मेरी छोटी बहन ने ट्रेन में मेरा लंड चूसा

bhai behen x kahani

एक भाई और बहन की रात्रि यात्रा में छुपे हुए जुनून की कहानी… जब अंधेरे में सीटों की भीड़ ने उन्हें इतना करीब ला दिया कि दोनों ने वो कर डाला जो कभी सोचा भी नहीं था। पढ़िए कैसे एक साधारण ट्रेन यात्रा बन गई जिंदगी की सबसे यादगार रात!

हैलो दोस्तों! मेरा नाम किशोर है। मेरे दोस्त मुझे “किकू” बुलाते हैं।

आज मैं आपको अपनी और अपनी बहन आलिया की वो रात्रि यात्रा की कहानी सुनाने जा रहा हूँ जिसने हमारे रिश्ते को एक नई दिशा दे दी।

हमारे परिवार में चार सदस्य हैं – मैं, मेरी बहन आलिया, मेरी माँ सुनीता और पिता राजेश।

हम मुंबई के अंधेरी इलाके में एक छोटी सी फ्लैट में रहते हैं। मेरी उम्र 22 साल है और आलिया 21 साल की है।

आलिया का बदन बिल्कुल परफेक्ट है – उसका फिगर 36-30-36 है।

वो देखने में बेहद खूबसूरत है, गोरा रंग, लंबे काले बाल और भूरे आँखें जिनमें कजरारी सी नजाकत है।

हमारे मामा का घर पुणे में है और उनकी बेटी की शादी अगले हफ्ते थी।

पूरा परिवार जाना था, लेकिन आलिया को फीवर हो गया था।

मैंने माँ-पापा से कहा, “आप दोनों पहले चले जाइए, मैं आलिया का ख्याल रखता हूँ। जैसे ही ठीक होगी, हम दूसरी ट्रेन से आ जाएँगे।”

माँ-पापा के जाने के बाद घर की सारी जिम्मेदारी मुझ पर आ गई। मैं रोज़ आलिया को खाना बनाकर खिलाता, दवाई देता और उसकी देखभाल करता।

पहले तो मैंने कभी आलिया को उस नज़र से नहीं देखा था।

लेकिन उन चार दिनों में जब वो बीमार थी, कुछ बदल सा गया।

जब मैं उसे खाना खिलाता, तो उसके कॉलर के अंदर से उसकी गहरी गर्दन और हल्की सी दिखती चूचियाँ मेरी नज़र को खींचतीं। मैं खुद को रोक नहीं पाता था।

एक दिन जब मैं उसके कमरे में दवाई देने गया, तो वो सफ़ेद रंग की नाइटी में थी।

उसकी नाइटी थोड़ी गीली थी पसीने से और उसके अंदर के हल्के गुलाबी रंग की ब्रा साफ़ दिख रही थी।

मेरे हाथ कांप रहे थे। जब मैंने उसे पानी दिया, तो हमारी उँगलियाँ छू गईं। उस पल एक अजीब सी बिजली सी दौड़ी।

आलिया भी शायद कुछ महसूस कर रही थी। जब मैं उसके पास बैठकर उसका माथा सहलाता, तो वो मेरी आँखों में देखती और फिर शरमा कर नज़रें झुका लेती।

एक दिन रात को जब मैं उसे दूध देने गया, तो वो सो रही थी। उसकी नाइटी ऊपर उठी हुई थी और उसकी सफ़ेद जांघें दिख रही थीं।

मैं वहीं खड़ा होकर काफी देर तक देखता रहा। मेरे अंदर कुछ गड़बड़ सा हो रहा था।

जब वो ठीक हुई, तो हमने फैसला किया कि अगले दिन रात 9:30 की ट्रेन से पुणे निकलेंगे।

अगले दिन हम स्टेशन पहुँचे। ट्रेन एक घंटा लेट थी।

जब आई, तो भीड़ इतनी थी कि साँस लेना मुश्किल था। हम धक्के-मुक्की करके एक स्लीपर कोच में चढ़े।

अंदर हालत और भी खराब थी – लोग सीटों पर, फर्श पर, हर जगह सोए पड़े थे।

हम आखिर में एक बंद गेट के पास पहुँचे। वहाँ थोड़ी जगह थी। हमने अपने बैग रखे और खड़े हो गए। ट्रेन चल पड़ी।

अगले स्टेशन पर और भीड़ चढ़ी और मैं पूरी तरह आलिया से चिपक गया।

मेरा लंड उसकी नरम गांड से टच हो रहा था। मुझे शर्म आ रही थी, लेकिन मज़ा भी आ रहा था।

आलिया ने मेरी तरफ देखा। उसकी आँखों में कोई गुस्सा नहीं था, बस एक अजीब सी नर्मी थी।

मैंने उससे कहा, “बैग पर बैठ जा, थक जाएगी।”

वो बैठ गई। मैं उसके सामने खड़ा था। ट्रेन के झटकों से मेरा लंड बार-बार उसके चेहरे के पास आ रहा था।

वो मोबाइल देखने का नाटक कर रही थी, लेकिन मुझे पता था कि वो मेरे पैंट के उभार को देख रही थी।

रात के साढ़े ग्यारह बज चुके थे। कोच में अंधेरा था, सिर्फ़ कुछ लोगों के फोन की रोशनी झिलमिला रही थी। सब थके हुए यात्री सो रहे थे।

मेरी हिम्मत बढ़ी। मैंने अपनी जिप खोली और लंड बाहर निकाल लिया।

अंधेरे में वो सफ़ेद सा चमक रहा था। मैं आलिया के करीब खड़ा हो गया।

ट्रेन ने एक जोरदार झटका दिया और मैं आगे झुका। मेरा लंड सीधा आलिया के होंठों से टच हो गया।

वो चौंकी, ऊपर देखी। हमारी आँखें मिलीं। मैं काँप रहा था, लेकिन वो कुछ बोली नहीं।

उसने धीरे से अपना हाथ बढ़ाया और मेरे लंड को छू लिया।

मेरे तो होश उड़ गए!

आलिया खड़ी हुई, मेरे कान में आई और फुसफुसाई, “पागल हो गए हो? यहाँ कोई देख लेगा। वो सीट देखो, वहाँ चलो।”

वहाँ एक ऊपरी बर्थ थी जिसके पास पर्दा लगा हुआ था। हम दोनों धीरे-धीरे वहाँ पहुँचे।

आलिया ने पर्दा खींच लिया। अब हम दोनों उस संकरी जगह में थे।

आलिया ने मेरी पैंट खोल दी। मेरा लंड पूरी तरह खड़ा था – करीब 7 इंच लंबा और मोटा।

उसने उसे अपने कोमल हाथों में पकड़ा और बोली, “कितने दिनों से यही चाहते थे ना, भैया?”

मैं कुछ बोल नहीं पाया। उसने मेरे लंड की स्किन पीछे की और टोपे को चूम लिया।

फिर उसने जीभ निकाली और लंड के सिरे पर फेरने लगी। मुझे ऐसा लगा जैसे करंट सा दौड़ गया।

“आलिया… यह…” मैं हकलाया।

“चुप रहो,” उसने कहा और पूरा लंड अपने मुँह में ले लिया।

उसके गर्म, गीले मुँह का एहसास अविश्वसनीय था।

वो धीरे-धीरे ऊपर-नीचे करने लगी। उसकी जीभ लंड के नीचे वाले हिस्से को चाट रही थी। मैंने उसके बाल पकड़ लिए।

मैंने उसकी शर्ट के बटन खोले। अंदर काली रंग की लेस वाली ब्रा थी।

मैंने उसे ऊपर उठाया और उसके गोल, गुलाबी चुचियाँ बाहर आ गए। मैं झुका और एक निप्पल मुँह में लेकर चूसने लगा।

“उम्म… आह…” आलिया की दबी हुई सिसकी निकली।

वो मेरे लंड को और तेज़ी से चूसने लगी।

उसके मुँह से आवाजें आ रही थीं – चुप… चुप… उसकी लार मेरे लंड पर बह रही थी, जिससे वो और चिकना हो गया था।

मैंने उसकी दूसरी चूची भी मसलना शुरू किया। उसके निप्पल कड़े हो गए थे।

मैं उन्हें उँगलियों से कसता और छोड़ता। आलिया की साँसें तेज़ हो गईं।

“भैया… बहुत मज़ा आ रहा है…” वो मेरे लंड को मुँह से निकालकर बोली और फिर से गहरा लेने लगी।

वो अपने गले तक लंड ले जा रही थी। कभी-कभी उल्टी जैसी आवाज़ आती तो वो रुकती, फिर फिर से शुरू कर देती।

मैंने उसके सिर को पकड़कर धीरे-धीरे आगे-पीछे करना शुरू किया।

ट्रेन के झटके हमें और भी मज़ा दे रहे थे।

हर झटके के साथ मेरा लंड उसके गले तक घुस जाता।

वो अपने हाथ से मेरे अंडकोष भी सहला रही थी।

“आलिया… मैं… मैं निकलने वाला हूँ…” मैंने कहा।

वो और तेज़ी से चूसने लगी। उसकी गर्दन तेज़ी से आगे-पीछे हो रही थी।

मैंने उसके सिर को पकड़ा और जोर से अपना लंड उसके मुँह में पेल दिया।

एक, दो, तीन झटके और फिर मेरा गर्म वीर्य उसके मुँह में भर गया।

आलिया ने एक भी बूंद बाहर नहीं निकलने दी। वो सब निगलती रही।

उसने मेरे लंड को अपनी जीभ से साफ़ किया और फिर मुँह से निकाला।

मैं थक कर बैठ गया।

आलिया मेरे पास आई, मेरे होंठों पर एक हल्का सा चूमन दिया और बोली, “अब सो जाओ, सुबह पुणे भी तो पहुँचना है।”

मैंने उसे अपनी बाँहों में भर लिया। हम दोनों उसी संकरी बर्थ पर एक-दूसरे से लिपटकर सो गए।

सुबह जब आँख खुली, तो ट्रेन पुणे स्टेशन पर खड़ी थी।

हमने जल्दी से कपड़े ठीक किए और उतर गए।

माँ-पापा ने स्टेशन पर हमें देखा तो कुछ नहीं बोले, लेकिन आलिया और मैं एक-दूसरे को देखकर शरमा गए।

उस रात के बाद हमारे बीच कुछ बदल सा गया था।

एक अजीब सी करीबी थी, एक गुप्त रिश्ता जो शब्दों में बयाँ नहीं किया जा सकता था।

मैं नहीं कहता कि आप इस कहानी पर यकीन करें, लेकिन ये सच है। अगली कहानी में बताऊँगा की कैसे मैंने आलिया को होटल में ले जाकर चोदा।

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नोट: यहां पोस्ट की गई सभी कहानियां केवल मनोरंजन के उद्देश्य से प्रस्तुत की गई हैं। कृपया इन्हें वास्तविक जीवन से जोड़कर न देखें। कहानी में दर्शाए गए किसी भी दृश्य, घटना या चित्र का वास्तविक जीवन में प्रयोग करना हानिकारक हो सकता है। इसके लिए न तो कहानी के लेखक और न ही प्रस्तुतकर्ता जिम्मेदार होंगे। इसलिए कृपया अपनी समझ, बुद्धि और विवेक का उपयोग करें।

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