live sex scene
लाइव सेक्स सीन मैंने देखा जब मैं मौसी के घर गया था मम्मी के साथ. मेरी मम्मी मस्त माल हैं. उनको देख कर जवान बूढ़े सब लंड खुजाते हैं. मेरे मौसा ने मेरी मम्मी को चोदा.
दोस्तो, मेरा नाम विशाल त्रिपाठी है.
आज मैं आपको बताऊंगा कि कैसे मेरे मौसा ने मेरी मां को चोदा.
सबसे पहले मैं आपको अपनी मां के बारे में बता दूँ.
मेरी मां का नाम रश्मि त्रिपाठी है.
उनका फिगर बहुत कड़क है.
एकदम गोरा बदन और 36-34-38 का साइज है.
मेरी मां देखने में एकदम ‘गर्म माल’ लगती हैं.
जब वे चलती हैं तो अच्छे अच्छों के लौड़े उनकी मादक जवानी को सलामी देते हैं.
मैं जब भी अपनी मां के साथ जाता था, तो मेरी नजरें आस पास खड़े नौजवानों और उम्रदराज मर्दों की टांगों के बीच में उनके फूलते लौड़ों पर ही रहती थी.
कुछ तो अपने लौड़े पकड़ कर ऐसे मसलने लगते थे मानो उनकी सोच यह हो कि मेरी मां उन्हें चोदने मिल जाएं तो वे खुली सड़क पर ही मेरी मां को नंगी करके चोद दें.
ये लाइव सेक्स सीन वाली बात उन दिनों की है, जब मेरी मौसी के लड़के की शादी आ गई थी.
मैं और मम्मी उसी शादी में गए हुए थे.
एक दिन की बात है, सभी खाना खाने के लिए बैठे हुए थे और मैं भी उनके साथ बैठ गया.
दोस्तो, उस दिन मेरा खाना खाने का बिल्कुल भी मन नहीं था … फिर भी मां ने जबरदस्ती करके मुझे खाना खिलाया.
तभी मौसा बोले- खाओगे नहीं तो बड़े कैसे होगे!
यह सुनकर मां हंस दी.
मौसा ने मां की तरफ अश्लीलता से देखा और आंख दबा दी.
मैं देख कर अनदेखा करते हुए खाना खाने लगा था.
तभी उतने में मौसा ने धीरे से मां से कहा- आज तैयार रहना!
मां भी मुस्कुरा दी.
मैं तुरंत समझ गया कि आज कुछ होने वाला है.
उस समय मैं जवान हुआ ही था, इसीलिए मौसा को लगा कि मैं कुछ समझ नहीं पाऊंगा लेकिन मैं उनका भी बाप था; सब समझ गया.
मैं आपको बता दूँ कि मैं और मां एक ही रूम में सोए हुए थे.
मैं ऊपर बेड पर सोया था और मां नीचे दरी बिछाकर सो रही थीं.
उस रात मैं मोबाइल में पोर्न देखने लगा.
रात के करीब 11 बज रहे थे और सभी सो गए थे.
मेरे मोबाइल का वोल्यूम ऑफ था और मैं चादर में उसे छिपा कर ब्लू-फिल्म देख रहा था ताकि मोबाइल की रोशनी से मां को पता न चले कि मैं जाग रहा हूँ.
तभी अचानक धीरे से गेट खुलने की आवाज आयी.
मैं फोन उल्टा रखकर तुरंत सोने का नाटक करने लगा.
कमरे में जीरो वाट का बल्ब जल रहा था इसलिए सब कुछ साफ-साफ दिखाई दे रहा था.
मैंने देखा कि मौसा एक प्लेट में 5 गुलाब जामुन लेकर आए थे.
वे धीरे से मां के बगल में लेट गए और एक गुलाब जामुन मां के होंठों पर रख दिया.
फिर वे दोनों फ्रेंच स्टाइल में किस करते हुए गुलाब जामुन को खाने लगे और मौसा, मम्मी की चुम्मियां लेने लगे.
फिर मौसा पीछे आ गए और उन्होंने धीरे धीरे करके मां की पूरी साड़ी और पेटीकोट दोनों उतार दिए.
मैंने देखा कि मां ने ब्रा पहनी थी, लेकिन पैंटी नहीं पहनी थी.
ऐसा लग रहा था जैसे उन्होंने अपनी चूत के बाल दो-तीन दिन पहले ही साफ किए हों.
उनकी गुलाबी चूत को देखकर मैं बिल्कुल पागल सा हो रहा था
इसके बाद मौसा ने 2 गुलाब जामुन मां की चूत पर पूरी तरह से मसल दिए और गुलाब जामुन का शीरा उनकी चूत की फांकों के बीच डाल दिया.
फिर वे नीचे को आए और मां की मीठी चूत में अपनी जुबान डालकर उसका स्वाद चखने लगे.
मां को भी अब चुत चुसवाने में मजा आने लगा था.
वे ‘उह … आह … आह … उम्म.’ की मादक आवाजें निकालने लगीं.
मौसा अपनी जुबान को चूत के अन्दर डालकर मेरी मां की चूत चुसाई के मजे ले रहे थे.
अच्छी तरह से चूत चाटने के बाद उन्होंने अपनी दो उंगलियों को मां की चूत में डालकर आगे-पीछे करना शुरू कर दिया, जिससे मेरी मां की चूत से ‘पिच-पिच.’ की आवाज आने लगी.
कुछ देर के बाद मौसा ने चूत में से उंगली निकाली और उसे अच्छे से चाटा.
ये सब देखकर मेरा मन कर रहा था कि अभी उठ जाऊं और उन लोगों से बोलूँ- क्या कर रहे हो आप लोग? शर्म नहीं आती आप लोगों को!
लेकिन फिर मैंने भी सोचा कि मेरी मम्मी क्या सोचेंगी मेरे बारे में कि उनके बेटे ने उनको बिना कपड़ों के दूसरे आदमी से चुदते हुए देखा.
बस यही सोचकर मैं लेटा रहा और जो हो रहा था उसे चुपचाप लाइव सेक्स सीन देखता रहा.
उसके बाद मौसा ने मां की ब्रा उतार दी.
उस समय तक मेरी मां के बूब्स बहुत बड़े और टाइट हो चुके थे.
मौसा मां की चूचियों पर टूट पड़े और अच्छे से दबा दबा कर मां की दोनों चूचियां को बारी बारी से पीने लगे.
मां को भी बहुत सुख प्राप्त हो रहा था, तो वे भी अपने हाथ से अपने दूध पकड़ पकड़ कर अपने दूध के निप्पल मौसा के मुँह में देती हुई उनको पिला रही थीं.
मौसा 15 मिनट तक मां की चूचियों से खेलते रहे और विदेशी स्टाइल में मां के होंठों को चूमते रहे.
मेरा भी लंड बहुत ज्यादा कड़क हो गया था.
जब मौसा मां के निप्पल को काट रहे थे, तो मां मादक आवाज में कराह कर रही थीं- आह काटो मत, ये तुम्हारे ही हैं आह … उम्म… आउच!
अब मौसा ने अपना अंडरवियर उतार दिया. उनका लंड बहुत कड़क हो गया था.
मौसा ने मां से कहा- चलो रानी, चूसो इसे!
पहले तो मां ने कहा कि मैं लौड़ा नहीं चूसती!
फिर मौसा के मनाने के बाद वे मान गईं और पूरे लंड को एक झटके में अपने मुँह में भर लिया.
मेरी मां इतना मस्त होकर मौसा का लंड चूस रही थीं जैसे वे कोई लॉलीपॉप चूस रही हों.
दस मिनट तक मौसा अपने लंड से मां के मुँह को चोदते रहे, फिर लंड बाहर निकाल लिया.
फिर मौसा ने अपने लंड को गुलाब जामुन के शीरे में अच्छी तरह से सान कर उसे मेरी मां की चूत पर सैट कर दिया और उनकी आंखों में देखते हुए एक ही झटके में पूरा लंड अन्दर तक ठांस दिया.
उन्होंने मेरी मां की बुर को लगभग फाड़ते हुए लंड जड़ तक पेल दिया था, इससे मेरी मां की तो जोर से ‘आह मर गई.’ की आवाज निकल गई.
मौसा ने समझ लिया था कि मेरी मां को ज्यादा दर्द हुआ है तो वे रुक गए थे और कुछ देर तक उनका लंड चूत में यूं ही घुसा रहा था.
उस समय मौसा मां की चुम्मियां ले रहे थे और चूची भी पी रहे थे.
कुछ देर बाद जब मां कुछ सामान्य हुईं, तो मौसा ने धीरे-धीरे अपना लंड आगे-पीछे करना चालू कर दिया.
अब शायद मेरी मां को भी उनके लंड की चोटें अच्छी लगने लगी थीं.
उनके मुँह से ‘आह … उह … आह … उह.’ की रोमांचित कर देने वाली आवाजें निकल रही थीं.
अब मां भी अपनी गांड उठा-उठाकर अच्छे से चुदाई का आनन्द ले रही थीं.
जब मां की चूत की चुदाई हो रही थी, तब उनकी चूत से ‘पच-पच’ की सेक्सी आवाज निकल रही थी.
आधा घंटा की घमासान चुदाई के बाद मौसा मां की चूत में ही झड़ गए और वे लंबी लंबी सांसें लेते हुए मेरी मां की चूचियों से खेलने लगे.
कुछ देर तक चूचियों से खेलने के बाद उन्होंने अपना लंड मां की चुत से निकाला और उनके मुँह में डाल दिया.
मां भी लंड में लगे वीर्य के अलावा गुलाब जामुन के शीरे व अपनी चुत के रस से मिश्रित माल को चाटने लगीं.
मौसा भी अपने लंड की चुसाई का आनन्द लेने लगे.
कुछ ही देर में उनका लंड फिर से कड़क हो गया था, तो वे फिर से मां की चूत चाटने लगे थे.
शायद उन दोनों का अभी चुदाई से मन नहीं भरा था तो अगले राउंड की चुदाई की तैयारी होने लगी थी.
कुछ देर के बाद मैंने देखा कि उन्होंने मां को पेट के बल लेटा दिया, शायद उनका इरादा मेरी मां की गांड मारने का था.
शायद मेरी मां ने भी उनका इरादा समझ लिया था तो मां ने उनसे कहा- आज तक मैंने अपनी गांड नहीं चुदाई है, मुझे बहुत दर्द होगा!
मौसा ने कहा- आराम से करूँगा, नहीं दुखेगा!
इतना कहकर मौसा जी ने नारियल का तेल मां की गांड के छेद पर लगाया और अपना लंड उनकी गांड के छेद पर रगड़ने लगे.
मां को बहुत ही मज़ा आने लगा था, उन्होंने अपने चूतड़ फैलाते हुए उठा दिए.
मां की गांड का छेद खुल गया था तो उतने में ही मौसा ने तुरंत एक कड़क झटके के साथ अपना पूरा लंड मां की गांड में पेल दिया.
मां चिल्ला पड़ीं- ऊई मम्मी से मर गई आह बहुत दर्द हो रहा है!
मौसा ने कुछ नहीं किया और वे लंड पेल कर पड़े रहे.
कुछ देर बाद वे मां की चूचियां मसल रहे थे और चुम्मियां ले रहे थे.
कुछ देर बाद जब मां का दर्द कम हुआ, तो मौसा ने अपना लंड निकाला और उस पर बहुत सारा नारियल तेल लगाकर मां की गांड में पुनः पेल दिया.
इस बार लंड आराम से चला गया और मां को भी मज़ा आने लगा.
वे भी ‘आह उह.’ करती हुई मज़े ले रही थीं.
उसके बाद मौसा ने मां को करवट के बल लेटा दिया.
अब उनका इरादा एक साथ मां की चूत और गांड, दोनों को ठोकने का था.
उन्होंने मां का एक पैर ऊपर उठा दिया और अपना लंड उनकी गांड में डाल दिया.
साथ में वे अपनी दो उंगलियों को मां की चूत में डालकर उनकी चूत भी चोद रहे थे.
जब मां की गांड और चूत दोनों छेद साथ में चुद रहे थे, तब मां को सबसे ज़्यादा मज़ा आ रहा था.
वे मौसा को अपनी चूचियां पिला रही थीं और ‘आह उह’ करके मस्त आवाज़ें निकाल रही थीं.
मौसा बोले- मजा आ रहा है कि नहीं?
मां बोलीं- सच में आप मस्त चोदते हो जीजा जी, इसीलिए तो शादी में शामिल होने के लिए पहले से आ गई हूँ.
मौसा बोले- तुम्हारी बहन को भी पता है कि तुम मुझसे चुदवाती हो?
मां ने हंस कर मौसा को चूम लिया और बोलीं- हां, दीदी को सब पता है.
आधा घंटा चोदने के बाद, मौसा ने अपना सारा माल मां की गांड में ही डाल दिया.
फिर वे धीरे से गेट खोलकर बाहर चले गए.
मम्मी अभी भी पूरी नंगी होकर सो रही थीं.
अब मैंने हिम्मत करके धीरे से अपना हाथ उनकी चूत पर रखा. मां की चूत बहुत गर्म थी.
मैंने धीरे-धीरे अपनी उंगली मम्मी की चूत में डाल दी. मेरी दो उंगलियां उनकी चूत में तुरंत चली गईं; अन्दर बहुत गर्माहट थी.
फिर धीरे से मैंने अपनी उंगली निकाल ली.
उन्हें पता चला या नहीं, मैं नहीं जानता.
उस समय रात के ढाई बज रहे थे, मुझे भी नींद आ गई और मैं भी सो गया.
इस तरह से उस रात मौसा ने मेरी आंखों के सामने मेरी मां चोद दी थी.
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