bus driver group sex story
मेरा नाम सुनील है और मेरी उम्र 28 साल है। मैं दिल्ली से जयपुर के बीच चलने वाली एक प्राइवेट बस का ड्राइवर हूँ।
मेरी बस का नाम “राजस्थान एक्सप्रेस” है और यह रोज़ सुबह 6 बजे दिल्ली से चलती है और शाम को 8 बजे वापस आती है।
मैं एक अच्छे खासे दिखने वाला युवक हूँ। मेरी हाइट 6 फीट है और मेरा बदन एथलेटिक बिल्ड का है।
मेरा लंड करीब 8 इंच लंबा और काफी मोटा है, जिसपर मैं बहुत गर्व करता हूँ।
मैं अभी तक अनमैरिड हूँ और अपनी इसी बस ड्राइवर की नौकरी में मस्त हूँ।
मेरी बस में रोज़ अलग-अलग तरह के यात्री आते हैं। लेकिन कुछ रेगुलर यात्री हैं जो रोज़ मेरी बस में यात्रा करते हैं।
इनमें 4 खास महिलाएं हैं जो मेरे लिए बहुत मायने रखती हैं:
- नीतू – 35 साल की शादीशुदा औरत, उसका पति आर्मी में है और वो अक्सर बाहर रहता है।
- रेहाना – 32 साल की विधवा, बहुत सुंदर और गोरी।
- रूबी – 24 साल की नवविवाहिता, उसका पति एक बैंक में काम करता है।
- नेहा – 19 साल की कॉलेज की छात्रा, बहुत मासूम लेकिन बड़े-बड़े बूब्स वाली।
ये चारों महिलाएं रोज़ मेरी बस में यात्रा करती हैं और मैं इन सबको बहुत पसंद करता हूँ।
लेकिन मैंने कभी सोचा नहीं था कि एक दिन इनमें से कुछ मेरे साथ वो करेंगी जो मैंने सिर्फ सपनों में सोचा था।
एक सुबह की बात है। मैं अपनी बस लेकर दिल्ली के ISBT बस स्टैंड पर पहुँचा।
यात्री बस में चढ़ने लगे। तभी मेरी नजर नीतू पर पड़ी। वह आज बहुत परेशान दिख रही थी।
“क्या हुआ नीतू जी, आज उदास क्यों हैं?” मैंने पूछा।
“सुनील, मेरा बैग बहुत भारी है और मेरे कंधे में दर्द हो रहा है,” नीतू ने कहा।
“कोई बात नहीं, मैं उठाकर बस में रख देता हूँ,” मैंने कहा।
मैंने उसका बैग उठाया। वह बैग सचमुच बहुत भारी था। जब मैंने उठाया तो मेरा हाथ उसके हाथ से टकराया। उसका हाथ बहुत नरम था।
“धन्यवाद सुनील,” नीतू ने मुस्कुराते हुए कहा।
“कोई बात नहीं नीतू जी,” मैंने कहा।
नीतू ने आज एक सफेद रंग की साड़ी पहनी हुई थी जो बहुत पारदर्शी थी। उसके ब्लाउज से उसके मोटे-मोटे बूब्स झलक रहे थे। मैं उसे देखकर उत्तेजित हो गया।
बस चल पड़ी। रास्ते में एक जगह स्पीड ब्रेकर आया और बस ज़ोर से उछली। नीतू जो खड़ी थी, वो अचानक मेरे पीछे आकर टकरा गई।
“ओह सॉरी,” नीतू ने कहा।
“कोई बात नहीं,” मैंने कहा।
लेकिन मैं महसूस कर रहा था कि उसके मोटे बूब्स मेरी पीठ से दबे हुए थे। मेरा लंड खड़ा हो गया।
अगले स्टॉप पर रेहाना चढ़ी। वह आज एक नीले रंग की सलवार कमीज में थी। उसकी सलवार बहुत टाइट थी और उसकी गोरी जांघें साफ दिख रही थीं।
“गुड मॉर्निंग सुनील,” रेहाना ने कहा।
“गुड मॉर्निंग रेहाना जी,” मैंने मुस्कुराते हुए कहा।
रेहाना हमेशा मुझसे बहुत प्यार से बात करती थी। उसके पति की मृत्यु 2 साल पहले हो गई थी और वह अकेली रहती थी।
“सुनील, कल रात मेरे घर का पंखा खराब हो गया है, क्या तुम देख सकते हो?” रेहाना ने पूछा।
“जी जरूर, आज शाम आ जाऊँगा,” मैंने कहा।
“धन्यवाद,” रेहाना ने कहा और अपने हाथ से मेरे कंधे पर हाथ रख दिया।
उसका स्पर्श बहुत नरम था। मैं उसे देखकर मुस्कुराया।
दोपहर को जब बस वापस आ रही थी, तो रूबी बस में चढ़ी। वह एक नवविवाहिता थी और उसकी शादी को सिर्फ 6 महीने हुए थे।
“सुनील भैया, आज मैं थोड़ा लेट हो गई,” रूबी ने कहा।
“कोई बात नहीं रूबी जी, आ जाइए,” मैंने कहा।
रूबी ने आज एक बहुत छोटी स्कर्ट पहनी हुई थी। जब वह बस में चढ़ी तो मेरी नजर उसकी जांघों पर पड़ी। वह गोरी और कोमल थीं।
बस चल पड़ी। रूबी खड़ी थी क्योंकि सीट खाली नहीं थी। एक जोरदार ब्रेक लगने पर वह मुझसे जा टकराई।
“सॉरी सुनील भैया,” रूबी ने कहा।
“कोई बात नहीं,” मैंने कहा।
लेकिन मैं महसूस कर रहा था कि उसकी गांड मेरे लंड से टकरा रही थी। मेरा लंड खड़ा हो गया था।
शाम को जब बस वापस दिल्ली आ रही थी, तो नेहा बस में चढ़ी। वह अपने कॉलेज से वापस आ रही थी।
“हाय सुनील भैया,” नेहा ने कहा।
“हाय नेहा, कैसा रहा आज का दिन?” मैंने पूछा।
“बहुत अच्छा,” नेहा ने कहा।
नेहा ने आज एक टाइट टी-शर्ट पहनी हुई थी जिसमें से उसके मोटे बूब्स साफ झलक रहे थे। वह सिर्फ 19 साल की थी लेकिन उसका फिगर बहुत डेवलप्ड था।
बस चल पड़ी। नेहा मेरे पास खड़ी हो गई। उसके बूब्स मेरे हाथ से टकरा रहे थे जब मैं गियर बदलता था।
एक शाम जब मैं अपनी ड्यूटी खत्म करके घर जा रहा था, तो नीतू मुझे रास्ते में मिली।
“सुनील, मेरे घर का ट्यूबलाइट खराब हो गया है, क्या तुम ठीक कर सकते हो?” नीतू ने पूछा।
“जी जरूर,” मैंने कहा।
मैं उसके घर गया। उसका घर एक छोटे से अपार्टमेंट में था। उसका पति, जैसा कि मैंने कहा, आर्मी में था और महीनों बाहर रहता था।
नीतू ने मुझे अंदर बुलाया। वह अभी भी वही सफेद साड़ी पहने हुई थी।
“सुनील, तुम बहुत हैंडसम हो,” नीतू ने अचानक कहा।
मैं चौंक गया। “क्या कहा नीतू जी?”
“मैंने कहा तुम बहुत हैंडसम हो,” नीतू ने कहा और मेरे करीब आ गई।
मैं समझ गया कि उसे क्या चाहिए। मैंने भी हिम्मत करके उसका हाथ पकड़ लिया।
“नीतू जी, मैं आपको बहुत पसंद करता हूँ,” मैंने कहा।
“मुझे भी तुम पसंद हो सुनील,” नीतू ने कहा।
उसने अपने हाथ से मेरे चेहरे को सहलाया। फिर उसने अपने होंठ मेरे होंठों पर रख दिए।
हम दोनों एक-दूसरे को किस करने लगे। नीतू का बदन बहुत गरम था। मैंने उसे अपनी बाहों में भर लिया।
मैंने नीतू को उसके बेडरूम में ले जाया। वहाँ उसने अपनी साड़ी उतार दी। वह अब सिर्फ ब्लाउज और पेटीकोट में थी।
मैंने उसका ब्लाउज खोला। उसके मोटे-मोटे बूब्स बाहर आ गए। वह गोरे और कोमल थे।
“क्या सुंदर दूध हैं आपके नीतू जी,” मैंने कहा।
मैंने एक बूब अपने मुँह में ले लिया और चूसने लगा। नीतू की साँसें तेज़ हो गईं।
“ओह सुनील, बहुत मजा आ रहा है,” नीतू ने कहा।
मैं दूसरे बूब को भी चूसने लगा। उसके निप्पल कड़क हो गए थे।
फिर मैं नीचे गया। मैंने उसका पेटीकोट उतारा। उसकी बुर दिख गई। वह थोड़ी बालों वाली थी और गुलाबी रंग की थी।
“क्या सुंदर बुर है आपकी,” मैंने कहा।
मैंने अपनी उँगली उसकी बुर पर रखी। वह पहले से ही गीली थी। मैंने धीरे से उँगली अंदर डाली।
“ओह सुनील, और अंदर करो,” नीतू ने कहा।
मैंने उँगली को अंदर-बाहर करना शुरू किया। फिर मैंने अपना मुँह वहाँ रख दिया।
“यह क्या कर रहे हो?” नीतू ने शर्माते हुए पूछा।
“आपकी बुर चाट रहा हूँ,” मैंने कहा।
मैंने अपनी जीभ निकाली और उसकी बुर पर लगाई। नीतू की कमर उठ गई।
“ओह हाँ, ऐसे ही,” नीतू चिल्लाई।
मैंने उसकी बुर को अपने होंठों से पकड़ा और चूसना शुरू कर दिया। मेरी जीभ उसकी चूत के अंदर-बाहर हो रही थी।
“मैं झड़ने वाली हूँ,” नीतू ने कहा।
“झड़ जाइए,” मैंने कहा।
नीतू झड़ गई। उसकी बुर से पानी निकला और मैंने उसे पी लिया।
अब मैंने अपने कपड़े उतारे। मेरा लंड पूरी तरह से खड़ा था। नीतू ने उसे देखकर कहा, “बहुत बड़ा लंड है तुम्हारा।”
“क्या आप सहन कर पाएँगी?” मैंने पूछा।
“कोशिश करती हूँ,” नीतू ने कहा।
मैंने नीतू की टाँगें फैलाईं और अपने लंड को उसकी बुर के मुँह पर रखा। मैंने धीरे से धक्का लगाया।
लंड का टोपा अंदर चला गया। नीतू की साँसें फूल गईं।
“ओह, बहुत मोटा है,” नीतू ने कहा।
मैंने थोड़ा और धक्का लगाया और आधा लंड अंदर चला गया। नीतू की बुर बहुत टाइट थी।
“थोड़ा रुको,” नीतू ने कहा।
मैंने रुककर उसके बूब्स को सहलाया। फिर मैंने एक जोर का धक्का लगाया और पूरा लंड अंदर घुसा दिया।
“आह!” नीतू चीखी।
मैंने रुककर उसके होंठों पर चुंबन किया। फिर मैंने अपने लंड को अंदर-बाहर करना शुरू किया।
बिस्तर की चरपराहट गूँजने लगी। नीतू की बुर से आवाज़ें आ रही थीं – “फच्… फच्… फच्…”
“ओह सुनील, बहुत मजा आ रहा है,” नीतू चिल्लाई, “और जोर से चोदो।”
मैंने अपनी स्पीड बढ़ा दी। मैं जोर-जोर से धक्के लगा रहा था। नीतू की टाँगें हवा में थीं और मैं उनके बीच में था।
“आपकी बुर बहुत टाइट है नीतू जी,” मैंने कहा।
“और तुम्हारा लंड बहुत मोटा है,” नीतू ने कहा।
मैंने लगभग 30 मिनट तक नीतू को चोदा। नीतू 2 बार झड़ चुकी थी। अब मैं झड़ने वाला था।
“मैं झड़ने वाला हूँ,” मैंने कहा।
“अंदर ही निकालो,” नीतू ने कहा।
मैंने जोर से धक्के लगाए और अपना सारा वीर्य नीतू की बुर में छोड़ दिया। वह गरम-गरम वीर्य उसकी बुर में भर गया। मैं थककर उसके ऊपर गिर पड़ा।
अगले दिन जब मैं अपनी बस चला रहा था, तो रेहाना ने मुझे अपने घर आने के लिए कहा।
शाम को मैं उसके घर गया। रेहाना ने एक सेक्सी नाइटी पहनी हुई थी जो बहुत पारदर्शी थी।
“सुनील, मैं बहुत अकेली हूँ,” रेहाना ने कहा।
“मैं समझता हूँ रेहाना जी,” मैंने कहा।
“क्या तुम मेरी मदद कर सकते हो?” रेहाना ने पूछा।
“जी जरूर,” मैंने कहा।
रेहाना ने मुझे अपनी बाहों में भर लिया। उसका बदन बहुत नरम था। मैंने भी उसे पकड़ लिया।
हम दोनों बेडरूम में गए। रेहाना ने अपनी नाइटी उतार दी। वह नंगी हो गई। उसका बदन बहुत गोरा था।
“क्या सुंदर बदन है आपका,” मैंने कहा।
मैंने उसे बिस्तर पर लेटाया और उसके बूब्स चूसने लगा। उसके बूब्स बहुत नरम थे।
“ओह सुनील, बहुत मजा आ रहा है,” रेहाना ने कहा।
मैंने उसकी बुर चाटी। वह बहुत गीली थी।
“ओह हाँ, और चाटो,” रेहाना चिल्लाई।
मैंने उसे घोड़ी बनाया और पीछे से उसकी बुर में लंड डाला।
“ओह, पीछे से बहुत मजा आता है,” रेहाना ने कहा।
मैंने जोर-जोर से धक्के लगाए। रेहाना की गांड बहुत मोटी थी और मजा दे रही थी।
अगले दिन रूबी ने मुझे अपने घर बुलाया। उसका पति बैंक में काम करता था और देर से आता था।
“सुनील भैया, मैं बहुत उदास हूँ,” रूबी ने कहा।
“क्यों?” मैंने पूछा।
“मेरे पति मुझे समय नहीं देते,” रूबी ने कहा।
“मैं दे सकता हूँ,” मैंने कहा।
रूबी ने मुझे किस किया। हम बेडरूम में गए। रूबी ने अपनी स्कर्ट उतार दी। उसकी जांघें बहुत गोरी थीं।
मैंने उसे बिस्तर पर लेटाया और उसकी बुर चाटी। वह बहुत टाइट थी।
“ओह, मेरी बुर फट जाएगी,” रूबी ने कहा।
“नहीं फटेगी,” मैंने कहा और अपना लंड अंदर डाल दिया।
रूबी चीखी लेकिन फिर मजा लेने लगी।
“ओह सुनील भैया, बहुत मजा आ रहा है,” रूबी ने कहा।
मैंने उसे 20 मिनट तक चोदा। वह 3 बार झड़ी।
एक दिन नेहा ने मुझे अपने घर बुलाया। उसके मम्मी-पापा बाहर गए हुए थे।
“सुनील भैया, मैंने कभी यह नहीं किया,” नेहा ने शर्माते हुए कहा।
“क्या किया?” मैंने पूछा।
“यही, जो आप नीतू आंटी के साथ करते हो,” नेहा ने कहा।
मैं समझ गया। “क्या तुम करना चाहती हो?”
“हाँ,” नेहा ने कहा।
मैंने उसे प्यार से किस किया। वह बहुत मासूम थी। मैंने उसके कपड़े उतारे। उसके बूब्स बहुत मोटे थे।
“क्या बड़े बूब्स हैं तुम्हारे,” मैंने कहा।
मैंने उन्हें चूसा। फिर मैंने उसकी बुर चाटी। वह बिल्कुल साफ थी।
“ओह, यह क्या हो रहा है?” नेहा ने कहा।
“मजा आ रहा है,” मैंने कहा।
मैंने अपना लंड उसकी बुर पर रखा। “थोड़ा दर्द होगा,” मैंने कहा।
मैंने धीरे से धक्का लगाया। नेहा चीखी लेकिन मैंने पूरा लंड अंदर डाल दिया।
“आह!” नेहा चीखी।
मैंने धीरे-धीरे चोदना शुरू किया। फिर जोर-जोर से धक्के लगाए।
“ओह सुनील भैया, बहुत मजा आ रहा है,” नेहा ने कहा।
मैंने उसे 25 मिनट तक चोदा। वह रोने लगी मजे से।
एक दिन नीतू, रेहाना, रूबी और नेहा सब एक साथ मिलीं। उन्होंने मुझे भी बुलाया।
“सुनील, हम चाहते हैं कि तुम हम चारों को एक साथ चोदो,” नीतू ने कहा।
मैं हैरान हो गया। “सच में?”
“हाँ,” चारों ने एक साथ कहा।
मैंने कहा, “ठीक है, लेकिन कहाँ?”
“नीतू के घर पर, उसका पति तो बाहर है,” रेहाना ने कहा।
रात को हम पांचों नीतू के घर पर इकट्ठे हुए। नीतू ने एक बड़ा बेड तैयार किया था।
चारों महिलाएं नंगी हो गईं। मैं भी नंगा हो गया। मेरा लंड खड़ा था।
“कौन पहले?” मैंने पूछा।
“मैं,” नीतू ने कहा।
नीतू ने मेरा लंड अपने मुँह में लिया और चूसने लगी। फिर रेहाना ने, फिर रूबी ने, और फिर नेहा ने। चारों ने मेरा लंड चूसा।
फिर मैंने नीतू को बिस्तर पर लेटाया और उसकी बुर में लंड डाला। रेहाना उसके बूब्स चूस रही थी, रूबी उसकी बुर चाट रही थी, और नेहा मेरे बूब्स चूस रही थी।
“ओह, यह तो बहुत मजेदार है,” नीतू चिल्लाई।
मैंने नीतू को 15 मिनट तक चोदा। फिर मैंने रेहाना को घोड़ी बनाया और उसकी बुर में लंड डाला।
“ओह, पीछे से बहुत मजा आता है,” रेहाना ने कहा।
नीतू और रूबी उसके बूब्स चूस रही थीं और नेहा मेरी गांड चाट रही थी।
फिर मैंने रूबी को अपनी गोद में बिठाया और उसकी बुर में लंड डाला।
“ओह, इस पोजीशन में बहुत अंदर जा रहा है,” रूबी ने कहा।
नीतू, रेहाना और नेहा उसके बूब्स चूस रही थीं।
अंत में मैंने नेहा को लेटाया और उसकी बुर में लंड डाला।
“ओह सुनील भैया, बहुत मजा आ रहा है,” नेहा ने कहा।
तीनों औरतें उसके बूब्स और बुर चूस रही थीं।
मैंने सबको 2-2 बार चोदा। फिर मैंने अपना वीर्य चारों के बूब्स पर निकाल दिया।
इसके बाद मैं रोज़ इन चारों को चोदने लगा। कभी नीतू के घर, कभी रेहाना के घर, कभी रूबी के घर, और कभी नेहा के घर।
मेरी बस की यात्रा अब और भी मजेदार हो गई थी। रोज़ सुबह चारों मुझे अलग-अलग तरह से मजा देती थीं।
नीतू मुझे बिस्तर पर चोदवाती, रेहाना घोड़ी बनकर, रूबी गोद में बैठकर, और नेहा खड़ी होकर।
एक दिन हमने एक नया खेल खेला। मैंने चारों को एक लाइन में लेटाया और एक-एक करके सबकी बुर चोदी।
फिर मैंने चारों को घोड़ी बनाया और एक साथ चारों की गांड देखी।
“किसकी गांड सबसे मोटी है?” मैंने पूछा।
“मेरी,” रेहाना ने कहा।
मैंने रेहाना की गांड में लंड डाला और चोदने लगा।
एक महीने बाद हम पांचों ने एक बड़ी चुदाई की। मैंने चारों को बारी-बारी से सब पोजीशन में चोदा।
नीतू को बिस्तर पर, मेज़ पर, कुर्सी पर, खड़ी करके, और गोद में बिठाकर।
रेहाना को घोड़ी बनाकर, 69 में, और खड़ी करके।
रूबी को गोद में बिठाकर, मेज़ पर, और खड़ी करके।
नेहा को बिस्तर पर, कुर्सी पर, और खड़ी करके।
चारों बहुत खुश थीं।
“सुनील, तुम बहुत अच्छे हो,” नीतू ने कहा।
“हम तुमसे हमेशा चुदवाना चाहते हैं,” रेहाना ने कहा।
“मैं तो रोज़ चुदवाऊँगी,” रूबी ने कहा।
“मैं भी,” नेहा ने कहा।
मैंने चारों को अपनी बाहों में भर लिया।
अब मैं इन चारों के साथ खुश हूँ। मैं रोज़ अपनी बस चलाता हूँ और रोज़ इन चारों को मजा देता हूँ।
नीतू अब मोटी हो गई है, रेहाना खुश रहती है, रूबी का पति खुश है क्योंकि रूबी अब उदास नहीं रहती, और नेहा अब अपने कॉलेज में टॉप कर रही है।
मैंने चारों का इलाज कर दिया अपने लंड से।
- नौकरानी की कोमल बुर चोदा
- मेरी ही चूत चोदने लगा मेरा बेटा
- अमीर राधा बीस लंडों से चुदवाई
- विधवा भाभी का देवर ने चोदकर इलाज़ किया
नोट: यहां पोस्ट की गई सभी कहानियां केवल मनोरंजन के उद्देश्य से प्रस्तुत की गई हैं। कृपया इन्हें वास्तविक जीवन से जोड़कर न देखें। कहानी में दर्शाए गए किसी भी दृश्य, घटना या चित्र का वास्तविक जीवन में प्रयोग करना हानिकारक हो सकता है। इसके लिए न तो कहानी के लेखक और न ही प्रस्तुतकर्ता जिम्मेदार होंगे। इसलिए कृपया अपनी समझ, बुद्धि और विवेक का उपयोग करें।
Bahut achha bhai
mujhe bhi dilwa do na