काली मोटी लड़की की चुदाई कहानी

kali moti ladki ki chudai story

एक मोटी, काली लड़की के साथ दफ्तर में हुई दोस्ती जो धीरे-धीरे शारीरिक संबंधों में बदल गई और उसे असली प्यार मिला।

नमस्कार दोस्तों, मेरा नाम राजत है और मैं इंदौर में एक आईटी कंपनी में काम करता हूँ।

मैं आज आपको अपनी सहकर्मी सुनीता की कहानी सुनाने जा रहा हूँ, जो दिखने में भद्दी और मोटी होने के बावजूद एक बहुत ही प्यारी दिल वाली लड़की है।

सुनीता की उम्र 27 साल है और वो मेरी ही कंपनी में काम करती है, लेकिन हेड ऑफिस में।

मैं ब्रांच ऑफिस में रहता हूँ। उसका फिगर है 38-34-42। उसके बूब्स 38 इंच के बहुत बड़े हैं, कमर 34 इंच की मोटी, और गांड 42 इंच की बहुत भारी और मोटी।

वो रंग से काली है, छोटी हाइट की है, और दिखने में बिल्कुल भी आकर्षक नहीं लगती। लेकिन उसका दिल बहुत साफ है।

हमारी पहली मुलाकात एक कंपनी मीटिंग में हुई थी।

मैंने उसे देखा तो मुझे लगा कि यह लड़की तो बहुत भद्दी है, लेकिन जब उससे बात की तो पता चला कि वो बहुत इंटेलिजेंट और दिल की साफ है। हमने नंबर एक्सचेंज किए और धीरे-धीरे दोस्ती हो गई।

एक दिन

मैंने उससे पूछा, “सुनीता, तुम्हारा कोई बॉयफ्रेंड है?”

वो थोड़ा उदास होकर बोली, “राजत, मुझमें ऐसा क्या है जो कोई मुझे अपनी गर्लफ्रेंड बनाएगा? मैं तो इतनी मोटी और काली हूँ, कोई मुझे सड़क पर देखकर भी मुँह फेर लेता है।”

मैंने कहा, “ऐसा मत बोलो, तुम बहुत अच्छी हो।”

वो मुस्कुराई और बोली, “राजत, तुम्हें पता है, मैंने जिंदगी में बहुत दुख देखे हैं। लोग मुझे सिर्फ इस्तेमाल करना चाहते हैं, प्यार नहीं।”

मैंने पूछा, “क्या मतलब?”

वो बोली, “मैं तुम्हें सब बताती हूँ।”

उसने अपनी कहानी सुनानी शुरू की।

वो बोली, “मैंने जब कॉलेज में एडमिशन लिया, तो मुझे लगा कि अब नई जिंदगी शुरू होगी। लेकिन लड़कों ने मुझे देखकर मज़ाक उड़ाया। वो कहते थे, ‘देखो वो काली भैंस आ गई।’ मेरा दिल टूट गया था।”

“फिर एक दिन एक लड़का मिला। उसका नाम रोहित था। वो मुझसे बहुत प्यार से बात करता था। मुझे लगा कि शायद कोई है जो मुझे दिल से समझता है। हम दोस्त बने, और धीरे-धीरे वो मुझे अकेले में मिलने लगा।”

“एक दिन उसने मुझे अपने घर बुलाया। मैं चली गई क्योंकि मुझे उस पर भरोसा था। जैसे ही मैं घर पहुँची, उसने दरवाज़ा बंद किया और मुझे पकड़ लिया। वो मुझे किस करने लगा, मेरे बूब्स दबाने लगा। मैंने कहा, ‘रुको, यह क्या कर रहे हो?’ लेकिन वो नहीं रुका।”

“उसने मेरे कपड़े फाड़ दिए। मैं रो रही थी, लेकिन उसे कोई फर्क नहीं पड़ा। उसने मेरे बूब्स काटे, मेरी चूत में उंगली की, और फिर मुझे जबरदस्ती चोदा। जब वो खत्म हुआ, तो उसने मुझे कहा, ‘अब निकल यहाँ से, काली भैंस।’ मैं रोती हुई वहाँ से निकली।”

“अगले दिन कॉलेज में सब लड़के मुझे अजीब नज़रों से देख रहे थे। पता चला कि रोहित ने सबको बता दिया था कि उसने मुझे चोद दिया है। मेरी इज़्ज़त मिट्टी में मिल गई। कोई मुझे अपनी दोस्त नहीं मानता था, सब मुझे रांड समझते थे।”

यह सुनकर मेरा दिल भर आया।

मैंने कहा, “सुनीता, वो लड़का गलत था, तुम नहीं।”

वो रोते हुए बोली, “राजत, इसके बाद भी मैंने कुछ लड़कों को मौका दिया। सब वही करते थे। अकेले में मुझे मसलते, मेरे जिस्म का मज़ा लेते, लेकिन सबके सामने मुझे नकार देते। एक लड़का तो इतना गिरा हुआ था कि उसने मुझे अपने दोस्तों के सामने नंगा करने की कोशिश की।”

“मैंने उसे मना किया तो उसने मुझे मारा। कहा, ‘तू तो रांड है, तुझे तो सबको चोदना चाहिए।’ मैं वहाँ से भाग आई।”

मैंने उसे गले लगाया और कहा, “अब मैं हूँ ना। मैं तुम्हें कभी दुख नहीं दूँगा।”

हमारी दोस्ती और गहरी हो गई।

वो मुझे हर बात बताने लगी।

कौन उसे ऑफिस में छेड़ता है, कौन उसके बूब्स देखकर मुस्कुराता है, कौन उसे गंदे मैसेज भेजता है।

मैं उसका साथ देता था।

एक दिन हमने मिलने का प्रोग्राम बनाया।

मैंने सोचा कि क्यों ना उसे एक अच्छी जगह घुमाऊँ।

हम एक मॉल में मिले।

वो आज भी वही पुरानी साड़ी में थी, लेकिन मुझे वो अच्छी लगी।

हमने साथ में लंच किया।

फिर मैंने कहा, “चलो सिनेमा देखते हैं।”

वो खुश हो गई। हमने एक रोमांटिक फिल्म की टिकट ली।

सिनेमा हॉल में लोग कम थे क्योंकि यह दोपहर का शो था।

हमने कार्नर की सीटें लीं।

फिल्म शुरू होते ही मैंने उसका हाथ पकड़ लिया।

वो मुस्कुराई। धीरे-धीरे मैंने उसके कंधे पर हाथ रखा और उसे अपनी ओर खींचा।

वो मेरे कंधे पर सर रखकर बैठ गई।

फिल्म के एक रोमांटिक सीन में मैंने उसकी तरफ देखा।

वो भी मुझे देख रही थी। हमारी आँखें मिलीं और धीरे-धीरे हम एक-दूसरे के करीब आने लगे।

हमारे होंठ एक-दूसरे से मिल गए।

क्या एहसास था! मैं उसके मुलायम होंठों को चूस रहा था। वो भी मेरा पूरा साथ दे रही थी।

हमारी जीभें एक-दूसरे से खेल रही थीं। वो मेरे बालों में हाथ फेर रही थी और मुझे और करीब खींच रही थी।

मैंने उसके चेहरे को दोनों हाथों से पकड़ा और गहराई से किस किया।

वो हल्के से कराह रही थी, “उम्म… राजत… कितना मीठा लग रहा है…”

मैंने धीरे से अपना हाथ उसके बूब्स पर रखा।

वो कांप गई, लेकिन मना नहीं किया।

मैंने उसके मम्मों को कपड़ों के ऊपर से ही दबाना शुरू किया।

वो आहें भरने लगी, “आहा… ओह… राजत… ऐसे ही… और दबाओ…”

उसके मम्मे बहुत बड़े और मुलायम थे।

मेरी हथेली में पूरी तरह नहीं समा रहे थे।

मैंने धीरे से एक मम्मे को दबाया, फिर दूसरे को।

उसके निप्पल कड़े हो चुके थे।

मैंने उन्हें अंगूठे से रगड़ा, वो तड़प उठी, “ओह्ह… राजत… ये क्या कर रहे हो… आग लग रही है अंदर…”

मैंने उसकी कुर्ती के अंदर हाथ डालने की कोशिश की।

उसने थोड़ा विरोध किया, फिर मान गई।

मैंने उसकी ब्रा के ऊपर से ही उसके मम्मों को मसलना शुरू किया।

वो पूरी तरह गर्म हो चुकी थी।

तभी अचानक इंटरवल हो गया। हम हड़बड़ाहट में अलग हुए।

उसने अपने कपड़े ठीक किए। इंटरवल के बाद वो फिर मेरे कंधे पर सर रखकर बैठ गई।

अब मैंने धीरे से उसकी जांघ पर हाथ रखा। वो कांपी, लेकिन कुछ नहीं बोली।

मैंने उसके कान में फुसफुसाया, “क्या मैं थोड़ा आगे बढ़ूँ?”

वो शर्माते हुए बोली, “राजत, मैं तुम्हारी हूँ… जो चाहो करो…”

यह सुनकर मेरा दिल धड़कने लगा।

मैंने अपना हाथ उसकी साड़ी के अंदर डाला और उसकी जांघों को सहलाने लगा।

उसकी जांघें बहुत मोटी और मुलायम थीं। मैं धीरे-धीरे ऊपर की तरफ बढ़ने लगा।

मैंने उसकी पैंटी तक पहुँच गया। वो बोली, “राजत, वहाँ बाल हैं… मैंने साफ नहीं किया…”

मैंने कहा, “कोई बात नहीं, मुझे सब पसंद है।”

मैंने अपना हाथ उसकी पैंटी में डाल दिया।

उसकी चूत बहुत गीली थी। घने बाल थे, लेकिन गीलेपन से चिपक चुके थे।

मैंने उसकी क्लिट को छुआ, वो झटके से उछल पड़ी, “आह… राजत… वहाँ मत छुओ… बहुत संवेदनशील है…”

लेकिन मैंने नहीं रुका।

मैंने उंगली से क्लिट को गोल-गोल रगड़ना शुरू किया।

वो अपनी सीट पर तड़प रही थी, जांघें सिकोड़ रही थी, “ओह्ह… उईई… राजत… ऐसे मत करो… मैं पागल हो जाऊंगी…”

मैंने उसकी चूत में उंगली डाल दी। वो पगला गई।

मैंने उसे टांगें चौड़ी करने को कहा। वो मान गई।

मैंने उंगली को धीरे-धीरे अंदर-बाहर करना शुरू किया।

उसकी चूत की दीवारें गर्म और टाइट थीं। वो पानी छोड़ रही थी।

मैंने स्पीड बढ़ाई। दो उंगलियां डाल दीं। उसे गहराई से चोद रहा था उंगलियों से।

वो कराह रही थी, “आह इह्ह ओह्ह ओह ! आह.. ह्ह्ह.. इह्ह.. राजत, जोर से, फाड़ दो इसे, उईईई… ऊउइ ..ऊई ..उईईई..”

मेरी उंगली जैसे ही अंदर-बाहर होती, वो ‘आह उईईईई माँ माँ सीईईईईई आह राजत धीरे करो..’ करती।

उसकी चूत लगातार पानी छोड़ रही थी।

चिकनाई हो जाने से मैं जोर-जोर से चूत में उंगली चलाने लगा।

अचानक उसने मेरा हाथ पकड़ लिया।

मैंने अपना हाथ छुड़वाया और उसे अपनी जीन्स की जिप खोलकर लंड निकालकर पकड़ा दिया।

मैंने कहा, “पकड़ो इसे… तुम्हारी वजह से यह कड़ा हो गया है…”

वो मेरे लंड को देखकर हैरान रह गई।

वो बोली, “राजत, कितना मोटा है ये… मैंने कभी ऐसा नहीं देखा…”

वो उसे हिलाने लगी। मैंने फिर से उसकी चूत में उंगली डाल दी और जोर-जोर से चोदने लगा।

कुछ ही देर में उसका पानी निकल गया।

उसका बदन अकड़ गया, वो जोर से कराही, “आह्ह.. ह्ह.. आऊ.. ऊऊ.. राजत, आ रहा है, ओह्ह… हां, ऐसे ही!”

उसकी चूत से गर्म रस बह निकला, मेरी उंगलियां भीगीं। इ

धर मेरे लंड ने भी पिचकारी मार दी।

वो उसे जोर-जोर से हिलाती रही, मेरा माल उसके हाथ पर गिरा।

वो हांफते हुए बोली, “राजत, कितना गर्म है ये… मैंने कभी ऐसा महसूस नहीं किया…”

हम दोनों तृप्त तो नहीं हुए थे, लेकिन मजा आ गया था। फिल्म खत्म होते ही हम अपने अपने घर निकल गए।

घर जाकर मुझे अपने आप से ग्लानि हुई। मैंने सोचा, कहीं मैं भी उन लड़कों की तरह तो नहीं बन गया जो सुनीता का इस्तेमाल करते हैं?

लेकिन जब उसका फोन आया, तो वो बहुत खुश थी।

वो बोली, “राजत, यह मेरी जिंदगी का सबसे यादगार दिन है। आज तक किसी ने मुझे इतनी इज्ज़त से नहीं छुआ। सब मुझे जानवरों की तरह नोचते थे, लेकिन तुमने मुझे प्यार किया।”

मैंने कहा, “सुनीता, मैं तुमसे सच्चा प्यार करता हूँ।”

वो रोते हुए बोली, “राजत, क्या सच? कोई मुझसे प्यार कर सकता है? मैं तो इतनी मोटी और काली हूँ…”

मैंने कहा, “हाँ, मैं करता हूँ। तुम्हारा दिल बहुत साफ है, और यही मुझे तुममें पसंद है।”

वो खुश हो गई।

फिर उसने कहा, “राजत, मैं चाहती हूँ कि हम कुछ दिनों के लिए कहीं बाहर चलें। मैं तुमसे पूरी तरह मिलना चाहती हूँ। मैं चाहती हूँ कि तुम मुझे अपनी बीवी, अपनी रांड, जो बनाना चाहो बनाओ। लेकिन प्लीज, मुझे वो प्यार दो जो मुझे आज तक नहीं मिला।”

मैंने कहा, “ठीक है, हम जाएंगे। मैं तुम्हें वो सब दूंगा जो तुम्हें चाहिए।”

हमने अगले हफ्ते गोवा जाने का प्लान बनाया।

वो बहुत खुश थी।

वो बोली, “राजत, वहाँ मैं तुम्हारी हूँ। तुम जो चाहो कर सकते हो। मैंने आज तक किसी को अपना पूरा जिस्म नहीं दिया, लेकिन तुम्हें सब कुछ दूंगी।”

यह सुनकर मेरा दिल खुशी से भर गया।

मैंने सोचा, कि इस मोटी, काली लड़की को मैं वो खुशी दूंगा जो उसे आज तक नहीं मिली।

और वो मुझे वो प्यार देगी जो मैंने कभी नहीं पाया।

यह थी मेरी और सुनीता की कहानी।

हम दोनों अब गोवा जाने की तैयारी में हैं, और मैं उसे वहाँ जाकर अपनी बीवी बनाऊंगा।

उम्मीद है आपको हमारी कहानी पसंद आई होगी।

नोट: यहां पोस्ट की गई सभी कहानियां केवल मनोरंजन के उद्देश्य से प्रस्तुत की गई हैं। कृपया इन्हें वास्तविक जीवन से जोड़कर न देखें। कहानी में दर्शाए गए किसी भी दृश्य, घटना या चित्र का वास्तविक जीवन में प्रयोग करना हानिकारक हो सकता है। इसके लिए न तो कहानी के लेखक और न ही प्रस्तुतकर्ता जिम्मेदार होंगे। इसलिए कृपया अपनी समझ, बुद्धि और विवेक का उपयोग करें।

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