मास्टर जी ने मुझे चोदकर गाभिन किया

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मैं कविता हूँ और यह मेरी असली कहानी है जो आज से कुछ समय पहले मेरे साथ घटित हुई। मैं पोस्ट ग्रेजुएशन की छात्रा हूँ और मेरी उम्र 24 साल है।

मेरी हाइट 5 फीट 3 इंच है और मेरी बॉडी बहुत ही सेक्सी है। मेरी चूचियाँ 36 साइज की हैं जो दूध से भरी हुई हैं और बहुत ही मोटी और नरम हैं।

मेरी कमर 32 इंच की है और मेरी गांड 42 इंच की है जो बिल्कुल किसी अफ्रीकन लड़की की तरह उभरी हुई और सेक्सी है।

मैं शहर में पढ़ाई करती हूँ और कॉलेज में कई लड़कों के साथ मेरे संबंध रहे हैं। उन्होंने मुझे इतना चोदा है कि मैं अब एकदम रंडी बन चुकी हूँ।

मुझे लंड की बहुत ज़रूरत रहती है और मैं हर समय चुदाई के बारे में सोचती रहती हूँ।

मेरी चूचियों के निप्पल गुलाबी हैं और बहुत ही संवेदनशील हैं। जब भी कोई उन्हें छूता है या चूसता है तो मेरी बुर में पानी आने लगता है।

एक दिन की बात है, मैं शहर से अपने गाँव जा रही थी। मैं बस से उतरकर अपने गाँव की ओर पैदल चल रही थी।

रास्ते में अचानक मुझे मेरे हाई स्कूल के मास्टर जी मिल गए। उनका नाम रामप्रसाद जी है और वह अब भी उसी स्कूल में अध्यापक हैं।

वह करीब 45 साल के हैं लेकिन बहुत ही फिट और हैंडसम हैं। उनका बदन बहुत ही मजबूत है और उनकी आँखों में एक अजीब सी चमक है।

जब उन्होंने मुझे देखा तो उनकी आँखें मेरी बॉडी पर टिक गईं। वह मेरी खूबसूरती के दीवाने थे और मैं यह बात अच्छी तरह जानती थी।

स्कूल के समय से ही वह मुझे घूरते थे और मेरी चूचियों को देखकर उनका लंड खड़ा हो जाता था।

आज जब उन्होंने मुझे देखा तो वह मेरी बदली हुई बॉडी को देखकर चौंक गए।

मैंने साड़ी पहनी हुई थी जो मेरी कमर और गांड को बहुत ही सेक्सी तरीके से दिखा रही थी।

मेरे ब्लाउज में से मेरी बड़ी-बड़ी चूचियाँ उभरी हुई थीं और निप्पल भी हल्के से दिख रहे थे।

मास्टर जी की आँखें मुझे देखकर चौड़ी हो गईं। वह मुझे ऐसे देख रहे थे जैसे कोई भूखा शेर किसी मेमने को देखता है।

उनकी आँखें बता रही थीं कि अगर मैं उन्हें मिल जाऊँ तो वह मुझे तुरंत चोद देंगे।

मैंने उन्हें नमस्कार किया और वह जवाब देकर बोले, “कैसी हो कविता? कहाँ रहती हो आजकल?”

मैंने बताया कि मैं पोस्ट ग्रेजुएशन कर रही हूँ और शहर में रहती हूँ। घर बहुत कम आती हूँ।

वह बोले, “तुम तो शहर जाकर बिल्कुल ही बदल गई हो। तुम्हारी बॉडी तो बहुत ही सेक्सी हो गई है। तुम्हारी चूचियाँ तो बहुत बड़ी हो गई हैं और तुम्हारी गांड भी बहुत मोटी और सेक्सी लग रही है।”

मैंने शर्माते हुए कहा, “मास्टर जी, आप भी क्या बातें कर रहे हैं।”

वह बोले, “नहीं कविता, मैं सच कह रहा हूँ। तुम तो एकदम हीरोइन लग रही हो। मेरी तो आँखें ही नहीं हट रही हैं तुम्हारी बॉडी से।”

इतना कहते हुए वह मेरे पास आ गए और मेरे कंधे पर हाथ रख दिया।

उनका हाथ मेरे कंधे को सहला रहा था और वह मेरी आँखों में देख रहे थे।

मुझे भी उनके पास जाने का मन हो रहा था क्योंकि वह बहुत ही मजबूत और हैंडसम लग रहे थे।

उनकी बॉडी से एक अजीब सी खुशबू आ रही थी जो मुझे पागल बना रही थी।

वह बोले, “कविता, मेरा घर पास में ही है। चलो थोड़ा आराम कर लो। रास्ता बहुत लंबा है और तुम थकी हुई लग रही हो।”

मैंने सोचा कि यह अच्छा मौका है और मैंने हाँ कर दी। हम उनके घर की ओर चल पड़े।

रास्ते में वह मेरी गांड को घूर-घूर कर देख रहे थे और मेरी चूचियों पर भी उनकी नज़रें टिकी हुई थीं।

उनका घर एक अकेले मकान में था जहाँ कोई और नहीं रहता था। जैसे ही हम अंदर गए, उन्होंने दरवाज़ा बंद कर दिया।

अब हम दोनों अकेले थे और कमरे में एक अजीब सी खामोशी थी। मास्टर जी ने मुझे सोफे पर बैठने के लिए कहा और वह मेरे पास आकर बैठ गए।

वह बोले, “कविता, तुम्हें पता है, स्कूल के समय से ही मैं तुम्हें चाहता था। मैं तुम्हें चोदना चाहता था लेकिन मौका नहीं मिला। आज जब मैंने तुम्हें देखा तो मेरा लंड खड़ा हो गया। तुम्हारी बॉडी बहुत ही सेक्सी है और मैं तुम्हें आज चोदना चाहता हूँ।”

मैंने शर्माते हुए कहा, “मास्टर जी, यह कैसी बातें कर रहे हैं आप।”

वह बोले, “नहीं कविता, मैं सच कह रहा हूँ। मैं तुमसे बहुत प्यार करता हूँ और तुम्हें अपनी बनाना चाहता हूँ।”

इतना कहते हुए उन्होंने मेरा हाथ पकड़ लिया और मेरी उंगलियों को चूमने लगे।

मुझे भी अब उनका साथ अच्छा लग रहा था। उनकी बातें मेरे दिल को छू रही थीं और मेरी बुर में पानी आने लगा था।

मैंने हल्की सी मुस्कान दी और उनकी ओर देखने लगी। उन्होंने मेरा चेहरा अपने हाथों में लिया और मेरी आँखों में देखने लगे।

फिर धीरे से वह मेरे होठों पर अपने होठ रखने लगे।

मास्टर जी ने धीरे से मेरे होठों को अपने होठों में ले लिया और किस करने लगे। उनके होठ बहुत ही नरम थे और उनकी साँसें गर्म हो रही थीं।

वह मेरे होठों को चूस रहे थे और मैं भी उनका साथ दे रही थी। यह हमारा पहला किस था और यह बहुत ही रोमांटिक था।

फिर उन्होंने अपनी जीभ मेरे मुँह में डाल दी और मेरी जीभ के साथ खेलने लगे। यह एक स्मूच किस था जो बहुत ही गहरा और प्यार भरा था।

उनकी जीभ मेरी जीभ के साथ घूम रही थी और हम दोनों एक-दूसरे की साँसों को महसूस कर रहे थे।

यह किस कई मिनट तक चला और मेरी बुर पूरी तरह से गीली हो चुकी थी।

मास्टर जी ने मुझे पीछे से गले लगा लिया और मेरी गर्दन पर किस करने लगे। वह मेरे पीछे खड़े होकर मेरी गर्दन को चूम रहे थे और मेरी साँसें तेज़ हो रही थीं।

उनके होंठ मेरी गर्दन पर घूम रहे थे और वह कभी कान के पीछे किस करते तो कभी गर्दन के बीच में।

यह अनुभव बहुत ही अद्भुत था और मैं पूरी तरह से उनके प्यार में खो चुकी थी।

फिर उन्होंने मेरी साड़ी को खींचना शुरू किया और धीरे-धीरे मुझे नंगा करने लगे।

उन्होंने मेरी साड़ी उतार दी और फिर मेरे ब्लाउज के हुक खोलने लगे।

जैसे ही ब्लाउज खुला, मेरी बड़ी-बड़ी चूचियाँ उनकी आँखों के सामने आ गईं। मेरी चूचियाँ ब्रा में कैद थीं और निप्पल ब्रा में से उभरे हुए थे।

मास्टर जी की आँखें मेरी चूचियों को देखकर चौड़ी हो गईं।

वह बोले, “कविता, तुम्हारी चूचियाँ तो बहुत ही बड़ी और सेक्सी हैं। इनमें कितना दूध भरा है यह तो मुझे चखना ही पड़ेगा।” इतना कहते हुए उन्होंने मेरी ब्रा उतार दी और मेरी चूचियाँ आज़ाद हो गईं।

मेरी चूचियाँ बहुत ही मोटी और नरम थीं। निप्पल गुलाबी और बड़े थे। मास्टर जी ने अपने हाथों से मेरी चूचियों को पकड़ा और उन्हें दबाने लगे।

वह मेरी चूचियों को मसल रहे थे और मुझे बहुत मज़ा आ रहा था।

फिर वह एक-एक करके मेरी दोनों चूचियों के निप्पलों को मुँह में लेकर चूसने लगे।

उनकी जीभ मेरे निप्पलों पर घूम रही थी और वह उन्हें काट-काट कर चूस रहे थे।

मेरे निप्पल कड़क हो गए थे और मेरी बुर में पानी की धार बह रही थी।

मैं आहें भर रही थी और उनके सिर को अपनी चूचियों पर दबा रही थी।

वह बारी-बारी से दोनों चूचियों को चूस रहे थे और मेरे दूध को पीने की कोशिश कर रहे थे।

फिर उन्होंने मुझे सोफे पर घुटनों के बल बैठने के लिए कहा। मैं घुटनों के बल हो गई और वह मेरे पीछे आ गए।

उन्होंने मेरी पीठ पर किस करना शुरू किया। वह मेरी पीठ के ऊपरी हिस्से से लेकर नीचे तक किस करते हुए नीचे आ रहे थे।

उनके होंठ मेरी पीठ की त्वचा को छू रहे थे और मैं कांप रही थी।

वह मेरी कमर पर किस करते हुए नीचे आए और फिर मेरी गांड पर पहुँच गए। उन्होंने मेरी गांड को दोनों हाथों से पकड़ा और उसे दबाया।

मेरी गांड बहुत ही मोटी और नरम थी। फिर उन्होंने मेरी गांड के छेद पर किस किया।

यह एक अजीब सा लेकिन मज़ेदार अनुभव था। उनकी जीभ मेरी गांड के छेद पर घूम रही थी और मैं पागल हो रही थी।

इसके बाद उन्होंने मुझे सोफे पर लेटा दिया और मेरी टांगें फैला दीं। मैंने पेटीकोट ऊपर उठाया हुआ था और मेरी बुर उनकी आँखों के सामने थी।

मेरी बुर पूरी तरह से गीली हो चुकी थी और उसमें से रस निकल रहा था।

मास्टर जी ने मेरी बुर को देखा और बोले, “कविता, तुम्हारी बुर तो बहुत ही प्यारी और गुलाबी है। मैं इसे चूसकर तुम्हें पागल बना दूँगा।”

इतना कहते हुए उन्होंने अपना मुँह मेरी बुर पर रख दिया और चूसना शुरू कर दिया।

उनकी जीभ मेरी बुर की दरार में घूम रही थी और वह मेरी बुर के रस को पी रहे थे।

मैं पागलों की तरह आहें भर रही थी और अपनी कमर को ऊपर उठा रही थी।

उन्होंने अपनी जीभ को मेरी बुर के अंदर डाल दिया और अंदर-बाहर करने लगे।

यह एक अद्भुत अनुभव था। उनकी जीभ मेरी बुर के अंदर घूम रही थी और मुझे बहुत मज़ा आ रहा था।

वह मेरी बुर को चाट-चाट कर गीला कर रहे थे और मेरी चूचियों को भी सहला रहे थे।

मेरी बुर पूरी तरह से खुल चुकी थी और उनकी जीभ आसानी से अंदर-बाहर हो रही थी।

फिर उन्होंने खड़े होकर अपने कपड़े उतार दिए। उनका बदन बहुत ही मजबूत था और छाती पर बाल थे।

लेकिन जब उन्होंने अपना लोअर उतारा तो मेरी आँखें उनके लंड को देखकर चौड़ी हो गईं।

उनका लंड बहुत ही बड़ा और मोटा था। वह करीब 8 इंच लंबा और 3 इंच मोटा था।

उनका लंड खड़ा होकर ऊपर की ओर तना हुआ था और उसका सुपाड़ा बहुत ही बड़ा और लाल था।

मास्टर जी ने मुझे अपने लंड को चूसने के लिए कहा। मैं उठकर बैठ गई और उनके लंड को अपने हाथ में ले लिया।

उनका लंड बहुत ही गर्म और कड़क था। मैंने उसे अपने मुँह में ले लिया और चूसने लगी।

उनका लंड मेरे मुँह में आता-जाता रहा और मैं उसे जीभ से चाट रही थी। वह आहें भर रहे थे और मेरे सिर को अपने लंड पर दबा रहे थे।

मैं उनके लंड को गहराई तक अपने मुँह में ले रही थी और उनके अंडकोशों को भी सहला रही थी।

उनका लंड पूरा लाल हो चुका था और उसमें से पानी की बूंदें निकल रही थीं।

वह बोले, “कविता, बस करो वरना मैं झड़ जाऊँगा। अब मैं तुम्हें चोदना चाहता हूँ।”

मास्टर जी ने मुझे सोफे पर लेटा दिया और मेरी टांगें फैला दीं। वह मेरे ऊपर आ गए और उनका लंड मेरी बुर के मुँह पर टिका हुआ था।

उन्होंने मेरे होठों पर किस किया और फिर धीरे से अपना लंड मेरी बुर में डालना शुरू किया।

उनका लंड बहुत ही मोटा था इसलिए थोड़ी दिक्कत हुई लेकिन मेरी बुर पहले से ही गीली थी इसलिए वह आसानी से अंदर चला गया।

जैसे ही उनका लंड मेरी बुर में पूरा अंदर गया, मैं चीख उठी।

वह बोले, “कविता, तुम्हारी बुर तो बहुत ही टाइट है। मज़ा आ रहा है।”

वह मुझे मिशनरी पोज़िशन में चोदने लगे। वह धीरे-धीरे अपना लंड अंदर-बाहर कर रहे थे और मैं उनके नीचे कराह रही थी।

वह मेरे ऊपर लेटे हुए थे और मेरी चूचियों को दबा रहे थे। वह बारी-बारी से मेरी दोनों चूचियों को दबाते और मेरे निप्पलों को काटते थे।

फिर वह मेरी चूचियों को चूसने लगे और मेरे निप्पलों को अपने मुँह में लेकर खींचते थे।

मैं पागल हो रही थी और उनकी कमर को अपने पैरों से जकड़ लिया था।

वह अपनी स्पीड बढ़ा रहे थे और ज़ोर-ज़ोर से मेरी बुर में अपना लंड पेल रहे थे।

मेरी बुर पूरी तरह से खुल चुकी थी और उनका लंड आसानी से अंदर तक जा रहा था।

वह मेरे होठों पर किस करते हुए चोद रहे थे और हमारी जीभें एक-दूसरे के साथ खेल रही थीं। यह एक स्मूच किस के साथ चुदाई थी जो बहुत ही मज़ेदार थी।

मैं आहें भर रही थी, “ओह मास्टर जी, और ज़ोर से चोदो। मेरी बुर फाड़ दो। आपका लंड बहुत ही मोटा है। मज़ा आ रहा है।”

वह भी पूरी ताकत से मुझे चोद रहे थे और सोफे की आवाज़ें आ रही थीं।

मेरी चूचियाँ उनके छाती से रगड़ खा रही थीं और मुझे बहुत मज़ा आ रहा था।

करीब पंद्रह मिनट तक वह मुझे इसी पोज़िशन में चोदते रहे। फिर उन्होंने पोज़िशन बदली।

उन्होंने मुझे एक कुर्सी पर बैठने के लिए कहा। मैं कुर्सी पर बैठ गई और उन्होंने मेरी टांगें अपने कंधों पर रख लीं।

वह खड़े होकर मेरी बुर में अपना लंड डालने लगे। यह पोज़िशन बहुत ही गहरी चुदाई की थी और उनका लंड मेरी बुर के सबसे अंदर तक जा रहा था।

वह मेरी टांगों को पकड़कर ज़ोर-ज़ोर से अपना लंड अंदर-बाहर कर रहे थे।

मेरी चूचियाँ कूद रही थीं और वह उन्हें देखकर और भी जोश में आ रहे थे।

वह कभी-कभी मेरी चूचियों को पकड़कर दबा देते और मेरे निप्पलों को घुमाते।

मैं पूरी तरह से उनके सामने नंगी थी और वह मुझे जी भरकर चोद रहे थे।

इस पोज़िशन में भी वह मुझे दस मिनट तक चोदते रहे।

फिर उन्होंने मुझे उठाया और मेरी एक टांग को ऊपर उठाकर खड़े होकर चोदना शुरू किया।

यह पोज़िशन बहुत ही रोमांटिक थी। वह मेरे होठों पर किस करते हुए मेरी बुर में अपना लंड पेल रहे थे।

मेरी एक टांग ज़मीन पर थी और दूसरी ऊपर उठी हुई थी। उनका लंड मेरी बुर में पूरा अंदर तक जा रहा था और मैं उनके गले से लिपटी हुई थी।

वह मेरी चूचियों को भी सहला रहे थे और मेरे निप्पलों को काट रहे थे।

मेरी बुर पूरी तरह से फैल चुकी थी और उनका लंड आसानी से अंदर-बाहर हो रहा था।

मैं बार-बार झड़ रही थी और मेरी बुर का रस उनके लंड पर लग रहा था।

वह भी मेरी बुर की कसावट को महसूस कर रहे थे और ज़ोर-ज़ोर से धक्के लगा रहे थे।

फिर उन्होंने मुझे फिर से सोफे पर लेटा दिया और मेरे ऊपर आ गए। वह फिर से मिशनरी पोज़िशन में मुझे चोदने लगे।

इस बार उन्होंने अपनी स्पीड और भी बढ़ा दी थी। वह पूरी ताकत से मेरी बुर में अपना लंड पेल रहे थे और मेरी चूचियाँ दबा रहे थे।

मैं चीख रही थी, “आह, मास्टर जी, और ज़ोर से। फाड़ दो मेरी बुर। आपका लंड बहुत ही अच्छा है। मुझे पूरी तरह से चोदो।”

वह भी पूरी तरह से जोश में थे और मुझे बिना रुके चोद रहे थे।

उनका लंड मेरी बुर में तेज़ी से अंदर-बाहर हो रहा था और मेरी बुर पूरी तरह से लाल हो चुकी थी।

वह मेरे होठों को चूसते हुए मुझे चोद रहे थे और हम दोनों एक-दूसरे में खोए हुए थे।

करीब बीस मिनट तक इसी तरह चुदाई होती रही। फिर उन्होंने मुझे घोड़ी बनने के लिए कहा।

मैं सोफे पर घुटनों के बल हो गई और उन्होंने मेरी गांड के पीछे आकर अपना लंड मेरी बुर में डाल दिया।

यह पोज़िशन बहुत ही गहरी चुदाई की थी और उनका लंड मेरी बुर के सबसे अंदर तक जा रहा था।

वह मेरी कमर पकड़कर ज़ोर-ज़ोर से धक्के लगा रहे थे।

मेरी चूचियाँ आगे-पीछे कूद रही थीं और वह कभी-कभी आगे झुककर मेरी चूचियों को पकड़ लेते और निप्पलों को घुमाते।

मेरी गांड उनके पेट से टकरा रही थी और आवाज़ें आ रही थीं। मैं पागलों की तरह आहें भर रही थी और उनसे और ज़ोर से चुदवाने की भीख माँग रही थी।

वह पूरी ताकत से मुझे चोद रहे थे और मेरी बुर फटने को हो रही थी।

लेकिन मज़ा बहुत आ रहा था। उनका लंड मेरी बुर में पूरा अंदर तक जा रहा था और मेरी बुर की दीवारों को चीर रहा था।

मैं बार-बार झड़ रही थी और मेरी टांगें कांप रही थीं।

फिर उन्होंने पोज़िशन फिर से बदली। उन्होंने मुझे कुर्सी पर बैठाया और खुद ज़मीन पर बैठकर मेरी बुर में अपना लंड डाल दिया।

मैं उनकी गोद में बैठी हुई थी और वह मेरी कमर को पकड़कर ऊपर-नीचे कर रहे थे।

यह पोज़िशन बहुत ही रोमांटिक थी क्योंकि हम एक-दूसरे की आँखों में देख रहे थे और किस भी कर रहे थे।

वह मेरी चूचियों को भी चूस रहे थे और मेरे निप्पलों को काट रहे थे।

मैं उनके लंड पर कूद रही थी और मेरी बुर पूरी तरह से उनके लंड को निगल चुकी थी।

हम दोनों पसीने से लथपथ हो चुके थे लेकिन रुकने का नाम नहीं ले रहे थे।

करीब आधे घंटे तक इसी तरह चुदाई होती रही। वह मुझे अलग-अलग पोज़िशन में चोद रहे थे और मैं पूरी तरह से संतुष्ट हो रही थी।

उनका लंड बहुत ही मजबूत था और वह बिना झड़े मुझे लगातार चोद रहे थे।

फिर उन्होंने मुझे फिर से मिशनरी पोज़िशन में लेटा दिया। वह मेरे ऊपर आए और मेरी टांगें अपने कंधों पर रख लीं।

वह बोले, “कविता, अब मैं तुम्हें अपना वीर्य दूँगा और तुम्हें गाभिन कर दूँगा। मैं चाहता हूँ कि तुम मेरे बच्चे की माँ बनो।”

मैंने कहा, “हाँ मास्टर जी, प्लीज़ मुझे गाभिन कर दीजिए। मैं आपके बच्चे को जन्म देना चाहती हूँ। मेरी बुर में अपना पूरा वीर्य डाल दीजिए।”

वह पूरी ताकत से मुझे चोदने लगे और मैं भी अपनी कमर उठा-उठाकर उनका साथ दे रही थी।

उनका लंड मेरी बुर में तेज़ी से अंदर-बाहर हो रहा था और मेरी बुर पूरी तरह से उनके वीर्य के लिए तैयार थी।

वह मेरी चूचियों को दबाते हुए और मेरे होठों को चूसते हुए मुझे चोद रहे थे।

अचानक उनका शरीर कांपने लगा और उन्होंने अपना लंड मेरी बुर के सबसे अंदर तक डाल दिया।

फिर उन्होंने अपना गाढ़ा और गर्म वीर्य मेरी बुर में छोड़ दिया। उनका वीर्य मेरी बुर की दीवारों से टकराकर मेरी गर्भाशय में जा रहा था।

वह पूरा का पूरा वीर्य मेरी बुर में डाल रहे थे और मैं भी उनकी कमर को जकड़े हुए थी।

वह कई बार धक्के देकर अपना वीर्य मेरी बुर में डालते रहे। मेरी बुर उनके वीर्य से भर चुकी थी और वह बाहर भी बह रहा था।

वह मेरे ऊपर ही लेटे रहे और मेरी चूचियों को सहलाते रहे। हम दोनों पसीने से लथपथ थे और हाँफ रहे थे।

कुछ देर बाद उनका लंड मेरी बुर से बाहर निकला और उनका वीर्य मेरी जाँघों पर बहने लगा।

लेकिन वह फिर भी मुझे चूम रहे थे और मेरी चूचियों को चूस रहे थे।

उन्होंने कहा, “कविता, तुम बहुत ही सेक्सी हो। मैं तुमसे बहुत प्यार करता हूँ। मुझे उम्मीद है कि तुम मेरे बच्चे को जन्म दोगी।”

मैंने कहा, “हाँ मास्टर जी, मैं भी आपसे प्यार करती हूँ। आपने मुझे बहुत मज़ा दिया है और मैं निश्चित रूप से आपके बच्चे की माँ बनूँगी। आपका वीर्य मेरी बुर में चला गया है और मैं गाभिन हो चुकी हूँ।”

हम दोनों एक-दूसरे से लिपटे रहे और फिर हमने फिर से सेक्स किया।

इस बार वह और भी ज़्यादा जोश में थे और मुझे तीन बार और चोदा।

हर बार उन्होंने मेरी बुर में अपना वीर्य डाला और मुझे पूरी तरह से गाभिन कर दिया।

अगले महीने जब मेरे पीरियड्स नहीं आए तो मुझे पता चला कि मैं सच में गाभिन हो चुकी हूँ।

मैंने मास्टर जी को यह खुशखबरी दी तो वह बहुत खुश हुए।

उन्होंने मुझसे शादी कर ली और अब मैं उनकी पत्नी हूँ और उनके बच्चे की माँ बनने वाली हूँ।

यह थी मेरी कहानी जब मास्टर जी ने मुझे चोदकर गाभिन किया।

यह एक बहुत ही रोमांटिक और यादगार अनुभव था जो मैं जीवन भर नहीं भूलूँगी।

नोट: यहां पोस्ट की गई सभी कहानियां केवल मनोरंजन के उद्देश्य से प्रस्तुत की गई हैं। कृपया इन्हें वास्तविक जीवन से जोड़कर न देखें। कहानी में दर्शाए गए किसी भी दृश्य, घटना या चित्र का वास्तविक जीवन में प्रयोग करना हानिकारक हो सकता है। इसके लिए न तो कहानी के लेखक और न ही प्रस्तुतकर्ता जिम्मेदार होंगे। इसलिए कृपया अपनी समझ, बुद्धि और विवेक का उपयोग करें।

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