slut sister xxx story
हाय दोस्तों, मेरा नाम जेबा है। मेरी उम्र 26 साल है, और मेरा फिगर 36-28-38 है।
मेरी हाइट 5 फीट 5 इंच है, और मैं दिखने में काफी सुंदर हूं।
मेरी बड़ी बहन सारा की शादी को 3 साल हो चुके हैं।
उनके पति का नाम रितेश है, जो एक बिजनेसमैन हैं। उनकी उम्र 32 साल है।
मेरी बहन ने मुझे अपने ससुराल बुलाया था कुछ दिनों के लिए।
मैंने सोचा कुछ दिन बदल-बदल रहूंगी। लेकिन मुझे नहीं पता था कि यहां मेरी जिंदगी बदलने वाली है।
मैं शाम को 6 बजे उनके घर पहुंची। यह एक बड़ा सा बंगला था, दिल्ली के एक अपमार्केट इलाके में।
रितेश जी ने दरवाजा खोला। उन्होंने वाइट शर्ट और ब्लैक पैंट पहनी हुई थी।
वो दिखने में काफी हैंडसम थे—6 फीट की हाइट, एथलेटिक बॉडी, और चेहरे पर एक charming सी मुस्कान।
“आओ जेबा, कैसी हो?” उन्होंने पूछा।
“ठीक हूं जीजू,” मैंने कहा।
मेरी बहन सारा भी आ गई। उसने साड़ी पहनी हुई थी, और वो थोड़ी थकी हुई लग रही थी।
“क्या हुआ दीदी? तबीयत ठीक है?” मैंने पूछा।
“हां, बस थोड़ी थकान है। तू आ गई, यही बहुत है,” सारा ने कहा।
हमने साथ में खाना खाया। रितेश जी काफी ध्यान से मेरी बहन का ख्याल रख रहे थे।
लेकिन मैंने नोटिस किया कि सारा दीदी कुछ परेशान थीं।
रात को, जब हम दोनों बहनें बातें कर रही थीं, तो सारा ने मुझे बताया।
“जेबा, रितेश में कुछ प्रॉब्लम है,” उसने कहा।
“क्या प्रॉब्लम?” मैंने पूछा।
“वो… वो सेक्स नहीं कर सकते। उनमें वो कैपेसिटी नहीं है। डॉक्टर ने कहा है यह जन्मजात है,” सारा ने रोते हुए कहा।
मैं चौंक गई। “क्या? लेकिन 3 साल हो गए शादी को…”
“हां, और मैं 3 साल से इसी तरह रह रही हूं। लेकिन रितेश मुझे बहुत प्यार करते हैं। उन्होंने मुझे प्रपोज किया है कि अगर मैं चाहूं तो बाहर से… लेकिन मैं मना कर देती हूं,” सारा ने कहा।
मैंने सारा को चुप किया। “दीदी, तुम चिंता मत करो। सब ठीक हो जाएगा।”
अगले दिन, रितेश जी ऑफिस गए। मैं और सारा घर पर थीं।
दोपहर को एक आदमी आया—नीलेश। वो रितेश का दोस्त था, और उनका बिजनेस पार्टनर भी। उसकी उम्र 30 साल थी, और वो काफी हैंडसम था।
“भाभी जी, रितेश है?” उसने पूछा।
“नहीं, ऑफिस गए हैं। आओ, बैठो,” सारा ने कहा।
नीलेश बैठ गया। मैंने उसके लिए चाय बनाई।
जब मैं चाय लेकर आई, तो मैंने देखा कि नीलेश सारा को घूर रहा था। उसकी नजरें सारा के बूब्स पर टिकी थीं।
“यह कौन है?” नीलेश ने मुझसे पूछा।
“मेरी बहन जेबा,” सारा ने कहा।
“वाह, बहन जी भी काफी सुंदर हैं,” नीलेश ने मुस्कुराते हुए कहा।
मैंने शरमाते हुए चाय रखी और अंदर चली गई।
लेकिन मैंने दरवाजे से झांककर देखा। नीलेश सारा के करीब बैठा था, और उसका हाथ ‘अनजाने’ में सारा के हाथ पर चला गया था।
सारा ने हाथ हटाया, लेकिन वो मुस्कुरा रही थी।
कुछ देर बाद नीलेश चला गया। मैंने सारा से पूछा, “दीदी, यह नीलेश…”
“वो रितेश का दोस्त है। लेकिन वो मुझे पसंद करता है। और रितेश को भी पता है। रितेश ने ही कहा है कि अगर मैं चाहूं तो नीलेश के साथ… लेकिन मैं अभी तक मना करती आई हूं,” सारा ने कहा।
मैं समझ गई कि यह घर कुछ अलग तरह का था।
शाम को रितेश आए। उन्होंने मुझे अपने स्टडी में बुलाया।
“जेबा, मुझे पता है सारा ने तुम्हें सब बता दिया है। मैं चाहता हूं कि तुम उसे समझाओ। मैं उसे खुश देखना चाहता हूं। और अगर वो नीलेश के साथ रिलेशन रखना चाहती है, तो मुझे कोई प्रॉब्लम नहीं है। मैं उसे प्यार करता हूं, और मैं जानता हूं वो भी मुझसे प्यार करती है। यह सिर्फ शारीरिक जरूरत है,” रितेश ने कहा।
मैंने सोचा, यह आदमी कितना अजीब है।
लेकिन फिर मुझे लगा कि शायद यही प्यार है—किसी की खुशी के लिए कुछ भी करना।
“मैं कोशिश करूंगी जीजू,” मैंने कहा।
अगले दिन, मैंने सारा से बात की। “दीदी, रितेश जी सही कह रहे हैं। तुम्हें अपनी जिंदगी जीनी चाहिए।”
“लेकिन जेबा, यह गलत है ना?” सारा ने पूछा।
“गलत क्या है? तुम्हारे पति को खुद मंजूरी है। और वो तुमसे प्यार करता है। तो फिर क्या प्रॉब्लम है?” मैंने कहा।
सारा ने सोचा, और फिर उसने हां कर दी।
उस शाम, रितेश ने नीलेश को डिनर पर बुलाया।
हम चारों थे—रितेश, सारा, नीलेश, और मैं। खाने के बाद, रितेश ने कहा, “मैं थोड़ा ऊपर जा रहा हूं। कुछ काम है। तुम लोग मस्ती करो।”
रितेश चले गए। नीलेश ने सारा का हाथ पकड़ा। “सारा, तुम मान गई?”
सारा ने शरमाते हुए हां कहा।
नीलेश ने उसे खींचा और अपनी गोद में बिठा लिया। मैं वहीं बैठी थी, देख रही थी।
नीलेश ने सारा को किस किया। वो एक लंबा, गहरा किस था।
सारा भी उसका साथ दे रही थी। नीलेश का हाथ सारा की साड़ी के अंदर जाने लगा।
मैंने नजरें झुका लीं, लेकिन फिर मैंने देखा।
नीलेश ने सारा को उठाया और सोफे पर लिटा दिया।
उसने सारा की साड़ी उतारी। सारा सिर्फ ब्लाउज और पेटीकोट में थी।
नीलेश ने उसका ब्लाउज खोला। सारा के बूब्स बाहर आ गए—बड़े, गोल, और सुंदर।
नीलेश उन्हें चूसने लगा। सारा आंखें बंद करके आनंद ले रही थी।
मैं वहीं बैठी थी, देख रही थी। मुझे समझ नहीं आ रहा था कि मैं जाऊं या रुकूं।
तभी रितेश आ गए। मैं घबरा गई, लेकिन रितेश ने मुझे रोका। “रुको जेबा, देखो।”
हम दोनों देख रहे थे। नीलेश सारा की पैंटी उतार रहा था। सारा पूरी तरह नंगी थी।
नीलेश ने अपने कपड़े उतारे। उसका लंड बाहर आया—7 इंच लंबा, मोटा, और कड़ा।
“वाह,” मैंने बिना सोचे कहा।
रितेश ने मेरी तरफ देखा। “कैसा लगा?”
“बहुत बड़ा है,” मैंने कहा।
“चाहो तो तुम भी ट्राई कर सकती हो,” रितेश ने कहा।
मैं चौंक गई। “क्या? मैं? नहीं, मैं कैसे…”
“क्यों नहीं? तुम भी तो अकेली हो। और मैं देख रहा हूं तुम्हें नीलेश पसंद आया है,” रितेश ने कहा।
मैंने मना किया, लेकिन अंदर ही अंदर मुझे कुछ हो रहा था। नीलेश का लंड देखकर मैं गर्म हो गई थी।
उधर, नीलेश सारा को चोद रहा था। वो उसे मिशनरी पोजीशन में चोद रहा था। सारा की आवाजें निकल रही थीं—”हां, नीलेश, और तेज…”
यह मेरे लिए नया अनुभव था। मैंने कभी किसी को चोदते हुए नहीं देखा था।
और अब मेरे सामने मेरी बहन चोदी जा रही थी, और उसके पति खड़े होकर देख रहे थे।
कुछ देर बाद, नीलेश झड़ गया।
उसने अपना वीर्य सारा की योनि में छोड़ दिया।
सारा थककर लेट गई, लेकिन उसके चेहरे पर खुशी थी।
नीलेश ने मेरी तरफ देखा। “जेबा, तुम भी आओ।”
मैंने मना किया, लेकिन रितेश ने मुझे धीरे से आगे किया। “जाओ, मजा लो,” उसने कहा।
मैं नीलेश के पास गई।
उसने मेरा हाथ पकड़ा और मुझे अपनी गोद में बिठा लिया।
उसका लंड अभी भी कड़ा था, और वो मेरी गांड के नीचे महसूस हो रहा था।
“क्या तुम मुझे पसंद करती हो?” नीलेश ने पूछा।
मैंने हां में सिर हिलाया। उसने मेरे होठों पर चुंबन किया।
मैंने भी जवाब दिया। उसने मेरे कपड़े उतारने शुरू किए। पहले मेरी कुर्ती, फिर मेरी लेगिंग। मैं सिर्फ ब्रा और पैंटी में रह गई।
“वाह, क्या बॉडी है,” नीलेश ने कहा।
उसने मेरी ब्रा खोली।
मेरे बूब्स बाहर आ गए—बड़े, गोल, और सुंदर। उसने उन्हें पकड़ा और चूसना शुरू कर दिया।
मैं आंखें बंद करके आनंद ले रही थी।
रितेश और सारा दोनों देख रहे थे।
सारा ने मुस्कुराते हुए कहा, “जेबा, मजा लो।”
नीलेश ने मेरी पैंटी उतारी। मेरी योनि गीली थी।
उसने अपनी उंगली से मुझे छुआ। “कितनी गीली हो,” उसने कहा।
“चुप करो,” मैंने शरमाते हुए कहा।
उसने मुझे सोफे पर लिटाया और मेरी टांगें फैलाईं।
उसने अपना लंड मेरी योनि के मुंह पर रखा और धीरे से धक्का दिया।
मैं चिल्लाई, लेकिन दर्द के साथ मजा भी आया।
वो बहुत बड़ा था। उसने धीरे-धीरे अपना पूरा लंड मेरे अंदर डाल दिया।
“ओह, नीलेश, यह बहुत बड़ा है,” मैंने कहा।
“सहन करो, मजा आएगा,” उसने कहा।
उसने हिलना शुरू किया। धीरे-धीरे, फिर तेजी से।
मैं झड़ने वाली थी। मैंने अपने नाखून उसकी पीठ में गाड़ दिए।
“हां, नीलेश, और तेज,” मैंने कहा।
उसने तेजी से धक्के लगाए। मैं झड़ गई।
मेरी योनि ने उसके लंड को कसकर पकड़ लिया।
नीलेश भी झड़ गया। उसने अपना वीर्य मेरी योनि में छोड़ दिया।
हम दोनों थककर एक-दूसरे पर गिर पड़े।
रितेश और सारा हमें देख रहे थे, और दोनों मुस्कुरा रहे थे।
“वेलकम टू द फैमिली, जेबा,” रितेश ने कहा।
उस रात के बाद, मेरी जिंदगी बदल गई।
मैं अब उनके घर पर ही रहने लगी। रितेश ने मेरे लिए एक अलग कमरा बना दिया।
रात को, कभी नीलेश सारा के साथ सोता, कभी मेरे साथ, और कभी हम दोनों के साथ।
हम एक अजीब सा परिवार बन गए थे—जहां प्यार था, समझ थी, और सेक्स भी था।
रितेश कभी जलता नहीं था। वो खुश था कि उसकी पत्नी और उसकी साली खुश थीं।
कुछ महीनों बाद, रितेश ने एक और दोस्त को इनवाइट किया—शमशेर।
वो एक जिम ट्रेनर था, और उसकी बॉडी बहुत अच्छी थी।
उसने मुझे और सारा को एक साथ चोदा। यह एक नया अनुभव था—दो बहनों को एक साथ।
फिर एक दिन, रितेश ने कहा, “मैं एक और लड़की को लाना चाहता हूं।”
“कौन?” हमने पूछा।
“हसीना। वो हमारी नई मेड है। मैंने देखा है वो तुम दोनों को घूरती है। और वो लेस्बियन भी है,” रितेश ने कहा।
हसीना 24 साल की थी, उसका फिगर 34-26-36 था।
वो काफी सुंदर थी, और उसकी आंखें बड़ी-बड़ी थीं।
रात को, रितेश ने हसीना को रुकने के लिए कहा।
हम चारों थे—सारा, मैं, रितेश, और हसीना। रितेश ने हसीना से कहा, “क्या तुम मेरी पत्नी और उसकी बहन को खुश कर सकती हो?”
हसीना ने मुस्कुराते हुए हां कहा। उसने पहले सारा को किस किया। फिर मुझे।
फिर उसने अपने कपड़े उतारे। उसकी बॉडी बहुत सुंदर थी—गोरी, कसी हुई, और बिल्कुल स्मूथ।
हम तीनों लड़कियां एक-दूसरे को किस करने लगीं। रितेश बैठकर देख रहा था।
हसीना ने मेरी योनि को चाटना शुरू किया, और सारा ने हसीना की योनि चाटी। हम एक ट्राइएंगल बन गए थे।
फिर रितेश भी शामिल हो गया। उसने हसीना को चोदा, जबकि हसीना मुझे चाट रही थी।
यह एक ग्रुप सेक्स था—चार लोग, एक साथ, एक-दूसरे को खुश करते हुए।
आज, 2 साल बाद, हम अभी भी इसी तरह रह रहे हैं।
मैंने रितेश से शादी नहीं की, लेकिन मैं उसकी दूसरी पत्नी की तरह ही हूं। सारा मेरी बहन है, लेकिन हम दोनों एक-दूसरे की साथी भी हैं।
हसीना अब हमारे साथ ही रहती है, और नीलेश और शमशेर अक्सर आते हैं।
यह एक अलग तरह का रिश्ता है, लेकिन हम सब खुश हैं।
हमने समाज के नियमों को तोड़ दिया है, और अपनी खुशी के लिए अपने नियम बना लिए हैं।
तो यह थी मेरी कहानी।
अगर आपको पसंद आई हो तो जरूर बताना।
मैं और भी कहानियां सुनाऊंगी।
धन्यवाद।
नोट: यहां पोस्ट की गई सभी कहानियां केवल मनोरंजन के उद्देश्य से प्रस्तुत की गई हैं। कृपया इन्हें वास्तविक जीवन से जोड़कर न देखें। कहानी में दर्शाए गए किसी भी दृश्य, घटना या चित्र का वास्तविक जीवन में प्रयोग करना हानिकारक हो सकता है। इसके लिए न तो कहानी के लेखक और न ही प्रस्तुतकर्ता जिम्मेदार होंगे। इसलिए कृपया अपनी समझ, बुद्धि और विवेक का उपयोग करें।
Wow! maan gaye bhai tum kamal ke laud ho. saale tum jaise logon ke wajah se hi ladkiya randi banti hai