मेरा ऑफिस बन गया रंडी खाना-2

office mein randi chudai kahani

अगर आपने फर्स्ट पार्ट नहीं पढ़ी है तो पहले फर्स्ट पढ़ें ताकि आप ज्यादा आनंद ले सकें मेरा ऑफिस बन गया रंडी खाना

प्रिया ने सीईओ साहब का हाथ पकड़कर अपने कमरे की तरफ खींचना शुरू कर दिया।

सीईओ साहब पहले तो झिझक रहे थे, लेकिन प्रिया की आंखों में वो कामुकता देखकर वो भी उसके साथ चलने लगे।

प्रिया ने गुलाबी रंग की छोटी ड्रेस पहनी हुई थी जो उसके उभारों को बखूबी दिखा रही थी।

उसके दूध कसकर ड्रेस में कैद थे और हर कदम पर वो हिल रहे थे।

“साहब, आइए ना,” प्रिया ने मीठी आवाज़ में कहा और सीईओ को अपने बिस्तर पर बैठा दिया।

कमरे में हल्की सी रोशनी थी।

अर्जुन ने बाहर से दरवाज़ा बंद कर दिया था और वो अंदर आकर एक कोने में खड़ा हो गया।

उसे ये सब देखना था।

प्रिया सीईओ के पास आकर बैठ गई। उसने धीरे से अपना हाथ सीईओ की जांघ पर रख दिया।

सीईओ साहब का शरीर कांपने लगा।

वो 45 साल के थे, लेकिन अभी भी काफी फिट दिखते थे।

“साहब, आप तो बहुत हैंडसम हो,” प्रिया ने उनके कान में फुसफुसाते हुए कहा और उसका हाथ उनकी छाती पर फिरने लगा।

सीईओ ने गहरी सांस ली, “प्रिया, ये ठीक नहीं है…”

“क्यों साहब? मैं तो बस आपका ध्यान रखना चाहती हूँ,” प्रिया ने कहा और उसने अपनी ड्रेस की स्लाइड एक तरफ कर दी।

उसके सफेद दूध अब आंखों के सामने थे। सीईओ की आंखें चौड़ी हो गईं।

“प्रिया… ये…” सीईओ हकलाने लगे।

“शhh… कुछ मत बोलिए,” प्रिया ने उनके होठों पर अपनी उंगली रख दी और फिर धीरे से अपने दोनों दूध बाहर निकाल दिए।

उसके गोल-गोल आम जैसे दूध सीईओ के मुँह के सामने थे।

गुलाबी निप्पल खड़े हो चुके थे।

सीईओ की सांसें तेज़ हो गईं। वो खुद को रोक नहीं पाए और उन्होंने एक दूध को अपने हाथ में ले लिया।

वो मुलायम था, बिल्कुल रुई जैसा।

उन्होंने धीरे से उसे दबाया तो प्रिया ने “आह्ह्ह” की आवाज़ निकाली।

“साहब, और ज़ोर से पकड़िए ना,” प्रिया ने कहा और सीईओ ने दोनों हाथों से उसके दूधों को पकड़ लिया।

वो उन्हें मसलने लगे, दबाने लगे, खींचने लगे।

प्रिया ने सीईओ का शर्ट खोलना शुरू किया।

उसने उनकी छाती पर अपने नाखून चलाए।

फिर वो नीचे उतरकर उनकी पैंट के ऊपर से उनका लंड सहलाने लगी।

सीईओ का लंड पैंट के अंदर खड़ा हो चुका था, एक बड़ी सी उभार बन रही थी।

“वाह साहब, आपका तो बहुत बड़ा है,” प्रिया ने शरारती मुस्कान के साथ कहा।

उसने सीईओ की पैंट की चेन खोली और अंदर हाथ डाल दिया।

एक मोटा, गरम लंड उसके हाथ में आ गया।

वो उसे बाहर निकालकर देखने लगी।

लगभग 7 इंच का काला, मोटा लंड था, जिसकी नसें फूली हुई थीं।

प्रिया ने उसे अपने मुँह में ले लिया। वो उसे चूसने लगी, जीभ से चाटने लगी।

सीईओ ने अपना सिर पीछे की तरफ झुका दिया और आंखें बंद कर लीं। वो आहें भरने लगे।

“उम्म्म… हाँ… बहुत अच्छा लग रहा है,” सीईओ ने कहा।

प्रिया तेज़ी से उनका लंड चूस रही थी।

वो उसे पूरा गले तक ले जा रही थी और फिर बाहर निकाल रही थी।

उसके थूक से लंड चमकने लगा था।

अर्जुन कोने में खड़ा होकर ये सब देख रहा था।

उसका भी लंड खड़ा हो चुका था।

उसने अपनी पैंट के ऊपर से अपने लंड को सहलाना शुरू कर दिया।

कुछ देर बाद प्रिया ने सीईओ का लंड मुँह से बाहर निकाला और खड़ी हो गई।

उसने अपनी ड्रेस पूरी तरह उतार दी। वो अब पूरी नंगी थी।

उसकी चिकनी बुर दिख रही थी, जिस पर एक भी बाल नहीं था। वो गुलाबी रंग की थी और गीली हो चुकी थी।

प्रिया ने सीईओ को भी पूरी तरह नंगा कर दिया। वो उनके ऊपर बैठ गई और उनके लंड को अपनी बुर के मुँह पर रखकर धीरे-धीरे अंदर लेने लगी।

“आह्ह्ह… साहब… आपका तो बहुत मोटा है,” प्रिया ने कहा और पूरा लंड अपनी बुर में समा लिया।

वो ऊपर-नीचे होने लगी।

उसके दूध हिल रहे थे, सीईओ ने उन्हें पकड़ लिया और दबाने लगे।

प्रिया तेज़ी से कूद रही थी, उसकी बुर से आवाज़ें आ रही थीं “फच… फच… फच…”

“ओह्ह्ह… प्रिया… तुम बहुत टाइट हो,” सीईओ ने कहा।

“हाँ साहब… और आपका लंड भी तो बहुत मोटा है… मेरी बुर फट रही है,” प्रिया ने कहते हुए अपनी स्पीड और तेज़ कर दी।

लगभग 15 मिनट तक ये चलता रहा।

प्रिया अलग-अलग पोज़ में सीईओ से चुदवा रही थी।

कभी वो कुत्ते की तरह बनकर उनसे पीछे से चुदवा रही थी, कभी वो उनके ऊपर सवार होकर कूद रही थी।

अंत में सीईओ झड़ने वाले थे।

प्रिया ने उनका लंड बाहर निकालकर अपने मुँह में ले लिया।

सीईओ ने प्रिया के मुँह में अपना सारा माल छोड़ दिया।

गरम-गरम वीर्य प्रिया के गले से नीचे उतर गया।

प्रिया ने सब कुछ पी लिया और उसने सीईओ का लंड चाट-चाटकर साफ कर दिया।

“बहुत मज़ा आया साहब,” प्रिया ने कहा।

सीईओ साहब थककर बिस्तर पर लेट गए।

उनके चेहरे पर संतुष्टि की मुस्कान थी।

अर्जुन ये सब देखकर समझ गया था कि अब उसकी योजना पूरी तरह काम कर रही है।

सीईओ अब उसकी तरफ थे और शर्मा का खेल खत्म हो चुका था।

कुछ देर बाद जब सीईओ साहब तैयार हो गए, तो उन्होंने अर्जुन से कहा, “अर्जुन, तुमने बहुत अच्छा काम किया है। कल से शर्मा यहाँ नहीं आएगा। और तुम… तुम मेरे विशेष सहायक बनोगे।”

अर्जुन ने मुस्कुराते हुए कहा, “धन्यवाद साहब।”

प्रिया ने कपड़े पहन लिए और वो भी मुस्कुरा रही थी।

उसे भी पता था कि अब कंपनी में नया खेल शुरू होने वाला है, और इस बार अर्जुन के नियमों से।

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नोट: यहां पोस्ट की गई सभी कहानियां केवल मनोरंजन के उद्देश्य से प्रस्तुत की गई हैं। कृपया इन्हें वास्तविक जीवन से जोड़कर न देखें। कहानी में दर्शाए गए किसी भी दृश्य, घटना या चित्र का वास्तविक जीवन में प्रयोग करना हानिकारक हो सकता है। इसके लिए न तो कहानी के लेखक और न ही प्रस्तुतकर्ता जिम्मेदार होंगे। इसलिए कृपया अपनी समझ, बुद्धि और विवेक का उपयोग करें।

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