salhaj ki blowjob sex kahani
नमस्ते दोस्तों, मैं अर्जुन मल्होत्रा हाजिर हूं अपनी एक और नयी सेक्स कहानी लेकर!
आज मैं आपको अपनी जिंदगी की सबसे यादगार और कामुक अनुभव के बारे में बताने जा रहा हूं।
यह ब्लोजॉब और चूत चटवाने की सेक्स कहानी है मेरी सलहज यानी मेरे बड़े साले की पत्नी के बारे में!
उसका नाम अनन्या है, और यह नाम उसकी सुंदरता के लिए बिल्कुल फिट बैठता है।
अनन्या मेरे बड़े साले रोहन की पत्नी है, और वो मुझसे लगभग 8 साल बड़ी है।
उम्र के इस फर्क के बावजूद, या शायद इसी वजह से, उसमें एक ऐसा आकर्षण है जो किसी भी मर्द को उसकी तरफ खींच लाए।
फिगर की बात करें तो उसके बूब्स 34 इंच के पूर्ण गोल आमों की तरह हैं, कमर 30 इंच की पतली और लचीली, और गांड 36 इंच की भरपूर और उभरी हुई।
उसका पूरा बदन ऊपर से नीचे यानी होंठों से चूत तक हल्का सांवला है, जो उसे और भी ज्यादा सेक्सी बनाता है।
मगर नैन नक्श से ऐसी है कि एक बार देख लो तो लौड़ा सलामी देने लगे।
उसकी आंखें बड़ी-बड़ी और काजल लगी हुई, नाक छोटी और सीधी, और होंठ मोटे और गुलाबी, जो किस करने के लिए एकदम बने हैं।
चलिए अब शुरू करते हैं यह कहानी जो मेरी जिंदगी बदलकर रख देगी।
ये बात तब की है जब मेरी शादी हुई थी और मैं दूसरी बार अपने ससुराल गया था।
पहली बार तो शादी के ठीक बाद गया था, तब सब नए-नए थे और मैं थोड़ा शर्माता भी था।
लेकिन यह दूसरा दौरा था और मैं थोड़ा फैमिली का हिस्सा बन चुका था।
मेरे सोने का इंतजाम घर की पहली मंजिल पर किया गया था।
यह एक पुराना सा हवेली टाइप घर था, जिसमें नीचे बड़ा सा आंगन और ड्राइंग रूम था, और ऊपर दो-तीन बेडरूम।
मैं बेड पर सो रहा था और मेरा साला रोहन चारपाई पर सो रहा था, क्योंकि बेड पर मेरे लिए जगह बनानी थी।
एक छोटी सी जानकारी दे दूं कि मेरा साला रोहन पास के जिला अस्पताल में कंपाउंडर का काम करता था।
उसकी ड्यूटी सुबह 7 बजे से शाम 3 बजे तक की थी, इसलिए उसे रोज सुबह जल्दी उठना पड़ता था।
उस दिन भी वो सुबह 5:30 बजे उठा और तैयार होने लगा। मैं उस वक्त गहरी नींद में था, कल रात की यात्रा की थकान अभी भी मेरी आंखों में थी।
उसने मुझे धीरे से जगाने की कोशिश की, मगर मैंने बस हां में हां मिलाई और फिर से सो गया। वो मुझे बाय बोलकर चला गया, और मैं नींद में ही था।
फिर मैं 6 बजे के करीब उठा। उस वक्त काफी धुंध थी, दिसंबर का महीना था और उत्तर प्रदेश की सर्दी अपने पूरे जोश में थी।
खिड़की से बाहर देखा तो सफेद सफेद धुंध सड़क को भी ढक चुकी थी। मैं सोचा कि इतनी ठंड में कहां जाना है, और वापस से लेट गया। रजाई ओढ़कर मैं दोबारा से नींद की गोद में चला गया।
थोड़ी देर में, शायद 6:30 बजे के आसपास, मुझे लगा कि कोई कमरे में आया है। दरवाजे की कुंडी की आवाज से मेरी नींद हल्की हुई, लेकिन मैंने आंखें नहीं खोलीं।
मुझे लगा कि शायद कोई चाय लेकर आया है, या फिर साफ सफाई के लिए कोई आया है। मैंने सोचा कि जब वो चले जाएंगे तब उठूंगा।
लेकिन यह अनन्या थी, और उसके इरादे कुछ और ही थे।
मुझे नींद आ रही थी तो मुझे उसके आने का सही अहसास नहीं हुआ।
मैंने महसूस किया कि कोई मेरे पास खड़ा है, लेकिन मेरी आंखें भारी थीं, शायद कल रात खाने में कुछ ज्यादा ही देसी घी का हलवा खा लिया था जो मुझे नींद में धकेल रहा था।
फिर मुझे महसूस हुआ कि रजाई धीरे-धीरे हट रही है। मैंने सोचा कि शायद ठंड के मारे मैंने रजाई ठीक से नहीं ओढ़ी है और वो खिसक रही है।
लेकिन फिर मुझे एक हल्का सा स्पर्श महसूस हुआ – कोई मेरे पजामे के ऊपर से धीरे-धीरे हाथ फिरा रहा था।
चूंकि मेरी नींद कच्ची थी तो मुझे अच्छा लगने लगा। वो स्पर्श इतना नरम था, इतना कोमल, जैसे रेशमी परियों के पंख मेरे शरीर पर घूम रहे हों।
मैंने सोचा कि शायद कोई सपना है, कोई अच्छा सा कामुक सपना जो मेरी नींद में मुझे परेशान कर रहा है।
वो अपने नर्म कोमल हाथ मेरे लंड पर फिरा रही थी। धीरे-धीरे, सहलाते हुए, जैसे कोई नई दुल्हन अपने पति के शरीर को पहचानने की कोशिश कर रही हो।
मैं ये सब नींद में सोच रहा था जैसे कोई सपना हो, मगर ये मेरे साथ उस वक्त सच में हो रहा था।
उसके हाथ फेरने से मेरे लंड में तनाव आने लगा।
मैंने महसूस किया कि मेरा लौड़ा धीरे-धीरे फूल रहा है, खड़ा हो रहा है, उस नरम स्पर्श का जवाब दे रहा है।
मेरी सांसें भारी होने लगीं, लेकिन मैं अभी भी पूरी तरह जागा नहीं था।
फिर मेरी नींद की अवस्था में ही उसने मेरा पजामा नीचे कर लिया।
मुझे लगा कि कोई ठंडी हवा लगी है, लेकिन उसके बाद जो गर्मी महसूस हुई वो अविश्वसनीय थी। मेरा लंड बाहर आ गया और उसने उसको झट से मुंह में भर लिया।
पजामा हटाकर वो मेरा लंड चूसने लगी।
उसके मुंह की गर्मी, उसके होंठों की नरमी, और उसकी जीभ का चलना – यह सब इतना असली लग रहा था कि मुझे समझ नहीं आ रहा था कि यह सपना है या हकीकत।
मेरी एकदम से आंख खुली और इससे पहले कि मैं कुछ बोलता अनन्या ने मेरे मुंह पर हाथ रख दिया और आंख मारी।
उसने दूसरे हाथ में मेरा लौड़ा पकड़ रखा था, जो अब पूरी तरह खड़ा हो चुका था, लगभग 7 इंच का और काफी मोटा।
वो कहने लगी- “ननदोईजी, घर पर कोई नहीं है। मां और दीदी ताऊ के घर गई हैं किसी काम से। यहां हम दोनों ही हैं। डरिए मत … मज़ा लीजिए मेरी जवानी का!”
मैं कुछ न बोल सका। मेरी आंखें उसके चेहरे पर टिकी थीं – वो कितनी सुंदर लग रही थी सुबह-सुबह के धुंध के प्रकाश में।
उसके बाल खुले हुए थे, रात की नींद से थोड़े बिखरे हुए, और उसने हल्का सा मेकअप किया हुआ था जो उसे और भी आकर्षक बना रहा था।
उसकी साड़ी का पल्लू कंधे से गिरा हुआ था और ब्लाउज की गहराई मुझे उसके मस्त बूब्स का एहसास दिला रही थी।
उसने मुझे धक्का देकर बेड पर गिरा दिया और ऊपर चढ़कर मेरे होंठ चूसने लगी। उसके होंठ इतने रसीले थे, इतने नरम, कि मैं तुरंत ही उसके आगे समर्पित हो गया।
अब मैं भी तैयार हो गया और उसे कसकर कमर से पकड़ लिया।
उसकी कमर इतनी पतली थी कि मेरे दोनों हाथ उसे आसानी से घेर सकते थे, और उसकी गांड मेरे हाथों में इतनी भरपूर महसूस हो रही थी।
वो कहने लगी- “ननदोईजी, मेरी ननद अनन्या बता रही थी काफी मोटा और गोरा है आपका! पेलते भी लम्बा हो … तो मुझसे भी रहा नहीं गया। मेरी चूत भी सालों से प्यासी है। रोहन तो अस्पताल के काम में इतना व्यस्त रहता है कि मेरी जरूरतों का ख्याल नहीं रख पाता। इसे अपने लौड़े का पानी पिला दो।”
मैं सुनता रहा और उसकी गांड मसलता रहा। उसकी गांड की गोलाई मेरे हाथों में इतनी अच्छी लग रही थी कि मैं उसे छोड़ना नहीं चाहता था।
मैं बोला- “ठीक है, मंजूर है तुम्हारी बात, मगर मेरी शर्त है कि मैं जब भी यहां पर आऊंगा, तुम मेरी ऐसे ही सेवा करोगी। और जो कुछ मैं कहूंगा, वो करना पड़ेगा।”
उसने एक बार भी मना नहीं किया और आंख मारकर फिर से मेरा लौड़ा चूसने लगी।
वो इतने अच्छे से चूस रही थी कि जैसे मेरे लौड़े का खून भी निकाल कर पी लेगी।
उसने पूरा लंड अपने मुंह में ले लिया और गले तक उतार दिया। फिर ऊपर नीचे करने लगी, जीभ को नीचे की तरफ रखकर मेरे सुपाड़े को चाटती हुई।
थोड़ी देर में मैं अकड़ने लगा। मुझे लगा कि मेरा माल इसके मुंह में गिर जाएगा इसलिए मैंने लौड़ा उसके मुंह से खींच लिया। मैंने सोचा कि शायद वो गंदगी समझेगी या नाराज होगी।
लेकिन उसने मुझे चपत लगाई और कहने लगी- “मुझे इसका दूध पीना है, एक एक कतरा इसके माल का पी जाना है। तुम मेरे ननदोई हो, मेरे देवर हो, मुझे अपना रस पिलाओ।”
मैंने भी उसकी इच्छा मानी और फिर से लौड़ा उसके मुंह में दे दिया। इस बार मैं उसके मुंह को चोदने लगा।
मैंने उसके सिर को पकड़ा और अपने कूल्हों को आगे-पीछे करने लगा। वो नीचे से मेरी गांड को सहला रही थी और मेरे बॉल्स को अपने हाथों में लेकर दबा रही थी।
कुछ ही देर के बाद मेरे लोहे जैसे सख्त लौड़े ने और ऐंठते हुए अपना गर्म गर्म माल उसके मुंह में उगल दिया।
मैंने ऐसा कभी महसूस नहीं किया था – इतना ज्यादा माल, इतनी तेज धार से निकलता हुआ।
वो लंड की प्यासी मेरे माल की बूंद बूंद अपने गले में उतार ले गयी। उसने मेरे लंड को चाटकर अपने होंठ साफ किए और मुस्कराकर मुझे थैंक्यू बोला।
फिर मैंने अपने पजामे को ऊपर कर लिया। मैं अभी भी हांफ रहा था, मेरी छाती तेजी से उठ-बैठ रही थी।
अनन्या बोली- “ननदोईजी, चाय तो ठंडी हो गई है। मैं गर्म करके ला रही हूं। अबकी बार जब आऊंगी तो आपकी जीभ का कमाल देखूंगी। मेरी चूत भी तो तरस रही है आपके मुंह के लिए।”
ये बोलकर उसने फिर से आंख मारी और चाय का कप उठाकर मटकती हुई चली गयी।
उसकी चाल में एक ऐसा जादू था कि मैं उसे जाते हुए देखता रहा। उसकी गांड कैसे एक-एक करके उठती थी, कैसे उसकी कमर मचलती थी – यह सब मुझे बेकाबू कर रहा था।
उसके जाने के बाद मैं सोचता रहा कि ये क्या बोलकर गई। “आपकी जीभ का कमाल देखूंगी” – इसका क्या मतलब था?
मुझे इतना तो समझ आ गया कि अबकी बार वो मेरे नीचे होगी मगर जीभ चूत पर चलवायेगी या बूब्स पर? मैं यह सोचता रहा और लेटा रहा।
मेरे दिमाग में अलग-अलग तस्वीरें चल रही थीं – अनन्या नंगी होकर मेरे सामने लेटी हुई, मैं उसकी चूत चाट रहा हूं, वो मेरे बालों में हाथ फिरा रही है।
मेरा लौड़ा उसके बारे में सोचने मात्र से ही दोबारा तन गया। मैंने सोचा कि यह लड़की तो जादूगरनी है – जो मुझे इतनी जल्दी फिर से तैयार कर दे।
साढ़े 6 बज गए थे। मेरी पत्नी अनन्या और सासूमां ताऊ ससुर के घर से नहीं लौटे थे। मैंने सोचा कि शायद और भी देर लगेगी, तब तक मैं और अनन्या…
5 मिनट बाद अनन्या चाय लेकर आई और हम दोनों ने चाय पी। इस बार वो और भी ज्यादा खुली हुई लग रही थी।
उसने एक हल्की सी नाइटी पहनी हुई थी जो उसके बूब्स को ढक नहीं पा रही थी। नीचे से उसकी जांघें नजर आ रही थीं, और जब वो झुककर चाय रख रही थी तो मुझे उसके बूब्स का क्लीवेज दिखाई दे रहा था।
फिर उसने बताया- “दीदी आधे घंटे और नहीं आने वाली! उन्होंने मुझे फोन करके आपको चाय पिलाने को बोला। मैं आपको दूसरी बार पिलाने आई हूं। पहली बार तो आपका गर्म गर्म माल था जो मैंने पिया।”
उसने हंसते हुए और आंख मारते हुए बोला। उसकी बात सुनकर मेरा चेहरा लाल हो गया, लेकिन मेरा लौड़ा फिर से खड़ा हो गया।
चाय खत्म होते ही उसने कप नीचे रख दिया। फिर मेरे हाथ से चाय का कप लिया और उसको अपने होंठों से चूमकर मेरे होंठों से लगा दिया।
यह इशारा इतना सेक्सी था कि मेरा लौड़ा उसकी इस हरकत से फिर से उछाल खा गया।
मेरे उफनते लौड़े को उसने पजामे के ऊपर से ही पकड़ा और उसके गियर बदलते हुए उसको एक दो बार दबाकर देखा। वो बोली- “हम्म … दीदी ठीक ही कहती थी। बड़े खिलाड़ी हो आप और आपका ये हथियार! इतनी जल्दी फिर से तैयार हो गया? लगता है आज तो मेरी चूत की खैर नहीं।”
फिर उसने उठकर दरवाजा बंद कर दिया और अपनी नाइटी का नाड़ा मेरे सामने खोलने लगी। उसकी कामुक अदाएँ मुझे पागल सी करने लगी थीं;
मैं सोचने लगा कि इतने दिन तक ये मुझसे बची कैसे रह गयी। यह तो आग है, आग जो मुझे जलाकर राख कर देगी।
इतने में ही उसने नाइटी का नाड़ा खोलकर उसे नीचे सरका दिया।
उसने अपनी चूत मेरे सामने खोल दी और उसको अपने हथेली से रगड़कर बोली- “ये आपके हाथ और जीभ की प्यासी है। देखिए कितनी गीली हो गई है आपका इंतजार करते-करते।”
मैंने उसका हाथ पकड़ कर उसको बेड पर खींच लिया और नीचे पटक लिया। फिर मैंने उसकी टांगें बेड पर से नीचे लटका दीं और खुद भी कूदकर फर्श पर आ बैठा।
मेरा मुंह ठीक उसकी टांगों के बीच में था, उसकी चूत मेरी नाक के सामने थी।
वो कितनी खूबसूरत लग रही थी – गुलाबी, गीली, तरसी हुई। उसकी चूत से एक अजीब सी खुशबू आ रही थी जो मुझे पागल बना रही थी।
मैंने उसकी टांगों को उठाया और अपने कंधों पर रख लिया। उसकी चूत मेरे होंठों के पास आ गयी थी। उसकी चूत की खुशबू मेरी नाक में जाने लगी मगर मैं उस खुशबू को और करीब से सूंघना चाहता था।
मैंने उसकी चूत में नाक रगड़नी शुरू की और उसकी खुशबू लेने लगा। वो अपने हाथों से अपनी चूत को और खोलकर मुझे दिखाने लगी, जैसे कह रही हो – “आओ, खाओ मुझे, पीओ मेरा रस।”
उसकी चूत के प्रीकम की खुशबू मुझे बेकाबू करने लगी। इतनी मादक खुशबू थी कि मेरा लंड टनटनाने लगा; बार बार लौड़े में उछाल लगने लगा। मैंने सोचा कि अगर अभी नहीं चाटा तो पागल हो जाऊंगा।
चूंकि मेरे पास समय की कमी थी तो मैंने इस मौके का पूरा मजा लेने की सोची और बिना समय गंवाए उसकी चूत को चाटने लगा, होंठों से चूमने लगा। वो “आह… ऊह…” की आवाजें निकालने लगी।
वो अपने बूब्स नाइटी के ऊपर से ही मसलने लगी। उसके निप्पल कड़े हो गए थे और ऊपर से ही दिखाई दे रहे थे।
मैंने उसकी चूत में जीभ देकर उसके चूतरस का स्वाद लेना शुरू किया तो उसके मुंह से अब कामवासना से भरी मदहोश कर देने वाली सिसकारियां निकलने लगीं।
“आह… ननदोईजी… बहुत मजा आ रहा है… चाटो और जोर से…” वो बोल रही थी।
उसकी सिसकारियों को सुनकर ऐसा लग रहा था जैसे कि वो बरसों से मेरे लंड का इंतजार कर रही थी।
मेरी जीभ से अपनी चूत चुसवाने के इंतजार में थी। उसकी आवाजें इतनी सेक्सी थीं कि मैं और भी जोश से उसकी चूत चाटने लगा।
उसके हाथ लगातार उसके बूब्स पर चल रहे थे। कभी वो अपने निप्पलों को भींच रही थी तो कभी दोनों चूचियों को दोनों हाथों से दबा देती थी।
वो अपनी चूत को मेरी जीभ पर रगड़ रही थी, अपनी कमर उठा-उठा कर।
मैं उसकी चूत के रस को खींचने में व्यस्त था। कभी उसकी चूत के दाने को मसल देता था तो कभी जांघों को चूमने लगता था। उसकी जांघें इतनी नरम थीं, इतनी मुलायम, कि मैं उन्हें चूमते ही रह गया।
मेरी सलहज की सिसकारियां अब और तेज होने लगी थीं। “आह… हां… और अंदर… जीभ को अंदर डालो…” वो चिल्ला रही थी।
मैं जीभ उसकी चूत की गहराई में उतार कर चोदने लगा। वो और ज्यादा मदहोश होने लगी। उसकी आंखें बंद थीं और वो सिर हिला रही थी, मजे में पागल हो रही थी।
उससे रहा न गया और उसने अपनी नाइटी को ऊपर उठा दिया। उसकी मस्त गोल गोल चूची एकदम से मेरी आंखों के सामने नंगी हो गईं।
उसकी चूचियां काफी टाइट लग रही थीं और चूचियों के भूरे रंग के निप्पल एकदम से तनकर कड़े हो गए थे। वो इतनी सुंदर लग रही थी कि मैं उसे देखता ही रह गया।
वो अपने चूचकों को भींचने लगी तो मैंने उसकी चूत से जीभ निकाली और उसकी चूचियों को पीने लगा।
मैंने एक चूची को मुंह में भर लिया और जोर-जोर से चूसने लगा, दूसरे को हाथ से दबाने लगा। वह मेरे सिर को अपने सीने पर दबाने लगी मगर उसकी चूत में भी उतनी ही प्यास लगी थी।
“ननदोईजी… नीचे… फिर से चाटो मेरी चूत को…” वो बोल रही थी।
उसने मेरे हाथ को पकड़ा और नीचे अपनी चूत पर ले गई। मैं उसका इशारा समझ गया। मैंने एक हाथ से उसकी चूत को फिर से रगड़ना शुरू कर दिया।
अनन्या की चूत का गीलापन मेरी हथेली को भी गीला करने लगा। वो इतनी गीली हो चुकी थी कि उसका रस मेरे हाथ पर टपक रहा था।
मुझे अब और ज्यादा सेक्स चढ़ने लगा था, उसकी चूत मारने का मन कर रहा था। मेरा लौड़ा फटने को हो रहा था, इतना तन गया था।
मगर शायद मुझसे ज्यादा आग तो उसके अंदर भरी हुई थी।
उसने मुझे अपने ऊपर खींच लिया और मेरे होंठों को पीने लगी, मेरी जीभ को काटने लगी। वो इतनी जोर से चूम रही थी कि मेरे होंठ दर्द करने लगे थे।
मैंने जीभ बाहर निकाल दी तो उसने मेरी जीभ को अपने होंठों के बीच में ले लिया और उसको लंड की तरह चूसने लगी।
मुझे बहुत मजा आ रहा था। वो मेरी जीभ को चूस रही थी जैसे कोई लॉलीपॉप हो।
कुछ देर मेरी जीभ को चूसने के बाद उसने मेरे सिर को पकड़ा और फिर से अपनी चूत पर मेरे होंठ लगवा दिए।
मेरी सलहज की चूत अब पहले से ज्यादा कामरस छोड़ रही थी।
उसकी चूत का पानी बहुत स्वादिष्ट था, मीठा-मीठा सा। मैं उसे पीने लगा, उसका सारा रस चाट-चाट कर खत्म करने लगा।
अब मैं बीच बीच में उसकी चूत में उंगली भी करने लगा। चूत में उंगली जाते ही उसकी टांगें चौड़ी फैलने लगीं। वो “आह… हां… और अंदर…” कह रही थी।
मैंने उसकी चूत में दो उंगली दे दी जिससे वो उचक गई। वो अपनी चूचियों के निप्पलों को एक उंगली और अंगूठे के बीच में दबाकर मसलने लगी। उसके मुंह से अब लगातार आवाजें निकल रही थीं।
उसकी चुदास हर पल और ज्यादा तेज होती जा रही थी। वो अब पूरी तरह से पागल हो चुकी थी।
मैंने फिर से उसकी चूत में जीभ डाल दी। अबकी बार उसने मेरे सिर को अपनी चूत पर दबा लिया और खुद ही अपनी गांड को उठाते हुए मेरी जीभ से अपनी चूत को चुदवाने लगी।
ऐसा लग रहा था कि उसकी चूत से कोई ज्वालामुखी फूटने वाला हो जिसमें से लावा के साथ साथ धुआं भी निकलने वाला हो।
मुझे अंदाजा नहीं था कि उसकी चूत में इतनी गर्मी होगी। वो इतनी गर्म थी कि मेरी जीभ जल रही थी।
मैं लगातार उसकी चूत को चूसता रहा और उसे जीभ से चोदता रहा। वो अब “मेरे राजा… मेरे मालिक…” कह रही थी।
5 मिनट की जीभ चुदाई के बाद वो अकड़ने लगी और कहने लगी- “मेरे राजा … आह … आह … मेरे लौड़े राजा … मेरी चूत का माल पीयो। माल पीकर मुझे निहाल कर दो। मैं आने वाली हूं…”
मैं ये करना तो नहीं चाहता था मगर उसकी सिसकारियां और उसके शब्द मुझे मजबूर कर रहे थे।
इतने में ही उसकी चूत ने पानी छोड़ दिया। एक तेज धार से उसका रस निकला और मैं उसकी चूत के रस को चाटने लगा और उसने मेरे मुंह को अपनी चूत पर दबा दिया।
मैंने उसकी चूत का माल पी लिया। उसकी चूत के रस का स्वाद काफी बढ़िया था, थोड़ा खट्टा-मीठा। मैंने एक भी बूंद बर्बाद नहीं होने दी।
स्खलित होने के बाद वो काफी हांफ रही थी। हांफने से उसकी नंगी चूचियां तेजी से ऊपर नीचे हो रही थीं। वो पसीने से लथपथ हो गई थी और उसकी सांसें तेज चल रही थीं।
मैंने उसको सामान्य होने दिया। उसके हाथ अभी भी उसके बूब्स पर थे, जैसे वो उन्हें शांत करने की कोशिश कर रही हो।
जब उसकी चूचियां हिलनी बंद हो गईं तो वो उठी और मुझे स्माइल दी। वो इतनी संतुष्ट दिख रही थी, जैसे उसने कोई बड़ी तृष्णा पूरी कर ली हो।
फिर उसने मुझे थैंक्स बोला और फिर अपनी नाइटी को पहनने लगी। उसकी चूचियों को उसने नाइटी के नीचे ढक लिया और फिर वहां से चली गई।
दोस्तो, ये सब बहुत जल्दी में हुआ था। मुझे यकीन नहीं हो रहा था कि मेरी सलहज मुझसे अपनी चूत चटवा चुकी है, अपनी चूत का माल पिला चुकी है और मेरा माल भी पी चुकी है।
इस तरह से उस दिन पहली बार मेरी सलहज के साथ मेरे सेक्स संबंध बने। हम दोनों में बात पक्की हो गई कि जब भी मैं आऊंगा, हम यह सब करेंगे।
मैं उसके बाद जब भी वहां जाता हम दोनों एक दूसरे को अपना माल पिलाते। कभी वो मेरा लंड चूसती, कभी मैं उसकी चूत चाटता। हमने हर तरह का मजा लिया।
एक दो बार मैंने उसकी चुदाई भी की। वो कहानी मैं आपको आने वाले समय में बताऊंगा। गांव में चुदाई का अपना मजा है इसलिए मैं उस कहानी को अलग से लिखूंगा।
मैंने अनन्या और उसकी बहन की चुदाई उनके गांव में ही की। वो कहानी भी जल्दी ही आपके लिए लाऊंगा।
आपको ये स्टोरी कैसी लगी इस बारे में अपनी राय जरूर जाहिर करें।
मैं और भी कहानियां लिऊंगा अगर आप लोगों को पसंद आई तो।
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नोट: यहां पोस्ट की गई सभी कहानियां केवल मनोरंजन के उद्देश्य से प्रस्तुत की गई हैं। कृपया इन्हें वास्तविक जीवन से जोड़कर न देखें। कहानी में दर्शाए गए किसी भी दृश्य, घटना या चित्र का वास्तविक जीवन में प्रयोग करना हानिकारक हो सकता है। इसके लिए न तो कहानी के लेखक और न ही प्रस्तुतकर्ता जिम्मेदार होंगे। इसलिए कृपया अपनी समझ, बुद्धि और विवेक का उपयोग करें।
Beautiful story
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