आंटी को पहले होटल और फिर घर पर चोदा

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मेरा नाम विजय है। मेरी उम्र 23 साल है। मैं नोएडा सेक्टर 63 का रहने वाला हूं।

मेरी हाइट 5 फीट 7 इंच है और मेरे लंड का साइज 7 इंच है। जिम जाने की वजह से मेरी बॉडी काफी अच्छी और आकर्षक बन गई है।

मेरे शरीर पर स्पष्ट तौर पर छाती और पेट की मांसपेशियां दिखती हैं, जो लड़कियों को काफी पसंद आती हैं।

मैं एक कॉल सेंटर में नौकरी करता हूं जहां मेरी सैलरी भी अच्छी है। साथ में काम करने वाली कई लड़कियां मुझे पसंद करती हैं और मैं पहले ही कई लड़कियों को चोद चुका हूं।

एक बार कोई लड़की मुझसे चुदवा लेती है तो फिर कभी नहीं भूलती, क्योंकि मेरा लंड साइज और सेक्स का तरीका दोनों ही उन्हें बेहद पसंद आते हैं।

जब भी मौका मिलता है, वे फिर से मुझसे चुदवाने के लिए तरसती हैं।

यह कहानी मेरे मकान में किराए पर रहने वाली बिमला आंटी की है। उनकी उम्र लगभग 47-48 साल होगी, लेकिन उनका फिगर बहुत ही खूबसूरत है – 36-32-34।

वह काफी गोरी हैं और उनके बाल अभी भी एकदम काले हैं। देखने में वह लगती हैं जैसे कोई 35 साल की युवती हो।

उनके चेहरे पर अभी भी वो निखार है जो किसी भी मर्द को उनकी तरफ आकर्षित कर सकता है।

बिमला आंटी के पति का कुछ साल पहले देहांत हो गया था और वह अकेली रहती थीं। उनके कोई बच्चे नहीं थे।

वह एक प्राइवेट कंपनी में काम करती थीं।

उनके व्यक्तित्व में एक अलग ही गरिमा थी – वह हमेशा साड़ी पहनती थीं और उनकी साड़ी के पल्लू में जो गहराई होती थी, वह किसी भी युवा लड़की से कम नहीं थी।

मैं पहली बार जब उन्हें देखा तभी से मैं उनका दीवाना हो गया था।

उनके बड़े-बड़े दूध, कमर की पतलाई और फिर उनकी गांड – सब कुछ मुझे मदहोश कर देता था।

मैं अक्सर उन्हें घूरता रहता था, खासकर जब वह सुबह-सुबह बाल्कनी में कपड़े सुखाती थीं और उनकी साड़ी का पल्लू कंधे से सरक जाता था, तो उनकी गोरी बाहें और गर्दन देखकर मेरा लंड खड़ा हो जाता था।

मैं उन्हें चोदने के बारे में सोचने लगा। मैंने कई बार उनके बारे में फंतासीज सोची – कैसे मैं उनकी साड़ी खोलूंगा, कैसे उनके दूध दबाऊंगा, कैसे उनकी बुर में अपना 7 इंच का लंड घुसेड़ूंगा।

लेकिन मुझे समझ नहीं आ रहा था कि यह काम कैसे करूं, क्योंकि आंटी बहुत ही संस्कारी और शालीन महिला लगती थीं।

एक दिन मेरा भाग्य चमका। मैं अपने कमरे में बैठा था जब मुझे बाथरूम से कुछ आवाजें सुनाई दीं।

मैंने देखा कि बिमला आंटी नहाने जा रही थीं। वहां एक पुराना बाथरूम था जिसकी दीवार में एक छोटा सा टूटा हुआ छेद था जो मेरे कमरे की तरफ खुलता था।

मैंने कभी ध्यान नहीं दिया था, लेकिन उस दिन मेरी नजर उस पर पड़ी।

जब आंटी अंदर गईं और नहाने लगीं, तो मैंने उस छेद से झांकने की कोशिश की।

पहले तो कुछ साफ नहीं दिखा, लेकिन जब मैंने सही एंगल पाया तो मैं तो एकदम से हैरान रह गया।

बिमला आंटी बिल्कुल नंगी खड़ी थीं और पानी की धारा उनके गोरे बदन पर गिर रही थी।

उनका शरीर देखकर मेरा दिल धड़कने लगा। उनके बड़े-बड़े दूध पानी की बौछारों से भीगे हुए थे और उनके निप्पल कड़े होकर खड़े थे।

उनकी कमर बहुत पतली थी और नीचे उनकी बुर पर थोड़ी सी झांटें थीं जो गीली होकर चिपकी हुई थीं। उनकी गांड बहुत मोटी और उभरी हुई थी – एकदम सेक्सी।

मैं उन्हें देखता रहा। वह अपने हाथों से अपने शरीर पर साबुन लगा रही थीं।

जब उन्होंने अपने दूधों पर साबुन लगाया तो मेरा लंड पैंट में तनकर खड़ा हो गया।

वह अपने दूधों को मल रही थीं और साबुन के झाग उनके गोरे बदन पर फैल रहे थे।

फिर उन्होंने नीचे हाथ ले जाकर अपनी बुर पर भी साबुन लगाया। मैं तो उन्हें देखकर पागल हो रहा था।

मैंने उसी समय फैसला कर लिया कि मुझे इस औरत को किसी भी तरह पटाना है और चोदना है।

मैं रोज उसी समय बाथरूम के पास रहने लगा जब आंटी नहाने जाती थीं और उन्हें छिपकर देखता रहता।

कभी-कभी वह अपनी बुर में उंगली भी करती थीं जो देखकर मेरा लंड पागलों की तरह झड़ जाता था।

मैंने आंटी को पटाने की योजना बनाई। मैंने सोचा कि सीधे तरीके से नहीं, बल्कि धीरे-धीरे उनका भरोसा जीतूंगा।

मैंने उनसे बातचीत शुरू की – सुबह नमस्ते करना, कभी-कभी उनके लिए सामान लाना, उनकी मदद करना। आंटी भी मुझसे धीरे-धीरे घुलने-मिलने लगीं।

एक दिन मैंने देखा कि आंटी उदास बैठी हैं। मैंने पूछा तो पता चला कि उनके ऑफिस में कुछ प्रॉब्लम है।

मैंने उन्हें चाय बनाकर दी और उनसे बात की। उस दिन हमारी बातचीत काफी देर तक चली और मैंने उन्हें हंसाया भी।

आंटी ने मुझे धन्यवाद दिया और मुझे अपने बेटे जैसा कहा, लेकिन मेरे मन में तो और ही ख्याल थे।

धीरे-धीरे मैंने और करीबी होने की कोशिश की।

जब भी मौका मिलता, मैं उनके पास से गुजरता और हल्का सा टच करता – कभी कंधा, कभी हाथ, कभी कमर।

शुरू में आंटी कुछ नहीं बोलती थीं, लेकिन धीरे-धीरे वह भी मेरी इस हरकत को नोटिस करने लगीं।

एक दिन मैंने जानबूझकर अपना हाथ उनके बूब्स पर लगा दिया। वह चौंक गईं लेकिन मैंने कहा कि सॉरी, गलती से लग गया।

आंटी ने कुछ नहीं कहा लेकिन उनके चेहरे पर शर्मिंदगी दिखी। मुझे लगा कि वह मना नहीं कर रही हैं, इसका मतलब है कि उनके मन में भी कुछ है।

एक रात को मैं अपने कमरे में अकेला था और मूवी देख रहा था। आंटी का कमरा मेरे बगल में था।

अचानक बिजली चली गई और आंटी डरकर मेरे कमरे में आ गईं। अंधेरे में हम दोनों अकेले थे। मैंने उन्हें बैठने के लिए कहा और हम बात करने लगे।

अंधेरे में मैंने हिम्मत करके उनका हाथ पकड़ लिया। आंटी ने हाथ खींचने की कोशिश की लेकिन मैंने जोर से पकड़ा रखा।

मैंने कहा, “आंटी, मैं आपको बहुत पसंद करता हूं।”

आंटी ने कहा, “पागल मत बनो, मैं तुम्हारी मां की उम्र की हूं।”

मैंने कहा, “उम्र से क्या फर्क पड़ता है? आप बहुत खूबसूरत हैं और मैं आपसे प्यार करता हूं।” यह कहकर मैंने उनकी ओर झुककर उनके गाल पर चूमा।

आंटी शर्मा गईं लेकिन मना नहीं किया। मैंने हिम्मत बढ़ाई और उनके होंठों पर किस कर दिया।

पहले तो आंटी ने थोड़ा विरोध किया, लेकिन फिर वह भी मेरे साथ देने लगीं।

हम दोनों एक-दूसरे को किस करने लगे। मैंने उनकी साड़ी का पल्लू खींचा और उनके गले को चूमने लगा।

आंटी की सांसें तेज हो गईं और वह मेरे बालों में हाथ फेरने लगीं।

मैंने उनकी ब्लाउज के ऊपर से ही उनके दूध दबाने शुरू कर दिए।

आंटी के मुंह से सिसकारियां निकलने लगीं – “उह्ह्ह… अह्ह्ह… विजय… धीरे…” मैं उनके दूधों को मसल रहा था और वह मजे ले रही थीं। लेकिन तभी बिजली आ गई और आंटी डरकर अपने कमरे में चली गईं।

अगले दिन से मैंने आंटी को और पटाने की कोशिश की।

मैं उन्हें मैसेज करता, उनसे फ्लर्ट करता और उन्हें यह समझाने की कोशिश करता कि हम दोनों एक-दूसरे को चाहते हैं।

कुछ दिनों बाद आंटी ने मान लिया और कहा कि वह भी मुझे पसंद करती हैं, लेकिन यहां नहीं, कहीं बाहर चलें।

मैंने तुरंत एक होटल में रूम बुक कर लिया। शाम को मैं और बिमला आंटी होटल पहुंचे।

वह साड़ी में बहुत खूबसूरत लग रही थीं। होटल के रूम में जाते ही मैंने दरवाजा बंद किया और आंटी को अपनी बाहों में भर लिया।

मैंने बिमला आंटी को कसकर अपनी बाहों में जकड़ लिया और उनके होंठों पर अपने होंठ रख दिए।

वह पहले तो शर्मा रही थीं, लेकिन मैंने जोर से उनके होंठ चूसने शुरू कर दिए। मेरा जीभ उनके मुंह के अंदर घुस गया और उनकी जीभ से खेलने लगा।

आंटी भी अब गर्म हो चुकी थीं और मेरा साथ दे रही थीं – उनका हाथ मेरे बालों में था और वह मेरे होंठों को चूस रही थीं।

“आंटी, आज मैं आपको पूरी तरह चोदूंगा,” मैंने उनके कान में फुसफुसाते हुए कहा।

“हां विजय, चोदो मुझे… बहुत दिनों से किसी ने नहीं चोदा है मुझे… मेरी बुर को शांत करो,” आंटी ने शर्माते हुए कहा।

मैंने उनकी साड़ी खोलनी शुरू की। उन्होंने हल्की गुलाबी रंग की साड़ी पहनी थी जो उनके गोरे बदन पर बहुत अच्छी लग रही थी।

मैंने साड़ी का पल्लू खींचा और उनकी ब्लाउज और पेटीकोट दिखने लगा।

उनकी कमर बहुत पतली थी और पेटीकोट उनकी नाभि से थोड़ा नीचे था, जिससे उनकी गोरी तोंद दिख रही थी।

मैंने उनकी कमर पर हाथ फेरते हुए कहा, “आंटी, आपकी कमर तो बिल्कुल लड़कियों जैसी है… कितनी सेक्सी लग रही हो आप।”

“अह्ह… विजय… शर्मा मत दिलाओ… जल्दी से नंगी कर दो मुझे,” आंटी ने कहा।

मैंने उनकी साड़ी पूरी तरह खोल दी और फिर उनका पेटीकोट भी नीचे खींच दिया।

अब वह सिर्फ ब्लाउज और ब्रा-पैंटी में थीं। उनके बड़े-बड़े दूध ब्लाउज से बाहर निकलने को तरस रहे थे।

मैंने उनकी ब्रा के ऊपर से ही उनके दूधों को दबाना शुरू कर दिया।

“क्या मस्त दूध हैं आपके आंटी… इतने बड़े और मुलायम… आज इन्हें खूब चूसूंगा,” मैंने कहा।

“हां विजय… दबाओ इन्हें… मेरे निपल्स कड़े हो गए हैं… चूसो इन्हें,” आंटी ने कहा।

मैंने उनकी ब्लाउज के हुक खोलने शुरू किए। एक-एक करके सारे हुक खोल दिए और ब्लाउज हटा दिया।

अब उनकी ब्रा दिख रही थी जो उनके बड़े दूधों को संभाले हुए थी। मैंने पीछे से ब्रा का हुक खोला और उनके दूध आजाद हो गए।

वाह! क्या नजारा था! बिमला आंटी के दूध बिल्कुल गोल और बड़े थे, उनके निप्पल गुलाबी रंग के थोड़े बड़े थे और कड़े होकर खड़े थे।

मैंने तुरंत अपना मुंह उनके एक दूध पर लगा दिया और चूसने लगा।

“उम्म्म… अह्ह्ह… विजय… और जोर से चूसो… मेरे निपल्स काट लो… बहुत मजा आ रहा है,” आंटी ने मेरे सिर को अपने दूधों पर दबाते हुए कहा।

मैं एक दूध को मुंह में लेकर चूस रहा था और दूसरे को हाथ से मसल रहा था।

आंटी के मुंह से सिसकारियां निकल रही थीं – “अह्ह्ह… उह्ह्ह… हां… और जोर से… रंडी की तरह चूसो मेरे दूध…”

मैंने दूसरा दूध भी मुंह में लिया और उसके निप्पल को जोर से चूसा।

आंटी के निप्पल बहुत संवेदनशील थे, थोड़ा चूसते ही वह पागल हो रही थीं। मैंने उनके दोनों दूधों को बारी-बारी से चूसा, काटा, और मसला।

“आंटी, आपके दूधों का दूध तो बहुत मीठा है… मजा आ गया,” मैंने कहा।

“हां विजय… पी लो मेरा दूध… सारा दूध पी जाओ… मेरी चूचियों को खा जाओ,” आंटी ने कहा।

मैंने उनके दूधों के बीच में अपना चेहरा घुसा दिया और दोनों दूधों को एक साथ दबाने लगा।

वह बहुत गरम हो चुकी थीं और मेरे सिर को अपने दूधों पर जोर-जोर से दबा रही थीं।

अब मैंने नीचे की ओर रुख किया। आंटी ने सफेद रंग की लेस वाली पैंटी पहनी थी जो उनकी बुर के ऊपर थी।

मैंने उनकी पैंटी के ऊपर से ही उनकी बुर को सहलाना शुरू किया। वह गीली हो चुकी थीं और पैंटी पर गीली का निशान दिख रहा था।

“आंटी, आपकी बुर तो पहले से ही गीली हो गई है… कितनी प्यासी है आपकी बुर,” मैंने कहा।

“हां विजय… बहुत प्यासी है… जल्दी से निकालो अपना लंड और दो इसे… चोदो मुझे,” आंटी ने कहा।

मैंने उनकी पैंटी नीचे खींची और उतार दी। अब बिमला आंटी पूरी तरह नंगी थीं।

आज उनकी बुर को बिलकुल करीब से देखकर मैं तो हैरान रह गया – बिल्कुल गुलाबी, चिकनी, और थोड़ी झांटें जो सेक्सी लग रही थीं। उनकी बुर के होट बाहर को उभरे हुए थे और बीच से पानी टपक रहा था।

मैंने उनकी जांघों पर हाथ फेरा और कहा, “क्या मस्त जांघें हैं आपकी… इतनी मुलायम… और यह बुर तो बिल्कुल लड़की जैसी है… 48 साल की उम्र में भी इतनी टाइट बुर…”

“चुप करो और चाटो मेरी बुर… बहुत दिनों से किसी ने नहीं चाटी… खा जाओ इसे,” आंटी ने अपनी बुर मेरे मुंह पर घुसाते हुए कहा।

मैंने आंटी को बेड पर लिटा दिया और उनकी टांगें फैला दीं।

उनकी बुर अब पूरी तरह से खुली थी और अंदर से गुलाबी रंग दिख रहा था। मैंने अपनी जीभ बाहर निकाली और उनकी बुर पर लगा दी।

“उह्ह्ह… अह्ह्ह… हां… विजय… और अंदर डालो जीभ… चाटो मेरी बुर को… रंडी की तरह चाटो,” आंटी चिल्ला उठीं।

मैंने उनकी बुर के होटों को चूमा और फिर जीभ अंदर घुसा दी। उनकी बुर का स्वाद बहुत अच्छा था – थोड़ा खट्टा और नमकीन।

मैंने उनकी बुर को अंदर तक चाटना शुरू कर दिया। मेरी जीभ उनकी बुर के अंदर-बाहर हो रही थी और आंटी पागलों की तरह चीख रही थीं।

“अह्ह्ह… मादरचोद… चाट मेरी बुर… और जोर से चाट… बहुत मजा आ रहा है… उह्ह्ह… हां… और अंदर… अपनी जीभ से चोद मेरी बुर को,” आंटी गाली देते हुए कह रही थीं।

मैंने उनकी बुर के साथ-साथ उनकी गांड को भी चाटना शुरू कर दिया।

मेरी जीभ उनकी बुर से गांड तक घूम रही थी। आंटी ने अपनी टांगें और फैला दीं और मेरा सिर अपनी बुर पर दबा दिया।

“खा जा मेरी बुर… पी जा इसका सारा रस… मैं झड़ने वाली हूं… और जोर से चाटो,” आंटी ने कहा।

मैंने उनकी बुर के अंदर अपनी जीभ डालकर उसे चोदना शुरू कर दिया।

साथ में मैं उनकी क्लिटoris को भी चूस रहा था। आंटी का शरीर कांपने लगा और वह झड़ गईं।

उनकी बुर से पानी की धार निकलकर मेरे मुंह में भर गई। मैंने उनका सारा रस पी लिया।

“वाह आंटी… आपकी बुर का पानी तो बहुत मीठा है… और दो इसे… मुझे और चाहिए,” मैंने कहा।

“बस करो विजय… अब मुझसे रहा नहीं जा रहा… अपना लंड निकालो और चोदो मुझे,” आंटी ने कहा।

अब मेरी बारी थी। मैंने अपनी शर्ट उतारी और अपनी जींस खोली।

आंटी मेरे बॉडी को देखकर मुग्ध हो गईं। मेरी छाती की मांसपेशियां, पेट का सिक्स पैक – सब कुछ उन्हें बहुत पसंद आ रहा था।

“वाह विजय… क्या बॉडी है तुम्हारी… बिल्कुल हीरो जैसी… और अब वो नीचे वाला समान दिखाओ,” आंटी ने कहा।

मैंने अपनी अंडरवियर खोली और मेरा 7 इंच का लंड बाहर निकल आया।

वह पूरी तरह से खड़ा था और लाल हो चुका था। आंटी उसे देखकर हैरान रह गईं।

“इतना बड़ा लंड! विजय… यह तो मेरे पति से भी बड़ा है… मुझे डर लग रहा है… यह मेरी बुर में जाएगा तो मैं फट जाऊंगी,” आंटी ने डरते हुए कहा।

“डरो मत आंटी… थोड़ा दर्द होगा लेकिन बहुत मजा आएगा… मैं आराम से डालूंगा,” मैंने कहा।

आंटी ने मेरे लंड को हाथ में पकड़ा और सहलाने लगीं। उनके हाथ का स्पर्श मेरे लंड पर बहुत अच्छा लग रहा था।

फिर उन्होंने मेरे लंड के सुपाड़े को चूमा।

“चूसो इसे आंटी… अपने मुंह में लो मेरा लंड,” मैंने कहा।

आंटी ने मेरे लंड को अपने मुंह में ले लिया और चूसने लगीं। वह पहले धीरे-धीरे चूस रही थीं लेकिन फिर गति बढ़ा दी।

मेरा लंड उनके मुंह के अंदर-बाहर हो रहा था और वह मजे से चूस रही थीं।

“उम्म्म… चुप… चुप… अह्ह्ह… क्या मस्त चूस रही हो आंटी… और जोर से चूसो… मेरा पूरा लंड अपने मुंह में लो,” मैंने उनके सिर को पकड़कर अपने लंड पर दबाते हुए कहा।

आंटी ने मेरे पूरे लंड को मुंह में ले लिया और गले तक ले जाने की कोशिश की।

वह मेरे लंड को जीभ से चाट रही थीं और चूस रही थीं। मेरा लंड उनके मुंह में तनकर खड़ा था।

“हां… रंडी की तरह चूसो… मेरा लंड खा जाओ… बहुत मजा आ रहा है… अह्ह्ह…” मैंने कहा।

आंटी ने मेरे लंड को और जोर से चूसना शुरू कर दिया।

वह मेरे लंड के नीचे की तरफ भी जीभ से चाट रही थीं और मेरे अंडकों को भी चूम रही थीं। मैं तो स्वर्ग में पहुंच गया था।

“आंटी… रुक जाओ… नहीं तो मैं झड़ जाऊंगा… अभी मुझे आपकी बुर चोदनी है,” मैंने कहा।

मैंने आंटी को बेड पर लिटा दिया और उनकी टांगें फैला दीं।

उनकी बुर अब फिर से गीली हो चुकी थी। मैंने अपने लंड को उनकी बुर के मुहाने पर रखा और धीरे से धक्का दिया।

“अह्ह्ह… दर्द हो रहा है… धीरे डालो… बहुत मोटा है तुम्हारा लंड,” आंटी ने कहा।

मैंने धीरे-धीरे अपना लंड अंदर डालना शुरू किया। उनकी बुर बहुत टाइट थी लेकिन गीली होने की वजह से लंड अंदर जा रहा था।

थोड़ा सा लंड अंदर गया तो मैंने रुककर उन्हें किस कर लिया।

“बस थोड़ी देर और… फिर मजा आएगा,” मैंने कहा।

फिर मैंने एक जोर का धक्का दिया और मेरा आधा लंड अंदर घुस गया।

आंटी के मुंह से चीख निकली – “अह्ह्ह… माँ… बहुत दर्द हो रहा है… रुक जाओ…”

मैंने थोड़ी देर रुककर उनके दूध दबाए और फिर धीरे-धीरे अपना पूरा लंड अंदर डाल दिया।

अब मेरा 7 इंच का लंड पूरी तरह से उनकी बुर में समा चुका था।

“अब कैसा लग रहा है आंटी?” मैंने पूछा।

“अह्ह्ह… अब ठीक है… थोड़ा दर्द है लेकिन अच्छा लग रहा है… अब हिलो अपना लंड… चोदो मुझे,” आंटी ने कहा।

मैंने धीरे-धीरे अपना लंड अंदर-बाहर करना शुरू किया। आंटी की बुर बहुत टाइट थी और मेरे लंड को कसकर पकड़े हुए थी।

मैं धीरे-धीरे धक्के लगा रहा था और आंटी भी नीचे से अपनी कमर उठाकर मेरा साथ दे रही थीं।

“अह्ह्ह… हां… विजय… और जोर से चोदो… बहुत मजा आ रहा है… तुम्हारा लंड बहुत अच्छा है… मेरी बुर फाड़ दो… रंडी बना दो मुझे,” आंटी चिल्ला रही थीं।

मैंने अपनी गति बढ़ा दी। अब मैं तेजी से अपना लंड उनकी बुर में अंदर-बाहर कर रहा था।

बेड की चरपराहट की आवाज और आंटी की सिसकारियां कमरे में गूंज रही थीं।

“चोदो… और जोर से चोदो… मादरचोद… बहनचोद… फाड़ दो मेरी बुर को… अह्ह्ह… उह्ह्ह…” आंटी गाली देते हुए कह रही थीं।

मैंने उनके दोनों पैर अपने कंधों पर रख लिए और और गहरे धक्के लगाने शुरू कर दिए। मेरा लंड अब उनकी बुर के सबसे गहरे हिस्से को छू रहा था।

“विजय… मैं झड़ने वाली हूं… और जोर से चोदो… मत रुको… अह्ह्ह… हां… आ गया… मजा…” आंटी चीखीं और उनकी बुर ने पानी छोड़ दिया।

मैंने भी नहीं रुका और लगातार धक्के लगाता रहा। कुछ ही देर में मैं भी झड़ने वाला था।

“आंटी… मैं भी झड़ने वाला हूं… कहां निकालूं?” मैंने पूछा।

“अंदर ही निकाल दो… मैं गर्भ निरोधक गोली खा लूंगी… अपना गाढ़ा वीर्य मेरी बुर में भर दो,” आंटी ने कहा।

मैंने कुछ और जोरदार धक्के लगाए और फिर अपना लंड अंदर ही रोककर झड़ गया।

मेरा गर्म वीर्य उनकी बुर में भर गया और मैं उनके ऊपर ही गिर गया।

थोड़ी देर आराम करने के बाद मैं फिर से तैयार हो गया। इस बार मैंने आंटी को घोड़ी बनने के लिए कहा।

वह बेड पर घुटनों के बल बैठ गईं और अपनी गांड ऊपर उठा दी। उनकी गांड देखकर मेरा लंड फिर से खड़ा हो गया।

“क्या मस्त गांड है आंटी… आज इसे भी चोदूंगा,” मैंने कहा।

“पहले बुर चोदो… फिर देखेंगे,” आंटी ने कहा।

मैंने पीछे से अपना लंड उनकी बुर में डाल दिया। इस बार पहले से गीली होने की वजह से लंड आसानी से अंदर चला गया।

मैंने उनकी कमर पकड़ी और जोर-जोर से धक्के लगाने शुरू कर दिए।

“थप… थप… थप…” की आवाजें कमरे में गूंज रही थीं। मेरे लंड की थपकी आंटी की बुर पर पड़ रही थी और वह चीख रही थीं।

“अह्ह्ह… विजय… और जोर से… मेरी बुर को तहस-नहस कर दो… रंडी की तरह चोदो मुझे… बहुत मजा आ रहा है… हां… हां… और गहरा…”

मैंने उनके बाल पकड़े और उनका सिर पीछे खींचा। अब मैं और भी जोर से धक्के लगा रहा था।

मेरे हर धक्के के साथ आंटी की गांड हिल रही थी और उनके दूध हिल रहे थे।

फिर मैंने उन्हें लिटा दिया और उनके ऊपर आ गया। मैंने उनके दोनों पैर फैलाए और मिशनरी पोजीशन में चोदने लगा।

इस पोजीशन में मैं उनके चेहरे को देख सकता था और वह मुझे देखकर शर्मा रही थीं।

“देखो आंटी… मैं तुम्हें कैसे चोद रहा हूं… कैसा लग रहा है?” मैंने पूछा।

“बहुत अच्छा लग रहा है… तुम बहुत अच्छा चोदते हो… मेरी बुर को बिल्कुल भर दिया है तुम्हारे लंड ने… और जोर से चोदो… मैं फिर से झड़ने वाली हूं…”

मैंने उनके होंठ चूसते हुए चोदना जारी रखा। उनके निप्पल मेरे छाती से रगड़ रहे थे जिससे दोनों को और मजा आ रहा था।

दूसरे राउंड के बाद हम दोनों थक गए थे लेकिन मजा बहुत आ रहा था। हमने सोचा कि अब बाथरूम में जाते हैं।

मैंने आंटी को उठाया और बाथरूम में ले गया। वहां मैंने उन्हें दीवार से सटाया और एक पैर उठाकर अपने कंधे पर रख दिया।

“अब यहां चोदूंगा मैं आपको,” मैंने कहा।

मैंने अपना लंड उनकी बुर में डाला और खड़े-खड़े ही चोदने लगा।

पानी की धारा हम दोनों पर गिर रही थी और मैं उन्हें चोद रहा था। यह बहुत ही रोमांटिक और सेक्सी माहौल था।

“अह्ह्ह… विजय… यह पोजीशन बहुत अच्छी है… और जोर से… मेरी बुर को पानी के साथ भर दो… हां… हां… मजा आ गया…”

मैंने उनके दूधों को पकड़ा और उन्हें मसलते हुए चोदना जारी रखा। पानी में हम दोनों का पसीना और वासना मिल रही थी।

फिर मैंने उन्हें नीचे झुकाया और पीछे से डॉगी स्टाइल में चोदना शुरू किया। बाथरूम में आवाजें और भी तेज गूंज रही थीं।

“थप… थप… थप… चोदो… और जोर से चोदो… बहनचोद… मेरी बुर फाड़ दो… रंडी बना दो मुझे… अह्ह्ह… हां… मैं झड़ गई…”

रात हो चुकी थी और हम दोनों बहुत थक चुके थे लेकिन अभी भी हमारी वासना शांत नहीं हुई थी।

इस बार मैंने धीमी और संवेदनशील चुदाई करने का फैसला किया।

मैंने आंटी को बेड पर लिटाया और उनके ऊपर आ गया।

मैंने धीरे-धीरे अपना लंड उनकी बुर में डाला और धीरे-धीरे हिलाना शुरू किया।

इस बार मैं जल्दी नहीं कर रहा था, बल्कि हर धक्के को महसूस कर रहा था।

“विजय… यह बहुत प्यारा लग रहा है… धीरे-धीरे चोदो… मुझे महसूस हो रहा है तुम्हारा हर धक्का… अह्ह्ह… बहुत अच्छा है…”

मैंने उनके चेहरे को चूमा, उनके गालों को चूमा, उनकी गर्दन को चूमा और धीरे-धीरे चोदता रहा।

हम दोनों एक-दूसरे की आंखों में देख रहे थे और प्यार का एहसास कर रहे थे।

“मैं तुमसे प्यार करता हूं आंटी,” मैंने कहा।

“मैं भी तुमसे प्यार करती हूं विजय… चोदो मुझे… अपनी बनाओ मुझे…”

मैंने धीरे-धीरे अपनी गति बढ़ाई और फिर तेजी से धक्के लगाने लगा।

आंटी भी नीचे से अपनी कमर उठा रही थीं और मेरा पूरा साथ दे रही थीं।

“अह्ह्ह… हां… विजय… मैं फिर से झड़ने वाली हूं… इस बार तुम भी मेरे साथ झड़ जाओ… अंदर ही निकालो अपना माल… भर दो मेरी बुर को…”

मैंने कुछ और जोरदार धक्के लगाए और फिर हम दोनों एक साथ झड़ गए।

मेरा वीर्य उनकी बुर में भर गया और उनका पानी मेरे लंड पर गिरा। हम दोनों एक-दूसरे की बाहों में थककर गिर गए।

कुछ देर बाद जब हम दोनों सांस फिरने लगे तो आंटी ने मुझे कसकर गले लगा लिया।

“विजय, आज रात बहुत खूबसूरत थी… मैंने इतने सालों बाद इतना मजा कभी नहीं लिया… तुम्हारा लंड और तुम्हारा प्यार दोनों ही बहुत अच्छे हैं,” आंटी ने कहा।

“आंटी, मैं भी आपको बहुत प्यार करता हूं… अब हमेशा मिलते रहेंगे… मैं आपकी हर इच्छा पूरी करूंगा,” मैंने कहा।

“हां, लेकिन यह हमारा राज रहेगा… किसी को पता नहीं चलना चाहिए… और मैं चाहती हूं कि तुम मुझे हफ्ते में कम से कम दो-तीन बार चोदो… मेरी बुर तुम्हारे लंड की दीवानी हो गई है,” आंटी ने शर्माते हुए कहा।

“बिल्कुल आंटी… मैं तो रोज आपको चोदना चाहता हूं… आपकी बुर, आपके दूध, आपकी गांड – सब कुछ मुझे बहुत पसंद है… मैं आपको खूब चोदूंगा… रंडी बनाकर चोदूंगा… मादरचोद बन जाऊँगा …”

“हां… बोलो… गाली दो मुझे… मुझे अच्छा लगता है जब तुम मुझे रंडी, बहनचोद कहते हो… चोदो मुझे… फाड़ दो मेरी बुर…”

हम दोनों फिर से एक-दूसरे को किस करने लगे और रात भर एक-दूसरे के शरीर का आनंद लेते रहे।

यह रात मेरे और बिमला आंटी के लिए जीवन की सबसे यादगार रात थी, जिसकी शुरुआत एक छोटे से छेद से हुई थी और अंत एक गहरे प्यार और वासना के रिश्ते से हुआ।

अगले दिन जब हम घर वापस आए तो हम दोनों में एक अलग ही नजदीकी आ गई थी।

अब हम रोज रात को एक-दूसरे के कमरे में मिलते और खूब चुदाई करते।

बिमला आंटी मेरी रंडी बन गई थीं और मैं उनका मादरचोद… और हम दोनों इस रिश्ते में बहुत खुश थे।

नोट: यहां पोस्ट की गई सभी कहानियां केवल मनोरंजन के उद्देश्य से प्रस्तुत की गई हैं। कृपया इन्हें वास्तविक जीवन से जोड़कर न देखें। कहानी में दर्शाए गए किसी भी दृश्य, घटना या चित्र का वास्तविक जीवन में प्रयोग करना हानिकारक हो सकता है। इसके लिए न तो कहानी के लेखक और न ही प्रस्तुतकर्ता जिम्मेदार होंगे। इसलिए कृपया अपनी समझ, बुद्धि और विवेक का उपयोग करें।

4 thoughts on “आंटी को पहले होटल और फिर घर पर चोदा”

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