिया और फिर ज़ोर-ज़ोर से धक्के लगाने लगा।
कुछ देर बाद निशा को भी मज़ा आने लगा। वो अब “हाँ… हाँ… और ज़ोर से…” कहने लगी।
किशोर ने उसके स्तनों को पीछे से पकड़ा और कसकर मसलते हुए गांड मारी।
लगभग पंद्रह मिनट बाद उसने अपना वीर्य निशा की गांड में ही छोड़ दिया।
उस रात किशोर ने निशा को तीन बार और चोदा।
एक बार बाथरूम में खड़े होकर, एक बार सोफे पर और एक बार रसोई में।
निशा पूरी तरह से थक चुकी थी लेकिन बहुत खुश थी।
अगले दिन जब निशा के चाचा-चाची आए तो उन्होंने देखा कि निशा बहुत खुश और चमक रही है।
उन्हें पता नहीं चला कि रात भर उनकी भतीजी किशोर के लंड का मज़ा ले रही थी।
निशा की छुट्टियाँ खत्म होने वाली थीं और उसे दिल्ली वापस जाना था।
किशोर उदास था लेकिन निशा ने उसे कहा, “मैं अगले साल फिर आऊँगी और तब हम शादी कर लेंगे। मैं तुम्हारे बिना नहीं रह सकती।”
किशोर ने उसे गले लगा लिया और कहा, “मैं भी तुम्हारे बिना नहीं रह सकता। मैं दिल्ली तुम्हारे घर आऊँगा।”
निशा चली गई लेकिन उनका प्यार और भी गहरा हो गया।
वो रोज़ फोन पर बात करते और फोन सेक्स करते।
दो महीने बाद किशोर दिल्ली गया और निशा के घर उसके माता-पिता से मिला।
उसने निशा के पिता से उसका हाथ माँगा और वो राज़ी हो गए।
छह महीने बाद किशोर और निशा की शादी हो गई।
वो अब गोवा में ही रहते हैं और उनका एक छोटा सा रेस्टोरेंट है।
रात को जब समुद्र शांत होता है तो वो एक-दूसरे को चोदते हैं और अपने प्यार को मज़बूत करते हैं।
निशा अब हर रात किशोर के लंड का मज़ा लेती है और किशोर उसकी चूत और गांड दोनों को चोदता है।
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Beautiful story 🙂🙂