doctor abortion sex story
रमादीन अंकल की चुदाई के बाद कुछ हफ्ते बीत गए थे। शमीना आपी रोज़ ही किसी न किसी से चुद रही थीं – कभी दशरथ से, कभी दिलीप से, कभी रमेश से, और कभी रमादीन अंकल से।
उनकी बुर अब पूरी तरह से भोसड़ा बन चुकी थी, हमेशा के लिए खुली हुई, रसीली, और हर लंड के लिए तैयार।
लेकिन एक दिन आपी को शक हुआ। उनकी मासिक धर्म की तारीख निकल चुकी थी और अभी तक कोई खून नहीं आया था।
उन्हें सुबह-सुबह उल्टी भी होने लगी थी। आपी समझ गईं कि वह प्रेग्नेंट हो गई हैं। उन्होंने यह बात मुझे बताई।
“सलमा, मुझे लगता है मैं गर्भवती हो गई हूँ। मेरा खून नहीं आ रहा है और मुझे उल्टी आ रही है,” आपी ने चिंतित होकर कहा।
मैं भी घबरा गई। अगर पिताजी को पता चल गया तो वह आपी को घर से निकाल देंगे।
हमें कुछ करना था। हमने सोचा कि किसी डॉक्टर से एबॉर्शन कराना होगा।
हमने पता लगाया कि कस्बे में एक बंगाली डॉक्टर रहते हैं जो गुपचुप तरीके से गर्भपात का काम करते हैं।
उनका नाम था डॉक्टर सुब्रत बनर्जी। वह एक छोटी सी क्लिनिक चलाते थे जो कस्बे के बाहरी इलाके में थी।
वह लगभग 45 साल के थे, मोटे-ताजे, चश्मा पहने हुए, और बंगाली अंदाज़ में बोलते थे।
हम दोनों बहनें एक दिन सुबह-सुबह उनकी क्लिनिक पर पहुँचीं।
क्लिनिक एक पुराने घर में थी जिसका एक हिस्सा अस्पताल जैसा बना हुआ था।
वहाँ एक रिसेप्शनिस्ट बैठी थी जिसने हमारा नाम लिखा और हमें अंदर भेज दिया।
डॉक्टर सुब्रत एक सफेद कोट पहने हुए थे।
उनके चेहरे पर एक शरारती मुस्कान थी जो मरीज़ों को देखकर और खिल उठी जब उन्होंने शमीना आपी को देखा।
आपी ने साड़ी पहनी हुई थी और उनके बदन की खुशबू पूरे कमरे में फैल रही थी।
“क्या समस्या है बेटी?” डॉक्टर सुब्रत ने अपनी बंगाली हिंदी में पूछा।
“डॉक्टर साहब, मुझे शक है कि मैं प्रेग्नेंट हो गई हूँ। मेरा खून नहीं आ रहा है,” आपी ने शरमाते हुए कहा।
“आओ, मैं चेक करता हूँ। तुम लेट जाओ उस बेड पर,” डॉक्टर ने एक छोटे से परदे के पीछे बने बेड की तरफ इशारा किया।
आपी बेड पर लेट गईं। डॉक्टर सुब्रत ने अपने हाथ में प्लास्टिक के दस्ताने पहने और आपी के पेट पर हाथ फिराया।
फिर उन्होंने एक छोटा सा यंत्र निकाला जिससे अल्ट्रासाउंड जैसी जाँच होती थी।
“हाँ बेटी, तुम प्रेग्नेंट हो। लगभग दो महीने का गर्भ है। तुम्हें एबॉर्शन कराना है?” डॉक्टर ने पूछा। {Note: एबॉर्शन कराना एक अपराध है}
“हाँ डॉक्टर साहब, प्लीज़ कर दीजिए। मेरे पिताजी को पता नहीं चलना चाहिए,” आपी ने विनती की।
“ठीक है, लेकिन इसका खर्चा होता है। 2000 रुपये लगेंगे,” डॉक्टर ने कहा।
हमारे पास इतने पैसे नहीं थे।
मैंने कहा, “डॉक्टर साहब, इतने पैसे नहीं हैं हमारे पास। कुछ कम कर दीजिए ना।”
डॉक्टर सुब्रत ने आपी को घूरकर देखा। उनकी नज़र आपी के स्तनों पर टिक गई।
उन्हें आपी में कुछ अलग नज़र आया – एक रंडी जैसी चाल, एक चुदक्कड़ औरत की महक।
“ठीक है, मैं कुछ कम कर सकता हूँ। लेकिन उसके लिए तुम्हें मेरी एक शर्त माननी होगी,” डॉक्टर ने कहा और उनकी आँखों में एक शैतानी चमक थी।
“क्या शर्त डॉक्टर साहब?” आपी ने पूछा।
“तुम्हें मेरे साथ सोना होगा। मैं तुम्हारा एबॉर्शन फ्री में कर दूँगा, बस तुम मुझे एक रात दो,” डॉक्टर ने सीधे तौर पर कह दिया।
मैं चौंक गई, लेकिन आपी ने सोचा कि एक रात की चुदाई में क्या जाता है। वह तो रोज़ ही चुदती हैं।
“ठीक है डॉक्टर साहब, लेकिन यह बात किसी को पता नहीं चलनी चाहिए,” आपी ने कहा।
“नहीं चलेगी बेटी, तुम आज शाम को यहीं आ जाओ। मैं यहाँ अकेला रहता हूँ। हम रात भर मज़े करेंगे और कल सुबह मैं तुम्हारा ऑपरेशन कर दूँगा,” डॉक्टर ने कहा।
हम उस दिन शाम को वापस गए। मैं आपी को छोड़कर आई और कहा कि मैं सुबह आऊँगी।
डॉक्टर सुब्रत ने दरवाज़ा बंद कर लिया और क्लिनिक को अपने घर में बदल दिया।
डॉक्टर सुब्रत ने आपी को अपने प्राइवेट कमरे में ले जाया।
वहाँ एक बड़ा सा बेड था, मेडिकल उपकरण रखे हुए थे, और कमरे में सैनिटाइजर की महक थी। लेकिन साथ ही एक अलग सी गर्मी भी थी।
“आओ बेटी, आज मैं तुम्हें अपना खास इलाज दूँगा। मेरा लंड तुम्हारी बुर की हर बीमारी दूर कर देगा,” डॉक्टर ने कहा और आपी को अपनी बाहों में भर लिया।
उन्होंने आपी के होंठ चूमने शुरू किए। उनके होंठ मोटे थे, नरम थे, और बहुत अच्छे से चूसते थे।
वह आपी के निचले होंठ को अपने मुँह में लेकर चूसते, फिर ऊपर वाले को, और फिर दोनों को एक साथ चूमते।
“आह… डॉक्टर साहब… धीरे…” आपी सिसकीं।
“चुप बेटी, मैं तुम्हें चूम रहा हूँ। यह मेरा पहला इलाज है,” डॉक्टर ने कहा और आपी की साड़ी खींचने लगे।
उन्होंने आपी की साड़ी खींचकर उतार दी। फिर ब्लाउज के बटन खोलने लगे।
आपी का ब्लाउज हटा तो उनकी ब्रा दिखी। डॉक्टर ने ब्रा भी खींचकर उतार दी और आपी के दोनों दूध आज़ाद हो गए।
“वाह… क्या सुंदर दूध हैं तुम्हारे… इनका साइज़ तो कम से कम 38 होगा,” डॉक्टर ने कहा और आपी के स्तनों पर हाथ फिराया।
उनके हाथ पेशेंट को छूने वाले हाथ थे – नरम, लेकिन मजबूत। उन्होंने आपी के दूध दबाए, मसले, और खींचे।
आपी के निप्पल्स खड़े हो गए। डॉक्टर ने उन निप्पल्स को अपने उंगलियों से पकड़ा और घुमाना शुरू कर दिया।
“आह… दर्द हो रहा है डॉक्टर साहब…” आपी चिल्लाईं।
“यह दर्द नहीं बेटी, यह मज़ा है। देखो, तुम्हारे निप्पल्स कितने कड़े हो गए हैं,” डॉक्टर ने कहा और एक निप्पल अपने मुँह में ले लिया।
उन्होंने ज़ोर-ज़ोर से आपी के निप्पल को चूसा, काटा, और जीभ से चाटा। आपी की सिसकियाँ निकलने लगीं। वह पूरी तरह से गर्म हो चुकी थीं।
“डॉक्टर साहब… अब और मत तड़पाओ… मेरी बुर में आग लग रही है…” आपी ने कहा।
“रुको बेटी, अभी तो मैं तुम्हारी जाँच कर रहा हूँ,” डॉक्टर ने कहा और नीचे झुककर आपी का पेटीकोट खींचने लगे।
उन्होंने आपी का पेटीकोट और पैंटी उतार दी। आपी पूरी नंगी हो गईं। उनकी बुर सामने थी – भोसड़े जैसी, थोड़ी सी बालों वाली, और गीली।
डॉक्टर ने आपी की बुर के होठों को फैलाया और अंदर देखा। “तुम्हारी बुर तो पूरी तरह से भोसड़ा बन चुकी है बेटी। यह तो बहुत सारे लंडों से चुदी हुई लगती है।”
“हाँ डॉक्टर साहब… मैं रोज़ चुदती हूँ…” आपी ने शरमाते हुए कहा।
“कोई बात नहीं, मेरा लंड भी इस भोसड़े को भर देगा,” डॉक्टर ने कहा और अपनी उंगली आपी की बुर में डाल दी।
उन्होंने उंगली अंदर-बाहर करनी शुरू कर दी। आपी की बुर गीली थी और उंगली आसानी से अंदर-बाहर हो रही थी।
फिर उन्होंने दो उंगलियाँ डाल दीं, फिर तीन।
“कितनी चौड़ी हो गई है तुम्हारी बुर। अब मैं अपना लंड डालता हूँ,” डॉक्टर ने कहा और अपने कपड़े उतारने लगे।
उन्होंने अपना सफेद कोट उतारा, फिर शर्ट, फिर पैंट। जब उन्होंने अंडरवियर उतारा तो उनका लंड बाहर आया।
वह 11 इंच लम्बा था, इतना मोटा कि आपी की आँखें खुली रह गईं। सुपाड़ा गुलाबी था, फूला हुआ था, और पूरा लंड एकदम कड़क था।
“देखो बेटी, यह है मेरा इलाज। यह लंड तुम्हारी बुर की हर बीमारी दूर कर देगा,” डॉक्टर ने कहा।
“डॉक्टर साहब… यह तो बहुत मोटा है… मेरी बुर में जाएगा?” आपी ने पूछा।
“जाएगा बेटी, और पूरा अंदर जाएगा। आओ, लेट जाओ,” डॉक्टर ने कहा और आपी को बेड पर लेटा दिया।
डॉक्टर सुब्रत ने आपी की टाँगें अपने कंधों पर रख लीं।
उनकी बुर पूरी तरह से खुली हुई थी, भोसड़े जैसी, गीली, और तैयार। डॉक्टर ने अपने लंड का सुपाड़ा आपी की बुर के मुहाने पर रखा।
“तैयार हो बेटी? अब मैं अपना लंड तुम्हारी बुर में डाल रहा हूँ,” डॉक्टर ने कहा।
“हाँ डॉक्टर साहब… डाल दीजिए… मेरी बुर में अपना लंड डाल दीजिए…” आपी ने कहा।
डॉक्टर ने ज़ोर से धक्का दिया। “फाअअअअअअ…”
पूरा लंड एक ही बार में आपी की बुर में घुस गया।
भले ही वह भोसड़ा थी, लेकिन डॉक्टर का लंड इतना मोटा और लम्बा था कि उन्हें पूरी तरह से भर गईं।
“आह… बहुत मोटा है… मेरी बुर फट रही है…” आपी चिल्लाईं।
“चुप बेटी, तुम्हारी बुर तो भोसड़ा है। यह आसानी से ले लेगी। रुको, अब मज़ा आएगा,” डॉक्टर ने कहा और धक्के मारने शुरू कर दिए।
वह ज़ोर-ज़ोर से अपना लंड आपी की बुर में अंदर-बाहर करने लगे। “फच… फच… फच…” की आवाज़ आ रही थी। आपी की बुर गीली थी और लंड आसानी से अंदर-बाहर हो रहा था।
“कैसा लग रहा है बेटी? मेरा लंड मज़ा दे रहा है ना?” डॉक्टर ने पूछा।
“हाँ डॉक्टर साहब… बहुत मज़ा आ रहा है… और ज़ोर से चोदिए… मेरी भोसड़ा बनी बुर को फाड़ दीजिए… आह… हाँ… वहीं… और ज़ोर से…” आपी चिल्लाने लगीं।
डॉक्टर ने आपी के दूध पकड़े और ज़ोर-ज़ोर से दबाते हुए चोदना जारी रखा।
वह उनके निप्पल्स को खींचते, काटते, और मसलते। आपी पूरी तरह से मस्त हो चुकी थीं।
“आह… मैं गई… मैं झड़ने वाली हूँ…” आपी ने कहा।
“रुको बेटी, अभी तो मैं शुरू ही हुआ हूँ,” डॉक्टर ने कहा और अपनी स्पीड बढ़ा दी।
वह ज़ोर-ज़ोर से धक्के मारने लगे। उनका लंड आपी की बुर की गहराई तक जा रहा था।
सुपाड़ा आपी की बुर की दीवारों से टकरा रहा था और उन्हें असीम आनंद दे रहा था।
“ले बेटी… ले मेरा लंड… तेरी बुर बहुत मस्त है… इतनी गीली… इतनी रसीली… आह… मज़ा आ गया…” डॉक्टर चिल्ला रहे थे।
आपी ने अपने हाथों से डॉक्टर की कमर पकड़ ली और उन्हें और अपनी तरफ खींचने लगीं। “और ज़ोर से… मेरी बुर में अपना पूरा लंड डालिए… फाड़ दीजिए इस भोसड़े को… डॉक्टर साहब.. आह… हाँ… और ज़ोर से…”
डॉक्टर लगभग तीस मिनट तक उन्हें इसी तरह चोदते रहे। फिर उन्होंने अपना लंड बाहर निकाल लिया और आपी को पीछे से चोदने के लिए कुत्तिया बना दिया।
“आओ बेटी, अब इस तरह से चुदो। मुझे तुम्हारी गांड भी दिखाओ,” डॉक्टर ने कहा।
आपी अपने हाथों और घुटनों के बल बेड पर आ गईं। उनकी गांड ऊपर उठी हुई थी और बुर पीछे की तरफ से दिख रही थी।
डॉक्टर ने उनकी गांड पर थप्पड़ मारा और फिर अपना लंड उनकी बुर में डाल दिया।
“आह… यह तो और भी गहरा जा रहा है…” आपी चीखीं।
“हाँ बेटी, इस तरह से और भी अंदर जाता है,” डॉक्टर ने कहा और ज़ोर-ज़ोर से धक्के मारने शुरू कर दिए।
वह आपी की गांड पर थप्पड़ मारते हुए, उनके बाल खींचते हुए, और उनकी बुर में लंड पेलते हुए चोद रहे थे।
आपी की बुर से आवाज़ें आ रही थीं – “फच… फच… फच…”
“क्या मस्त भोसड़ा है तुम्हारी बुर बेटी… यह तो रोज़ चुदती है ना?” डॉक्टर ने पूछा।
“हाँ डॉक्टर साहब… रोज़ चुदती हूँ… हर रोज़ कोई न कोई मेरे घर आता है… मेरी बुर चोदने के लिए…” आपी ने कहा।
“साली रंडी… तू तो पूरी प्रोफेशनल हो गई है,” डॉक्टर ने कहा और और भी ज़ोर से चोदने लगे।
आपी के स्तन ज़ोर-ज़ोर से हिल रहे थे। डॉक्टर ने एक हाथ आगे बढ़ाकर उनके दूध पकड़ लिए और उन्हें खींचने लगे।
वह उनके निप्पल्स को मसलते हुए उन्हें चोद रहे थे।
“आह… माँ… बहुत मज़ा आ रहा है… मैं फिर से झड़ने वाली हूँ…” आपी चिल्लाईं।
“झड़ो बेटी, मेरे साथ झड़ो,” डॉक्टर ने कहा और अपनी स्पीड और तेज़ कर दी।
वह ज़ोर-ज़ोर से धक्के मार रहे थे। आपी की बुर में से पानी निकलने लगा था। दोनों की साँसें तेज़ चल रही थीं।
कमरे में सिर्फ़ चुदाई की आवाज़ें गूँज रही थीं।
“आह… मैं गई… मैं झड़ गई…” आपी ने अपना पानी छोड़ दिया।
“मैं भी झड़ने वाला हूँ बेटी… तुम्हारी बुर में अपना माल छोड़ूँगा…” डॉक्टर ने कहा।
“नहीं डॉक्टर साहब… बाहर निकालिए… प्रेगनेंट हो जाऊँगी…” आपी ने कहा।
“चुप साली, आज तो तुम्हारी बुर में ही जाएगा मेरा माल। वैसे भी कल मैं तुम्हारा एबॉर्शन कर दूँगा,” डॉक्टर ने कहा और ज़ोर से धक्का दिया।
वह ज़ोर-ज़ोर से चोदने लगे। उनका लंड आपी की बुर की गहराई में जाकर फँस गया।
फिर उन्होंने एक ज़ोरदार धक्का दिया और अपना गरम-गरम माल आपी की बुर में छोड़ दिया।
“आह… गरम माल… बहुत गरम है…” आपी चिल्लाईं।
डॉक्टर ने लगभग दो मिनट तक अपना लंड आपी की बुर में ही रखा और अपना सारा माल उनकी बुर में भर दिया।
फिर वह थककर उनके ऊपर गिर गए।
कुछ देर बाद वह उठे और अपना लंड बाहर निकाला। माल और रस से लथपथ लंड बाहर आया।
आपी की बुर से भी माल बह रहा था। उनकी भोसड़ा बनी बुर अब और भी ज़्यादा लाल और फैली हुई दिख रही थी।
“बेटी, मज़ा आया?” डॉक्टर ने पूछा।
“हाँ डॉक्टर साहब, बहुत मज़ा आया,” आपी ने कहा।
फिर डॉक्टर ने रात भर उन्हें और भी बार चोदा। सुबह होने पर उन्होंने आपी का एबॉर्शन किया और उन्हें कुछ दवाइयाँ देकर विदा कर दिया।
यह थी बंगाली डॉक्टर सुब्रत और शमीना आपी की चुदाई की कहानी।
उन्होंने आपी की भोसड़ा बनी बुर को खूब चोदा और उनके दूध, निप्पल्स, और बुर का पूरा मज़ा लिया।
एक दिन की बात है की आपी अरहर के खेत में गयी थीं, दोपहर का समय था। उसी खेत से थोड़ी दूर पर देसी और बिदेशी शराब की दुकान है।
तभी पांच – छे शराब पीने वाले उन्हें देख लिया और फिर आपी की जमकर ग्रुप चुदाई हुआ… यह कहानी मैं आप लोंगों फिर कभी सुनाऊंगी….
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