मामा के दोनों बेटों ने मिलकर मुझे चोदा

bhai ne milkar choda aur pregnant kiya

मेरा नाम आलिया है। आज मेरी उम्र 22 साल है।

जब मैं 19 साल की थी तब मैं पढ़ाई के लिए मुंबई आ गई थी।

मेरे पापा ने मेरे मामा के घर मुझे रहने के लिए भेज दिया था।

मामा के घर में मामा, मामी और उनके 2 बेटे रहते थे। बड़े बेटे का नाम रमेश था और वह 28 साल का था। छोटे बेटे का नाम रितेश था और वह 25 साल का था। दोनों ही लड़के मामा के बिजनेस में काम करते थे।

उस समय मेरा फिगर 36 28 38 था। मैं गोरी और गदराई शरीर की थी।

मेरी कमर बहुत पतली थी, सिर्फ 28 इंच की, और कूल्हे गोल और भरे हुए थे, 38 इंच के।

मेरी चूचियाँ भारी और उभरी हुई थीं, 36 इंच की, जो किसी भी कपड़े के अंदर से भी साफ झलकती थीं।

मेरी जाँघें मोटी और मुलायम थीं, और मेरी गांड का आकार देखकर हर मर्द की निगाहें ठहर जाती थीं।

जब मैं मामा के घर पहुंची तब मुझे रितेश ने दरवाजा खोला। उसकी आँखें मुझे देखते ही चौड़ी हो गईं।

मेरे बड़े-बड़े स्तन उसकी नजरों में साफ झलक रहे थे। मैंने टाइट टी-शर्ट और जींस पहनी हुई थी जिसमें मेरे शरीर के सारे कर्व साफ दिख रहे थे।

“आलिया, तुम तो बहुत बड़ी हो गई हो,” रितेश ने कहा, उसकी आँखें मेरे स्तनों पर टिकी हुई थीं।

“हाँ, 3 साल बाद तो आई हूँ,” मैंने शर्माते हुए कहा।

मामा भी घर पर थे। उनकी उम्र 52 साल थी लेकिन वे अभी भी बहुत फिट दिखते थे।

उनकी आँखें भी मुझे देखकर चमक गईं। मामी ने मुझे गले लगाया और मेरे कमरे में ले गईं।

मेरा कमरा घर के ऊपरी हिस्से में था, जहाँ से पूरा शहर दिखता था।

शाम को जब रमेश आया तो वह भी मुझे देखकर हैरान रह गया।

“वाह आलिया, तुम तो मॉडल लग रही हो,” उसने कहा, उसकी नजरें मेरी कमर से लेकर मेरी जाँघों तक घूम रही थीं।

रात को खाने के बाद हम सब टीवी देख रहे थे। मैंने नाइटी पहनी हुई थी जो मेरे घुटनों से थोड़ी ऊपर थी।

जब मैं सोफे पर बैठी तो मेरी नाइटी थोड़ी ऊपर उठ गई और मेरी जाँघें नंगी दिखने लगीं।

मामा की नजरें बार-बार मेरी जाँघों पर जा रही थीं।

कुछ दिनों बाद मामा-मामी को किसी रिश्तेदार के यहाँ जाना पड़ा।

वे 2 दिन के लिए बाहर जा रहे थे। घर में सिर्फ मैं, रमेश और रितेश रहने वाले थे।

मामी ने मुझे समझाया कि मैं अच्छे से रहूँ और किसी भी चीज़ की जरूरत हो तो रमेश या रितेश से कहूँ।

मामा-मामी के जाते ही माहौल बदल गया। रमेश और रितेश दोनों मुझसे बहुत फ्रैंक हो गए।

वे मेरे कमरे में आने लगे और मुझसे बातें करने लगे।

रात को हम तीनों ने साथ में डिनर किया और फिर बैठकर बातें करने लगे।

रितेश ने शराब की बोतल निकाली। “आलिया, एक पेग ले लो,” उसने कहा।

“नहीं, मैं नहीं पीती,” मैंने मना किया।

“अरे, आज तो मामा-मामी भी नहीं हैं। मजे करो,” रमेश ने कहा और मेरे लिए भी एक गिलास भर दिया।

मैंने थोड़ी सी शराब पी और मेरा सिर हल्का होने लगा। मैं ज्यादा नहीं पी सकती थी।

रमेश और रितेश दोनों ने 3-3 पेग लगा लिए थे और वे नशे में थोड़े चूर हो गए थे।

रितेश ने अचानक मेरा हाथ पकड़ लिया। “आलिया, तुम बहुत खूबसूरत हो,” उसने कहा, उसकी आँखों में एक अजीब सी चमक थी।

“क्या कर रहे हो?” मैंने हाथ खींचने की कोशिश की।

“अरे, रुको ना,” रमेश ने भी आकर मेरे दूसरी तरफ बैठ लिया। “हम तुम्हें पसंद करते हैं।”

मैं समझ गई कि स्थिति खराब हो रही है। मैं उठकर जाने लगी लेकिन रितेश ने मेरा हाथ खींच लिया और मुझे सोफे पर बैठा दिया।

“बस थोड़ी देर बैठो,” रमेश ने कहा और उसने अपना हाथ मेरे कंधे पर रख दिया।

धीरे-धीरे उनके हाथ मेरे शरीर पर घूमने लगे। रितेश का हाथ मेरी जाँघ पर आ गया और वह धीरे-धीरे सहलाने लगा। मैं कांपने लगी। मेरे शरीर में एक अजीब सी सनसनी दौड़ गई।

“प्लीज, मत करो,” मैंने कहा लेकिन मेरी आवाज कमजोर थी।

“डरो मत,” रमेश ने कहा और उसने अपने होंठ मेरे गाल पर रख दिए। उसके होंठ गर्म थे और मेरी साँसें तेज हो गईं।

रितेश ने मेरी नाइटी के नीचे हाथ डाल दिया और मेरी जाँघों को सहलाने लगा।

उसकी उंगलियाँ ऊपर की ओर बढ़ रही थीं।

मैंने अपने पैरों को बंद करने की कोशिश की लेकिन रमेश ने मेरी टाँगों को फैला दिया।

“देखो तो कितनी गोल और मुलायम जाँघें हैं,” रितेश ने कहा और उसने मेरी नाइटी को ऊपर खींच लिया। मेरी जाँघें पूरी तरह नंगी हो गईं और मेरी सफेद पैंटी दिखने लगी।

रमेश ने मेरी नाइटी को ऊपर से उतार दिया।

मैंने अंदर ब्रा नहीं पहनी थी और मेरे बड़े-बड़े स्तन बाहर निकल आए।

दोनों भाइयों की आँखें मेरे स्तनों पर चिपक गईं। मेरे निपल्स सख्त होकर खड़े हो गए थे।

“वाह, कितने बड़े दूध हैं,” रितेश ने कहा और उसने मेरी एक चूची को अपने हाथ में भर लिया।

उसकी उंगलियाँ मेरे नरम मांस को दबा रही थीं।

रमेश ने दूसरी चूची को पकड़ लिया और उसे मुँह में भरकर चूसने लगा।

उसके होंठ मेरे निपल को घेरकर खींच रहे थे और जीभ गोल-गोल घुमा रही थी। मुझे एक अजीब सा मजा आने लगा और मैं कराहने लगी।

“आह… प्लीज… मत करो,” मैंने कहा लेकिन मेरे शरीर ने विरोध नहीं किया।

रितेश ने मेरी पैंटी को नीचे खींचा और मेरी नंगी चूत दिखने लगी।

मैंने चूत के बाल साफ किए हुए थे और वह पूरी तरह गोरी और गुलाबी थी। मेरी चूत के होंठ मोटे थे और बीच से गीली हो रही थी।

“देखो, यह तो गीली हो गई है,” रितेश ने कहा और उसने अपनी एक उंगली मेरी चूत में डाल दी।

मेरे मुँह से एक लंबी सिसकारी निकल गई। “आह… ईईईई…”

रमेश ने मेरे होंठों को चूमना शुरू कर दिया। उसके होंठ गर्म और गीले थे।

उसकी जीभ मेरे मुँह में घुस गई और मेरी जीभ के साथ खेलने लगी। मैं पूरी तरह गर्म हो चुकी थी और अब मैं भी उनका साथ देने लगी थी।

रितेश ने मेरी चूत में एक और उंगली डाल दी। अब 2 उंगलियाँ अंदर-बाहर हो रही थीं और मुझे बहुत मजा आ रहा था।

मेरी चूत गीली हो चुकी थी और उंगलियाँ आसानी से अंदर-बाहर हो रही थीं।

“अब इसे चोदते हैं,” रमेश ने कहा और उसने अपनी शर्ट और पैंट उतार दी। उसका लंड बहुत बड़ा था, करीब 8 इंच लंबा और 2.5 इंच मोटा। वह लाल होकर फूला हुआ था और उसके अंडकोष भारी थे।

रितेश ने भी अपने कपड़े उतार दिए। उसका लंड थोड़ा छोटा था लेकिन बहुत मोटा था, करीब 7 इंच लंबा और 3 इंच का घेरा।

दोनों भाइयों के लंड देखकर मैं डर गई लेकिन मेरे शरीर में एक उत्तेजना भी थी।

रमेश ने मुझे सोफे पर लिटा दिया और मेरी टाँगों को फैला दिया।

उसने अपने लंड का सिरा मेरी चूत पर रखा और धीरे-धीरे अंदर डालना शुरू किया।

मेरी चूत बहुत तंग थी क्योंकि मैंने कभी सेक्स नहीं किया था।

“आह… दर्द हो रहा है… धीरे करो,” मैंने कहा।

रमेश ने एक जोर का धक्का मारा और उसका आधा लंड मेरी चूत में घुस गया। मेरे मुँह से चीख निकल गई। “ईईईई… मर गई… बाहर निकालो…”

लेकिन रमेश ने ध्यान नहीं दिया और उसने एक और धक्का मारा।

अब उसका पूरा 8 इंच लंबा लंड मेरी चूत में समा गया था।

मेरी चूत की दीवारें फैल गई थीं और मुझे बहुत दर्द हो रहा था।

थोड़ी देर बाद जब दर्द कम हुआ तो रमेश ने धक्के मारना शुरू किया।

उसके कूल्हे तेजी से आगे-पीछे हो रहे थे और उसका लंड मेरी चूत में अंदर-बाहर हो रहा था।

धीरे-धीरे मुझे भी मजा आने लगा और मैं कराहने लगी।

“आह… हाँ… और जोर से… चोदो मुझे…” मैंने कहा।

रितेश ने अपना लंड मेरे मुँह के पास ला दिया। “इसे भी चूसो,” उसने कहा।

मैंने उसका मोटा लंड अपने मुँह में ले लिया। वह इतना मोटा था कि मेरे मुँह में भर गया था।

मैंने उसे चूसना शुरू किया और रितेश कराहने लगा।

“वाह… क्या चूसती है… बहुत मजा आ रहा है,” रितेश ने कहा।

रमेश मेरी चूत को ताबड़तोड़ चोद रहा था।

उसके धक्के तेज हो गए थे और वह पूरी ताकत से मुझे पेल रहा था।

मेरी चूत से पानी निकलने लगा था और उसकी चिकनाई से लंड और आसानी से अंदर-बाहर हो रहा था।

“मैं आने वाला हूँ,” रमेश ने कहा और उसने अपने धक्के और तेज कर दिए।

“मुझे भी मजा आ रहा है… और जोर से चोदो,” मैंने कहा।

कुछ ही देर में रमेश झड़ गया। उसने अपना गर्म गाढ़ा वीर्य मेरी चूत के अंदर ही छोड़ दिया।

मुझे अंदर भरा हुआ महसूस हो रहा था और उसका वीर्य मेरी चूत से बाहर बहने लगा था।

रमेश के हटते ही रितेश ने मुझे उठाया और घुटनों के बल खड़ा कर दिया।

उसने मेरी कमर पकड़ी और अपना मोटा लंड मेरी चूत में एक ही धक्के में डाल दिया।

मेरी चूत पहले से ही गीली थी इसलिए वह आसानी से अंदर चला गया।

“आह… कितनी मोटी है तुम्हारी चूत,” रितेश ने कहा और वह मुझे पीछे से चोदने लगा।

उसका लंड बहुत मोटा था और मेरी चूत की दीवारों को चीरता हुआ अंदर जा रहा था।

उसके हर धक्के पर मेरे शरीर में आग सी लग रही थी।

मेरी चूचियाँ आगे-पीछे हिल रही थीं और रितेश ने उन्हें पकड़कर खींचना शुरू कर दिया।

“आह… और जोर से… मेरी चूत फाड़ दो,” मैंने कहा।

रितेश ने पूरी ताकत से धक्के मारने शुरू कर दिए। उसके कूल्हे मेरी गांड से टकरा रहे थे और फच-फच की आवाजें गूँज रही थीं।

मेरी चूत से पानी और वीर्य का मिश्रण बाहर बह रहा था और फर्श पर गिर रहा था।

20 मिनट तक लगातार चोदने के बाद रितेश भी झड़ गया। उसने भी अपना सारा वीर्य मेरी चूत में भर दिया।

अब मेरी चूत दोनों भाइयों के वीर्य से भरी हुई थी और वह बाहर बहकर मेरी जाँघों तक आ गया था।

मैं फर्श पर गिर गई। मेरा शरीर कांप रहा था और मुझे बहुत थकान महसूस हो रही थी।

मेरी चूत में दर्द हो रहा था लेकिन साथ ही एक अजीब सी संतुष्टि भी थी।

अगले दिन जब मैं उठी तो रमेश और रितेश दोनों मेरे कमरे में आए।

वे दोनों अभी भी नंगे थे और उनके लंड फिर से खड़े हो रहे थे।

“सुबह-सुबह एक राउंड और कर लेते हैं,” रमेश ने कहा।

मैंने मना करने की कोशिश की लेकिन वे दोनों मेरे ऊपर झपट पड़े।

इस बार उन्होंने मुझे डबल पेनेट्रेशन किया। रमेश ने अपना लंड मेरी चूत में डाला और रितेश ने अपना लंड मेरी गांड में डाल दिया। मेरे मुँह से चीख निकल गई।

“आह… दोनों एक साथ… मर गई… ईईईई…”

दोनों भाइयों ने एक साथ धक्के मारने शुरू किए।

मेरी चूत और गांड दोनों एक साथ भरी हुई थीं और मुझे बहुत दर्द हो रहा था लेकिन साथ ही बहुत मजा भी आ रहा था।

मेरे शरीर में आग सी लग रही थी और मैं बार-बार झड़ रही थी।

30 मिनट तक दोनों ने मुझे एक साथ चोदा और फिर दोनों एक साथ झड़ गए।

उन्होंने अपना वीर्य मेरी चूत और गांड दोनों में भर दिया। मैं पूरी तरह थककर बिस्तर पर गिर गई।

इके बाद से रमेश और रितेश मुझे रोज चोदने लगे।

कभी अलग-अलग तो कभी एक साथ।

मेरी चूत और गांड दोनों उनके लंड के निशान से भर गई थीं।

2 महीने बाद मुझे पता चला कि मैं प्रेग्नेंट हो गई हूँ।

मैं बहुत डर गई लेकिन रमेश और रितेश दोनों ने मुझे समझाया कि वे इस बच्चे को अपनाएंगे।

मामा-मामी को भी पता चल गया लेकिन वे भी चुप रहे क्योंकि उन्हें भी पोता चाहिए था।

9 महीने बाद मैंने एक लड़के को जन्म दिया।

रमेश और रितेश दोनों बच्चे को अपना मानते थे और मुझे अभी भी दोनों मिलकर चोदते थे।

मेरी जिंदगी अब इसी तरह चल रही थी।

मैं रमेश की बीवी बनकर रहती थी लेकिन रितेश भी मुझे रोज चोदता था।

आज भी जब मामा-मामी घर पर नहीं होते तो दोनों भाई मुझे एक साथ चोदते हैं।

मेरा फिगर अब 38 30 40 हो गया है। मेरी चूचियाँ और भी बड़ी हो गई हैं, 38 इंच की, और मेरी गांड भी फैलकर 40 इंच की हो गई है।

मैं अब पूरी तरह से एक औरत बन चुकी हूँ और मुझे इस जिंदगी से कोई शिकायत नहीं है।

यह मेरी सच्ची कहानी है।

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नोट: यहां पोस्ट की गई सभी कहानियां केवल मनोरंजन के उद्देश्य से प्रस्तुत की गई हैं। कृपया इन्हें वास्तविक जीवन से जोड़कर न देखें। कहानी में दर्शाए गए किसी भी दृश्य, घटना या चित्र का वास्तविक जीवन में प्रयोग करना हानिकारक हो सकता है। इसके लिए न तो कहानी के लेखक और न ही प्रस्तुतकर्ता जिम्मेदार होंगे। इसलिए कृपया अपनी समझ, बुद्धि और विवेक का उपयोग करें।

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