समधन माधुरी की चुदाई

samdhan madhuri ki chudai

बेटे की शादी के बाद उसकी सास के साथ हुई गहरी संबंध की कहानी।

नमस्कार दोस्तों, मेरा नाम प्रदीप है और मैं 52 साल का एक व्यवसायी हूँ।

मैं आज आपको अपनी समधन माधुरी के साथ हुई मेरी कहानी सुनाने जा रहा हूँ।

यह कहानी उस समय की है जब मेरे बेटे राहुल की शादी हुई थी।

मेरे परिवार में मैं, मेरी पत्नी सुनीता, और मेरा बेटा राहुल रहते हैं।

राहुल की शादी प्रिया से हुई थी। प्रिया की माँ का नाम माधुरी है और वो मेरी समधन बनी।

माधुरी की उम्र उस समय 48 साल थी, लेकिन वो दिखने में 35 की भी नहीं लगती थीं।

माधुरी का फिगर बिल्कुल कातिलाना था – 38-32-40।

उनके बूब्स 38 इंच के भारी और उभरे हुए थे, कमर 32 इंच की पतली और सुडौल, और गांड 40 इंच की बहुत बड़ी और मोटी।

वो रंग से गोरी थीं, लंबे काले बाल उनकी कमर तक आते थे, और आँखें हल्की हरी थीं जिनमें एक अलग सी चमक थी।

राहुल और प्रिया की शादी के बाद, माधुरी और उनके पति अशोक हमारे यहाँ आए थे।

शादी के बाद की रस्में थीं इसलिए वो एक हफ्ते के लिए ठहरे थे। हमारा घर बड़ा था इसलिए उन्हें अतिथि कक्ष में रखा गया।

शादी के दूसरे दिन, मेरी पत्नी सुनीता और माधुरी किचन में खाना बना रही थीं।

मैं बाहर बैठा था और माधुरी को देख रहा था।

उन्होंने हल्की सी साड़ी पहनी हुई थी जो उनके शरीर पर चिपकी हुई थी और उनकी गांड साफ झलक रही थी।

मेरा लंड उन्हें देखकर खड़ा हो गया।

मैंने सोचा, “क्या माल है समधन जी। इनको तो मैं चोदना चाहता हूँ।”

शाम को जब सब सो गए, मैं पानी पीने के लिए उठा। किचन से होकर जाते समय मैंने देखा कि माधुरी बाथरूम से नहाकर निकल रही थीं।

उन्होंने केवल एक तौलिया लपेटा हुआ था और उनके बूब्स ऊपर से झलक रहे थे।

मैंने उन्हें देखा और वो शर्मा गईं। उन्होंने कहा, “प्रदीप जी, आप अभी तक जाग रहे हैं?”

मैंने कहा, “हाँ, पानी पीने आया था। आप नहा रही थीं?”

वो बोलीं, “हाँ, गर्मी बहुत है इसलिए नहा लिया।”

मैंने उनकी तरफ देखा और कहा, “आप बहुत खूबसूरत हैं माधुरी जी।”

वो शर्माते हुए बोलीं, “अरे प्रदीप जी, आप भी क्या बातें कर रहे हैं। मैं तो बूढ़ी हो गई हूँ।”

मैंने कहा, “बूढ़ी कहाँ, आप तो बिल्कुल जवान लग रही हैं।”

वो मुस्कुराईं और अपने कमरे में चली गईं। लेकिन मैंने देखा कि उन्होंने मुझे एक अलग नज़र से देखा था।

अगले दिन सुबह, मैं बाहर लॉन में बैठा था।

माधुरी वहाँ आईं और मेरे पास बैठ गईं। उन्होंने गहरे गले का ब्लाउज पहना हुआ था और उनका क्लीवेज साफ दिख रहा था।

हम दोनों बातें करने लगे। मैंने उनसे पूछा, “आपके और अशोक जी के बीच सब ठीक है ना?”

वो थोड़ा उदास होकर बोलीं, “अशोक तो बस अपने काम में रहते हैं। मेरी कोई परवाह नहीं करते। मुझे जो चाहिए वो नहीं दे पाते।”

मैं समझ गया कि वो क्या कहना चाह रही हैं।

मैंने कहा, “मैं समझ सकता हूँ। सुनीता के साथ भी मेरा यही हाल है।”

वो मेरी तरफ देखीं और बोलीं, “प्रदीप जी, क्या आप मेरी मदद कर सकते हैं?”

मैंने पूछा, “कैसी मदद?”

वो धीरे से बोलीं, “मुझे वो चाहिए जो एक औरत को चाहिए होता है। क्या आप समझ रहे हैं?”

मैं समझ गया।

मैंने कहा, “लेकिन माधुरी जी, आप मेरी समधन हैं। यह ठीक नहीं होगा।”

वो बोलीं, “प्रदीप जी, समधन ही तो हैं। कोई रिश्तेदारी तो नहीं है। और मेरी बेटी आपके बेटे से शादी कर चुकी है, इसलिए हम तो एक परिवार हैं।”

मैंने सोचा और फिर कहा, “ठीक है, लेकिन किसी को पता नहीं चलना चाहिए।”

वो खुश हो गईं और बोलीं, “वादा करती हूँ। यह हम दोनों का राज रहेगा।”

शाम को जब सुनीता और अशोक किसी काम से बाहर गए, और राहुल-प्रिया अपने कमरे में थे, मैंने माधुरी को अपने कमरे में बुलाया।

वो आईं और मैंने दरवाज़ा बंद कर दिया। मैंने उन्हें अपनी बाहों में भर लिया और किस करने लगा। उनके होंठ बहुत मुलायम थे और वो भी मेरा पूरा साथ दे रही थीं।

मैंने उनकी साड़ी खोलना शुरू की।

उन्होंने गहरे लाल रंग का ब्लाउज और पेटीकोट पहना हुआ था।

मैंने उनका ब्लाउज खोला और उनकी ब्रा भी। उनके बड़े-बड़े गोरे बूब्स बाहर आ गए।

मैं उन्हें देखता ही रह गया। वो इतने सुंदर थे कि मैं उन्हें छूना चाहता था।

मैंने अपने हाथ उनके बूब्स पर रखे और दबाने लगा। वो आहें भरने लगीं, “आह्ह्ह… प्रदीप… बहुत मज़ा आ रहा है…”

मैं बारी-बारी से दोनों बूब्स चूस रहा था। उनके निप्पल्स बड़े-बड़े और काले थे।

मैंने उन्हें काटा तो वो और ज़्यादा उत्तेजित हो गईं।

फिर मैंने नीचे की तरफ बढ़ना शुरू किया। मैंने उनका पेटीकोट खोला और पैंटी भी।

उनकी चूत थोड़ी झाँटों वाली थी लेकिन बहुत सेक्सी लग रही थी।

मैंने अपना मुँह उनकी चूत पर लगाया और चाटना शुरू कर दिया।

वो पागल हो रही थीं, “ओह्ह्ह… प्रदीप… यह क्या कर रहे हो… बहुत मज़ा आ रहा है… और चाटो…”

मैं उनकी चूत को जीभ से चाट रहा था।

करीब 15 मिनट बाद वो झड़ गईं। उन्होंने पानी मेरे मुँह में छोड़ दिया और मैंने सब पी लिया।

अब माधुरी ने मेरे कपड़े उतारे। मेरा 6.5 इंच का लंड देखकर वो खुश हो गईं।

वो बोलीं, “वाह प्रदीप, तुम्हारा तो अशोक से भी बड़ा है।”

वो नीचे बैठीं और मेरा लंड चूसने लगीं। वो बहुत अच्छे से चूस रही थीं।

मैं उनके बाल पकड़कर उनके मुँह को आगे-पीछे कर रहा था। करीब 20 मिनट बाद मैंने उन्हें उठाया और बेड पर लिटाया।

मैंने उनकी टांगें फैलाईं और अपना लंड उनकी चूत पर रगड़ा।

वो बहुत गीली हो चुकी थीं। मैंने धीरे से अंदर डाला।

वो चीखीं, “आह्ह्ह… धीरे… बहुत मोटा है…”

मैंने धीरे-धीरे धक्के लगाने शुरू किए। उनकी चूत बहुत टाइट थी।

मैंने धीरे-धीरे अपना पूरा लंड अंदर डाल दिया।

वो अब मज़े में आने लगी थीं। वो बोलीं, “हाँh… प्रदीप… अब तेज़ करो… और ज़ोर से…”

मैंने स्पीड बढ़ा दी। थप-थप-थप की आवाज़ कमरे में गूँज रही थी।

उनके बूब्स हिल रहे थे और मैं उन्हें दबा रहा था। करीब 25 मिनट तक मैं उन्हें चोदता रहा।

फिर मैंने उन्हें घोड़ी बनाया। उनकी बड़ी गोरी गांड देखकर मैं और ज़्यादा उत्तेजित हो गया।

मैंने पीछे से उनकी चूत में लंड डालकर ज़ोर-ज़ोर से धक्के लगाने शुरू किए।

“आह्ह्ह… प्रदीप… मर गई… बहुत अंदर जा रहा है… और तेज़ करो… मैं तुम्हारी हूँ आज… चोदो मुझे…” वो चिल्ला रही थीं।

मैंने उनकी गांड थपथपाई और चोदता रहा। करीब 20 मिनट बाद वो फिर से झड़ गईं।

मैंने भी कुछ ही मिनट बाद अपना वीर्य उनकी चूत में ही छोड़ दिया।

हम दोनों थककर बेड पर गिर गए।

वो बोलीं, “प्रदीप, यह बहुत अच्छा था। अशोक तो कभी इतनी देर नहीं चोदते।”

मैंने कहा, “जब भी तुम्हारा मन करे, मुझे बता देना।”

उस हफ्ते के दौरान, जब भी मौका मिलता, हम दोनों चुदाई करते।

कभी रात में सबके सोने के बाद, कभी दिन में जब घर में कोई नहीं होता।

एक दिन सुनीता और अशोक दोनों बाहर गए थे।

राहुल-प्रिया भी अपने दोस्तों के साथ घूमने गए थे। घर में सिर्फ मैं और माधुरी थे।

माधुरी ने मुझे अपने कमरे में बुलाया। वो पहले से ही नंगी बेड पर लेटी हुई थीं।

मैंने भी कपड़े उतारे और उनके ऊपर आ गया।

उस दिन हमने बहुत देर तक चुदाई की। मैंने उन्हें अलग-अलग पोजीशन में चोदा – मिशनरी, डॉगी, काउगर्ल, और 69 भी किया। वो बहुत खुश थीं।

जब माधुरी और अशोक जाने लगे, तो माधुरी ने मुझे अपना नंबर दिया और कहा, “प्रदीप, जब भी मौका मिले, मुझे बुलाना। मैं आ जाऊँगी।”

मैंने कहा, “जरूर।”

उसके बाद भी, जब भी सुनीता घर पर नहीं होती, मैं माधुरी को बुलाता और हम दोनों जमकर चुदाई करते। यह हमारा सीक्रेट अफेयर है जो आज तक चल रहा है।

नोट: यहां पोस्ट की गई सभी कहानियां केवल मनोरंजन के उद्देश्य से प्रस्तुत की गई हैं। कृपया इन्हें वास्तविक जीवन से जोड़कर न देखें। कहानी में दर्शाए गए किसी भी दृश्य, घटना या चित्र का वास्तविक जीवन में प्रयोग करना हानिकारक हो सकता है। इसके लिए न तो कहानी के लेखक और न ही प्रस्तुतकर्ता जिम्मेदार होंगे। इसलिए कृपया अपनी समझ, बुद्धि और विवेक का उपयोग करें।

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