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मेरा नाम निशा है और मेरी उम्र 22 साल है। मेरी हाइट 5 फीट 2 इंच है और मेरे शरीर का साइज 34-30-36 है।
मैंने हमेशा से ही अपने आपको एक साधारण लड़की माना, लेकिन जब से मैंने अपने मामा के बेटे नागेंद्र को करीब से देखा, तब से मेरी दुनिया बदल गई।
मेरी माँ का नाम सीमा है। उनकी उम्र 45 साल है, लेकिन वह आज भी बहुत खूबसूरत हैं। उनकी चूचियों का साइज 38 इंच है – बड़े, गोल और सेक्सी।
उनकी कमर 34 इंच है और उनकी गांड 42 इंच की है, जो हर मर्द को अपनी तरफ आकर्षित करती है।
मैंने हमेशा देखा है कि लोग उन्हें घूरते हैं, लेकिन मैंने कभी सोचा नहीं था कि एक दिन मेरा ही कजिन उनके साथ…
नागेंद्र, जिसे मैं प्यार से “भैया” कहती हूँ, 24 साल का है।
उसकी हाइट 5 फीट 6 इंच है और उसका लंड 9 इंच का है – यह मैंने एक बार नहाते हुए गलती से देख लिया था।
वह देखने में बहुत हैंडसम है, उसके बाल हल्के काले हैं और उसकी आँखों में एक अजीब सी चमक है जो किसी भी लड़की को उसकी तरफ खींच सकती है।
हम दोनों बहुत फ्रैंक थे। बचपन से ही हम साथ में खेले, बड़े हुए और एक-दूसरे के करीब आए।
जैसे-जैसे हम बड़े होते गए, मेरे मन में उसके लिए एक अलग ही भावना पैदा होने लगी।
मैं उसे देखकर अंदर ही अंदर एक्साइट हो उठती थी। उसकी मुस्कान, उसकी आवाज़, उसके हाथ – सब कुछ मुझे मदहोश कर देता था।
हमारे घर की छत पर एक पुराना कमरा था जहाँ गर्मियों में सोना बहुत अच्छा लगता था।
वहाँ की हवा ताज़ा होती थी और तारों भरा आसमान देखकर मन प्रसन्न हो जाता था।
नागेंद्र अक्सर हमारे यहाँ आता रहता था क्योंकि उसका घर शहर के दूसरे छोर पर था और वह यहाँ नौकरी करता था।
एक शाम, जब मैं और नागेंद्र छत पर बैठे हुए थे, तारों को देख रहे थे, तो मेरे हाथ उसके हाथ से टकरा गए।
वह झिझक गया, लेकिन मैंने हिम्मत करके उसका हाथ पकड़ लिया।
उसका हाथ गरम था, मज़बूत था। मैंने उसकी तरफ देखा तो उसकी आँखों में भी वही चमक देखी जो मेरी आँखों में थी।
“निशा…” उसने धीरे से मेरा नाम लिया।
“हाँ भैया?” मैंने शरमा कर पूछा।
“तुम मुझे भैया मत कहो… आज से मैं तुम्हारा नागेंद्र हूँ,” उसने कहा और मेरे हाथ को अपने हाथों में भर लिया।
वह रात बहुत खूबसूरत थी। हम दोनों छत पर बैठे रहे और बातें करते रहे।
उसने मुझे बताया कि वह मुझे कब से पसंद करता है। सालों से, जब से हम दोनों जवान हुए थे।
उसकी बातें सुनकर मेरा दिल धड़कने लगा। मैंने भी अपने दिल की बात कह दी – कि मैं भी उससे प्यार करती हूँ, तन और मन दोनों से और ये की मैं उससे चुदवाना चाहती हूँ।
“कल रात…” उसने कहा, “कल रात हम यहीं छत पर सोएँगे। मेरे पापा और मामू तो कल शहर से बाहर जा रहे हैं। घर में सिर्फ़ तुम, मैं और बुआ होंगी।”
मैं समझ गई उसका इशारा। मेरे शरीर में एक अजीब सी गर्मी दौड़ने लगी। मैंने हाँ में सिर हिला दिया।
उस रात मैं सो नहीं पाई। मैं सोच रही थी कि कल क्या होगा।
मैंने अपने कपड़े तैयार किए – एक हल्की सी साड़ी जो मेरे शरीर पर बहुत अच्छी लगती थी।
मैंने सोचा कि मैं उसे अपना सब कुछ दे दूँगी। मेरी बुर उसके लिए तरस रही थी।
आज तक मैं कभी किसी से नहीं चुदवाई थी, और नागेंद्र के लौड़े से मैं पहली बार चुदवाना चाहती थी।
सुबह जब मैं उठी तो मेरी माँ सीमा रसोई में थीं। उन्होंने सफेद रंग की साड़ी पहनी हुई थी जो उनके गोरे शरीर पर बहुत सुंदर लग रही थी।
उनके बड़े-बड़े दूध उनके ब्लाउज में कसे हुए थे और उनके निप्पल ब्लाउज के कपड़े पर साफ़ दिख रहे थे। वह अभी भी बहुत जवान दिखती थीं।
“निशा, आज शाम तू अपनी सहेली प्रिया के यहाँ चली जाना,” पापा ने कहा, “उसकी तबीयत खराब है ना, उसका हालचाल पूछ आना।”
मैं चौंक गई। “ठीक है पापा, मैं उससे मिलने चली जाती हूँ।”
“बहुत अच्छी बेटी, बीमारी में दोस्तों को अकेला नहीं छोड़ते है।,” पापा ने कहा और चले गये।
मैं उदास हो गई। मैंने नागेंद्र को फोन किया लेकिन वह नहीं उठा। शाम को जब वह आया तो मैंने उसे सब बताया। उसका चेहरा उतर गया।
“कोई बात नहीं,” उसने कहा, “मैं कल आऊँगा। तुम जाओ, प्रिया का ख्याल रखो।”
मैंने सोचा कि शायद यह ठीक है। कल फिर से मौका मिल जाएगा। मैंने अपने पापा को हाँ कह दी और शाम को अपनी सहेली के घर चली गई।
नागेंद्र के मन में अलग ही ख्याल थे।
वह निशा से प्यार करता था, लेकिन वह एक औरत को भी बहुत समय से नोटिस कर रहा था – अपनी बुआ सीमा को।
सीमा की खूबसूरती उसे हमेशा से ही मोहित करती थी। उनके बड़े-बड़े दूध, उनकी मोटी गांड, उनकी मादक मुस्कान – सब कुछ उसे पागल कर देता था।
जब निशा चली गई, तो नागेंद्र ने सोचा कि वह भी छत पर सोने चला जाए।
गर्मी बहुत थी और नीचे के कमरे में नींद नहीं आ रही थी। वह अपना बिस्तर लेकर छत पर चला गया।
रात के करीब 11 बजे थे। चाँद पूरा था और रोशनी छत पर बिखरी हुई थी। नागेंद्र ने देखा कि छत पर पहले से ही एक बिस्तर बिछा हुआ है।
वह सोचने लगा कि शायद निशा ने यह बिस्तर यहीं छोड़ दिया होगा। वह अपने बिस्तर पर लेट गया और तारों को देखने लगा।
कुछ देर बाद उसे किसी के आने की आवाज़ सुनाई दी। वह उठकर देखा तो सीमा बुआ आ रही थीं।
उन्होंने हल्की गुलाबी रंग की साड़ी पहनी हुई थी और उनके बाल खुले हुए थे। चाँद की रोशनी में वह देवी लग रही थीं।
“अरे नागेंद्र, तुम यहाँ?” सीमा ने पूछा।
“हाँ बुआ, गर्मी बहुत थी तो सोचा छत पर आ जाऊँ,” नागेंद्र ने कहा और उनकी तरफ देखने लगा।
सीमा को लगा कि निशा भी यहीं सोएगी, इसलिए वह भी अपना बिस्तर लेकर आ गई थीं। लेकिन अब निशा तो नहीं थी, सिर्फ़ नागेंद्र था।
“निशा कहाँ है?” सीमा ने पूछा।
“वह तो प्रिया के यहाँ चली गई है, मामा ने भेज दिया,” नागेंद्र ने बताया।
सीमा को समझ आया कि अब यहाँ सिर्फ़ वह और नागेंद्र हैं। उन्हें थोड़ा अजीब लगा, लेकिन वह वापस जाना भी नहीं चाहती थीं क्योंकि नीचे गर्मी बहुत थी।
“ठीक है, मैं उधर कोने में सो जाती हूँ,” सीमा ने कहा।
नागेंद्र का दिल तेज़ी से धड़कने लगा। वह सीमा को देख रहा था।
जब वह अपना बिस्तर बिछा रही थीं, तो उनकी साड़ी का पल्लू सरक गया और उनका ब्लाउज साफ़ दिखने लगा।
उनके बड़े-बड़े दूध ब्लाउज से बाहर निकलने को तरस रहे थे। नागेंद्र का लंड अपने आप खड़ा होने लगा।
सीमा ने नोटिस किया कि नागेंद्र उन्हें घूर रहा है। उन्हें अजीब लगा, लेकिन साथ ही एक अजीब सा मज़ा भी आया।
वह जानती थीं कि वह अभी भी जवान और खूबसूरत हैं। उनके पति उन्हें उतना समय नहीं दे पाते थे और उनकी शारीरिक ज़रूरतें अधूरी रह जाती थीं।
“क्या देख रहे हो?” सीमा ने पूछा, लेकिन उनकी आवाज़ में कोई गुस्सा नहीं था, बल्कि एक हल्की सी शरारत थी।
“कुछ नहीं बुआ… आप बहुत खूबसूरत लग रही हैं,” नागेंद्र ने हिम्मत करके कह दिया।
सीमा शरमा गईं। उन्होंने अपनी साड़ी ठीक की और अपने बिस्तर पर बैठ गईं।
“पागल हो गए हो क्या? मैं तुम्हारी बुआ हूँ,” सीमा ने कहा, लेकिन उनके चेहरे पर मुस्कान थी।
“बुआ, आप सच में बहुत खूबसूरत हैं। मैं हमेशा से ही… मतलब…” नागेंद्र हकलाने लगा।
“क्या?” सीमा ने पूछा।
“मैं हमेशा से ही आपको पसंद करता हूँ,” नागेंद्र ने कहा और उनके बिस्तर की तरफ बढ़ गया।
सीमा का दिल धड़कने लगा। वह जानती थीं कि यह गलत है, लेकिन उनका शरीर उन्हें कुछ और ही कह रहा था।
उनकी बुर में एक अजीब सी खुजली होने लगी। उन्हें महीनों से किसी ने नहीं चोदा था और स्पर्श भी नहीं किया था।
“नागेंद्र, यह ठीक नहीं है… मैं तुम्हारी बुआ हूँ,” सीमा ने कहा, लेकिन उनकी आवाज़ कमज़ोर थी।
“बुआ, प्लीज़… मैं जानता हूँ कि आप भी कुछ महसूस कर रही हैं। मैंने देखा है कि आप मुझे कैसे देखती हैं,” नागेंद्र ने कहा और उनके पास बैठ गया।
सीमा ने विरोध नहीं किया। नागेंद्र ने धीरे से अपना हाथ उनके कंधे पर रखा।
उनकी त्वचा गरम थी, नरम थी। सीमा ने आँखें बंद कर लीं।
“बुआ, आप बहुत सेक्सी हैं,” नागेंद्र ने फुसफुसाते हुए कहा।
“नागेंद्र…” सीमा ने एक लंबी साँस ली।
नागेंद्र ने हिम्मत की और अपने हाथ से उनका चेहरा सहलाया।
फिर धीरे से उनकी ठोड़ी को उठाया और उनकी आँखों में देखने लगा। चाँद की रोशनी में सीमा बहुत खूबसूरत लग रही थीं।
“क्या मैं आपको किस कर सकता हूँ?” नागेंद्र ने पूछा।
सीमा ने कुछ नहीं कहा, बस अपने होंठ हल्के से खोल दिए। यह हरी झंडी थी। नागेंद्र ने धीरे से अपने होंठ उनके होंठों पर रख दिए।
वह पहला चुंबन धीमा था, हल्का था। लेकिन फिर नागेंद्र ने अपने होंठों से उनके होंठों को दबाना शुरू कर दिया।
सीमा भी प्रतिक्रिया देने लगीं। उन्होंने अपने हाथ नागेंद्र के बालों में फेर दिए और उसे अपनी तरफ खींच लिया।
वह चुंबन गहरा होता गया। नागेंद्र ने अपनी जीभ बाहर निकाली और सीमा के होंठों को चाटने लगा।
फिर उसने उनके मुँह को खोला और अपनी जीभ अंदर डाल दी।
सीमा ने भी अपनी जीभ बाहर निकाली और दोनों की जीभें आपस में लड़ने लगीं। वह एक लंबा, गीला और गर्म चुंबन था।
“उम्म्म्म… नागेंद्र…” सीमा ने आँखें बंद करके आवाज़ निकाली।
नागेंद्र का लंड उसके शॉर्ट्स में तनकर खड़ा हो गया था। वह 9 इंच का मोटा लंड था जो अब सीमा को छूने को बेताब था।
नागेंद्र ने अपने हाथ सीमा की कमर पर रखे और उन्हें अपनी तरफ खींच लिया। अब सीमा का शरीर उसके शरीर से सट गया था।
नागेंद्र ने महसूस किया कि सीमा के बड़े-बड़े दूध उसके सीने से दब रहे थे।
वह उन दूधों को छूना चाहता था, उन्हें दबाना चाहता था, चूसना चाहता था।
“बुआ, मैं आपके दूध देखना चाहता हूँ,” नागेंद्र ने कहा और उनके ब्लाउज के हुक खोलने लगा।
“नहीं नागेंद्र… यह गलत है…” सीमा ने कहा, लेकिन वह उसे रोक नहीं पाईं।
नागेंद्र ने उनका ब्लाउज खोल दिया। अंदर एक काले रंग की ब्रा थी जो उनके बड़े दूधों को बड़ी मुश्किल से संभाल रही थी।
नागेंद्र ने उनकी ब्रा के ऊपर से ही उनके दूधों को सहलाना शुरू कर दिया।
“अहहहह… नागेंद्र…” सीमा ने साँसें तेज़ कर दीं।
नागेंद्र ने उनकी ब्रा के हुक खोल दिए। जैसे ही ब्रा खुली, सीमा के दोनों बड़े-बड़े दूध बाहर निकल आए।
वह गोल, मुलायम और सफेद थे। बीच में गुलाबी रंग के निप्पल थे जो तने हुए थे। नागेंद्र उन्हें देखता ही रह गया।
“क्या देख रहे हो?” सीमा ने शरमा कर पूछा।
“बुआ, आपके दूध बहुत खूबसूरत हैं,” नागेंद्र ने कहा और एक हाथ से उनके एक दूध को पकड़ लिया।
उसका दूध इतना बड़ा था कि उसके एक हाथ में भी नहीं आ रहा था।
नागेंद्र ने उसे दबाना शुरू किया, मसलना शुरू किया। सीमा की आँखें बंद हो गईं और वह मज़े लेने लगीं।
फिर नागेंद्र ने अपना मुँह उनके एक दूध पर रख दिया और चूसने लगा।
उसने अपनी जीभ से उनके निप्पल को चाटना शुरू किया। सीमा के निप्पल और कड़े हो गए।
“उम्म्म्म… हाँ… और चूसो…” सीमा ने फुसफुसाते हुए कहा।
नागेंद्र ने उनके दूध को ज़ोर-ज़ोर से चूसना शुरू कर दिया। वह एक दूध चूसता और दूसरे को हाथ से दबाता।
सीमा के मुँह से आवाज़ें निकलने लगीं – “अहहहह… हाँ… बेटा… और ज़ोर से…”
नागेंद्र को “बेटा” कहकर सीमा ने उसे और उत्तेजित कर दिया।
उसने दूसरे दूध को भी अपने मुँह में ले लिया और दोनों को बारी-बारी से चूसने लगा।
सीमा के दूधों से एक हल्की सी खुशबू आ रही थी जो नागेंद्र को पागल बना रही थी।
“बुआ, मैं आपकी साड़ी खोल दूँ?” नागेंद्र ने पूछा।
सीमा ने हाँ में सिर हिलाया। नागेंद्र ने उनकी साड़ी खोल दी।
अब सीमा सिर्फ़ अपनी पेटीकोट और ब्रा में थीं – हालाँकि ब्रा तो पहले ही खुली हुई थी, उनके दूध बाहर लटक रहे थे।
नागेंद्र ने उनके पेटीकोट का नाड़ा खोला और उसे नीचे खींच दिया।
अब सीमा सिर्फ़ अपनी काली रंग की पैंटी में थीं। उनकी जाँघें गोरी और मुलायम थीं। नागेंद्र ने उनकी जाँघों को सहलाना शुरू कर दिया।
“बुआ, आपकी बुर देखनी है,” नागेंद्र ने कहा।
“नागेंद्र… प्लीज़… धीरे…” सीमा ने कहा।
नागेंद्र ने उनकी पैंटी खींची नीचे की तरफ। सीमा की बुर सामने आ गई।
वह गुलाबी रंग की थी, थोड़ी बालों वाली, और बहुत खूबसूरत। नागेंद्र ने उसे देखा और फिर अपनी उँगली से छुआ।
“उम्म्म्म…” सीमा ने आवाज़ निकाली।
नागेंद्र ने उनकी बुर की फाँकों को फैलाया। वह गीली हो चुकी थी। उसने अपनी एक उँगली अंदर डाली।
“अहहहह… हाँ…” सीमा ने कहा।
नागेंद्र ने उँगली अंदर-बाहर करनी शुरू कर दी। सीमा की बुर बहुत टाइट थी, लेकिन गीली होने की वजह से उँगली अंदर जा रही थी। नागेंद्र ने दूसरी उँगली भी अंदर डाल दी।
“ओहhhhh… नागेंद्र… बहुत मज़ा आ रहा है…” सीमा ने कहा।
नागेंद्र ने अपनी जीभ से उनकी बुर को चाटना शुरू कर दिया।
उसने अपनी जीभ उनकी बुर की फाँकों पर फेरनी शुरू की और फिर क्लिटोरिस को चाटने लगा।
“अहहहह… हाँ… वहीं… और चाटो…” सीमा ने अपनी कमर उठाकर कहा।
नागेंद्र ने जीभ से उनकी बुर को चोदना शुरू कर दिया।
वह अपनी जीभ को अंदर-बाहर कर रहा था और सीमा के मुँह से आवाज़ें निकल रही थीं – “उम्म्म्म… हाँ… बेटा… मेरे राजा… और ज़ोर से…”
सीमा ने नागेंद्र के बाल पकड़े और उसका मुँह अपनी बुर पर और ज़ोर से दबा दिया।
नागेंद्र ने भी जीभ से उन्हें खूब मज़ा दिया। कुछ देर बाद सीमा झड़ गईं और उनकी बुर से पानी निकलने लगा।
“उम्म्म्म… आहhhhh…” सीमा ने लंबी साँस ली।
नागेंद्र ने उनका पानी चाट लिया। अब उसका लंड बहुत तड़प रहा था।
उसने अपने कपड़े उतारे। उसका 9 इंच का मोटा लंड सामने आ गया। वह बहुत लंबा और मोटा था, लाल रंग का, और बहुत कड़ा।
सीमा ने उसका लंड देखा और उनकी आँखें चौड़ी हो गईं। “यह तो बहुत बड़ा है… आज तो मेरी बुर पूरी तरह से फ़ैल जाएगी”
“हाँ बुआ, बिलकुल … आप ले लेंगी… आपकी बुर तो बहुत टाइट है लेकिन यह अंदर चला जाएगा और आपके बुर को पूरी तरह से फैला कर मजा देगा।,” नागेंद्र ने कहा।
सीमा ने उसके लंड को हाथ में पकड़ा। वह इतना गरम था कि उनके हाथ में लेने पर ही उन्हें मजा आने लगा। उन्होंने उसे सहलाना शुरू किया – ऊपर से नीचे की तरफ।
“कितना मोटा और कड़ा है…” सीमा ने कहा और फिर उसे अपने मुँह में ले लिया।
नागेंद्र ने “उम्म्म्म…” की आवाज़ निकाली। सीमा ने उसके लंड को चूसना शुरू कर दिया। वह उसके सुपाड़े को अपनी जीभ से चाट रही थीं और फिर पूरे लंड को अपने मुँह में ले रही थीं।
“अहहहह… बुआ… क्या चूस रही हैं आप…” नागेंद्र ने कहा।
सीमा ने उसके लंड को गहरे तक अपने गले में उतारा। नागेंद्र को बहुत मज़ा आ रहा था। उसने सीमा के सिर को पकड़ा और उसे ऊपर-नीचे करने लगा।
“और ज़ोर से बुआ… मुँह से चोदिए…” नागेंद्र ने कहा।
सीमा ने ज़ोर-ज़ोर से उसके लंड को चूसना शुरू कर दिया।
उनके मुँह से चप-चप की आवाज़ें आ रही थीं। नागेंद्र का लंड पूरा कड़ा हो गया था और उसके अंडकोश भी तन गए थे।
“बस बुआ… अब मैं आपकी बुर में डालूँगा… लेट जाइए,” नागेंद्र ने कहा।
सीमा ने अपनी पीठ के बल लेट गईं और अपनी टाँगें फैला दीं।
नागेंद्र उनके ऊपर आ गया। उसने अपने लंड का सुपाड़ा उनकी बुर के मुँह पर रखा।
“बुआ, तैयार हैं?” नागेंद्र ने पूछा।
“हाँ बेटा… धीरे से डालना… बहुत दिनों से किसी ने नहीं डाला है…” सीमा ने कहा।
नागेंद्र ने धीरे से अपने कूलों को आगे धकेलना शुरू किया। उसका लंड का सुपाड़ा अंदर घुस गया।
“उम्म्म्म… अहहहह…” सीमा ने आवाज़ निकाली।
नागेंद्र ने और ज़ोर लगाया और उसका आधा लंड अंदर चला गया।
“अहहहह… बहुत मोटा है… और ज़ोर से डालो…” सीमा ने कहा।
नागेंद्र ने एक ज़ोरदार धक्का लगाया और पूरा 9 इंच का लंड सीमा की बुर में उतार दिया।
“आहhhhh… माँ…” सीमा ने चीखते हुए कहा।
नागेंद्र का लंड पूरी तरह से सीमा की बुर में था। उसे बहुत टाइट और गरम महसूस हो रहा था। उसने रुककर सीमा को ठीक करने का मौका दिया।
“बुआ, ठीक है?” नागेंद्र ने पूछा।
“हाँ… अब चोदो मुझे… और ज़ोर-ज़ोर से…” सीमा ने कहा।
नागेंद्र ने धक्के लगाने शुरू किए। वह धीरे-धीरे अपना लंड अंदर-बाहर कर रहा था। फिर उसने स्पीड बढ़ा दी।
“पच-पच-पच…” की आवाज़ें आने लगीं। नागेंद्र का लंड सीमा की बुर में पूरी तरह से जा रहा था और फिर बाहर आ रहा था।
“अहहहह… हाँ… और ज़ोर से… मेरी बुर फाड़ दो…” सीमा ने कहा।
नागेंद्र ने अपनी स्पीड और तेज़ कर दी। वह पूरी तरह से सीमा के ऊपर था और उसके दूध उसके सीने से दब रहे थे। सीमा ने अपने पैर नागेंद्र की कमर पर लपेट लिए।
“उम्म्म्म… बहुत मज़ा आ रहा है… और ज़ोर से चोदो…” सीमा ने कहा।
नागेंद्र ने उनके होंठों को चूसना शुरू कर दिया और साथ ही उनकी बुर को चोदता रहा। वह एक रिदम में चल रहा था – पहले धीरे, फिर तेज़, फिर धीरे।
“बुआ, मैं आपके दूध दबाना चाहता हूँ,” नागेंद्र ने कहा।
“दबाओ… ज़ोर-ज़ोर से दबाओ…” सीमा ने कहा।
नागेंद्र ने अपने हाथों से उनके बड़े-बड़े दूधों को पकड़ा और ज़ोर-ज़ोर से दबाना शुरू कर दिया।
उसने उनके निप्पलों को अपनी उँगलियों से मसला और खींचा।
“अहहहह… हाँ… वहीं… निप्पल खींचो…” सीमा ने कहा।
नागेंद्र ने उनके निप्पलों को खींचना शुरू कर दिया और साथ ही उनकी बुर को चोदता रहा। सीमा बहुत उत्तेजित हो चुकी थीं।
“बेटा… मैं झड़ने वाली हूँ… और तेज़ करो…” सीमा ने कहा।
नागेंद्र ने अपनी पूरी ताकत लगा दी। उसका लंड सीमा की बुर में बहुत तेज़ी से अंदर-बाहर हो रहा था।
सीमा की बुर से पानी निकलने लगा और उसकी गीली आवाज़ें आने लगीं।
“आहhhhh… मैं झड़ गई…” सीमा ने चीखते हुए कहा।
उनकी बुर ने नागेंद्र के लंड को कस लिया और उसमें एक अजीब सा स्पाज़्म महसूस हुआ।
लेकिन नागेंद्र रुका नहीं। उसने चोदना जारी रखा।
“बुआ, मैं भी झड़ने वाला हूँ… कहाँ निकालूँ?” नागेंद्र ने पूछा।
“अंदर ही डाल दो… मेरे अंदर ही अपना पानी छोड़ दो…” सीमा ने कहा।
नागेंद्र ने कुछ और धक्के लगाए और फिर उसका लंड फूलने लगा।
उसने अपना सारा वीर्य सीमा की बुर के अंदर छोड़ दिया।
“आहhhhh…” दोनों ने एक साथ आवाज़ निकाली।
नागेंद्र का गरम वीर्य सीमा की बुर में भर गया। वह उनके ऊपर पड़ा रहा और दोनों एक-दूसरे को कसकर पकड़े रहे।
कुछ देर बाद नागेंद्र ने अपना लंड बाहर निकाला। उस पर उसका और सीमा का पानी लगा हुआ था। सीमा की बुर से भी वीर्य बाहर बह रहा था।
“बुआ, यह बहुत अच्छा था,” नागेंद्र ने कहा।
“हाँ बेटा… तुमने मुझे बहुत मज़ा दिया…” सीमा ने कहा और उसे अपनी बाहों में भर लिया।
दोनों छत पर ही एक-दूसरे के बाहों में सो गए।
अगली सुबह जब निशा अपनी सहेली के यहाँ से वापस आई तो उसने देखा कि नागेंद्र और उसकी माँ दोनों अलग-अलग कमरों में सो रहे थे।
लेकिन जब वह छत पर गई तो उसे दोनों के बिस्तर एक साथ मिले हुए मिले और कुछ बाल और अन्य निशान दिखे।
निशा समझ गई कि रात में क्या हुआ होगा।
उसे पहले तो बहुत बुरा लगा, लेकिन फिर उसने सोचा कि शायद यह उसकी गलती थी कि वह नहीं रुक सकी।
और फिर, उसकी माँ भी तो औरत थीं, उनकी भी ज़रूरतें थीं।
दोपहर को जब नागेंद्र उठा तो निशा उससे मिली। उसके चेहरे पर एक अजीब सी शरारती मुस्कान थी।
“कल रात मज़ा आया?” निशा ने पूछा।
नागेंद्र शरमा गया। “निशा, मैं… मैं समझा सकता हूँ…”
“कोई बात नहीं भैया,” निशा ने कहा और उसके करीब आ गई, “मैं समझ सकती हूँ। और अब मेरी बारी है।”
नागेंद्र ने उसे देखा। निशा ने आज एक हल्की पीली ड्रेस पहनी हुई थी जिसमें वह बहुत खूबसूरत लग रही थी।
उसके मीडियम साइज़ के दूध उसके टॉप में से झाँक रहे थे और उसकी कमर बहुत पतली थी।
“आज रात…” निशा ने कहा, “आज रात मैं तुम्हारे कमरे में आऊँगी। मम्मी तो सो जाएँगी, और हम…”
नागेंद्र ने मुस्कुराते हुए कहा, “ठीक है। मैं तुम्हारा इंतज़ार करूँगा।”
निशा ने उसके गाल पर एक चुंबन दिया और चली गई।
नागेंद्र सोचने लगा कि आज रात क्या होगा। वह निशा की उस टाइट बुर को चोदने के लिए बेताब था।
और शायद… शायद वह दोनों माँ और बेटी को एक साथ भी…
यह कहानी यहीं समाप्त होती है, लेकिन एक नई शुरुआत भी यहीं से होती है – मेरी और नागेंद्र के बीच एक नया रोमांस, और शायद एक और रहस्य जो तीनों के बीच एक अनोखा रिश्ता बना देगा।
NEXT PART: मेरे मामा के बेटे ने मुझे रंडियों की तरह चोदा
- आंटी को पहले होटल और फिर घर पर चोदा
- पड़ोस में आई लड़की की बुर चोद दिया
- रंडी बनकर 10 लोगों के साथ गैंगबैंग करायी
नोट: यहां पोस्ट की गई सभी कहानियां केवल मनोरंजन के उद्देश्य से प्रस्तुत की गई हैं। कृपया इन्हें वास्तविक जीवन से जोड़कर न देखें। कहानी में दर्शाए गए किसी भी दृश्य, घटना या चित्र का वास्तविक जीवन में प्रयोग करना हानिकारक हो सकता है। इसके लिए न तो कहानी के लेखक और न ही प्रस्तुतकर्ता जिम्मेदार होंगे। इसलिए कृपया अपनी समझ, बुद्धि और विवेक का उपयोग करें।
Very nice and beautiful romantic story ❤️.
Hai mem
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Very romantic make it more fun