hot sexy slut mother sex story
उर्मिला देवी अब घर के हर नौकर की रंडी बन चुकी है। उसके बेटे अक्षय, पहला नौकर बिरजू, ड्राइवर रामू, माली श्याम और तीनों बावर्ची राजू, गोविंद और मोहन – ये सात लंड अब उसकी बुर की भूख नहीं मिटा पा रहे थे। उसे और नए लंड चाहिए थे। उसकी बुर हर दिन नए मर्दों की तलाश में रहती थी।
अगर आपने मेरी पिछली कहानी नहीं पढ़ी है तो पढ़े की कैसे ड्राइवर, माली, मेरा बेटा और तीनों बावर्ची मिलकर मुझे ग्रुप में चोदे
हमारे पड़ोस में शर्मा जी रहते हैं। वे बहुत अमीर आदमी हैं और उनके तीन जवान बेटे हैं – राकेश (26 साल), सुरेश (24 साल) और दिनेश (22 साल)। तीनों बहुत हट्टे-कट्टे और हैंडसम हैं। राकेश सबसे लंबा है और उसका लंड 11 इंच का है। सुरेश का लंड 10.5 इंच का है और दिनेश का 9 इंच का।
ये तीनों भाई मुझे कई सालों से घूरते आ रहे थे। जब मैं छत पर जाती, तो वे अपनी छत से मुझे देखते। जब मैं बालकनी में कपड़े सुखाने जाती, तो उनकी आँखें मेरे स्तनों पर टिक जातीं। जब मैं साड़ी पहनकर बाहर जाती, तो तीनों खिड़की से झाँककर मेरी गांड देखते।
राकेश ने कई बार मुझसे बात करने की कोशिश की थी। एक दिन उसने मुझे देखकर कहा था, “आंटी, आप तो दिन-ब-दिन और जवान होती जा रही हैं।” मैं समझ गई थी कि वह क्या चाहता है।
अक्षय को पता था कि उसकी माँ अब और लंडों की भूखी है। उसने एक दिन मुझसे कहा, “माँ, शर्मा जी के तीनों बेटे तुम्हें देखकर पागल हैं। राकेश ने मुझसे तुम्हारे बारे में पूछा था। क्या तुम उन्हें भी मौका दोगी?”
मैंने मुस्कुराते हुए कहा, “बेटा, मेरी बुर तो हमेशा तैयार है। बुला लो उन्हें भी।”
“माँ, तुम तो सच में एक रंडी हो। अब तक सात लंड थे, अब दस हो जाएंगे। तुम संभाल पाओगी?” अक्षय ने पूछा।
“हाँ बेटा, मेरी बुर में दस लंड भी समा जाएंगे। मुझे बस लंड चाहिए, चाहे कितने भी हों। मैं हर लंड की रंडी हूँ,” मैंने कहा।
अक्षय ने योजना बनाई। उसने शर्मा जी के तीनों बेटों को बुलाया और घर के सारे नौकरों को भी। अब हम दस लोग थे – अक्षय, बिरजू, रामू, श्याम, राजू, गोविंद, मोहन, राकेश, सुरेश और दिनेश।
इस बार हमने छत को चुना। रात का समय था और पूरा चाँद आसमान में चमक रहा था। छत पर मोटे गद्दे बिछाए गए थे। चारों तरफ मोमबत्तियाँ जलाई गईं और गुलाब की पंखुड़ियाँ बिखेर दी गईं। ठंडी हवा चल रही थी और चाँद की रोशनी में पूरी छत चाँदी जैसी चमक रही थी।
यह रात बहुत रोमांटिक थी। नीचे शहर की रोशनी दिख रही थी और ऊपर तारे। मेरे लिए यह पूरी रात एक सपने जैसी थी।
शाम को मैंने खुद छत को सजाया। मोटे-मोटे गद्दे बिछाए। ऊपर चादरें डालीं। चारों कोनों पर मोमबत्तियाँ रखीं। गुलाब की पंखुड़ियाँ गद्दों पर बिखेर दीं। हवा में गुलाब और चंदन की खुशबू फैला दी।
फिर मैं सजने-धजने लगी। इस रात के लिए मैंने खास तैयारी की थी। मैंने एक बेहद सेक्सी गहरे लाल रंग की नाइटी पहनी। यह पूरी तरह से पारदर्शी थी और इतनी छोटी थी कि मेरी जांघें पूरी दिख रही थीं। ऊपर से यह गहरी खुली थी जिससे मेरे दोनों भारी स्तन और उनके बड़े गुलाबी निप्पल साफ दिख रहे थे।
मेरे स्तन आज और भी भारी लग रहे थे क्योंकि मेरे दूध भरे हुए थे। जब मैं चलती, मेरे दूध हिलते और मेरे निप्पल कड़े हो जाते। मेरी कमर 32 इंच की थी और कूल्हे 38 इंच के। मेरी गांड मोटी और उभरी हुई थी।
मैंने अपने लंबे काले बाल खोल दिए। गालों पर हल्का गुलाबी रंग लगाया और होंठों पर लाल लिपस्टिक। गले में सिर्फ एक पतली सी सोने की चेन और पैरों में ऊँची लाल सैंडल।
जब मैं आईने में खुद को देखा, तो मुझे अपने ही बदन पर गर्व हुआ। 44 साल की उम्र में भी मैं किसी 25 साल की लड़की से कम नहीं लग रही थी।
रात लगभग 9 बजे सब लोग छत पर आने लगे। पहले अक्षय आया। फिर बिरजू। फिर रामू, श्याम, राजू, गोविंद और मोहन। सबसे आखिर में शर्मा जी के तीनों बेटे – राकेश, सुरेश और दिनेश – आए।
जब तीनों भाई छत पर पहुँचे और उन्होंने मुझे देखा, तो उनकी आँखें फटी रह गईं। राकेश तो मुँह खोलकर देखता ही रह गया।
“आंटी… यह… यह आप हैं?” राकेश हकलाते हुए बोला।
“हाँ राकेश, मैं ही हूँ। कैसी लग रही हूँ?” मैंने मुस्कुराते हुए पूछा।
“आंटी, आप तो… आप तो बहुत खूबसूरत लग रही हैं। यह नाइटी… आपके स्तन… आपकी जांघें…” राकेश कुछ बोल नहीं पाया।
सुरेश बोला, “आंटी, आपके निप्पल तो नाइटी से साफ दिख रहे हैं। और आपकी गांड… कितनी मोटी है!”
दिनेश ने कहा, “आंटी, मैं तो आपको सालों से देख रहा हूँ। आज आपके इतने करीब आकर लग रहा है कि मेरा सपना पूरा हो गया।”
अक्षय हँसते हुए बोला, “माँ, देखो तीनों कैसे पागल हो गए हैं। अब इन्हें भी वो मजा दो जो तुम हमें देती हो।”
मैंने कहा, “आज यह रात हमारी है। आज कोई जल्दी नहीं करेगा। आज पूरी रात चुदाई होगी। चाँद गवाह है हमारा।”
सभी दस लोग गद्दों पर बैठ गए। मैं बीच में बैठी। चाँद की रोशनी में सब एक-दूसरे को देख रहे थे। ठंडी हवा चल रही थी।
“आओ, पहले सब मुझे छुओ। मुझे सहलाओ। मेरे शरीर को महसूस करो,” मैंने आँखें बंद करके कहा।
दसों लोग मेरे चारों ओर आ गए। हर तरफ से हाथ आने लगे। कोई मेरे स्तन पकड़ता, कोई मेरी गांड दबाता, कोई मेरे बाल सहलाता, कोई मेरे पेट पर हाथ फेरता। मेरा पूरा बदन हाथों से भर गया।
“ओह… हाँ… सब मुझे छुओ… मेरे पूरे शरीर को छुओ… मुझे महसूस करो,” मैंने कहा।
राकेश ने मेरा एक दूध पकड़ लिया और सुरेश ने दूसरा। दोनों भाई मेरे स्तनों को दबाने लगे।
“आंटी, आपके दूध बहुत बड़े और मुलायम हैं। इन्हें छूकर ही पता चल रहा है,” राकेश बोला।
राकेश ने मेरी नाइटी की पट्टी नीचे की और मेरा एक स्तन बाहर निकल आया। उसने तुरंत मेरे निप्पल को मुँह में ले लिया और चूसने लगा।
“ओह… राकेश… चूसो… मेरे दूध चूसो,” मैंने कहा।
सुरेश ने भी दूसरा स्तन बाहर निकाला और चूसने लगा। अब दोनों भाई मेरे दोनों निप्पल एक साथ चूस रहे थे।
“अहहह… हाँ… और चूसो… मेरे दूध पी जाओ… मेरे निप्पलों को काटो,” मैं चीखी।
दिनेश नीचे बैठकर मेरी जांघों को सहलाने लगा। बिरजू मेरी गांड को दबाने लगा। रामू मेरे पैरों को चूमने लगा। श्याम मेरे पीठ पर किस कर रहा था। राजू, गोविंद और मोहन मेरे हाथ और बाल सहला रहे थे।
अक्षय मेरे सामने आया और उसने मेरे होंठों पर अपने होंठ रख दिए। उसने अपनी जीभ मेरे मुँह में डाली और मेरी जीभ से खेलने लगा।
“ओह बेटा… तुम्हारी जीभ… बहुत अच्छी लग रही है,” मैंने उसके मुँह में ही कहा।
दिनेश ने मेरी नाइटी और ऊपर कर दी और मेरी बुर पर अपनी जीभ लगाई। वह मेरी बुर चाटने लगा।
“ओह… दिनेश… मेरी बुर चाट रहे हो… अहहह… बहुत मजा आ रहा है,” मैं चीखी।
दिनेश मेरी बुर को जीभ से चाट रहा था और बीच-बीच में मेरी गांड के छेद पर भी जीभ फेर रहा था। मेरी बुर पानी से भर गई।
बिरजू ने मेरी गांड के छेद पर उंगली रगड़नी शुरू की। वह धीरे-धीरे उंगली अंदर करने लगा।
“ओह बिरजू… तुम मेरी गांड में उंगली कर रहे हो… बहुत मजा आ रहा है,” मैंने कहा।
रामू और श्याम ने अपने लंड बाहर निकाल लिए और मेरे चेहरे के पास ले आए। मैंने दोनों के लंड हाथों में ले लिए और उन्हें हिलाने लगी।
“आंटी, मेरा लंड भी चूसो,” राजू बोला।
मैंने राजू का लंड मुँह में ले लिया और चूसने लगी। उसका 11 इंच का लंड बहुत बड़ा था। फिर मैंने गोविंद का, फिर मोहन का, फिर राकेश का, फिर सुरेश का और फिर दिनेश का लंड चूसा।
मैं एक-एक करके सबके लंड चूस रही थी। हर लंड का स्वाद अलग था। हर लंड की मोटाई अलग थी। मैं सबको संतुष्ट कर रही थी।
“ओह माँ… क्या मुँह है तुम्हारा… सबको चूस रही हो,” अक्षय बोला।
“हाँ बेटा, मैं सबकी रंडी हूँ। मैं सबके लंड चूसूंगी,” मैंने कहा।
अब असली खेल शुरू हुआ। रामू अपने 12 इंच के काली लंड के साथ गद्दे पर लेट गया। मैं उसके ऊपर बैठ गई और अपनी बुर में उसका लंड ले लिया।
“उई माँ… रामू… तुम्हारा 12 इंच का लंड… मेरी बुर फट रही है,” मैं चीखी।
“ले रंडी… ले मेरा पूरा लंड… अपनी बुर में ले,” रामू गाली देते हुए बोला।
मैं ऊपर-नीचे होने लगी। इतने में श्याम पीछे आया और उसने अपना 10 इंच का लंड मेरी गांड में डाल दिया।
“ओह… दो लंड… मेरी बुर और गांड दोनों भरी हुई हैं,” मैं चिल्लाई।
राजू मेरे सामने आया और उसने अपना 11 इंच का लंड मेरे मुँह में डाल दिया। अब मैं तीन लंडों से भरी हुई थी।
गोविंद और मोहन ने अपने लंड मेरे हाथों में पकड़ा दिए। राकेश ने अपना लंड मेरे दूध के बीच में रख दिया। सुरेश ने अपना लंड मेरे बालों में रगड़ा। दिनेश ने अपना लंड मेरे गालों पर रगड़ा। बिरजू और अक्षय अपने लंड हिला रहे थे और मुझे देख रहे थे।
“ओह हाँ… दस लंड… मेरा पूरा शरीर लंडों से भरा हुआ है,” मैंने सोचा।
रामू और श्याम एक साथ धक्के मार रहे थे। जब रामू अंदर धकेलता, श्याम बाहर खींचता। मेरी बुर और गांड दोनों फच-फच की आवाज कर रही थीं।
“ओह माँ… कितनी टाइट बुर और गांड है… बहुत मजा आ रहा है,” रामू बोला।
“हाँ… यह रंडी बहुत मजा दे रही है… इसकी गांड बहुत गरम है,” श्याम बोला।
“ओह… और तेज… सब और तेज चोदो… मुझे मार डालो चोद-चोदकर,” मैं चिल्ला रही थी।
कुछ देर बाद सबने पोजीशन बदली। अब राकेश नीचे लेट गया और मैं उसके ऊपर बैठ गई। उसका 11 इंच का लंड मेरी बुर में था। सुरेश पीछे आया और उसने अपना 10.5 इंच का लंड मेरी गांड में डाल दिया। दिनेश मेरे मुँह में अपना लंड डालकर चोदने लगा।
“ओह… तीनों भाई एक साथ… मुझे बहुत मजा आ रहा है,” मैंने कहा।
“आंटी, आप तो सच में रंडी हैं… तीन लंड एक साथ,” राकेश बोला।
“हाँ… मैं रंडी हूँ… तुम तीनों की रंडी हूँ… मुझे चोदो,” मैंने कहा।
अब बाकी लंड मेरे हाथों, दूध, बालों और गालों पर थे। मेरे पूरे शरीर पर लंड रगड़े जा रहे थे।
सभी दस लोग बारी-बारी से स्वैप कर रहे थे। हर कोई मेरी बुर, गांड और मुँह चोद रहा था। कभी कोई नीचे लेट जाता, कभी कोई। मैं हर पोजीशन में जाती।
एक बार बिरजू नीचे लेटा और मैं उसके ऊपर बैठी। उसका 9.5 इंच का लंड मेरी बुर में था। अक्षय पीछे आया और उसने अपना 8 इंच का लंड मेरी गांड में डाल दिया।
“ओह बेटा… तुम्हारा लंड मेरी गांड में… और बिरजू का लंड मेरी बुर में… बहुत मजा आ रहा है,” मैंने कहा।
“हाँ माँ… आज तुम्हें दस लंड से चोदेंगे… तुम्हें याद रहेगी यह रात,” अक्षय बोला।
फिर कुछ लोगों ने मुझे गोद में उठाकर चोदा। रामू और श्याम ने मुझे बीच में उठा लिया। रामू का लंड मेरी बुर में और श्याम का लंड मेरी गांड में। वे दोनों हवा में खड़े होकर मुझे चोद रहे थे।
“ओह… यह तो बहुत ही मजेदार है… दो लंड हवा में… मेरी जान निकल रही है,” मैं चीख रही थी।
बाकी लोग चारों तरफ खड़े होकर हमें देख रहे थे और अपने लंड हिला रहे थे।
फिर राजू, गोविंद और मोहन ने मुझे तीनों तरफ से घेर लिया। राजू मेरी बुर में, गोविंद मेरी गांड में और मोहन मेरे मुँह में। तीनों एक साथ धक्के मार रहे थे।
“आओ… सब आओ… जो भी चाहे मेरी बुर में डालो… मेरी गांड में डालो… मेरे मुँह में डालो… मैं सबकी हूँ,” मैं चिल्ला रही थी।
रात गहरी हो गई थी और चाँद अपनी पूरी रोशनी बिखेर रहा था। ठंडी हवा में मेरा गरम शरीर और भी उत्तेजित हो रहा था।
अंत में सबसे जोरदार चुदाई शुरू हुई। सभी दस लोग मुझे घेरकर खड़े हो गए। कोई मेरी बुर में लंड डालता, कोई निकालता और कोई और डालता। मेरी बुर लगातार लंडों से भरी रहती। मेरी गांड भी लगातार भरी रहती। मेरा मुँह भी खाली नहीं रहता।
“ओह हाँ… और चोदो… मुझे रंडी बनाओ… मैं तुम सबकी रंडी हूँ,” मैं चीख रही थी।
“ले रंडी… ले दस लंड… अपनी बुर में ले… अपनी गांड में ले… साली,” सब गालियाँ दे रहे थे।
अक्षय ने मेरी बुर में लंड डाला और जोर से चोदा। फिर राकेश ने डाला। फिर रामू ने। फिर बिरजू ने। मेरी बुर हर लंड को चूस रही थी।
मेरी गांड में श्याम, सुरेश, राजू, गोविंद और मोहन ने बारी-बारी से लंड डाला। मेरी गांड फैल गई थी लेकिन मैं हर लंड को सह रही थी।
मेरे मुँह में दिनेश, अक्षय, बिरजू और रामू ने लंड डाला। मैं सबको चूस रही थी।
लगभग तीन घंटे की लगातार चुदाई के बाद सब झड़ने वाले थे।
“माँ, अब सब झड़ने वाले हैं। तुम सबका वीर्य पीयोगी?” अक्षय ने पूछा।
“हाँ बेटा, मैं सबका वीर्य पीऊंगी। दसों का। मेरे मुँह में निकालो और मेरे दूध पर भी,” मैंने कहा।
मैं घुटनों के बल बैठ गई। सभी दस लोग मेरे चारों ओर खड़े हो गए। उन्होंने अपने लंड हिलाने शुरू किए।
पहले रामू झड़ा। उसके 12 इंच के लंड से गाढ़ा गर्म वीर्य मेरे मुँह में निकला। मैंने पी लिया।
फिर बिरजू झड़ा। फिर श्याम। फिर राजू। फिर गोविंद। फिर मोहन। फिर राकेश। फिर सुरेश। मैंने सबका वीर्य पी लिया। मेरा मुँह वीर्य से भर गया।
अंत में अक्षय झड़ा। उसने अपना वीर्य मेरे दूध पर निकाला। उसका गाढ़ा वीर्य मेरे निप्पलों पर गिरा और बहने लगा।
“ओह… मेरे दूध पर वीर्य… क्या मजा है,” मैंने कहा।
मैंने अपने हाथों से अपने स्तनों पर लगे वीर्य को चाटकर खा लिया। सबका वीर्य बहुत स्वादिष्ट था।
“कैसा लगा माँ?” अक्षय ने पूछा।
“बहुत अच्छा बेटा… दस लंडों ने मुझे खूब मजा दिया। मैं आज पूरी तरह से संतुष्ट हूँ,” मैंने कहा।
हम सभी थककर गद्दों पर लेट गए। चाँद अभी भी चमक रहा था। ठंडी हवा चल रही थी। मैं दस लोगों के बीच में लेटी थी। सभी मेरे शरीर को सहला रहे थे।
राकेश ने मेरे कान में फुसफुसाया, “आंटी, यह रात हम कभी नहीं भूलेंगे।”
“मैं भी नहीं भूलूंगी राकेश,” मैंने कहा।
मैं सोच रही थी – 24 साल तक एक छोटे लंड से तड़पती रही और अब दस-दस लंड एक साथ ले रही हूँ। किस्मत ने आखिर मेरी सुन ली।
कुछ दिनों बाद अक्षय ने मुझसे कहा, “माँ, अब तो पूरे मोहल्ले को पता चल गया है कि तुम क्या चीज हो। सब तुम्हें चोदना चाहते हैं।”
“अच्छा? और कौन-कौन?” मैंने पूछा।
“शर्मा जी खुद! वे भी तुम्हें चोदना चाहते हैं। उनकी उम्र 50 साल है लेकिन उनका लंड अभी भी 10 इंच का है। वे कहते हैं कि उनके बेटों ने उन्हें तुम्हारे बारे में बताया है,” अक्षय बोला।
मैं मुस्कुराई। अब तो पूरा मोहल्ला मेरा दीवाना हो गया था।
“और माँ, एक बात और… दो गार्ड भी हैं जो रात में गली में पहरा देते हैं। वे भी तुम्हें देखकर पागल हैं,” अक्षय ने कहा।
“बेटा, अब तो मैं पूरे मोहल्ले की रंडी बन जाऊंगी,” मैंने हँसते हुए कहा।
“तो कल से पूरा मोहल्ला तुम्हें चोदेगा माँ,” अक्षय बोला।
मैंने सोचा… अगले भाग में क्या होगा… शर्मा जी, दो गार्ड… और भी लंड… मेरी बुर फिर से तड़पने लगी…
अगले भाग में: उर्मिला देवी की पूरे मोहल्ले के साथ चुदाई… जहाँ शर्मा जी, दो गार्ड और कई और मर्द उसे चोदेंगे… एक ऐसी रात जिसमें उर्मिला पूरे मोहल्ले की रंडी बन जाएगी…
नोट: यहां पोस्ट की गई सभी कहानियां केवल मनोरंजन के उद्देश्य से प्रस्तुत की गई हैं। कृपया इन्हें वास्तविक जीवन से जोड़कर न देखें। कहानी में दर्शाए गए किसी भी दृश्य, घटना या चित्र का वास्तविक जीवन में प्रयोग करना हानिकारक हो सकता है। इसके लिए न तो कहानी के लेखक और न ही प्रस्तुतकर्ता जिम्मेदार होंगे। इसलिए कृपया अपनी समझ, बुद्धि और विवेक का उपयोग करें।
mast kahani, koi chandigarh se hai jiske land ka size 10 inch se bada ho to mujhe message karen……………👌👌