साली और सलहज को बीवी के बेड पर चोदा

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नमस्ते दोस्तों, मैं अर्जुन मल्होत्रा फिर से हाजिर हूं अपनी कहानी के तीसरे भाग के साथ!

जैसा कि मैंने पिछली कहानी में बताया था, गांव से वापसी के बाद तिया भी हमारे साथ शहर आ गई थी कुछ दिनों के लिए।

{जैसा कि मैंने पहली कहानी मेरी सलहज की प्यासी जवानी में वादा किया था कि कैसे मेरी सलहज और उसकी बहन मुझसे रंडियों जैसे चुदवाई।} अब आगे पढ़ें …

उसके पति का फोन आया था कि वो अभी और 3 महीने विदेश में ही रहेंगे, इसलिए तिया ने सोचा कि शहर में रहकर कुछ काम सीख लेती है या फिर समय बिता लेती है।

मेरी सास ने उसे हमारे घर में रहने की पेशकश की, क्योंकि हमारे घर में एक अतिरिक्त कमरा था जो खाली पड़ा रहता था।

यह बात उसी हफ्ते की है जब हम गांव से वापस आए थे।

मेरा दिल तो खुशी से झूम रहा था क्योंकि मुझे पता था कि अब मेरे पास दो-दो मालिश करने वाली होंगी।

अनन्या तो पहले से ही मेरे साथ थी, और अब तिया भी।

मेरी पत्नी जिया को तो कुछ पता नहीं था, वो तो बस अपनी बहन और बहन की सहेली को मेहमान समझकर रख रही थी।

घर की व्यवस्था यह थी – नीचे एक बड़ा हॉल, एक किचन, और एक मेहमान कमरा।

ऊपर दो बेडरूम – एक में मैं और मेरी पत्नी जिया सोते थे, और दूसरे में अनन्या (बड़ी) सोती थी जब वो आती थी।

लेकिन अब तिया को भी रखना था, इसलिए मेरी पत्नी ने सोचा कि तिया अनन्या के साथ उस कमरे में सोएगी।

लेकिन मैंने एक योजना बनाई। मैंने अनन्या से कहा कि वो तिया को समझाए कि रात को वो मेरे साथ सोए, और अनन्या मेरी पत्नी के साथ सोए।

यह बहाना बनाया गया कि मेरी पत्नी को कुछ दिनों से नींद नहीं आ रही है और अनन्या उसे कहानी सुनाकर सुलाएगी।

इस तरह तिया मेरे कमरे में आ जाएगी।

पहली रात जब यह व्यवस्था हुई तो मेरी पत्नी जिया थोड़ी हैरान हुई लेकिन मैंने कहा कि मैं सोफे पर सो जाऊंगा और तिया बेड पर सोएगी।

वो मान गई। लेकिन रात को जब सब सो गए तो मैंने सोफे से उठकर बेड पर चले जाना था।

रात के करीब 11 बजे थे। मेरी पत्नी जिया और अनन्या (बड़ी) दूसरे कमरे में चली गईं।

मैंने देखा कि तिया नाइटी पहनकर मेरे कमरे में आई।

वो हल्की गुलाबी रंग की नाइटी पहने हुए थी जो उसके गोरे बदन पर बहुत सुंदर लग रही थी।

उसके बाल गीले थे, शायद अभी नहाकर आई थी।

वो शर्माते हुए बोली – “ननदोईजी, मैं यहां सोऊंगी? आप कहां सोएंगे?”

मैंने कहा – “मैं भी यहीं सोऊंगा। डरो मत, मैं तुम्हें कुछ नहीं करूंगा।”

वो मुस्कुराई और बेड पर बैठ गई।

मैंने लाइट बंद कर दी और अंधेरे में बेड पर लेट गया।

हम दोनों के बीच थोड़ी दूरी थी, लेकिन मैं धीरे-धीरे उसकी तरफ सरकने लगा।

तिया भी मेरी तरफ मुड़ गई और बोली – “ननदोईजी, गांव में जो हुआ वो सिर्फ एक बार था ना? फिर कभी नहीं होगा?”

मैंने समझा कि वो क्या चाहती है।

मैंने कहा – “अगर तुम चाहो तो रोज हो सकता है।”

वो चुप हो गई। मैंने अपना हाथ बढ़ाया और उसकी कमर पर रख दिया।

वो नहीं हटी। मैंने धीरे से उसे अपनी तरफ खींच लिया। अब वो मेरे बगल में थी, उसकी सांसें मेरे चेहरे पर महसूस हो रही थीं।

मैंने उसके होंठ चूमने की कोशिश की। वो पहले तो पीछे हटी लेकिन फिर वो भी मेरे होंठों से लिपट गई।

हमारे होंठ मिले और हम एक-दूसरे को चूमने लगे। उसके होंठ इतने नरम थे, इतने रसीले, कि मैं उन्हें छोड़ना नहीं चाहता था।

मैंने धीरे से उसकी नाइटी ऊपर उठानी शुरू की। उसने नीचे से कुछ नहीं पहना था।

मेरा हाथ उसकी चूत पर पहुंचा तो मैंने महसूस किया कि वो पहले से ही गीली हो चुकी थी। वो मेरे स्पर्श से कांप उठी।

मैंने उसकी नाइटी पूरी तरह उतार दी। अब वो मेरे सामने पूरी नंगी लेटी थी।

चांदनी रात थी और खिड़की से चांद की रोशनी आ रही थी जिसमें उसका बदन चांदी की तरह चमक रहा था।

उसके बूब्स पूर्ण गोल थे, निप्पल गुलाबी और कड़े हो चुके थे।

मैंने उसके बूब्स पर हाथ फिराया। वो “आह…” करके मेरी तरफ और करीब आ गई।

मैंने एक चूची मुंह में ले ली और चूसने लगा। वो अपने हाथों से मेरे सिर को दबा रही थी, मुझे और जोर से अपने सीने से लगा रही थी।

मैंने दूसरी चूची भी चूसी। फिर मैं नीचे उतरता गया, उसके पेट को चूमा, नाभि में जीभ घुमाई, और फिर उसकी चूत पर पहुंच गया।

उसकी चूत बिल्कुल साफ थी, एक भी बाल नहीं था। मैंने उसकी चूत को चूमना शुरू किया।

वो अपनी टांगें फैला दी और मेरे सिर को पकड़कर अपनी चूत पर दबाने लगी।

मैंने अपनी जीभ निकाली और उसकी चूत की दरार में घुमाना शुरू कर दिया।

वो “ऊह… आह… हां…” की आवाजें निकाल रही थी।

मैंने उसकी चूत के दाने को मुंह में लेकर चूसना शुरू किया। वो पागल हो गई, उसकी कमर हवा में उठने लगी।

मैंने एक उंगली उसकी चूत में डाल दी। वो इतनी टाइट थी कि उंगली को जकड़ लिया।

मैंने उंगली अंदर-बाहर करनी शुरू की और साथ में चूत को भी चाटता रहा।

5 मिनट में ही वो झड़ गई। उसका पानी मेरे मुंह पर निकला और मैंने उसे पी लिया।

वो थककर लेट गई। मैंने अपने कपड़े उतारे और अपना लौड़ा उसके हाथ में दे दिया।

वो उसे सहलाने लगी और फिर मुंह में लेकर चूसने लगी। उसने गांव में भी चूसा था लेकिन अब और अच्छे से चूस रही थी, जैसे उसे अनुभव हो गया हो।

मैंने उसे घोड़ी बनने को कहा। वो उठी और घुटनों के बल हो गई, उसकी गांड हवा में थी।

मैंने उसकी चूत में अपना लौड़ा घुसाया। वो “आह…” करके चिल्लाई। मैंने धीरे-धीरे धक्के मारने शुरू किए।

वो अपनी गांड पीछे की तरफ धकेल रही थी, मेरा साथ दे रही थी।

मैंने उसकी कमर पकड़ी और जोर-जोर से चोदने लगा।

बेड की चरचराहट की आवाज आ रही थी लेकिन मुझे डर नहीं था क्योंकि दूसरा कमरा दूर था।

10 मिनट तक मैंने उसकी चूत मारी। फिर मैंने लौड़ा बाहर निकाला और उसकी गांड पर तेल लगाया।

वो समझ गई कि मैं क्या करने वाला हूं। वो बोली – “धीरे से ननदोईजी, दर्द होगा।”

मैंने धीरे से अपना सुपाड़ा उसकी गांड में डाला। वो दर्द से कराह उठी।

मैंने रुककर उसकी पीठ सहलाई और फिर धक्का दिया। आधा लौड़ा अंदर चला गया। वो रोने लगी – “बहुत दर्द हो रहा है।”

मैंने रुककर उसकी चूत सहलाई और फिर धीरे-धीरे अंदर-बाहर करने लगा।

कुछ देर में उसे मजा आने लगा और वो भी साथ देने लगी। मैंने पूरा लौड़ा अंदर डाल दिया और जोर-जोर से गांड मारने लगा।

वो “आह… हां… और जोर से…” कह रही थी। मैंने 15 मिनट तक उसकी गांड मारी और फिर अपना गर्म माल उसकी गांड में ही छोड़ दिया। वो भी झड़ चुकी थी।

हम दोनों थककर लेट गए।

थोड़ी देर बाद उसने कहा – “ननदोईजी, आप बहुत अच्छे हो। मेरी पति तो कभी इतना मजा नहीं देते।”

मैंने कहा – “अब तो मैं हूं ना। जब तक तुम यहां हो, रोज मजा दूंगा।”

अगली सुबह जब मैं उठा तो तिया पहले से ही जाग चुकी थी और नाश्ता बना रही थी।

मेरी पत्नी जिया और अनन्या (बड़ी) भी उठ चुकी थीं। अनन्या ने मुझे आंख मारी और पूछा – “रात को मजा आया?”

मैंने हां में जवाब दिया। वो मुस्कुराई।

दिन भर तो सब काम में व्यस्त रहे। लेकिन शाम को जब मेरी पत्नी और सास बाजार गईं, तो मैं, अनन्या और तिया घर पर अकेले थे।

यह मौका था तीनों के साथ मजे करने का।

मैंने दरवाजा बंद कर दिया और दोनों को अपने कमरे में ले गया। मैंने कहा – “आज हम तीनों साथ में करेंगे।”

अनन्या ने कहा – “मैं तो तैयार हूं। तिया, तू भी तैयार है ना?”

तिया ने शर्माते हुए हां कहा। मैंने दोनों को बेड पर बिठाया और उनकी नाइटी उतार दी।

दोनों बहनें पूरी नंगी मेरे सामने थीं। एक सांवली, एक गोरी। दोनों की चूतें गीली थीं।

मैंने अनन्या की चूत चाटनी शुरू की और तिया के बूब्स चूसने लगा।

दोनों आवाजें निकाल रही थीं। फिर मैंने दोनों को 69 की पोजीशन में लेटाया – एक दूसरे की चूत चाटने के लिए।

वो दोनों एक-दूसरी की चूत चाटने लगीं। यह देखकर मेरा लौड़ा फटने को हो रहा था।

मैंने अनन्या की गांड में लौड़ा डाला और वो चाटते-चाटते चिल्लाई। लेकिन फिर वो मजे लेने लगी।

मैंने अनन्या की गांड मारी जबकि वो तिया की चूत चाट रही थी। तिया भी झड़ने वाली थी।

फिर मैंने लौड़ा बाहर निकाला और तिया की चूत में डाल दिया।

अब अनन्या उसकी चूत चाट रही थी और मैं चोद रहा था।

हम तीनों इस तरह 20 मिनट तक मजे किए।

फिर मैंने अपना माल तिया की चूत में छोड़ दिया और अनन्या ने उसे चाट-चाट कर साफ किया।

यह हमारा रोज का काम हो गया। रात को तिया मेरे साथ सोती, दिन को जब मौका मिलता तीनों मिलकर करते।

यह सिलसिला एक महीने तक चला।

एक दिन मेरी पत्नी जिया ने मुझे शक की नजर से देखा।

उसने कहा – “तुम और तिया बहुत घुलने-मिलने लगे हो।”

मैंने डरकर कहा – “नहीं तो, वो तो बस मेहमान है इसलिए ध्यान रखता हूं।”

वो कुछ नहीं बोली लेकिन मुझे लगा कि उसे कुछ-कुछ पता चल गया है।

उस रात मैंने तिया से कहा कि थोड़ा संभलकर रहें।

लेकिन तिया तो मजे में थी, वो मानने को तैयार नहीं थी।

उसने कहा – “मुझे तो मजा आ रहा है, मैं क्यों रुकूं?”

अगले दिन जब मेरी पत्नी ऑफिस गई (वो एक बैंक में काम करती थी), तो मैंने सोचा कि आज तिया को अच्छे से चोदूंगा।

लेकिन तभी दरवाजे की घंटी बजी। मैंने दरवाजा खोला तो देखा अनन्या (बड़ी) आई हुई थी।

वो बोली – “ननदोईजी, मैंने सोचा आज तुम दोनों अकेले हो, तो मैं भी शामिल हो जाऊं।”

मैंने कहा – “लेकिन तिया तो ऊपर है।”

वो बोली – “मुझे पता है, चलो तीनों मजे करते हैं।”

हम तीनों ऊपर गए। तिया तो पहले से ही नंगी होकर बेड पर लेटी थी।

वो जानती थी कि मैं आऊंगा।

अनन्या ने भी तुरंत कपड़े उतार दिए और तीनों नंगे हो गए।

मैंने इस बार सोचा कि कुछ अलग करते हैं।

मैंने दोनों को एक-दूसरे को चूमने को कहा।

वो दोनों एक-दूसरे के होंठ चूमने लगीं, बूब्स दबाने लगीं।

मैं यह सब देखकर हिला रहा था।

फिर मैंने अनन्या को बेड पर लेटाया और तिया को उसके ऊपर बिठाया ताकि दोनों की चूतें आपस में मिल जाएं।

वो दोनों एक-दूसरी की चूत रगड़ने लगीं।

यह देखना इतना सेक्सी था कि मेरा लौड़ा बिना छुए ही झड़ने को था।

फिर मैंने तिया की गांड में लौड़ा डाला और वो अनन्या की चूत चाटने लगी।

इस तरह तीनों मजे कर रहे थे।

मैंने तिया की गांड 10 मिनट तक मारी फिर अनन्या की चूत में डाल दिया।

दोनों बारी-बारी से मेरा लौड़ा अपने अंदर ले रही थीं।

फिर मैंने दोनों को घुटनों के बल किया और एक-एक करके दोनों की गांड मारी।

दोनों चिल्ला रही थीं लेकिन मजे भी ले रही थीं।

आखिर में मैंने अपना माल दोनों के मुंह में बांट दिया। दोनों ने चाट-चाट कर साफ किया और एक-दूसरे को चूमीं।

यह हमारा रोज का खेल बन गया। लेकिन एक दिन मेरी पत्नी ने हमें पकड़ लिया।

वो अचानक ऑफिस से आई और दरवाजा खुला था, वो सीधे ऊपर आई और हमें तीनों को नंगा देखा।

मैं अनन्या की चूत चाट रहा था और तिया मेरा लौड़ा चूस रही थी।

मेरी पत्नी चीखी – “यह क्या हो रहा है?”

हम तीनों जमीन पर गिर गए।

मैंने कहा – “अनन्या, मुझे माफ कर दो।”

वो रोने लगी और बोली – “मैं तुम्हें छोड़ दूंगी, मैं तलाक ले लूंगी।”

मैंने उसके पैर पकड़े और कहा – “प्लीज, एक मौका दो। यह सब गलती थी।”

लेकिन वो नहीं मानी।

उसने अपने मायके चले जाने की धमकी दी।

मैंने कहा – “ठीक है, जाओ। लेकिन मुझे माफ कर दो।”

वो चली गई और हम तीनों अकेले रह गए।

अब मैं, अनन्या और तिया एक साथ रहने लगे।

मेरी पत्नी ने तलाक ले लिया और मैंने अनन्या और तिया दोनों को अपना लिया।

अब हम तीनों एक साथ रहते हैं।

दोनों मेरी पत्नी की तरह हैं, दोनों मुझसे प्यार करती हैं और मैं दोनों से प्यार करता हूं।

हम रोज मजे करते हैं, कभी-कभी दोनों साथ में, कभी-कभी अलग-अलग।

यह थी मेरी कहानी दोस्तों।

अगर आपको पसंद आई तो बताएं।

मैं और भी कहानियां लिखूंगा।

नोट: यहां पोस्ट की गई सभी कहानियां केवल मनोरंजन के उद्देश्य से प्रस्तुत की गई हैं। कृपया इन्हें वास्तविक जीवन से जोड़कर न देखें। कहानी में दर्शाए गए किसी भी दृश्य, घटना या चित्र का वास्तविक जीवन में प्रयोग करना हानिकारक हो सकता है। इसके लिए न तो कहानी के लेखक और न ही प्रस्तुतकर्ता जिम्मेदार होंगे। इसलिए कृपया अपनी समझ, बुद्धि और विवेक का उपयोग करें।

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