antarvasana xxx story
अन्तर्वासाना Xxx स्टोरी में कोचिंग क्लास की एक लड़की मुझे पसंद थी. एक दिन क्लास में ही मैंने अपने पैर से उसकी पिंडली सहला दी. उसने अपनी जीभ गुलाबी होंठों पर फेरी।
शाम के 7:30 बजे थे।
सीए (CA) की ऑडिटिंग क्लास चल रही थी, लेकिन मेरा दिमाग बैलेंस शीट में नहीं, बल्कि बगल वाली बेंच पर बैठी नाज़ की कातिल अदाओं में उलझा था।
नाज़ ने आज काले रंग की टाइट कुर्ती पहनी थी।
जब भी वह बोर्ड की तरफ देखने के लिए झुकती, उसकी कुर्ती के गले से उसके गोरे और भारी ‘मैंगोज़’ (स्तनों) की गहरी खाई साफ़ नज़र आती।
को-एड कोचिंग होने की वजह से वहां लड़कों और लड़कियों की कतारें पास-पास थीं।
मैंने मौका पाकर अपनी चप्पल उतारी और अपना नंगा पैर धीरे से नाज़ की पिंडलियों पर रगड़ा।
उसने चौंक कर मेरी तरफ देखा.
लेकिन गुस्सा होने के बजाय उसने अपनी जीभ अपने गुलाबी होंठों पर फेरी।
वह एक साफ़ इशारा था अन्तर्वासाना Xxx स्टोरी बनाने का.
उसने अपना पैन नीचे गिराया और उसे उठाने के बहाने जब वह नीचे झुकी, तो उसने डेस्क के नीचे से मेरे पैंट के ऊपर से मेरे 6 इंच के ‘अनाकोंडा’ को अपनी उंगलियों से सहला दिया।
मेरा लंड पैंट फाड़कर बाहर आने को बेताब हो गया।
नाज़ ने धीरे से फुसफुसाकर कहा, “जतिन, आज रात रुकें क्या? ऑडिट के बहाने असली ऑडिट करेंगे।”
मैंने मुस्कुराकर सिर हिला दिया।
हमने तय किया कि जब सब चले जाएंगे, तो हम लाइब्रेरी के पीछे छिप जाएंगे।
रात के 8:30 बजे क्लास खत्म हुई।
गार्ड लाइटें बंद कर रहा था।
हम दोनों चुपके से उस गलियारे में छिप गए जहाँ कॉमन वॉशरूम था।
जैसे ही सब बाहर निकले और शटर गिरने की आवाज़ आई— ‘धड़ाम!’
हमें अहसास हुआ कि अब हम इस पूरी बिल्डिंग में अकेले हैं।
नाज़ को शायद बहुत तेज़ उत्तेजना हो रही थी।
वह भागकर वॉशरूम के अंदर गई।
मैंने जब दरवाज़ा खोला तो मेरा कलेजा मुंह को आ गया।
उसने अपनी कुर्ती उतार कर सिंक पर फेंक दी थी।
वह सिर्फ अपनी लेस वाली काली ब्रा और पैंटी में थी।
उसकी क्लीन शेव्ड बगल की सफेदी लाइट में चमक रही थी और वहां से उठने वाली उसकी महक ने मुझे मदहोश कर दिया।
वह अपनी आंखें बंद करके अपनी उंगलियों को अपनी क्लीन शेव्ड ‘काजू कतली’ पर पैंटी के ऊपर से ही रगड़ रही थी।
वह सिसक रही थी, “अह्ह्ह जतिन… जल्दी आओ, मेरी चूत पानी छोड़ रही है।”
मैंने आगे बढ़कर उसे पीछे से जकड़ लिया और उसके स्तनों को अपनी हथेलियों में भींचने लगा।
उसने अपनी गर्दन पीछे की और मेरे होंठों को चूसने लगी।
मैंने धीरे से उसकी पैंटी नीचे खिसकाई।
उसकी चूत एकदम चिकनी और रेशमी थी, एक भी बाल नहीं था।
मैंने उसे वॉशरूम के ठंडे संगमरमर के प्लेटफॉर्म पर बैठा दिया।
”जतिन, देखो मेरी चूत कितनी प्यासी है,” उसने अपनी टांगें पूरी तरह फैला दीं।
उसकी गुलाबी सुराख़ से चिपचिपा पानी टपक रहा था।
मैंने अपना 6 इंच का फन फैलाया हुआ लंड निकाला।
उसने उसे देखते ही अपने हाथ में पकड़ लिया और सहलाने लगी।
“कितना गरम और सख्त है तुम्हारा अनाकोंडा.” वह बुदबुदाई।
मैंने उसे प्लेटफॉर्म के किनारे पर खड़ा किया।
उसने सिंक को पकड़ा और मैंने पीछे से उसके हिप्स को फैलाकर अपना लंड उसकी गीली गहराई में एक ही झटके में उतार दिया।
“आह्ह्ह् मर गई… जतिन कितना मोटा है तुम्हारा!” वह ज़ोर से चिल्लाई।
को-एड वॉशरूम की टाइल्स उसकी सिसकारियों से गूँज उठीं।
मैंने उसकी कमर पकड़कर उसे तेज़ धक्के (strokes) मारने शुरू किए।
हर धक्के के साथ मेरा लंड उसकी बच्चेदानी से टकरा रहा था और वह पागल हुई जा रही थी।
बाथरूम में अभी हमारी मस्ती चरम पर ही थी कि तभी गलियारे में जूतों की खट-खट सुनाई दी।
हमारे रोंगटे खड़े हो गए।
वे हमारे अकाउंट्स वाले टीचर थे!
शायद वह अपना रजिस्टर या केबिन की चाबी भूल गए थे।
”कोई है क्या अंदर?” सर की भारी आवाज़ खाली बिल्डिंग में गूँजी।
हम दोनों पूरी तरह नग्न (Nude) थे।
नाज़ के शरीर पर एक धागा भी नहीं था।
वह घबराहट में काँपने लगी।
को-एड कोचिंग होने की वजह से वहां लड़कों और लड़कियों के बैठने की अलग-अलग कतारें थीं।
मैंने फुसफुसाकर कहा, “नाज़, जल्दी बेंच के नीचे छिपो!”
वह अपनी गोरी जांघों को सिकोड़कर लड़कियों वाली पहली बेंच के नीचे दुबक गई।
मैं अपने 6 इंच के लंड को हाथों से दबाते हुए पिछली बेंच के पीछे लेट गया।
अंधेरे क्लासरूम में बाहर की स्ट्रीट लाइट से हल्का उजाला आ रहा था।
सर अंदर आए और टॉर्च जलाई।
टॉर्च की रोशनी ठीक उस बेंच के पास रुकी जहाँ नाज़ नंगी छिपी थी।
मेरा दिल इतनी ज़ोर से धड़क रहा था कि मुझे लगा सर उसकी धक-धक सुन लेंगे।
सर वहां करीब 10 मिनट तक कुछ ढूंढते रहे।
नाज़ ने डर के मारे अपनी आँखें बंद कर ली थीं।
अगर सर एक इंच भी नीचे झुकते, तो उसकी क्लीन शेव्ड चूत (Vagina) और गोरे हिप्स साफ़ नज़र आ जाते।
आखिरकार सर बड़बड़ाते हुए बाहर निकल गए और शटर दोबारा लॉक होने की आवाज़ आई।
जब सन्नाटा छा गया, तब हमने एक-दूसरे को देखा और डर के उस माहौल में भी हमारी उत्तेजना और बढ़ गई।
खतरा टलते ही नाज़ मुस्कुराई और बोली, “जतिन, आज तो मौत के मुंह से वापस आए हैं! चलो अब इस रात को यादगार बनाते हैं।”
मैंने अपना फोन निकाला।
अब वह डर पूरी तरह से ‘थ्रिल’ में बदल चुका था।
हमने तय किया कि हम एक-दूसरे का न्यूड फोटोशूट करेंगे।
- द टीचर पोज़: नाज़ नंगी होकर व्हाइट बोर्ड के पास खड़ी हो गई।
उसने हाथ ऊपर उठाकर बोर्ड को पकड़ा, जिससे उसकी क्लीन शेव्ड बगलें यानी अंडर आर्म्स की सफेदी लाइट में चमक रही थी।
मैंने उसका एक क्लोज-अप शॉट लिया। - द डेस्क व्यू: मैंने उसे उसी बेंच पर लेटाया जहाँ वह दिन में पढ़ती थी।
उसने अपनी टांगें पूरी तरह फैला दीं।
उसकी गुलाबी और चिकनी चूत कैमरे के लेंस के सामने एकदम साफ़ थी। - द रोलप्ले: नाज़ ने हाथ में मार्कर लिया और नंगी होकर बोर्ड पर कुछ लिखने का नाटक करने लगी। वह मेरी ‘टीचर’ बनी थी।
मैंने उसे पीछे से पकड़ा और उसके गोरे स्तनों को मसलते हुए अपना लंड उसकी चूत की गहराई में उतार दिया।
क्लासरूम की दीवारें हमारी चपा-चप और उसकी सिसकारियों से गूँज उठीं।
अगले 1 घंटे तक हमने कम से कम 100 फोटो खींचे और हर बेंच पर अपनी प्यास बुझाई।
रात के 3 बज रहे थे।
हम दोनों पसीने से तर-बतर फर्श पर लेटे थे।
नाज़ ने मेरे लंड को अपने मुंह में लिया और उसे तब तक चूसा जब तक कि मेरा वीर्य बाहर नहीं आ गया।
उसने मेरा पूरा गर्म वीर्य पी लिया और अपनी जीभ बाहर निकालकर मुस्कुराई।
फिर मैंने उसकी चूत का रस अपनी उंगलियों से चखा।
हमने तय किया कि अब सबूत मिटाना होगा।
सुबह 5:30 बजे अलार्म बजा।
हमने तुरंत बाथरूम के पोछे से फर्श और टाइल्स पर गिरे हुए निशानों को साफ़ किया।
मैंने एक मास्टर प्लान बनाया।
मैंने एसी का रिमोट छिपा दिया और मेन स्विच के तार थोड़े ढीले कर दिए।
जैसे ही 6:00 बजे गार्ड ने शटर खोला, हम घबराते हुए बाहर निकले।
गार्ड चौंक गया!
मैंने एक्टिंग करते हुए कहा, “गार्ड भैया, हम रात को यहीं लाइब्रेरी में पढ़ाई कर रहे थे और अचानक शॉर्ट सर्किट हुआ, धुआं निकलने लगा तो हम डर के मारे छिप गए थे और बाहर से लॉक हो गया।”
गार्ड बेचारा भोला था, उसने हमारी बात मान ली और हमें जाने दिया।
बाहर निकलते ही ताजी हवा में नाज़ ने मेरा हाथ दबाया और कान में धीरे से कहा, “जतिन, ये फोटोज़ मेरे पास सुरक्षित हैं. अगली बार फिर से चुदाई की क्लास में ऑडिट करेंगे!”
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