बहन ने भाई से रक्षाबंधन पर लंड गिफ्ट मांगी

bahan ne bhai se raksha bandhan par lund gift manga

मेरा नाम प्रिया है। मैं 22 साल की एक खूबसूरत लड़की हूँ।

मेरा फिगर 36-28-38 है और मेरी हाइट 5 फीट 6 इंच है।

मेरे भाई अमित मुझसे 2 साल छोटे हैं और उनकी उम्र 20 साल है।

वो एक हैंडसम जवान लड़का है और उसकी हाइट 6 फीट है।

हमारे माता-पिता की छोटी उम्र में ही मृत्यु हो गई थी, इसलिए हम दोनों भाई-बहन एक-दूसरे के सहारे बड़े हुए हैं।

हमारी बहुत गहरी बॉन्डिंग है और हम एक-दूसरे से हर बात शेयर करते हैं।

बात उस रक्षाबंधन की है जब मैंने अपने भाई से सबसे अनोखा और यादगार गिफ्ट पाया।

वो रक्षाबंधन अगस्त के महीने में था। गर्मी अपने चरम पर थी और मैंने सुबह ही नहा-धोकर त्यार हो गई थी।

मैंने एक गुलाबी रंग की साड़ी पहनी थी जो मेरे बदन पर बहुत सुंदर लग रही थी।

मैंने ब्लाउज भी गहरे गले वाला पहना था जिसमें से मेरे बड़े-बड़े स्तन झलक रहे थे।

मैंने मांग में सिंदूर लगाया और बाल खुले छोड़ दिए।

सुबह 10 बजे अमित उठा। उसने मुझे देखा तो उसकी आँखें चौड़ी हो गईं।

वो बोला, “दीदी, आज तुम बहुत खूबसूरत लग रही हो।”

मैंने मुस्कुराते हुए कहा, “धन्यवाद भैया, चलो राखी बांधते हैं।”

हमने पूजा की थाली सजाई।

मैंने अमित के माथे पर टीका लगाया और उसकी कलाई पर राखी बांधी।

फिर मैंने उसे मिठाई खिलाई।

अमित ने मुझे गिफ्ट दिया – एक सुंदर सा नेकलेस।

मैंने कहा, “भैया, ये तो बहुत सुंदर है, लेकिन मुझे और भी कुछ चाहिए।”

अमित ने पूछा, “क्या चाहिए दीदी? बताओ, मैं ले आऊँगा।”

मैंने शरारती अंदाज़ में कहा, “वो गिफ्ट जो सिर्फ तुम ही दे सकते हो।”

अमित समझ नहीं पाया।

उसने पूछा, “क्या मतलब?”

मैंने उसे पास बुलाया और फुसफुसाते हुए कहा, “मुझे पता है कि तुम रोज़ रात को मुझे देखकर मुठ मारते हो। मैंने कई बार देखा है तुम्हें।”

अमित शर्मा गया। उसका चेहरा लाल हो गया।

वो बोला, “दीदी, वो… वो मैं…”

मैंने उसके होंठ पर उंगली रखी और कहा, “चुप करो, मुझे सब पता है। आज मुझे वही गिफ्ट चाहिए जिसे तुम रोज़ मेरे बारे में सोचकर हिलाते हो।”

अमित की आँखें हैरानी से चौड़ी हो गईं।

वो बोला, “दीदी, ये क्या कह रही हो? मैं तुम्हारा भाई हूँ।”

मैंने कहा, “भाई हो तो क्या हुआ? मुझे पता है कि तुम मुझे पसंद करते हो। और मैं भी तुम्हें पसंद करती हूँ। आज रक्षाबंधन है, इस पवित्र दिन पर मुझे अपने भाई का प्यार चाहिए – असली प्यार।”

अमित कुछ देर सोचता रहा।

फिर उसने हिम्मत करके कहा, “ठीक है दीदी, लेकिन ये हमारे बीच ही रहेगा। किसी को पता नहीं चलना चाहिए।”

मैंने कहा, “वादा है, ये सिर्फ तुम्हारा और मेरा राज रहेगा।”

अमित ने अपनी टी-शर्ट उतारी।

उसका एथलेटिक बदन देखकर मेरा दिल धड़कने लगा।

फिर उसने अपनी शॉर्ट्स उतारी।

उसकी अंडरवियर में से उसका लंड बाहर निकलने को तरस रहा था।

मैंने कहा, “आज का गिफ्ट मुझे इसी बॉक्स में चाहिए।”

मैंने एक खाली गिफ्ट बॉक्स उठाया और उसके सामने रख दिया।

अमित ने समझदारी दिखाते हुए अपनी अंडरवियर उतार दी।

उसका 8 इंच का मोटा लंड बाहर आ गया। वो लाल और तनाव में था।

मैंने उसे कहा, “इसे इस बॉक्स में रखो।”

अमित ने अपना लंड उस बॉक्स में रख दिया।

मैंने बॉक्स उठाया और उसे खोलकर देखा।

उसका सुंदर लंड मुझे इशारा कर रहा था।

मैंने कहा, “ये तो बहुत सुंदर गिफ्ट है भैया।”

इतना कहकर मैंने बॉक्स नीचे रखी और झुककर उसके लंड को चूम लिया।

अमित की साँसें तेज हो गईं।

मैंने धीरे से उसके लंड को अपने हाथ में लिया और सहलाने लगी।

“कितना मोटा और गरम है तुम्हारा लंड,” मैंने कहा।

फिर मैंने उसे अपने मुँह में ले लिया।

वो इतना बड़ा था कि मेरे मुँह में आते ही मेरी गालें फैल गईं।

मैंने जीभ से उसके सुपाड़े को चाटना शुरू किया।

“आह्ह… दीदी… बहुत मज़ा आ रहा है,” अमित कराह उठा।

मैंने उसका लंड गले तक लेने की कोशिश की।

कुछ देर चूसने के बाद मैंने उसे बेडरूम में ले जाया।

मैंने अपनी साड़ी उतार दी।

अब मैं सिर्फ ब्लाउज और पेटीकोट में थी।

अमित ने मेरी तरफ देखा और कहा, “दीदी, तुम बहुत सेक्सी लग रही हो।”

मैंने अपना ब्लाउज भी खोल दिया।

मेरे बड़े-बड़े स्तन बाहर आ गए।

अमित ने उन्हें देखकर अपने हाथ आगे बढ़ाए और पकड़ लिए।

“कितने मोटे और नरम हैं तुम्हारे स्तन,” वो बोला।

मैंने कहा, “इन्हें चूसो अपने मुँह में।”

अमित ने मेरे स्तन पकड़कर चूसना शुरू कर दिया।

वो एक-एक करके दोनों स्तनों को चूस रहा था और निप्पलों को काट रहा था।

मुझे बहुत मज़ा आ रहा था।

“आह्ह… भैया… और चूसो… निप्पल काटो… ओह्ह…” मैं कराह रही थी।

फिर मैंने अपना पेटीकोट भी उतार दिया।

अब मैं पूरी नंगी थी। अमित ने मेरी चूत को देखा। वो गीली हो चुकी थी।

“दीदी, तुम्हारी चूत तो बहुत सुंदर है,” वो बोला।

मैंने कहा, “इसे चाटो अपनी जीभ से।”

अमित ने मेरी चूत पर अपनी जीभ रखी और चाटना शुरू कर दिया।

उसकी जीभ मेरी चूत की दीवारों को चाट रही थी। मैं बेसुध होने लगी।

“आह्ह… भैया… और अंदर… जीभ घुसाओ… ओह्ह… मज़ा आ रहा है…” मैं चीख रही थी।

अमित ने मेरी चूत में जीभ घुसाकर चोदनी शुरू कर दी।

करीब 15 मिनट तक चाटने के बाद मैं झड़ गई।

मेरा पानी उसके मुँह में गया और उसने पी लिया।

अब मैंने कहा, “भैया, अब अपना गिफ्ट मेरी चूत में डालो।”

अमित ने मुझे बेड पर लिटाया।

मैंने अपनी टाँगें फैला दीं।

उसने अपना मोटा लंड मेरी चूत के मुँह पर रखा।

“धीरे से डालना भैया, पहली बार है,” मैंने कहा।

अमित ने धीरे से धक्का मारा।

उसका सुपाड़ा अंदर चला गया।

मेरी चूत फैलने लगी। वो इतना मोटा था कि मुझे दर्द भी हो रहा था और मज़ा भी आ रहा था।

“आह्ह… भैया… थोड़ा और अंदर… धीरे…” मैं कराह रही थी।

अमित ने धीरे-धीरे पूरा लंड अंदर डाल दिया।

अब उसका पूरा 8 इंच का लंड मेरी चूत में था।

मेरी चूत पूरी तरह भर गई थी।

“फच्च-फच्च-फच्च” की आवाजें कमरे में गूँज रही थीं।

“ओह्ह… दीदी… तुम्हारी चूत तो बहुत टाइट है… बहुत मज़ा आ रहा है,” अमित बोला।

मैंने कहा, “और चोदो भैया… अपनी बहन को चोदो… आज रक्षाबंधन पर अपनी दीदी की चूत फाड़ डालो… आह्ह…”

अमित ने धक्कों की स्पीड बढ़ा दी।

वो मुझे जोर-जोर से चोद रहा था।

मेरी चूचियाँ उसके हर धक्के के साथ उपर-नीचे हो रही थीं।

“आह्ह… भैया… मर गई… और तेज… और चोदो… मेरी चूत फाड़ डालो… आह्ह…” मैं चीख रही थी।

करीब 20 मिनट तक चोदने के बाद अमित ने अपना पानी मेरी चूत में छोड़ दिया।

उसका गर्म वीर्य मेरी चूत में भर गया। मैं भी झड़ गई।

हम दोनों थककर बेड पर लेट गए।

अमित ने मुझे अपनी बाहों में भर लिया।

हम एक-दूसरे को किस करने लगे।

मैंने कहा, “भैया, ये तो बहुत अच्छा गिफ्ट था।”

अमित ने कहा, “दीदी, ये गिफ्ट तो मैं हर रोज़ दे सकता हूँ।”

मैंने कहा, “ठीक है, लेकिन आज रक्षाबंधन का दिन है, आज तुम मुझे कई बार चोदोगे।”

अमित ने कहा, “जी दीदी, जितनी बार कहोगी उतनी बार चोदूँगा।”

थोड़ी देर आराम करने के बाद अमित फिर से खड़ा हो गया।

उसका लंड फिर से तन गया था।

इस बार उसने मुझे डॉगी स्टाइल में बिठाया।

मैंने अपनी गांड उसकी तरफ उठा दी।

उसने मेरी गांड पर थूका और अपना लंड मेरी गांड के छेद पर रखा।

“आज तुम्हारी गांड भी मारूँगा दीदी,” उसने कहा।

मैंने कहा, “धीरे से डालना भैया, गांड बहुत टाइट है।”

अमित ने धीरे से धक्का मारा।

उसका सुपाड़ा मेरी गांड में घुस गया।

मुझे दर्द हुआ लेकिन मैंने चिल्लाना बंद कर दिया।

“आह्ह… भैया… धीरे… दर्द हो रहा है…” मैंने कहा।

अमित ने धीरे-धीरे पूरा लंड अंदर डाल दिया।

फिर वो मेरी गांड चोदने लगा।

“फच्च-फच्च-फच्च” की आवाजें फिर से गूँजने लगीं।

“ओह्ह… दीदी… तुम्हारी गांड तो और भी टाइट है… बहुत मज़ा आ रहा है,” अमित बोला।

मैंने कहा, “और चोदो भैया… मेरी गांड फाड़ डालो… आह्ह…”

करीब 15 मिनट तक गांड मारने के बाद अमित ने अपना पानी मेरी गांड में छोड़ दिया।

मेरी गांड उसके वीर्य से भर गई।

फिर मैंने उसे लिटाया और उसके लंड को चूसना शुरू कर दिया।

वो फिर से खड़ा हो गया। इस बार मैंने उसके ऊपर बैठकर उसका लंड अपनी चूत में ले लिया।

मैं उसके ऊपर उछल-उछलकर चुदने लगी।

अमित नीचे से धक्के मार रहा था और मैं उपर से। हम दोनों को बहुत मज़ा आ रहा था।

“आह्ह… दीदी… और तेज… और उछलो… मज़ा आ रहा है…” अमित कराह रहा था।

करीब 20 मिनट तक इस पोजीशन में चुदने के बाद हम दोनों एक साथ झड़ गए।

उस दिन हमने तीन बार सेक्स किया।

शाम को जब हम उठे तो हम दोनों बहुत खुश थे।

मैंने अमित से कहा, “भैया, ये रक्षाबंधन का गिफ्ट मैं कभी नहीं भूलूँगी।”

अमित ने कहा, “दीदी, ये गिफ्ट तो मैं हर साल दूँगा।”

अब हर रक्षाबंधन पर अमित मुझे अपना लंड गिफ्ट में देता है और मैं उसे जमकर चूसती और चुदवाती हूँ।

ये हमारा सीक्रेट है जो हम दोनों के बीच ही रहेगा।

मुझे अपने भाई का लंड बहुत पसंद है और मैं उससे हर रोज़ चुदवाती हूँ।

यही मेरी जिंदगी है और इसमें मैं बहुत खुश हूँ।

मुझे पता है आप लोग कमेंट नहीं करोगे…पर उम्मीद करती हूँ की आप को बहुत मजा आया होगा…. आपकी रंडी प्रिया

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नोट: यहां पोस्ट की गई सभी कहानियां केवल मनोरंजन के उद्देश्य से प्रस्तुत की गई हैं। कृपया इन्हें वास्तविक जीवन से जोड़कर न देखें। कहानी में दर्शाए गए किसी भी दृश्य, घटना या चित्र का वास्तविक जीवन में प्रयोग करना हानिकारक हो सकता है। इसके लिए न तो कहानी के लेखक और न ही प्रस्तुतकर्ता जिम्मेदार होंगे। इसलिए कृपया अपनी समझ, बुद्धि और विवेक का उपयोग करें।

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