mla chudai kahani
एक युवा विवाहिता जो अपने पति की लापरवाही से तंग आ चुकी है, उसकी मुलाकात एक शक्तिशाली MLA से होती है जो उसकी हर मदद करता है। जानिए कैसे एक रात की मुलाकात ने उसे उस पावरफुल नेता की रखैल और रंडी बना दिया, और क्यों वो अपनी शादी तोड़कर उसी के पैरों में अपनी ज़िंदगी बिताने को तैयार हो गई। यह कहानी वासना, पावर और नई शुरुआत की है।
मेरा नाम शकुंतला है और मैं उत्तर प्रदेश के एक छोटे से शहर की रहने वाली हूँ।
मेरी उम्र छब्बीस साल है और मेरी शादी को तीन साल हो चुके हैं।
मेरे पति अजय एक प्राइवेट कंपनी में नौकरी करते हैं और अक्सर टूर पर रहते हैं।
वो मेरी शारीरिक और भावनात्मक ज़रूरतों का कोई ख्याल नहीं रखते। मैं घर में अकेली रहती हूँ और अपने सास-ससुर के साथ रहती हूँ।
मेरा फिगर छत्तीस-अट्ठाईस-छत्तीस का है।
मेरे स्तन बड़े और गोल हैं, मेरी कमर पतली और कूल्हे भरे हुए हैं।
मेरा रंग गोरा है और मेरे होंठ गुलाबी हैं। मैं जानती हूँ कि मैं देखने में बहुत आकर्षक हूँ और हर मर्द की नज़र मुझ पर टिक जाती है।
मेरे शहर के MLA विक्रम सिंह हैं।
उनकी उम्र पचास साल है लेकिन वो देखने में बहुत फिट और आकर्षक हैं।
उनकी हाइट पाँच फुट ग्यारह इंच है और रंग गेहुँआ है।
उनका बदन एकदम मजबूत है और उनमें अपनी पावर और पैसे की खुशबू है जो किसी भी औरत को उनकी तरफ खींच ले।
उनकी नज़रें इतनी तेज़ हैं कि किसी को भी घूरते ही उसकी चूत में पानी आ जाए।
मैं पहली बार MLA साहब से अपने पड़ोसी की शादी में मिली।
वो मुख्य अतिथि थे और मैं वहाँ अपनी सास के साथ गई थी।
जब मैं उनके सामने से गुज़री तो उनकी नज़रें मुझ पर टिक गईं।
मैंने लाल रंग की साड़ी पहनी हुई थी जिसमें मेरे स्तन और कूल्हों का आकार साफ़ दिख रहा था।
“यह कौन है?” MLA साहब ने अपने सहयोगी से पूछा।
“साहब, यह रमेश की बहू है शकुंतला। बड़ी खूबसूरत माल है ना?” उसने जवाब दिया।
MLA साहब ने मुझे घूरते हुए कहा, “बहुत ही बढ़िया माल है। इसे मेरे बारे में पता होना चाहिए।”
मैं यह सब सुन रही थी और मेरे चेहरे पर शर्मिंदगी के भाव थे लेकिन अंदर ही अंदर मुझे मज़ा आ रहा था।
मैं जानबूझकर उनके सामने झुककर पानी का गिलास रखी ताकि वो मेरे स्तनों को देख सकें।
उनकी नज़रें मेरे बूब्स पर थीं और मेरा दिल ज़ोर-ज़ोर से धड़क रहा था।
कुछ दिनों बाद मेरे ससुर की तबीयत खराब हो गई।
उन्हें अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा और इलाज के लिए बहुत पैसे चाहिए थे।
मेरे पति की नौकरी से इतने पैसे नहीं बन पा रहे थे। मैं बहुत परेशान थी।
तभी मुझे याद आया कि MLA साहब ने मुझे देखा था और शायद वो मदद कर सकते हैं।
मैंने हिम्मत करके उनके कार्यालय पर फोन किया। उन्होंने मुझे तुरंत बुलाया।
जब मैं उनके कार्यालय पहुँची तो वो अकेले थे।
उन्होंने मुझे कुर्सी पर बैठने को कहा और मेरे पास आकर खड़े हो गए।
“क्या हुआ शकुंतला जी? तुम इतनी परेशान क्यों लग रही हो?” उन्होंने पूछा।
मैंने अपनी समस्या बताई।
उन्होंने तुरंत एक चेक लिखकर दिया और कहा, “यह लो, दो लाख रुपये। तुम्हारे ससुर का इलाज अच्छे से होगा।”
मैंने चेक लेते वक़्त जानबूझकर अपने हाथ को उनके हाथ से छुआ।
उनकी आँखों में एक अजीब सी चमक देखी मैंने।
“धन्यवाद MLA साहब, आपने हमारी बहुत मदद की,” मैंने कहा।
“इसमें धन्यवाद की क्या बात है? मैं तुम्हारी कोई भी मदद करने को तैयार हूँ। बस तुम मुझे मना मत करना,” उन्होंने कहा और मेरी कमर पर हाथ रख दिया।
मैंने विरोध नहीं किया। उनका स्पर्श मुझे अच्छा लग रहा था।
मैं उनकी पावर और उनके पैसे से बहुत आकर्षित हो रही थी।
वो मुझे देखते ही ऐसे थे जैसे कोई शिकारी अपने शिकार को देखता हो।
“मैं तुम्हें कहीं चोदना चाहता हूँ शकुंतला। क्या तुम तैयार हो?” उन्होंने सीधे पूछ लिया।
मैं शरमा गई लेकिन मैंने कहा, “MLA साहब, आप जैसा चाहें। मैं आपकी हूँ।”
MLA साहब ने मुझे अपने फार्महाउस पर बुलाया। वो शहर से बाहर एक बड़े बंगले में था जहाँ कोई नहीं आता था।
मैं शाम को वहाँ पहुँची। उन्होंने गेट पर ही मुझे अपनी बाहों में भर लिया और मेरे होंठों पर किस कर दिया।
“आज से तुम मेरी रखैल हो शकुंतला। मैं तुम्हें हर वो चीज़ दूँगा जो तुम्हें चाहिए,” उन्होंने कहा।
मैंने हाँ में सिर हिलाया।
उन्होंने मुझे अंदर ले जाकर एक बड़े कमरे में बैठाया जहाँ मोमबत्तियाँ जल रही थीं और शराब रखी थी।
उन्होंने मुझे शराब पिलाई और फिर मेरे पास आकर बैठ गए।
“तुम बहुत खूबसूरत हो शकुंतला। तुम्हारे पति को समझ नहीं आता कि वो क्या खो रहे हैं,” उन्होंने कहा।
मैंने कुछ नहीं कहा। उन्होंने मेरी साड़ी का पल्लू खींचा और मेरे ब्लाउज के ऊपर से ही मेरे स्तनों को दबाना शुरू कर दिया।
मेरे निप्पल कड़े हो गए और मैं सिसकियाँ लेने लगी।
“आहह MLA साहब… धीरे…” मैंने कहा।
“आज से तुम मेरी रंडी हो। मैं जैसे चाहूँगा वैसे चोदूँगा तुम्हें,” उन्होंने कहा और मेरे ब्लाउज के बटन खोल दिए।
मेरे बड़े-बड़े दूध बाहर आ गए। उन्होंने एक स्तन को मुँह में ले लिया और ज़ोर-ज़ोर से चूसने लगे।
वो मेरे निप्पल को काट-काट कर खेल रहे थे और दूसरे स्तन को हाथ से मसल रहे थे।
“क्या मस्त दूध हैं तुम्हारे शकुंतला। मैं इन्हें रोज़ चूसूँगा,” उन्होंने कहा।
फिर वो नीचे गए और मेरी साड़ी उतार दी। मेरी पेटीकोट भी उतार दी।
अब मैं सिर्फ़ पैंटी में थी। उन्होंने मेरी पैंटी के ऊपर से ही मेरी बुर को चूमना शुरू किया।
“ओह MLA साहब… यह क्या कर रहे हो…” मैं काँप उठी।
“तुम्हारी चूत को चाट रहा हूँ मेरी रंडी। आज से यह मेरी है,” उन्होंने कहा और मेरी पैंटी उतार दी।
मेरी गुलाबी चूत उनके सामने थी। उन्होंने मेरी टाँगें फैलाईं और चूत में जीभ डाल दी।
वो मेरी चूत की दरार में जीभ घुसा रहे थे और कभी-कभी ऊपर की क्लिटोरिस को चूस लेते।
“आहह… और ज़ोर से चाटो… मैं झड़ने वाली हूँ…” मैं चिल्लाई।
उन्होंने मेरी क्लिटोरिस को होठों में लेकर चूसा और दो उँगलियाँ मेरी चूत में डाल दीं।
मैं तड़प उठी और झड़ गई। मेरी चूत से पानी निकलकर उनके मुँह में आ गया जिसे उन्होंने पी लिया।
अब उन्होंने अपने कपड़े उतारे। उनका लंड दस इंच लंबा और बहुत मोटा था। मैं उसे देखकर डर गई।
“MLA साहब, यह तो बहुत बड़ा है… मुझसे नहीं लेगा…” मैंने कहा।
“लेगा मेरी जान। आज से तुम मेरी रंडी हो और रंडी को हर लंड लेना पड़ता है,” उन्होंने कहा और मुझे घोड़ी बना दिया।
मैं घुटनों और हाथों के बल हो गई। उन्होंने मेरी चूत में थूक लगाया और अपने लंड का सुपड़ा मेरी चूत के मुँह पर रखा।
एक ही धक्के में आधा लंड अंदर चला गया।
“आहह… दर्द हो रहा है… रुको…” मैं चीखी।
“रुकूँगा नहीं मेरी रंडी। आज तुम्हें मैं पूरी तरह से चोदूँगा,” उन्होंने कहा और एक और ज़ोरदार धक्का दिया।
पूरा लंड मेरी चूत में समा गया। मेरी आँखों से आँसू निकल आए।
उन्होंने मेरे बाल पकड़े और पीछे से ज़ोर-ज़ोर से धक्के लगाने शुरू कर दिए। पूरा कमरा “पच पच” की आवाज़ों से गूँज उठा।
“आहह… हाँ… और ज़ोर से चोदो… फाड़ दो मेरी चूत को…” मैं चिल्ला रही थी।
उन्होंने बीस मिनट तक मुझे इसी पोज़िशन में चोदा।
फिर उन्होंने मुझे लिटाया और मिशनरी पोज़िशन में आ गए।
उन्होंने मेरे पैर अपने कंधों पर रखे और फिर से चोदना शुरू किया। उनका लंड बहुत गहरा जा रहा था।
“आहह… मर गई… बहुत मज़ा आ रहा है…” मैं कराही।
उन्होंने मेरे दूध को मसलते हुए चोदना जारी रखा। मेरे निप्पल कड़े हो गए थे और वो उन्हें काट-काट कर खेल रहे थे।
फिर उन्होंने कहा, “मैं झड़ने वाला हूँ… कहाँ निकालूँ?”
“अंदर ही डाल दो… आज मेरा सेफ़ दिन है…” मैंने कहा।
उन्होंने और तेज़ धक्के लगाए और अपना सारा वीर्य मेरी चूत में ही छोड़ दिया।
मैं भी उनके साथ झड़ गई। वो मेरे ऊपर ही पड़े रहे।
कुछ देर बाद MLA साहब का लंड फिर से खड़ा हो गया।
इस बार उन्होंने कहा, “अब मैं तुम्हारी गांड मारूँगा। तुम मेरी रंडी हो और रंडी की गांड भी मारी जाती है।”
मैंने मान लिया। उन्होंने मुझे घोड़ी बनाया और मेरी गांड पर थूक लगाया।
उन्होंने एक ज़ोरदार धक्का दिया और आधा लंड मेरी गांड में चला गया।
“आहह… माँ… मर गई… बहुत दर्द हो रहा है…” मैं रोने लगी।
वो रुके नहीं। उन्होंने एक और धक्का दिया और पूरा लंड मेरी गांड में समा गया।
मेरी गांड से खून निकलने लगा। उन्होंने मेरे मुँह में तकिया दबाया और ज़ोर-ज़ोर से धक्के लगाने शुरू कर दिए।
कुछ देर बाद मुझे भी मज़ा आने लगा। मैं “हाँ… हाँ… और ज़ोर से…” कहने लगी।
उन्होंने मेरे दूध पकड़े और कसकर मसलते हुए गांड मारी। पंद्रह मिनट बाद उन्होंने अपना वीर्य मेरी गांड में ही छोड़ दिया।
उस रात MLA साहब ने मुझे तीन बार और चोदा।
एक बार बाथरूम में खड़े होकर, एक बार सोफे पर और एक बार रसोई में।
मैं पूरी तरह से थक चुकी थी लेकिन बहुत खुश थी।
उस दिन के बाद मैं MLA साहब की रखैल और रंडी बन गई।
उन्होंने मुझे एक अलग फ्लैट में रखा और हर महीने पचास हज़ार रुपये देने लगे।
मेरे पति को भी उन्होंने अच्छी नौकरी पर लगवा दिया लेकिन वो अब मुझे छू भी नहीं सकते थे क्योंकि मैं MLA साहब की हो चुकी थी।
अब हालत यह है कि जब भी MLA साहब का मन करता है, वो मुझे बुला लेते हैं और मेरी चूत और गांड दोनों की जमकर चुदाई करते हैं।
वो मुझे अपने दोस्तों को भी देते हैं और मैं सबकी रंडी बनकर उनका लंड चूसती हूँ और चुदवाती हूँ।
मैंने अपने पति से तलाक ले लिया है और अब मैं पूरी तरह से MLA साहब की रखैल हूँ।
उन्होंने मुझे अपनी विधानसभा में एक छोटी सी पोस्ट भी दिलवा दी है ताकि मैं रोज़ उनके साथ रह सकूँ।
मैं खुश हूँ क्योंकि मुझे हर रात एक मजबूत लंड मिलता है जो मेरी चूत की प्यास बुझाता है।
MLA साहब मुझे बहुत प्यार करते हैं और मेरी हर ज़रूरत पूरी करते हैं।
मैं उनकी रंडी बनकर बहुत खुश हूँ और रोज़ रात को उनका लंड लेकर मज़े करती हूँ।
अगले पार्ट में बताऊंगी की कैसे एम एल ए साहब ने अपने दोस्तों के मिलकर एक साथ चुदाई करी।
NEXT PART: MLA साहब ने अपने दोस्तों के साथ मिलकर चुदाई की
- मेरी मकान मालिक के साथ पहली चुदाई
- पापा ने मेरी सहेली को चोद दिया
- सहेली ने मेरी चूत को चुदाई का मजा दिलाया
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